Geopolitics

Mojtaba Khamenei delivering a statement on Iran, Hezbollah, and the Middle East conflict
US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

US-Iran War: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में "जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।" साथ ही उन्होंने लेबनान के सशस्त्र संगठन हिज्बुल्लाह के प्रति ईरान का समर्थन दोहराते हुए कहा कि उसकी रक्षा करना ईरान की रणनीतिक जिम्मेदारी है। इजराइल के हमले रुकने तक नहीं होगा कोई समझौता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने संदेश में खामेनेई ने कहा कि जब तक इजराइल लेबनान पर अपने सैन्य हमले पूरी तरह और बिना किसी शर्त के बंद नहीं करता, तब तक अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने या किसी तरह के समझौते पर विचार नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक, लेबनान में सैन्य कार्रवाई का रुकना किसी भी संभावित शांति समझौते की पहली और सबसे अहम शर्त है। हिज्बुल्लाह की जमकर की तारीफ खामेनेई ने हिज्बुल्लाह प्रमुख शेख नईम कासिम और संगठन के लड़ाकों की ओर से मिले समर्थन संदेश का जवाब देते हुए उनके साहस और धैर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह के लड़ाकों ने संघर्ष के दौरान जिस तरह दृढ़ता दिखाई है, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, "अब जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। हमें विश्वास है कि सच की लड़ाई लड़ने वालों की जीत होकर रहेगी।" नसरल्लाह को दी श्रद्धांजलि मोजतबा खामेनेई ने दक्षिणी लेबनान के लोगों के धैर्य और हिज्बुल्लाह के प्रति उनके समर्थन की भी सराहना की। उन्होंने संगठन के दिवंगत प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह समेत संघर्ष में मारे गए अन्य कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपने उद्देश्य के लिए बड़ा बलिदान दिया है। 'छोटे पौधे से विशाल संगठन बना हिज्बुल्लाह' अपने बयान में खामेनेई ने दावा किया कि हिज्बुल्लाह आज इजराइल के खिलाफ सबसे मजबूत ताकतों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि संगठन के लड़ाकों ने इसे एक छोटे पौधे से मजबूत और विशाल वृक्ष की तरह खड़ा किया है। उनके अनुसार, हिज्बुल्लाह की वजह से लेबनान को पूरे इस्लामी जगत में सम्मान मिला है। मिडिल ईस्ट में बढ़ सकता है तनाव खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव चरम पर है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी तथा लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियों के बीच इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि वह हिज्बुल्लाह को राजनीतिक और वैचारिक समर्थन जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है, जब इजराइल लेबनान पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह बंद करे और उसकी संप्रभुता तथा सीमाओं का सम्मान करे।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Iran responds to Donald Trump’s warning, saying any attack on its civilian infrastructure will trigger a strong retaliation
US-Iran War: ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, बोला- एक भी पुल या पावर प्लांट पर हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके किसी पुल, पावर प्लांट या अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो उसका जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा. दोनों देशों के बीच खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नागरिकों के उपयोग वाले पुलों, बिजलीघरों और अन्य जरूरी ढांचों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जाता है. बकाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी नागरिक ढांचे पर हमला किया तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों से भी अपील की कि वे किसी भी गैरकानूनी सैन्य आदेश का पालन न करें. ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ा तनाव तनाव उस समय और बढ़ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजलीघरों को निशाना बना सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई. ईरान की चेतावनी- अमेरिकी हितों पर होगा जवाबी हमला ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट पर हमला किया तो जवाब में ईरान पूरे क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां अमेरिका के रणनीतिक या आर्थिक हित जुड़े हैं. अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है. 'सामूहिक सजा' बताया अमेरिकी रुख ईरान ने अमेरिकी रुख को "सामूहिक सजा" करार देते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. तेहरान का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी. होर्मुज जलडमरूमध्य पर कायम रहेगा ईरान का रुख ईरान ने साफ किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता और नियंत्रण बनाए रखेगा. विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब "जैसे को तैसा" होगा और प्रतिक्रिया बेहद सख्त होगी. बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है.  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
A symbolic image showing rising tensions between Iran, the United States and Israel amid unverified reports of a purported "hit list" circulating in Iranian media.
ईरानी मीडिया में 'हिट लिस्ट' का दावा, ट्रंप-नेतन्याहू समेत 13 नेताओं के नाम बताए गए; आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी मीडिया में एक कथित "हिट लिस्ट" को लेकर दावा सामने आया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के पहले सार्वजनिक संबोधन के दौरान अमेरिका, इजरायल और यूरोप के कई शीर्ष नेताओं को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही ईरान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूची जारी की गई है। रिपोर्टों में किन नेताओं के नाम? ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर ब्रैड कूपर, इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी, आईडीएफ प्रमुख एयाल जमीर और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार के नाम बताए गए हैं। ग्राफिक पोस्टर का भी दावा कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि एक ग्राफिक पोस्टर जारी किया गया, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों पर स्नाइपर के निशान दर्शाए गए, जबकि अन्य नेताओं को नारंगी रंग की जेल की वर्दी में दिखाया गया। इस ग्राफिक की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मोजतबा खामेनेई के नाम से बयान का दावा रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई के नाम से जारी कथित संदेश में कहा गया कि "प्रतिशोध हमारे राष्ट्र की सामूहिक इच्छा है और इसे हर हाल में पूरा किया जाएगा।" हालांकि, इस बयान की भी किसी आधिकारिक या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच सामने आए दावे ये दावे ऐसे समय सामने आए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तनाव जारी है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल ईरान सरकार, अमेरिकी प्रशासन या सूची में शामिल अन्य देशों की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन रिपोर्टों को आधिकारिक पुष्टि होने तक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Israeli Deputy Foreign Minister Sharren Haskel speaking during an interview, commenting on Iran, regional security, and the ongoing U.S.-Iran diplomatic talks.
इजराइल की चेतावनी: 'ईरान पर भरोसा करना खतरनाक', भारत समेत लोकतांत्रिक देशों को सतर्क रहने की सलाह

यरुशलम/नई दिल्ली: Sharren Haskel ने कहा है कि ईरान पर भरोसा करना आसान नहीं है और भारत सहित सभी लोकतांत्रिक देशों को सतर्क रहना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु एवं क्षेत्रीय तनाव से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर जताया संदेह समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शैरेन हैस्केल ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका-ईरान वार्ता से बहुत अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने ईरान को एक आक्रामक शासन बताते हुए कहा कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं है, बल्कि भरोसा तभी कायम हो सकता है जब उसके व्यवहार में वास्तविक बदलाव दिखाई दे। इजराइल लंबे समय से लगाता रहा है आरोप इजराइल लगातार ईरान पर आरोप लगाता रहा है कि वह पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ाने, विभिन्न सशस्त्र समूहों का समर्थन करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है तथा इजराइल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। दोनों देशों के बीच तनाव 1979 की Iranian Revolution के बाद से लगातार बना हुआ है और हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव भी देखने को मिले हैं। भारत का संतुलित रुख भारत ने अब तक पश्चिम एशिया के मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। भारत के इजराइल के साथ रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मजबूत संबंध हैं। वहीं ईरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। इसी कारण भारत दोनों देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए किसी एक पक्ष का खुला समर्थन करने से बचता रहा है। वैश्विक नजर अमेरिका-ईरान वार्ता पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता का उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवादों का समाधान तलाशना है। इजराइल लगातार इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त करता रहा है। शैरेन हैस्केल का ताजा बयान भी इसी नीति को दोहराता है कि स्थायी भरोसे के लिए केवल कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि ईरान के व्यवहार में ठोस बदलाव आवश्यक है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
U.S. Senator Steve Daines speaks at the U.S.-India Strategic Partnership Forum, praising India as a trusted partner while contrasting his security concerns during visits to China.
'मेरा फोन बीजिंग नहीं, दिल्ली जाता है': अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेंस ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार

वॉशिंगटन: Steve Daines ने भारत की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह चीन की यात्रा करते हैं तो अपना मोबाइल फोन वॉशिंगटन में छोड़ देते हैं, लेकिन भारत आते समय वही फोन अपने साथ लेकर आते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। भारत पर भरोसा, चीन को लेकर सतर्कता Steve Daines ने U.S.-India Strategic Partnership Forum के लीडरशिप समिट में कहा कि उनका यह व्यवहार दोनों देशों के प्रति भरोसे के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब मैं चीन जाता हूं, तो मेरा यह फोन मेरे साथ नहीं जाता। यह वॉशिंगटन में ही रहता है। लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी भी शहर में आता हूं, तो यही फोन मेरे साथ होता है।" उनके अनुसार, यही एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार की पहचान है। भारत-अमेरिका मिलकर दे सकते हैं चीन को चुनौती सीनेटर डेंस ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर तकनीक, नवाचार और उन्नत उद्योगों के क्षेत्र में चीन को प्रभावी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा और अमेरिका की तकनीकी क्षमता का संयोजन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर सकता है। चीन से रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते डेंस ने माना कि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसे आर्थिक और रणनीतिक जोखिम कम करने की दिशा में काम करना होगा। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अहम सीनेटर ने कहा कि वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रहती है, लेकिन अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि भविष्य में किन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध केवल दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf speaks during a televised interview, accusing Israel of trying to derail a reported Iran-US agreement amid ongoing regional tensions.
ईरान का दावा- इजरायल बिगाड़ना चाहता है अमेरिका से हुई डील, गालिबाफ बोले- ट्रंप प्रशासन के भीतर भी मतभेद

  तेहरान: ईरान की संसद के अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने दावा किया है कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते को सफल नहीं होने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस समझौते को लेकर मतभेद मौजूद हैं। स्विट्जरलैंड की यात्रा से लौटने के बाद एक टीवी इंटरव्यू में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए 14 बिंदुओं वाले "इस्लामाबाद समझौते" को लागू करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इजरायल इसके रास्ते में बाधा डाल रहा है। 'इजरायल समझौते से घबराया हुआ है' ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि यह समझौता लेबनान में युद्ध समाप्त करने, विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करने और कब्जे वाले क्षेत्रों से सेना हटाने जैसे प्रावधानों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल इस समझौते का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि यह उसके और अमेरिका के लिए "हार का दस्तावेज" साबित होगा। गालिबाफ ने कहा कि समझौते पर सहमति बनने के बाद इजरायल ने लेबनान में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दीं, ताकि समझौते के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो। लेबनान की संप्रभुता पर दिया जोर ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि समझौते के अनुसार लेबनान की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां की सरकार के पास होगी और देश की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विस्थापित नागरिकों को अपने घर लौटने का अधिकार मिलना चाहिए और कब्जा किए गए इलाकों से सैन्य बलों की वापसी होनी चाहिए। 'अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी मतभेद' गालिबाफ ने दावा किया कि समझौते को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अलग-अलग राय है। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और उपराष्ट्रपति JD Vance का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। उनके अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों की कुछ गतिविधियां इस समझौते की भावना के अनुरूप नहीं थीं। दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं ईरान की ओर से किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका या इजरायल की ओर से भी इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में जारी तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu speaking during a public address, warning that Israel is prepared to launch further military action against Iran if necessary.
ईरान को इजरायल की खुली चेतावनी, नेतन्याहू बोले- जरूरत पड़ी तो फिर करेंगे हमला

  यरुशलम: Benjamin Netanyahu ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। 'जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी करेंगे कार्रवाई' नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल की सुरक्षा को फिर से खतरा महसूस हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव नेतन्याहू का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों पक्ष संघर्षविराम को व्यापक राजनीतिक समझौते में बदलने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इजरायल ने दोहराया अपना रुख इजरायल पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी भी समझौते से स्वयं को बाध्य नहीं मानेगा, जो उसकी दृष्टि में ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताओं को बढ़ावा देता हो। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वह एकतरफा कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप ने संयम बरतने की अपील की वहीं, Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होगा और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
Mumbai Rain
मुंबई में मानसून का कहर: मूसलाधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, लोकल ट्रेनें प्रभावित

मुंबई,एजेंसियां। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधेरी सबवे में करीब पांच फीट पानी भर जाने के कारण प्रशासन को एहतियातन इसे यातायात के लिए बंद करना पड़ा।   लोकल ट्रेन सेवा पर पड़ा असर भारी बारिश का असर मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी देखने को मिला। वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन की कई ट्रेनें देरी से चलीं। हार्बर लाइन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर में तकनीकी खराबी आने से कई लोकल ट्रेनें बीच रास्ते में ही रुक गईं। सुबह के व्यस्त समय में आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे सेवाएं सामान्य करने का प्रयास किया गया।   बालकनी गिरने से व्यक्ति की मौत दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड स्थित MHADA की 'सूर्यप्रकाश' इमारत में मंगलवार देर रात तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे में 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भारस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची तथा सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए।   कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। वहीं, रेलवे, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
Chinese Foreign Ministry spokesperson Guo Jiakun speaks in Beijing as China backs Bangladesh’s Teesta River project amid India's security concerns.
तीस्ता परियोजना पर चीन का बयान, बोला- बांग्लादेश के साथ सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं

  बीजिंग/नई दिल्ली: भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच चीन ने तीस्ता नदी परियोजना पर अपना रुख स्पष्ट किया है। चीन ने कहा है कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे देश, विशेष रूप से भारत, को निशाना बनाकर नहीं किया जा रहा है। साथ ही उसने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त होने चाहिए। तीस्ता परियोजना को चीन का खुला समर्थन बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस वार्ता के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन बांग्लादेश की 'तीस्ता नदी व्यापक उपचार एवं पुनर्वास परियोजना' का समर्थन करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आम लोगों की आजीविका से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल है और बांग्लादेश सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है। चीन इस परियोजना के जरिए दोनों देशों के बीच विकास सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। आर्थिक और जल संसाधन क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन और बांग्लादेश अपनी विकास रणनीतियों में बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देश अर्थव्यवस्था, व्यापार, जल संरक्षण और जनकल्याण जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के इच्छुक हैं। भारत की आपत्तियों पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "चीन-बांग्लादेश सहयोग किसी तीसरे पक्ष को लक्षित नहीं करता और इसे किसी भी बाहरी प्रभाव से मुक्त रखा जाना चाहिए।" भारत पहले ही जता चुका है आपत्ति भारत ने तीस्ता नदी से जुड़ी परियोजनाओं में चीन की संभावित भागीदारी पर पहले ही चिंता जताई है। नई दिल्ली का मानना है कि यह परियोजना भारत-बांग्लादेश सीमा के अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र के निकट स्थित है, इसलिए इसमें चीन की मौजूदगी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है। क्यों अहम है तीस्ता नदी? तीस्ता नदी का उद्गम पूर्वी हिमालय में होता है। यह सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहां यह सिंचाई, कृषि और लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। 'चिकन नेक' के कारण बढ़ी भारत की चिंता भारत की सबसे बड़ी चिंता यह है कि तीस्ता नदी परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है। यह संकरा भूभाग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय संपर्क मार्ग है और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में चीन की वित्तीय, तकनीकी या बुनियादी ढांचा संबंधी मौजूदगी बढ़ती है, तो इसका असर भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है। इसी कारण भारत पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian officials amid conflicting claims over possible US-Iran talks in Doha.
ट्रंप का दावा- दोहा में बैठक के लिए ईरान ने किया अनुरोध, तेहरान ने किया खंडन

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संभावित वार्ता को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस सप्ताह किसी भी तरह की बैठक या वार्ता तय नहीं है। ट्रंप बोले- ईरान ने मांगी बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और यह बैठक अगले दिन दोहा में आयोजित होगी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पर हो सकती है चर्चा यदि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में वार्ता होती है तो उसका मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को कम करना हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिकी अधिकारी का दावा- सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रह सकती है। ईरान ने बैठक की खबरों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया है। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा कि इस सप्ताह किसी भी कार्य समूह की बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर के साथ नियमित संपर्क और परामर्श जारी है, लेकिन दोहा में किसी तकनीकी बैठक की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर सहमत होंगे। कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में कतर लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है और विभिन्न माध्यमों से बातचीत की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। विरोधाभासी दावों से बनी असमंजस की स्थिति ट्रंप के दावे और ईरान के आधिकारिक खंडन के बाद संभावित वार्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर अमेरिका बैठक होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी निर्धारित वार्ता से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US and Iranian officials agree to pause military operations ahead of high-level talks in Doha aimed at easing regional tensions.
मिडिल ईस्ट संकट पर राहत के संकेत! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर सहमत, दोहा में होगी अहम वार्ता

  वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी सैन्य तनाव के बीच राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ सभी सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब हाल के दिनों में सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। अमेरिकी मीडिया कंपनी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष अब संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार (30 जून) को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। फिलहाल रुकी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने अस्थायी रूप से सभी सैन्य (काइनेटिक) गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम उस अंतरिम समझौते को बचाने की कोशिश माना जा रहा है, जिसकी घोषणा दोनों देशों ने करीब 11 दिन पहले लंबे तनाव को कम करने के उद्देश्य से की थी। समझौते के बाद भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की थी, जिससे युद्धविराम पर सवाल उठने लगे थे। अब दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। दोहा में होगी अहम बैठक अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद इसका स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े विवादों और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा होगी। समुद्री व्यापार रहेगा सामान्य अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बातचीत शुरू होने तक दोनों देश सैन्य कार्रवाई से परहेज करेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि सभी सैन्य गतिविधियों को फिलहाल रोकने पर सहमति बन गई है। दूसरे अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए पीछे हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर तत्काल असर पड़ने की आशंका कम हो गई है। होर्मुज विवाद रहेगा वार्ता का केंद्र दोहा में होने वाली बैठक का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों का समाधान होगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोहा वार्ता सकारात्मक रहती है, तो मध्य पूर्व में हालिया सैन्य तनाव कम करने और व्यापक कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks as Iran warns of halting US talks following American military strikes and rising tensions in the Gulf.
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन-कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले; वार्ता रोकने की चेतावनी

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत की ओर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो दोनों देशों के बीच चल रही वार्ता पूरी तरह रोक दी जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा विवाद ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संचालन और सुरक्षा पर उसका नियंत्रण है तथा उसकी सीधी भागीदारी के बिना इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा खोलने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। इसी मुद्दे को लेकर क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का आरोप है कि अंतरिम समझौते के बावजूद कुछ देशों ने उसकी भूमिका को नजरअंदाज करते हुए जलडमरूमध्य में नई व्यवस्था लागू करने की कोशिश की, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। ओमान मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भी हमले ईरान ने संयुक्त राष्ट्र समर्थित ओमान समुद्री मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर भी दो बार हमले किए हैं। लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस जलमार्ग को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानता रहा है। एक समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग पांचवें हिस्से की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरती थी, इसलिए क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। विदेश मंत्री अराघची का सख्त संदेश इराक यात्रा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से हालात और खराब होंगे। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की मौजूदा व्यवस्था से अलग कोई नया तंत्र लागू करने की कोशिश की गई, तो इससे जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने में देरी होगी और क्षेत्रीय टकराव और बढ़ सकता है। कुवैत ने ड्रोन और मिसाइलें मार गिराने का दावा किया कुवैत की सेना के अनुसार, रविवार सुबह अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों और कई ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। कुवैत में अमेरिकी सेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है, जिसके कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। बहरीन में रिहायशी इमारत को नुकसान बहरीन के गृह मंत्रालय ने बताया कि ईरानी हमलों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट स्थित एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत क्षतिग्रस्त हुई। इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। सरकार की ओर से जारी तस्वीरों में इमारत की ऊपरी मंजिल को भारी नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दिया। बहरीन ने हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, समुद्र में एक व्यापारी पोत पर हुए हमले के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, हवाई रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों सहित कई रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई है। वार्ता पर मंडराया संकट ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पूरी तरह ठप हो सकती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi speaks during a press conference, warning about the Strait of Hormuz amid rising regional tensions.
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ईरान ने दी होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की चेतावनी, अमेरिका को बताया 'धोखेबाज'

  तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा और विदेशी शक्तियां होर्मुज के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कोशिश करती रहीं, तो इस जलडमरूमध्य को खुला रखना संभव नहीं होगा। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी केवल ईरान की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य देश ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की तो टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है। होर्मुज पर विदेशी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि ऐसा हुआ तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की मांग अराघची ने कहा कि समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह युद्धविराम लागू कराए तथा इजरायली हमलों को रोके। अमेरिका पर लगाया वादाखिलाफी का आरोप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी अमेरिका के खिलाफ तीखा बयान दिया। संगठन के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि अमेरिका भरोसे के लायक नहीं है और वह बार-बार अपने वादों से पीछे हटता है। उन्होंने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा, "जैसा हमने पहले भी कहा था, दुश्मन धोखेबाज है और उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वह किसी भी समय अपने वादे तोड़ सकता है।" 'हमले का मिलेगा और कड़ा जवाब' आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों की ओर से कोई नया सैन्य हमला किया गया तो ईरान पहले से अधिक ताकत के साथ जवाब देगा। मोहेबी ने कहा कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि ईरान इस मार्ग को बंद करने की दिशा में कदम उठाता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Bangladesh PM Tarique Rahman meets Chinese officials in Beijing to discuss Teesta River project near India's Siliguri Corridor
भारत के ‘चिकन नेक’ के करीब बढ़ी चीन की दस्तक! तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश-चीन की नई डील से बढ़ी रणनीतिक चिंता

  ढाका/बीजिंग: भारत की सुरक्षा और सामरिक हितों से जुड़े संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब स्थित तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग और गहरा होने जा रहा है। बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने तीस्ता समेत अन्य नदियों के जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और नदी पुनरुद्धार परियोजनाओं पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन से तीस्ता परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता मांगी, जिस पर बीजिंग ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। यह घटनाक्रम भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तीस्ता नदी परियोजना भारत के अत्यंत संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के नजदीक स्थित है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा भू-मार्ग है। बीजिंग में हुई अहम बैठक बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस (Bangladesh Sangbad Sangstha) के अनुसार, चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने बीजिंग में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने तीस्ता और अन्य साझा नदियों के बेहतर प्रबंधन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह तारिक रहमान का दूसरा विदेश दौरा है। इससे पहले उन्होंने मलेशिया की यात्रा की थी। चीन दौरे के दौरान उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी चिनफिंग, प्रधानमंत्री ली च्यांग और अन्य वरिष्ठ चीनी नेताओं से भी प्रस्तावित है। बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन में चीन से मांगी मदद बैठक के दौरान तारिक रहमान ने कहा कि उनकी सरकार देशभर में नदी पुनरुद्धार और खुदाई अभियान चला रही है ताकि बाढ़ की समस्या कम हो, पर्यावरण संरक्षण हो सके और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने चीन से— नदी किनारों के कटाव को रोकने, सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने, अंतर्देशीय जल परिवहन मजबूत करने, तथा तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता की मांग की। चीन ने दिया पूरा सहयोग का भरोसा चीनी जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग ने कहा कि चीन जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में बांग्लादेश को हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने वर्ष 2005 के दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) और हाल के वर्षों में चीनी विशेषज्ञों की यात्राओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों का सहयोग शोध और तकनीकी आधार पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों और अधिकारियों को प्रशिक्षण के लिए चीन आने का भी निमंत्रण दिया। भारत के लिए क्यों अहम है तीस्ता परियोजना? तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम, पश्चिम बंगाल और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश में यह सिंचाई और कृषि के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। रणनीतिक दृष्टि से इसकी सबसे बड़ी अहमियत यह है कि प्रस्तावित तीस्ता परियोजना भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बेहद करीब स्थित है। लगभग 20-22 किलोमीटर चौड़ा यह गलियारा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। ऐसे में इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारत की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। भारत की पेशकश ठुकरा चुका है बांग्लादेश भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। वर्ष 2024 में भारत ने तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी विकास में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बांग्लादेश ने इस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय चीन के साथ सहयोग का रास्ता चुना। पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भी बीजिंग दौरे के दौरान औपचारिक रूप से चीन से तीस्ता नदी पुनरुद्धार परियोजना में सहयोग का अनुरोध किया था। गंगा जल संधि पर भी टिकी हैं निगाहें भारत और बांग्लादेश के बीच जल साझेदारी का एक और महत्वपूर्ण मुद्दा 1996 की गंगा जल संधि है, जिसकी 30 वर्षीय अवधि इस वर्ष पूरी हो रही है। यदि दोनों देश इसे आगे बढ़ाने पर सहमत नहीं होते, तो यह समझौता समाप्त हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तीस्ता परियोजना और गंगा जल बंटवारा दोनों ही भारत-बांग्लादेश संबंधों के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक और कूटनीतिक मुद्दों में शामिल रहेंगे।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir attends a diplomatic event amid reports of an alleged Mossad threat during Switzerland visit.
आसिम मुनीर की हत्या की साजिश का दावा, पाकिस्तान ने बताया 'काल्पनिक कहानी'; मोसाद पर लगे आरोपों से मचा हड़कंप

  इस्लामाबाद/ल्यूसर्न: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर को लेकर एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने आरोप लगाया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड दौरे के दौरान आसिम मुनीर और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह निराधार और काल्पनिक बताया है। पत्रकार का दावा- मुनीर को निशाना बनाने की तैयारी कर रही थी मोसाद पेपे एस्कोबार ने राजनीतिक विश्लेषक मारियो नवफल के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान दावा किया कि पाकिस्तान की सेना को ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिली थी, जिसके अनुसार मोसाद कथित रूप से आसिम मुनीर और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही थी। एस्कोबार के अनुसार, यह कथित योजना उस समय बनाई गई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न में महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों में भाग लेने पहुंचे थे। 'अगर प्रतिनिधिमंडल को नुकसान पहुंचाया तो...' पाकिस्तान की कथित चेतावनी ब्राजीलियाई पत्रकार ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने कथित तौर पर इजरायल को कड़ा संदेश भेजा था। उनके अनुसार, यह संदेश संभवतः ओमान के माध्यम से पहुंचाया गया था। एस्कोबार के मुताबिक, पाकिस्तान ने चेतावनी दी थी कि यदि उसके प्रतिनिधिमंडल को कोई नुकसान पहुंचाया गया तो इसका गंभीर परिणाम होगा। हालांकि इस कथित संदेश की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान ने दावों को बताया पूरी तरह झूठा इन दावों के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया सामने आई। पाकिस्तानी मीडिया संस्थान ARY News के चेयरमैन कामरान खान ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह खबर "पूरी तरह बकवास और वास्तविकता से परे" है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की स्विट्जरलैंड यात्रा पूरी तरह सामान्य रही और कार्यक्रम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार संपन्न हुआ। यात्रा के दौरान किसी प्रकार का सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। स्विस दौरे में नहीं मिला कोई सुरक्षा खतरा पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, न तो स्विस सुरक्षा एजेंसियों और न ही अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने यात्रा के दौरान किसी संभावित खतरे की जानकारी दी। सुरक्षा व्यवस्था सामान्य प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती रही और पूरे दौरे में कोई असामान्य स्थिति दर्ज नहीं की गई। अधिकारियों ने कहा कि मोसाद से जुड़ी साजिश की कहानी का वास्तविक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है। ईरान-अमेरिका वार्ता के दौरान स्विट्जरलैंड में मौजूद था पाकिस्तान गौरतलब है कि पाकिस्तान का यह दौरा ऐसे समय हुआ था जब अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए बातचीत चल रही थी। स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित बैठकों के दौरान पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद थे। आसिम मुनीर की कथित हत्या की साजिश संबंधी दावों की अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी या स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे अफवाह और अटकलों पर आधारित बताया है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Women T20 World Cup
सेमीफाइनल की राह में भारत-बांग्लादेश आमने-सामने, जीत दोनों टीमों के लिए बेहद अहम

मैनचेस्टर, एजेंसियां। विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप में गुरुवार को ग्रुप-ए के समीकरण बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच गए हैं। भारतीय महिला टीम का सामना बांग्लादेश से होगा, जबकि दूसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका की टीम नीदरलैंड से भिड़ेगी। सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका तीनों टीमों के लिए जीत जरूरी है। तीन मैचों के बाद इन तीनों टीमों के चार-चार अंक हैं, जबकि नीदरलैंड पहले ही शीर्ष-4 की दौड़ से बाहर हो चुकी है।   बांग्लादेश के खिलाफ भारत का शानदार रिकॉर्ड विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में बांग्लादेश की टीम भारत को अब तक एक भी बार नहीं हरा सकी है। दोनों टीमें टूर्नामेंट में तीन बार आमने-सामने आई हैं और हर बार भारतीय टीम ने जीत दर्ज की है। वहीं कुल टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की बात करें तो दोनों देशों के बीच 23 मैच खेले गए हैं, जिनमें भारत ने 20 और बांग्लादेश ने केवल तीन मुकाबले जीते हैं।   स्मृति मंधाना और श्री चरणी पर रहेंगी निगाहें भारतीय टीम की ओपनर स्मृति मंधाना शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने टूर्नामेंट के तीन मैचों में 159 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 154 से अधिक रहा है। गेंदबाजी में एन. श्री चरणी टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनी हुई हैं। उन्होंने तीन मुकाबलों में 10 विकेट झटके हैं। इसके अलावा जेमिमा रोड्रिग्स से भी बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी। दूसरी ओर बांग्लादेश के लिए जुआरिया फिरदौस और संजीदा अख्तर मेघला प्रमुख खिलाड़ी होंगी। जुआरिया टीम की सबसे सफल बल्लेबाज रही हैं, जबकि संजीदा ने गेंद से प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।   दक्षिण अफ्रीका को बड़ी जीत की तलाश दिन के दूसरे मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका का सामना नीदरलैंड से होगा। दक्षिण अफ्रीका न केवल जीत बल्कि बेहतर नेट रन रेट के लिए बड़ी जीत दर्ज करना चाहेगा। मारिजान काप और कप्तान लौरा वोल्वार्ट टीम की प्रमुख उम्मीदें होंगी, जबकि नीदरलैंड की कप्तान बेबेट डी लीडे एक बार फिर टीम की सबसे बड़ी ताकत रहेंगी।

anjali kumari जून 25, 2026 0
US President Donald Trump speaks after Switzerland talks, warning Iran over compliance with the interim peace agreement.
60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तनावपूर्ण वार्ता के एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि ईरान अंतरिम शांति समझौते के तहत किए गए वादों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सख्त जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता, तो हम वही करेंगे जो जरूरी होगा।" उनके इस बयान को तेहरान के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। पहले दौर की वार्ता में दिखा था तनाव स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत के दौरान भी तनाव देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए वार्ता कक्ष छोड़कर बाहर चला गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। जेडी वेंस बोले- मजबूत समझौते की नींव पड़ी शुरुआती तनाव के बावजूद वार्ता बाद में पटरी पर लौटती दिखाई दी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत ने अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। ईरान ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि वार्ता का दायरा उसके परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) तक बढ़ा दिया गया है। ईरान को आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में मिली छूट अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को सीमित आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) ने 21 अगस्त तक कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट प्रदान की है। इस फैसले के बाद ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिल गई है। साथ ही उसे इन निर्यातों के बदले भुगतान प्राप्त करने की भी मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिबंधों से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की गई। दोनों देशों ने पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इस रोडमैप का उद्देश्य स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और लंबित विवादित मुद्दों का समाधान निकालना है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। 60 दिन की राहत, लेकिन दबाव बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की राहत ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी यह भी स्पष्ट करती है कि वाशिंगटन समझौते के उल्लंघन पर कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आने वाले दो महीने अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Rising tensions over the Indus Waters Treaty spark concerns for Pakistan's economy and regional stability.
सिंधु जल समझौते पर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी; अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks as tensions rise over Iran and the strategic Strait of Hormuz during talks in Switzerland.
'होर्मुज बंद हुआ तो अपने देश नहीं लौट पाओगे', ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Donald Trump and Iranian officials at Versailles Palace after signing the 14-point US-Iran agreement.
100 साल पहले जहां से अमेरिका बना महाशक्ति, उसी वर्साय में ट्रंप-ईरान डील पर उठे सवाल; क्या पश्चिम एशिया में नए समीकरण बन रहे हैं?

  फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय महल (Versailles Palace) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कई राजनीतिक विश्लेषक इस समझौते की तुलना 1919 की वर्साय संधि से कर रहे हैं, जिसे प्रथम विश्व युद्ध के बाद वैश्विक व्यवस्था को पुनर्गठित करने वाला दस्तावेज माना जाता है। इस बार बहस का केंद्र यह है कि क्या अमेरिका ने अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखी है या फिर समझौते में ईरान को अपेक्षा से अधिक रियायतें दी गई हैं। 1919 की वर्साय संधि और अमेरिका का उदय प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद 28 जून 1919 को फ्रांस के वर्साय महल में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। उस समय अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन के प्रसिद्ध ‘14 सूत्र’ (Fourteen Points) ने युद्धोत्तर विश्व व्यवस्था की दिशा तय की थी। इतिहासकारों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका आर्थिक और वित्तीय महाशक्ति के रूप में उभरा। यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था युद्ध से कमजोर हुई, जबकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता और औद्योगिक शक्ति बनकर सामने आया। वर्साय में ट्रंप-ईरान समझौता और नई राजनीतिक बहस करीब 107 वर्ष बाद एक बार फिर वर्साय महल वैश्विक राजनीति का केंद्र बना, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के बाद ट्रंप ने कहा कि यह समझौता आसान नहीं था और इसके लिए लंबी वार्ताएं करनी पड़ीं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते में अपनी पूर्व घोषित कठोर नीतियों से पीछे हटने का संकेत दिया है। बैलिस्टिक मिसाइलों पर ट्रंप के बदले सुर फ्रांस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि अन्य क्षेत्रीय देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान के पास भी सीमित संख्या में ऐसी मिसाइलें होने पर उन्हें आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलें और परमाणु हथियार एक जैसी चीज नहीं हैं और इस मुद्दे पर आगे भी बातचीत जारी रहेगी। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका और इजराइल दोनों ने ईरानी मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। ईरान को मिलीं क्या बड़ी रियायतें? समझौते के सामने आए विवरणों के अनुसार: ईरान को तत्काल अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को सौंपने की बाध्यता नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से जुड़े मुद्दों पर आगे की वार्ताओं का रास्ता खुला रखा गया है। अमेरिका ने ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियों को लेकर भी नरम रुख दिखाया है। प्रतिबंधों में संभावित राहत और पुनर्निर्माण फंड को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि समझौते में देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभु अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है। इजराइल में क्यों बढ़ी चिंता? इजराइल के कई राजनीतिक और रणनीतिक विश्लेषकों ने इस समझौते पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि ईरान की कुछ सैन्य क्षमताएं और क्षेत्रीय प्रभाव बरकरार रहता है, तो इससे भविष्य में इजराइल की सुरक्षा चुनौतियां बढ़ सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि समझौते से ईरान को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकता है, जबकि इजराइल के लिए उपलब्ध विकल्प सीमित हो सकते हैं। क्या इतिहास दोहराया जा सकता है? 1919 की वर्साय संधि को कई इतिहासकार द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले कारकों में से एक मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों और 1919 के यूरोप की स्थिति में सीधी तुलना करना उचित नहीं होगा। फिर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप-ईरान समझौता पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करेगा या यह केवल बड़े टकराव को कुछ समय के लिए टालने वाला समझौता साबित होगा। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के बाद अगले 60 दिनों की वार्ताएं निर्णायक मानी जा रही हैं। मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु गतिविधियां, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के रुख से यह तय होगा कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता लाता है या नई भू-राजनीतिक चुनौतियों को जन्म देता है।    

Deepshikha जून 19, 2026 0
US President Donald Trump discusses Iran missile policy after signing the US-Iran Islamabad MoU agreement.
ट्रंप का बड़ा यू-टर्न! बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर

  पेरिस/वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के पास सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रहने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संवर्धित यूरेनियम भंडार और जमी हुई ईरानी संपत्तियों को लेकर भी अपेक्षाकृत नरम बयान दिए हैं। ट्रंप का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजराइल दोनों ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की बात कर रहे थे। ‘दूसरे देशों के पास हैं तो ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें हो सकती हैं’ फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान के पास भी सीमित संख्या में ऐसी मिसाइलें होना पूरी तरह अनुचित नहीं है। ट्रंप ने कहा, “अगर दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान के पास कुछ मिसाइलें होने से उन्हें पूरी तरह रोकना थोड़ा अनुचित होगा।” उन्होंने सऊदी अरब और कतर का उदाहरण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय संतुलन को देखते हुए ईरान के पास भी कुछ मिसाइलें रहने दी जा सकती हैं। ‘मिसाइलें समस्या नहीं, परमाणु हथियार ज्यादा खतरनाक’ ट्रंप ने मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु हथियारों के बीच अंतर करते हुए कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन परमाणु हथियारों की विनाशकारी क्षमता कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, “मिसाइलें किसी छोटे इलाके को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे दुनिया को तबाह नहीं करतीं, जैसा कि परमाणु हथियार कर सकते हैं।” युद्ध के दौरान था मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने का लक्ष्य 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट रुख था कि ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम दोनों को कमजोर करना आवश्यक है। उस समय ट्रंप ने कहा था कि: ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह नष्ट किया जाएगा। परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। ताजा बयान संकेत देता है कि वॉशिंगटन अब इस मुद्दे पर पहले जैसी कठोर स्थिति में नहीं है। इसके बावजूद ट्रंप ने कहा कि अगले 60 दिनों तक चलने वाली वार्ताओं में मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी। यूरेनियम भंडार तुरंत सौंपने की शर्त नहीं एमओयू के अनुसार, ईरान को अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम भंडार को तत्काल सौंपने की बाध्यता नहीं दी गई है। समझौते में कहा गया है कि: इस मुद्दे का समाधान अगले 60 दिनों में तैयार किए जाने वाले अलग तंत्र के तहत होगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी। ट्रंप ने इस मुद्दे को भी अधिक महत्व नहीं देते हुए कहा, “यह सामग्री अब उतनी मूल्यवान नहीं है, लेकिन मनोवैज्ञानिक तौर पर हम उसे हासिल करना चाहेंगे।” उन्होंने दावा किया कि पहले हुए हमलों के बाद संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब चुकी है और उसे कोई छू भी नहीं सकता। जमी हुई ईरानी संपत्तियों को लौटाने के संकेत ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका को ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियां वापस करनी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा, “हमने उनका काफी पैसा रोका हुआ है। वह उनका अपना पैसा है। मुझे लगता है कि हमें उसे वापस करना होगा।” ट्रंप के अनुसार, यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है तो वैश्विक निवेशकों का डॉलर पर भरोसा प्रभावित हो सकता है। 300 अरब डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन फंड को मिली मान्यता अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ने ईरान के प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण (Reconstruction) फंड को मान्यता दे दी है। हालांकि इस फंड के वित्तपोषण और धन के स्रोत को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। राष्ट्रपतियों ने समझौते पर किए हस्ताक्षर फ्रांस के वर्साय पैलेस में डील पर हस्ताक्षर करने के कुछ घंटों बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि एमओयू के अंतिम मसौदे पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने आधिकारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, “इस्लामाबाद एमओयू का पाठ राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है। अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा शुरू होगी।” इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटल रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी निगरानी स्वयं डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। समझौते के बाद बदलते संकेत ट्रंप के ताजा बयानों ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका-ईरान संबंधों में टकराव की जगह अब चरणबद्ध कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़ने की कोशिश हो रही है। बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत को लेकर आने वाले 60 दिनों की बातचीत इस समझौते की वास्तविक दिशा तय करेगी।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0