Germany

Europe Wildfire Crisis
यूरोप में जंगल की आग के मामलों में तेज बढ़ोतरी, WHO ने जताई चिंता; जलवायु परिवर्तन को बताया बड़ी वजह

ब्रुसेल्स, एजेंसियां। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यूरोप में लगातार बढ़ रही जंगल की आग की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के यूरोप क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, पिछले चार वर्षों में क्षेत्र में जंगल की आग की घटनाओं में 57% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल 22 जुलाई तक यूरोप में 1,254 से अधिक बड़े जंगलों में आग लग चुकी है, जिससे करोड़ों टन कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में पहुंची है।   फ्रांस, स्पेन और कई देशों में हालात गंभीर   WHO ने कहा कि इस समय फ्रांस, स्पेन, ग्रीस, पुर्तगाल और जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में जंगल की आग तेजी से फैल रही है। फ्रांस और स्पेन में आग के कारण ढाई लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है, जबकि कई इलाकों में आपातकाल जैसी स्थिति बनी हुई है। स्पेन में इस वर्ष जंगल की आग से पहली मौत भी दर्ज की गई है। आग पर काबू पाने के लिए कई देशों ने सेना, हेलीकॉप्टर और फायर फाइटिंग विमानों को तैनात किया है।   स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा गंभीर असर   WHO ने चेतावनी दी कि जंगल की आग केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। आग से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण (PM2.5) सांस संबंधी बीमारियों, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाते हैं। संगठन ने सरकारों से आग की रोकथाम, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
World leaders react to the proposed US-Iran peace agreement and reopening of the Strait of Hormuz amid hopes of easing Middle East tensions.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर दुनिया ने जताई खुशी, कतर से फ्रांस तक नेताओं ने किया स्वागत

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इसका स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत कई देशों ने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा खोलने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते के दावे और पाकिस्तान की ओर से 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ईरान ने भी संकेत दिया है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। कतर ने कहा- स्थायी शांति की दिशा में अहम पहल Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ेंगी। एर्दोआन बोले- दुनिया लंबे समय से इस खबर का इंतजार कर रही थी Recep Tayyip Erdoğan ने कहा कि पूरी दुनिया लंबे समय से इस तरह की खबर का इंतजार कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करेगा। एर्दोआन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और उकसावे वाली गतिविधियों से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की। ब्रिटेन ने बताया युद्ध समाप्ति की दिशा में बड़ी उपलब्धि Keir Starmer ने इस समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्टार्मर ने यह भी कहा कि समझौते को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए और ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। जर्मनी ने कहा- वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत Friedrich Merz ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला कदम साबित हो सकता है। उन्होंने इसे दूरगामी प्रभाव वाला कूटनीतिक समाधान बताते हुए कहा कि इससे ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और व्यापारिक अनिश्चितताएं कम हो सकती हैं। फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य तत्काल खोलने की मांग की Emmanuel Macron ने कहा कि समझौते का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य का तत्काल और बिना किसी शर्त के दोबारा खुलना होना चाहिए। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों सहित क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़नी चाहिए। ट्रंप ने किया समझौता पूरा होने का दावा Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति दी जा रही है। ट्रंप ने कहा, "दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें, तेल का प्रवाह जारी रहने दें।" पाकिस्तान की मध्यस्थता की चर्चा Shehbaz Sharif ने दावा किया कि लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हुए हैं और 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका अहम रही है। वैश्विक बाजार की नजरें 19 जून पर यदि प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब 19 जून को होने वाली संभावित औपचारिक प्रक्रिया और उसके बाद की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Jaspal Rana passed away
भारतीय शूटर जसपाल राणा का 49 की उम्र में निधन, कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड जीते एक जून को जर्मनी से लौटते वक्त तबीयत बिगड़ी थी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के दिग्गज शूटर जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया है। वे 49 साल के थे। वे दिल्ली के मैक्स साकेत हॉस्पिटल में एडमिट थे। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कालीकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की पुष्टि की। एक जून की रात को म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में जसपाल की तबीयत खराब हो गई थी, जहां उन्हें मेडिकल हेल्प दी गई थी। दिल्ली पहुंचते ही जसपाल को मैक्स साकेत हास्पिटल में एडमिट कराया गया। टेस्ट के बाद उन्हें हार्ट में एक स्टेंट डाला गया था। मनु भाकर को पेरिस ओलिंपिक में डबल मेडल जिताए जसपाल राणा पेरिस ओलिंपिक में डबल ओलिंपिक मेडल जीतने वाली निशानेबाज मनु भाकर के कोच थे। वे जूनियर टीम के कोच और हाई परफार्मेंस ट्रेनर थे। जसपाल फरवरी 2025 से 25 मीटर पिस्टल में भारत के हाई परफार्मेंस कोच बनाए गए थे। खिलाड़ी के रूप में जसपाल राणा ने एशियन गेम्स 8 मेडल जीते। इनमें 4 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल रहे। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में 9 गोल्ड सहित 15 मेडल जीते। इनमें 4 सिल्वर और दो ब्रॉन्ज भी शामिल हैं।   बिंद्रा ने लिखा- जसपाल का जाना दुखद 2008 ओलिंपिक में भारत को शूटिंग का पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले अभिनव बिंद्रा ने जसपाल राणा के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म X पर लिखा- 'जसपाल के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। वे मेरे टीम मेट रहे हैं और भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली पीढ़ी के अहम सदस्य थे। वह बेहद प्रतिभाशाली और जुनूनी खिलाड़ी थे, जो हर बार रेंज पर उतरते समय देश का गौरव अपने साथ लेकर चलते थे। उनका जाना भारतीय खेल जगत, खासकर निशानेबाजी के लिए बड़ी क्षति है। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, दोस्तों, शिष्यों और उन सभी लोगों के साथ हैं, जिनके जीवन को उन्होंने छुआ और प्रेरित किया।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Donald Trumph G7
जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे ट्रंप, वैश्विक मुद्दों पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जाएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब ईरान को लेकर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित यूएफसी विश्व चैंपियनशिप मुकाबलों में शामिल होने के बाद सीधे फ्रांस रवाना होंगे। उन्होंने इस आयोजन को अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक बताया। पश्चिम एशिया को लेकर बढ़े हैं मतभेद हाल के दिनों में ट्रंप ने Germany, France और United Kingdom जैसे प्रमुख सहयोगी देशों की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि ये देश पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का पर्याप्त समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शुरुआत में उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रंप कई वैश्विक नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें United States, Canada, France, Germany, Italy, Japan और United Kingdom शामिल हैं। इसके अलावा European Union भी इस समूह का हिस्सा है। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसके फैसले आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Unknown जून 4, 2026 0
UN General Assembly voting session electing new non-permanent members to the UN Security Council.
UNSC चुनाव में बदला वैश्विक समीकरण, किर्गिस्तान की ऐतिहासिक एंट्री; जर्मनी को झटका

  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2026 चुनाव परिणामों ने वैश्विक कूटनीति में बदलते समीकरणों की झलक दिखाई है। जहां मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान ने पहली बार सुरक्षा परिषद में जगह बनाकर इतिहास रचा, वहीं यूरोप की प्रमुख शक्तियों में शामिल जर्मनी को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने संयुक्त राष्ट्र के भीतर बदलते राजनीतिक रुझानों और वैश्विक समर्थन के नए पैटर्न पर चर्चा तेज कर दी है। पांच नए देशों को मिली सुरक्षा परिषद में जगह 3 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हुए मतदान के बाद 2027-28 कार्यकाल के लिए पांच नए अस्थायी सदस्य चुने गए। इनमें शामिल हैं: किर्गिस्तान पुर्तगाल ऑस्ट्रिया जिम्बाब्वे त्रिनिदाद और टोबैगो ये देश 1 जनवरी 2027 से अपना दो वर्षीय कार्यकाल शुरू करेंगे और वर्तमान सदस्यों की जगह लेंगे जिनका कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। किर्गिस्तान ने रचा नया इतिहास इस चुनाव का सबसे उल्लेखनीय परिणाम किर्गिस्तान की जीत रही। स्वतंत्रता प्राप्ति और संयुक्त राष्ट्र सदस्यता के तीन दशक से अधिक समय बाद पहली बार देश को सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व मिला है। एशिया-प्रशांत समूह की सीट के लिए हुए मुकाबले में किर्गिस्तान को कई दौर की मतदान प्रक्रिया के बाद सफलता मिली। इसे देश की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। किर्गिस्तान लंबे समय से यह मुद्दा उठाता रहा है कि छोटे, पर्वतीय और भू-आवेष्ठित देशों को भी वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। जर्मनी की हार बनी सबसे बड़ी चर्चा चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका जर्मनी को लगा। पश्चिमी यूरोपीय और अन्य देशों के समूह की दो सीटों के लिए हुए मुकाबले में पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया सफल रहे, जबकि जर्मनी आवश्यक समर्थन जुटाने में पीछे रह गया। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जर्मनी संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख वित्तीय योगदानकर्ताओं में शामिल है और अतीत में कई बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रुख बना चर्चा का विषय विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर जर्मनी की स्पष्ट विदेश नीति का असर मतदान पर पड़ा हो सकता है। आधिकारिक तौर पर किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चुनाव परिणामों ने यह संकेत दिया है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन हासिल करना केवल आर्थिक शक्ति या राजनीतिक प्रभाव से संभव नहीं है। भारत के लिए क्या संकेत? इन नतीजों को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील का जी-4 समूह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए अभियान चलाता रहा है। ऐसे में जर्मनी का अस्थायी सीट हासिल न कर पाना यह दर्शाता है कि संयुक्त राष्ट्र में समर्थन जुटाने की चुनौती लगातार बढ़ रही है। भारत ने सभी विजेता देशों को बधाई देते हुए उनके साथ सहयोग जारी रखने की बात कही है। सुरक्षा परिषद की संरचना को समझिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य शामिल हैं: United States Russia China United Kingdom France इन पांच देशों के पास वीटो शक्ति होती है। शेष 10 सदस्य दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के आधार पर उनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है। बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत 2026 के चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में शक्ति संतुलन और समर्थन के पारंपरिक समीकरण बदल रहे हैं। छोटे और उभरते देशों की भूमिका बढ़ रही है, जबकि बड़े देशों को भी व्यापक कूटनीतिक समर्थन सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयास करने पड़ रहे हैं। सुरक्षा परिषद के ये नतीजे आने वाले वर्षों में वैश्विक कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र सुधार की बहस को नई दिशा दे सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
US military personnel and armored vehicles at an American base in Germany amid troop withdrawal plans
US Troops Germany: जर्मनी से 5000 सैनिक वापस बुलाएगा अमेरिका, ईरान युद्ध पर ट्रंप-यूरोप में बढ़ी खाई

अमेरिका ने यूरोप में अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाने का फैसला किया है। पेंटागन ने शुक्रवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान को लेकर जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। 6-12 महीनों में पूरी होगी वापसी पेंटागन के अनुसार, सैनिकों की वापसी चरणबद्ध तरीके से अगले 6 से 12 महीनों में पूरी की जाएगी। इस फैसले के बाद यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकर 2022 से पहले के स्तर के करीब आ जाएगी। जर्मनी में अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी जर्मनी में अमेरिका की सैन्य उपस्थिति यूरोप में सबसे बड़ी मानी जाती है। फिलहाल वहां करीब 35,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जबकि पूरे यूरोप में यह संख्या 80,000 से 1,00,000 के बीच रहती है। जर्मनी में अमेरिका के कई अहम सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जिनमें: रामस्टीन एयर बेस – यूरोप में अमेरिकी वायुसेना का सबसे बड़ा केंद्र पैच बैरक्स – यूएस यूरोपियन और अफ्रीका कमांड का मुख्यालय विस्बाडेन – यूरोप-अफ्रीका कमान का संचालन केंद्र लैंडस्टुहल रीजनल मेडिकल सेंटर – अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा सैन्य अस्पताल इसके अलावा ग्राफेनवोहर, होहेनफेल्स और स्पैंगडाहलेम जैसे कई बड़े ट्रेनिंग और एयर बेस भी यहीं स्थित हैं। क्यों बढ़ी अमेरिका-यूरोप में तकरार? यह फैसला ऐसे समय आया है, जब यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के उस बयान के बाद विवाद गहरा गया, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका के “अपमानित” होने की बात कही थी। इस पर जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जर्मनी को ईरान पर टिप्पणी करने के बजाय यूक्रेन युद्ध खत्म करने और अपने आंतरिक हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। यूरोप के समर्थन की कमी पर नाराजगी रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका इस बात से भी नाराज है कि कई यूरोपीय देशों ने ईरान के खिलाफ उसके सैन्य अभियानों में अपेक्षित समर्थन नहीं दिया। विशेष रूप से: स्पेन ने सहयोग से इनकार किया इटली ने भी सीमित समर्थन दिया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अन्य नेताओं के साथ भी ट्रंप के मतभेद सामने आए हैं। नाटो सहयोगियों पर ट्रंप का आरोप डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नाटो सहयोगियों पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे अमेरिकी सुरक्षा ढांचे का फायदा उठाते हैं, लेकिन पर्याप्त योगदान नहीं करते। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा में यूरोपीय देशों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी से सैनिकों की वापसी का यह फैसला ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों पर दबाव बढ़ा सकता है। अमेरिका चाहता है कि यूरोप अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाए और नाटो में ज्यादा खर्च करे।

surbhi मई 2, 2026 0
Reza Pahlavi targeted with tomato sauce after press conference in Berlin
बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर फेंका गया टमाटर सॉस, VIDEO वायरल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुआ हमला जर्मनी की राजधानी बर्लिन में ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर एक व्यक्ति ने लाल रंग का तरल पदार्थ फेंक दिया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टमाटर केचप था। घटना उस समय हुई जब पहलवी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अपने समर्थकों का अभिवादन कर रहे थे। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कैसे हुआ हमला? वीडियो में देखा जा सकता है कि रेजा पहलवी समर्थकों की ओर हाथ हिला रहे थे। तभी पीछे से एक व्यक्ति अचानक आया और उन पर लाल तरल फेंक दिया। लाल पदार्थ उनके कोट और गर्दन पर गिरा सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत आरोपी को पकड़ लिया पुलिस ने मौके पर ही उसे हिरासत में ले लिया हालांकि, पहलवी इस घटना में पूरी तरह सुरक्षित रहे। हमले के बाद भी नहीं रुके पहलवी हमले के बावजूद रेजा पहलवी ने संयम बनाए रखा। उन्होंने समर्थकों का अभिवादन जारी रखा और बाद में अपनी कार में बैठकर वहां से रवाना हो गए। यह घटना उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच मौजूद गहरे राजनीतिक विभाजन को भी दर्शाती है। सीजफायर पर की थी तीखी आलोचना घटना से कुछ देर पहले पहलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्धविराम की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि तेहरान के मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा करना एक बड़ी भूल होगी और पश्चिमी देशों को ईरान के साथ केवल "यथास्थिति" बनाए रखने की नीति छोड़नी चाहिए। कौन हैं रेजा पहलवी? रेजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। 1967 में उन्हें क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद उनका परिवार निर्वासन में चला गया। वे लंबे समय से ईरान की मौजूदा इस्लामिक सरकार के मुखर आलोचक रहे हैं। हाल के महीनों में वे ईरान में राजनीतिक बदलाव की मांग को लेकर काफी सक्रिय रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 23, 2026 0