Global Oil Market

NSE launching Brent Crude futures from April 13, 2026, for Indian traders and investors.
NSE 13 अप्रैल से लॉन्च करेगा ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स: जानिए क्या बदलेगा, कैसे करें ट्रेड और निवेशकों के लिए क्या मायने

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) 13 अप्रैल 2026 से अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में डेटेड ब्रेंट क्रूड (Platts) फ्यूचर्स लॉन्च करने जा रहा है। S&P ग्लोबल एनर्जी (Platts) के साथ साझेदारी में शुरू हो रहा यह प्रोडक्ट भारतीय कमोडिटी बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। SEBI की मंजूरी के बाद यह कदम अब भारत के ट्रेडर्स, रिफाइनरियों और निवेशकों को ग्लोबल ऑयल प्राइस पर सीधे दांव लगाने और हेजिंग करने का मौका देगा। क्या है यह नया प्रोडक्ट? ब्रेंट क्रूड दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल बेंचमार्क है, जिस पर 60-70% वैश्विक तेल व्यापार होता है। अभी तक भारत में ज्यादातर ट्रेडिंग MCX पर WTI क्रूड के आधार पर होती थी, लेकिन NSE का यह नया प्रोडक्ट सीधे ब्रेंट प्राइस से जुड़ा होगा। यानी अब भारतीय निवेशक इंटरनेशनल मार्केट के साथ ज्यादा सिंक में ट्रेड कर सकेंगे। ट्रेडिंग के नियम एक नजर में कॉन्ट्रैक्ट सिंबल: BRCRUDEOIL न्यूनतम साइज: 100 बैरल सेटलमेंट: कैश सेटल्ड (कोई फिजिकल डिलीवरी नहीं) ट्रेडिंग करेंसी: भारतीय रुपये बेस प्राइस: Platts Dated Brent Benchmark इससे ट्रेडिंग आसान, ट्रांसपेरेंट और ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब होगी। क्यों यह लॉन्च इतना अहम है? 1. ग्लोबल मार्केट से सीधा कनेक्शन अब भारतीय ट्रेडर्स सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर ट्रेड कर सकेंगे, जिससे प्राइस डिस्कवरी बेहतर होगी। 2. हेजिंग के नए मौके तेल कंपनियां पहले से ही कीमत लॉक कर सकेंगी, जिससे कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का जोखिम कम होगा। 3. MCX को मिलेगी टक्कर अब कमोडिटी ट्रेडिंग में NSE की एंट्री से कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, जिससे निवेशकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे। 4. रिटेल निवेशकों के लिए बड़ा मौका छोटे निवेशकों को भी अब ग्लोबल ऑयल मूवमेंट से कमाई का मौका मिलेगा। किन सेक्टर्स पर पड़ेगा असर? ऑयल मार्केटिंग कंपनियां रिफाइनरी सेक्टर एविएशन (फ्यूल कॉस्ट पर असर) ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स इन सेक्टर्स के लिए हेजिंग आसान और ज्यादा प्रभावी होगी। क्या हैं जोखिम? कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जियोपॉलिटिकल तनाव का सीधा असर नए निवेशकों के लिए हाई रिस्क इसलिए बिना समझे ट्रेडिंग करना नुकसानदायक हो सकता है। निवेशक क्या करें? शुरुआती दिनों में बाजार का ट्रेंड समझें छोटे अमाउंट से शुरुआत करें ग्लोबल न्यूज (जंग, सप्लाई, OPEC फैसले) पर नजर रखें लॉन्ग टर्म के लिए इसे डाइवर्सिफिकेशन टूल की तरह देखें

surbhi मार्च 30, 2026 0
Satellite view of Iran’s Kharg Island oil terminal amid reports of US airstrikes.
Donald Trump का दावा – Kharg Island पर सैन्य ठिकाने तबाह, क्यों कहा जाता है इसे Iran की ‘लाइफ़लाइन’?

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि उनके आदेश पर अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व के इतिहास के सबसे शक्तिशाली हवाई हमलों में से एक को अंजाम देते हुए ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद अहम Kharg Island पर मौजूद सभी सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि “मानवीय और नैतिक कारणों से” उन्होंने फिलहाल इस द्वीप के तेल ढांचे को निशाना नहीं बनाने का फैसला किया है।   क्यों अहम है खार्ग द्वीप Kharg Island को ईरान की अर्थव्यवस्था की ‘लाइफ़लाइन’ माना जाता है। यह द्वीप ईरान के सबसे बड़े तेल भंडारण और निर्यात केंद्रों में से एक है और देश के करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है। इसलिए किसी भी सैन्य कार्रवाई या संभावित कब्जे को ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।   युद्ध के बीच तेल ठिकाने निशाने पर Israel, United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच पूरे मध्य पूर्व में तेल रिफाइनरियां और भंडारण टैंक हमलों का निशाना बन रहे हैं। इज़राइली सेना पहले ही Tehran के रेय, शहरान और अकदसियेह इलाकों के तेल डिपो और Karaj शहर के फरदिस क्षेत्र में हमले कर चुकी है। इज़राइल का कहना है कि इन स्थानों का इस्तेमाल ईरानी सरकार सैन्य ईंधन भंडारण के लिए कर रही थी।   ईरान की जवाबी कार्रवाई दूसरी ओर Iran ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए फारस की खाड़ी के कई देशों में रिफाइनरियों और तेल डिपो को निशाना बनाया है। ऐसे में खार्ग द्वीप पर हमले के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका भविष्य में इस द्वीप पर कब्जा करने की रणनीति अपना सकता है।   पहले भी उठ चुका है मुद्दा इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री Yair Lapid ने भी पहले कहा था कि खार्ग द्वीप पर मौजूद ईरान के तेल ढांचे को नष्ट करना उसकी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दे सकता है। वहीं अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर Lindsey Graham ने कहा कि ईरान की तेल अर्थव्यवस्था इस संघर्ष में अहम भूमिका निभा सकती है और रणनीतिक लक्ष्यों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए।   कब्जे की संभावना पर चर्चा समाचार वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारियों के बीच खार्ग द्वीप पर कब्जे की संभावना पर भी चर्चा हुई है। पेंटागन के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार Michael Rubin का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान पर दबाव और बढ़ाना चाहता है, तो खार्ग द्वीप पर कब्जा करना ईरानी शासन को उसके सबसे बड़े वित्तीय स्रोत से वंचित कर सकता है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Russian oil 30-day concession
सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट, अमेरिका ने 30 दिन की रियायत दी कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार

तेल अवीव, एजेंसियां। अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि ईरान जंग की वजह से दुनिया में ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगेः इस छूट के तहत देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे बाजार में ऑयल सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद मिलेगी। जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता बढ़ गई है। यह है अमेरिकी शर्तः अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह इजाजत सिर्फ उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाना है।

Anjali Kumari मार्च 13, 2026 0
Donald Trump announcing $300 billion Texas oil refinery project with Reliance partnership strengthening India-US energy cooperation
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी मजबूत: टेक्सास में 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी डील, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को कहा ‘धन्यवाद’

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास में लगभग 300 अरब डॉलर की विशाल तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा करते हुए भारत और भारतीय कंपनी रिलायंस का आभार जताया है। ट्रंप ने कहा कि यह निवेश अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम है और करीब 50 वर्षों में देश में स्थापित होने वाली पहली नई तेल रिफाइनरी होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विल (Brownsville) में स्थापित की जाएगी। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देगी।   भारत और रिलायंस को दिया धन्यवाद परियोजना की घोषणा करते हुए ट्रंप ने भारत और उसकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निवेश में भारत के सहयोग से अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। ट्रंप ने लिखा, “भारत में हमारे साझेदारों और उनकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस को इस जबरदस्त निवेश के लिए धन्यवाद। यह अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए बड़ी जीत है।” हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रिफाइनरी भारत के साथ किसी व्यापक आर्थिक समझौते का हिस्सा है या नहीं, लेकिन इस घोषणा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।   50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी रिफाइनरी ट्रंप ने इस परियोजना को अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, यह रिफाइनरी पिछले पांच दशकों में अमेरिका में बनने वाली पहली नई बड़ी तेल रिफाइनरी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बार फिर ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप के शब्दों में, “अमेरिका ‘रियल एनर्जी सेक्टर’ में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर रहा है। टेक्सास के ब्राउनस्विल में बनने वाली यह रिफाइनरी अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक होगी।”   ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का असर ट्रंप ने इस निवेश को अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने और करों में कटौती से जुड़ा परिणाम बताया। उनके मुताबिक इन नीतियों के कारण ही अरबों डॉलर का निवेश अमेरिका की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राउनस्विल पोर्ट पर बनने वाली यह नई रिफाइनरी न केवल अमेरिकी बाजार को ऊर्जा उपलब्ध कराएगी, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।   रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा ट्रंप के अनुसार यह परियोजना दक्षिण टेक्सास के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक और स्वच्छ रिफाइनरियों में से एक होगी, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निर्यात को भी बढ़ावा देगी।   वैश्विक परिस्थितियों के बीच अहम घोषणा यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में अमेरिका में नई रिफाइनरी की स्थापना को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भी और मजबूत हो सकती है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0