Global Politics

Prime Minister Narendra Modi arrives in France to attend the 52nd G7 Summit in Evian alongside global leaders.
G7 समिट के लिए फ्रांस पहुंचे ट्रम्प और मेलोनी, आज एवियन पहुंचेंगे पीएम मोदी; मैक्रों बोले- अमेरिका-ईरान समझौता विश्व शांति के लिए अहम

  एवियन/पेरिस: फ्रांस के एवियन शहर में मंगलवार से 52वें G7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है, जो 17 जून तक चलेगा। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन फ्रांस पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्लोवाकिया से फ्रांस पहुंचेंगे और सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के नेता के रूप में हिस्सा लेंगे। ट्रम्प-मैक्रों की मुलाकात, ईरान-अमेरिका समझौते का स्वागत फ्रांस पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे विश्व शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मैक्रों ने कहा कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। G7 नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के दौरान G7 सदस्य देशों के नेताओं और अन्य सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर भारत का पक्ष रख सकते हैं। ईरान, यूक्रेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रहेगा फोकस इस बार G7 समिट के एजेंडे में यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजरायल तनाव, गाजा और लेबनान की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख मुद्दे हैं। G7 देशों के नेता इन विषयों पर सामूहिक रणनीति और संभावित घोषणाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। पीएम मोदी का 100वां विदेशी दौरा फ्रांस और स्लोवाकिया की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल का 100वां विदेशी दौरा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, मोदी अब तक प्रधानमंत्री के रूप में 78 देशों की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पहला विदेश दौरा जून 2014 में भूटान का था। पहले कार्यकाल में उन्होंने 49, दूसरे कार्यकाल में 27 और तीसरे कार्यकाल में अब तक 24 विदेश यात्राएं की हैं। क्या है G7? G7 यानी 'ग्रुप ऑफ सेवन' दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह G7 बना। 1998 में रूस को शामिल कर इसे G8 बनाया गया, लेकिन 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूस को बाहर कर दिया गया और समूह फिर G7 बन गया। भारत क्यों है खास? भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका के कारण उसे नियमित रूप से विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से लगातार G7 शिखर सम्मेलनों में हिस्सा ले रहे हैं। इस बार वह सातवीं बार G7 मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। G20 और G7 में क्या अंतर? G7 मुख्य रूप से विकसित देशों का समूह है, जहां आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर भी चर्चा होती है। वहीं G20 में विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं दोनों शामिल हैं और उसका मुख्य फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और वित्तीय स्थिरता पर रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में G20 का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन भू-राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर G7 अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Donald Trump and Iranian officials discuss draft peace agreement amid hopes of ending conflict
अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म होने की उम्मीद? ड्राफ्ट समझौते पर बनी सहमति, जल्द हो सकता है बड़ा ऐलान

युद्धविराम की दिशा में बड़ी प्रगति, समझौते का मसौदा तैयार अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों ने शांति समझौते के एक ड्राफ्ट (मसौदा) के शब्दों पर सहमति बना ली है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है और मध्यस्थ देश इसे अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में यह अब तक की सबसे महत्वपूर्ण प्रगति है और समझौता पहले से कहीं ज्यादा करीब दिखाई दे रहा है। ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री ने भी दिए सकारात्मक संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच समझौता जल्द हो सकता है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि किसी समझौते के इतने करीब दोनों देश पहले कभी नहीं पहुंचे थे। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मसौदा अभी आंतरिक समीक्षा के दौर से गुजर रहा है और अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। क्या जल्द होगा समझौते पर हस्ताक्षर? ईरान की ओर से संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि हस्ताक्षर किसी आमने-सामने बैठक के बजाय ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यम से भी किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस प्रारंभिक समझौते का मुख्य उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को फिलहाल इस समझौते से अलग रखा गया है और उन पर बाद में अलग चरण में बातचीत की जाएगी। किन मुद्दों पर अब भी बनी हुई है असहमति? हालांकि बातचीत में काफी प्रगति हुई है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिले और विदेशों में जमा उसकी संपत्तियां मुक्त की जाएं। दूसरी ओर अमेरिका का कहना है कि किसी भी राहत से पहले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ कदम उठाने होंगे। यही कारण है कि अंतिम समझौते से पहले कुछ शर्तों पर और बातचीत हो सकती है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता? इस संभावित समझौते का भारत पर भी सीधा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, समझौते में Strait of Hormuz को फिर से पूरी तरह खोलने की दिशा में कदम शामिल हो सकते हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव कम होता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ जाएगी। इजरायल अभी भी बातचीत का हिस्सा नहीं रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel इस वार्ता प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इजरायली नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है और जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से फैसले लेने का अधिकार सुरक्षित रखता है। अगले कुछ दिन होंगे बेहद अहम कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के भीतर सभी स्तरों पर मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले कुछ दिनों में आधिकारिक समझौते की घोषणा हो सकती है। इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम होने, वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा बहाल होने की उम्मीद बढ़ जाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
S.Jaishankar
विदेश मंत्री जयशंकर ने यूरोप को दिखाया आईना

लंदन, एजेंसियां। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूरोप को आईना दिखाया है। उन्होंने रूस या ईरान की जगह अमेरिका या वेनेजुएला से तेल खरीदने और नैतिकता के प्रश्न पर यूरोपिय देशों को दो टूक जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हम कीमत और उपलब्धता के आधार पर तेल खरीदते हैं। चूंकि उस समय बाजार में ज्यादातर तेल रूस का ही उपलब्ध था, क्योंकि यूरोपिय देश मुख्य रूप से मिडिल-ईस्ट  से तेल खरीद रहे  थे, जोकि कभी हमारी पारंपरिक सप्लाई थी। हालात ने हमें एक खास दिशा में धकेल दिया था।  किसी यूरोपिय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ उन्होंने कहा कि चूंकि आप नैतिक दुविधा की बात करते हैं, तो मैं कहूंगा कि किसी भी यूरोपिय देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि काश मैं भारत के मामले में यूरोपिय हथियारों  के बारे में ऐसा कह पाता। विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोपिय देश ऐसे हथियार बेचते हैं, जिनका इस्तेमाल भारत पर हमले के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह आज की बात नहीं है, बल्कि वर्षों से ऐसा होता आ रहा है।  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम भारतीयों ने कभी यूरोप को खतरे में डालने वाला कोई काम नहीं  किया है। इसलिए मुझे लगता है कि यह वाजिब बात है।  2022 के बाद रूस से ज्यादा तेल खरीदा अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर विदेश मंत्री एस जयशसंकर ने कहा कि 2022 तक हमने रूस  से बहुत ज्यादा तेल नहीं खरीदा था। हालात ने हमें उस बाजार में  जाने को मजबूर किया और मुझे यह कहना होगा कि रूस लगातार सप्लाई करने वाला देश रहा है, क्योंकि वे कार्गो भी उपलब्ध कराते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि आप जाकर तेल खरीदते हैं, जो भी तेल सबसे सही कीमत पर आसानी से मिल रहा हो। उन्होंने  कहा कि मैं चाहता हूं कि लोग यह बात याद रखें। उन्होंने  कहा कि उस समय अमेरिका ने खासतौर पर भारत से रूस का तेल खरीदने को कहा था, ताकि दुनिया के बाजारों में स्थिरता बनी रही। हमने अमेरिकी टैरिफ झेला यदि आप देखें तो पिछले साल रूस से तेल खरीदने पर हम पर टैरिफ लगाने के बाद, अमेरिका ने फिर से अपने प्रतिबंध हटा लिए। इसलिए ऐसा दिखावा नहीं करना चाहिए कि इसमें कोई बड़ा सिद्धांत शामिल है।  कभी हां और कभी हां ठीक नहीं है विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कभी हां और कभी हां ठीक नहीं है। जब चीजें आपके अनुकूल है तो करो और जब प्रतिकूल हो तो मत करो। हम सब समझदार लोग हैं और समझते हैं कि खेल क्या है। उन्होंने कहा कि उसे नैतिकता का मुद्दा बनाना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि आज हमारा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रूस है जो कुल सप्लाई का लगभग 40 फीसदी है। सबसे ज्यादा गैस की सप्लाई अमेरिका से होती है, जबकि इसी साल 28 फरवरी तक ऐसा नहीं था। तब गैस का मुख्य सप्लायर कतर था।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Iranian officials respond to reports of a possible US-Iran agreement amid ongoing diplomatic negotiations.
ट्रंप के समझौता दावे को ईरान ने नकारा, कहा- अभी किसी अंतिम डील पर फैसला नहीं

  अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच तेहरान ने स्पष्ट किया है कि अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है और जल्द ही उस पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान बोला- समझौते की खबरें अटकलों पर आधारित ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए से बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी अंतिम समझौते को लेकर सामने आ रही खबरें केवल अटकलें हैं। उन्होंने कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है और मसौदे का बड़ा हिस्सा पहले ही तैयार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। बघाई के अनुसार, कतर और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिकी रुख पर जताई नाराजगी बघाई ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष लगातार अपना रुख बदलता रहा है, जिससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी निर्धारित "रेड लाइन्स" से पीछे नहीं हटेगा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उनका कहना था कि वार्ता जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय अभी शेष है। होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चिंता ईरानी प्रवक्ता ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अमेरिकी गतिविधियों के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहां किसी भी तनाव का असर वैश्विक तेल बाजारों पर पड़ सकता है। ट्रंप ने किया था समझौते का दावा इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार है। ट्रंप ने कहा था कि अब केवल दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है और आने वाले दिनों में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि हस्ताक्षर समारोह यूरोप में आयोजित किया जा सकता है और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिका का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। ट्रंप ने दावा किया था कि प्रस्तावित समझौते का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। भारतीय जहाज पर हमले को लेकर अमेरिका पर आरोप इस बीच ओमान के तट के निकट एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले और उसमें भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे पर भी ईरान ने अमेरिका की आलोचना की है। इस्माइल बघाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में अमेरिकी कार्रवाई को "राज्य प्रायोजित समुद्री डकैती" और "सशस्त्र लूट" करार दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगे क्या? अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। जहां वॉशिंगटन समझौते को अंतिम चरण में बता रहा है, वहीं तेहरान का कहना है कि बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है। ऐसे में आने वाले दिनों की कूटनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि दोनों देश वास्तव में किसी व्यापक समझौते के करीब हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Donald Trump speaks about a potential US-Iran agreement as diplomatic negotiations continue.
ट्रंप का दावा: अमेरिका-ईरान समझौता अंतिम चरण में, वीकेंड पर यूरोप में हो सकते हैं हस्ताक्षर

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर जल्द हस्ताक्षर हो सकते हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है और कई मुद्दों पर बातचीत जारी है। ट्रंप बोले- औपचारिक प्रक्रिया बाकी व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि समझौते के अधिकांश बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ औपचारिक दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ दिनों में इन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देकर समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम इसी सप्ताहांत यूरोप में आयोजित किया जा सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ट्रंप ने बताया कि यदि हस्ताक्षर समारोह आयोजित होता है तो वह स्वयं इसमें शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस बयान को अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से चल रही कूटनीतिक बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी जताई उम्मीद ट्रंप ने कहा कि संभावित समझौते से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है। उनका मानना है कि समझौते के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल होने में मदद मिलेगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है। ईरान ने कहा- अभी अंतिम समझौता नहीं दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावों पर सावधानीपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि वार्ता के कई पहलुओं पर प्रगति हुई है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिका की ओर से नई मांगें सामने रखी जा रही हैं, जिससे कुछ मुद्दों पर सहमति बनने में कठिनाई आ रही है। बघाई ने दोहराया कि ईरान अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और निर्धारित "रेड लाइन" से पीछे नहीं हटेगा। आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर नजर ट्रंप के आशावादी बयान और ईरान की सतर्क प्रतिक्रिया के बीच अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर आगामी कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है। यदि दोनों पक्ष शेष मतभेदों को दूर करने में सफल रहते हैं, तो यह समझौता पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Russian President Vladimir Putin speaking about Russia’s future priorities and 2030 presidential election speculation.
2030 चुनाव लड़ेंगे या नहीं? पुतिन ने भविष्य पर दिया बड़ा बयान

  रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने 2030 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चल रही अटकलों को समय से पहले बताया है। उनका कहना है कि फिलहाल रूस के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं और देश को उन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, न कि भविष्य के चुनावी समीकरणों पर। 'ईश्वर ही जानता है कल क्या होगा' एक कार्यक्रम के दौरान जब पुतिन से पूछा गया कि क्या वह 2030 का चुनाव लड़कर 2036 तक सत्ता में बने रहने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि भविष्य के बारे में कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। पुतिन ने कहा कि यह केवल ईश्वर ही जानता है कि आने वाले वर्षों में किसके पास कितना स्वास्थ्य, ऊर्जा और क्षमता होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय उनका ध्यान केवल रूस के रणनीतिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने पर है। संविधान देता है एक और कार्यकाल का अवसर रूस के मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पुतिन 2030 में फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। यदि वह चुनाव जीतते हैं तो उनका कार्यकाल 2036 तक बढ़ सकता है। रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह इस संभावना पर विचार नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ्य को लेकर वर्षों से चल रही हैं चर्चाएं पिछले कुछ वर्षों में पुतिन की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं। कभी उनके गंभीर बीमारी से जूझने के दावे किए गए, तो कभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में हमशक्ल इस्तेमाल करने जैसी चर्चाएं हुईं। हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें उनके हाथ या पैरों में कंपन दिखाई देने का दावा किया गया। इन दावों के आधार पर कुछ लोगों ने पार्किंसन जैसी बीमारियों की अटकलें लगाईं, लेकिन क्रेमलिन ने कभी ऐसी किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की है। 73 की उम्र में भी सक्रिय राजनीति के केंद्र में 73 वर्षीय पुतिन अब भी रूस की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। उनकी सार्वजनिक छवि हमेशा एक मजबूत और सक्रिय नेता की रही है। विभिन्न अवसरों पर उनकी खेल गतिविधियों, घुड़सवारी और फिटनेस से जुड़ी तस्वीरें चर्चा में रहती हैं। वैश्विक राजनीति में भी यह उम्र असामान्य नहीं मानी जाती। उदाहरण के तौर पर Donald Trump और Narendra Modi भी उन्नत आयु में सक्रिय राजनीतिक नेतृत्व कर रहे हैं। जीवन बढ़ाने वाली तकनीकों पर रूस का फोकस रूसी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, पुतिन मानव जीवन की अवधि बढ़ाने से जुड़ी उन्नत जैव-चिकित्सीय तकनीकों पर आधारित एक बड़े सरकारी कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं। इस पहल के तहत थ्री-डी बायोप्रिंटिंग, पुनर्योजी चिकित्सा (रेजेनरेटिव मेडिसिन) और ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर शोध किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का लक्ष्य भविष्य में मानव अंग प्रत्यारोपण और जीवन विस्तार से जुड़ी नई संभावनाएं विकसित करना है। रूस की चुनौतियों पर ध्यान देने की अपील पुतिन ने कहा कि चुनावी चर्चाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि रूस अपने आर्थिक, सुरक्षा और विकास संबंधी लक्ष्यों को हासिल करे। उनके अनुसार, देश के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों के समाधान पर ध्यान देना ही इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
US President Donald Trump speaking about Iran conflict and Middle East ceasefire during a White House briefing.
ट्रंप बोले- सीजफायर का मतलब पूरी तरह शांति नहीं, कम हो सकती है गोलीबारी

  अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति Donald Trump ने संघर्षविराम की नई व्याख्या पेश की है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में सीजफायर का मतलब हमेशा पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता, बल्कि कई बार इसका अर्थ केवल कम तीव्रता वाली सैन्य कार्रवाई भी हो सकता है। व्हाइट हाउस में ट्रंप का संकेत- अमेरिकी सैनिक मरे तो खत्म हो सकता है संघर्षविराम ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसके पीछे ईरान की भूमिका साबित होती है, तो मौजूदा संघर्षविराम जारी रखना मुश्किल होगा। वॉशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट: सहयोगियों को ट्रंप ने दिया सख्त संदेश रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों से कहा है कि छोटे स्तर की झड़पों को कुछ समय तक सहन किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी सैनिकों पर घातक हमले की स्थिति में अमेरिका की रणनीति बदल सकती है। होर्मुज के पास अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा नया तनाव ताजा तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप के निकट एक सैन्य नियंत्रण केंद्र और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक लक्ष्य पर कार्रवाई की। इसके बाद क्षेत्र में हालात और संवेदनशील हो गए। कुवैत और बहरीन में ईरानी हमले, भारतीय नागरिक की मौत ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। ट्रंप का दावा- ईरानी हमले हालिया अमेरिकी कार्रवाई का जवाब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हर सैन्य कार्रवाई के पीछे कोई न कोई कारण होता है। उनके अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी और स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है। वॉशिंगटन-तेहरान संपर्क अब भी जारी, ट्रंप ने खारिज की बातचीत रुकने की खबरें ईरानी मीडिया में वार्ता रुकने की खबरों के बावजूद ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और बातचीत की प्रक्रिया जारी है। तीन महीने से खाड़ी क्षेत्र में जारी है टकराव 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी छिटपुट सैन्य कार्रवाइयां जारी रहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अटका विवाद, वैश्विक ऊर्जा बाजार की बढ़ी चिंता Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए क्षेत्र में अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अब भी आमने-सामने हैं अमेरिका-ईरान वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि तेहरान प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। युद्ध और कूटनीति साथ-साथ, पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बरकरार ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि संघर्षविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी बड़े हमले से हालात फिर तेजी से बदल सकते हैं।  

Deepshikha जून 4, 2026 0
Iranian President Masoud Pezeshkian amid reports of resignation denied by government officials
ईरान के राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरों पर ईरान की सफाई, कहा- अफवाहों पर ध्यान न दें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के इस्तीफे की खबरों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि देश की निर्णय प्रक्रिया में बढ़ते सैन्य प्रभाव और सरकार की सीमित भूमिका से नाराज होकर उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की है। ईरानी सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? ब्रिटिश-ईरानी मीडिया संस्थान 'ईरान इंटरनेशनल' की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सर्वोच्च नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय फैसलों में सरकार की भूमिका कम होने से वह असंतुष्ट थे। राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया निराधार राष्ट्रपति कार्यालय के अधिकारियों ने इन खबरों को अफवाह करार देते हुए कहा कि पेजेशकियन सामान्य रूप से अपने सभी सरकारी दायित्व निभा रहे हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के संचार विभाग ने कहा कि विदेशी मीडिया द्वारा फैलाई जा रही खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। तस्नीम एजेंसी ने भी किया खंडन आईआरजीसी से संबद्ध तस्नीम न्यूज एजेंसी ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि राष्ट्रपति ने इस्तीफा नहीं दिया है और सरकार अपना कामकाज सामान्य रूप से चला रही है। सरकार और सुरक्षा संस्थाओं के रिश्तों पर चर्चा पिछले कुछ महीनों से ईरान की निर्वाचित सरकार और सैन्य-सुरक्षा संस्थाओं के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में इस्तीफे की अटकलों को बल मिला। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश की एकता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर फैलाई जा रही ऐसी खबरों का कोई आधार नहीं है। सत्ता के केंद्र को लेकर बहस जारी विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में कई प्रभावशाली संस्थाओं और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका रहती है। लेकिन फिलहाल राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सरकार लगातार इन दावों को भ्रामक प्रचार बता रही है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Iranian officials respond to Donald Trump’s claims regarding negotiations over the Strait of Hormuz
ट्रंप के दावों पर ईरान का पलटवार, बोला- होर्मुज स्ट्रेट को लेकर नहीं बनी कोई अंतिम सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर नए विवाद की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमत हो गया है। ईरान का कहना है कि मौजूदा वार्ता के मसौदे में ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है। ईरान बोला- ट्रंप के बयान में सच कम, दावे ज्यादा ईरान की सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े मीडिया संस्थान Fars News Agency ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के हालिया बयान वास्तविक बातचीत से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसे दावे कर रहे हैं जो अभी तक किसी अंतिम समझौते का हिस्सा नहीं हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वार्ता अभी जारी है और किसी भी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। किस मसौदे पर चल रही है चर्चा? रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच "कमिटमेंट के बदले कमिटमेंट" के सिद्धांत पर आधारित एक प्रस्तावित समझौते पर चर्चा हो रही है। तेहरान ने अभी तक इस मसौदे को अंतिम स्वीकृति नहीं दी है। ईरानी पक्ष का दावा है कि ट्रंप जिन शर्तों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख कर रहे हैं, वे वर्तमान ड्राफ्ट डील का हिस्सा नहीं हैं। ट्रंप ने क्या कहा था? व्हाइट हाउस में पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात सामान्य होने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा था कि ईरान जल्द ही समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जहाजों की आवाजाही पर लगी बाधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और क्षेत्र में फंसे जहाज अब सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक लौट सकेंगे। होर्मुज स्ट्रेट क्यों है अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तनाव या समझौते का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। अभी भी जारी है वार्ता दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ईरान और अमेरिका के बयानों में अंतर यह संकेत देता है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। ऐसे में संभावित शांति समझौते को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष आधिकारिक रूप से समझौते की पुष्टि नहीं करते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Donald Trump speaking about a possible Iran agreement and developments around the Strait of Hormuz
होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- जल्द हो सकता है ईरान से समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र में लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जा रही है और ईरान के साथ संभावित समझौते पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। ईरान ने उनके दावों पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है और कहा है कि बातचीत अभी जारी है। शांति समझौते पर चल रही है बातचीत पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कई दौर की बातचीत हो रही है। दोनों देशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच शुरुआती स्तर पर कुछ सहमति बनी है और मौजूदा युद्धविराम को 60 दिनों तक बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है। व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बैठक ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते पर जल्द निर्णय लेंगे। इसके लिए व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में करीब दो घंटे तक एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समझौते से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। बैठक के बाद व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी अंतिम फैसले पर सहमति बनी है या नहीं। ईरान के सामने रखीं ये प्रमुख शर्तें ट्रंप ने कहा कि किसी भी संभावित समझौते के लिए ईरान को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम विकसित नहीं करेगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी देशों के जहाजों के लिए बिना किसी शुल्क और बाधा के खोलना होगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाया या निष्क्रिय किया जाएगा ताकि समुद्री यातायात सामान्य हो सके। होर्मुज में फंसे जहाजों को लेकर ट्रंप का बयान ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई के कारण प्रभावित जहाज अब जल्द अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इसी दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जहाजों के चालक दल अपने परिवारों तक लौट सकते हैं और "अपनी पत्नी को मेरी तरफ से हैलो कहना।" उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गई। व्हाइट हाउस ने क्या कहा? व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका तभी किसी शांति समझौते को अंतिम रूप देगा, जब ईरान सभी आवश्यक शर्तों को स्वीकार करेगा। अधिकारी के अनुसार, बातचीत जारी है और अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। वैश्विक ऊर्जा बाजार की नजर समझौते पर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक समुदाय की नजर बनी हुई है। यदि समझौता सफल होता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Donald Trump speaking on global security and warning Oman over Hormuz Strait tensions
ओमान तक पहुंची ट्रम्प की धमकी की राजनीति, 15 देशों को दे चुके हैं चेतावनी; दुनिया में बढ़ी बेचैनी

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने आक्रामक बयानों को लेकर वैश्विक चर्चा में हैं। इस बार ट्रम्प ने ओमान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ओमान, ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका संबंध पहले से ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की लगातार बढ़ती सैन्य चेतावनियां दुनिया में अस्थिरता और रणनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। ट्रम्प की धमकियों की सूची में ओमान बना 15वां देश ओमान अब वह 15वां देश बन गया है, जिसे लेकर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से सैन्य कार्रवाई या सख्त कदम की चेतावनी दी है। इससे पहले भी ट्रम्प कई देशों के खिलाफ आक्रामक बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान, इराक, सीरिया, यमन, सोमालिया, नाइजीरिया और वेनेजुएला समेत कई देशों में सैन्य कार्रवाई की। इनमें कुछ ऑपरेशन ड्रोन हमलों के जरिए हुए, जबकि कुछ में सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया गया। विशेष रूप से ईरान को लेकर अमेरिका का रुख सबसे ज्यादा सख्त माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। कनाडा से क्यूबा तक, कई देशों को दी कब्जे की चेतावनी ट्रम्प केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई देशों को अमेरिका में शामिल करने या उन पर नियंत्रण स्थापित करने जैसे विवादित बयान भी दिए हैं। बताया जा रहा है कि कनाडा, ग्रीनलैंड, क्यूबा और वेनेजुएला को लेकर भी ट्रम्प ने बेहद आक्रामक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा पनामा नहर को लेकर भी उन्होंने अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चिंता बढ़ा दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अमेरिका की पारंपरिक विदेश नीति से अलग दिखाई देती है। चुनाव से पहले शांति की बात, सत्ता में आते ही बदले तेवर राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प खुद को “शांति स्थापित करने वाले नेता” के रूप में पेश करते रहे थे। उन्होंने कई बार कहा था कि अगर वह सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प अपने विरोधियों पर अमेरिका को “अनावश्यक युद्धों” में धकेलने का आरोप लगाते थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका रुख अधिक आक्रामक दिखाई देने लगा। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रम्प अब दबाव की राजनीति के जरिए अपने विरोधियों और सहयोगियों दोनों को संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका किसी भी हद तक जा सकता है। क्या है ‘मैडमैन थ्योरी’, जिससे जोड़ा जा रहा ट्रम्प को राजनीतिक विशेषज्ञ ट्रम्प की रणनीति को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Richard Nixon की “मैडमैन थ्योरी” से जोड़कर देख रहे हैं। इस सिद्धांत के तहत नेता अपने विरोधियों को यह एहसास दिलाने की कोशिश करता है कि वह अप्रत्याशित और बेहद कठोर कदम उठा सकता है। इसका मकसद विरोधी देशों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होता है। निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान इसी रणनीति का इस्तेमाल किया था। माना जाता है कि ट्रम्प भी कई बार इसी शैली में बयान देकर विरोधियों को डराने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी- उल्टा पड़ सकता है दबाव कई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प की यह रणनीति हर जगह असरदार साबित नहीं हो रही। रूस और ईरान जैसे देशों पर अमेरिकी दबाव का सीमित असर देखने को मिला है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सैन्य धमकियों से ईरान जैसे देश अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Historian Yuval Noah Harari criticizes Donald Trump and Benjamin Netanyahu over divisive politics
इजराइली इतिहासकार का बड़ा बयान: नेतन्याहू ने देश को बांटा, ट्रम्प की राजनीति दुनिया को पीछे ले जा रही

दुनिया के चर्चित इतिहासकार Yuval Noah Harari ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की राजनीति पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि डर, ताकत और नफरत की राजनीति दुनिया को कमजोर बना रही है। नेतन्याहू पर हरारी का बड़ा आरोप एक इंटरव्यू में हरारी ने कहा कि इजराइल के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा नेता रहा हो जिसने समाज को उतना बांटा हो जितना नेतन्याहू ने किया। उनके मुताबिक, नेतन्याहू ने लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया और देश के भीतर गहरी राजनीतिक खाई पैदा की। हरारी ने कहा कि राष्ट्रवाद का मतलब अपने लोगों से प्रेम और जुड़ाव होना चाहिए, न कि समाज में नफरत फैलाना। ट्रम्प की राजनीति पर भी निशाना हरारी ने ट्रम्प की राजनीति की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रम्पवाद की सोच यह है कि कमजोर देश हमेशा ताकतवर देशों के सामने झुक जाएं। हरारी के मुताबिक यह सोच खतरनाक है, क्योंकि इससे दुनिया में हथियारों की दौड़ और संघर्ष बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर दुनिया सिर्फ ताकत के नियम पर चलेगी, तो हर देश अपने संसाधन विकास की जगह हथियारों पर खर्च करेगा। “सहयोग से आगे बढ़ी इंसानी सभ्यता” हरारी ने कहा कि इंसानों की सबसे बड़ी ताकत युद्ध नहीं बल्कि सहयोग है। उन्होंने बताया कि इंसान इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोग मिलकर समाज, कानून, बाजार और तकनीक बना सके। उन्होंने कहा कि अगर केवल ताकत ही सबकुछ होती, तो इंसान आज भी छोटे-छोटे समूहों में रह रहा होता। राष्ट्रवाद पर क्या बोले हरारी? हरारी ने कहा कि राष्ट्रवाद अपने आप में गलत नहीं है। उनके मुताबिक, राष्ट्रवाद का असली मतलब उन लोगों के लिए अपनापन महसूस करना है जिन्हें हम व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते, लेकिन फिर भी उनके लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत, इजराइल और चीन जैसे बड़े देशों में करोड़ों लोग रहते हैं, फिर भी राष्ट्रवाद लोगों को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब राष्ट्रवाद नफरत और विभाजन का रूप ले लेता है, तब यह समाज के लिए खतरा बन जाता है।   AI को बताया सबसे बड़ा खतरा हरारी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को भविष्य का सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि AI केवल मशीन नहीं रह गया है, बल्कि अब वह इंसानों जैसी बातचीत और भावनाओं की नकल करना सीख रहा है। हरारी के मुताबिक आने वाले समय में लोग असली रिश्तों की जगह AI पर ज्यादा निर्भर हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर AI पर नियंत्रण कमजोर हुआ, तो यह इंसानों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Donald Trump speaks about a future Iran agreement, contrasting it with the Obama-era nuclear deal.
ट्रंप बोले- ईरान से होगी ‘सख्त और अलग’ डील, ओबामा समझौते जैसा नहीं मिलेगा कैश

Donald Trump ने कहा है कि अगर उनकी सरकार के दौरान Iran के साथ कोई नया समझौता होता है, तो वह पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama के दौर की परमाणु डील से पूरी तरह अलग होगा। ट्रंप ने साफ कहा कि उनकी संभावित डील में ईरान को किसी तरह की आर्थिक राहत या नकद सहायता नहीं दी जाएगी। उन्होंने एक बार फिर ओबामा प्रशासन की परमाणु नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि पुराना समझौता कमजोर था। “हमारी डील मजबूत होगी” सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रंप ने कहा, “अगर मैं ईरान के साथ कोई समझौता करता हूं, तो वह मजबूत और सही होगा। यह ओबामा की डील जैसा नहीं होगा, जिसमें ईरान को भारी मात्रा में कैश मिला था और परमाणु हथियार की दिशा में खुला रास्ता दिया गया था।” उन्होंने आगे कहा कि अभी तक प्रस्तावित समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है और कई लोग बिना तथ्य जाने आलोचना कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, “मैंने हमेशा खराब समझौतों से बचने की कोशिश की है।” क्या थी ओबामा की न्यूक्लियर डील? साल 2015 में ओबामा प्रशासन के दौरान ईरान और विश्व शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था, जिसे Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है। इस समझौते में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी शामिल थे। डील के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे। उसने संवर्धित यूरेनियम का भंडार काफी घटाने और बड़ी संख्या में सेंट्रीफ्यूज हटाने पर सहमति दी थी। साथ ही International Atomic Energy Agency (IAEA) को ईरान के परमाणु ठिकानों की निगरानी की अनुमति दी गई थी। इसके बदले पश्चिमी देशों ने ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी थी। 2018 में ट्रंप ने तोड़ी थी डील ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में साल 2018 में अमेरिका को JCPOA से बाहर कर लिया था। उनका आरोप था कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए पर्याप्त सख्त नहीं था। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। 2025 से बढ़ा तनाव रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2025 में अमेरिका ने Natanz Nuclear Facility, Isfahan Nuclear Technology Center और Fordow Fuel Enrichment Plant पर बड़े हमले किए थे। बताया गया कि इन हमलों में बी-2 बॉम्बर विमानों का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद इजरायल और ईरान के बीच चला 12 दिन का संघर्ष समाप्त हुआ था। बाद में यह दावा सामने आया कि ईरान के पास अब भी लगभग 400 किलोग्राम तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। 2026 में और बिगड़े हालात रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी 2026 में अमेरिका और Israel ने ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। इसमें ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने का दावा किया गया, जिनमें Ali Khamenei का नाम भी शामिल रहा। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में पश्चिम एशिया के कई हिस्सों को निशाना बनाया और Strait of Hormuz की नाकेबंदी कर दी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। समझौते की ओर बढ़ रहे दोनों देश? तनाव बढ़ने के बाद अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम लागू हुआ। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित समझौते में ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन स्तर को कम करने, स्टॉक नष्ट करने या किसी तीसरे देश को सौंपने पर विचार कर सकता है। ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने अब भी ऐसी किसी डील पर सहमति से इनकार किया है।  

surbhi मई 25, 2026 0
PM Narendra Modi and Italy PM Giorgia Meloni pose for a selfie during Modi’s Rome visit
‘Welcome to Rome, My Friend!’: इटली पहुंचते ही PM मोदी का खास अंदाज में स्वागत, जॉर्जिया मेलोनी ने शेयर की सेल्फी

Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के अंतिम चरण में Italy पहुंच गए हैं। इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के साथ एक सेल्फी साझा कर उनका खास अंदाज में स्वागत किया। मेलोनी ने पोस्ट में लिखा, “Welcome to Rome, my friend!” यानी “रोम में स्वागत है, मेरे दोस्त!” दोनों नेताओं की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भारत-इटली संबंधों की गर्मजोशी की चर्चा हो रही है। रोम एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत इटली के उप प्रधानमंत्री Antonio Tajani ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय भी एयरपोर्ट और होटल के बाहर मौजूद रहे। पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनसे बातचीत भी की। IMEC और रणनीतिक साझेदारी पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि इस यात्रा के दौरान वह इटली के राष्ट्रपति Sergio Mattarella और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य फोकस भारत-इटली सहयोग को और मजबूत करना होगा, खासकर ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ यानी India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा ‘संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029’ की समीक्षा भी की जाएगी। FAO मुख्यालय का भी करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि वह Food and Agriculture Organization (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे। इस दौरान वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर चर्चा होगी। होटल में दिखी भारतीय संस्कृति की झलक रोम स्थित होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य, भारतीय वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भारतीय परंपरा की झलक दिखाई गई। पीएम मोदी Anantara Palazzo Naiadi Rome Hotel में ठहरे हैं। होटल और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। क्या रहेगा पीएम मोदी का कार्यक्रम? इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले Quirinal Palace जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति सर्जियो मैटरेला से होगी। इसके बाद Villa Doria Pamphili में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ द्विपक्षीय शिखर बैठक आयोजित होगी। दोनों नेता भारतीय और इटालियन उद्योग समूहों के प्रमुखों के साथ वर्किंग लंच में भी शामिल होंगे। G7 के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा यह जून 2024 में आयोजित G7 Summit 2024 के बाद पीएम मोदी की पहली द्विपक्षीय इटली यात्रा है। वह जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर इटली पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान भारत और इटली के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। भारत-इटली रिश्ते लगातार मजबूत भारत और इटली के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, विज्ञान एवं तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली ने भारत में 3.66 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Iranian official Mohsen Rezaei issues strong warning to Donald Trump amid rising US-Iran nuclear tensions.
ईरान की ट्रंप को खुली चेतावनी, खामेनेई के करीबी बोले- ‘अमेरिका को झुकना पड़ेगा’

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान की ओर से एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के करीबी और वरिष्ठ सलाहकार Mohsen Rezaei ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को कड़ी चेतावनी दी है। ‘ईरान की सेना अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर करेगी’ मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका यह गलतफहमी पाल रहा है कि दबाव बनाकर ईरान को झुकाया जा सकता है। उन्होंने लिखा कि ईरान की “लोहे जैसी मजबूत” सशस्त्र सेनाएं अमेरिका को पीछे हटने और आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर देंगी। रेजाई ने ट्रंप के हालिया बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप ने क्या कहा था? ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर संभावित हमला “कुछ समय के लिए” रोक दिया है। उनके मुताबिक, Saudi Arabia, Qatar और United Arab Emirates समेत कई खाड़ी देशों ने वॉशिंगटन से अपील की थी कि सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाए ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकल सके। ट्रंप ने कहा था कि अगर बिना युद्ध और बमबारी के समझौता हो जाए तो यह सबसे बेहतर विकल्प होगा। ईरान बोला- बातचीत का मतलब समर्पण नहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी साफ किया कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता। उन्होंने कहा कि ईरान अपने परमाणु अधिकारों और राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि देश किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है। पाकिस्तान के जरिए पहुंचा नया प्रस्ताव रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को संशोधित शांति प्रस्ताव भेजा है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि नए प्रस्ताव में बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं। वॉशिंगटन अब भी यह मानता है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त रियायतें देने को तैयार नहीं है। परमाणु कार्यक्रम बना तनाव की सबसे बड़ी वजह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता लगातार बढ़ रही है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान संवर्धित यूरेनियम के भंडार को बढ़ा रहा है, जबकि तेहरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। पश्चिम एशिया में जारी इस तनातनी के बीच अब दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और संभावित समझौते पर टिकी हुई है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Vladimir Putin and Xi Jinping meeting in Beijing amid growing discussions on global power shifts and new world order.
ट्रंप के बाद पुतिन की चीन यात्रा: क्या बीजिंग बन रहा है नए वर्ल्ड ऑर्डर का केंद्र?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की हाई-प्रोफाइल चीन यात्रा खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का बीजिंग दौरा वैश्विक राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या China खुद को अमेरिका के विकल्प के रूप में नए वैश्विक शक्ति केंद्र के तौर पर स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक पुतिन दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मंगलवार को चीन पहुंचेंगे। यह दौरा चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के निमंत्रण पर हो रहा है। क्रेमलिन ने भी इस यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेता रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सहयोग, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे। ट्रंप की यात्रा के तुरंत बाद क्यों अहम है पुतिन का दौरा? ट्रंप ने 13 से 15 मई तक चीन का दौरा किया था। करीब एक दशक में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा थी। इस दौरान ट्रंप के साथ अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों के कई सीईओ भी मौजूद थे। हालांकि यात्रा के बाद कोई बड़ा व्यापारिक समझौता सामने नहीं आया। इसी के कुछ दिनों बाद पुतिन का चीन जाना कई रणनीतिक संकेत दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग अब खुद को ऐसी शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है जो अमेरिका और रूस दोनों के साथ अलग-अलग स्तर पर संवाद बनाए रख सके। चीन-रूस साझेदारी लगातार मजबूत रूस और चीन के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से गहरे हुए हैं। दोनों देशों ने फरवरी 2022 में “असीमित रणनीतिक साझेदारी” (No Limits Partnership) की घोषणा की थी। यह समझौता रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के ठीक पहले हुआ था। युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, लेकिन चीन ने न तो रूस की खुलकर आलोचना की और न ही पश्चिमी प्रतिबंधों का समर्थन किया। इसके उलट दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ता गया। रॉयटर्स के अनुसार, पुतिन और शी जिनपिंग पिछले कुछ वर्षों में 40 से अधिक बार मुलाकात कर चुके हैं। पिछले साल दोनों देशों ने “पावर ऑफ साइबेरिया 2” गैस पाइपलाइन परियोजना को आगे बढ़ाने पर भी समझौता किया था, जिससे रूस की ऊर्जा आपूर्ति चीन की ओर और बढ़ेगी। क्या बदल रहा है वैश्विक शक्ति संतुलन? विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया धीरे-धीरे “मल्टीपोलर वर्ल्ड” यानी बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। अब केवल अमेरिका ही वैश्विक राजनीति का केंद्र नहीं रह गया है। चीन, रूस, भारत और खाड़ी देशों जैसी शक्तियां भी अंतरराष्ट्रीय समीकरणों को प्रभावित कर रही हैं। चीन की रणनीति केवल सैन्य या आर्थिक ताकत तक सीमित नहीं है। बीजिंग: BRICS और SCO जैसे मंचों के जरिए प्रभाव बढ़ा रहा है डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बड़े निवेश कर रहा है AI, चिप्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहता है चीन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हालांकि चीन की बढ़ती ताकत से अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ी है, लेकिन बीजिंग के सामने कई मुश्किलें भी हैं। ताइवान मुद्दा, पश्चिमी देशों के साथ तकनीकी टकराव, आर्थिक सुस्ती और सप्लाई चेन शिफ्ट जैसी चुनौतियां चीन के लिए बड़ी परीक्षा बनी हुई हैं। इसके अलावा रूस के साथ अत्यधिक नजदीकी भी चीन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि इससे पश्चिमी देशों के साथ उसका तनाव और बढ़ सकता है। नया वर्ल्ड ऑर्डर या नई शक्ति प्रतिस्पर्धा? पुतिन की चीन यात्रा और ट्रंप के हालिया दौरे ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया अब तेजी से बदलते भू-राजनीतिक दौर में प्रवेश कर चुकी है। चीन खुद को केवल एक आर्थिक शक्ति नहीं, बल्कि नए वैश्विक संतुलन की धुरी के रूप में स्थापित करना चाहता है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि दुनिया पूरी तरह चीन केंद्रित हो गई है, लेकिन इतना तय है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक राजनीति अधिक प्रतिस्पर्धी, बहुध्रुवीय और रणनीतिक गठबंधनों पर आधारित होने वाली है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump issues strong warning to Iran amid rising Middle East tensions and nuclear dispute.
‘घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी’, ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Donald Trump ने Iran को लेकर एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच ट्रंप ने कहा कि “ईरान के लिए घड़ी की टिक-टिक शुरू हो चुकी है” और उसे जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “उन्हें बहुत तेजी से कदम उठाने होंगे, वरना वहां कुछ भी बाकी नहीं बचेगा। समय सबसे महत्वपूर्ण है।” फिर बढ़ा सैन्य कार्रवाई का खतरा ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका एक सप्ताह के भीतर ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को अपने शीर्ष सुरक्षा सलाहकारों के साथ व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अहम बैठक कर सकते हैं, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा होगी। नेतन्याहू से हुई लंबी बातचीत सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने हाल ही में Benjamin Netanyahu से करीब आधे घंटे तक बातचीत की। चर्चा में ईरान और मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति पर विचार किया गया। बताया जा रहा है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजरायली सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिका की नई शर्तें ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए कई नई शर्तें रखी हैं। इनमें शामिल हैं: 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना केवल एक परमाणु केंद्र संचालित रखना युद्ध मुआवजे की मांग वापस लेना अधिकांश फ्रीज विदेशी संपत्तियों पर दावा छोड़ना क्षेत्रीय संघर्ष को वार्ता प्रक्रिया पूरी होने तक समाप्त न करना   ईरान ने भी रखीं अपनी शर्तें ईरान ने भी बातचीत के लिए अपनी शर्तें सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि वह तभी बातचीत करेगा जब: क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई बंद हो ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं विदेशों में फ्रीज ईरानी संपत्तियां जारी की जाएं युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा मिले Strait of Hormuz पर उसकी संप्रभुता को मान्यता दी जाए अब तक अमेरिका ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया है। युद्ध और संघर्षविराम के बाद भी तनाव बरकरार दोनों देशों के बीच संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान समेत कई इलाकों पर हमले किए थे। इसके बाद कई हफ्तों तक संघर्ष जारी रहा और 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम पर सहमति बनी। सीजफायर के बावजूद धमकियों, आरोपों और सैन्य गतिविधियों का सिलसिला जारी है। ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका-इजरायल पर लगाए आरोप Masoud Pezeshkian ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं होने दिया। उन्होंने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक का आभार भी जताया। होर्मुज स्ट्रेट बना विवाद का केंद्र मिडिल ईस्ट तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट सबसे संवेदनशील मुद्दा बन गया है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Donald Trump speaks after China visit amid reports of possible US action against Iran
चीन दौरे से लौटते ही ईरान पर फिर सख्त हुए ट्रंप, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान पर दोबारा बड़े हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय Pentagon संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। ‘शांति प्रस्ताव पसंद नहीं आया’ रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने खारिज कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैंने उस प्रस्ताव को देखा और उसकी पहली लाइन ही मुझे पसंद नहीं आई, इसलिए मैंने उसे फेंक दिया।” ट्रंप के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले संघर्ष के दौरान रोके गए “Operation Epic Fury” को नए रूप में फिर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर “Operation Epic Fury 2.0” नाम की किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास और सैन्य तैयारियों में लगी हुई हैं। अगले सप्ताह हमले की आशंका? मध्य पूर्व के कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि सैन्य तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर अगले सप्ताह की शुरुआत में कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव पिछले महीने संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए हालात शांत हुए थे, लेकिन अब दोनों पक्षों के बयानों और सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा, जबकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump and Xi Jinping discussing Iran nuclear issue and Hormuz Strait during China visit
ट्रंप का दावा- ‘ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते’, होर्मुज खुला रखने पर चीन से सहमति

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद दावा किया है कि अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हैं कि Iran के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य हर हाल में खुला रहना चाहिए। ट्रंप ने यह बयान चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि उनकी चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ मध्य पूर्व, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ‘होर्मुज खुला रहना बेहद जरूरी’ ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे खुला रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक दबाव और नाकेबंदी के कारण पिछले ढाई सप्ताह में ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी बहुत जोर देकर कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए।” ईरान को लेकर अमेरिका-चीन की ‘अच्छी समझ’ ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान और ताइवान के मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच “अच्छी समझ” बनी है। उन्होंने कहा, “हमने ईरान और ताइवान दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुझे लगता है कि इन विषयों पर हमारी समझ काफी अच्छी रही।” हालांकि चीन की ओर से ट्रंप के इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ताइवान मुद्दे पर भी हुई चर्चा ट्रंप ने बताया कि शी चिनफिंग ने ताइवान को लेकर अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से रखीं। उनके अनुसार, चीनी राष्ट्रपति नहीं चाहते कि ताइवान में किसी तरह का स्वतंत्रता संघर्ष या सैन्य टकराव हो, क्योंकि इससे बड़ा क्षेत्रीय संकट पैदा हो सकता है। ट्रंप ने कहा, “मैंने उनकी बात पूरी तरह सुनी। मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है।” ताइवान को हथियार बिक्री पर क्या बोले ट्रंप? प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप से 1982 के उस अमेरिकी आश्वासन को लेकर सवाल पूछा गया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बिक्री के मामलों में चीन से सलाह नहीं लेगा। इस पर ट्रंप ने कहा, “1982 बहुत पुरानी बात हो चुकी है। हमने ताइवान और हथियारों की बिक्री पर चर्चा की। यह एक अहम मुद्दा है और मैं जल्द इस पर फैसला लूंगा।” वैश्विक तनाव के बीच अहम मानी जा रही यात्रा ट्रंप की यह चीन यात्रा ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव, ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और चीन वास्तव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा को लेकर साझा रुख अपनाते हैं, तो इसका असर वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Donald Trump and Xi Jinping walking through Zhongnanhai Garden while admiring blooming roses in Beijing.
चीन के गुलाबों के मुरीद हुए ट्रंप, जिनपिंग के साथ गार्डन में टहलते दिखे अमेरिकी राष्ट्रपति

Donald Trump के चीन दौरे का एक खास वीडियो सामने आया है, जिसमें वह चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ बीजिंग के मशहूर झोंगनानहाई गार्डन में घूमते नजर आ रहे हैं। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत भी हुई, जिसने सबका ध्यान खींच लिया। गुलाब देखकर प्रभावित हुए ट्रंप गार्डन में टहलते वक्त ट्रंप वहां लगे खूबसूरत गुलाबों को देखकर काफी प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा कि उन्होंने इतने सुंदर गुलाब पहले कभी नहीं देखे। इस पर शी जिनपिंग ने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि वह ट्रंप को इन गुलाबों के बीज भेजेंगे। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो न्यूज एजेंसी PTI ने जारी किया है। कई अहम मुद्दों पर हुई बातचीत चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों से लेकर वैश्विक मुद्दों तक पर विस्तृत चर्चा हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कई नए साझा समझौतों पर भी सहमति जताई है। बताया गया है कि दोनों नेताओं ने गुरुवार को दो अलग-अलग दौर की बैठकें कीं, जिनमें व्यापार, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। साथ में किया लंच बैठकों के अलावा ट्रंप और शी जिनपिंग ने साथ में लंच भी किया। दोनों नेताओं के बीच दिखी गर्मजोशी को हाल के महीनों में अमेरिका-चीन संबंधों में आई नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। तीन दिवसीय दौरे का आखिरी दिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप शुक्रवार को अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा समाप्त कर लौटेंगे। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, टैरिफ और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव बना हुआ था। ऐसे में इस मुलाकात को वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Donald Trump speaking about Xi Jinping’s remarks while criticizing Joe Biden’s administration
‘100% सही थे शी जिनपिंग’, अमेरिका की हालत पर ट्रंप का बयान; बाइडेन पर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति Joe Biden पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने तेज़ प्रगति की, जबकि देश की गिरावट बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के उस बयान का जिक्र किया जिसमें अमेरिका को “गिरावट की ओर बढ़ता देश” बताया गया था। ट्रंप ने कहा कि वह शी जिनपिंग की बात से “100 फीसदी सहमत” हैं, लेकिन यह टिप्पणी उनके कार्यकाल पर नहीं बल्कि बाइडेन सरकार के दौर पर लागू होती है। ‘बाइडेन के समय देश कमजोर हुआ’ ट्रंप ने कहा कि बाइडेन प्रशासन के चार वर्षों में अमेरिका को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर काफी नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि खुली सीमाओं, ज्यादा टैक्स, गलत व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध ने देश को कमजोर किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी और DEI (डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन) नीतियों की भी आलोचना की। ‘मेरे नेतृत्व में अमेरिका ने जबरदस्त उछाल देखा’ ट्रंप ने दावा किया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका ने केवल 16 महीनों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, 401K निवेश मजबूत हुए और अमेरिका फिर से आर्थिक ताकत के रूप में उभरा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली बनी रही और ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया। ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ रिश्तों में सुधार और रिकॉर्ड निवेश आने का भी दावा किया। ‘शी जिनपिंग ने दी थी बधाई’ ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खुद उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में रोजगार के अवसर बढ़े और कई नीतिगत बदलावों ने अमेरिका को मजबूत बनाया। हालांकि ट्रंप के इन दावों पर विपक्षी डेमोक्रेटिक नेताओं की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0