नई दिल्ली, एजेंसियां। 20 मई को सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई है, जबकि चांदी के दाम में हल्की गिरावट देखने को मिली। अगर आप सोना खरीदने या चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो आज के नए भाव जानना आपके लिए जरूरी है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और डॉलर की स्थिति का असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है। आज कितना महंगा हुआ सोना? आज 24 कैरेट सोने का दाम 15,705 रुपये प्रति ग्राम पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट सोना 14,396 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना 11,779 रुपये प्रति ग्राम पर बिक रहा है। कल के मुकाबले हर कैरेट में 1 रुपये प्रति ग्राम की मामूली बढ़त दर्ज की गई है। आज का सोने का भाव • 24 कैरेट – ₹15,705 प्रति ग्राम • 22 कैरेट – ₹14,396 प्रति ग्राम • 18 कैरेट – ₹11,779 प्रति ग्राम बड़े शहरों में सोने के रेट देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई। लखनऊ और दिल्ली में 24 कैरेट सोना 15,720 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया है। पटना में यह 15,710 रुपये प्रति ग्राम बिक रहा है, जबकि मुंबई और कोलकाता में 15,705 रुपये प्रति ग्राम का भाव दर्ज किया गया। चेन्नई में सबसे ज्यादा रेट देखने को मिला, जहां 24 कैरेट सोना 16,223 रुपये प्रति ग्राम पर पहुंच गया। चांदी क्यों हुई सस्ती? सोने के विपरीत चांदी की कीमतों में आज हल्की गिरावट दर्ज हुई है। 1 ग्राम चांदी का रेट 284.90 रुपये हो गया है, जबकि 10 ग्राम चांदी 2,849 रुपये में बिक रही है। वहीं 1 किलो चांदी की कीमत 2,84,900 रुपये पहुंच गई है। कल की तुलना में प्रति किलो 100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। आज का चांदी का भाव • 1 ग्राम – ₹284.90 • 10 ग्राम – ₹2,849 • 1 किलो – ₹2,84,900 शहरों में चांदी के ताजा रेट लखनऊ, पटना, दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 1 किलो चांदी का भाव 2,84,900 रुपये दर्ज किया गया है। चेन्नई में चांदी का रेट सबसे अधिक 2,99,900 रुपये प्रति किलो रहा। बाजार जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में वैश्विक मांग और निवेशकों की गतिविधियों के आधार पर कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
Brent Crude और West Texas Intermediate की कीमतों में सोमवार, 18 मई को जोरदार उछाल देखने को मिला। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7% और एक महीने में 23% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। इस तेजी ने वैश्विक बाजारों में नई चिंता पैदा कर दी है। आखिर क्यों बढ़ रही है तेल की कीमत? तेल बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आया है। Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि समझौते के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उनके इस बयान के बाद बाजार में बेचैनी बढ़ गई और निवेशकों ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। अगर इस समुद्री मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। UAE की घटना ने बढ़ाया तनाव वीकेंड में United Arab Emirates के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर ने बाजार को और चिंतित कर दिया। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने साफ किया कि किसी के घायल होने या रेडिएशन लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और तेल बाजार में तेजी को और हवा मिली। सोने की कीमतों पर दबाव जहां कच्चा तेल तेजी से ऊपर गया, वहीं COMEX Gold की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब 0.62% टूटकर 4,533 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे इसकी मांग कमजोर हो जाती है। आगे क्या? अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और व्हाइट हाउस की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है
महंगे गोल्ड ज्वेलरी से हटकर नए विकल्पों की ओर बढ़ रहे लोग भारत में सोना हमेशा से निवेश और पारंपरिक शान का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन 2026 में लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की पसंद बदलनी शुरू कर दी है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी लोगों से फिलहाल गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की थी। ऐसे में अब नई पीढ़ी पारंपरिक गोल्ड ज्वेलरी के बजाय दूसरे विकल्पों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रही है। लैब-ग्रोउन डायमंड्स बने नया स्टेटस सिंबल 2026 में ज्वेलरी इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव लैब-ग्रोउन डायमंड्स को लेकर देखा जा रहा है। युवा वर्ग अब प्राकृतिक हीरों की बजाय लैब में तैयार किए गए डायमंड्स को पसंद कर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कम कीमत और पर्यावरण के प्रति जागरूकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लैब-ग्रोउन डायमंड्स की कीमत प्राकृतिक हीरों की तुलना में लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक कम होती है। दिखने में ये बिल्कुल असली हीरों जैसे लगते हैं और इन्हें अधिक टिकाऊ और एथिकल विकल्प माना जा रहा है। सिल्वर ज्वेलरी की फिर बढ़ी डिमांड एक समय बजट विकल्प मानी जाने वाली सिल्वर ज्वेलरी अब फैशन ट्रेंड बन चुकी है। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर नेकलेस, झुमके और विंटेज डिजाइन वाले आभूषण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इंडो-वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ सिल्वर ज्वेलरी का कॉम्बिनेशन लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। फैशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ती गोल्ड कीमतों के बीच सिल्वर एक स्टाइलिश और किफायती विकल्प बनकर उभरा है। पुरानी विरासत वाली ज्वेलरी को मिल रहा नया महत्व अब लोग नई भारी-भरकम गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के बजाय परिवार की पुरानी ज्वेलरी को दोबारा इस्तेमाल करना पसंद कर रहे हैं। पुराने कुंदन सेट, मंदिर ज्वेलरी और पारंपरिक चूड़ियों को नया डिजाइन देकर दोबारा पहना जा रहा है। इस ट्रेंड को सिर्फ फैशन नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और टिकाऊ लाइफस्टाइल से भी जोड़ा जा रहा है। परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही ज्वेलरी अब फिर से खास बनती जा रही है। रेंटल ज्वेलरी का बढ़ा क्रेज भारतीय शादियों में भारी गोल्ड ज्वेलरी पहनने का चलन लंबे समय से रहा है, लेकिन अब युवा पीढ़ी शादी के लिए ज्वेलरी किराए पर लेना ज्यादा पसंद कर रही है। कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म अब ब्राइडल ज्वेलरी रेंट पर उपलब्ध करा रहे हैं। इससे लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और लोग ट्रेंडिंग डिजाइन भी आसानी से पहन सकते हैं। बदलती सोच के साथ बदल रहा ज्वेलरी मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय ज्वेलरी बाजार में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब लोग केवल निवेश नहीं बल्कि स्टाइल, सुविधा और टिकाऊ विकल्पों को ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहे हैं।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। खासतौर पर चांदी के दाम में जोरदार उछाल दर्ज किया गया, जबकि सोना भी मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों की नजर आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और सर्राफा बाजार के भाव पर बनी रही। MCX पर सोने-चांदी के ताजा भाव MCX पर सुबह करीब 9:58 बजे 5 जून डिलीवरी वाला सोना 407 रुपये की बढ़त के साथ 1,54,070 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इसमें 0.26 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 1,54,243 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंचा, जबकि इसका निचला स्तर 1,53,851 रुपये रहा। वहीं, 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में जबरदस्त तेजी देखी गई। चांदी का भाव 3,713 रुपये बढ़कर 2,82,024 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। कारोबार के दौरान चांदी ने 2,82,755 रुपये प्रति किलोग्राम का इंट्राडे हाई भी छुआ। सोमवार के मुकाबले मजबूत शुरुआत सोमवार को सोना 1,53,663 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि मंगलवार को इसकी शुरुआत 1,53,999 रुपये पर हुई। दूसरी ओर, चांदी सोमवार को 2,78,311 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी और मंगलवार को करीब 2,000 रुपये की तेजी के साथ 2,80,229 रुपये पर खुली। सर्राफा बाजार में भी चांदी चमकी अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, सोमवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी 3,700 रुपये महंगी होकर 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। हालांकि, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में 600 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी और इसका भाव 1,55,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया था।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, मिडिल ईस्ट में तनाव और घरेलू मांग बढ़ने के कारण सर्राफा बाजार में कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। 24 कैरेट सोना दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में डेढ़ लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है। दिल्ली-मुंबई में सोना रिकॉर्ड स्तर पर दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,52,880 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई, जबकि मुंबई में यह 1,52,680 रुपये रही। चेन्नई में सोने का भाव 1,53,840 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं लखनऊ में भी कीमत 1,52,880 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 22 कैरेट सोने की कीमत भी 1,40,000 से 1,41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कारोबारी दिन की तुलना में सोने की कीमत में 80 से 200 रुपये प्रति ग्राम तक की बढ़ोतरी हुई है। चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखा गया। देश में चांदी का भाव 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में चांदी की कीमत 2,70,100 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि नोएडा में यह 2,75,000 रुपये प्रति किलो रही। चेन्नई में चांदी का भाव 2,74,900 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच हालात बिगड़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा दुनिया के कई केंद्रीय बैंक, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक भी शामिल है, लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। घरेलू बाजार में शादी के सीजन के कारण गहनों की मांग बढ़ने से भी कीमतों को समर्थन मिल रहा है। कारोबारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। India Bullion and Jewellers Association (IBJA) के अनुसार, 6 मई को 24 कैरेट सोना 3,000 रुपये बढ़कर 10 ग्राम के लिए 1.51 लाख रुपये पर पहुंच गया। इससे पहले इसकी कीमत 1.48 लाख रुपये थी। वहीं, चांदी की कीमत में भी बड़ा उछाल देखने को मिला और यह 6,000 रुपये बढ़कर 2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। इस साल लगातार बढ़ रहे दाम साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में करीब 18,000 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। 31 दिसंबर 2025 को सोना 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.51 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह चांदी भी इस साल 16,000 रुपये महंगी हो चुकी है और 2.30 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.46 लाख रुपये तक पहुंच गई है। रिकॉर्ड स्तर से अभी नीचे हालांकि, मौजूदा कीमतें अभी भी अपने ऑलटाइम हाई से नीचे हैं। 29 जनवरी को सोना 1.76 लाख रुपये और चांदी 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। खरीदारी में बरतें सावधानी विशेषज्ञों के अनुसार, सोना खरीदते समय ग्राहकों को सावधानी बरतनी चाहिए। हमेशा Bureau of Indian Standards (BIS) हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें। साथ ही, खरीदारी से पहले विभिन्न स्रोतों से कीमत की जांच जरूर करें, क्योंकि कैरेट के अनुसार सोने की कीमत अलग-अलग होती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सोमवार, 20 अप्रैल को घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। Multi Commodity Exchange (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर करीब 1600 रुपये तक फिसल गया। 5 जून 2026 एक्सपायरी वाला सोना 1,53,158 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ओपन हुआ और सुबह 10 बजे के आसपास 1.03% की गिरावट के साथ करीब 1,53,018 रुपये पर ट्रेड करता दिखा। चांदी में भारी गिरावट चांदी की कीमतों में और भी ज्यादा गिरावट देखने को मिली। MCX पर सिल्वर फ्यूचर करीब 5,000 रुपये से अधिक गिर गया। 5 मई 2026 एक्सपायरी वाला चांदी वायदा 1.99% टूटकर करीब 2,53,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है। शहरों में सोने के ताजा भाव देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में भी नरमी देखने को मिली। • दिल्ली: 24 कैरेट – ₹1,55,440, 22 कैरेट – ₹1,42,500 • मुंबई: 24 कैरेट – ₹1,55,290, 22 कैरेट – ₹1,42,350 • चेन्नई: 24 कैरेट – ₹1,56,650, 22 कैरेट – ₹1,43,590 • कोलकाता: 24 कैरेट – ₹1,55,290, 22 कैरेट – ₹1,42,350 चांदी के रेट में भी गिरावट दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में चांदी 2,750 रुपये प्रति 10 ग्राम बिक रही है, जबकि चेन्नई में इसकी कीमत 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम है। निवेशकों के लिए संकेत विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार के संकेतों और डॉलर की मजबूती के चलते सोने-चांदी में दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और बाजार की चाल पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद घरेलू और वैश्विक सर्राफा बाजार (Bullion Market) में गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे सोना और चांदी दोनों के दाम प्रभावित हुए। चांदी में बड़ी गिरावट, सोना भी टूटा दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतों में 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। चांदी 2,47,000 रुपये से घटकर 2,45,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, 99.9% शुद्धता वाला सोना भी 300 रुपये गिरकर 1,55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। अमेरिका-ईरान वार्ता विफलता का असर विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म होने के बाद बाजार की धारणा कमजोर हुई। इससे डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में तेजी आई, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। इस मार्ग में संभावित सैन्य गतिविधियों और आपूर्ति बाधा की आशंका ने कच्चे तेल और सर्राफा बाजार दोनों में अस्थिरता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट वैश्विक बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली। हाजिर चांदी 2.09% गिरकर 74.31 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि सोना 4,722.26 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। निवेशकों में अनिश्चितता, आगे रुख वैश्विक घटनाओं पर निर्भर विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर की चाल आगे भी बाजार को प्रभावित करेगी। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद कुछ सुधार भी देखा गया है, लेकिन अस्थिरता बनी हुई है। मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के कारण बाजार बंद रहेगा, जिससे अगले सत्र में प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। Multi Commodity Exchange (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों के दाम नीचे फिसल गए। सोना करीब 0.63% गिरकर 1,51,686 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी 2.10% टूटकर ₹2,38,163 प्रति किलोग्राम पर आ गई। महानगरों में सोने के ताज़ा भाव देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिला। Delhi में 24 कैरेट सोना ₹15,261 प्रति ग्राम, 22 कैरेट ₹13,990 और 18 कैरेट ₹11,449 पर रहा। मुंबई , कोलकाता और बेंगलुरु Mumbai, Kolkata और Bengaluru में 24 कैरेट सोना ₹15,246 प्रति ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं Chennai में सोने की कीमत सबसे ज्यादा रही, जहां 24 कैरेट सोना ₹15,338 प्रति ग्राम तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर वैश्विक स्तर पर भी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 2% गिरकर 4,700 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया उतार-चढ़ाव के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाएं प्रमुख कारण हैं। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि सोना अब तक हालिया संघर्ष के दौरान 10% से ज्यादा गिर चुका है और आगे भी इसमें उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने और बाजार की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम की खबर और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बाद बुधवार को सर्राफा बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 3,200 रुपये उछलकर 1,56,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि चांदी 11,000 रुपये की तेज छलांग लगाकर 2,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इस उछाल ने निवेशकों का रुझान एक बार फिर कीमती धातुओं की ओर मोड़ दिया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव में नरमी और सुरक्षित निवेश की मांग ने इस तेजी को बल दिया। MCX और वैश्विक बाजार में भी सोने की कीमतों में मजबूती वायदा कारोबार में भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला सोना 3,007 रुपये या करीब 2% बढ़कर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में जून अनुबंध वाला सोना लगभग 129 डॉलर की तेजी के साथ 4,813.82 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर के कमजोर पड़ने से सोने की वैश्विक मांग बढ़ी है, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कच्चे तेल में गिरावट और अनिश्चितता से बढ़ी खरीदारी विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 15% गिरावट आई, जिससे बाजार की धारणा में सुधार हुआ। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही। जानकारों के अनुसार यह तेजी फिलहाल राहत रैली और शॉर्ट कवरिंग का असर भी हो सकती है। अगर भू-राजनीतिक हालात फिर बिगड़ते हैं तो कीमतों में और उछाल संभव है। कुछ विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि यदि वैश्विक हालात अनुकूल रहे, तो सोना आगे 1.59 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। सावधान ! लूटेरे भी घूम रहे डिलीवरी बॉय के भेष में डिलीवरी बॉय के भेष में लूटेरे सुन कर अजीब लग रहा है न। ऐसा नहीं कह रही कि सब डिलीवरी बॉय लूटेरे, चोर या फ्रॉड होते है लेकिन अक्सर डिलीवरी बॉय से जुड़े आपराधिक मामले का खबर हमलोग देखते रहते है। हाल ही में रांची के मोरहाबादी में एक ज्वेलरी दूकान से लूट का मामला सामने आया है जहां आरोपी डिलीवरी बॉय निकले। ऐसे में एक सवाल खड़ा होता है की क्या ऑनलाइन आर्डर पर निर्भर रहने वाले लोगो की सिक्योरिटी कहां गई ? क्यूंकि जहां लोग
नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-अमेरिका तनाव का असर अब भारतीय सर्राफा बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। इसी वजह से मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। चांदी में बड़ी टूट, सोना भी फिसला ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी की कीमत में ₹2000 प्रति किलोग्राम की गिरावट आई है। इसके बाद चांदी का भाव ₹2,40,000 प्रति किलो पर पहुंच गया। वहीं 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना भी ₹600 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,53,200 पर आ गया। इससे पहले यह ₹1,53,800 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वैश्विक बाजार में भी उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में अस्थिरता बनी रही। हाजिर सोना मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी में लगभग 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल बड़े जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक घटनाक्रमों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता जहां सोना-चांदी में गिरावट आई, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी। WTI क्रूड और ब्रेंट क्रूड दोनों में उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और गहरी हुई है। आगे क्या रहेगा रुख? विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बाजार की अगली दिशा अब पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की चाल और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शादी सीजन शुरू होने से पहले एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों में तेजी लौटती दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते निवेशक एक बार फिर सेफ हेवन यानी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है, जहां पिछले कुछ दिनों से सोना और चांदी दोनों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। आज क्या है सोने का ताजा भाव? 28 मार्च 2026 को देश के बड़े शहरों में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है। वहीं 22 कैरेट सोना लगभग ₹1.35 लाख और 18 कैरेट सोना करीब ₹1.11 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹1,48,220, 22 कैरेट ₹1,35,900 और 18 कैरेट ₹1,11,220 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। मुंबई, कोलकाता और हैदराबाद में 24 कैरेट सोना ₹1,48,090, 22 कैरेट ₹1,35,750 और 18 कैरेट ₹1,11,070 प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं चेन्नई में सोना थोड़ा महंगा है, जहां 24 कैरेट का भाव ₹1,49,020, 22 कैरेट ₹1,36,600 और 18 कैरेट ₹1,14,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। चांदी में भी लौटी मजबूती सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती देखने को मिली है। देश के कई शहरों में 10 ग्राम चांदी का भाव ₹2,450 से ₹2,500 के बीच बना हुआ है। यानी 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को करीब ₹24,500 से ₹25,000 तक खर्च करने पड़ सकते हैं। वहीं 1 किलो चांदी का औसत बाजार भाव लगभग ₹2.45 लाख के आसपास बना हुआ है। यह दिखाता है कि निवेशक सिर्फ सोने ही नहीं, बल्कि चांदी को भी सुरक्षित विकल्प मानकर खरीदारी कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।