नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने या इनमें निवेश करने की योजना बना रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा बाजार में गिरावट के चलते दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आ गए हैं। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख और घरेलू निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत में 10 ग्राम पर 680 रुपये की गिरावट आई है। इसके बाद सोने का औसत भाव घटकर ₹1,41,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। स्थानीय टैक्स और अन्य शुल्कों के कारण विभिन्न शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है। वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। प्रति किलोग्राम चांदी का भाव करीब ₹1,320 घटकर ₹2,18,690 के स्तर पर आ गया है। कुछ शहरों में खुदरा मांग बेहतर रहने के कारण चांदी के दाम ₹2,19,800 प्रति किलो तक बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते सोना करीब 0.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034.40 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी 0.34 प्रतिशत टूटकर 57.235 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा घरेलू बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी कीमतों में नरमी का एक प्रमुख कारण बनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव जारी रहता है तो आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों को बाजार की चाल पर नजर रखते हुए ही खरीदारी का फैसला करना चाहिए।
Zomato के सह-संस्थापक दीपेंदर गोयल की बहुप्रतीक्षित वियरेबल डिवाइस Temple एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इस डिवाइस को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी और अब इसकी लॉन्च टाइमलाइन को लेकर नई जानकारी सामने आई है। गोयल के अनुसार, यह डिवाइस अगले 6 से 12 महीनों के भीतर यानी 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक बाजार में लॉन्च की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इसकी अंतिम लॉन्च तारीख या कीमत की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। क्या है Temple डिवाइस? Temple एक बेहद कॉम्पैक्ट वियरेबल डिवाइस है, जिसे कनपटी (Temple Area) पर चिपकाकर पहना जाता है। इसका आकार फली (Bean) जैसा बताया गया है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस केवल सामान्य फिटनेस डेटा ही नहीं, बल्कि शरीर की मेटाबोलिक स्थिति (Metabolic State) को रियल-टाइम में मॉनिटर करने में सक्षम होगी। इसका उद्देश्य शरीर की ऊर्जा, रिकवरी और प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण बायोमार्कर्स का विश्लेषण करना है। हर किसी के लिए नहीं है यह डिवाइस दीपेंदर गोयल ने कहा कि Temple को शुरुआत से ही आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं बनाया गया है। उनके अनुसार, यह डिवाइस मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस एथलीट्स और ऐसे लोगों के लिए विकसित की जा रही है, जिन्हें अपने शरीर की मेटाबोलिक परफॉर्मेंस का गहराई से विश्लेषण करना होता है। गोयल ने यह भी कहा कि उन्होंने इस डिवाइस को सबसे पहले अपनी जरूरत को ध्यान में रखकर विकसित करना शुरू किया था और व्यवसाय उसका स्वाभाविक परिणाम है। लॉन्च में हुई देरी गोयल ने स्वीकार किया कि Temple प्रोजेक्ट अपनी तय समयसीमा से पीछे चल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों से वे इसकी लॉन्चिंग को लेकर उम्मीद जता रहे हैं, लेकिन तकनीकी विकास और परीक्षण के कारण इसमें देरी हुई। अब उनका अनुमान है कि अगले 6 से 12 महीनों के भीतर इसे बाजार में उतारा जा सकता है। संभावित कीमत कितनी होगी? रिपोर्ट्स के अनुसार Temple की संभावित कीमत लगभग 1,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1 लाख रुपये से कम) हो सकती है। हालांकि, कंपनी ने कीमत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की है। अंतिम कीमत लॉन्च के समय अलग हो सकती है। Apple Watch और Galaxy Ring से कितनी अलग? फिटनेस वियरेबल्स की दुनिया में पहले से Apple Watch, Samsung Galaxy Ring और अन्य स्मार्ट डिवाइस मौजूद हैं। लेकिन Temple का फोकस पारंपरिक फिटनेस ट्रैकिंग से आगे बढ़कर एडवांस मेटाबोलिक मॉनिटरिंग पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस— शरीर की मेटाबोलिक स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकती है। ऊर्जा स्तर (Energy Levels) का विश्लेषण कर सकती है। लैक्टिक एसिड जैसे एथलेटिक बायोमार्कर्स की निगरानी करने में सक्षम हो सकती है। प्रोफेशनल एथलीट्स और हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग करने वालों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यदि कंपनी अपने दावों के अनुसार इस तकनीक को सफलतापूर्वक बाजार में उतारती है, तो Temple प्रीमियम हेल्थ और फिटनेस वियरेबल्स सेगमेंट में एक अलग पहचान बना सकती है।
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। गुरुवार, 11 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है स्थिति? स्पॉट गोल्ड कारोबार के दौरान 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की कीमत 0.2 फीसदी गिरकर 4,063.87 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि स्पॉट सिल्वर 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ 63.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। एमसीएक्स पर सोना और चांदी घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,46,444 रुपये तक पहुंच गया। 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,35,505 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,30,493 रुपये तक आ गई। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 मुंबई ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 कोलकाता ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 चेन्नई ₹1,47,280 ₹1,35,000 ₹1,13,100 लखनऊ ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 पटना ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,380 जयपुर ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 भोपाल ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,280 सर्राफा बाजार में भी बड़ी गिरावट गुड रिटर्न्स के अनुसार, 24 कैरेट सोना ₹2,130 सस्ता होकर ₹1,45,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट सोने में ₹1,950 की गिरावट आई और इसका भाव ₹1,33,500 प्रति 10 ग्राम रह गया। 18 कैरेट सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,09,230 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी का भाव करीब ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट से खरीदारों को राहत मिल सकती है। हालांकि निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।
कीमती धातुओं के बाजार में आज फिर नरमी देखने को मिली है। Multi Commodity Exchange (MCX) पर शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए यह अहम अपडेट बन गया है। सोने में 1000 रुपये तक की गिरावट MCX पर 5 जून डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में ₹1,51,761 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जो आज गिरकर ₹1,50,750 तक पहुंच गया। सुबह 10:20 बजे यह करीब ₹589 (0.39%) की गिरावट के साथ ₹1,51,172 पर ट्रेड करता नजर आया। चांदी भी 2000 रुपये तक सस्ती चांदी की कीमतों में भी बड़ा झटका देखने को मिला। 5 मई डिलीवरी वाली चांदी ₹2,41,513 प्रति किलो से गिरकर ₹2,39,200 तक आ गई। सुबह के कारोबार में यह करीब ₹713 (0.30%) की गिरावट के साथ ₹2,40,800 पर ट्रेड कर रही थी। क्यों आई कीमतों में गिरावट? विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सोने-चांदी पर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर मिश्रित संकेत मिलने से निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सराफा बाजार में भी नरमी राष्ट्रीय राजधानी New Delhi के सराफा बाजार में भी गिरावट देखने को मिली। 24 कैरेट सोना करीब ₹1.57 लाख प्रति 10 ग्राम तक आ गया, जबकि चांदी ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास रही। प्रमुख शहरों में सोने के दाम (24 अप्रैल 2026) दिल्ली: 24K ₹153700 | 22K ₹140900 | 18K ₹115310 मुंबई: 24K ₹153550 | 22K ₹140750 | 18K ₹115160 कोलकाता: 24K ₹153550 | 22K ₹140750 | 18K ₹115160 चेन्नई: 24K ₹154480 | 22K ₹141600 | 18K ₹118100 पटना: 24K ₹153600 | 22K ₹140800 | 18K ₹115210 आगे किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगी। निवेशकों को फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में नरमी का रुख जारी है। निवेशकों के बदलते मूड और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव में कमी की खबरों का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। 23 अप्रैल को भी कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे खरीदारों को थोड़ी राहत मिली है। सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आज सोने के दाम में प्रति ग्राम लगभग 1 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट के सिलसिले को आगे बढ़ाती है। दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोना करीब 15,475 रुपये प्रति ग्राम के आसपास बना हुआ है। प्रति 10 ग्राम सोने के ताजा रेट: 24 कैरेट: ₹1,54,740 (– ₹10) 22 कैरेट: ₹1,41,840 (– ₹10) 18 कैरेट: ₹1,16,050 (– ₹10) 18 अप्रैल को बने हालिया उच्च स्तर की तुलना में सोने की कीमतों में अब अच्छी-खासी नरमी आ चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं आता, तब तक कीमतें इसी दायरे में बनी रह सकती हैं। प्रमुख शहरों में सोने के दाम (प्रति ग्राम) पटना: 24K ₹15,638 | 22K ₹14,335 दिल्ली: 24K ₹15,489 | 22K ₹14,199 मुंबई: 24K ₹15,474 | 22K ₹14,184 चेन्नई: 24K ₹15,545 | 22K ₹14,249 चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। आज चांदी करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हुई है। चांदी के ताजा रेट: 1 ग्राम: ₹264.90 100 ग्राम: ₹26,490 1 किलोग्राम: ₹2,64,900 अप्रैल की शुरुआत में जहां चांदी 2.55 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास थी, वहीं 18 अप्रैल को यह 2.75 लाख रुपये तक पहुंच गई थी। अब इसमें मुनाफावसूली देखने को मिल रही है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है। क्या यह खरीदारी का सही समय है? विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच हालात कुछ सामान्य होने से सोने की मांग पर दबाव पड़ा है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि, गहने खरीदते समय ग्राहकों को जीएसटी और मेकिंग चार्ज जैसी अतिरिक्त लागतों को ध्यान में रखना चाहिए, क्योंकि ये कीमतें बेस रेट होती हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।