Google Maps

User adding a new business location on Google Maps while the app verifies map information and business details.
Google Maps पर नई जगहों के नाम कैसे जुड़ते हैं? जानिए कौन देता है जानकारी और कैसे होता है वेरिफिकेशन

आज के समय में किसी नई जगह का पता ढूंढना हो, नजदीकी पेट्रोल पंप खोजना हो या किसी दुकान तक पहुंचना हो, तो ज्यादातर लोग Google Maps का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मैप्स पर नई सड़कें, दुकानें, अस्पताल, होटल या अन्य स्थानों की जानकारी आखिर आती कहां से है? क्या Google खुद यह सारी जानकारी जोड़ता है या इसमें आम लोगों की भी भूमिका होती है? आइए जानते हैं Google Maps पर नई जगहों के जुड़ने और उनके वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया। कई स्रोतों से जुटाई जाती है जानकारी Google Maps किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रहता। प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाली जानकारी कई अलग-अलग माध्यमों से एकत्र की जाती है, जिनमें शामिल हैं- स्थानीय व्यवसाय (Local Businesses) सरकारी रिकॉर्ड मैपिंग पार्टनर्स सार्वजनिक वेबसाइट्स Google की अपनी मैपिंग और सर्वे प्रक्रिया इन सभी स्रोतों से प्राप्त जानकारी को मिलाकर Google अपने मैप्स को लगातार अपडेट करता रहता है। बिजनेस मालिक खुद जोड़ सकते हैं अपनी लोकेशन यदि आपने नया बिजनेस शुरू किया है, तो आप Google Business Profile के माध्यम से अपनी दुकान, ऑफिस या संस्थान की जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। इस दौरान आपको निम्न जानकारी देनी होती है- पता (Address) फोन नंबर वेबसाइट काम करने का समय फोटो बिजनेस कैटेगरी जानकारी जमा होने के बाद Google उसकी जांच करता है। सत्यापन पूरा होने पर आपका बिजनेस Google Maps पर दिखाई देने लगता है। आम यूजर्स भी भेज सकते हैं नई जानकारी Google Maps की एक बड़ी खासियत यह है कि केवल बिजनेस मालिक ही नहीं, बल्कि आम यूजर्स भी नई जानकारी जोड़ सकते हैं। अगर किसी इलाके में नई सड़क, दुकान या कोई महत्वपूर्ण स्थान मैप्स पर नहीं दिख रहा है, तो यूजर- Add a Place Suggest an Edit जैसे फीचर्स का उपयोग करके Google को जानकारी भेज सकता है। यदि जांच के बाद जानकारी सही पाई जाती है, तो उसे Google Maps में जोड़ दिया जाता है। कैसे होती है वेरिफिकेशन? Google किसी भी नई जानकारी को बिना जांचे सीधे मैप्स पर नहीं दिखाता। वेरिफिकेशन के लिए कंपनी कई स्तरों पर जांच करती है, जिनमें शामिल हैं- एडवांस एल्गोरिदम मशीन लर्निंग सिस्टम मानव (Human) वेरिफिकेशन विभिन्न स्रोतों से डेटा का मिलान यदि एक ही जानकारी कई भरोसेमंद स्रोतों से मिलती है, तो उसके सही होने की संभावना अधिक मानी जाती है। गलत जानकारी मिलने पर क्या होता है? यदि कोई जानकारी भ्रामक, गलत या फर्जी पाई जाती है, तो Google उसे Maps से हटा भी सकता है। यही कारण है कि Google Maps लगातार अपडेट होता रहता है और समय के साथ उसकी सटीकता बेहतर होती जाती है। क्यों भरोसेमंद माना जाता है Google Maps? Google Maps की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा कारण यही है कि इसमें केवल एक स्रोत की जानकारी नहीं होती, बल्कि बिजनेस, सरकारी रिकॉर्ड, यूजर इनपुट और Google की तकनीक मिलकर डेटा को सत्यापित करती हैं। इसी वजह से दुनिया भर के करोड़ों लोग रोजमर्रा की यात्रा और नेविगेशन के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Google Maps app displaying AI-powered restaurant suggestions and food ordering options on a smartphone.
Google Maps में आएगा AI फूड ऑर्डर फीचर? पसंदीदा डिश ढूंढने से लेकर ऑर्डर तक करेगा मदद, जानिए पूरी जानकारी

Google Maps आने वाले समय में सिर्फ रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं रहेगा, बल्कि यह आपके लिए खाना ऑर्डर करने में भी मददगार बन सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, Google Maps के एंड्रॉयड ऐप के नए बैकएंड कोड में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि कंपनी एक नए AI आधारित फूड ऑर्डरिंग फीचर पर काम कर रही है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इस फीचर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 'Ask Maps to Order Food' फीचर के मिले संकेत रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google Maps Android ऐप के वर्जन 26.27.00 में "Ask Maps to Order Food" नाम से एक संभावित फीचर के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि यह सुविधा यूजर को सिर्फ आसपास के रेस्टोरेंट दिखाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी पसंद के अनुसार डिश चुनने और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाने में भी मदद करेगी। यह फीचर Google के Agentic AI विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सुझाव नहीं देता बल्कि यूजर के लिए कई जरूरी काम भी पूरा करने में सहायता करता है। कैसे काम कर सकता है नया AI फीचर? फिलहाल Google ने इस फीचर के काम करने के तरीके का खुलासा नहीं किया है। लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, यूजर अपनी पसंद, जैसे किसी खास डिश या खाने की कैटेगरी, AI को बताएगा। इसके बाद सिस्टम आसपास उपलब्ध रेस्टोरेंट्स, उनकी रेटिंग और अन्य जानकारी के आधार पर सबसे उपयुक्त विकल्प सुझा सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि AI ऑर्डर तैयार करने की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके लिए Google का Gemini AI मॉडल इस्तेमाल होगा या स्मार्टफोन की ऑन-डिवाइस AI तकनीक। ऑर्डर का अंतिम फैसला रहेगा यूजर के पास अगर यह फीचर लॉन्च होता है, तो AI केवल सुझाव देने और ऑर्डर तैयार करने में मदद करेगा। ऑर्डर को अंतिम रूप देने और भुगतान करने से पहले पूरी जानकारी यूजर के सामने दिखाई जा सकती है। इससे गलत डिश, गलत मात्रा या अनचाहे ऑर्डर जैसी समस्याओं से बचने में आसानी होगी। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा ध्यान AI आधारित इस सुविधा के साथ डेटा प्राइवेसी को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। बेहतर सुझाव देने के लिए सिस्टम को यूजर की पसंद, पहले किए गए सर्च और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण करना पड़ सकता है। हालांकि, Google ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कौन-सा डेटा इस्तेमाल किया जाएगा और उसकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा यह भी देखना दिलचस्प होगा कि AI रेस्टोरेंट्स की सिफारिश पूरी तरह यूजर की पसंद के आधार पर करेगा या प्रमोटेड विकल्प भी शामिल होंगे। Google Maps बन सकता है स्मार्ट AI असिस्टेंट यदि यह फीचर भविष्य में लॉन्च होता है, तो Google Maps केवल नेविगेशन और लोकेशन खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। AI की मदद से यह यूजर्स के रोजमर्रा के कई काम, जैसे पसंदीदा खाना ढूंढना, सही रेस्टोरेंट चुनना और ऑर्डर प्रक्रिया को आसान बनाना, एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा सकता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Young man uses AI to locate 25 ancestral land plots through digital records and mapping tools
AI की मदद से युवक ने खोज निकाली 25 पुश्तैनी जमीनें, वायरल हुई अनोखी कहानी

उत्तर प्रदेश के एक युवक की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस युवक ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपनी 25 पुश्तैनी जमीनों की सटीक लोकेशन खोज निकाली। यह मामला इस बात का उदाहरण बन गया है कि AI अब केवल चैटिंग, कंटेंट लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं का समाधान भी कर सकता है। मोहम्मदपुर गांव से जुड़े इस मामले में जाहिद खान नाम के युवक को अपने परिवार की विरासत में मिली जमीनों की सही जानकारी नहीं थी। जमीनें उनके परदादा से दादा, फिर पिता और बाद में उन्हें मिली थीं, लेकिन समय के साथ रिकॉर्ड्स इतने बिखर गए कि उनकी सटीक पहचान करना मुश्किल हो गया। सरकारी रिकॉर्ड्स बने बड़ी चुनौती जाहिद के अनुसार, जमीन से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध थे। इनमें तकनीकी शब्दावली और जटिल हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिसे समझना आसान नहीं था। इसके अलावा उन्होंने गांव में बहुत कम समय बिताया था, इसलिए जमीनों की वास्तविक स्थिति का भी कोई स्पष्ट अंदाजा नहीं था। हालांकि रिकॉर्ड्स डिजिटल रूप में मौजूद थे, लेकिन उन्हें समझना और आपस में जोड़ना आम व्यक्ति के लिए बेहद कठिन काम था। Claude AI ने संभाली जिम्मेदारी इस समस्या का समाधान निकालने के लिए जाहिद ने AI असिस्टेंट Claude का उपयोग किया। Claude के "Computer Use" फीचर की मदद से AI ने स्वयं सरकारी वेबसाइटों पर जाकर रिकॉर्ड्स खंगालना शुरू किया। AI ने हिंदी ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड का उपयोग करते हुए उनके पिता का नाम दर्ज किया और उससे जुड़े भूमि रिकॉर्ड्स की खोज की। इसके बाद परिवार के नाम पर दर्ज 25 अलग-अलग जमीनों के गाटा नंबर निकाल लिए। जटिल मैपिंग डेटा को बनाया आसान असल चुनौती तब सामने आई जब जमीनों की लोकेशन UTM (Universal Transverse Mercator) कोऑर्डिनेट्स में उपलब्ध थी। सामान्य व्यक्ति के लिए इन आंकड़ों को समझना लगभग असंभव था। लेकिन AI ने इन कोऑर्डिनेट्स को प्रोसेस कर उन्हें सामान्य GPS लोकेशन में बदल दिया। इसके बाद सभी जमीनों की सीमाओं और लोकेशन को जोड़कर एक विस्तृत डिजिटल नक्शा तैयार किया गया। Google Maps पर दिखीं सभी जमीनें AI ने सभी जमीनों की सीमा रेखाओं को पहचानकर KML फाइल तैयार की। इस फाइल को Google My Maps पर अपलोड किया गया, जिससे हर जमीन की सटीक GPS लोकेशन और उसकी सीमा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी। जाहिद का कहना है कि यदि AI की सहायता नहीं मिलती, तो उन्हें पुराने दस्तावेजों, स्थानीय लोगों और सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते। लेकिन AI ने यह पूरा काम बेहद कम समय में आसान बना दिया। सोशल मीडिया पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया जैसे ही जाहिद ने अपनी कहानी सोशल मीडिया पर साझा की, यह तेजी से वायरल हो गई। हजारों लोगों ने इसे AI के सबसे उपयोगी और व्यावहारिक उपयोगों में से एक बताया। कई यूजर्स का कहना है कि भारत में लाखों लोग जमीन, राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों की जटिल प्रक्रियाओं से जूझते हैं। ऐसे में AI आम नागरिकों के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों का भी मानना है कि भविष्य में AI सरकारी रिकॉर्ड्स, भूमि दस्तावेजों, भाषा संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं यह घटना दर्शाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल मनोरंजन या कंटेंट निर्माण का साधन नहीं रह गया है। सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यह लोगों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है और जटिल डिजिटल सिस्टम्स को आम नागरिकों के लिए आसान बना सकता है।  

surbhi मई 30, 2026 0
User saving car parking location on Google Maps in a large mall parking area
एयरपोर्ट या मॉल की पार्किंग में भूल जाते हैं कार? Google Maps का यह फीचर मिनटों में ढूंढ देगा लोकेशन

बड़ी पार्किंग में कार खड़ी करने के बाद उसकी लोकेशन भूल जाना बेहद आम बात है। खासकर एयरपोर्ट, मॉल, स्टेडियम या मल्टीलेवल पार्किंग में लौटते समय अक्सर लोग अपनी गाड़ी खोजते रह जाते हैं। ऐसे में Google Maps का एक शानदार फीचर आपकी यह परेशानी पूरी तरह खत्म कर सकता है। 'Save Parking Location' फीचर करेगा मदद Google Maps का 'Save Parking Location' फीचर आपकी कार की सटीक लोकेशन सेव कर देता है। गाड़ी पार्क करते ही आप उसकी जगह मैप पर मार्क कर सकते हैं। बाद में सिर्फ एक टैप में आप सीधे अपनी कार तक पहुंच सकते हैं। ऐसे करें इस्तेमाल गाड़ी पार्क करने के बाद Google Maps खोलें। मैप पर दिख रहे नीले लोकेशन डॉट पर टैप करें। "Save your parking" विकल्प चुनें। चाहें तो फ्लोर नंबर, पिलर नंबर या सेक्शन का नाम नोट करें। फोटो भी जोड़ सकते हैं। वापस आने पर सेव लोकेशन खोलें और Directions पर टैप करें। नोट्स और फोटो हैं सबसे बड़ा हथियार इंडोर या बेसमेंट पार्किंग में GPS कभी-कभी पूरी तरह सटीक नहीं होता। ऐसे में "B2, Pillar P17" जैसा नोट या पार्किंग स्पॉट की फोटो बाद में आपकी काफी मदद करती है। यही छोटी सी ट्रिक आपको लंबे समय तक भटकने से बचा सकती है। किन जगहों पर सबसे ज्यादा उपयोगी? यह फीचर खास तौर पर इन जगहों पर बेहद काम आता है: एयरपोर्ट की विशाल पार्किंग शॉपिंग मॉल स्टेडियम मल्टीलेवल बेसमेंट अनजान शहरों की भीड़भाड़ वाली सड़कें कार खोजने की टेंशन खत्म अब पार्किंग में घंटों भटकने की जरूरत नहीं। Google Maps का यह फीचर आपकी कार तक पहुंचने का सबसे आसान, तेज और स्मार्ट तरीका है। अगली बार जब भी किसी बड़ी पार्किंग में जाएं, इस फीचर का इस्तेमाल जरूर करें।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Google Maps AI search feature
10 साल बाद Google Maps में जुड़ा स्मार्ट AI सर्च फीचर, अब रास्ता ढूंढना हुआ और आसान

नई दिल्ली, एजेंसियां। टेक कंपनी गूगल ने अपने लोकप्रिय नेविगेशन प्लेटफॉर्म Google Maps में बड़ा अपडेट जारी किया है। कंपनी के अनुसार यह पिछले दस वर्षों में मैप्स का सबसे बड़ा बदलाव है। इस अपडेट के तहत दो नए एआई आधारित फीचर पेश किए गए हैं Ask Maps और Immersive Navigation। ये दोनों फीचर Gemini AI मॉडल पर आधारित हैं और यूजर्स के लिए लोकेशन खोजने और नेविगेशन को पहले से ज्यादा आसान बनाने के लिए तैयार किए गए हैं।गूगल का कहना है कि इन नए फीचर्स से लोग मैप्स का इस्तेमाल बिल्कुल नए तरीके से कर पाएंगे और उन्हें ज्यादा पर्सनलाइज्ड और स्मार्ट अनुभव मिलेगा। Ask Maps: सवाल पूछकर ढूंढें लोकेशन   नए अपडेट में शामिल Ask Maps फीचर एक स्मार्ट सर्च टूल की तरह काम करता है। इसमें यूजर सीधे मैप्स ऐप के अंदर सवाल पूछकर अपनी जरूरत के हिसाब से जगह ढूंढ सकते हैं।उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूजर पूछे कि “आज रात खेलने के लिए लाइट वाला पब्लिक टेनिस कोर्ट कहां मिलेगा?” या “ऐसी कॉफी शॉप बताओ जहां फोन चार्ज करने की सुविधा हो और ज्यादा भीड़ भी न हो”, तो यह फीचर तुरंत आसपास की संबंधित लोकेशन दिखा देगा।यूजर को सिर्फ Ask Maps बटन पर टैप करना होगा और इसके बाद मैप पर ही उन्हें पर्सनलाइज्ड जवाब और सुझाव मिल जाएंगे। यह फीचर यूजर के पिछले सर्च, सेव किए गए लोकेशन और उनकी पसंद को ध्यान में रखकर भी परिणाम दिखाता है। गूगल के अनुसार Ask Maps फीचर 30 करोड़ से अधिक स्थानों के डेटा और लगभग 50 करोड़ यूजर रिव्यू का विश्लेषण करता है। इसके साथ ही यूजर उसी इंटरफेस से रेस्टोरेंट बुकिंग, लोकेशन सेव करना, दोस्तों के साथ शेयर करना और सीधे नेविगेशन शुरू करना जैसे काम भी कर सकेंगे।यह फीचर भारत और अमेरिका में धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है। Immersive Navigation से मिलेगा 3D नेविगेशन दूसरा नया फीचर Immersive Navigation है, जो मैप्स के नेविगेशन अनुभव को पूरी तरह बदलने वाला माना जा रहा है। इसमें यूजर को रास्तों का 3D व्यू दिखाई देगा, जिसमें आसपास की इमारतें, सड़कें, फ्लाईओवर और अन्य संरचनाएं वास्तविक जैसी दिखाई देंगी। इस फीचर में ट्रैफिक लाइट, क्रॉसवॉक, स्टॉप साइन और रोड लेन जैसी महत्वपूर्ण चीजें भी साफ दिखाई देंगी। इससे ड्राइविंग के दौरान सही लेन चुनना और मोड़ लेना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा। गूगल के अनुसार यह फीचर स्ट्रीट व्यू और एरियल इमेज की मदद से अधिक सटीक विजुअल तैयार करता है। साथ ही इसमें स्मार्ट ज़ूम, ट्रांसपेरेंट बिल्डिंग ओवरले और ज्यादा प्राकृतिक आवाज में नेविगेशन निर्देश भी मिलेंगे।फिलहाल Immersive Navigation फीचर को शुरुआती चरण में अमेरिका में लॉन्च किया गया है और आने वाले महीनों में इसे अन्य देशों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।

Unknown मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 27, 2026 0