मुंबई, एजेंसियां। Reserve Bank of India (RBI) ने युवाओं के लिए शानदार करियर अवसर की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक ने अपने मुंबई स्थित केंद्रीय कार्यालयों के विभिन्न विभागों में यंग प्रोफेशनल (Young Professional) के 12 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 1.50 लाख रुपये का निश्चित स्टाइपेंड दिया जाएगा। यह नियुक्ति आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ युवाओं को बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से जोड़ने की पहल का हिस्सा है। भर्ती के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और क्लाइमेट चेंज रिस्क जैसे उभरते क्षेत्रों में विशेषज्ञों का चयन किया जाएगा। यह नियुक्ति पूरी तरह संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर होगी। प्रारंभिक अनुबंध तीन वर्ष का होगा, जिसे कार्य प्रदर्शन और बैंक की आवश्यकता के आधार पर अधिकतम पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। चयनित उम्मीदवारों को अगस्त से अक्टूबर 2026 के बीच कार्यभार संभालना होगा। आवेदन के लिए क्या क्या है ज़रुरत? आवेदन के लिए उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। आयु सीमा 21 से 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 6 जुलाई 2026 के आधार पर होगी। इच्छुक उम्मीदवार 6 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को 1.5 लाख रुपये RBI ने नियुक्ति से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी तय की हैं। चयनित उम्मीदवारों को 1.5 लाख रुपये के फिक्स स्टाइपेंड के अलावा कोई अतिरिक्त भत्ता, आवास या चिकित्सा सुविधा नहीं मिलेगी। स्टाइपेंड पर लागू कर (टैक्स) भी नियमानुसार काटा जाएगा। कर्मचारियों को निर्धारित कार्यालय समय के अनुसार कार्य करना होगा और आवश्यकता पड़ने पर सप्ताहांत या अवकाश के दिन भी काम करना पड़ सकता है, जिसके लिए अलग से भुगतान नहीं होगा। इसके अलावा, वर्ष में 15 दिनों का अवकाश मिलेगा, जिसे अगले वर्ष के लिए आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा। बिना सूचना लगातार आठ दिन अनुपस्थित रहने पर अनुबंध समाप्त किया जा सकता है। चयन के बाद उम्मीदवारों को मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट और गोपनीयता संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 के लिए एडमिट कार्ड जारी करने की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बोर्ड ने पहले ही अभ्यर्थियों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी है और अब उम्मीदवारों को प्रवेश पत्र का इंतजार है। यह भर्ती परीक्षा 8 जून से 10 जून 2026 तक आयोजित की जाएगी, जिसके जरिए कुल 32,679 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। अलग-अलग तिथियों पर जारी होंगे एडमिट कार्ड बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा तिथि के आधार पर एडमिट कार्ड अलग-अलग दिनों में उपलब्ध कराए जाएंगे। 8 जून की परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार 5 जून से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। 9 जून की परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र 6 जून को जारी होगा, जबकि 10 जून की परीक्षा के उम्मीदवार 7 जून से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर पाएंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय पर प्रवेश पत्र डाउनलोड कर उसमें दर्ज सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच कर लें। दो पालियों में होगी परीक्षा यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा तीन दिनों तक दो-दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक होगी। परीक्षा ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। बोर्ड ने उम्मीदवारों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी है, क्योंकि देर से आने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। एडमिट कार्ड में रहेंगी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रवेश पत्र में उम्मीदवार का नाम, रोल नंबर, पंजीकरण संख्या, फोटो, हस्ताक्षर, जन्मतिथि, परीक्षा तिथि, शिफ्ट, परीक्षा केंद्र का नाम और पता सहित परीक्षा दिवस से जुड़े दिशा-निर्देश दर्ज होंगे। यदि किसी अभ्यर्थी को एडमिट कार्ड में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो उसे तुरंत संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना होगा। ऐसे करें डाउनलोड उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर “UP Police Constable Admit Card 2026” लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद पंजीकरण संख्या या रोल नंबर और जन्मतिथि दर्ज कर लॉगिन करें। सभी विवरण भरने के बाद एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा, जिसे डाउनलोड कर प्रिंट निकालना आवश्यक होगा। भर्ती बोर्ड ने परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम भी किए हैं।
रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के तहत भाषा के स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य पद के लिए 22 अतिरिक्त अभ्यर्थियों का चयन किया है। आयोग ने शुक्रवार को इसका अतिरिक्त परिणाम जारी करते हुए चयनित अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित की। इस फैसले के बाद कई अभ्यर्थियों को राहत मिली है। आयोग ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में संशोधित परिणाम जारी किया गया है। इसके कारण 12 अभ्यर्थियों के आवंटित जिले बदल गए हैं। इनमें कुछ उम्मीदवारों की श्रेणी (कोटि) में भी परिवर्तन किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि विभिन्न मामलों की सुनवाई अभी न्यायालय में लंबित है, इसलिए अंतिम आदेश के बाद परिणाम में आगे भी संशोधन संभव है। प्रमाणपत्र नहीं मिलने से कुछ परिणाम लंबित JSSC के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने के कारण उनके परिणाम फिलहाल लंबित रखे गए हैं। वहीं भाषा शिक्षक भर्ती परीक्षा के 15 सितंबर 2025 को प्रकाशित परिणाम में टंकण त्रुटि के कारण एक गलत पंजीयन संख्या शामिल हो गई थी। आयोग ने अब पंजीयन संख्या 113348001 को परिणाम सूची से हटा दिया है। ANM परीक्षा का बायोमेट्रिक सत्यापन 2 जून को इधर, झारखंड एएनएम प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के तहत जिन अभ्यर्थियों का तकनीकी कारणों से बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाया था, उनका सत्यापन अब 2 जून को कराया जाएगा। आयोग ने सूचना जारी कर बताया कि नामकोम स्थित JSSC कार्यालय में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक यह प्रक्रिया पूरी होगी। अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
रांची। झारखंड में 2532 पारा मेडिकल पदों पर भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) द्वारा 2023 में शुरू की गई इस नियुक्ति प्रक्रिया को विभागीय स्तर पर अधियाचना वापस लिए जाने के कारण बीच में ही रद्द कर दिया गया। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। भर्ती रद्द होने से युवाओं में निराशा इस बहाली के तहत फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे तकनीशियन और परिचारिका ग्रेड-ए जैसे पद भरे जाने थे। आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और उम्मीदवार परीक्षा की तैयारी में जुटे थे, लेकिन अचानक भर्ती रद्द होने से उन्हें बड़ा झटका लगा। कई अभ्यर्थी पिछले 3-4 वर्षों से इस अवसर का इंतजार कर रहे थे। अब नई भर्ती की कोई समयसीमा तय नहीं होने से युवाओं में असमंजस और नाराजगी बढ़ गई है। अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी राज्य के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से फार्मासिस्टों के कई पद खाली हैं, जिससे दवा वितरण, स्टॉक प्रबंधन और जांच सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। नियमित नियुक्ति नहीं होने से मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता गिर रही है। सरकार पर उठे सवाल, नई भर्ती का इंतजार भर्ती प्रक्रिया रद्द होने के बाद सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आया है। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और योजना पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द नई बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो इसका असर लंबे समय तक स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनता पर पड़ सकता है।फिलहाल, अभ्यर्थी और स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।