रांची। नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास का विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, खनन और आधारभूत संरचना के क्षेत्रों में विशेष सहयोग की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि विकसित भारत-2047 का महत्वपूर्ण साझेदार बनना चाहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड ने देश की औद्योगिक प्रगति में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन राज्य ने विस्थापन और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर ही वास्तविक विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय मदद की मांग की। राज्य की चुनौतियां सामने रखीं। उन्होंने बताया कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है, फिर भी पोषण अभियान और सरकार की ‘सामार’ योजना के जरिए कुपोषण और स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी आई है। सभी बच्चों को प्रतिदिन एक अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस से अब आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयन होने लगे हैं। उन्होंने केंद्र से पीएमश्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा विभिन्न शैक्षणिक योजनाओं को एकीकृत करने का आग्रह किया। कौशल विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है, जबकि बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम के तहत राज्य के अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी स्वास्थ्य सेवाओं पर मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत स्तरीय दवा दुकान योजना के तहत राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित हो रही हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि और नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति में तेजी लाने का आग्रह किया। साथ ही राज्य में एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की योजना की भी जानकारी दी। खेलों में झारखंड एक्सीलेंट और बेहतरी की संभावना खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, एथलेटिक्स और तीरंदाजी में झारखंड की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हॉकी एवं फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और खेल संघों में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। सिंचाई में सहयोग की जरूरत कृषि और जल संसाधन के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं तथा बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ में फलदार पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन की लंबित राशि जल्द उपलब्ध कराने और सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की। सीएम हेमंत सोरेन के संबोधन की 5 मुख्य बाते मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक झारखंड को केवल खनिज आधारित राज्य नहीं, बल्कि Manufacturing Hub, Green Economy और Knowledge Economy के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षा और आंगनबाड़ी पर जोर राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से 15 हजार के पास भवन नहीं है, फिर भी कुपोषण में कमी आई है। सरकार 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवन बना रही है और 80 CM Schools of Excellence के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार झारखंड हर साल 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और AI, EV, Robotics जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष फोकस है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की पहल पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। राज्य AI-enabled Digital State Health Profile बनाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार हो सके। केंद्र से वित्तीय और विकास संबंधी मांगे मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की 6,000 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने तथा झारखंड में उद्योग, खेल, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए अधिक केंद्रीय सहयोग की मांग की।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के कार्यों की व्यापक समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए और विभिन्न परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया। छात्रवृत्ति और साइकिल योजना पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री ने छात्रवृत्ति योजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए लाभुकों तक समय पर सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले वर्ष साइकिल वितरण योजना से पहले कल्याण, उद्योग और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर राज्य में ही साइकिल उद्योग लगाने की संभावनाओं पर विस्तृत योजना तैयार करने को कहा। साथ ही दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए ट्राई-साइकिल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी मांगा। हॉस्टल और स्कूलों के विकास पर जोर बैठक में रांची, पलामू सहित विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन छात्रावासों की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और निर्धारित समयसीमा में निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने आश्रम स्कूलों को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा। खेल, कौशल विकास और रोजगार योजनाओं की समीक्षा मुख्यमंत्री ने कल्याण विभाग के स्कूलों में जिला एवं राज्य स्तरीय इंटर-स्कूल खेल प्रतियोगिताएं नियमित रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना (CMEGP) की समीक्षा करते हुए लाभुकों से ऑनलाइन संवाद भी किया और योजना के प्रभाव का मूल्यांकन कर आगे की रणनीति प्रस्तुत करने को कहा। वन अधिकार, स्वास्थ्य और कौशल प्रशिक्षण पर भी निर्देश सीएम ने वन अधिकार पट्टा वितरण की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए "अबुआ बीर अबुआ दिशोम" अभियान में तेजी लाने को कहा। कल्याण विभाग के अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ संयुक्त कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही कल्याण गुरुकुल से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट, नर्सिंग स्कूलों में युवकों की भागीदारी बढ़ाने और एक ड्राइविंग इंस्टीट्यूट स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रांची। झारखंड मंत्रालय में सोमवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच राज्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।मुलाकात के दौरान अन्नपूर्णा देवी ने कोडरमा जिले के हजारों छात्र-छात्राओं से जुड़े एक अहम विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि छात्रों को Vinoba Bhave University से स्थानांतरित कर Sir J.C. Bose University से संबद्ध किए जाने के प्रस्ताव के कारण कई शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस विषय को लेकर पहले भी पत्राचार और मुलाकात के माध्यम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री विद्यार्थियों के हितों को दी प्राथमिकता केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में सकारात्मक पहल करेंगे, ताकि छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।बैठक में राज्य में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से आम लोगों तक पहुंचाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने राज्य के विकास, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई, जिसमें जनहित और विकास से जुड़े विषय प्रमुख रूप से केंद्र में रहे।
रांची। हेमंत सोरेन से शनिवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में ओडिशा के मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का स्वागत और अभिनंदन करते हुए अपने क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न सामाजिक, विकासात्मक और जनहित के मुद्दों को उनके समक्ष रखा। झारखंड और ओडिशा बैठक में झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने क्षेत्र की जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं से जुड़े कई सुझाव भी मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनहित और क्षेत्रीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए मुद्दों और सुझावों पर सकारात्मक एवं गंभीरता से विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास और वहां रहने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई इस मुलाकात के दौरान भविष्य में भी संवाद और सहयोग को मजबूत बनाए रखने पर सहमति बनी। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए क्षेत्रीय विकास के लिए निरंतर सहयोग की उम्मीद जताई।
रांची। झारखंड में JTET 2026 भाषा विवाद को लेकर गठित मंत्रियों की कमेटी की पहली बैठक रविवार को हुई। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, सुदिव्य कुमार सोनू और योगेंद्र प्रसाद शामिल हुए। करीब दो घंटे चली बैठक में भाषा विवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों को दिए गए अहम निर्देश बैठक के बाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पहली बैठक काफी सकारात्मक रही। कमेटी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे JTET भाषा विवाद से जुड़े सभी तथ्य, दस्तावेज और आवश्यक जानकारी अगली बैठक में प्रस्तुत करें। सरकार नई नियमावली की समीक्षा कर रही है और जिन बिंदुओं पर विवाद है, उन पर विस्तार से विचार किया जाएगा। नियमावली में सुधार पर मंथन मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि नई JTET नियमावली में किन-किन जगहों पर सुधार की आवश्यकता है, इसे लेकर विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि अगली बैठक की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कमेटी इस शुक्रवार को दोबारा बैठक कर सकती है। क्या है पूरा विवाद? JTET 2026 को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब हेमंत सोरेन सरकार ने नई नियमावली को मंजूरी दी। नई सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा श्रेणी से बाहर कर दिया गया, जबकि 2016 की JTET परीक्षा में ये भाषाएं शामिल थीं। कई जिलों में विरोध पलामू, गढ़वा, गोड्डा, देवघर और दुमका जैसे जिलों में बड़ी संख्या में लोग इन भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भाषाओं को सूची से हटाने पर राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने समाधान के लिए पांच मंत्रियों की कमेटी गठित की, जिसकी पहली बैठक अब संपन्न हुई है।
रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सत्ताधारी दल Jharkhand Mukti Morcha (झामुमो) ने इस मुद्दे पर अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए 21 और 22 अप्रैल को रांची में अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल होंगे। बैठक में राज्यभर के जिलों से चुने गए पदाधिकारियों को बुलाया गया है, ताकि जमीनी स्तर पर ठोस रणनीति बनाई जा सके और SIR प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके। बिहार और बंगाल से सीखने की तैयारी झामुमो इस मुद्दे पर बिहार और पश्चिम बंगाल के हालिया अनुभवों से सीख लेने की योजना बना रहा है। पार्टी का कहना है कि इन राज्यों में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने की शिकायतें सामने आई थीं, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ा था। गरीब और आदिवासी अधिकारों पर चिंता पार्टी के महासचिव विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया के जरिए गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोगों के अस्तित्व और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भाजपा पर निशाना, कार्यकर्ताओं को अलर्ट झामुमो ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसकी नीतियां गरीब वर्ग को कमजोर करने वाली हैं। पार्टी ने दावा किया कि कुछ राज्यों में बड़ी संख्या में राशन कार्ड रद्द किए जाने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। इसके साथ ही झामुमो ने अपने कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रह जाए। राज्य की राजनीति में बढ़ी हलचल SIR को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। झामुमो इसे अधिकार और सम्मान की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है, जबकि विपक्षी दल इस पर अलग रणनीति अपना सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।