Gumla News

Ranchi Gumla Highway Accident
रांची-गुमला हाईवे पर भीषण टक्कर, बोलेरो और ऑटो पलटे, 13 घायल

रांची। रांची-गुमला मुख्य मार्ग (एनएच-43) पर शुक्रवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में 13 लोग घायल हो गए। इटकी थाना क्षेत्र के पलमा पेट्रोल पंप के समीप तेज रफ्तार बोलेरो ने आगे चल रहे सवारी ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन सड़क किनारे पलट गए और उनमें सवार यात्री अंदर फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय ग्रामीण तथा राहगीर तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।   स्थानीय लोगों ने बचाई घायलों की जान ग्रामीणों और राहगीरों ने पलटे वाहनों में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को तत्काल बेड़ो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। सूचना मिलते ही इटकी थाना की पुलिस, बेड़ो पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करते हुए दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाया और कुछ देर के लिए बाधित यातायात को फिर से सामान्य कराया।   तीन गंभीर घायलों को रिम्स भेजा गया बेड़ो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने तीन घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर कर दिया। अन्य घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में जारी है। हादसे में बोलेरो और ऑटो दोनों वाहनों में सवार लोग घायल हुए हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।   पुलिस ने शुरू की हादसे की जांच प्राथमिक जांच में हादसे का कारण बोलेरो की तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना माना जा रहा है। इटकी पुलिस ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दुर्घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती से नियंत्रण और नियमित निगरानी की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Jewelry Robbery in Gumla
गुमला में ज्वेलरी कारोबारी से हथियार के बल पर लूट, 15 से 20 लाख रुपये के आभूषण लेकर फरार हुए बदमाश

गुमला। झारखंड के गुमला जिले में अपराधियों ने एक बार फिर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए ज्वेलरी कारोबारी से लाखों रुपये के आभूषण लूट लिए। यह घटना पालकोट मुख्य बाजार की है, जहां मंगलवार देर शाम माही ज्वेलर्स के संचालक मनीष सोनी को तीन हथियारबंद अपराधियों ने निशाना बनाया। वारदात के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।   घात लगाकर बैठे थे तीन बदमाश जानकारी के अनुसार, मनीष सोनी दुकान बंद कर मोटरसाइकिल से अपने घर पालकोट बस्ती लौट रहे थे। इसी दौरान भीमो कंसारी के घर के पास पहले से घात लगाए बैठे तीन अपराधियों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने पिस्तौल दिखाकर उन्हें धमकाया और सोने-चांदी के आभूषणों से भरा बैग छीन लिया। कारोबारी द्वारा विरोध किए जाने पर अपराधियों ने हवाई फायरिंग कर दी, जिससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।   15 से 20 लाख के आभूषण लूटे जाने का अनुमान वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों अपराधी एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर पालकोट बस स्टैंड की ओर से गुमला की दिशा में फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पालकोट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। गुमला के पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कारोबारी के अनुसार लूटे गए जेवरात की कीमत लगभग 15 से 20 लाख रुपये है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।   पहले भी बन चुकी है माही ज्वेलर्स निशाना स्थानीय लोगों के अनुसार, इससे पहले भी माही ज्वेलर्स की दुकान में लूट की घटना हो चुकी है। लगातार दूसरी बार एक ही प्रतिष्ठान को निशाना बनाए जाने से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस का कहना है कि अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है और सभी पहलुओं पर जांच जारी है। घटना के बाद कारोबारियों में भी भय का माहौल है और उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Snakebite Cases in Gumla
गुमला में सर्पदंश का कहर, 125 दिनों में 83 लोग बने शिकार

गुमला। बरसात के मौसम के साथ झारखंड के गुमला जिले में सर्पदंश के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 मार्च से 3 जुलाई 2026 के बीच 125 दिनों में जिले में सर्पदंश के 83 मामले सामने आए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराया है तथा लोगों से सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए अस्पताल पहुंचने की अपील की है।   बिशुनपुर में सबसे अधिक मामले स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिशुनपुर प्रखंड में सबसे अधिक 19 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बसिया में 15 मामले सामने आए, जबकि गुमला सदर अस्पताल में 35 सर्पदंश पीड़ितों का इलाज किया गया। भरनो में तीन, रायडीह, सिसई और पालकोट में दो-दो, जबकि चैनपुर और घाघरा में एक-एक मामला दर्ज हुआ है। वर्तमान में जिले में कुल 1,380 एंटी स्नेक वेनम वायल उपलब्ध हैं। इनमें 595 वायल जिला अस्पताल गुमला में सुरक्षित रखी गई हैं, जबकि पालकोट, बिशुनपुर, भरनो, बसिया, सिसई, कामडारा, रायडीह, घाघरा, चैनपुर और डुमरी के स्वास्थ्य केंद्रों में भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।   सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी ने बताया कि बरसात के मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचें, क्योंकि समय पर एंटी स्नेक वेनम मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।   शुक्रवार को पालकोट और घाघरा प्रखंड में चार लोग जहरीले सांप के काटने से घायल हो गए। सभी को गुमला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स रेफर किया गया। अन्य तीन मरीजों का इलाज जारी है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Tragic Incident Gumla
गुमला में हृदयविदारक घटना, महिला ने दो मासूम बच्चों के साथ की आत्महत्या

गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। घाघरा थाना क्षेत्र के मनातू गांव में एक महिला ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और स्तब्धता का माहौल है। मृतकों की पहचान परदेशनी कुमारी (27 वर्ष), उनके पांच वर्षीय पुत्र अंश उरांव और चार वर्षीय पुत्री आशमानी कुमारी के रूप में हुई है।   परिजनों के अनुसार परिजनों के अनुसार, परदेशनी कुमारी पिछले लगभग आठ महीनों से मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं और उनका इलाज रांची के कांके स्थित संस्थान में चल रहा था। महिला के पति जगन्नाथ उरांव ने बताया कि बुधवार दोपहर उनकी पत्नी दोनों बच्चों को साथ लेकर घर से निकली थीं। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वे वापस नहीं लौटीं तो परिवार के लोगों को चिंता हुई और उनकी तलाश शुरू की गई।   खोजबीन के दौरान हुआ दर्दनाक खुलासा परिजनों और ग्रामीणों द्वारा आसपास खोजबीन की गई। इसी दौरान महिला के पति ने घर के पास स्थित कुएं में झांककर देखा, जहां पानी में कपड़े जैसा कुछ दिखाई दिया। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से कुएं की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान सबसे पहले एक बच्चे का शव दिखाई दिया। बाद में महिला और दूसरे बच्चे के शव भी कुएं से बाहर निकाले गए। घटना की जानकारी मिलते ही घाघरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया है।   जांच में जुटी पुलिस एसडीपीओ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही घटना के कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव में मातम का माहौल है और लोग इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Gumla Murder
डायन-बिसाही के शक में वृद्ध की हत्या, आरोपी फरार

गुमला। झारखंड के गुमला जिले के सदर थाना क्षेत्र के मुरकुंडा पंचायत अंतर्गत कोटेनगसेरा गांव में अंधविश्वास से जुड़ी एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां डायन-बिसाही के आरोप में 65 वर्षीय पालु खड़िया की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस दौरान उनकी पत्नी सुगी देवी पर भी हमला किया गया, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहीं। पूरी रात उन्होंने गांव के आसपास छिपकर बिताई और सुबह घर लौटने पर पति को मृत पाया।   जानकारी के अनुसार, पड़ोसी बहुरा उरांव के परिवार के कुछ सदस्य बीमार चल रहे थे। बीमारी का कारण जानने के लिए एक भगत को बुलाया गया, जिसने कथित तौर पर पालु खड़िया और उनकी पत्नी पर डायन-बिसाही का आरोप लगाया। इसके बाद मामला हिंसक हो गया और उन्हें घर बुलाकर मारपीट की गई।   घर बुलाकर की गई बेरहमी से पिटाई ग्रामीणों के मुताबिक, बहुरा उरांव ने दंपति को अपने घर बुलाया और डायन होने का आरोप लगाते हुए बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान पालु खड़िया को दीवार पर पटक दिया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और वे बेहोश हो गए। सुगी देवी के साथ भी मारपीट की गई, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर वह भाग निकलीं।   रातभर लाश के पास रहा माहौल, आरोपी फरार महिला के भागने के बाद गंभीर रूप से घायल पालु खड़िया को घर लाकर छोड़ दिया गया। समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। सुबह जब सुगी देवी वापस लौटीं, तो उन्होंने अपने पति को मृत पाया। घटना के बाद मुख्य आरोपी बहुरा उरांव गांव से फरार हो गया है।   सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है।   गांव में दहशत, अंधविश्वास पर उठे सवाल इस घटना के बाद गांव में तनाव और भय का माहौल है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला एक बार फिर समाज में फैले अंधविश्वास और डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा की भयावह सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें आज भी निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ती है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
गुमला में अंधविश्वास की आड़ में परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप

गुमला। गुमला जिले के बरगांव बरवाटोली गांव में डायन-बिसाही के आरोप में एक बुजुर्ग परिवार को प्रताड़ित किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने गांव के एक व्यक्ति पर लगातार अंधविश्वास फैलाने और सामाजिक रूप से बदनाम करने का आरोप लगाया है। मामला बढ़ने के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका। अब पीड़ित परिवार ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।   बुजुर्ग ने थाना में दिया आवेदन गांव निवासी 63 वर्षीय विजय गोप ने गुमला थाना में आवेदन देकर बताया कि गांव के महतो उरांव अपनी बेटी और नाती की पूर्व में हुई मौत के लिए उन्हें और उनके परिवार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि महतो उरांव लगातार उन्हें “डायन-बिसाही” कहकर प्रताड़ित करते हैं। विजय गोप ने यह भी कहा कि पड़ोसी माडु सिंह और उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी को भी इस मामले में बेवजह बदनाम किया जा रहा है। पीड़ित परिवार के अनुसार, बार-बार डायन कहे जाने से समाज में उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है और गांव में तनाव का माहौल बन गया है।   पंचायत में नहीं बनी सहमति मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव में ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई। पंचायत में दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने डायन-बिसाही जैसी कुप्रथा को अंधविश्वास बताते हुए आरोपी को भविष्य में ऐसी बातें नहीं करने की सलाह दी। हालांकि आरोप है कि पंचायत के दौरान महतो उरांव भड़क गए और ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने पंचायत की बात मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि उनकी बेटी की मौत “जादू-टोना” के कारण हुई थी।   पुलिस जांच में जुटी पंचायत विफल होने के बाद विजय गोप ने थाना पहुंचकर कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है।

Unknown मई 16, 2026 0
boundary dispute in Gumla
गुमला में सीमांकन करने पहुंची अंचल कर्मियों पर ग्रामीणों का हमला

गुमला। गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड के केड़ग गांव में जमीन सीमांकन के दौरान अंचल कर्मियों पर ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना में एक राजस्व कर्मचारी घायल हो गया, जबकि अन्य कर्मियों को मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। बताया जा रहा है कि स्थिति उस समय बिगड़ी जब कर्मचारी सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने पहुंचे थे।   जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार, गांव निवासी शिव प्रसाद साहू के आवेदन पर अंचलाधिकारी के निर्देश के बाद चैनपुर अंचल की टीम जमीन का सीमांकन करने के लिए गांव पहुंची थी। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने सीमांकन का विरोध शुरू कर दिया। विरोध धीरे-धीरे उग्र हो गया और ग्रामीणों ने कर्मचारियों पर हमला कर दिया। इस दौरान एक महिला ने राजस्व कर्मचारी सुजीत कुमार सिंह को चप्पल से पीट दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि कर्मचारियों को वहां से भागना पड़ा, जबकि कुछ ग्रामीणों ने उनका पीछा कर मारपीट भी की।   मौके पर पहुंची पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि विवाद के कारण सीमांकन कार्य पूरा नहीं हो सका और टीम को बिना काम किए लौटना पड़ा। इस घटना के बाद राजस्व कर्मियों ने संबंधित थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।इस घटना के बाद अंचल कर्मियों में आक्रोश और भय का माहौल है। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं सरकारी कार्यों में बाधा उत्पन्न करती हैं और दूरदराज क्षेत्रों में काम करना जोखिम भरा हो गया है। कर्मियों ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

Unknown मई 1, 2026 0
Gumla crime review meeting
गुमला में अपराध समीक्षा बैठक: त्योहारों के बाद कानून-व्यवस्था की समीक्षा, मामलों में तेजी के निर्देश

गुमला। जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर पुलिस प्रशासन ने समीक्षा बैठक आयोजित की। पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमां ने चंदाली स्थित कार्यालय में मासिक अपराध समीक्षा बैठक की, जिसमें विभिन्न मामलों की प्रगति का आकलन करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।   त्योहारों के संचालन पर हुई समीक्षा बैठक में हाल ही में संपन्न हुए नगरपालिका चुनाव, होली, सरहुल, ईद और रामनवमी के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई। इन आयोजनों के शांतिपूर्ण संपन्न होने पर अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन किया गया।   गंभीर अपराधों पर प्रगति की जांच बैठक के दौरान हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, POCSO और एससी-एसटी से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। साथ ही लूट और गृहभेदन जैसे मामलों में अब तक की कार्रवाई का आकलन करते हुए लंबित मामलों को शीघ्र निष्पादित करने के निर्देश दिए गए।   नशा और लंबित वारंट पर कार्रवाई की समीक्षा अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही लंबित वारंट, कुर्की और इस्तेहार के निष्पादन की प्रगति पर चर्चा हुई और इसे तेज करने के निर्देश दिए गए।   जनसेवा से जुड़े मामलों के निपटारे पर जोर सूचना अधिकार, जन शिकायत, पासपोर्ट और चरित्र सत्यापन से संबंधित लंबित आवेदनों के निष्पादन की समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन मामलों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने को कहा गया।   सामाजिक अपराधों पर जागरूकता अभियान की समीक्षा डायन प्रथा, मानव तस्करी, पलायन और महिलाओं से जुड़े अपराधों की रोकथाम को लेकर चल रहे जागरूकता अभियानों की समीक्षा की गई और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।   सड़क सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर चर्चा बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की समीक्षा की गई। हेलमेट जांच, नशे में ड्राइविंग और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर की गई कार्रवाई का आकलन किया गया। साथ ही जमानत पर छूटे अपराधियों की निगरानी व्यवस्था को सख्त रखने पर जोर दिया गया।   नक्सल गतिविधियों और अवैध खनन पर नजर नक्सल गतिविधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई, खुफिया तंत्र की स्थिति और अवैध खनन पर नियंत्रण को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को इन मामलों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।   प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन पिछले महीने के कार्यों के आधार पर थाना प्रभारियों और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया। कमजोर प्रदर्शन करने वालों को चेतावनी दी गई, जबकि बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया गया।

Unknown मार्च 30, 2026 0
Theft in Gumla with valuables
गुमला में बड़ी चोरी: बंद घर को बनाया निशाना, 18 लाख के गहने और नकदी लेकर फरार हुए चोर

गुमला: झारखंड के गुमला शहर के रामनगर इलाके में चोरी की एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां अज्ञात चोरों ने एक बंद घर को निशाना बनाकर लाखों की संपत्ति उड़ा ली। इस वारदात के बाद पूरे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। दरवाजा तोड़कर घर में घुसे चोर पीड़िता मधुछन्दा सेनगुप्ता, जो एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं, ने बताया कि घटना के समय घर के सभी सदस्य बाहर गए हुए थे। इसी मौके का फायदा उठाकर चोरों ने मुख्य दरवाजा तोड़ दिया और घर के अंदर घुस गए। इसके बाद उन्होंने अलमारी और अन्य जगहों को खंगालते हुए कीमती सामान चोरी कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने सदर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गहनों से लेकर नकदी तक सब कुछ गायब चोरी किये गए सामानों में सोने के दो नेकलेस, पांच लॉकेट, कंगन, झुमका, बाली, टॉप्स, पांच अंगूठियां और पांच मंगलसूत्र सेट शामिल हैं। इसके अलावा चांदी के चार चैन, पांच जोड़ी पायल, तीन सिंदूरदानी और चांदी का  बिछिया भी चोर ले गए। पीड़िता के अनुसार, इन आभूषणों की कुल कीमत करीब 18 लाख रुपये है। वहीं, चोर लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद भी साथ ले गए। किसान विकास पत्र भी चुरा ले गए बदमाश चोरों ने सिर्फ गहनों और नकदी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि घर में रखे डाकघर के किसान विकास पत्र (KVP) भी अपने साथ ले गए। यह प्रमाणपत्र वर्ष 2018 में ही परिपक्व हो चुका था, जिससे साफ है कि चोरों ने पूरे घर की बारीकी से तलाशी ली। इलाके में दहशत, लोगों ने बढ़ाई सुरक्षा की मांग घटना के बाद रामनगर क्षेत्र के लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हाल के दिनों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों ने पुलिस प्रशासन से गश्त बढ़ाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। सीसीटीवी फुटेज के सहारे जांच तेज मामले की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही चोरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पीड़िता ने प्रशासन से चोरी किये गए सामान की जल्द बरामदगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 13, 2026 0