Heart Health

Afghan Agriculture Minister Mawlawi Ataullah Omari meets Indian officials during his visit to India, highlighting growing cooperation between the two countries.
भारत दौरे पर अफगान मंत्री ओमारी बोले- 'भारत अपना देश लगता है, हमारा DNA एक है', रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत

नई दिल्ली: भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई और पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया है। उन्होंने भारत में मिले स्वागत की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे अपने ही लोगों के बीच हैं। ओमारी ने कहा, "भारत मुझे अपना देश लगता है, हमारा DNA एक ही है।" उनके इस बयान को दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत में मिला गर्मजोशी भरा स्वागत एएनआई के अनुसार, मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने कहा कि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है। उन्होंने भारत सरकार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारतीय जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें यहां बेहद सम्मान और अपनापन मिला। उनके मुताबिक, यह स्वागत केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के प्रति भारत की सद्भावना को दर्शाता है। अफगान जनता के लिए उम्मीद का संदेश ओमारी ने कहा कि भारत की मेहमाननवाजी अफगानिस्तान के लोगों के लिए उम्मीद का संदेश है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ता संवाद विकास, सहयोग और बेहतर भविष्य की नई संभावनाएं खोल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंध अफगानिस्तान के लिए लाभकारी साबित होंगे। इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— कृषि और आधुनिक खेती सिंचाई एवं जल प्रबंधन पशुपालन और डेयरी विकास खाद्य सुरक्षा शिक्षा और क्षमता निर्माण स्वास्थ्य सेवाएं मानवीय सहायता और तकनीकी सहयोग भारत पहले भी अफगान किसानों के प्रशिक्षण, गेहूं और दवाइयों की आपूर्ति तथा कई विकास परियोजनाओं में सहयोग करता रहा है। पुराने रिश्तों को फिर मजबूत करने की कोशिश भारत और अफगानिस्तान के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं। वर्ष 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों की गति धीमी हुई थी, लेकिन भारत ने मानवीय सहायता जारी रखी और काबुल में अपना तकनीकी मिशन भी दोबारा सक्रिय किया। विशेषज्ञों का मानना है कि मौलवी अताउल्लाह ओमारी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और व्यावहारिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Fresh Rohu, Katla, Hilsa, Tuna and Sardine fish displayed as healthy protein choices for senior citizens.
60 की उम्र के बाद डाइट में शामिल करें ये 5 हेल्दी मछलियां, बढ़ेगी एनर्जी, मजबूत होंगे दिल, दिमाग और हड्डियां

Healthy Diet For Senior Citizens: रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी मछलियां प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। जानें इनके स्वास्थ्य लाभ, अनुमानित कैलोरी, हेल्दी कुकिंग टिप्स और सेवन का सही तरीका। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बदलने लगती हैं। 60 वर्ष के बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार स्वस्थ जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह में दो से तीन बार सीमित मात्रा में मछली का सेवन बुजुर्गों के लिए लाभदायक हो सकता है। मछली में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन D, विटामिन B12, आयोडीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों और इम्यून सिस्टम के बेहतर कार्य में मदद कर सकते हैं। 1. रोहू (Rohu) अनुमानित कैलोरी: लगभग 170 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- रोहू को हल्दी, नमक, अदरक-लहसुन पेस्ट और नींबू के रस के साथ 20 मिनट मेरिनेट करें। इसके बाद नॉन-स्टिक पैन में हल्के सरसों के तेल के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें। फायदे :- हाई क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा स्रोत हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभदायक पाचन में अपेक्षाकृत हल्की दिल की सेहत को सपोर्ट करती है 2. कतला (Katla) अनुमानित कैलोरी: लगभग 160 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों में मेरिनेट करें। प्याज और टमाटर की हल्की ग्रेवी तैयार कर उसमें मछली को धीमी आंच पर 10–12 मिनट पकाएं। फायदे विटामिन B12 से भरपूर शरीर को ऊर्जा देने में सहायक मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार प्रोटीन का अच्छा स्रोत 3. हिल्सा (Hilsa/इलिश) अनुमानित कैलोरी: लगभग 210 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :-  सरसों के पेस्ट, हल्दी और नमक के साथ मेरिनेट कर 15 मिनट तक स्टीम करें। फायदे ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभदायक आंखों और त्वचा की सेहत को सपोर्ट करती है 4. टूना (Tuna) अनुमानित कैलोरी: लगभग 132 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- नींबू, लहसुन, काली मिर्च और थोड़ा ऑलिव ऑयल लगाकर 8–10 मिनट तक ग्रिल करें। फायदे कम फैट और हाई प्रोटीन हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर विटामिन D और B12 का अच्छा स्रोत वजन नियंत्रित रखने में सहायक 5. सार्डिन (Sardine) अनुमानित कैलोरी: लगभग 200 kcal प्रति 100 ग्राम कैसे बनाएं :- हल्के मसालों के साथ मेरिनेट कर एयर फ्रायर, ग्रिल या स्टीम में पकाएं। फायदे कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है क्या मछली कैंसर से बचाती है? वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकती हैं। स्वस्थ आहार का हिस्सा होने के कारण ये कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकती हैं। हालांकि, कोई भी मछली कैंसर की रोकथाम या इलाज की गारंटी नहीं देती। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुजुर्गों के लिए सबसे हेल्दी कुकिंग स्टाइल स्टीम फिश ग्रिल्ड फिश एयर फ्राइड फिश हल्की ग्रेवी वाली फिश करी कम तेल में पैन-सीयर फिश डीप फ्राई मछली का सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है। किसके साथ करें सर्व? ब्राउन राइस मल्टीग्रेन रोटी दलिया स्टीम सब्जियां हरी सलाद दाल का सूप नींबू हरी चटनी जरूरी कुकिंग टिप्स हमेशा ताजी मछली का चयन करें। पकाने से पहले अच्छी तरह साफ करें। हल्दी और नींबू से मेरिनेट करने पर गंध कम होती है। कम तेल और हल्के मसालों का इस्तेमाल करें। सप्ताह में 2–3 बार 100–150 ग्राम मछली पर्याप्त मानी जाती है (व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार)। यदि फिश एलर्जी, किडनी रोग या कोई गंभीर बीमारी है तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। निष्कर्ष:- रोहू, कतला, हिल्सा, टूना और सार्डिन जैसी भारत में आसानी से मिलने वाली मछलियां बुजुर्गों के लिए प्रोटीन, ओमेगा-3, विटामिन D और B12 का बेहतरीन स्रोत हैं। इन्हें स्टीम, ग्रिल या कम तेल में पका कर खाने से बेहतर पोषण मिलता है और यह हृदय, हड्डियों, मांसपेशियों तथा संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।  

anmol जुलाई 11, 2026 0
Mamata Banerjee News
ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका? राज्यसभा सांसद के इस्तीफे की अटकलें तेज

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में तीन राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब एक और सांसद के इस्तीफे की चर्चाओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सांसद रुक्मणी मलिक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के उपसभापति को ई-मेल के माध्यम से भेजा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।   राज्यसभा में संख्या बल घटने की आशंका सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ और राज्यसभा सांसद पार्टी से दूरी बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो उच्च सदन में पार्टी का संख्या बल और प्रभाव दोनों कमजोर हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे इस्तीफे केवल संख्यात्मक नुकसान नहीं हैं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संबंधी चुनौतियों का भी संकेत देते हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 20 सांसद अलग-अलग समय पर पार्टी छोड़ चुके हैं या अन्य दलों में शामिल हो चुके हैं।   संगठन में भी बढ़ी चुनौती राज्यसभा के घटनाक्रम के साथ-साथ टीएमसी संगठन के भीतर भी संकट गहराता दिख रहा है। ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट समानांतर संगठन खड़ा करने में सक्रिय है। इस गुट ने पहले ही नई वर्किंग कमेटी का गठन कर खुद को "असली तृणमूल" बताया है और संबंधित दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपने का दावा किया है। अब राज्य और जिला स्तर पर नई संगठनात्मक इकाइयों के गठन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।   नेतृत्व पर बढ़ता दबाव बताया जा रहा है कि कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय बैठक में राज्य अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों के नामों पर मंथन किया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सांसदों का पलायन जारी रहता है और समानांतर संगठन अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर संघर्ष आने वाले समय में और तेज हो सकता है। फिलहाल पार्टी की ओर से इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
Person performing strength training exercises to build chest and back muscles, highlighting their potential link to better heart health.
मजबूत छाती और पीठ की मांसपेशियां हार्ट अटैक का खतरा 31% तक घटा सकती हैं? नए अध्ययन में सामने आए अहम संकेत

शोध में मांसपेशियों की गुणवत्ता और हृदय स्वास्थ्य के बीच मिला मजबूत संबंध दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। ऐसे में एक नए अध्ययन ने संकेत दिया है कि सिर्फ स्वस्थ खानपान और कार्डियो एक्सरसाइज ही नहीं, बल्कि छाती और पीठ की मजबूत व स्वस्थ मांसपेशियां भी हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि मांसपेशियों की गुणवत्ता किसी व्यक्ति की समग्र फिटनेस और लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। क्या कहता है नया अध्ययन? यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल Radiology में प्रकाशित हुआ है। इसमें 1,722 वयस्कों को शामिल किया गया, जिनकी औसत आयु 57 वर्ष थी। सभी प्रतिभागियों का कोरोनरी कंप्यूटेड टोमोग्राफी एंजियोग्राफी (CCTA) स्कैन किया गया, जिससे हृदय की धमनियों की स्थिति का आकलन किया जाता है। शोधकर्ताओं ने इन लोगों के स्वास्थ्य पर लगभग 10 वर्षों तक नजर रखी। 31% तक कम हुआ हार्ट अटैक का जोखिम अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों की छाती और पीठ की मांसपेशियों की गुणवत्ता बेहतर थी, उनमें हार्ट अटैक का खतरा काफी कम पाया गया। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार रहे— मांसपेशियों की गुणवत्ता में हर 10 अंकों की बढ़ोतरी पर हार्ट अटैक का जोखिम 31% तक कम हुआ। अगले 10 वर्षों में मृत्यु का जोखिम 39% तक कम पाया गया। उम्र, लिंग और धमनियों में कैल्शियम जमाव जैसे कारकों को ध्यान में रखने के बाद भी यह संबंध बना रहा। मांसपेशियों का आकार नहीं, गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण शोध की सबसे अहम बात यह रही कि मांसपेशियों का बड़ा आकार नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता अधिक मायने रखती है। स्वस्थ मांसपेशियों में वसा कम होती है और वे स्कैन में अधिक घनी दिखाई देती हैं। इसके विपरीत, केवल अधिक मांसपेशियां होने से समान लाभ नहीं मिला। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी मांसपेशियां इस बात का संकेत हैं कि व्यक्ति नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करता है और उसकी जीवनशैली अपेक्षाकृत स्वस्थ है। AI ने आसान बनाया विश्लेषण इस अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का भी उपयोग किया गया। AI सॉफ्टवेयर ने हार्ट स्कैन के दौरान छाती और पीठ की मांसपेशियों, वसा, हड्डियों और अन्य अंगों का कुछ ही सेकंड में विश्लेषण किया। जहां किसी रेडियोलॉजिस्ट को यह काम करने में कई घंटे लग सकते थे, वहीं AI ने प्रति स्कैन एक मिनट से भी कम समय में यह प्रक्रिया पूरी कर दी। शोधकर्ताओं का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक हृदय रोग के जोखिम की पहचान को और आसान बना सकती है। क्या मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक से बचाती हैं? विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल संबंध (Association) दिखाता है। इससे यह साबित नहीं होता कि मजबूत मांसपेशियां सीधे हार्ट अटैक को रोकती हैं। संभव है कि जिन लोगों की मांसपेशियां बेहतर होती हैं, वे नियमित व्यायाम करते हों, उनका वजन नियंत्रित हो और उनकी जीवनशैली अधिक स्वस्थ हो। यही सभी कारक मिलकर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। मांसपेशियों की गुणवत्ता कैसे बढ़ाएं? विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर मांसपेशियां बनाने के लिए घंटों जिम में समय बिताना जरूरी नहीं है। सप्ताह में 2 से 3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना भी पर्याप्त हो सकता है। इन एक्सरसाइज से फायदा मिल सकता है— पुश-अप्स चेस्ट प्रेस रो (Rows) प्लैंक रेजिस्टेंस बैंड एक्सरसाइज बॉडीवेट वर्कआउट इसके साथ ही रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना या तैराकी जैसी एरोबिक गतिविधियां भी हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती हैं। विशेषज्ञों की सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत और सक्रिय मांसपेशियां स्वस्थ जीवनशैली का संकेत हैं। इसलिए केवल वजन कम करने पर नहीं, बल्कि शरीर की ताकत और फिटनेस बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ आदतें लंबे समय तक दिल को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Person experiences shortness of breath and rapid heartbeat after stepping out of an air-conditioned room into extreme summer heat.
AC से बाहर निकलते ही फूलने लगती है सांस या तेज हो जाती है धड़कन? डॉक्टरों की चेतावनी, इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली: गर्मियों में घंटों एयर कंडीशनर (AC) में रहने के बाद जब अचानक 40 डिग्री या उससे अधिक तापमान वाली तेज धूप में निकलते हैं, तो शरीर को कुछ ही सेकंड में खुद को नए तापमान के अनुसार ढालना पड़ता है। इस दौरान कई लोगों को सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होना, चक्कर आना, कमजोरी या सीने में बेचैनी जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, स्वस्थ लोगों में यह बदलाव अक्सर कुछ समय के लिए होता है, लेकिन हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अस्थमा और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है। AC से निकलते ही दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव? जब कोई व्यक्ति 22–24°C तापमान वाले कमरे से निकलकर 40°C या उससे अधिक गर्म वातावरण में पहुंचता है, तो शरीर तुरंत खुद को ठंडा रखने की कोशिश शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में: त्वचा की रक्त वाहिकाएं फैलने लगती हैं। शरीर पसीने के जरिए तापमान कम करने की कोशिश करता है। हृदय को त्वचा तक ज्यादा रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे कुछ समय के लिए हार्ट रेट बढ़ सकती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गर्म मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को सामान्य से ज्यादा काम करना पड़ता है। क्यों फूलने लगती है सांस? तेज गर्मी और उमस में शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत बढ़ जाती है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से हार्ट डिजीज, अस्थमा, COPD या अन्य श्वसन संबंधी बीमारी है, तो अचानक तापमान बदलने पर सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है असर तापमान बदलने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने और फैलने लगती हैं। इसका असर ब्लड प्रेशर पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण: चक्कर आना कमजोरी सिर भारी लगना घबराहट दिल की धड़कन तेज होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत? इन लोगों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है: बुजुर्ग हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का इतिहास रखने वाले लोग डायबिटीज के मरीज अस्थमा या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति खुद को कैसे रखें सुरक्षित? AC से बाहर निकलने से पहले कुछ मिनट सामान्य तापमान वाले स्थान पर रहें। AC का तापमान 24–26°C के बीच रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो। धूप में निकलते समय टोपी, छाता और हल्के रंग के कपड़े पहनें। दोपहर की तेज धूप में अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि AC से बाहर आने के बाद बार-बार ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: सीने में दर्द या दबाव लगातार सांस फूलना बहुत तेज या अनियमित धड़कन चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना अत्यधिक कमजोरी या पसीना आना ये लक्षण केवल गर्मी की वजह से ही नहीं, बल्कि किसी गंभीर हृदय समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Swollen feet and ankles highlighting edema, a possible warning sign of heart, kidney, liver, or circulation-related health conditions.
पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज! किडनी, हार्ट और लिवर की गंभीर बीमारी का हो सकता है संकेत

नई दिल्ली: लंबे समय तक खड़े रहने, अधिक चलने या हल्की चोट लगने के बाद पैरों में सूजन आना आम बात है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों, टखनों या तलवों में लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह हार्ट फेलियर, किडनी की बीमारी, लिवर संबंधी समस्याओं या रक्त संचार में गड़बड़ी जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। सीनियर इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एलेक्स मैथ्यू के अनुसार, जब शरीर के टिश्यू में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने लगता है, तो पैरों में सूजन यानी एडिमा (Edema) की समस्या होती है। यदि सूजन वाली जगह पर उंगली दबाने के बाद कुछ समय तक गड्ढा बना रहे, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर का शुरुआती संकेत हो सकती है सूजन जब हृदय शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता, तो अतिरिक्त तरल पदार्थ पैरों और टखनों में जमा होने लगता है। इसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर कहा जाता है। इस स्थिति में आमतौर पर दोनों पैरों में सूजन के साथ-साथ ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं: सांस फूलना जल्दी थक जाना सीने में भारीपन रात में सांस लेने में परेशानी किडनी ठीक से काम न करे तो भी फूल सकते हैं पैर किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले तत्व बाहर निकालने का काम करती है। जब इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो शरीर में पानी जमा होने लगता है। ऐसे मामलों में मरीज को दिखाई दे सकते हैं: पैरों और टखनों में सूजन चेहरे पर सूजन पेशाब में बदलाव लगातार थकान क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों में यह लक्षण काफी आम माना जाता है। लिवर की बीमारी भी बन सकती है वजह लिवर एल्ब्यूमिन नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है, जो रक्त वाहिकाओं में तरल पदार्थ को नियंत्रित रखने में मदद करता है। यदि लिवर सिरोसिस या अन्य गंभीर बीमारी से प्रभावित हो जाए, तो एल्ब्यूमिन कम बनने लगता है, जिससे: पैरों में सूजन पेट में पानी भरना शरीर में भारीपन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। नसों में खून का थक्का भी हो सकता है कारण यदि किसी एक पैर में अचानक सूजन, दर्द, गर्माहट या लालिमा दिखाई दे, तो यह डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) यानी नस में रक्त का थक्का बनने का संकेत हो सकता है। यह स्थिति गंभीर होती है और तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए क्योंकि थक्का फेफड़ों तक पहुंचकर जानलेवा भी बन सकता है। शरीर में प्रोटीन की कमी से भी आती है सूजन कुपोषण, किडनी रोग या लिवर की बीमारी के कारण शरीर में एल्ब्यूमिन का स्तर कम हो सकता है। ऐसे में रक्त से तरल पदार्थ बाहर निकलकर टिश्यू में जमा होने लगता है, जिससे पैरों में सूजन दिखाई देती है। कुछ दवाएं भी बढ़ा सकती हैं परेशानी विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं के सेवन से भी पैरों में सूजन हो सकती है: हाई ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं स्टेरॉयड हार्मोनल दवाएं कुछ दर्द निवारक दवाएं डायबिटीज की कुछ दवाएं यदि नई दवा शुरू करने के बाद सूजन आने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। पैरों की सूजन से बचने के आसान उपाय लंबे समय तक लगातार खड़े या बैठे न रहें। नमक का सेवन सीमित करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। नियमित व्यायाम करें। वजन नियंत्रित रखें। बैठते समय पैरों को हल्का ऊंचा रखें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं में बदलाव न करें। कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? यदि पैरों की सूजन के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें: अचानक दोनों या एक पैर में तेज सूजन सांस लेने में तकलीफ सीने में दर्द तेज दर्द या लालिमा पेशाब कम होना कई दिनों तक सूजन का बने रहना  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Different cooking oils including mustard, coconut, sesame, sunflower, and palm oil displayed with healthy food ingredients.
सिर्फ सरसों के तेल में खाना बनाना सही नहीं! ICMR ने बताया कौन-सा तेल कब करें इस्तेमाल, पाम ऑयल को भी बताया फायदेमंद

भारतीय रसोई में खाना बनाने के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। उत्तर भारत में जहां सरसों का तेल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है, वहीं दक्षिण भारत में नारियल तेल का उपयोग अधिक होता है। लेकिन अब इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने सलाह दी है कि लंबे समय तक सिर्फ एक ही प्रकार के तेल का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प नहीं है। ICMR की नई डाइटरी गाइडलाइंस के मुताबिक, बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाना बनाने में समय-समय पर अलग-अलग खाद्य तेलों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे शरीर को विभिन्न प्रकार के आवश्यक फैटी एसिड और पोषक तत्व मिलते हैं। क्यों बदल-बदलकर इस्तेमाल करना चाहिए कुकिंग ऑयल? ICMR और FSSAI के अनुसार, कोई भी एक कुकिंग ऑयल सभी जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध नहीं कराता। हर खाद्य तेल की अपनी अलग पोषण संबंधी विशेषताएं होती हैं। ऐसे में यदि लोग अलग-अलग तेलों का संतुलित उपयोग करते हैं, तो शरीर को विभिन्न प्रकार के हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स मिल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्दी डाइट का मतलब तेल पूरी तरह छोड़ देना नहीं, बल्कि सही मात्रा और सही तरीके से उसका इस्तेमाल करना है। ICMR की हेल्दी ऑयल गाइडलाइन स्वस्थ रहने के लिए ICMR ने कुछ आसान सुझाव दिए हैं— एक ही तेल का लगातार इस्तेमाल करने के बजाय समय-समय पर तेल बदलें। तेल का उपयोग सीमित मात्रा में करें। एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करने से बचें। ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। डीप फ्राई की बजाय स्टीम, ग्रिल या रोस्टेड भोजन को प्राथमिकता दें। कौन-सा तेल किसलिए फायदेमंद है? सरसों का तेल सरसों का तेल मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड और ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। तिल का तेल तिल के तेल में ओमेगा-6 फैटी एसिड और प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यह शरीर में सूजन कम करने और कोशिकाओं की सुरक्षा में मदद कर सकता है। नारियल तेल नारियल तेल में मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCTs) पाए जाते हैं, जो शरीर को जल्दी ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। हालांकि इसका सेवन भी सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। पाम ऑयल ICMR के अनुसार, पाम ऑयल में टोकोफेरॉल्स, टोकोट्रिएनोल्स (विटामिन E के रूप) और कैरोटेनॉयड्स जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर यह भी आहार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इसका अत्यधिक सेवन किसी भी अन्य तेल की तरह उचित नहीं माना जाता। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी का तेल विटामिन-E और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड से भरपूर होता है। यह त्वचा और हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। तेल की मात्रा कैसे करें कम? FSSAI के मुताबिक, यदि आप रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल की मात्रा में लगभग 10 प्रतिशत की कमी कर दें, तो इससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा— डीप फ्राइड फूड्स कम खाएं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें। घर में कम तेल वाले भोजन को प्राथमिकता दें। भोजन में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की मात्रा बढ़ाएं। क्या है विशेषज्ञों की सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए किसी एक तेल को 'सबसे बेहतर' मानने के बजाय संतुलित और विविधतापूर्ण आहार अपनाना ज्यादा जरूरी है। अलग-अलग कुकिंग ऑयल का सीमित मात्रा में उपयोग, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि मिलकर हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

surbhi जून 29, 2026 0
Doctor checking a patient's blood pressure while explaining the connection between hypertension and thyroid disorders.
बार-बार बढ़ रहा है BP? सिर्फ नमक नहीं, थायरॉइड की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह, जानिए डॉक्टर की सलाह

भारत में हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) और डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आमतौर पर लोग हाई बीपी की वजह अधिक नमक, मोटापा, तनाव, धूम्रपान या खराब लाइफस्टाइल को मानते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार बार-बार बढ़ता ब्लड प्रेशर किसी हार्मोनल समस्या, खासकर थायरॉइड डिसऑर्डर का भी संकेत हो सकता है। कार्डियक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ब्लड प्रेशर दवाइयों के बावजूद बार-बार बढ़ रहा है या नियंत्रित नहीं हो रहा, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। कैसे जुड़ा है थायरॉइड और हाई ब्लड प्रेशर? थायरॉइड ग्रंथि शरीर में बनने वाले T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) हार्मोन का उत्पादन करती है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगते हैं, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म (Hypothyroidism) कहा जाता है, तब रक्त वाहिकाएं धीरे-धीरे सख्त होने लगती हैं। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और ब्लड प्रेशर, विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर (निचला स्तर), बढ़ सकता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है? हाइपोथायरॉइडिज्म में दिल की धड़कन सामान्य से धीमी हो जाती है। साथ ही रक्त वाहिकाओं का लचीलापन कम होने लगता है। यही कारण है कि शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए दबाव बढ़ सकता है, जिससे डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई बीपी और थायरॉइड के बीच संबंध को देखते हुए दोनों स्थितियों की जांच एक साथ करना बेहतर माना जाता है। कब करानी चाहिए थायरॉइड जांच? यदि आपको— बार-बार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो, दवा लेने के बावजूद बीपी नियंत्रित न हो, लगातार थकान महसूस हो, वजन बढ़ रहा हो, ठंड ज्यादा लगती हो, दिल की धड़कन धीमी रहती हो, तो डॉक्टर की सलाह पर TSH, T3 और T4 टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। हाइपोथायरॉइडिज्म में किन दवाओं में बरतें सावधानी? विशेषज्ञों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म के मरीजों में पहले से ही दिल की धड़कन धीमी हो सकती है। ऐसे में कुछ बीपी की दवाएं, जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और कुछ कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, धड़कन को और धीमा कर सकती हैं। इसलिए कोई भी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के आसान उपाय हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड दोनों स्थितियों में स्वस्थ जीवनशैली काफी मददगार साबित होती है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। योग और कार्डियो एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। नमक का सेवन सीमित रखें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज से भरपूर DASH डाइट अपनाएं। पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की जांच कराते रहें। डॉक्टर की सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड की समस्या कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए जिन लोगों को लगातार हाई बीपी की शिकायत रहती है, उन्हें थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए। वहीं थायरॉइड के मरीजों को भी समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए ताकि किसी गंभीर हृदय संबंधी समस्या से बचा जा सके।  

surbhi जून 29, 2026 0
Person practicing deep breathing and relaxation techniques to reduce stress and control cortisol levels.
सिर्फ 3 मिनट का तनाव भी पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़ सकता है बीपी और कॉर्टिसोल लेवल, जानें कैसे करें स्ट्रेस मैनेज

Stress Side Effects: तनाव हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक होता है, यह बात लगभग हर कोई जानता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि केवल लंबे समय तक बना रहने वाला स्ट्रेस ही नहीं, बल्कि सिर्फ 3 से 5 मिनट का तनाव भी शरीर में कई नकारात्मक बदलाव पैदा कर सकता है। बार-बार होने वाला छोटा तनाव धीरे-धीरे दिल, दिमाग, इम्यूनिटी और पाचन तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है। गुरुग्राम स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनल मेडिसिन) डॉ. तुषार तायल के अनुसार, शरीर हर प्रकार के तनाव को एक खतरे की तरह लेता है और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देता है। तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है? जब मस्तिष्क किसी चुनौती या खतरे को महसूस करता है, तो ब्रेन का एमिग्डाला सक्रिय हो जाता है। इसके बाद शरीर में एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होने लगते हैं। इसके परिणामस्वरूप: हार्ट रेट बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। शरीर अधिक सतर्क हो जाता है। ऊर्जा मांसपेशियों की ओर केंद्रित हो जाती है। इस प्रक्रिया को "फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स" कहा जाता है। असली खतरा कब शुरू होता है? कुछ मिनटों का तनाव सामान्य रूप से खत्म हो जाता है, लेकिन यदि दिनभर में बार-बार तनाव की स्थिति पैदा होती रहे, तो शरीर सामान्य अवस्था में लौट नहीं पाता। लगातार: काम का दबाव मोबाइल नोटिफिकेशन छोटी-छोटी बहसें डेडलाइन का तनाव इन सबकी वजह से कोर्टिसोल का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। दिल पर पड़ता है असर शोध के अनुसार, बार-बार सक्रिय होने वाला स्ट्रेस रिस्पॉन्स: हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ाता है। धमनियों में प्लाक जमने की संभावना बढ़ाता है। हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकता है। वजन और नींद भी होती है प्रभावित कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर: भूख बढ़ा सकता है। मोटापे का कारण बन सकता है। नींद की गुणवत्ता खराब कर सकता है। व्यायाम करने की इच्छा कम कर सकता है। कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी लगातार तनाव इम्यून सिस्टम की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों में: बार-बार संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बीमारी से रिकवरी में अधिक समय लग सकता है। गट हेल्थ पर भी पड़ता है असर बार-बार होने वाला तनाव: गट माइक्रोबायोम का संतुलन बिगाड़ सकता है। एसिडिटी और एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकता है। IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम) जैसी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है प्रभाव लगातार छोटे-छोटे तनाव के एपिसोड से: एंग्जायटी बढ़ सकती है। भावनात्मक सहनशक्ति कम हो सकती है। डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। तनाव से राहत पाने के आसान उपाय विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे रिलैक्सेशन ब्रेक तनाव के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। अपनाएं ये आदतें गहरी डायाफ्रामिक ब्रीदिंग करें। 5 मिनट शांत बैठें। थोड़ी देर बाहर टहलें। स्क्रीन से कुछ समय का ब्रेक लें। पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम करें। इन छोटे प्रयासों से कोर्टिसोल का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और शरीर को अगली तनावपूर्ण स्थिति से पहले सामान्य होने का मौका मिलता है।  

surbhi जून 23, 2026 0
Doctor explaining the link between thyroid disorders and high blood pressure with medical charts.
हाई बीपी और थायरॉइड का है गहरा संबंध? जानिए कैसे साथ-साथ बढ़ सकता है दोनों बीमारियों का खतरा

हमारे शरीर में मौजूद थायरॉइड ग्रंथि आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इसका काम बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह ग्रंथि मेटाबॉलिज्म, हृदय की कार्यप्रणाली और रक्त संचार को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब यह पर्याप्त मात्रा में थायरॉइड हार्मोन नहीं बना पाती, तो हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति पैदा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या केवल थकान या वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के खतरे को भी बढ़ा सकती है। क्या होता है हाइपोथायरॉइडिज्म? हाइपोथायरॉइडिज्म वह स्थिति है, जब थायरॉइड ग्रंथि शरीर के लिए जरूरी T3 और T4 हार्मोन पर्याप्त मात्रा में नहीं बना पाती। इसके कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: लगातार थकान महसूस होना वजन बढ़ना अधिक ठंड लगना त्वचा का सूखापन कब्ज की समस्या बालों का झड़ना हाई ब्लड प्रेशर क्या है? जब रक्त धमनियों की दीवारों पर लगातार अधिक दबाव डालता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है। इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हाइपोथायरॉइडिज्म और हाई बीपी के बीच क्या है संबंध? इंडियन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-4) के आंकड़ों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हर तीन में से एक व्यक्ति में थायरॉइड ग्रंथि की कार्यक्षमता कम पाई गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, थायरॉइड हार्मोन रक्त वाहिकाओं की लोच और हृदय की पंपिंग क्षमता को प्रभावित करते हैं। जब हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, तो धमनियां कठोर होने लगती हैं, जिससे रक्त प्रवाह पर दबाव बढ़ता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। हाइपोथायरॉइडिज्म किस तरह बढ़ाता है ब्लड प्रेशर? 1. हृदय की कार्यक्षमता पर असर अध्ययनों के अनुसार, हाइपोथायरॉइडिज्म हृदय की धड़कन को धीमा कर सकता है और शरीर में रक्त पंप करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। 2. खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ना इस बीमारी से LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल) का स्तर बढ़ सकता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमा होने लगता है और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ जाता है। 3. रक्त वाहिकाओं का कठोर होना थायरॉइड हार्मोन की कमी से रक्त वाहिकाओं की लचक कम हो सकती है, जिससे विशेष रूप से डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना रहती है। किन लोगों में अधिक होता है जोखिम? अमेरिकन थायरॉइड एसोसिएशन के अनुसार, इन लोगों में थायरॉइड संबंधी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है: 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग महिलाएं मोटापे से ग्रसित व्यक्ति डायबिटीज के मरीज जिनके परिवार में पहले से थायरॉइड की हिस्ट्री हो क्या थायरॉइड का इलाज ब्लड प्रेशर को नियंत्रित कर सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हाई ब्लड प्रेशर का मुख्य कारण हाइपोथायरॉइडिज्म है, तो थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से ब्लड प्रेशर में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि, सभी मरीजों में इसका प्रभाव समान नहीं होता और कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर की अलग दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।  

surbhi जून 17, 2026 0
Doctor explaining warning signs of high cholesterol and high blood pressure affecting heart health.
हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई बीपी एकसाथ बढ़ने पर दिख सकते हैं ये 10 संकेत, सांस फूलना हो सकता है पहला अलर्ट; डॉक्टर की सलाह को न करें नजरअंदाज

आजकल हाई ब्लड प्रेशर और हाई एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को दिल की सेहत के दो सबसे बड़े दुश्मन माना जाता है। ये दोनों समस्याएं धीरे-धीरे शरीर में विकसित होती हैं और लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं। लेकिन जब इनका असर रक्त वाहिकाओं और दिल पर पड़ने लगता है, तब कुछ चेतावनी भरे संकेत सामने आ सकते हैं। एशियन हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दिवाकर कुमार के अनुसार, हाई बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल का कॉम्बिनेशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा सकता है। दोनों समस्याएं साथ होने पर शरीर में क्या होता है? एलडीएल कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होकर प्लाक बनाता है, जिससे रक्त वाहिकाएं संकरी हो जाती हैं। वहीं हाई ब्लड प्रेशर धमनियों की दीवारों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। दोनों स्थितियां मिलकर आर्टरी को तेजी से नुकसान पहुंचाती हैं और दिल के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हाई बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल के 10 चेतावनी संकेत डॉ. दिवाकर कुमार के मुताबिक, यदि ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं— सांस फूलना लगातार सिरदर्द रहना चक्कर आना सीने में दर्द या दबाव महसूस होना अत्यधिक थकान रहना धुंधला दिखाई देना दिल की धड़कन तेज महसूस होना शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन (गंभीर स्थिति में) पैरों में सूजन (गंभीर स्थिति में) रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होना इसके अलावा, खराब ब्लड सर्कुलेशन के कारण हाथ-पैर ठंडे पड़ना, चलने पर मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन और घावों का देर से भरना भी संकेत हो सकते हैं। पेट की चर्बी भी हो सकती है खतरे की घंटी विशेषज्ञों के अनुसार, पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल दोनों से जुड़ी होती है। डायबिटीज, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में इसका जोखिम अधिक रहता है। किन आदतों से बढ़ता है खतरा? ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना नमक और शुगर का अधिक सेवन शारीरिक गतिविधि की कमी धूम्रपान और शराब का सेवन तनाव और खराब नींद मोटापा और बढ़ती उम्र परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री बचाव के लिए क्या करें? फल, सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन लें। नमक और अनहेल्दी फैट का सेवन कम करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें। वजन नियंत्रित रखें। तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लें। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित बीपी और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं। डॉ. दिवाकर कुमार का कहना है कि लक्षण दिखने का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना सबसे बेहतर तरीका है। शुरुआती अवस्था में लाइफस्टाइल में बदलाव और जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Stressed person holding head while working, highlighting mental and physical effects of chronic stress
हर समय तनाव में रहना पड़ सकता है भारी, दिमाग से लेकर दिल तक पर पड़ सकता है गंभीर असर

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) लगभग हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। नौकरी का दबाव, आर्थिक चुनौतियां, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव लोगों की मानसिक शांति को प्रभावित कर रहा है। हालांकि थोड़े समय का तनाव सामान्य माना जाता है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहता है तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव न केवल व्यक्ति के व्यवहार और सोचने की क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि यह हृदय, पाचन तंत्र, नींद और शरीर की कई अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। तनाव का दिमाग पर क्या असर पड़ता है? 1. निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है लगातार तनाव के दौरान शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन दिमाग के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स को प्रभावित करता है, जो सोचने, समझने, निर्णय लेने और समस्याओं का समाधान खोजने के लिए जिम्मेदार होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति छोटे-छोटे फैसले लेने में भी कठिनाई महसूस कर सकता है और गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है। 2. याददाश्त और सीखने की क्षमता प्रभावित होती है लंबे समय तक तनाव में रहने से दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा प्रभावित हो सकता है, जो नई चीजें सीखने और याद रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस कारण व्यक्ति को बातें भूलने, ध्यान भटकने और नई जानकारी को याद रखने में परेशानी होने लगती है। 3. चिंता और डिप्रेशन का खतरा शुरुआत में तनाव केवल बेचैनी, चिड़चिड़ापन या चिंता के रूप में दिखाई देता है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर मानसिक समस्याओं का रूप ले सकता है। लगातार तनाव के कारण: एंग्जायटी बढ़ सकती है डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है आत्मविश्वास कम हो सकता है भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है 4. प्रोडक्टिविटी में गिरावट जब दिमाग लगातार तनाव में रहता है तो किसी भी काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है। व्यक्ति जल्दी थक जाता है और उसकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है। इसका प्रभाव नौकरी, पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन सभी पर दिखाई देने लगता है। नींद पर पड़ता है सीधा असर तनाव की स्थिति में व्यक्ति अक्सर एक ही समस्या के बारे में बार-बार सोचता रहता है। इससे रात में नींद आने में देर हो सकती है या बार-बार नींद टूट सकती है। खराब नींद के कारण: दिनभर थकान महसूस होती है ऊर्जा कम हो जाती है चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है मानसिक प्रदर्शन प्रभावित होता है तनाव का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है? 1. हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है तनाव के दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है और रक्तचाप बढ़ सकता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। 2. मांसपेशियों में दर्द और अकड़न लगातार तनाव में रहने पर शरीर की मांसपेशियां तनावग्रस्त रहती हैं। इससे गर्दन, कंधों और पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है। 3. पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है तनाव का असर सीधे हमारे पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। इसके कारण: अपच गैस पेट दर्द कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं उभर सकती हैं। 4. वजन बढ़ने का खतरा कई लोग तनाव के दौरान जरूरत से ज्यादा खाना खाने लगते हैं, जिसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। इससे: कैलोरी का सेवन बढ़ता है वजन बढ़ सकता है मोटापे का खतरा बढ़ जाता है तनाव कम करने के आसान तरीके विशेषज्ञों के अनुसार तनाव को नियंत्रित करने के लिए कुछ सरल आदतें अपनाई जा सकती हैं: रोजाना 20-30 मिनट वॉक करें मेडिटेशन और योग का अभ्यास करें पर्याप्त नींद लें दोस्तों और परिवार से बातचीत करें पसंदीदा संगीत सुनें सोशल मीडिया का उपयोग सीमित करें प्रकृति के बीच समय बिताएं यदि तनाव लंबे समय तक बना रहे, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे या चिंता और उदासी लगातार महसूस हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। तनाव केवल मन की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समय रहते इसके संकेतों को पहचानना और उचित कदम उठाना बेहद जरूरी है।  

surbhi जून 3, 2026 0
Fresh watermelon slices highlighting heart health benefits and hydration properties in summer diet
दिल को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकता है तरबूज, नई रिसर्च में सामने आए कई बड़े फायदे

गर्मियों का पसंदीदा फल सिर्फ स्वाद ही नहीं, दिल की सेहत भी सुधार सकता है गर्मियों में तरबूज खाना लगभग हर किसी को पसंद होता है। पानी से भरपूर और मीठा स्वाद वाला यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। अब हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि तरबूज का नियमित सेवन हृदय रोगों के खतरे को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज में मौजूद कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ रक्तचाप और रक्त संचार को भी बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। दिल की सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है तरबूज? हालिया अध्ययनों के अनुसार तरबूज में एल-सिट्रुलीन (L-Citrulline) नामक अमीनो एसिड पाया जाता है। यह तत्व शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे रक्त वाहिकाएं बेहतर तरीके से काम कर पाती हैं और रक्त प्रवाह सुचारु बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एल-सिट्रुलीन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने और धमनियों की कठोरता कम करने में भी मददगार हो सकता है। यही कारण है कि तरबूज को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी फल माना जा रहा है। पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग नियमित रूप से तरबूज का सेवन करते हैं, उनके शरीर में कई आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बेहतर पाई जाती है। इनमें शामिल हैं: फाइबर पोटैशियम मैग्नीशियम विटामिन C विटामिन A लाइकोपीन कैरोटेनॉयड्स ये सभी पोषक तत्व शरीर को स्वस्थ रखने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शरीर को रखता है हाइड्रेटेड तरबूज का लगभग 91 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। गर्मियों में इसका सेवन शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है। पर्याप्त हाइड्रेशन हृदय, किडनी और पाचन तंत्र के बेहतर कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। तरबूज खाने के अन्य फायदे विशेषज्ञों के अनुसार तरबूज का सेवन कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी दे सकता है: रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने में सहायक मांसपेशियों के दर्द में राहत पाचन तंत्र को बेहतर बनाना त्वचा की सेहत सुधारना सूजन कम करने में मदद 100 ग्राम तरबूज में क्या-क्या होता है? 100 ग्राम ताजे तरबूज में लगभग: कैलोरी: 30 पानी: 91.4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 7.55 ग्राम प्रोटीन: 0.61 ग्राम फाइबर: 0.4 ग्राम शुगर: 6.2 ग्राम फैट: 0.2 ग्राम डाइट में ऐसे करें शामिल अगर आप तरबूज के फायदे बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे सिर्फ फल के रूप में खाने के अलावा कई अन्य तरीकों से भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं: फ्रूट स्मूदी में मिलाकर फेटा चीज और पुदीने के साथ सलाद में ग्रीक योगर्ट के साथ फ्रूट स्क्यूअर्स बनाकर तरबूज पॉप्सिकल तैयार करके ठंडा गजपाचो सूप बनाकर संतुलित आहार भी है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि तरबूज दिल की सेहत के लिए फायदेमंद जरूर है, लेकिन केवल एक फल खाने से हृदय रोगों का खतरा पूरी तरह कम नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जून 2, 2026 0
Doctor checking blood pressure of heart patient during cardiovascular health assessment in hospital
हाई Pulse Pressure बन सकता है दिल की बीमारी का बड़ा संकेत, नई स्टडी में सामने आया गंभीर खतरा

दिल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को समझने के लिए वैज्ञानिक लगातार नए संकेतकों की तलाश कर रहे हैं। अब एक नई रिसर्च में सामने आया है कि बढ़ा हुआ Pulse Pressure, stable coronary artery disease यानी स्थिर कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मरीजों में बीमारी की गंभीरता और भविष्य में होने वाले cardiovascular events का मजबूत संकेतक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार Pulse Pressure, systolic और diastolic blood pressure के अंतर को कहा जाता है। यह धमनियों की कठोरता और vascular ageing को दर्शाता है, जो हृदय रोगों के प्रमुख कारण माने जाते हैं। क्या कहती है नई रिसर्च? इस prospective study में 7,027 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें stable coronary artery disease था और जिनका ejection fraction सामान्य था। शोधकर्ताओं ने पाया कि जैसे-जैसे Gensini Score बढ़ता गया, वैसे-वैसे systolic blood pressure और pulse pressure दोनों में वृद्धि देखी गई। Gensini Score कोरोनरी धमनियों में blockage और lesion severity मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। तीन धमनियों में बीमारी का बढ़ा खतरा अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों का pulse pressure ज्यादा था, उनमें three-vessel disease की संभावना भी अधिक थी। विशेष रूप से pulse pressure के उच्च quartiles में मरीजों में तीन प्रमुख coronary arteries के प्रभावित होने की दर काफी ज्यादा देखी गई। इससे यह संकेत मिला कि बढ़ा हुआ pulse pressure अधिक गंभीर coronary involvement से जुड़ा हो सकता है। Stroke और दिल से जुड़ी घटनाओं का बढ़ा जोखिम करीब 36.4 महीनों के median follow-up के दौरान कुल 289 cardiovascular events दर्ज किए गए। शुरुआती विश्लेषण में pulse pressure और systolic blood pressure दोनों का संबंध cardiovascular death, stroke और अन्य adverse outcomes से पाया गया। हालांकि confounding factors को adjust करने के बाद भी pulse pressure stroke और combined cardiovascular outcomes के साथ स्वतंत्र रूप से जुड़ा रहा। स्टडी के अनुसार– Stroke risk के लिए hazard ratio: 1.019 Combined outcomes के लिए hazard ratio: 1.014 वहीं systolic blood pressure केवल stroke risk से ही जुड़ा रहा। क्यों महत्वपूर्ण है Pulse Pressure? विशेषज्ञों का मानना है कि pulse pressure एक आसान और सुलभ clinical marker बन सकता है, जिसकी मदद से stable CAD मरीजों में जोखिम का आकलन किया जा सकता है। अन्य जटिल imaging tests या biomarkers की तुलना में pulse pressure को नियमित blood pressure जांच के दौरान आसानी से मापा जा सकता है। रिसर्च के अनुसार यह केवल blood pressure का हिस्सा नहीं, बल्कि भविष्य में होने वाले गंभीर cardiovascular events का महत्वपूर्ण संकेतक भी हो सकता है। आगे और रिसर्च की जरूरत शोधकर्ताओं ने कहा कि भविष्य में और बड़े अध्ययनों की जरूरत होगी ताकि pulse pressure को clinical risk models में बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके और इसकी उपयोगिता को नियमित cardiovascular assessment का हिस्सा बनाया जा सके।  

surbhi मई 9, 2026 0
Illustration of heart disease risk linked to unhealthy diet showing processed food and cardiovascular health concept
खराब खानपान से बढ़ रहा दिल की बीमारी का खतरा: IHD से 40 लाख से ज्यादा मौतें, नई रिपोर्ट में खुलासा

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण खराब खानपान सामने आया है। Global Burden of Disease Study 2023 के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, असंतुलित डाइट के कारण साल 2023 में इस्केमिक हार्ट डिजीज (IHD) से करीब 40.6 लाख मौतें हुईं, जबकि 9.68 करोड़ DALYs (डिसेबिलिटी-एडजस्टेड लाइफ ईयर्स) दर्ज किए गए। क्या है IHD और क्यों है खतरनाक? इस्केमिक हार्ट डिजीज एक ऐसी स्थिति है, जिसमें दिल तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। यह आज भी दुनिया में मौत का प्रमुख कारण बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, डाइट इसका सबसे बड़ा बदला जा सकने वाला (modifiable) जोखिम कारक है। किन खानपान की गलतियों से बढ़ रहा खतरा? रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ प्रमुख डाइटरी फैक्टर्स इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा रहे हैं: नट्स और सीड्स (मेवे और बीज) का कम सेवन – सबसे बड़ा कारण साबुत अनाज (Whole Grains) की कमी फलों का कम सेवन नमक (सोडियम) का अधिक सेवन आंकड़ों के अनुसार, नट्स और सीड्स की कमी से प्रति 1 लाख आबादी पर 9.87 मौतें जुड़ी हैं, जबकि साबुत अनाज और फलों की कमी से क्रमशः 9.22 और 7.25 मौतें दर्ज की गईं। गरीब देशों पर ज्यादा असर रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लो और मिडिल इनकम देशों में इस बीमारी का बोझ ज्यादा है। इसका कारण पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की कमी और प्रोसेस्ड फूड पर बढ़ती निर्भरता है। सुधार के बावजूद खतरा बरकरार हालांकि 1990 से 2023 के बीच खराब डाइट से जुड़ी मौतों की दर में करीब 43.92% की कमी आई है, लेकिन बढ़ती आबादी और उम्रदराज़ लोगों की संख्या के कारण कुल मामलों में कमी नहीं आ पाई है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Black salt (Kala Namak) with spoon and health benefits highlighted for digestion and heart
सेहत का खजाना है काला नमक! पाचन से दिल तक, जानिए इसके जबरदस्त फायदे और सही इस्तेमाल का तरीका

स्वस्थ शरीर के लिए सही खानपान जरूरी हम जो खाते-पीते हैं, वही हमारे शरीर की सेहत तय करता है। संतुलित आहार (Balanced Diet) ही शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपनी डाइट में सही चीजों को शामिल करें और उनकी मात्रा का भी ध्यान रखें। इन्हीं में एक खास चीज है काला नमक, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देता है। 1. एसिडिटी और पेट फूलने से राहत काला नमक लीवर में पित्त (Bile) के उत्पादन को बढ़ाता है, जिससे एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या कम होती है। यह पेट में एसिड के स्तर को संतुलित रखता है और रिफ्लक्स की समस्या को भी नियंत्रित करता है। 2. पाचन तंत्र को बनाता है मजबूत अगर आपको खाना पचाने में दिक्कत होती है, तो काला नमक फायदेमंद साबित हो सकता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर को जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। 3. दिल की सेहत के लिए लाभकारी काला नमक शरीर में जमा खराब तत्वों (टॉक्सिन) को कम करने में मदद करता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है। यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक है प्राकृतिक “ब्लड थिनर” के रूप में काम करता है  विशेषज्ञों के अनुसार: रोजाना 6 ग्राम से ज्यादा काला नमक नहीं लेना चाहिए हाई बीपी वाले लोग 3.75 ग्राम तक ही सीमित रखें 4. डायबिटीज में मददगार काला नमक ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। इसकी थोड़ी मात्रा हाई ब्लड प्रेशर को भी कम करने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज मरीजों को फायदा मिल सकता है। 5. मांसपेशियों के लिए फायदेमंद काला नमक में पोटैशियम की अच्छी मात्रा होती है, जो मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। मसल्स क्रैम्प (ऐंठन) से राहत मिलती है शरीर की ताकत और संतुलन बना रहता है   काला नमक के नुकसान भी जान लें जहां काला नमक फायदेमंद है, वहीं इसका अधिक सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। इसमें फ्लोराइड और कुछ अन्य तत्व होते हैं, जो ज्यादा मात्रा में लेने पर शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संभावित दुष्प्रभाव: किडनी स्टोन का खतरा थायरॉइड की समस्या दांत और मुंह से जुड़ी परेशानियां

surbhi मार्च 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0