Hindu Rituals

Devotee offering mustard oil to Shani Dev idol in temple on Saturday Pooja ritual
शनि देव पूजा: क्यों चढ़ाया जाता है तेल, क्या है पूजा विधि और क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व?

भारतीय सनातन परंपरा में शनि देव को न्याय, कर्म और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। आम धारणा के विपरीत, शनि देव भय के नहीं बल्कि न्याय के देवता हैं, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। जीवन में आने वाले कठिन समय जैसे साढ़ेसाती या ढैय्या दरअसल व्यक्ति को आत्ममंथन, धैर्य और सही मार्ग पर चलने की सीख देते हैं। शनिवार का महत्व शनिवार का दिन विशेष रूप से शनि देव की आराधना के लिए समर्पित माना गया है। यह दिन हमें अपने कर्मों का मूल्यांकन करने और जीवन में अनुशासन व विनम्रता अपनाने का अवसर देता है। इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति प्राप्त होती है। शनि देव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है? धार्मिक मान्यताओं और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, तिल का तेल नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। जब भक्त शनि देव को तेल अर्पित करते हैं, तो यह प्रतीक होता है कि उनके जीवन की बाधाएं, कष्ट और नकारात्मक कर्म धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं। तेल की चिकनाहट और शीतलता शनि की कठोर ऊर्जा को शांत करती है, जिससे जीवन में स्थिरता और राहत मिलती है। पूजा विधि शनिवार के दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और शनि मंदिर जाएं। पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें सरसों के तेल का दीपक जलाएं शनि देव की मूर्ति पर तिल का तेल चढ़ाएं काले तिल, उड़द या लोहे की वस्तुएं दान करें शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय जरूरतमंदों को दान करना विशेष फलदायी माना गया है काले वस्त्र, जूते-चप्पल, काली उड़द आदि का दान करें नियमित रूप से शनि मंत्रों का जाप करें शनि मंत्र “ॐ शं शनेश्वराय नमः” या “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” इन मंत्रों का श्रद्धा से जाप करने से शनि दोषों में कमी आती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Devotees performing early morning holy bath during Vaishakh month with sunrise and river scene
वैशाख स्नान 2026: आज से शुरू हुआ पवित्र महीना, जानें रोज स्नान का महत्व और शास्त्रीय नियम

हिंदू धर्म में आस्था और आध्यात्म का विशेष महत्व है, और इसी क्रम में आज 3 अप्रैल 2026 से हिंदू नववर्ष का दूसरा महीना वैशाख शुरू हो गया है। इस महीने को “माधव मास” के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे माह में प्रतिदिन स्नान, पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, वैशाख कृष्ण प्रतिपदा तिथि 2 अप्रैल सुबह 7:41 बजे से शुरू होकर 3 अप्रैल सुबह 8:42 बजे तक रही, लेकिन उदया तिथि के आधार पर आज 3 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ माना गया है। क्यों जरूरी है वैशाख में रोज स्नान? धार्मिक ग्रंथों और व्रत-परंपराओं के अनुसार, चैत्र शुक्ल पूर्णिमा से लेकर वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तक प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान करना अत्यंत पुण्यदायक माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्योदय से पहले स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप, रोग और दोष समाप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यदि तीर्थ स्थल जैसे नदी, कुआं या सरोवर में स्नान संभव न हो, तो घर पर शुद्ध जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी समान फलदायी माना गया है। इस माह में नियमित स्नान करने से पुण्य में वृद्धि होती है और व्यक्ति का प्रभाव व तेज बढ़ता है। वैशाख में स्नान और पूजा के प्रमुख नियम प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना श्रेष्ठ माना गया है। स्नान के जल में गंगाजल मिलाना शुभ होता है। स्नान के दौरान अपने इष्ट देव का स्मरण करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “हरे राम हरे राम” मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप 108 या 1008 बार किया जा सकता है। इस माह में एक समय भोजन करने का भी विधान बताया गया है। पूरे 31 दिनों तक इन नियमों का पालन करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। मेष संक्रांति का विशेष महत्व वैशाख माह में मेष संक्रांति का पर्व भी आता है। इस दिन सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। साल 2026 में मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 9:39 बजे सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश के समय स्नान और दान करने से विशेष पुण्य और सूर्य कृपा प्राप्त होती है। वैशाख माह का धार्मिक महत्व वैशाख को “माधव मास” कहा जाता है, इसलिए इस पूरे महीने भगवान विष्णु और जल देवता की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस माह में किए गए स्नान, दान और पूजा से “अक्षय पुण्य” प्राप्त होता है, जो कभी समाप्त नहीं होता।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Devotees performing Maa Mahagauri पूजा on Maha Ashtami during Navratri
नवरात्रि 2026: महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना से मिलती है सुख-समृद्धि, जानें सही पूजा विधि और खास उपाय

चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन, जिसे महाअष्टमी के नाम से जाना जाता है, मां महागौरी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी को शांति, पवित्रता और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को धन-धान्य, सुख-शांति और सभी कष्टों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मिर्जापुर के विंध्यधाम के विद्वान आचार्य पं. अनुपम महाराज के अनुसार, महाअष्टमी के दिन विशेष पूजा और कुछ सरल उपाय करने से मां की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। पूजा विधि: ऐसे करें मां महागौरी की आराधना महाअष्टमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें। इसके बाद एक थाली में लाल चुनरी, चंदन, अक्षत, धूप, लाल और पीले पुष्प रखें। मां को अर्पित करने के लिए 7 गोमती चक्र, 7 कौड़ियां, चांदी या पीतल का कछुआ, लक्ष्मी बैल और पान रखें। मान्यता है कि पूजा के बाद कछुए को तिजोरी में रखने से धन की कमी नहीं होती। मां को प्रसन्न करने के लिए 56 भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो पूड़ी और लप्सी का भोग भी लगाया जा सकता है। कन्या पूजन का महत्व और सही विधि महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। 1 वर्ष से अधिक और 9 वर्ष से कम आयु की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। कन्याओं को हलवा और खीर का भोग खिलाएं मिष्ठान अर्पित करें और दक्षिणा दें ध्यान रखें कि कन्या पूजन में नमक का उपयोग न करें मां को नारियल अर्पित करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है धार्मिक मान्यता के अनुसार, नारियल की आठ आहुति देने से अष्टलक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। खास उपाय: दूर होंगे कष्ट और बढ़ेगा धन-धान्य मां महागौरी को 7 कौड़ियां और 7 गोमती चक्र अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही घी, शक्कर और बेल के मुरब्बे से हवन करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
मां दुर्गा के नौ रूप और उनके भोग दर्शाता धार्मिक चित्र
चैत्र नवरात्रि 2026: माता दुर्गा के नौ रूपों को लगाएं ये खास भोग, पूरी होंगी मनोकामनाएं

नई दिल्ली, एजेंसियां। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर दिन माता के अलग-अलग रूप को विशेष भोग अर्पित करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।   पहले से तीसरे दिन तक का भोग नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में दूध, घी या खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी या गुड़ अर्पित किया जाता है, जिससे ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बने पकवान या मेवे का भोग लगाना शुभ होता है।   चौथे से छठे दिन तक का भोग चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केला चढ़ाना शुभ माना जाता है, जिससे संतान सुख की प्राप्ति होती है। छठे दिन मां कात्यायनी को शहद या मीठा पान अर्पित किया जाता है।   सातवें से नौवें दिन तक का भोग सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने पदार्थ चढ़ाए जाते हैं। आठवें दिन मां महागौरी को हलवा-पूरी, खीर और नारियल का भोग लगाया जाता है। वहीं नौवें दिन मां सिद्धिदात्री को काला चना, हलवा और नारियल अर्पित कर नवरात्रि पूजा का समापन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से माता के नौ रूपों को भोग अर्पित करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 19, 2026 0
Different colored Kalava sacred threads tied on wrist during Hindu rituals symbolizing protection, peace and prosperity
कलावा के रंगों का रहस्य: कौन सा धागा देता है किस तरह का लाभ, जानें धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

  कलावा के रंगों का रहस्य: कौन सा धागा देता है किस तरह का लाभ, जानें धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान हाथ में कलावा या मौली बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे केवल एक साधारण धागा नहीं माना जाता, बल्कि आस्था, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक समझा जाता है। आमतौर पर लोग लाल रंग का कलावा बांधते हैं, लेकिन ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग रंग के कलावे का अपना अलग महत्व बताया गया है। माना जाता है कि यदि व्यक्ति अपनी जरूरत या उद्देश्य के अनुसार कलावा धारण करता है, तो उसे जीवन में विशेष लाभ मिल सकता है।   लाल कलावा: शक्ति और साहस का प्रतीक लाल रंग का कलावा सबसे अधिक प्रचलित है और इसे ऊर्जा, शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे धारण करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। इसे भगवान हनुमान और देवी दुर्गा की कृपा से भी जोड़ा जाता है, इसलिए पूजा-पाठ के समय अक्सर यही कलावा बांधा जाता है।   पीला कलावा: गुरु कृपा और ज्ञान की वृद्धि पीले रंग का कलावा गुरु ग्रह से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से ज्ञान, बुद्धि और शुभता में वृद्धि होती है। शिक्षा, अध्यात्म या ज्ञान से जुड़े कार्य करने वाले लोगों के लिए पीला कलावा विशेष रूप से शुभ माना जाता है।   काला कलावा: नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा काले रंग का कलावा आमतौर पर बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाव के लिए बांधा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्यक्ति को नजर दोष से बचाने के साथ-साथ शनि से जुड़ी परेशानियों को कम करने में भी सहायक माना जाता है।   हरा कलावा: स्वास्थ्य और तरक्की का संकेत हरा रंग समृद्धि, विकास और उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि हरा कलावा बांधने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और जीवन में प्रगति के नए अवसर मिलते हैं। ज्योतिष के अनुसार यह रंग बुध ग्रह से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।   सफेद कलावा: शांति और पवित्रता का प्रतीक सफेद रंग शांति, पवित्रता और संतुलन का प्रतीक है। सफेद कलावा धारण करने से मन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसे चंद्रमा और शुक्र ग्रह की कृपा से भी जोड़ा जाता है।   नीला कलावा: कर्म और सफलता के लिए नीला रंग धैर्य, अनुशासन और कर्म का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि नीला कलावा पहनने से व्यक्ति अपने कार्यों में एकाग्रता बनाए रखता है और सफलता की ओर आगे बढ़ता है। कई लोग इसे शनि से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भी धारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलावा केवल एक धागा नहीं, बल्कि आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। सही उद्देश्य और श्रद्धा के साथ इसे धारण करने से जीवन में मानसिक संतुलन, सुरक्षा और सफलता की भावना को बल मिलता है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Devotees performing rituals and tarpan on Chaitra Amavasya for ancestors
चैत्र अमावस्या 2026: पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए बेहद खास दिन, जानें तिथि और धार्मिक महत्व

  हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है, लेकिन Chaitra Amavasya को वर्ष की प्रमुख अमावस्याओं में गिना जाता है। यह दिन खास तौर पर पितरों की शांति, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए स्नान, तर्पण और दान से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है। देशभर में श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं या घर पर ही विधि-विधान से पूजा कर अपने पितरों का स्मरण करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना जाता है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।   चैत्र अमावस्या 2026 की तिथि और समय हिंदू पंचांग के अनुसार Chaitra Amavasya की तिथि 18 मार्च 2026 को सुबह 08:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च 2026 को सुबह 06:52 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार स्नान, दान और पितरों का तर्पण जैसे शुभ कार्य 19 मार्च को करना अधिक फलदायी माना गया है।   तामसिक भोजन से रखें दूरी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अमावस्या के दिन मांस, मछली, शराब और अन्य तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मन शांत रहता है और व्यक्ति पूजा-पाठ में पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हो पाता है।   घर में शांति बनाए रखना जरूरी अमावस्या के दिन घर में झगड़ा या विवाद करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दिन नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक हो सकता है, इसलिए सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी होता है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बनाए रखने से आध्यात्मिक वातावरण भी मजबूत होता है।   पितरों का तर्पण और सम्मान चैत्र अमावस्या को पितरों को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन पूर्वजों के नाम से तर्पण करना, उनका स्मरण करना और जरूरतमंदों को दान देना विशेष पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।   सुबह जल्दी उठकर करें पूजा अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और भगवान का ध्यान करना शुभ माना जाता है। देर तक सोने के बजाय सुबह ध्यान, जप और पूजा-पाठ करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है और मन में सकारात्मकता बनी रहती है।   दान-पुण्य का विशेष महत्व इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या धन का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। कहा जाता है कि अमावस्या के दिन किया गया दान कई गुना फल देता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा-पाठ, तर्पण और दान किया जाए, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक संतोष के साथ-साथ पारिवारिक सुख-शांति भी प्राप्त होती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0