वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा यह दावा किए जाने के बाद कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया, अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। वहीं ईरान ने भी अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा। दक्षिणी ईरान में कई स्थानों पर हमले अमेरिकी कार्रवाई के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न इलाकों से विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत, बंदर अब्बास, सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप के आसपास कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हमले रणनीतिक सैन्य ठिकानों और निगरानी प्रणालियों को निशाना बनाकर किए गए। बताया जा रहा है कि कार्रवाई में लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। हेलीकॉप्टर हादसे के बाद बढ़ा तनाव पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर गश्त के दौरान एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर पर हमला किया गया। अमेरिका का आरोप है कि हेलीकॉप्टर को एक ईरानी ड्रोन ने निशाना बनाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया। उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका इस घटना का जवाब देगा। एयर डिफेंस सिस्टम बने निशाना अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में ईरान के कई एयर डिफेंस सिस्टम, रडार प्रतिष्ठानों और निगरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस अभियान को "आत्मरक्षा में उठाया गया कदम" बताया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। ईरान ने दी सख्त प्रतिक्रिया ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी हमलों के बाद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी सैन्य दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और देश की सशस्त्र सेनाएं हर चुनौती का जवाब देने के लिए तैयार हैं। अराघची ने विदेशी सैन्य बलों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह देते हुए कहा कि बाहरी हस्तक्षेप क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाता है और इससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पहले भी दिया था जवाबी कार्रवाई का संकेत ईरानी मीडिया ने हमलों से पहले सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा था कि यदि हेलीकॉप्टर घटना को आधार बनाकर ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई की गई तो उसका "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिकी आरोपों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है और हेलीकॉप्टर गिराने के दावे पर भी स्पष्ट टिप्पणी से परहेज किया है। वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
वॉशिंगटन/होर्मुज स्ट्रेट: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के निकट एक अमेरिकी सैन्य अपाचे हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में सवार दोनों पायलटों और चालक दल के अन्य सदस्यों को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। बचाव अभियान में सुरक्षित निकाला गया चालक दल रिपोर्टों के अनुसार, हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के तुरंत बाद अमेरिकी सैन्य बलों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बचाव दल ने चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया। प्रारंभिक जानकारी में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि हेलीकॉप्टर तकनीकी खराबी, मौसम संबंधी कारणों या किसी अन्य वजह से दुर्घटनाग्रस्त हुआ। रणनीतिक क्षेत्र में हुआ हादसा होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में अमेरिका, ईरान और अन्य देशों की सैन्य गतिविधियां लगातार बनी रहती हैं। ऐसे में अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर का दुर्घटनाग्रस्त होना सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी संवेदनशीलता यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने तथा संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। हाल के दिनों में क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और संघर्ष की घटनाओं ने पहले ही सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हादसे का सीधा संबंध किसी सैन्य कार्रवाई से है या नहीं, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। जांच एजेंसियां जुटीं अमेरिकी रक्षा विभाग ने दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। हेलीकॉप्टर के फ्लाइट डेटा, तकनीकी रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक दुर्घटना के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्षेत्रीय हालात पर बनी हुई है नजर होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के क्षेत्र में जारी रणनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर अमेरिकी सैन्य बल स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल चालक दल के सुरक्षित होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अमेरिकी सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब समाप्त हो चुका है। क्षेत्र में हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला अभी भी जारी है। अमेरिकी कांग्रेस में बोले रूबियो- अब ईरान के भीतर नहीं हो रहे लगातार हमले हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष रूबियो ने कहा कि अमेरिका अब ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए लगातार हमले नहीं कर रहा है, क्योंकि अभियान अपने प्रमुख उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। वॉशिंगटन का दावा- मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक क्षमता को पहुंचाया बड़ा नुकसान रूबियो के अनुसार अमेरिका ने ईरान के रक्षा औद्योगिक ढांचे, मिसाइल लॉन्चरों, ड्रोन भंडार और पारंपरिक नौसेना को गंभीर क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यही इस अभियान की सफलता का पैमाना था। होर्मुज संकट बरकरार, ईरान ने सहयोगी देशों पर बढ़ाया दबाव अमेरिका के दावों के बीच ईरान ने क्षेत्रीय सहयोगी देशों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई जारी रखी है। साथ ही Strait of Hormuz को लेकर तनाव भी बना हुआ है। कुवैत और बहरीन पर हमलों से बढ़ी चिंता, अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर बुधवार को ईरानी हमलों में कुवैत के एक हवाई अड्डे पर एक व्यक्ति की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल हुए। बहरीन में भी ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं, जहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। कांग्रेस में घिरे रूबियो, डेमोक्रेट सांसदों ने उठाए सवाल डेमोक्रेट सांसदों ने रूबियो के ‘युद्ध समाप्त’ होने के दावे पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब क्षेत्र में हमले जारी हैं और अमेरिकी सैनिक खतरे में हैं, तब संघर्ष समाप्त होने का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता। सांसद सारा जैकब्स का पलटवार- नाम बदलने से हालात नहीं बदलते Sara Jacobs ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभियान का नाम बदलने या उसे समाप्त घोषित करने से यह तथ्य नहीं बदलता कि क्षेत्र में तनाव जारी है और अमेरिकी सैनिक अभी भी जोखिम में हैं। वॉशिंगटन-तेहरान वार्ता में यूरेनियम भंडार बना सबसे बड़ा मुद्दा रूबियो ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार सबसे महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस समझौता हो। शांति समझौते पर अब भी नहीं बनी सहमति अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार तेहरान ने अभी तक किसी अंतिम शांति समझौते को मंजूरी नहीं दी है। दोनों पक्षों के बीच दस्तावेजों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी नहीं मिली है। युद्ध खत्म या विराम? पश्चिम एशिया में बनी हुई है अनिश्चितता रूबियो भले ही ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त घोषित कर रहे हों, लेकिन मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और परमाणु वार्ता पर गतिरोध यह संकेत देते हैं कि अमेरिका-ईरान टकराव का अध्याय अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का सपना देख रहे लाखों छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। Joint Seat Allocation Authority काउंसलिंग 2026 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके साथ जारी सीट मैट्रिक्स में पता चला है कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में बीटेक सीटों की संख्या इस वर्ष बढ़ा दी गई है। सीटों में हुई इस बढ़ोतरी से अधिक छात्रों को देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पाने का मौका मिलेगा। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संस्थानवार और शाखावार सीटों का पूरा विवरण देख सकते हैं। पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ीं सीटें JoSAA द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में IITs में बीटेक की कुल 18,160 सीटें उपलब्ध थीं। वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 18,951 हो गई है। यानी इस साल कुल 791 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इससे उन छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई एडवांस्ड) के माध्यम से IIT में दाखिला लेना चाहते हैं। कंप्यूटर साइंस नहीं, इस शाखा में सबसे ज्यादा सीटें आमतौर पर इंजीनियरिंग अभ्यर्थियों के बीच कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे लोकप्रिय शाखा मानी जाती है। बेहतर प्लेसमेंट, आकर्षक वेतन पैकेज और बढ़ती तकनीकी मांग के कारण अधिकांश छात्र इसी शाखा को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि सीटों की संख्या के मामले में इस बार भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग सबसे आगे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार— मैकेनिकल इंजीनियरिंग : 2,286 सीटें कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग : 2,183 सीटें इस तरह सीटों की संख्या के लिहाज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग ने कंप्यूटर साइंस को पीछे छोड़ दिया है। सीट मैट्रिक्स क्यों है महत्वपूर्ण? JoSAA काउंसलिंग के दौरान सीट मैट्रिक्स छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होता है। इसमें देश के सभी IIT, NIT, IIIT और GFTI संस्थानों में उपलब्ध सीटों का विस्तृत विवरण दिया जाता है। इसकी मदद से छात्र यह जान सकते हैं— किस संस्थान में कितनी सीटें उपलब्ध हैं किस शाखा में प्रवेश के कितने अवसर हैं विभिन्न श्रेणियों के लिए सीटों का वितरण काउंसलिंग विकल्प भरने की बेहतर रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि सीटों में बढ़ोतरी से इस वर्ष IIT में प्रवेश के अवसर पहले की तुलना में बेहतर हो सकते हैं, हालांकि प्रतिस्पर्धा अभी भी काफी कड़ी रहने वाली है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति Donald Trump ने संघर्षविराम की नई व्याख्या पेश की है। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में सीजफायर का मतलब हमेशा पूरी तरह युद्धविराम नहीं होता, बल्कि कई बार इसका अर्थ केवल कम तीव्रता वाली सैन्य कार्रवाई भी हो सकता है। व्हाइट हाउस में ट्रंप का संकेत- अमेरिकी सैनिक मरे तो खत्म हो सकता है संघर्षविराम ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि किसी हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत होती है और उसके पीछे ईरान की भूमिका साबित होती है, तो मौजूदा संघर्षविराम जारी रखना मुश्किल होगा। वॉशिंगटन पोस्ट रिपोर्ट: सहयोगियों को ट्रंप ने दिया सख्त संदेश रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने अपने करीबी अधिकारियों से कहा है कि छोटे स्तर की झड़पों को कुछ समय तक सहन किया जा सकता है, लेकिन अमेरिकी सैनिकों पर घातक हमले की स्थिति में अमेरिका की रणनीति बदल सकती है। होर्मुज के पास अमेरिकी कार्रवाई के बाद बढ़ा नया तनाव ताजा तनाव तब बढ़ा जब अमेरिका ने ईरान के केश्म द्वीप के निकट एक सैन्य नियंत्रण केंद्र और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक लक्ष्य पर कार्रवाई की। इसके बाद क्षेत्र में हालात और संवेदनशील हो गए। कुवैत और बहरीन में ईरानी हमले, भारतीय नागरिक की मौत ईरान की जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। ट्रंप का दावा- ईरानी हमले हालिया अमेरिकी कार्रवाई का जवाब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हर सैन्य कार्रवाई के पीछे कोई न कोई कारण होता है। उनके अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी और स्थिति को नियंत्रण में लाया जा रहा है। वॉशिंगटन-तेहरान संपर्क अब भी जारी, ट्रंप ने खारिज की बातचीत रुकने की खबरें ईरानी मीडिया में वार्ता रुकने की खबरों के बावजूद ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संपर्क बना हुआ है और बातचीत की प्रक्रिया जारी है। तीन महीने से खाड़ी क्षेत्र में जारी है टकराव 28 फरवरी से शुरू हुए इस संकट के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। 8 अप्रैल को संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बाद भी छिटपुट सैन्य कार्रवाइयां जारी रहीं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अटका विवाद, वैश्विक ऊर्जा बाजार की बढ़ी चिंता Strait of Hormuz इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए क्षेत्र में अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर अब भी आमने-सामने हैं अमेरिका-ईरान वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि तेहरान प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों तक पहुंच की मांग कर रहा है। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ है। युद्ध और कूटनीति साथ-साथ, पश्चिम एशिया में अनिश्चितता बरकरार ट्रंप के ताजा बयान ने संकेत दिया है कि संघर्षविराम लागू होने के बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बातचीत जारी है, लेकिन किसी भी बड़े हमले से हालात फिर तेजी से बदल सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर नए विवाद की स्थिति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान बिना किसी शुल्क के होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमत हो गया है। ईरान का कहना है कि मौजूदा वार्ता के मसौदे में ऐसी कोई शर्त शामिल नहीं है। ईरान बोला- ट्रंप के बयान में सच कम, दावे ज्यादा ईरान की सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े मीडिया संस्थान Fars News Agency ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा कि ट्रंप के हालिया बयान वास्तविक बातचीत से मेल नहीं खाते। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसे दावे कर रहे हैं जो अभी तक किसी अंतिम समझौते का हिस्सा नहीं हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वार्ता अभी जारी है और किसी भी प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। किस मसौदे पर चल रही है चर्चा? रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच "कमिटमेंट के बदले कमिटमेंट" के सिद्धांत पर आधारित एक प्रस्तावित समझौते पर चर्चा हो रही है। तेहरान ने अभी तक इस मसौदे को अंतिम स्वीकृति नहीं दी है। ईरानी पक्ष का दावा है कि ट्रंप जिन शर्तों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख कर रहे हैं, वे वर्तमान ड्राफ्ट डील का हिस्सा नहीं हैं। ट्रंप ने क्या कहा था? व्हाइट हाउस में पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात सामान्य होने की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा था कि ईरान जल्द ही समुद्री मार्ग में मौजूद बारूदी सुरंगों को हटाएगा या निष्क्रिय करेगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि जहाजों की आवाजाही पर लगी बाधाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं और क्षेत्र में फंसे जहाज अब सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक लौट सकेंगे। होर्मुज स्ट्रेट क्यों है अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तनाव या समझौते का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है। अभी भी जारी है वार्ता दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन ईरान और अमेरिका के बयानों में अंतर यह संकेत देता है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। ऐसे में संभावित शांति समझौते को लेकर अंतिम घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष आधिकारिक रूप से समझौते की पुष्टि नहीं करते, तब तक होर्मुज स्ट्रेट, क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर अपने आक्रामक बयानों को लेकर वैश्विक चर्चा में हैं। इस बार ट्रम्प ने ओमान को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ओमान, ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान-अमेरिका संबंध पहले से ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की लगातार बढ़ती सैन्य चेतावनियां दुनिया में अस्थिरता और रणनीतिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। ट्रम्प की धमकियों की सूची में ओमान बना 15वां देश ओमान अब वह 15वां देश बन गया है, जिसे लेकर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से सैन्य कार्रवाई या सख्त कदम की चेतावनी दी है। इससे पहले भी ट्रम्प कई देशों के खिलाफ आक्रामक बयान दे चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने ईरान, इराक, सीरिया, यमन, सोमालिया, नाइजीरिया और वेनेजुएला समेत कई देशों में सैन्य कार्रवाई की। इनमें कुछ ऑपरेशन ड्रोन हमलों के जरिए हुए, जबकि कुछ में सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया गया। विशेष रूप से ईरान को लेकर अमेरिका का रुख सबसे ज्यादा सख्त माना जा रहा है। हाल के महीनों में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी ठिकानों पर हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। कनाडा से क्यूबा तक, कई देशों को दी कब्जे की चेतावनी ट्रम्प केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई देशों को अमेरिका में शामिल करने या उन पर नियंत्रण स्थापित करने जैसे विवादित बयान भी दिए हैं। बताया जा रहा है कि कनाडा, ग्रीनलैंड, क्यूबा और वेनेजुएला को लेकर भी ट्रम्प ने बेहद आक्रामक टिप्पणियां की थीं। इसके अलावा पनामा नहर को लेकर भी उन्होंने अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इन बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में चिंता बढ़ा दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी अमेरिका की पारंपरिक विदेश नीति से अलग दिखाई देती है। चुनाव से पहले शांति की बात, सत्ता में आते ही बदले तेवर राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प खुद को “शांति स्थापित करने वाले नेता” के रूप में पेश करते रहे थे। उन्होंने कई बार कहा था कि अगर वह सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू ही नहीं होता। ट्रम्प अपने विरोधियों पर अमेरिका को “अनावश्यक युद्धों” में धकेलने का आरोप लगाते थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद उनका रुख अधिक आक्रामक दिखाई देने लगा। विश्लेषकों का कहना है कि ट्रम्प अब दबाव की राजनीति के जरिए अपने विरोधियों और सहयोगियों दोनों को संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका किसी भी हद तक जा सकता है। क्या है ‘मैडमैन थ्योरी’, जिससे जोड़ा जा रहा ट्रम्प को राजनीतिक विशेषज्ञ ट्रम्प की रणनीति को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Richard Nixon की “मैडमैन थ्योरी” से जोड़कर देख रहे हैं। इस सिद्धांत के तहत नेता अपने विरोधियों को यह एहसास दिलाने की कोशिश करता है कि वह अप्रत्याशित और बेहद कठोर कदम उठा सकता है। इसका मकसद विरोधी देशों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना होता है। निक्सन ने वियतनाम युद्ध के दौरान इसी रणनीति का इस्तेमाल किया था। माना जाता है कि ट्रम्प भी कई बार इसी शैली में बयान देकर विरोधियों को डराने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी- उल्टा पड़ सकता है दबाव कई रणनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रम्प की यह रणनीति हर जगह असरदार साबित नहीं हो रही। रूस और ईरान जैसे देशों पर अमेरिकी दबाव का सीमित असर देखने को मिला है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सैन्य धमकियों से ईरान जैसे देश अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि बुशेहर प्रांत के पास एक अमेरिकी विमान को मार गिराया गया है। अमेरिका ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट कहा है कि बुशेहर क्षेत्र में अमेरिका का कोई विमान नष्ट नहीं हुआ और ईरानी मीडिया की रिपोर्ट गलत है। ईरानी सरकारी टीवी ने “दुश्मन विमान” गिराने का किया दावा ईरान के सरकारी टीवी ने शुक्रवार 29 मई को दावा किया कि बुशेहर प्रांत के जाम इलाके में ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने एक “दुश्मन विमान” को निशाना बनाकर मार गिराया। रिपोर्ट में जाम काउंटी के गवर्नर मसूद तंगस्तानी के हवाले से कहा गया कि ईरान की वायु रक्षा प्रणाली ने सफलतापूर्वक विमान को तबाह कर दिया। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, मसूद तंगस्तानी ने कहा कि रात के समय यह कार्रवाई की गई और इसके बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है। अमेरिका ने कहा- कोई विमान नहीं गिराया गया ईरानी दावों के सामने आने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। CENTCOM ने कहा कि ईरान में अमेरिकी विमान गिराए जाने की खबरें पूरी तरह गलत हैं और उस क्षेत्र में अमेरिका का कोई विमान नष्ट नहीं हुआ है। एक अमेरिकी अधिकारी ने भी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि बुशेहर प्रांत के ऊपर अमेरिकी सैन्य विमान गिराए जाने का दावा तथ्यहीन है। खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा तनाव यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और बयानबाजी में तेजी देखी गई है। इसी बीच युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर भी कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। युद्धविराम और जहाजों की आवाजाही पर चल रही बातचीत रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही आसान बनाने को लेकर बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि अब तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और बातचीत जारी है। वैश्विक स्तर पर बढ़ी चिंता ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी बयानबाजी और सैन्य दावों से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
भारत के नौवहन महानिदेशालय ने जानकारी दी है कि ईरान में हिरासत में लिए गए 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया गया है। ये नाविक जुलाई 2025 से ईरान में बंद थे। सभी नाविक ऑयल टैंकर MV Harbor Phoenix पर सवार थे, जिसे ईरान ने जास्क पोर्ट के पास रोका था। भारत सरकार के प्रयासों के बाद मिली रिहाई महानिदेशालय के मुताबिक, लगातार कूटनीतिक बातचीत और भारत सरकार के प्रयासों के बाद सभी नाविक सुरक्षित रूप से रिहा कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि अब नाविकों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। जहाज को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई भारत सरकार ने फिलहाल नाविकों की गिरफ्तारी के कारणों या जहाज से जुड़े मामले में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। जहाज ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, MV Harbor Phoenix पलाऊ के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर है। भारत ने अपनाई शांत कूटनीति रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस पूरे मामले में शांत और संतुलित कूटनीति अपनाई। बातचीत के दौरान भारत ने सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए सीधे राजनयिक संपर्क बनाए रखा। भारत के ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों देशों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में भारत ने इस संवेदनशील मामले में संतुलित रुख बनाए रखा। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर बढ़ी निगरानी ईरानी बल पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की निगरानी और कार्रवाई बढ़ा रहे हैं। ईरान अक्सर उन जहाजों को रोकने की बात कहता रहा है, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का आरोप होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार बढ़ रहा तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ा है। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध भी बढ़ाए हैं। यह कदम अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद और तेज हुआ है। दुनिया के लिए बेहद अहम है यह समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए मंगाता है। नाविकों की सुरक्षित वापसी पर परिवारों में राहत भारतीय नाविकों की रिहाई की खबर सामने आने के बाद उनके परिवारों में राहत का माहौल है। कई महीनों से परिवार सरकार से लगातार हस्तक्षेप की मांग कर रहे थे। अब सभी नाविकों के जल्द भारत लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।
Quadrilateral Security Dialogue देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अहम चर्चा हुई। बैठक के बाद जारी साझा बयान में सुरक्षित और बिना रुकावट समुद्री व्यापार पर जोर दिया गया। दिल्ली में हुई इस बैठक में S. Jaishankar समेत चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने वैश्विक सप्लाई चेन, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता पर बातचीत की। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता बैठक में खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। यह इलाका दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि QUAD का यह संदेश अप्रत्यक्ष रूप से Iran पर दबाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है। QUAD ने क्या कहा? साझा बयान में कहा गया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। चारों देशों ने कहा कि: समुद्री व्यापार सुरक्षित रहना चाहिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है सप्लाई चेन मजबूत और भरोसेमंद होनी चाहिए ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाया जाएगा समुद्री सुरक्षा पर बढ़ेगा सहयोग QUAD देशों ने समुद्री निगरानी, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, पनडुब्बी केबल सुरक्षा, ट्रेनिंग और आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। आतंकवाद पर भी सख्त संदेश एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है और आतंकवाद के खिलाफ QUAD देशों की नीति “जीरो टॉलरेंस” की है।
United States और Iran के बीच जारी तनाव के बीच दक्षिणी ईरान में सोमवार को बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास “सेल्फ-डिफेंस स्ट्राइक” करते हुए मिसाइल लॉन्च साइट्स और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की नौकाओं को निशाना बनाया। अमेरिका ने दावा किया कि ईरानी नौकाएं रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं। अमेरिकी सेना ने क्या कहा? अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता Tim Hawkins ने कहा कि कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए की गई। उनके मुताबिक, अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान के उन ठिकानों पर हमला किया जहां से अमेरिकी सेना के लिए खतरा पैदा हो रहा था। कार्रवाई के दौरान मिसाइल लॉन्च साइट्स और ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया गया। IRGC की नावों पर कार्रवाई एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ऑपरेशन से पहले अमेरिकी सेना ने IRGC की दो नौकाओं को जलडमरूमध्य में माइन बिछाते हुए देखा था। इसके बाद अमेरिकी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन नौकाओं को नष्ट कर दिया। अधिकारी ने दावा किया कि बंदर अब्बास में मौजूद एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद उस मिसाइल सिस्टम पर भी हमला किया गया। ईरान का दावा- कई लोगों की मौत ईरानी मीडिया के मुताबिक, लारक द्वीप पर हुए हमले में कई लोगों की मौत हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि मृतक सैन्यकर्मी थे या आम नागरिक। इसके अलावा बंदर अब्बास, सिरिक और जास्क इलाकों में भी धमाकों की खबरें सामने आईं। युद्धविराम के बीच बढ़ा तनाव यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम और शांति वार्ता को लेकर बातचीत जारी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह सीमित कार्रवाई थी और इसका मतलब युद्धविराम खत्म होना नहीं है। ट्रंप ने फिर उठाया यूरेनियम मुद्दा इस बीच Donald Trump ने एक बार फिर ईरान के संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने की मांग दोहराई। ट्रंप ने कहा कि ईरान के “न्यूक्लियर डस्ट” को या तो अमेरिका को सौंपा जाए या अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी “आधा-अधूरा” समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। अब्राहम अकॉर्ड्स का भी जिक्र ट्रंप ने मध्य पूर्व में Abraham Accords के विस्तार की बात भी दोहराई। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति व्यवस्था के तहत भविष्य में ईरान को भी इस ढांचे में शामिल किया जा सकता है।
Donald Trump प्रशासन एक बार फिर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य कदम की तैयारी में जुटा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस, पेंटागन और खुफिया एजेंसियों में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बना दी गई है। इसी बीच ट्रंप ने अपने निजी कार्यक्रम और छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे ट्रंप अमेरिका में 25 मई को मेमोरियल डे के चलते लंबा वीकेंड है। ट्रंप पहले न्यू जर्सी स्थित अपने गोल्फ क्लब में समय बिताने वाले थे, लेकिन उन्होंने अचानक कार्यक्रम बदल दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने इसकी वजह “सरकारी परिस्थितियां” बताई। इसके बाद उनका काफिला वॉशिंगटन डीसी में तेजी से व्हाइट हाउस लौटता देखा गया। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों के कई अधिकारियों ने भी अपनी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। विदेशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए “रिकॉल रोस्टर” अपडेट किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य पूर्व में मौजूद कुछ अमेरिकी सैनिकों को संवेदनशील इलाकों से हटाया भी जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका संभावित जवाबी हमले की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। ईरान के IRGC की बड़ी चेतावनी Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी दी है। IRGC ने कहा कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र में NOTAM जारी कर सोमवार तक उड़ानों पर रोक लगा दी है। इसे संभावित सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका ने दिया “फाइनल ऑफर” रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को एक “अंतिम प्रस्ताव” दिया है। कहा जा रहा है कि अगर तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो अगले 24 घंटे में सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि “ईरान समझौता करना चाहता है” और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। असली विवाद क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करे ईरान इस मांग को मानने को तैयार नहीं है तेहरान अपने विदेशी फ्रीज एसेट्स जारी करने और युद्ध नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल व्यवस्था की भी बात कर रहा है विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ यही मुद्दे हैं। पाकिस्तान और कतर निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका रिपोर्ट्स के अनुसार Asim Munir इस समय तेहरान में मौजूद हैं। वहीं कतर का प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंचा हुआ है। दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख की मुलाकात IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों से हो सकती है। फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों में जवाबी कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। 8 अप्रैल को सीजफायर पर सहमति बनी, लेकिन उसके बाद भी धमकियों, प्रतिबंधों और सैन्य तैयारियों का सिलसिला जारी है। अब ट्रंप प्रशासन की गतिविधियों से यह आशंका बढ़ गई है कि हालात फिर से बड़े टकराव की ओर बढ़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने चेतावनी दी है कि कूटनीति का रास्ता बहुत जल्द बंद हो सकता है। इसी बीच अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर की जांच किए जाने से हालात और संवेदनशील हो गए हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में शांति समझौता होगा या फिर मध्य पूर्व में नया सैन्य टकराव शुरू होगा। ट्रंप बोले- “फैसला बेहद करीब” वॉशिंगटन के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “अंतिम चरण” में है। उन्होंने कहा, “मामला बिल्कुल आखिरी मोड़ पर है। अगर हमें सही जवाब नहीं मिले तो हालात बहुत तेजी से बदलेंगे। हम पूरी तरह तैयार हैं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौता “बहुत जल्दी” या “कुछ दिनों में” हो सकता है, लेकिन इसके लिए तेहरान को “100 प्रतिशत सही जवाब” देना होगा। ईरान ने कहा- अमेरिकी प्रस्ताव की जांच जारी इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान को अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं और तेहरान उनके सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए विदेशी फंड जारी किए जाएं और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जाए। इससे पहले ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर युद्ध फिर शुरू करने की तैयारी का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमला हुआ तो ईरान “कड़ा जवाब” देगा। ईरानी जहाज पर चढ़ी अमेरिकी सेना यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, बुधवार को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर के जरिए ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर पर चढ़कर जांच की। अमेरिका को शक था कि जहाज प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। तलाशी के बाद जहाज को छोड़ दिया गया, लेकिन उसका रास्ता बदलने का आदेश दिया गया। CENTCOM ने दावा किया कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद अमेरिकी सेना अब तक 91 व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदलवा चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटों में 26 जहाजों को सुरक्षा देते हुए होर्मुज से गुजरने दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा तो दुनिया भर में तेल, गैस, खाद और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका पर भी बढ़ रहा आर्थिक दबाव अमेरिका में बढ़ती तेल और गैस कीमतों की वजह से ट्रंप प्रशासन पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि वॉशिंगटन एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ समझौते की संभावना भी खुली रखना चाहता है। फिलहाल दुनिया की नजर आने वाले कुछ दिनों पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेगा कि मध्य पूर्व में शांति कायम होगी या नया संघर्ष शुरू होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद दावा किया है कि अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हैं कि Iran के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य हर हाल में खुला रहना चाहिए। ट्रंप ने यह बयान चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि उनकी चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ मध्य पूर्व, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ‘होर्मुज खुला रहना बेहद जरूरी’ ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे खुला रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक दबाव और नाकेबंदी के कारण पिछले ढाई सप्ताह में ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी बहुत जोर देकर कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए।” ईरान को लेकर अमेरिका-चीन की ‘अच्छी समझ’ ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान और ताइवान के मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच “अच्छी समझ” बनी है। उन्होंने कहा, “हमने ईरान और ताइवान दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुझे लगता है कि इन विषयों पर हमारी समझ काफी अच्छी रही।” हालांकि चीन की ओर से ट्रंप के इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ताइवान मुद्दे पर भी हुई चर्चा ट्रंप ने बताया कि शी चिनफिंग ने ताइवान को लेकर अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से रखीं। उनके अनुसार, चीनी राष्ट्रपति नहीं चाहते कि ताइवान में किसी तरह का स्वतंत्रता संघर्ष या सैन्य टकराव हो, क्योंकि इससे बड़ा क्षेत्रीय संकट पैदा हो सकता है। ट्रंप ने कहा, “मैंने उनकी बात पूरी तरह सुनी। मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है।” ताइवान को हथियार बिक्री पर क्या बोले ट्रंप? प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप से 1982 के उस अमेरिकी आश्वासन को लेकर सवाल पूछा गया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बिक्री के मामलों में चीन से सलाह नहीं लेगा। इस पर ट्रंप ने कहा, “1982 बहुत पुरानी बात हो चुकी है। हमने ताइवान और हथियारों की बिक्री पर चर्चा की। यह एक अहम मुद्दा है और मैं जल्द इस पर फैसला लूंगा।” वैश्विक तनाव के बीच अहम मानी जा रही यात्रा ट्रंप की यह चीन यात्रा ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव, ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और चीन वास्तव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा को लेकर साझा रुख अपनाते हैं, तो इसका असर वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भारत बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका है। नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दों का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। ‘अमेरिका पर भरोसा नहीं’ अराघची ने कहा, “40 दिनों की लड़ाई के बाद जब अमेरिका को यह समझ आ गया कि वह ईरान के खिलाफ अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता, तब उसने बातचीत का प्रस्ताव रखा। हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के कई कारण हैं, जबकि अमेरिका के पास ईरान पर अविश्वास करने का कोई ठोस कारण नहीं है। भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि भारत फारसी खाड़ी के सभी देशों का मित्र है और उसकी अच्छी साख है। उन्होंने कहा, “भारत इस क्षेत्र में कूटनीति को बढ़ावा देने, शांति और सुरक्षा स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हम भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे।” होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिया बड़ा बयान अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी रखने के पक्ष में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात बेहद जटिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय उन देशों के जहाजों के जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में हैं। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हालिया तनाव के कारण इस क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। चाबहार पोर्ट पर भारत की तारीफ ईरानी विदेश मंत्री ने Chabahar Port परियोजना को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काम कुछ धीमा हुआ है, लेकिन यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच का सुनहरा दरवाजा साबित होगा।” भारत से सहयोग जारी रखने की उम्मीद अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत चाबहार पोर्ट परियोजना पर काम जारी रखेगा ताकि इसका पूर्ण विकास हो सके और इससे भारत सहित पूरे क्षेत्र को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत संतुलित कूटनीति के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के United Arab Emirates दौरे के दौरान भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत को LPG और तेल आपूर्ति के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है। अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार (15 मई) को अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में UAE की राजधानी Abu Dhabi पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता दोनों देशों के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इससे भारत को लंबे समय तक स्थिर LPG आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में UAE के साथ यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर भी सहमति भारत और UAE के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर भी समझौता हुआ है। इससे भविष्य में वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत को अतिरिक्त ऊर्जा सुरक्षा मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करेगी। पीएम मोदी ने जताया आभार वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने UAE सरकार के स्वागत और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि UAE वायुसेना द्वारा भारतीय विमान को एस्कॉर्ट किया जाना भारत के लोगों के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने हालिया प्राकृतिक आपदा के दौरान UAE द्वारा संवेदनाएं व्यक्त करने पर भी धन्यवाद दिया। UAE पर हमलों की कड़ी निंदा पीएम मोदी ने मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यूएई को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। कठिन परिस्थितियों में आपने जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, वह सराहनीय है।” ‘होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहना जरूरी’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला, सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत हर स्थिति में UAE के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच भारत-UAE की यह नई ऊर्जा साझेदारी आने वाले समय में भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज खाड़ी में बाधाओं और सप्लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका असर सबसे ज्यादा दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, पड़ोसी देशों की तुलना में India में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर Pakistan में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में वहां पेट्रोल करीब 64 प्रतिशत और डीजल 61 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। फिलहाल पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.42 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के कारण वहां आम लोगों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू किया है और कई स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है। नेपाल में दक्षिण एशिया का सबसे महंगा पेट्रोल Nepal भी गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। नेपाल अब दक्षिण एशिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश बन गया है। जनवरी 2026 में जहां पेट्रोल 137 नेपाली रुपये प्रति लीटर था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 219 नेपाली रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। नेपाल पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर है, जिसके चलते परिवहन और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। श्रीलंका में लागू हुई ईंधन राशनिंग Sri Lanka में भी हालात सामान्य नहीं हैं। वहां ऑटो डीजल की कीमतों में 26 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार को हालात नियंत्रित करने के लिए ईंधन राशनिंग लागू करनी पड़ी है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और स्कूल गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि तेल की खपत कम की जा सके। बांग्लादेश में भी बढ़ा दबाव Bangladesh ने शुरुआत में सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते बोझ के बाद सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। देश में कई जगह पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जिलों में ईंधन की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। भारत में सीमित बढ़ोतरी से राहत इन हालातों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है। 15 मई 2026 तक पेट्रोल में करीब 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है that केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने वैश्विक कीमतों के बड़े झटके का असर काफी हद तक खुद संभाला, जिससे आम जनता पर दबाव सीमित रहा। होर्मुज संकट का वैश्विक असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में शुक्रवार को United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पश्चिम एशिया संकट पर हुई अहम चर्चा अबू धाबी में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने का समर्थक रहा है। ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी’ पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में गिना जाता है। UAE पर हमलों की निंदा प्रधानमंत्री मोदी ने UAE पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि UAE को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में UAE ने जिस संयम और समझदारी के साथ स्थिति को संभाला है, वह सराहनीय है। ‘भारत हर हाल में UAE के साथ’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर भी चर्चा हुई है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार को अपने विदेश दौरे के पहले चरण में United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय हालात को लेकर अहम चर्चा हुई। “मुश्किल वक्त में भारत UAE के साथ” बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने UAE में हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि इस कठिन समय में भारत पूरी मजबूती के साथ UAE के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत और UAE के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे। पीएम मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह खोलना जरूरी है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। ऊर्जा और निवेश पर रहेगा फोकस पीएम मोदी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और UAE के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों देशों के बीच LPG सप्लाई और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद बढ़ी अहमियत UAE द्वारा तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद भारत-UAE ऊर्जा साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच दोनों देशों का सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? Ministry of External Affairs के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांडला और मंगलूरु पहुंचेंगे टैंकर मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है। वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है। अब तक 13 भारतीय जहाजों ने पार किया मार्ग अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ओमान के पास हमले में डूबी भारतीय नौका इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई। यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है। चालक दल सुरक्षित, भारत लाने की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।