Donald Trump प्रशासन एक बार फिर ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य कदम की तैयारी में जुटा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस, पेंटागन और खुफिया एजेंसियों में हाई अलर्ट जैसी स्थिति बना दी गई है। इसी बीच ट्रंप ने अपने निजी कार्यक्रम और छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं, जिससे अटकलें और तेज हो गई हैं। बेटे की शादी में भी नहीं जाएंगे ट्रंप अमेरिका में 25 मई को मेमोरियल डे के चलते लंबा वीकेंड है। ट्रंप पहले न्यू जर्सी स्थित अपने गोल्फ क्लब में समय बिताने वाले थे, लेकिन उन्होंने अचानक कार्यक्रम बदल दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह अपने बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और बेटिना एंडरसन की शादी में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने इसकी वजह “सरकारी परिस्थितियां” बताई। इसके बाद उनका काफिला वॉशिंगटन डीसी में तेजी से व्हाइट हाउस लौटता देखा गया। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों के कई अधिकारियों ने भी अपनी छुट्टियां रद्द कर दी हैं। विदेशों में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए “रिकॉल रोस्टर” अपडेट किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार मध्य पूर्व में मौजूद कुछ अमेरिकी सैनिकों को संवेदनशील इलाकों से हटाया भी जा रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका संभावित जवाबी हमले की आशंका को देखते हुए अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। ईरान के IRGC की बड़ी चेतावनी Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC ने अमेरिका और इजरायल को खुली चेतावनी दी है। IRGC ने कहा कि अगर ईरान पर फिर हमला हुआ तो जवाब सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने अपने पश्चिमी हवाई क्षेत्र में NOTAM जारी कर सोमवार तक उड़ानों पर रोक लगा दी है। इसे संभावित सैन्य गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिका ने दिया “फाइनल ऑफर” रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को एक “अंतिम प्रस्ताव” दिया है। कहा जा रहा है कि अगर तेहरान इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो अगले 24 घंटे में सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया कि “ईरान समझौता करना चाहता है” और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। असली विवाद क्या है? अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम एनरिचमेंट पूरी तरह बंद करे ईरान इस मांग को मानने को तैयार नहीं है तेहरान अपने विदेशी फ्रीज एसेट्स जारी करने और युद्ध नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर टोल व्यवस्था की भी बात कर रहा है विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ यही मुद्दे हैं। पाकिस्तान और कतर निभा रहे मध्यस्थ की भूमिका रिपोर्ट्स के अनुसार Asim Munir इस समय तेहरान में मौजूद हैं। वहीं कतर का प्रतिनिधिमंडल भी ईरान पहुंचा हुआ है। दोनों देश अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख की मुलाकात IRGC के वरिष्ठ अधिकारियों से हो सकती है। फरवरी में शुरू हुआ था संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों में जवाबी कार्रवाई का दौर शुरू हुआ। 8 अप्रैल को सीजफायर पर सहमति बनी, लेकिन उसके बाद भी धमकियों, प्रतिबंधों और सैन्य तैयारियों का सिलसिला जारी है। अब ट्रंप प्रशासन की गतिविधियों से यह आशंका बढ़ गई है कि हालात फिर से बड़े टकराव की ओर बढ़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने चेतावनी दी है कि कूटनीति का रास्ता बहुत जल्द बंद हो सकता है। इसी बीच अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर की जांच किए जाने से हालात और संवेदनशील हो गए हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में शांति समझौता होगा या फिर मध्य पूर्व में नया सैन्य टकराव शुरू होगा। ट्रंप बोले- “फैसला बेहद करीब” वॉशिंगटन के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “अंतिम चरण” में है। उन्होंने कहा, “मामला बिल्कुल आखिरी मोड़ पर है। अगर हमें सही जवाब नहीं मिले तो हालात बहुत तेजी से बदलेंगे। हम पूरी तरह तैयार हैं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि समझौता “बहुत जल्दी” या “कुछ दिनों में” हो सकता है, लेकिन इसके लिए तेहरान को “100 प्रतिशत सही जवाब” देना होगा। ईरान ने कहा- अमेरिकी प्रस्ताव की जांच जारी इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान को अमेरिका की ओर से नए प्रस्ताव मिले हैं और तेहरान उनके सभी पहलुओं की समीक्षा कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए विदेशी फंड जारी किए जाएं और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी हटाई जाए। इससे पहले ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर युद्ध फिर शुरू करने की तैयारी का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हमला हुआ तो ईरान “कड़ा जवाब” देगा। ईरानी जहाज पर चढ़ी अमेरिकी सेना यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, बुधवार को ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैनिकों ने हेलीकॉप्टर के जरिए ईरानी झंडे वाले एक तेल टैंकर पर चढ़कर जांच की। अमेरिका को शक था कि जहाज प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। तलाशी के बाद जहाज को छोड़ दिया गया, लेकिन उसका रास्ता बदलने का आदेश दिया गया। CENTCOM ने दावा किया कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद अमेरिकी सेना अब तक 91 व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदलवा चुकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने पिछले 24 घंटों में 26 जहाजों को सुरक्षा देते हुए होर्मुज से गुजरने दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा तो दुनिया भर में तेल, गैस, खाद और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। अमेरिका पर भी बढ़ रहा आर्थिक दबाव अमेरिका में बढ़ती तेल और गैस कीमतों की वजह से ट्रंप प्रशासन पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि वॉशिंगटन एक तरफ सैन्य दबाव बनाए रखना चाहता है, लेकिन दूसरी तरफ समझौते की संभावना भी खुली रखना चाहता है। फिलहाल दुनिया की नजर आने वाले कुछ दिनों पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेगा कि मध्य पूर्व में शांति कायम होगी या नया संघर्ष शुरू होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद दावा किया है कि अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हैं कि Iran के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य हर हाल में खुला रहना चाहिए। ट्रंप ने यह बयान चीन से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने बताया कि उनकी चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ मध्य पूर्व, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। ‘होर्मुज खुला रहना बेहद जरूरी’ ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसे खुला रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक दबाव और नाकेबंदी के कारण पिछले ढाई सप्ताह में ईरान को प्रतिदिन लगभग 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। ट्रंप ने कहा, “राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी बहुत जोर देकर कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए।” ईरान को लेकर अमेरिका-चीन की ‘अच्छी समझ’ ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान और ताइवान के मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच “अच्छी समझ” बनी है। उन्होंने कहा, “हमने ईरान और ताइवान दोनों मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुझे लगता है कि इन विषयों पर हमारी समझ काफी अच्छी रही।” हालांकि चीन की ओर से ट्रंप के इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ताइवान मुद्दे पर भी हुई चर्चा ट्रंप ने बताया कि शी चिनफिंग ने ताइवान को लेकर अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से रखीं। उनके अनुसार, चीनी राष्ट्रपति नहीं चाहते कि ताइवान में किसी तरह का स्वतंत्रता संघर्ष या सैन्य टकराव हो, क्योंकि इससे बड़ा क्षेत्रीय संकट पैदा हो सकता है। ट्रंप ने कहा, “मैंने उनकी बात पूरी तरह सुनी। मेरे मन में उनके लिए बहुत सम्मान है।” ताइवान को हथियार बिक्री पर क्या बोले ट्रंप? प्रेस वार्ता के दौरान ट्रंप से 1982 के उस अमेरिकी आश्वासन को लेकर सवाल पूछा गया जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ताइवान को हथियार बिक्री के मामलों में चीन से सलाह नहीं लेगा। इस पर ट्रंप ने कहा, “1982 बहुत पुरानी बात हो चुकी है। हमने ताइवान और हथियारों की बिक्री पर चर्चा की। यह एक अहम मुद्दा है और मैं जल्द इस पर फैसला लूंगा।” वैश्विक तनाव के बीच अहम मानी जा रही यात्रा ट्रंप की यह चीन यात्रा ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व में तनाव, ईरान संकट और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और चीन वास्तव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा को लेकर साझा रुख अपनाते हैं, तो इसका असर वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने में भारत बड़ी और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका है। नई दिल्ली में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा कि ईरान से जुड़े मुद्दों का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। ‘अमेरिका पर भरोसा नहीं’ अराघची ने कहा, “40 दिनों की लड़ाई के बाद जब अमेरिका को यह समझ आ गया कि वह ईरान के खिलाफ अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता, तब उसने बातचीत का प्रस्ताव रखा। हमें अमेरिकियों पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के कई कारण हैं, जबकि अमेरिका के पास ईरान पर अविश्वास करने का कोई ठोस कारण नहीं है। भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार ईरानी विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि भारत फारसी खाड़ी के सभी देशों का मित्र है और उसकी अच्छी साख है। उन्होंने कहा, “भारत इस क्षेत्र में कूटनीति को बढ़ावा देने, शांति और सुरक्षा स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हम भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेंगे।” होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दिया बड़ा बयान अराघची ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी रखने के पक्ष में है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात बेहद जटिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय उन देशों के जहाजों के जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में हैं। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और हालिया तनाव के कारण इस क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। चाबहार पोर्ट पर भारत की तारीफ ईरानी विदेश मंत्री ने Chabahar Port परियोजना को भारत-ईरान सहयोग का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “हमें खुशी है कि भारत ने चाबहार बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण काम कुछ धीमा हुआ है, लेकिन यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंच का सुनहरा दरवाजा साबित होगा।” भारत से सहयोग जारी रखने की उम्मीद अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत चाबहार पोर्ट परियोजना पर काम जारी रखेगा ताकि इसका पूर्ण विकास हो सके और इससे भारत सहित पूरे क्षेत्र को आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत संतुलित कूटनीति के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के United Arab Emirates दौरे के दौरान भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े दो अहम समझौतों पर सहमति बनी है। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत को LPG और तेल आपूर्ति के मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है। अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार (15 मई) को अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में UAE की राजधानी Abu Dhabi पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। LPG सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता दोनों देशों के बीच एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इससे भारत को लंबे समय तक स्थिर LPG आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में UAE के साथ यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर भी सहमति भारत और UAE के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve) को लेकर भी समझौता हुआ है। इससे भविष्य में वैश्विक संकट या सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत को अतिरिक्त ऊर्जा सुरक्षा मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करेगी। पीएम मोदी ने जताया आभार वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने UAE सरकार के स्वागत और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि UAE वायुसेना द्वारा भारतीय विमान को एस्कॉर्ट किया जाना भारत के लोगों के सम्मान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने हालिया प्राकृतिक आपदा के दौरान UAE द्वारा संवेदनाएं व्यक्त करने पर भी धन्यवाद दिया। UAE पर हमलों की कड़ी निंदा पीएम मोदी ने मध्य-पूर्व के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए UAE पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “यूएई को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। कठिन परिस्थितियों में आपने जिस संयम और साहस का परिचय दिया है, वह सराहनीय है।” ‘होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित रहना जरूरी’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का खुला, सुरक्षित और निर्बाध रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत हर स्थिति में UAE के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल संकट और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच भारत-UAE की यह नई ऊर्जा साझेदारी आने वाले समय में भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज खाड़ी में बाधाओं और सप्लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका असर सबसे ज्यादा दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, पड़ोसी देशों की तुलना में India में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर Pakistan में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में वहां पेट्रोल करीब 64 प्रतिशत और डीजल 61 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। फिलहाल पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.42 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के कारण वहां आम लोगों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू किया है और कई स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है। नेपाल में दक्षिण एशिया का सबसे महंगा पेट्रोल Nepal भी गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। नेपाल अब दक्षिण एशिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश बन गया है। जनवरी 2026 में जहां पेट्रोल 137 नेपाली रुपये प्रति लीटर था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 219 नेपाली रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। नेपाल पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर है, जिसके चलते परिवहन और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। श्रीलंका में लागू हुई ईंधन राशनिंग Sri Lanka में भी हालात सामान्य नहीं हैं। वहां ऑटो डीजल की कीमतों में 26 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार को हालात नियंत्रित करने के लिए ईंधन राशनिंग लागू करनी पड़ी है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और स्कूल गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि तेल की खपत कम की जा सके। बांग्लादेश में भी बढ़ा दबाव Bangladesh ने शुरुआत में सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते बोझ के बाद सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। देश में कई जगह पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जिलों में ईंधन की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। भारत में सीमित बढ़ोतरी से राहत इन हालातों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है। 15 मई 2026 तक पेट्रोल में करीब 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है that केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने वैश्विक कीमतों के बड़े झटके का असर काफी हद तक खुद संभाला, जिससे आम जनता पर दबाव सीमित रहा। होर्मुज संकट का वैश्विक असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi अपने पांच देशों के दौरे के पहले चरण में शुक्रवार को United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद पीएम मोदी को सम्मान स्वरूप गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। पश्चिम एशिया संकट पर हुई अहम चर्चा अबू धाबी में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर महसूस किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने का समर्थक रहा है। ‘होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना जरूरी’ पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित नहीं होने देना चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में गिना जाता है। UAE पर हमलों की निंदा प्रधानमंत्री मोदी ने UAE पर हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि UAE को जिस तरह निशाना बनाया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात में UAE ने जिस संयम और समझदारी के साथ स्थिति को संभाला है, वह सराहनीय है। ‘भारत हर हाल में UAE के साथ’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत हर परिस्थिति में UAE के साथ खड़ा है और क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर भी चर्चा हुई है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi शुक्रवार को अपने विदेश दौरे के पहले चरण में United Arab Emirates पहुंचे। अबू धाबी पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने UAE के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय हालात को लेकर अहम चर्चा हुई। “मुश्किल वक्त में भारत UAE के साथ” बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने UAE में हुए हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि इस कठिन समय में भारत पूरी मजबूती के साथ UAE के साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत और UAE के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश मिलकर आगे बढ़ते रहेंगे। पीएम मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द पूरी तरह खोलना जरूरी है ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। ऊर्जा और निवेश पर रहेगा फोकस पीएम मोदी के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और UAE के बीच व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और निवेश संबंधों को और मजबूत करना है। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों देशों के बीच LPG सप्लाई और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन समझौतों से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद बढ़ी अहमियत UAE द्वारा तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलने के फैसले के बाद भारत-UAE ऊर्जा साझेदारी को और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच दोनों देशों का सहयोग ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है। विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? Ministry of External Affairs के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांडला और मंगलूरु पहुंचेंगे टैंकर मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है। वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है। अब तक 13 भारतीय जहाजों ने पार किया मार्ग अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ओमान के पास हमले में डूबी भारतीय नौका इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई। यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है। चालक दल सुरक्षित, भारत लाने की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
मिडिल ईस्ट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद अचानक रडार से गायब हो गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 7700 कोड भेजते ही गायब हुआ विमान फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर विमान ने कतर के पास उड़ान के दौरान “7700” स्क्वॉक कोड ट्रांसमिट किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी सिग्नल होता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब विमान किसी गंभीर संकट का सामना कर रहा हो। इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया। आखिरी लोकेशन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर सिग्नल खो दिया। माना जा रहा है कि यह उस समय एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था और किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था। एक घंटे बाद पूरी तरह बंद हुआ सिग्नल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी कोड भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि केवल सिग्नल खोना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ा रहा है। क्या हो सकती हैं वजहें? विशेषज्ञों के अनुसार 7700 कोड कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे: तकनीकी खराबी इंजन या सिस्टम फेल होना आग लगना मेडिकल इमरजेंसी बाहरी खतरा या हमले की आशंका फिलहाल किसी भी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नहीं मिला कोई मलबा या SOS संकेत अब तक न तो किसी मलबे का पता चला है, न ही कोई डिस्टेस कॉल (SOS) या रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि हुई है। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स की संख्या भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि KC-135 आमतौर पर सीमित क्रू के साथ उड़ान भरता है। क्यों अहम है यह घटना? होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में इस अमेरिकी टैंकर विमान का अचानक गायब होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तनाव के बीच बढ़ी चिंता ईरान-अमेरिका तनाव के बीच इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं–क्या यह तकनीकी खराबी थी या किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत? फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर टिकी हैं।
Iran–US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा बयान देकर हालात को और गरमा दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे “धरती के नक्शे से मिटा दिया जाएगा।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। क्या है पूरा मामला? अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों को निशाना बनाया। ये जहाज अमेरिकी सेंट्रल कमांड के “प्रोजेक्ट फ्रीडम” के तहत सुरक्षित मार्ग से गुजर रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दावा किया कि हमलों में एक दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज भी शामिल था। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने सात छोटी नौकाओं को निशाना बनाने की कार्रवाई की बात कही है। ट्रंप का शक्ति प्रदर्शन ट्रंप ने अपने बयान में अमेरिकी सैन्य ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास अत्याधुनिक हथियार, व्यापक सैन्य अड्डे और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “हम जरूरत पड़ने पर अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे।” साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया जैसे देशों से इस मिशन में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील भी की। क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से यह मार्ग प्रभावी रूप से बाधित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। भारत समेत कई देशों में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। तेल बाजार पर असर युद्ध से पहले जहां कच्चे तेल की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह 100 डॉलर के पार पहुंच गई है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद रहता है, तो ऊर्जा संकट और गंभीर हो सकता है। शिपिंग कंपनियों को भी चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने शिपिंग कंपनियों को भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी कंपनी ने होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को भुगतान किया, तो उस पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईरान की ओर से जहाजों से टोल वसूलने की कोशिश को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीजफायर के बावजूद जारी टकराव हालांकि 8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच सीमित सीजफायर लागू है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय बयानबाजी और रणनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि मध्य पूर्व में शांति अभी दूर है और किसी भी समय हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। क्या बढ़ेगा खतरा? ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। अगर होर्मुज स्ट्रेट में टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव आगे किस दिशा में जाता है।
युद्धविराम के बावजूद ईरान में खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। उत्तर-पश्चिमी जंजान में शुक्रवार को हुए एक भीषण विस्फोट ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के अवशेष कितने घातक हो सकते हैं। इस हादसे में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बम निष्क्रिय करने के दौरान हुआ हादसा ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह विस्फोट उस समय हुआ जब IRGC की एक विशेष बम निरोधक टीम इलाके में सफाई अभियान चला रही थी। यह टीम हालिया हवाई हमलों के बाद बचे हुए गोला-बारूद को खोजकर निष्क्रिय कर रही थी अचानक एक अज्ञात विस्फोटक सक्रिय हो गया धमाका इतना शक्तिशाली था कि कई जवान मौके पर ही मारे गए मारे गए जवान “अंसार अल-महदी” यूनिट के अनुभवी सदस्य थे, जिन्हें ऐसे जोखिम भरे अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। बिना फटे बम बने सबसे बड़ा खतरा प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि विस्फोट का कारण क्लस्टर बम या बारूदी सुरंग हो सकता है, जो हवाई हमलों के दौरान गिराए गए थे लेकिन फटे नहीं थे। ऐसे बम जमीन में छिपे रहते हैं और लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं इन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन और खतरनाक होता है जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है युद्ध खत्म होने के बाद भी ये ‘अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस’ (UXO) वर्षों तक खतरा बने रहते हैं। सीजफायर के बाद सबसे बड़ी सैन्य क्षति 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह IRGC के लिए अब तक की सबसे बड़ी जनहानि बताई जा रही है। यह घटना इस बात की गंभीर याद दिलाती है कि युद्ध के प्रभाव सिर्फ लड़ाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उसके बाद भी जानलेवा खतरे बने रहते हैं। IRGC के मुताबिक: अब तक 15,000 से ज्यादा बिना फटे गोला-बारूद की पहचान की जा चुकी है इनको निष्क्रिय करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है कई इलाके अभी भी ‘हाई रिस्क जोन’ बने हुए हैं आम नागरिक और खेती भी खतरे में अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह खतरा सिर्फ सैन्य बलों तक सीमित नहीं है। कई बम रिहायशी इलाकों और गांवों के पास पड़े हैं कृषि भूमि में भी भारी मात्रा में विस्फोटक मौजूद हैं फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, लगभग 1,200 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र अभी भी जोखिम में है, जिससे किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है और खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। युद्ध की पृष्ठभूमि और बढ़ता वैश्विक तनाव इस हादसे की पृष्ठभूमि हालिया संघर्ष से जुड़ी है, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने फरवरी में ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए इस संघर्ष में 4000 से अधिक लोगों की जान गई वैश्विक दबाव और बढ़ते नुकसान के बाद 8 अप्रैल को सीजफायर लागू हुआ होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा गया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला सीजफायर के बाद भी इस क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। अमेरिका-ईरान वार्ता में जारी गतिरोध इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव “पर्याप्त नहीं” है परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों में मतभेद बरकरार हैं बातचीत जारी है, लेकिन ठोस समाधान अभी दूर नजर आ रहा है ईरान ने युद्ध समाप्त करने और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत के लिए बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखती है।
अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान की मुश्किलें बढ़ीं अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान गंभीर तेल संकट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में ईरान के पास तेल भंडारण की क्षमता तेजी से खत्म होती जा रही है। केवल 12 से 22 दिन का स्टोरेज बचा रिसर्च फर्म Kpler की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अब केवल 12 से 22 दिनों का ही अतिरिक्त तेल भंडारण बचा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो ईरान को मजबूरन अपने तेल उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टोरेज पूरी तरह भरने से पहले ही उत्पादन कम करना जरूरी होगा, ताकि तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समस्याओं से बचा जा सके। निर्यात में भारी गिरावट अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक घेराबंदी के बाद ईरान के तेल निर्यात में जबरदस्त गिरावट आई है। अप्रैल की शुरुआत में जहां ईरान प्रतिदिन करीब 21 लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा था, वहीं 14 अप्रैल के बाद यह आंकड़ा घटकर लगभग 5.67 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। यह गिरावट ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है। उत्पादन आधे से भी कम हो सकता है रिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकेबंदी जारी रहती है, तो मई के मध्य तक ईरान का कच्चे तेल का उत्पादन घटकर 12 से 13 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से आधे से भी कम होगा। पेट्रोल संकट की चेतावनी अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि ईरान में जल्द ही पेट्रोल की कमी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल उद्योग धीरे-धीरे ठप होने की ओर बढ़ रहा है। चीन को रेल मार्ग से तेल भेजने की कोशिश समुद्री रास्ते बाधित होने के बाद ईरान अब चीन को रेल मार्ग से तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह तरीका काफी महंगा और धीमा है, इसलिए इसे स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा। वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर यदि ईरान का उत्पादन और निर्यात लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।
ईरान मुद्दे पर अमेरिका-जर्मनी में बढ़ी तल्खी ईरान को लेकर अमेरिका और जर्मनी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज पर तीखा हमला करते हुए कहा कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया को बंधक बना सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मर्ज के बयान की कड़ी आलोचना की। "मर्ज को नहीं पता वह क्या कह रहे हैं" ट्रंप ने लिखा, "फ्रेडरिक मर्ज सोचते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। उन्हें पता ही नहीं कि वह क्या कह रहे हैं।" हालांकि, जर्मन चांसलर ने कभी भी ईरान के परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं किया है। उनका रुख हमेशा यही रहा है कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए। परमाणु ईरान से पूरी दुनिया को खतरा ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु शक्ति बन गया, तो पूरी दुनिया उसकी धमकियों के साये में जीने को मजबूर होगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार वह कदम उठा रही है, जिसे पिछली अमेरिकी सरकारें उठाने से बचती रही थीं। मर्ज ने अमेरिकी रणनीति पर उठाए थे सवाल दरअसल, फ्रेडरिक मर्ज ने एक दिन पहले ईरान संकट से निपटने में अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन के पास इस संघर्ष से बाहर निकलने की कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आ रही। मर्ज ने यह भी कहा कि ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को असहज स्थिति में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता जर्मन चांसलर ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह अहम समुद्री मार्ग आंशिक रूप से खनन किया जा चुका है। यदि यहां कोई बड़ा व्यवधान होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में बढ़ सकता है तनाव ईरान को लेकर यह सार्वजनिक टकराव ऐसे समय सामने आया है, जब यूक्रेन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच पहले से मतभेद मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बयानबाजी तेज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन साथ ही यह भी चेतावनी दी कि ईरान के पास शांति समझौते के लिए “बहुत कम समय बचा है”। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है। ट्रंप का दावा: “पारंपरिक तरीके से ईरान को भारी नुकसान” व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने बिना परमाणु हथियारों के ही ईरान को काफी नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार, ईरान की सैन्य क्षमता पहले ही “काफी हद तक कमजोर” हो चुकी है और अब स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी भी देश के लिए पूरी तरह गलत है और इसे कभी भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। “टिक-टॉक का समय शुरू हो चुका है”: ट्रंप की चेतावनी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान के लिए “समय तेजी से खत्म हो रहा है”। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की स्थिति मजबूत है और ईरान की सैन्य और नेतृत्व संरचना पहले से कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, अमेरिका का दबाव लगातार बढ़ रहा है और ईरान के पास समझौता करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं हैं। मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिक ताकत में इजाफा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए तीसरा विमानवाहक पोत (aircraft carrier) भी तैनात कर दिया है। इससे क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की ताकत और बढ़ गई है। पहले से ही दो बड़े विमानवाहक पोत मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिससे तनावपूर्ण स्थिति और गंभीर हो गई है। ईरान-हॉर्मुज स्ट्रेट विवाद से बढ़ी चिंता मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना हुआ है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का अहम मार्ग है। स्थिति इतनी संवेदनशील हो गई है कि इस समुद्री मार्ग से होने वाली व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं। सैन्य टकराव की आशंका, लेकिन कूटनीति अभी भी अधर में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति वार्ता की कोशिशें फिलहाल अनिश्चित हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद कमजोर स्थिति में बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत दोबारा शुरू नहीं होती, तो यह तनाव आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव में बदल सकता है। युद्ध की नहीं, लेकिन दबाव की राजनीति तेज ट्रंप के बयान और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व की स्थिति को और जटिल बना दिया है। हालांकि उन्होंने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया है, लेकिन उनके बयानों से साफ है कि दबाव की रणनीति तेज हो चुकी है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव कूटनीति की ओर बढ़ेगा या फिर टकराव और गहरा होगा।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के भीतर ही सत्ता के शीर्ष स्तर पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर ईरानी नेतृत्व दो धड़ों में बंटा दिख रहा है–एक पक्ष बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, जबकि दूसरा टकराव के रास्ते पर अडिग है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका Ahmad Vahidi की मानी जा रही है, जिन पर यह तय करने की जिम्मेदारी आ टिकी है कि ईरान शांति की राह चुनेगा या संघर्ष को आगे बढ़ाएगा। IRGC बनाम सिविल नेतृत्व: बढ़ती खींचतान रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के प्रमुख अहमद वाहिदी के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं। जहां गालिबाफ जैसे नागरिक नेता अमेरिका के साथ वार्ता के जरिए तनाव कम करने के पक्ष में हैं, वहीं IRGC के कई वरिष्ठ अधिकारी बातचीत का विरोध कर रहे हैं। मौजूदा संकेतों से यह भी लग रहा है कि इस समय सत्ता संतुलन में वाहिदी का प्रभाव ज्यादा मजबूत है। कौन हैं अहमद वाहिदी? अहमद वाहिदी को ईरान के सबसे प्रभावशाली और कठोर रुख वाले नेताओं में गिना जाता है। मार्च 2026 में उन्हें IRGC का कमांडर-इन-चीफ बनाया गया। इससे पहले वे गृह मंत्री और रक्षा मंत्री जैसे अहम पदों पर भी रह चुके हैं। उनका नाम 1994 के अर्जेंटीना AMIA बम धमाके में भी सामने आया था, जिसके चलते इंटरपोल ने उन्हें वांटेड घोषित किया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन पर कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वाहिदी का रुख हमेशा से आक्रामक रहा है और वे “अमेरिका विरोधी” रणनीति के मजबूत समर्थक हैं। ईरान के प्रॉक्सी संगठनों पर भी उनकी गहरी पकड़ मानी जाती है। वार्ता पर सस्पेंस, इस्लामाबाद बैठक अनिश्चित अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जाएगा या नहीं, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। जहां अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल रवाना हो चुका है, वहीं ईरान की ओर से स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि ईरान बातचीत के लिए सहमत भी होता है, तो उसकी शर्तें पहले जैसी ही सख्त रह सकती हैं। समुद्री तनाव और बढ़ती सख्ती इस बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास अपनी नौसैनिक गतिविधियां और नाकेबंदी जारी रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक कई जहाजों को अपना मार्ग बदलने के निर्देश दिए गए हैं और एक ईरानी जहाज को जब्त भी किया गया है। वहीं ईरानी संसद होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर एक नया विधेयक तैयार कर रही है। इसके तहत ‘शत्रु देशों’ के जहाजों पर सख्त प्रतिबंध और टोल वसूली जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। यह कदम वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है। आगे क्या? मौजूदा हालात में यह स्पष्ट है कि ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष ही यह तय करेगा कि देश अमेरिका के साथ टकराव बढ़ाएगा या कूटनीतिक रास्ता अपनाएगा।
न्यूयॉर्क: वैश्विक बाजारों के लिए राहत भरी खबर के बीच अमेरिकी शेयर बाजारों ने ऐतिहासिक तेजी दर्ज की। Dow Jones Industrial Average, S&P 500 और Nasdaq Composite ने मजबूत बढ़त के साथ रिकॉर्ड स्तर छू लिए। इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह रही तेल कीमतों में तेज गिरावट और Strait of Hormuz के दोबारा खुलने की खबर। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे प्रमुख इंडेक्स सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन Dow Jones Industrial Average 868.71 अंक (1.79%) उछलकर 49,447.43 पर बंद हुआ S&P 500 84.78 अंक (1.20%) बढ़कर 7,126.06 पर पहुंचा Nasdaq Composite 365.78 अंक (1.52%) की तेजी के साथ 24,468.48 पर बंद हुआ नैस्डैक लगातार 13वें सत्र में बढ़त के साथ 1992 के बाद का सबसे लंबा रैली रिकॉर्ड दर्ज करने में सफल रहा। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य खुलने से आई राहत Abbas Araqchi ने घोषणा की कि Strait of Hormuz से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर दी गई है। यह फैसला लेबनान में सीजफायर के बाद आया। इससे पहले Donald Trump ने संकेत दिए थे कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जल्द शुरू हो सकती है, जिससे निवेशकों में सकारात्मक माहौल बना। तेल में 11% गिरावट, महंगाई का डर कम कच्चे तेल की कीमतों में 11% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता कम हुई। हॉरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का परिवहन होता है। सेक्टर में मिला-जुला रुख ऊर्जा सेक्टर 2.9% गिरा, जिसमें Exxon Mobil और Chevron प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, जहां क्रूज कंपनियों के शेयर उछले इंडस्ट्रियल सेक्टर भी 1.8% की मजबूती के साथ आगे रहा स्मॉल-कैप इंडेक्स Russell 2000 ने 2.1% की बढ़त के साथ रिकॉर्ड क्लोजिंग दर्ज की, जो दर्शाता है कि गिरती ऊर्जा कीमतों से छोटे कारोबारों को ज्यादा फायदा मिल रहा है। कुछ जोखिम अब भी बरकरार हालांकि बाजार में तेजी है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि शिपिंग सेक्टर को अब भी युद्ध-जोखिम बीमा, संभावित खतरों और अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ सकता है। टेक और कॉरपोरेट अपडेट Netflix के शेयर 9.7% गिर गए, क्योंकि कंपनी ने कमजोर तिमाही अनुमान दिया एल्यूमिनियम कंपनी Alcoa के शेयर भी कमजोर नतीजों के कारण 6.8% टूटे
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच China ने United States को कड़ा संदेश दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद चीन ने साफ कहा है कि वह उसके व्यापारिक और ऊर्जा हितों में दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन के रक्षा मंत्री का सख्त बयान चीन के रक्षा मंत्री Dong Jun ने चेतावनी देते हुए कहा: अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी न करे चीन-ईरान संबंधों में हस्तक्षेप से बचे यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहना चाहिए उन्होंने कहा कि चीन के Iran के साथ महत्वपूर्ण ट्रेड और एनर्जी समझौते हैं, इसलिए किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। चीन के लिए इसकी अहमियत: करीब 40% कच्चा तेल यहीं से आता है लगभग 30% LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है इसी वजह से चीन लगातार सीजफायर और स्थिरता की मांग कर रहा है। अमेरिका की नाकेबंदी से बढ़ा तनाव Donald Trump के निर्देश पर अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए Iran के बंदरगाहों तक जाने वाले समुद्री रास्तों पर नाकेबंदी लागू कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक: यह नाकेबंदी सभी जहाजों पर लागू होगी किसी देश के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा ईरानी पोर्ट्स से जुड़े हर समुद्री मार्ग पर निगरानी रहेगी पेट्रोडॉलर vs युआन की जंग? कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति भी हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में कुछ तेल सौदे युआन में हो रहे हैं यह पारंपरिक पेट्रोडॉलर सिस्टम को चुनौती देता है ऐसे में अमेरिका की कार्रवाई चीन की आर्थिक पकड़ को कमजोर करने की कोशिश भी मानी जा रही है सीजफायर के पक्ष में चीन तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा: होर्मुज की सुरक्षा और स्थिरता पूरी दुनिया के हित में है बिना रुकावट जहाजों की आवाजाही जरूरी है सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए क्या आगे बढ़ेगा टकराव? अमेरिका की नाकेबंदी और चीन की चेतावनी के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। अगर कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो इसका असर: वैश्विक तेल कीमतों सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधा से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। क्या कहा RBI गवर्नर ने? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार: भारत मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष से ग्रोथ पर असर पड़ सकता है होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है उन्होंने माना कि इन परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक रफ्तार पर पड़ना तय है। FY27 के लिए नया GDP अनुमान RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान में बदलाव किया है: Q1: 6.9% ➝ 6.8% Q2: 7.0% ➝ 6.7% Q3: 7.0% (स्थिर) Q4: 7.2% पूरे FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान करीब 6.9% रखा गया है। क्यों बढ़ा जोखिम? 1. तेल-गैस की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां बाधा आने से: क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ता है 2. महंगाई का खतरा फिलहाल कोर महंगाई कंट्रोल में है लेकिन खाद्य कीमतों और मौसम का असर बढ़ सकता है 3. ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता ईरान-अमेरिका तनाव से वित्तीय बाजार प्रभावित निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) की ओर बढ़े डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं पर दबाव फिर भी भारत की स्थिति क्यों बेहतर? RBI के मुताबिक: भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में अच्छा मोमेंटम वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता बेहतर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है, जिससे देश में LPG सप्लाई को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। ‘ग्रीन सान्वी’ लेकर आ रहा 44,000 टन LPG भारतीय झंडे वाला जहाज ‘ग्रीन सान्वी’ सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है इस पर करीब 44,000 मीट्रिक टन LPG लदा हुआ है जहाज अब मुंबई बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है सातवां जहाज पहुंचा भारत की ओर युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 6 LPG जहाज भारत पहुंच चुके हैं ‘ग्रीन सान्वी’ इस दौरान होर्मुज पार करने वाला 7वां जहाज है इससे देश में LPG की कमी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी क्यों अहम है यह राहत? होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदियों के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई भारत में कई जगह LPG के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं अभी 17 जहाज फंसे हुए होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में 17 भारतीय जहाज अब भी फंसे हैं इनमें से ग्रीन आशा और जग विक्रम जैसे जहाज LPG से लदे हुए हैं ये जहाज ईरान की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं आगे क्या? अगर बाकी जहाजों को भी जल्द क्लियरेंस मिलती है, तो: भारत में LPG संकट काफी हद तक कम हो सकता है सप्लाई चेन फिर से सामान्य होने लगेगी
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।