धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और TMC नेता सुजीत बोस को नगर निगम भर्ती घोटाले में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। सुजीत अपने बेटे समुद्र बोस के साथ सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे ED ऑफिस पहुंचे थे। उनसे करीब 10 घंटे पूछताछ की गई, फिर देर रात उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 150 लोगों को अवैध बहाल कराने का आरोप सुजीत बोस पर 2014-2018 के बीच साउथ दमदम नगर निगम में करीब 150 लोगों की अवैध भर्ती कराने का आरोप है। कहा जाता है कि सुजीत ने इसके बदले पैसे और फ्लैट लिए थे। सुजीत उस वक्त दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष थे। इस बार चुनाव हार गये हैं सुजीत बिधाननगर से तीन बार के विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के शरदवत मुखर्जी से 37,000 से अधिक वोटों के अंतर से हार गए थे। 11 दिन में दो बार पूछताछ, फिर गिरफ्तारी सुजीत बोस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ED के कई नोटिस मिले। जिनमें से एक 6 अप्रैल को मिला था। इसी दिन नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे। उन्होंने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और चुनाव प्रचार में अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए ED के सामने पेश होने से छूट मांगी थी। चुनावों के बाद बोस 1 मई को CGO कॉम्प्लेक्स में ED अधिकारियों के सामने पेश हुए। 11 दिन बाद दोबारा पेशी में सुजीत को अरेस्ट कर लिया गया। छापेमारी भी हो चुकी कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों पर CBI की तरफ से FIR दर्ज किए जाने के बाद ED ने 2 जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में सुजीत बोस के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान ने फिर से एक वीडियो जारी कर धनबाद SSP प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने यहां तक दावा किया है कि धनबाद से दुबई भागने में उसकी मदद किस-किस ने की। प्रिंस खान ने इस दौरान ये भी दावा किया उसे अपराधी किसने बनाया और किस कारण उसने धनबाद छोड़ा। कैसे उसने तत्कालीन बैंक मोड़ थाना प्रभारी को 10 लाख रुपए देकर अपना पासपोर्ट बनवाया। प्रिंस खान का एक और नया वीडियो इस वीडियो के झारखंड में तेजी से वायरल होने के बाद मानो भूचाल आ गया हो। प्रिंस खान के इस वीडियो को भी झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट X पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल पूछे हैं। साथ ही धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान द्वारा विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। बाबूलाल मरांडी ने SSP पर उठाए सवाल बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 'आमतौर पर पुलिस अपराधियों का पर्दाफाश करती है, लेकिन झारखंड में गैंगस्टर ही पुलिस के कथित काले कारनामों का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं। धनबाद के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का मीडिया में वायरल हो रहा एक ताजा वीडियो न केवल पुलिस को चुनौती दे रहा है, बल्कि एसएसपी के कार्यकाल का मूल्यांकन भी कर रहा है। यह स्थिति कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। पुलिस और क्रिमिनल्स में गैंगवार- बाबूलाल मरांडी बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 'ऐसा प्रतीत होता है कि मानो धनबाद में पुलिस और अपराधियों के बीच संघर्ष नहीं, बल्कि दो समानांतर गिरोहों के बीच गैंगवार चल रहा हो। दोनों पक्षों में होड़ मची है कि व्यापारियों के बीच कौन अधिक दहशत पैदा करेगा। फर्क बस इतना है कि एक वर्दी पहनकर कथित वसूली कर रहा है, तो दूसरा बिना वर्दी के। सबसे भयावह पक्ष सत्ता संरक्षण की आशंका है। जब चर्चा आम हो कि करोड़ों की 'बोली' लगाकर संवेदनशील जिलों में पोस्टिंग ली जाती है, तो जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। क्या ऐसी पोस्टिंग कानून सुधारने के लिए है या यह किसी एक्सटॉर्शन लाइसेंस की तरह काम कर रही है?'
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें बताया जा रहा है कि प्रिंस खान ने विदेश से यह वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में प्रिंस खान ने धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एसएसपी प्रभात कुमार पर कार्रवाई की मांग प्रिंस खान ने एसएसपी पर कोल माफिया को संरक्षण देने, भूमाफिया से साठ गांठ और व्यापारियों को धमकाने समेत कई आरोप लगाए हैं। इस वीडियो को झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री से धनबाद एसएसपी प्रभात कुमार को तत्काल हटाने और विधिसंवत कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने निष्पक्ष जांच की मांग की नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने धनबाद के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान की ओर से विदेश से जारी कथित वीडियो को लेकर राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस वीडियो ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो का संपादित हिस्सा साझा करते हुए कहा कि वीडियो में धनबाद के एसएसपी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। माफिया और प्रशासन के गठजोड़ की आशंका नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वीडियो में गरीबों और कमजोर लोगों की जमीन पर कब्जा कराने, माइनिंग माफियाओं से सांठगांठ और वर्दी तथा सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर भय का माहौल बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि अपराधी प्रिंस खान के इन आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है। बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हों, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां क्यों सौंपी जा रही हैं। इससे जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि सत्ता और प्रभाव के आगे न्याय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। क्या माफियाओं का प्रभाव बढ़ा है मरांडी ने मुख्यमंत्री से सवालिया लहजे में पूछा कि क्या झारखंड का प्रशासनिक तंत्र माफियाओं के प्रभाव में काम कर रहा है? उन्होंने कहा कि राज्य की जनता यह देख रही है कि सरकार कानून के शासन के साथ खड़ी है या फिर माफिया तंत्र के दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास बनाए रखना है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। मुख्यमंत्री को देंगे पूरा वीडियो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्होंने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए संयम बरता है। समाज में भय और अराजकता का माहौल न बने, इसलिए वीडियो का केवल संपादित अंश ही सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल पूरा वीडियो वह मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराएंगे, ताकि बाद में यह नहीं कहा जा सके कि सरकार को मामले की जानकारी नहीं थी। जांच की हो न्यायिक निगरानी बाबूलाल मरांडी ने मांग की कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। साथ ही माइनिंग माफिया, भूमि कब्जा और प्रशासनिक संरक्षण से जुड़े सभी आरोपों की न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। बाबूलाल मरांडी ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय, ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग को भी टैग किया है। इससे इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि झारखंड सरकार इसपर क्या एक्शन लेती है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के पानिहाटी इलाके में देर रात बम से हमला किया गया। जानकारी के अनुसार इस हमले में BJP के कम से कम पांच समर्थक घायल हो गए। सभी घायलों को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि यह घटना नव निर्वाचित BJP विधायक रत्ना देबनाथ के आवास के पास घटी है। रत्ना देबनाथ आरजी कर अस्पताल रेप पीड़िता की मां हैं। मोटरसाइकिल सवार बदमाशों ने फेंके देसी बम जानकारी के अनुसार पानिहाटी के वार्ड नंबर 2 स्थित दत्ता रोड इलाके में BJP कार्यकर्ता स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार कुछ अज्ञात लोग वहां पहुंचे और देसी बम फेंककर फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायल कार्यकर्ताओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। BJP ने TMC पर साधा निशानाः घटना के बाद BJP ने TMC पर राजनीतिक हिंसा कराने का आरोप लगाया है। हालांकि TMC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ घंटे पहले ही BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले को लेकर भी BJP लगातार राज्य सरकार पर निशाना साध रही है। CCTV फुटेज खंगाले जा रहे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। सियासत गरमाई लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। BJP इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि TMC विपक्ष पर माहौल खराब करने का आरोप लगा रही है।
धनबाद। धनबाद के वासेपुर का गैंगस्टर प्रिंस खान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है। उसे आईएसआई ने एक कैंप में संरक्षण दे रखा है। रंगदारी से मिलने वाला पैसा अब वह आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है। यह खुलासा प्रिंस के खास गुर्गे सैफी उर्फ मेजर ने पुलिस के समक्ष किया है। उसने पुलिस को बताया कि दुबई में इंटरपोल की दबिश बढ़ने के बाद प्रिंस काफी परेशान था। दुबई से भागने के लिए उसने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक सहयोगी की मदद ली। उसके साथ वह डंकी रूट से ओमान के रास्ते पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पहुंच गया। वहां उसे आईएसआई के द्वारा संचालित जैश-ए-मोहम्मद के सेंटर में संरक्षण मिला। प्रिंस पंजाब प्रांत में किसके साथ है, सैफी ने उसके बारे में पूरी जानकारी पुलिस को दी है। प्रिंस को पैसे देनेवाले आयेंगे राष्ट्रद्रोह के दायरे मे धनबाद पुलिस का कहना है कि धनबाद से भेजा जा रहे रंगदारी का पैसे से प्रिंस पहले चल-अचल संपत्तियां खरीदता था, लेकिन अब वही पैसा आतंकी गतिविधियों में लगा रहा है। ऐसे में प्रिंस को जो भी रंगदारी दे रहे हैं, नाम सामने आने पर उन पर आतंकी को मदद करने के आरोप में कार्रवाई संभव है। दुबई में एक ही फ्लैट में रह रहीं प्रिंस की दोनों बीविया सैफी ने पुलिस को यह भी जानकारी दी है कि प्रिंस के दुबई से भागने के बाद उसकी दो पत्नियां एक साथ दुबई में एक फ्लैट में रह रही हैं। फरारी के दौरान ही प्रिंस ने दूसरी शादी रचाई थी। वहीं उसका भाई गोपी खान अपनी पत्नी के साथ वहां से 10 किमी दूर दूसरे फ्लैट में रह रहा है। उसके साथ ऋतिक भी रहता है। धनबाद से रंगदारी से मिलने वाले पैसे से सभी वहां ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं। पुलिस की नजर अब गोपी खान पर भी है। एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारियों ने धनबाद थाने में सैफी से कई राउंड में पूछताछ की। अब वायरल पर्चों की होगी फॉरेंसिक जांच पूछताछ में सैफी ने बताया कि सितंबर 2025 से पूर्व वह प्रिंस के लिए किसी वारदात से पूर्व और बाद में पर्चा लिखने का काम करता था। पर्चा में अपना नाम मेजर लिखता था, जिसे धनबाद के गुर्गों को भेजने का काम करता था। गुर्गे धनबाद में पर्चा वायरल करते थे। वहीं प्रिंस का साथ छोड़ने के बाद पलामू के कुबेर के नाम पर पर्चा लिख कर प्रिंस के गुर्गों के माध्यम से वायरल कराता था। पुलिस पूर्व में वायरल पर्चा का फॉरेंसिक जांच कराएगी, जिससे यह पता चल सके कि हैंडराइटिंग किसकी है? रिमांड अवधि खत्म, जेल भेजा गया मेजर एसएसपी प्रभात कुमार, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारियों ने धनबाद थाने में सैफी से कई राउंड में पूछताछ की। तीन दिनों की रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद सैफी को कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट ने सैफी को जेल भेज दिया। इसके पूर्व भी पुलिस ने तीन दिनों की रिमांड पर उससे पूछताछ की थी। रिमांड अवधि ने सैफी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। बता दें कि 19 मार्च को सैफी को कोलकाता के दमदम एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के पुणे जिले में शुक्रवार को 65 साल के एक व्यक्ति ने 4 साल की बच्ची से रेप के बाद पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ सख्त एक्शन की मांग के लिए लोग अब सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों ने थाने का घेराव कर दिया है और हंगामा कर रहे हैं। नानी के यहां आई थी बच्ची बच्ची पुणे के भोर तहसील के नसरापुर गांव में रहने वाली अपनी नानी के यहां गर्मी की छुट्टियां बिताने आई थी। शुक्रवार को वह घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान दोपहर करीब दो बजे 65 साल का भीमराव कांबले उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के पास बने पशुओं के तबेले में ले गया। इसी तबेले में उसने बच्ची के साथ हैवानियत की। इसके बाद उसने शव को तबेले में पड़े गाय के गोबर के ढेर के नीचे छिपा दिया, ताकि किसी को शक न हो। तबेले से मिला बच्ची का शव काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गांवभर में खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला। इसी बीच कुछ लोगों ने तबेले में भी बच्ची को तलाशा, तो उसका शव बरामद हुआ। बच्ची की हालत देखकर हर कोई सन्न रह गया। सीसीटीवी फुटेज से पकड़ाया आरोपी घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की तलाश की तो एक फुटेज में आरोपी बच्ची को तबेले की ओर ले जाता हुआ दिखा। पुलिस ने तुरंत भीमराव कांबले को हिरासत में ले लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है। तबेले के सामने जमा हैं गांववाले वारदात के बाद पूरे गांव में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और आरोपी को उन्हें सौंप देने की मांग करने लगे। गांव वाले का कहना है कि जब तक आरोपी उनके हवाले नहीं कर दिया जाता, तब तक पुलिस को बच्ची का शव नहीं देंगे। पुलिस समझाने में विफल गांव वालों ने तबेले के सामने कैंप लगा लिया है। पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे गए हैं और लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। हालात के मद्देनजर पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर चक्काजाम घटना के बाद गांव के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर चक्काजाम कर दिया, जिससे भारी ट्रैफिक जाम लग गया। पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि इस मामले में 15 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
रांची। रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित मनिटोला में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके को हिला दिया। शुरुआत में इस घटना को सामान्य मौत मानकर शव को दफना दिया गया था, लेकिन बाद में पुलिस जांच में हत्या का खुलासा हुआ। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हत्या के आरोप में मृतका की सगी बेटी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कब्र से निकलवाया गया शव, जांच तेज मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में महिला के शव को कब्र से बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के कारण और हत्या के तरीके का खुलासा होने की उम्मीद है। बेटी पर साजिश का आरोप पुलिस जांच में शुरुआती तौर पर यह सामने आया है कि मृतका की बेटी ने अपने दो सहयोगियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। अधिकारियों के अनुसार यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी। घटना के बाद इसे सामान्य मौत दिखाने की कोशिश की गई, ताकि किसी को शक न हो और मामला दबा रहे। तीनों आरोपी गिरफ्तार, पूछताछ जारी डोरंडा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस हत्या के पीछे की असली वजह का पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जांच में संपत्ति विवाद और आपसी रंजिश जैसे कारण सामने आ रहे हैं, हालांकि सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मुंबई, एजेंसियां। डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जितना कारगार है उतना ही खतरनाक भी। आज कल इन्हीं प्लेटफॉर्म के जरिए मासूम नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र के अमरावती में सामने आया है, जिसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए मासूम लड़कियों को निशाना बनाकर किए गए इस संगीन अपराध ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग हो रही है। क्या है मामला पुलिस के मुताबिक, मोहम्मद अयाज नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया ऐप्स, खासकर व्हाट्सएप और स्नैपचैट के माध्यम से नाबालिग लड़कियों से संपर्क साधा और उन्हें बहलाकर अपने जाल में फंसाया। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने करीब 180 लड़कियों का यौन शोषण किया और 350 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो बनाये। पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसमें भारी मात्रा में संवेदनशील सामग्री पाई गई है। फिलहाल आरोपी को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस जुटी जांच मे पुलिस की कार्रवाई में अब तक कुछ अन्य पीड़ितों की पहचान भी हुई है, जिनमें कई महिलाओं के फोटो और वीडियो बरामद किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि इस संवेदनशील मामले में अफवाहों से बचें और जांच में सहयोग करें. फिलहाल पुलिस आरोपी के डिजिटल नेटवर्क और संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अपराध में और कौन-कौन शामिल है। नेटवर्क खंगाल रहीं जांच एजेंसिया जांच एजेंसियां अब इस मामले को सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित मानकर नहीं चल रहीं, बल्कि इसे एक संभावित संगठित नेटवर्क के रूप में भी खंगाल रही हैं। साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से आरोपी के मोबाइल, सोशल मीडिया अकाउंट्स और क्लाउड डेटा की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं ये आपत्तिजनक वीडियो अन्य प्लेटफॉर्स्ि पर साझा या बेचे तो नहीं गए। इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी के साथ और लोग जुड़े थे, जो लड़कियों को फंसाने या कंटेंट फैलाने में उसकी मदद कर रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। झारखंड से नाबालिग लड़कियां गायब हो रही हैं। कई जिलों से युवतियों के लगातार गायब होने की खबरें आ रही हैं। गुमशुदगी की इन घटनाओं को लेकर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने गहरी चिंता व्यक्त की है और सख्ती दिखाई है। उन्होंने इसे लेकर डीजीपी को सख्त निर्देश जारी किया है। पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश देते हुए डीजीपी से गायब लड़कियों की पूरी रिपोर्ट मांगी है। राज्यपाल के निर्देश पर उनके अतिरिक्त मुख्य सचिव नितिन कुलकर्णी ने डीजीपी को नाबालिग लड़कियों के लापता होने से जुड़े मामलों के संबंध में पत्र भेजा है। कैसे और क्यों गायब हो रही लड़कियां? यहां बड़ा सवाल है कि आखिर लड़कियों कैसे और क्यों गायब हो रही हैं? झारखंड से लड़कियों को कौन गायब कर रहा है? किसकी नजर नाबालिग लड़कियों पर है? आखिर क्यों नहीं मिल रहीं गायब लड़कियां? नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी मामले में झारखंड हाईकोर्ट भी सख्ती दिखा चुका है। गुमला से गायब लड़की के मामले में हाईकोर्ट सरकार को फटकार भी लगा चुका है। दरअसल, झारखंड में आये दिन जिलों से नाबालिग लड़कियों के गायब होने की सूचना मिल रही है। परंतु इन मामलों में पुलिस खाली हाथ है, जिससे परेशान होकर कई लोगों ने राज्यपाल से शिकायत की है। आंकड़ें चौंकाते है झारखंड में लड़कियों और बच्चों के लापता होने के आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पिछले एक दशक में यानी 2015-2025 के बीच झारखंड से 3000 से अधिक लड़कियां लापता हुई हैं, जिनमें से लगभग 1000 का आज तक पता नहीं चला है। NCRB की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, 1,395 बच्चे लापता थे, जिनमें 743 लड़कियां थीं, जो एक साल से अधिक समय से गायब थीं। नाबालिग लड़कियों की तस्करी: सिर्फ 2022 में 18 वर्ष से कम उम्र की 96 लड़कियों की तस्करी का खुलासा हुआ था। जनवरी 2017 से अक्टूबर 2021 तक के आंकड़ों के अनुसार, 1613 लड़कियां लापता हुई थीं, जिनमें से 201 लड़कियों का 4 साल बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका था। गायब होने वाली लड़कियों की संख्या अधिक होने के पीछे बाल तस्करी, मानव तस्करी और गरीबी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालात चिंताजनक बताया जाता है कि पिछल 25 साल से झारखंड में मानव तस्करी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। खास तौर पर मानव तस्कर और उनके दलाल कम उम्र की लजडकियों को निशाना बनाते हैं। इन लड़कियों को बड़े शहरों में भेजकर घरों में काम के नाम पर शोषण किया जाता है। इसके अलावा यूपी, बिहार, पंजाब, गुजरात के खेत और ईट भट्टों पर काम करने के लिए भी यहां के युवक-युवतियों को बहला-फुसला कर ले जाया जाता है, जहां, इनका हर तरह से शोषण किया जाता है। इसके अलावा अनैतिक कार्यों के लिए भी झारखंड की नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसला कर दलाल ले जाते हैं। न दलालों में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं भी शामिल रहती हैं। तत्काल कार्रवाई का निर्देश झारखंड में लड़कियों के गायब होने पर राज्यपाल के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने राज्य के डीजीपी को पत्र भेजकर इन मामलों में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। कहा है कि पिछले कुछ दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों से नाबालिग लड़कियों के लापता होने के कई मामले सामने आए हैं। इनमें कई मामलों में स्थानीय पुलिस द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे अप्रिय घटनाएं भी घटित हुई हैं। राज्यपाल चिंतित राज्यपाल ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया है। राज्यपाल ने निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में गुमशुदगी से जुड़े मामलों की विशेष समीक्षा की जाए और प्रत्येक मामले की जांच प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरी की जाए। साथ ही, लंबित मामलों का जिलावार अद्यतन रिपोर्ट तैयार कर लोक भवन को उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि इन मामलों की निगरानी उच्च स्तर पर की जा सके। बता दें कि नाबालिग लड़कियों की गुमशुदगी को लेकर राज्यपाल को विभिन्न संगठनों और नागरिकों की ओर से कई ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। इन ज्ञापनों में मामलों की गंभीरता और त्वरित कार्रवाई की मांग की गई थी। इसी के मद्देनजर राज्यपाल ने यह पहल करते हुए पुलिस विभाग को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
धनबाद। झारखंड के आतंक का पर्याय बन चुके गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे करीबी गुर्गे शैफी उर्फ मेजर को इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया गया है। उसकी गिरफ्तारी कोलकाता नहीं बल्कि दुबई में हुई है। दुबई में उसे गिरफ्तार कर कोलकाता लाया गया। मेजर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। उसे विदेश से भारत लाने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम उसे कड़ी सुरक्षा के बीच धनबाद लेकर आई। प्रिंस खान को लेकर बड़े खुलासों की उम्मीद पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के नेटवर्क, फंडिंग और प्रिंस खान के ठिकानों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। झारखंड के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर प्रिंस खान को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सूचना मिली है। करीब चार साल पहले दुबई भागने और इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बावजूद वह अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर है। प्रिंस खान से जुड़ी कुछ अहम जानकारिया धनबाद में कई सालों से प्रिंस खान ने दहशत फैला रखी है अर्से से झारखंड पुलिस को प्रिंस खान की तलाश है 2021 में प्रिंस खान पुलिस से बचने के लिए दुबई भाग गया अब वह दुबई से पाकिस्तान भाग गया है प्रिंस खान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में छिपा है पुलिस प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश में है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा ताजा खुफिया इनपुट के अनुसार, प्रिंस खान ने अपना ठिकाना दुबई से बदलकर अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बना लिया है। वह वहीं से रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर के बड़े कारोबारियों को वर्चुअल नंबरों के जरिए रंगदारी के लिए धमकाता है। कभी वासेपुर की गलियों से अपराध शुरू करने वाला प्रिंस खान अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। प्रिंस खान को घोषित किया जाएगा आतंकवादी पाकिस्तान से गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना के बाद झारखंड पुलिस अब उसे 'आतंकवादी' घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्रिंस खान के सिंडिकेट को न केवल अपराधी, बल्कि कई 'व्हाइट कॉलर' लोग और जमीन कारोबारी भी हथियार और धन की आपूर्ति कर समर्थन दे रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रिंस ने दुबई में एक आंतकी संगठन की मदद से पनाह ली है। और वह झारखंड से वसूले गये रंगदारी के पैसे में उस आतंकी संगठन को कमीशन भी दे रहा है। मेजर की गिरफ्तारी प्रिंस खान के अंत की शुरुआत मेजर की गिरफ्तारी को प्रिंस खान के साम्राज्य के अंत की शुरुआत माना जा रहा है। धनबाद पुलिस के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों की पुलिस भी मेजर को रिमांड पर लेने की तैयारी में है, जहां-जहां उसके खिलाफ मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्रिंस खान के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में यह सबसे बड़ी कार्रवाई है।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के डंडा थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। 22 वर्षीय छात्रा ने आरोप लगाया है कि उसके साथ पिस्तौल की नोक पर दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के अनुसार, वह पलामू जिले में रहकर पढ़ाई कर रही थी, जहां उसके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने उसे अकेला पाकर जबरन संबंध बनाए। विरोध करने पर आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर चुप रहने को कहा। अपहरण और जबरन शादी का नाटक पीड़िता ने बताया कि घटना के बाद वह डर के कारण अपने गांव लौट आई थी, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। 4 अप्रैल को जब उसके माता-पिता घर पर नहीं थे, तब आरोपी अपने बहनोई के साथ आया और उसे अगवा कर लिया। उसे पलामू के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र के एक गांव ले जाया गया, जहां आरोपी की बहन और बहनोई की मौजूदगी में जबरन सिंदूर भरकर शादी का ढोंग रचाया गया। गैंगरेप का आरोप पीड़िता के मुताबिक, इसके बाद आरोपी और उसका बहनोई उसे एक सुनसान जगह तहले नदी के पुल के नीचे ले गए, जहां दोनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद जब वे उसे वापस गांव लाए, तो ग्रामीणों को शक हुआ और उन्होंने दोनों को घेर लिया। हालांकि, आरोपी का बहनोई मौके से फरार हो गया। दोनों पक्षों से FIR दर्ज गढ़वा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई है और जांच जारी है। पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि पिछले चार वर्षों से उसके साथ शोषण हो रहा था। पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। समाज में आक्रोश इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक मेडिकल छात्रा के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना 9 अप्रैल की रात एक अपार्टमेंट में हुई, जहां पीड़िता को जन्मदिन की पार्टी के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि पार्टी के दौरान उसे खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया, जिससे वह अर्धबेहोशी की हालत में चली गई। पिज्जा में नशा देकर दिया गया वारदात को अंजाम पीड़िता के बयान के अनुसार, केक काटने के बाद उसे पिज्जा दिया गया, जिसे खाने के बाद उसे नशे जैसा महसूस होने लगा। इसके बाद वह एक कमरे में आराम करने चली गई। इसी दौरान आरोपी दानिश ने उसकी हालत का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने बताया कि नशे की वजह से वह विरोध करने में असमर्थ थी। सुबह खून से लथपथ मिली पीड़िता पीड़िता ने एफआईआर में बताया कि सुबह जब उसे होश आया तो वह खून से लथपथ हालत में थी। घटना के बाद पार्टी में मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने उसे समझाकर हॉस्टल भेज दिया। वहां उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसकी सहेली ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया और पुलिस को सूचना दी। एफआईआर दर्ज, आरोपी गिरफ्तार होने की सूचना लालपुर थाना पुलिस ने पीड़िता के फर्द बयान के आधार पर केस दर्ज कर लिया है। मामला केस नंबर 66/26 के तहत दर्ज हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी दानिश को पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से गिरफ्तार किए जाने की सूचना है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। पुलिस जांच जारी पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना शहर में सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक परिवार पिछले पांच दिनों से महिला के सड़ते हुए शव के साथ एक ही फ्लैट में रह रहा था। यह सनसनीखेज घटना गोविंदपुर थाना क्षेत्र के कौआबांध स्थित वास्तु विहार सोसाइटी की है। रविवार की रात जब घर से आने वाली दुर्गंध असहनीय हो गई, तब पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने सड़ा-गला शव बरामद किया। मृतका की पहचान 40 वर्षीय लिपिका कुमारी के रूप में हुई है। दुर्गंध ने खोला पांच दिनों से छिपा खौफनाक राज वास्तु विहार सोसाइटी के इस फ्लैट से पिछले कुछ दिनों से हल्की बदबू आ रही थी, जिसे शुरुआत में स्थानीय निवासियों ने नजरअंदाज कर दिया। हालांकि, रविवार शाम होते-होते यह गंध इतनी तेज हो गई कि आसपास के लोगों का जीना मुहाल हो गया। अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत गोविंदपुर थाना पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब फ्लैट का दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का दृश्य देख उनके भी होश उड़ गए। कमरे में लिपिका कुमारी का शव अत्यंत क्षत-विक्षत स्थिति में पड़ा था और वह पूरी तरह सड़ चुका था। परिजनों की चुप्पी और बीमारी का दावा सवालों के घेरे में पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि लिपिका कुमारी की मौत संभवतः 8 अप्रैल को ही हो गई थी। बताया जा रहा है कि वह पिछले कुछ समय से बीमार थी। चौंकाने वाली बात यह है कि मौत के बाद परिजनों ने न तो किसी को जानकारी दी और न ही अंतिम संस्कार की कोई प्रक्रिया शुरू की। वे पांच दिनों तक उसी फ्लैट में शव के साथ सामान्य रूप से आते-जाते रहे। लिपिका अपने परिवार के साथ साल 2022 से इस फ्लैट में रह रही थी। इस लंबी खामोशी ने पुलिस के मन में कई गंभीर संदेह पैदा कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिसिया पूछताछ से सुलझेगी गुत्थी घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर तुरंत शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मौत की सटीक वजह और समय का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। फिलहाल, घर के सदस्यों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी या क्या मंशा थी, जिसके कारण परिवार ने इतनी बड़ी घटना को पांच दिनों तक बाहरी दुनिया से छिपाए रखा। इलाके में दहशत का माहौल, जांच जारी इस घटना के बाद से पूरी वास्तु विहार सोसाइटी और आसपास के क्षेत्रों में दहशत के साथ-साथ चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोग इस बात से हैरान हैं कि कैसे कोई परिवार एक सड़ते हुए शव की दुर्गंध के बीच इतने दिनों तक रह सकता है। पुलिस ने मामले को संदिग्ध मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है और जल्द ही इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
धार, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के धार जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जिसने समाज में गहराई तक पैठे रंगभेद के जहर को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यहाँ एक पत्नी ने अपने पति की हत्या सिर्फ इसलिए करवा दी क्योंकि वह उसके 'सांवले रंग' से नफरत करती थी। राजोद थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उस 'गोरेपन' की मानसिकता पर भी चोट की है जो आज एक जानलेवा महामारी का रूप ले चुकी है। सांवलेपन का ताना और खूनी साजिश मृतक की पहचान मिर्ची व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित के रूप में हुई है। जांच में यह बात सामने आई है कि उनकी पत्नी प्रियंका अक्सर उन्हें उनके रंग को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करती थी। प्रियंका का मानना था कि देवकृष्ण 'काले' हैं और वे उसे डिजर्व नहीं करते। घर में लगातार होने वाले इस विवाद और मानसिक दबाव के बीच प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश के साथ मिलकर एक खूनी योजना तैयार की। पुलिस के अनुसार, प्रियंका ने अपने ही पति को रास्ते से हटाने के लिए 1 लाख रुपये की सुपारी देकर इस हत्याकांड को अंजाम दिलवाया। 25 हजार करोड़ का बाजार और मानसिक गुलामी यह घटना महज एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि उस विशाल बाजार की सफलता का दुष्परिणाम है जो असुरक्षाओं पर फलता-फूलता है। एक अनुमान के मुताबिक, भारत का स्किन केयर मार्केट 2026 तक 2.98 बिलियन डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचने वाला है। बाजार का दबाव: ब्यूटी प्रोडक्ट्स का एक बड़ा हिस्सा 'गोरापन' और 'त्वचा निखारने' के भ्रामक दावों पर टिका है। मैट्रिमोनियल साइट्स का खेल: शादी-ब्याह की वेबसाइटों पर 'फेयर' (गोरा) फिल्टर का अत्यधिक इस्तेमाल समाज की इस बीमार सोच को पुख्ता करता है। बदलाव की लहर: साल 2020 में वैश्विक दबाव और ऑनलाइन पिटीशन के बाद Shaadi.com जैसी बड़ी वेबसाइटों को अपने प्लेटफॉर्म से स्किन टोन फिल्टर हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। भ्रामक विज्ञापनों पर सरकारी सख्ती और जमीनी हकीकत रंगभेद की इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने 'ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट' में कड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत गोरा करने का झूठा दावा करने वाले विज्ञापनों पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना और 5 साल की जेल का प्रावधान है। इसी दबाव के चलते कई नामी ब्रांड्स ने अपने उत्पादों के नाम बदले हैं (जैसे 'Fair' से बदलकर 'Glow' करना), लेकिन जानकारों का कहना है कि सिर्फ नाम बदलने से नीयत नहीं बदली। आज भी विज्ञापनों का मूल संदेश यही होता है कि सफलता और खूबसूरती का पैमाना सिर्फ गोरा रंग ही है। सामाजिक नजरिया बदलने की चुनौती धार की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक समाज 'सीरत' से ऊपर 'सूरत' और 'चरित्र' से ऊपर 'चमड़ी' को रखेगा, तब तक ऐसी हिंसक घटनाएं रुकना मुश्किल है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, भारत की एक बड़ी आबादी 'बॉडी इमेज एंग्जायटी' का शिकार है, जिसका सीधा संबंध सांवले रंग के प्रति सामाजिक तिरस्कार से है। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या हम अपनी सोच के इस गहरे रंगभेद को कभी मिटा पाएंगे? निष्कर्ष: यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि उस सामाजिक ढांचे की विफलता है जहां बचपन से ही बच्चों के मन में 'गोरा मतलब सुंदर' का जहर घोला जाता है। जब तक 25 हजार करोड़ का यह बाजार हमारी असुरक्षाओं का फायदा उठाता रहेगा, तब तक मानवता ऐसे ही शर्मसार होती रहेगी।
धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।
रांची। तमाड़ थाना क्षेत्र में हुई महिला की हत्या के मामले में आरोपी मांगा मुंडा को फिलहाल राहत नहीं मिली है। अपर न्याययुक्त संजीव झा की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जेल में ही रखने का फैसला सुनाया। प्रेम संबंध बना विवाद की वजह मामले की पृष्ठभूमि में पारिवारिक असहमति और प्रेम संबंध का विवाद सामने आया है। नावाडीह निवासी जम्बी कुमारी का अपने ही रिश्तेदार मांगा मुंडा के साथ संबंध था, जिसे लेकर परिवार सहमत नहीं था। इसी को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया। पहले पति की मौत, फिर मायके में रह रही थी युवती जानकारी के अनुसार, जम्बी कुमारी की शादी खूंटी जिले के टोटवादा निवासी लाचू पाहन से हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद सड़क दुर्घटना में पति की मौत हो गई। इसके बाद वह मायके में रहने लगी थी, जहां से यह पूरा घटनाक्रम शुरू हुआ। शादी के लिए दबाव और धमकी का आरोप परिवार के विरोध के बावजूद आरोपी मांगा मुंडा शादी के लिए दबाव बना रहा था। प्राथमिकी के मुताबिक, उसने युवती और उसकी मां को जान से मारने की धमकी भी दी थी। रात में घर पहुंचकर की वारदात घटना 16 जनवरी 2026 की रात की है, जब परिवार के लोग घर में सो रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान मांगा मुंडा घर पहुंचा और युवती की मां पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी। मामला दर्ज, जांच जारी इस संबंध में तमाड़ थाना में कांड संख्या 6/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि अदालत ने आरोपी को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है।
मुंबई, एजेंसियां। Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़े सोना तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 24 विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है और लगभग 37.74 करोड़ रुपये मूल्य का सोना बरामद किया गया है। ‘ऑपरेशन धाहाबू ब्लिट्ज’ में बड़ी सफलता खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई की मुंबई जोनल यूनिट ने “ऑपरेशन धाहाबू ब्लिट्ज” चलाया। इस ऑपरेशन के तहत नैरोबी से आए यात्रियों पर नजर रखी गई और जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सोना बरामद किया गया। यह इस साल एयरपोर्ट पर हुई सबसे बड़ी तस्करी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है। बैग और कपड़ों में छिपाकर लाया जा रहा था सोना जांच में सामने आया कि तस्करी गिरोह ने सोना छिपाने के लिए बेहद चालाक तरीके अपनाए थे। महिलाओं के बैग और कपड़ों की जांच में 25.10 किलोग्राम सोने की ईंटें और 4.27 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए। संगठित गिरोह होने की आशंका अधिकारियों के अनुसार, इन महिलाओं को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया था ताकि वे एयरपोर्ट सुरक्षा जांच से बच सकें। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क है, जो कैरियर के जरिए सोना भारत लाने की कोशिश कर रहा था। आगे की जांच जारी गिरफ्तार सभी महिलाओं को अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, इस पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए जांच जारी है। DRI इस पूरे अंतरराष्ट्रीय तस्करी मॉड्यूल को तोड़ने की कोशिश में जुटी है।
बड़कागांव। हजारीबाग के बड़कागांव थाना क्षेत्र में हुए चर्चित नंदनी ज्वेलर्स लूटकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने कुल सात शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से एक देसी पिस्टल, 13 जिंदा कारतूस, तीन मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की गई है। गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल पुलिस के अनुसार, 8 अप्रैल 2026 को मिली गुप्त सूचना के आधार पर जानकारी मिली कि बड़कागांव-हजारीबाग मुख्य मार्ग पर कुछ अपराधी हथियारों के साथ बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। इसके बाद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने टीपी-06 के पास झाड़ियों में छिपे तीन संदिग्धों को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। तीन आरोपियों से हुआ बड़े गिरोह का खुलासा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विनोद कुमार भुइयां, प्रिंस यादव और तेजु कुमार भोक्ता के रूप में हुई है, जो चतरा जिले के निवासी हैं। पूछताछ में तीनों ने कबूल किया कि वे राहगीरों को निशाना बनाकर लूट की योजना बना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने फरवरी 2026 में हुई नंदनी ज्वेलर्स लूट की वारदात में अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की। दुकान की रेकी से लेकर लूट तक की पूरी साजिश आरोपियों ने खुलासा किया कि इस वारदात की पूरी योजना स्थानीय संदीप कुमार सोनी ने तैयार की थी, जिसने दुकान की रेकी की थी। इसके बाद गिरोह ने हथियार के बल पर ज्वेलरी शॉप मालिक पर गोलीबारी कर गहनों से भरा बैग लूट लिया और बाइक से फरार हो गए। पूरे नेटवर्क पर पुलिस की नजर जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में राहुल कुमार सिंह उर्फ पद्धी, साकिन्दर कुमार गंजू, रामधनी ठठेरा, संदीप कुमार सोनी और विशाल शांताराम भी शामिल थे। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि लूटे गए जेवर को गलाकर दूसरे राज्यों में बेचा जाता था। पुलिस अब इस पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।
हॉलीवुड एनिमेशन फिल्म The Super Mario Galaxy Movie ने भारत में अपने पहले सप्ताह का सफर संतोषजनक स्तर पर पूरा किया है, हालांकि उम्मीदों के मुकाबले इसकी रफ्तार कुछ धीमी रही। Universal Pictures के बैनर तले बनी इस फिल्म ने ओपनिंग वीकेंड में करीब 4.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जबकि सोमवार से गुरुवार के बीच लगभग 2 करोड़ रुपये और जोड़ते हुए पहले हफ्ते का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 6.50 करोड़ रुपये तक पहुंचा। फिल्म का निर्देशन Aaron Horvath और Michael Jelenic ने किया है। शुरुआती कमाई को देखते हुए कहा जा सकता है कि फिल्म ने ठीक-ठाक शुरुआत की है, लेकिन वीकडेज़ में इसकी पकड़ मजबूत नहीं रही, जो इसके कुल प्रदर्शन पर असर डाल सकती है। वीकेंड पर टिकी उम्मीदें ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिल्म के पास अभी भी मौके हैं। आने वाले वीकेंड पर अगर कलेक्शन में उछाल आता है और फिल्म अपने पहले हफ्ते के बराबर या उससे थोड़ा कम भी प्रदर्शन करती है, तो यह लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिक सकती है। आमतौर पर अच्छी प्रतिक्रिया पाने वाली हॉलीवुड फिल्मों का प्रदर्शन समय के साथ बेहतर होता है, और इस फिल्म से भी यही उम्मीद की जा रही है। ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन जहां भारत में फिल्म को सीमित दर्शक मिल रहे हैं, वहीं ग्लोबल स्तर पर इसका प्रदर्शन शानदार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जल्द ही Project Hail Mary के कुल कलेक्शन को पार कर सकती है, जिसमें Ryan Gosling मुख्य भूमिका में हैं। स्टार कास्ट और कहानी फिल्म में Chris Pratt, Anya Taylor-Joy, Charlie Day, Jack Black, Keegan-Michael Key, Benny Safdie, Donald Glover और Brie Larson जैसे कलाकारों ने अपनी आवाज़ दी है। कहानी The Super Mario Bros. Movie की आगे की कड़ी है, जहां मारियो और लुइगी की मुलाकात योशी से होती है। इसके बाद ये तीनों प्रिंसेस पीच और टोड के साथ अंतरिक्ष मिशन पर निकलते हैं, जहां उनका सामना बाउज़र और उसके बेटे बाउज़र जूनियर से होता है। इस एडवेंचर में रोज़ालिना उनकी मदद करती हैं। अब सभी की निगाहें इस वीकेंड के कलेक्शन पर टिकी हैं-क्या फिल्म भारत में भी अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी या नहीं, यह जल्द साफ हो जाएगा।
गुमला। झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दो युवतियों के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िताओं में से एक युवती की पहचान एक आरोपी से पहले से थी। इसी जान-पहचान का फायदा उठाकर आरोपी ने उसे गुमला घूमने के बहाने बुलाया। युवती अपनी एक सहेली के साथ वहां पहुंची। आरोपी भी अपने एक दोस्त के साथ आया और दोनों युवतियों को बाइक पर बैठाकर सिसई क्षेत्र की ओर ले गया। कब हुआ ये मामला? बताया जा रहा है कि शाम के समय आरोपियों ने बीयर खरीदी और फिर दोनों युवतियों को जबरन एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उनके साथ दुष्कर्म किया गया। घटना के दौरान एक युवती किसी तरह आरोपियों के चंगुल से निकलकर भागने में सफल रही। उसने पास के पुआल में छिपकर अपने मोबाइल फोन से परिजनों को लोकेशन भेजी और मदद मांगी। वहीं दूसरी युवती आरोपियों के कब्जे में फंसी रही। आरोप है कि बाद में एक और युवक को मौके पर बुलाया गया और तीनों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। पुलिस ने पूरी घटना की जानकारी दी किसी तरह जान बचाकर दोनों युवतियां रविवार देर रात थाना पहुंचीं और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। एक आरोपी डुमरडीह पंचायत और दूसरा असनी नकटीटोली का बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश कर रही है और मामले की गंभीरता से जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।