Illegal infiltration

West Bengal Chief Minister Shubhendu Adhikari addresses Assembly on illegal infiltration and deportation policy.
घुसपैठ पर बंगाल सरकार का सख्त रुख, ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति पर अडिग रहने का दावा

  पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र की ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू कर रही है और इससे पीछे हटने का कोई सवाल नहीं है। 10 हजार घुसपैठियों की पहचान का दावा मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बनने के बाद पिछले लगभग डेढ़ महीने के दौरान 10 हजार अवैध घुसपैठियों की पहचान की गई है। उन्होंने दावा किया कि इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को सीमा पार वापस भेजा जा चुका है और शेष के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। 12 होल्डिंग सेंटरों में रखे गए 1800 लोग मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य सरकार ने हाल ही में 12 होल्डिंग सेंटर स्थापित किए हैं, जहां फिलहाल 1800 लोगों को रखा गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन लोगों को भी जल्द डिपोर्ट किया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद बीएसएफ को सौंपे जाएंगे लोग मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ के मामलों में गिरफ्तार व्यक्तियों को जेल में रखने के बजाय सीधे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपा जाएगा, ताकि उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीमा पार भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूर्ववर्ती सरकार पर लगाए आरोप अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए आवश्यक सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि देने का दावा मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद डेढ़ महीने से भी कम समय में बीएसएफ को 142.79 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। उनके अनुसार इससे सीमा पर कंटीले तार लगाने और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने का काम तेज होगा। ‘जो भागना चाहते हैं, वे भाग जाएं’ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि जो लोग अवैध रूप से राज्य में रह रहे हैं और भागना चाहते हैं, वे सीमा पर बाड़ पूरी होने से पहले चले जाएं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की सख्ती के बाद कुछ क्षेत्रों से अवैध घुसपैठियों के वापस लौटने की सूचनाएं भी मिली हैं। भारतीय नागरिकों को चिंता की जरूरत नहीं मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वास्तविक भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल अवैध घुसपैठियों के खिलाफ है और इसका किसी धर्म, जाति या समुदाय से कोई संबंध नहीं है। सरकारी योजनाओं का लाभ केवल नागरिकों को मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल भारतीय नागरिकों को मिलेगा। उन्होंने अन्नपूर्णा भंडार, वृद्धावस्था पेंशन, बेरोजगारी भत्ता, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल पात्र नागरिकों के लिए किया जाएगा और किसी भी अवैध घुसपैठिये को इन योजनाओं का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। आगे और तेज हो सकती है कार्रवाई मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिला है कि राज्य सरकार आने वाले दिनों में अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज कर सकती है। पहचान, हिरासत और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जारी हैं और सरकार इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
West Bengal Governor RN Ravi addresses the Assembly during Budget Session outlining BJP government's priorities and reforms.
बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरएन रवि का बड़ा संदेश, बोले- अपराधियों और घुसपैठियों पर कार्रवाई कर रही सरकार

  पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र गुरुवार को शुरू हो गया। सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरएन रवि ने अपने अभिभाषण में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को सदन के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नई सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करने, घुसपैठ रोकने, भ्रष्टाचार और वसूली के नेटवर्क को खत्म करने तथा राज्य को औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘धमकाने की संस्कृति और भ्रष्टाचार के गिरोह खत्म होंगे’ राज्यपाल ने कहा कि पिछली सरकार के शासनकाल में पनपे असामाजिक तत्वों, वसूली करने वाले गिरोहों और अवैध खनन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नई सरकार ‘धमकाने की संस्कृति’ और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। घुसपैठ और अतिक्रमण पर सख्ती राज्यपाल ने कहा कि अवैध रूप से रह रहे विदेशियों और घुसपैठियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। सीमा सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण हटाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया। बीएसएफ को भूमि उपलब्ध कराने के फैसले की सराहना आरएन रवि ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भूमि उपलब्ध कराने के राज्य सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं राज्यपाल ने कहा कि सरकार महिलाओं तथा कमजोर एवं वंचित वर्गों के खिलाफ अपराधों को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस बल में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विशेष कदम उठाए जाएंगे। अवैध खनन और वसूली के नेटवर्क पर प्रहार सरकार अवैध बालू और कोयला खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। राज्य में कथित तौर पर सक्रिय वसूली नेटवर्क को खत्म कर कानून का शासन स्थापित किया जाएगा। उद्योग, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर रहेगा फोकस पश्चिम बंगाल को प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में काम। अनुपयोगी सरकारी भूमि को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। मेट्रो और रेलवे परियोजनाओं में केंद्र के साथ सहयोग। तटीय नौवहन, जलमार्ग, मत्स्य पालन और ऊर्जा परियोजनाओं को बढ़ावा। उत्तर बंगाल में IIT और AIIMS स्थापित करने की दिशा में प्रयास। स्टार्टअप केंद्र विकसित कर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। पुस्तकालयों का आधुनिकीकरण और ‘पीएम श्री’ स्कूल योजना लागू की जाएगी। राज्य के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाएगा। अन्नपूर्णा भंडार योजना और महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा राज्यपाल ने कहा कि सरकार ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ शुरू करेगी और महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता दी जाएगी। गोरखालैंड मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत राज्यपाल ने कहा कि दार्जिलिंग और गोरखालैंड से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी। राज्यपाल आरएन रवि के अभिभाषण ने पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार के पहले बजट सत्र की दिशा तय कर दी है। यह सत्र ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा ने लगभग 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस शासन का अंत कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Security personnel outside holding center in West Bengal during illegal infiltration verification drive
बंगाल में ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ अभियान तेज

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के सभी 23 जिलों में होल्डिंग सेंटर्स बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य संदिग्ध घुसपैठियों और नागरिकता जांच के दायरे में आये लोगों को अस्थायी रूप से रखना है, ताकि दस्तावेजों का सत्यापन पूरा किया जा सके। जेल नहीं, ‘सुविधा केंद्र’ के तौर पर तैयार किये गये सेंटर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि होल्डिंग सेंटर्स जेल नहीं हैं। इन्हें ट्रांजिट सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां रहने वाले लोगों को भोजन, साफ बिस्तर और चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायी जायेंगी। सरकार के मुताबिक, इन केंद्रों में किसी भी व्यक्ति को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा। इस दौरान उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच की जायेगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बल और सिविल डिफेंस कर्मियों की तैनाती की गयी है। मालदा और मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ ऑपरेशन सीमावर्ती जिलों में इन केंद्रों ने काम करना भी शुरू कर दिया है। मालदा जिले के इंग्लिश बाजार स्थित एक सरकारी प्रशिक्षण केंद्र की एक मंजिल को होल्डिंग सेंटर में बदला गया है। यहां हाल ही में पकड़े गये 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। वहीं मुर्शिदाबाद के लालगोला स्थित ‘पद्म भवन’ में दूसरा केंद्र सक्रिय किया गया है। यहां जाली दस्तावेजों के साथ पकड़े गये लोगों को शिफ्ट किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्र में प्रवेश से पहले सभी लोगों का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है ताकि संक्रमण या बीमारी के खतरे को रोका जा सके। क्या है ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति? राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी रणनीति को ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नाम दिया है। डिटेक्ट (Detect) : संदिग्ध घुसपैठियों और फर्जी दस्तावेज रखने वालों की पहचान करना। डिलीट (Delete) : अवैध रूप से वोटर लिस्ट या सरकारी रिकॉर्ड में शामिल लोगों के नाम हटाना। डिपोर्ट (Deport) : दस्तावेज सत्यापन के बाद संबंधित व्यक्तियों को बीएसएफ को सौंपना, ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार घुसपैठ के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। CAA के तहत अल्पसंख्यकों को राहत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 31 दिसंबर 2014 से पहले पड़ोसी देशों से भारत आये हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे लोगों को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत सुरक्षा प्रदान की जायेगी। विपक्ष ने उठाये सवाल जहां बीजेपी सरकार इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल टीएमसी ने प्रक्रिया को लेकर चिंता जतायी है। टीएमसी का कहना है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी भारतीय नागरिक को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। सरकार का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार चलायी जा रही है और इसका उद्देश्य केवल अवैध घुसपैठ पर रोक लगाना है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Suvendu adhikari
शुभेंदु सरकार के कड़े रुख के बाद भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर बढ़ी गुसपैठियों की हलचल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बाद अवैध प्रवासियों के बीच हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश लौटने के लिए उत्तर 24 परगना जिले के हाकिमपुर सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जमा होने लगे हैं। भाजपा ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोग अब सीमा पार लौटने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि विशेष पहचान प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी ऐसे दृश्य सामने आए थे और अब सरकार की सख्त नीति के बाद फिर से सीमा क्षेत्रों में भीड़ बढ़ने लगी है।   होल्डिंग सेंटर और पहचान प्रक्रिया पर जोर रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य सरकार ने मालदा में एक होल्डिंग सेंटर तैयार किया है, जहां कथित अवैध प्रवासियों को रखा जाएगा। इसके बाद उनकी पहचान प्रक्रिया पूरी कर उन्हें संबंधित एजेंसियों के माध्यम से डिपोर्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।   राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि सरकार अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए विशेष अभियान चला रही है। इसके तहत दस्तावेजों की जांच और नागरिकता संबंधी सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।   शुभेंदु अधिकारी के बयान से बढ़ी चर्चा हाल ही में एक बैठक के दौरान भाजपा नेता शुवेंदी अधिकारी  ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपा जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।   आधिकारिक पुष्टि का इंतजार हालांकि, सीमा पर जुटी भीड़ और बड़े पैमाने पर लोगों के लौटने के दावों की अब तक प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्षी दलों ने भी भाजपा के दावों पर सवाल उठाए हैं। इसके बावजूद राज्य में अवैध प्रवास और नागरिकता का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

Unknown मई 26, 2026 0
Suvendu Adhikari talking about ‘Detect, Delete and Deport mission
शुभेंदु अधिकारी का ‘Detect, Delete and Deport’ मिशन शुरू, 9 संदिग्ध घुसपैठिये डिटेंशन सेंटर में भेजे गये

Suvendu Adhikari ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार ने ‘Detect, Delete and Deport’ यानी 3D नीति लागू करते हुए संदिग्ध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि अब अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जायेगा और फिर सीमा सुरक्षा बल को सौंपकर वापस भेजा जायेगा। मालदा में बना पहला डिटेंशन सेंटर Malda राज्य का पहला जिला बन गया है, जहां अवैध विदेशी नागरिकों के लिए डिटेंशन सेंटर बनाया गया है। यह केंद्र इंगलिश बाजार के चंदन पार्क इलाके में स्थापित किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गजोले के पांडुआ क्षेत्र से पकड़ी गयी 3 महिलाओं और 6 नाबालिगों समेत कुल 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को यहां रखा गया है। सभी को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच डिटेंशन सेंटर लाया गया। सीसीटीवी और पुलिस निगरानी में रखा गया सेंटर अधिकारियों ने बताया कि डिटेंशन सेंटर में कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था की गयी है। यहां सीसीटीवी निगरानी के साथ 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी है। इसके अलावा नागरिक सुरक्षा कर्मी और स्वयंसेवक भी मौजूद हैं। भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गयी है। क्या है ‘Detect, Delete and Deport’ नीति? राज्य सरकार की इस नीति का मकसद अवैध घुसपैठ रोकना और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना बताया जा रहा है। Detect (पहचान) खुफिया एजेंसियों और जिला प्रशासन की मदद से उन लोगों की पहचान की जायेगी, जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे हैं। Delete (हटाना) जिन लोगों के दस्तावेज वैध नहीं होंगे, उनके नाम मतदाता सूची, राशन कार्ड और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से हटाये जायेंगे। Deport (निर्वासन) पकड़े गये लोगों को Border Security Force को सौंपा जायेगा, जो बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगी। जिलों में बनेंगे होल्डिंग सेंटर राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश दिये हैं। इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जायेगा, जो जेल से रिहा हो चुके हैं या अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पकड़े गये हैं। CAA को लेकर भी सरकार का बड़ा बयान नबान्न में वरिष्ठ अधिकारियों और BSF अधिकारियों के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जो लोग Citizenship Amendment Act के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जायेगा। उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के कारण वर्षों तक केंद्र के निर्देशों की अनदेखी की गयी। अब राज्य सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने की बात कह रही है। सीमा क्षेत्रों में पुलिस को मिले विशेष निर्देश राज्य के गृह सचिव और डीजीपी को सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में इस नीति को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया गया है। अब स्थानीय पुलिस संदिग्ध विदेशी नागरिकों को हिरासत में लेते ही इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और BSF को देगी, ताकि निर्वासन की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके।  

surbhi मई 26, 2026 0
Assam model Bengal
बंगाल में ‘असम मॉडल’ की एंट्री, अवैध घुसपैठ पर सख्त हुए CM सुवेंदु

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि अब बंगाल में भी असम मॉडल लागू किया जाएगा और बांग्लादेश सीमा पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमा पर तेजी से बाड़ लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेगी।   असम की तर्ज पर होगी कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि असम और त्रिपुरा में जिस तरह अवैध घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उसी मॉडल को अब बंगाल में अपनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशहित में सीमाओं को सुरक्षित करना बेहद जरूरी है और भाजपा सरकार इस दिशा में कठोर कदम उठाएगी।   TMC सरकार पर साधा निशाना सुवेंदु अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति के कारण सीमा सुरक्षा कमजोर हुई। उन्होंने कहा कि कई इलाकों में BSF को बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं दी गई, जिसकी वजह से सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाई। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार अब इस प्रक्रिया को तेज कर रही है।   45 दिनों में पूरी होगी जमीन हस्तांतरण प्रक्रिया कोलकाता में हुई पहली कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए आवश्यक जमीन 45 दिनों के भीतर केंद्रीय गृह मंत्रालय और BSF को सौंप दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।   पूर्वी राज्यों के गठजोड़ पर जोर सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पूर्वोदय अभियान” का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्वी भारत के भाजपा शासित राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाएगा। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा को अपना “मार्गदर्शक और संकटमोचक” बताते हुए कहा कि असम की विकास और सुरक्षा नीति बंगाल के लिए प्रेरणा बनेगी।   राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा बता रहा है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम बता रही है। आने वाले दिनों में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ का मुद्दा बंगाल की राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है।

Unknown मई 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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