India Economy

Prime Minister Narendra Modi chairs high-level cabinet meeting on energy security and Viksit Bharat 2047 vision
पीएम मोदी की 4 घंटे लंबी महाबैठक, एनर्जी सिक्योरिटी और ‘विकसित भारत 2047’ पर बड़ा मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।  

surbhi मई 22, 2026 0
Gold jewelry displayed amid rising gold and silver import figures
India Gold Import: पीएम मोदी की अपील से पहले सोने के आयात में जबरदस्त उछाल, चांदी का इंपोर्ट 157% बढ़ा

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में सोने और चांदी के आयात के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील से पहले अप्रैल महीने में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में बड़ी तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत उछलकर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। ऊंची कीमतों के बावजूद बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश और ज्वेलरी डिमांड के चलते आयात में तेजी बनी रही। सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर आयात पर दिखाई दे सकता है। वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग में कमी आ सकती है और गोल्ड इंपोर्ट घट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। चांदी के आयात में रिकॉर्ड तेजी वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण सिल्वर इंपोर्ट में तेज उछाल देखा गया है। बढ़ा व्यापार घाटा अप्रैल में सोने और चांदी के बढ़े आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सरकार का फोकस अब विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने पर है। भारत में कहां से आता है सबसे ज्यादा सोना? Switzerland भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बना हुआ है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद United Arab Emirates की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और South Africa की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में सिर्फ स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत, China के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है। देश में गोल्ड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Sugar sacks stacked at warehouse after India bans sugar exports till September 2026
चीनी निर्यात पर बड़ा फैसला: भारत ने सितंबर 2026 तक लगाया प्रतिबंध, घरेलू आपूर्ति पर फोकस

सरकार ने अचानक बदली निर्यात नीति भारत सरकार ने घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब देश से चीनी का निर्यात सितंबर 2026 तक रोक दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह फैसला पहले की उस नीति से बिल्कुल अलग है, जिसमें सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। अब इसे “restricted” से बदलकर पूरी तरह “prohibited” कर दिया गया है। किन-किन प्रकार की चीनी पर लगा प्रतिबंध नए आदेश के अनुसार कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी–तीनों के निर्यात पर रोक रहेगी। यह आदेश वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीजीएफटी (Directorate General of Foreign Trade) द्वारा जारी किया गया है। हालांकि, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को कुछ मौजूदा समझौतों के तहत सीमित निर्यात की अनुमति दी गई है। घरेलू आपूर्ति को लेकर चिंता सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में लगभग 275 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती स्टॉक जोड़ने के बाद कुल आपूर्ति लगभग 325 लाख टन हो जाएगी। वहीं घरेलू मांग करीब 280 लाख टन रहने की संभावना है। इसके बाद स्टॉक केवल 45 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। मौसम और संकट ने बढ़ाई चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि 2026-27 में उत्पादन और घट सकता है। इसका कारण कमजोर मानसून और एल-नीनो की संभावना बताई जा रही है। साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे तनाव से उर्वरक आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है। व्यापारियों और मिलों पर असर अचानक लिए गए इस फैसले से चीनी उद्योग और व्यापारियों पर असर पड़ सकता है। कई कंपनियों ने पहले ही निर्यात के सौदे कर लिए थे, जिन पर अब अनिश्चितता बन गई है। वैश्विक बाजार में कीमतों में उछाल भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखा गया। न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी की कीमतों में 2% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि लंदन में सफेद चीनी के भाव लगभग 3% तक बढ़ गए। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और वैश्विक आपूर्ति में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक बाजार में भी दबाव बढ़ सकता है।  

surbhi मई 14, 2026 0
RBI Governor Sanjay Malhotra warns fuel prices may rise amid ongoing Middle East oil crisis
मध्य पूर्व संकट जारी रहा तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, RBI गवर्नर की चेतावनी

वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।  

surbhi मई 14, 2026 0
Fuel station display showing petrol and diesel prices fluctuating across Indian cities on May 6 2026
6 मई 2026: पेट्रोल-डीजल के दामों में मिला-जुला असर, कहीं राहत तो कहीं बढ़ोतरी

देशभर में 6 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हलचल देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर अब स्थानीय स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जहां कुछ शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, वहीं कई जगहों पर मामूली बढ़ोतरी और गिरावट दर्ज की गई है। बड़े शहरों में क्या है हाल? देश की आर्थिक राजधानी Mumbai में पेट्रोल 103.54 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि New Delhi में भी कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। इसी तरह डीजल के दाम भी मुंबई में 90.03 रुपये और दिल्ली में 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं। यूपी, बिहार और झारखंड में बदलाव पूर्वी और उत्तरी राज्यों में कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला: Gaya में पेट्रोल 50 पैसे बढ़कर 106.44 रुपये हो गया Noida में पेट्रोल 13 पैसे सस्ता हुआ Dhanbad में पेट्रोल 30 पैसे घटा Patna में पेट्रोल 8 पैसे बढ़ा डीजल की बात करें तो: पटना में 7 पैसे की बढ़त मुजफ्फरपुर में 8 पैसे की गिरावट जमशेदपुर में 23 पैसे महंगा धनबाद में 31 पैसे सस्ता हुआ प्रमुख शहरों में पेट्रोल के ताजा भाव (₹/लीटर) लखनऊ – 94.69 नोएडा – 94.77 गया – 106.44 पटना – 105.42 भागलपुर – 106.27 मुजफ्फरपुर – 105.98 धनबाद – 97.87 रांची – 97.86 देवघर – 97.68 जमशेदपुर – 98.03 मुंबई – 103.54 नई दिल्ली – 94.77 कोलकाता – 105.45 चेन्नई – 100.84 भोपाल – 106.52 गुरुग्राम – 95.51 बेंगलुरु – 102.92 प्रमुख शहरों में डीजल के ताजा भाव (₹/लीटर) लखनऊ – 87.81 नोएडा – 87.89 गया – 92.63 पटना – 91.67 भागलपुर – 92.44 मुजफ्फरपुर – 92.17 धनबाद – 92.62 रांची – 92.62 देवघर – 92.39 जमशेदपुर – 92.78 मुंबई – 90.03 नई दिल्ली – 87.67 कोलकाता – 92.02 चेन्नई – 92.39 भोपाल – 91.89 गुरुग्राम – 87.98 बेंगलुरु – 90.99 क्या है बदलाव की वजह? विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी मुद्रा विनिमय दर (रुपया बनाम डॉलर) सीधे तौर पर घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा राज्यों के टैक्स स्ट्रक्चर के कारण भी अलग-अलग शहरों में दामों में अंतर देखने को मिलता है। आगे क्या उम्मीद? आने वाले दिनों में अगर ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता रहती है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतें संतुलित रह सकती हैं। हालांकि, छोटे स्तर पर उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।  

surbhi मई 6, 2026 0
RBI forex reserves chart showing weekly decline alongside falling gold reserve value in India
Forex Watch: तीन हफ्तों की बढ़त के बाद फिसला विदेशी मुद्रा भंडार, सोने के भंडार में भी गिरावट

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में लगातार तीन सप्ताह की बढ़त के बाद एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की कमी आई है। कुल भंडार में आई गिरावट ताजा गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 698.487 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.494 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था। उल्लेखनीय है कि अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में भंडार में 14 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि मार्च 2026 में इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। FCA में कमी बना बड़ा कारण विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) भी इस गिरावट की मुख्य वजह रही हैं। FCA में 2.841 अरब डॉलर की कमी कुल FCA भंडार घटकर 554.622 अरब डॉलर FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है, जिससे कुल भंडार प्रभावित होता है। सोने के भंडार पर भी असर इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की वैल्यू में 1.897 अरब डॉलर की कमी कुल वैल्यू घटकर 120.236 अरब डॉलर हालांकि, मार्च 2026 के अंत तक भारत के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7% हिस्सा है। SDR और IMF रिजर्व में भी गिरावट स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 67 मिलियन डॉलर की कमी, अब 18.774 अरब डॉलर International Monetary Fund (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 15 मिलियन डॉलर की गिरावट, कुल 4.855 अरब डॉलर क्यों आई गिरावट? विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं में गिरावट भी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। क्या है इसका मतलब? विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट अल्पकालिक दबाव का संकेत हो सकता है, लेकिन भारत का कुल भंडार अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक हालात के आधार पर इसमें फिर सुधार देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 2, 2026 0
RBI gold reserves being transported to India as central bank repatriates 104 tonnes from overseas vaults
Gold Back to India: विदेशों से 104 टन सोना वापस, रणनीतिक बदलाव के संकेत – क्या है असली वजह?

भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। Reserve Bank of India (RBI) ने पिछले छह महीनों में करीब 104 टन सोना विदेशों से वापस देश में मंगाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। कितना सोना भारत में, कितना विदेश में? RBI की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल 880.52 टन सोने में से अब लगभग 77% यानी करीब 680 टन सोना देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। वहीं, करीब 197.67 टन सोना अभी भी Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास रखा हुआ है। क्यों बदली रणनीति? पहले भारत सहित कई देश अपने सोने को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में रखते थे। इसके पीछे मुख्य कारण थे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की खरीद-फरोख्त में आसानी वैश्विक लेनदेन में सुविधा विदेशी संस्थानों पर भरोसा लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Russia-Ukraine War और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसी घटनाओं ने देशों को सतर्क कर दिया है। अब सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा (Strategic Asset) के रूप में देखा जा रहा है। क्या हैं प्रमुख जोखिम? विदेशों में रखी संपत्ति राजनीतिक कारणों से फ्रीज हो सकती है संकट के समय तुरंत उपयोग में लाना मुश्किल वैश्विक तनाव के कारण भरोसे में कमी विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ी हिस्सेदारी सोने की कीमतों में तेजी के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी अहमियत भी बढ़ी है: सितंबर 2025: 97.4 अरब डॉलर मार्च 2026: 115.4 अरब डॉलर हिस्सेदारी: 13.9% से बढ़कर 16.7% दुनिया में भी बढ़ रहा ट्रेंड भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी राह पर चल रहे हैं: फ्रांस ने 129 टन सोना वापस मंगाया सर्बिया ने पूरा स्वर्ण भंडार देश में शिफ्ट किया जर्मनी भी अपने विदेशी भंडार की समीक्षा कर रहा है World Gold Council के अनुसार, 2025 तक 59% केंद्रीय बैंक अपना सोना अपने देश में रखना पसंद कर रहे हैं, जो 2020 में 50% था। क्या संकेत देता है यह कदम? भारत का यह कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि बदलते वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा और स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह सिर्फ एक वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Heatwave, rising oil prices and dry farmland depict economic pressure from weak monsoon in India
भारत पर ‘ट्रिपल अटैक’ का खतरा: महंगा क्रूड, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून से बढ़ी आर्थिक चिंता

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई मोर्चों पर दबाव झेलती नजर आ रही है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच अब भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के संकेतों ने महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। महंगे क्रूड से बढ़ा दबाव वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा असर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है। भीषण गर्मी ने बढ़ाई बिजली मांग देश के कई हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलर के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हाल ही में देश में पावर डिमांड 256 गीगावाट तक पहुंच गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। कमजोर मानसून से खेती पर खतरा जून से सितंबर के बीच आने वाला मानसून भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। महंगाई बढ़ने का खतरा Reserve Bank of India ने जहां महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया था, वहीं अब विशेषज्ञ इसे 5% से ऊपर जाने की आशंका जता रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है, तो यह आंकड़ा 5.8% तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है, बल्कि दरें बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है। ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ जैसी स्थिति का खतरा ANZ Bank के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतें, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून मिलकर “परफेक्ट स्टॉर्म” यानी गंभीर आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। खासकर खाद्य महंगाई सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है। आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं किसानों की आय पर असर पड़ सकता है ग्रामीण इलाकों में मांग घट सकती है खेती की लागत बढ़ने से महंगाई और तेज हो सकती है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 37% है, इसलिए खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ेगा। क्या है राहत की उम्मीद? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पूरी तरह बिगड़ेगी नहीं। Nomura Holdings के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही बेहतर सिंचाई और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के कारण खेती पर असर पहले के मुकाबले कुछ कम हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Oil barrels with rising price chart symbolizing crude surge and India’s resilient economic growth outlook
$130 तक पहुंचे कच्चे तेल के बावजूद मजबूत रहेगी भारत की अर्थव्यवस्था: S&P का भरोसा

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि अगर इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी भारत करीब 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत वृद्धि दर मानी जाएगी। भारत की साख पर नहीं पड़ेगा असर S&P Global Ratings ने साफ किया है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत की ‘सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी मुख्य वजह भारत का मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता बताई गई है। सामान्य हालात में 7.1% ग्रोथ का अनुमान एजेंसी के डायरेक्टर (सॉवरेन रेटिंग्स) YeeFarn Phua के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, तेल की कीमत 130 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति में भी भारत की ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर है। क्या हैं संभावित जोखिम? S&P ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा एक बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि ईंधन और उर्वरक जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ईरान संकट से बढ़ी तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। एक समय पर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसकी एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत और गैस का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। हालांकि, फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है, जिसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकट में भी मजबूत भारत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। मजबूत नीतिगत ढांचा और वित्तीय अनुशासन इसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Oil barrels, rising inflation graph, RBI building silhouette and stock market indicators showing economic impact of West Asia conflict on India
Iran War Impact: FY27 में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें, कंपनियों के Capex फैसले टलने के आसार

  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों के निवेश फैसलों पर पड़ेगा। RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर हिमांशु कोहली के मुताबिक: फिलहाल RBI दरों को स्थिर रख सकता है लेकिन अगर एनर्जी प्राइस बढ़ते रहे, तो FY27 में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी संभव है महंगाई और तेल कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधा का खतरा डॉलर की मजबूती ये सभी फैक्टर्स महंगाई को बढ़ा सकते हैं, जिससे RBI पर दबाव बढ़ेगा। Capex (पूंजीगत खर्च) फैसले टल सकते हैं अनिश्चित माहौल को देखते हुए: कंपनियां निवेश (Capex) फैसलों को टाल सकती हैं मैनेजमेंट Q4FY26 के नतीजों में सतर्क रुख अपना सकता है किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर? अगर युद्ध लंबा चला, तो इन सेक्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है: केमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर्स सीमेंट और मेटल्स ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लॉजिस्टिक्स और एयरलाइंस कंज्यूमर स्टेपल्स इन सेक्टर्स के मार्जिन में गिरावट आ सकती है असर कब दिखेगा? Q4FY26: असर सीमित रहने की संभावना Q1FY27 – Q2FY27: मार्जिन पर दबाव साफ दिख सकता है डिमांड में भी कमी आ सकती है RBI की रणनीति क्या हो सकती है? रेपो रेट फिलहाल स्थिर फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप OMOs के जरिए लिक्विडिटी सपोर्ट 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले ही 7% के पार जा चुकी है

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Petrochemical plant with industrial units highlighting government duty cut impact on manufacturing and supply chain
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा कदम: पेट्रोकेमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म, उद्योगों को राहत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कई जरूरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार के मुताबिक: मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो रही है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है इन परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि देश में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित न हो। किन सेक्टरों को होगा फायदा? इस फैसले से कई बड़े उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा: प्लास्टिक और पैकेजिंग टेक्सटाइल इंडस्ट्री फार्मा सेक्टर केमिकल इंडस्ट्री ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और सप्लाई चेन सुचारू बनी रहेगी। किन उत्पादों पर मिली छूट? सरकार ने जिन प्रमुख पेट्रोकेमिकल्स पर ड्यूटी हटाई है, उनमें शामिल हैं: एनहाइड्रस अमोनिया मेथनॉल टोल्यून स्टाइरीन विनाइल क्लोराइड मोनोमर मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) फिनोल, एसिटिक एसिड, PTA इसके अलावा कई पॉलिमर भी शामिल हैं: पॉलीएथिलीन (PE) पॉलीप्रोपिलीन (PP) पॉलीस्टाइरीन (PS) PVC, PET चिप्स ABS (इंजीनियरिंग प्लास्टिक) आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा? कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन लागत कम होगी इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़े, दवाइयों जैसी चीजों की कीमतों में राहत मिल सकती है बाजार में सप्लाई बनी रहने से महंगाई पर भी काबू पाने में मदद मिल सकती है

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Commercial LPG gas cylinders stacked with price hike impact on businesses and restaurants
महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹195 तक महंगा, जानिए नए रेट और असर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई की खबर लेकर आई है। कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। 1 अप्रैल से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितनी बढ़ी कीमत? सरकार द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 और कोलकाता में ₹218 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जो पहले ₹1884.50 थी। वहीं कोलकाता में यह कीमत बढ़कर 2208 रुपये पहुंच गई है। अलग-अलग शहरों में नए रेट देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की नई कीमत इस प्रकार है: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 छोटे सिलेंडर पर भी असर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹51 की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है। कारोबारियों पर सीधा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। पहले भी बढ़ चुके हैं दाम गौरतलब है कि 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹114.50 महंगा हुआ था। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 बढ़ा था। यानी पिछले एक महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। क्यों बढ़ रही है कीमत? विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर LPG के दामों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव संभव है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Fuel pump showing petrol prices as global crude oil rises amid Middle East tensions
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद राहत, सरकार का संकेत-फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की कोई योजना नहीं है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 99.75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार गई। हालांकि शाम तक कीमतें कुछ नरम पड़ीं और यह लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थीं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।   महंगाई पर फिलहाल बड़ा असर नहीं लोकसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की महंगाई दर पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें आधार स्तर से 10 प्रतिशत बढ़ती हैं और उसका पूरा असर घरेलू बाजार में आता है, तो महंगाई दर में केवल लगभग 30 बेसिस पॉइंट यानी करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम अवधि में महंगाई पर असर कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें रुपये की विनिमय दर, वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति और समग्र आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।   सरकारी तेल कंपनियों की मजबूत स्थिति सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां-Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited-वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में हैं। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में इन तीनों कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 192 प्रतिशत बढ़कर 57,810 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,768 करोड़ रुपये था। मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण ये कंपनियां फिलहाल खुदरा स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और नहीं बढ़ता तथा ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले नहीं होते, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसके बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है।   भारत में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें जून 2022 में जब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गया था, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर थी। इसके बाद मार्च 2024 में कीमतों में 2 रुपये की कटौती की गई, जिससे पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। 30 अक्टूबर 2024 को मार्केटिंग कॉस्ट एडजस्टमेंट के कारण केवल 5 पैसे की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है।   टैक्स नीति से मिलती है राहत विशेषज्ञों के अनुसार सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए समय-समय पर उत्पाद शुल्क में बदलाव करती रहती है। 8 अप्रैल 2025 को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे सालाना लगभग 34,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। वर्तमान में पेट्रोल पर SAED 13 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर है। इससे पहले नवंबर 2021 और मई 2022 में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल की कीमत में 13 रुपये और डीजल में 16 रुपये प्रति लीटर की राहत दी थी।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर युद्ध का असर ऊर्जा विशेषज्ञ Jim Burkhard (S&P Global Energy) का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बन सकता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब और कतर के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0