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rajya sabha elections
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा का मंथन तेज, सत्ता पक्ष से समर्थन की उम्मीद

रांची। झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी एक सीट पर जीत सुनिश्चित करने के साथ-साथ दूसरी सीट के लिए भी मजबूत रणनीति बनाने में जुटी है। भाजपा को उम्मीद है कि चुनाव के दौरान सत्ता पक्ष के कुछ विधायक भी उसके प्रत्याशी का समर्थन कर सकते हैं।   एनडीए सहयोगियों से होगी चर्चा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता जल्द ही एनडीए सहयोगी दलों जदयू, लोजपा (रामविलास) और आजसू नेताओं से मुलाकात करेंगे। बैठक में राज्यसभा चुनाव के लिए संयुक्त रणनीति और एनडीए प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी। सूत्रों के मुताबिक भाजपा फिलहाल उम्मीदवार के नाम से ज्यादा जरूरी वोटों के आंकड़े जुटाने पर ध्यान दे रही है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।   जून में झारखंड आएंगे नितिन नवीन राज्यसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के जून के पहले सप्ताह में झारखंड दौरे की संभावना है। इस दौरान वे पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होकर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। भाजपा नेता दीनदयाल वर्णवाल ने कहा कि पार्टी ने प्रत्याशी उतारने का निर्णय ले लिया है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार के विकास कार्यों और देश की वैश्विक पहचान को देखते हुए कई विधायक भाजपा उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं।   18 जून को होगा मतदान राज्यसभा  Elections 2026 के तहत झारखंड की दो सीटों पर 18 जून को मतदान होना है। एक सीट Shibu Soren के निधन के बाद खाली हुई, जबकि दूसरी सीट सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार सत्तारूढ़ गठबंधन जेएमएम, कांग्रेस और राजद के पास कुल 56 विधायक हैं, जबकि एनडीए के पास 24 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में दूसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।

Unknown मई 27, 2026 0
BJP women safety protest
‘नारी सुरक्षा’ के मुद्दे पर भाजपा का बड़ा प्रदर्शन, सड़कों पर उतरी हजारों महिलाएं

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित महिला आक्रोश मार्च ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। मोराबादी मैदान से शुरू हुआ यह मार्च अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा, जिसमें हजारों महिला कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं ने भाग लिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए महिलाएं ‘नारी सुरक्षा’ और ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई’ जैसे नारों के साथ सड़कों पर उतरीं। इस दौरान शहर में कई मार्गों को डायवर्ट करना पड़ा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।   महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल मार्च का मुख्य उद्देश्य राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, बढ़ते अपराध और कथित रूप से बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना था। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आम जनता खासकर महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।   नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना रैली में कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और राज्य सरकार को जमकर घेरा। नेताओं ने कहा कि यह मार्च सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि बदलाव की शुरुआत है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब मौजूदा सरकार से नाराज है और आने वाले समय में इसका असर राजनीतिक परिदृश्य पर भी देखने को मिलेगा।   राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन यह आक्रोश मार्च भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच भी साबित हुआ। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने पार्टी के जनाधार को दर्शाया। रैली के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह महिलाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर है और सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

Unknown अप्रैल 25, 2026 0
Udit Raj reacting to Tej Pratap Yadav statement on Rahul Gandhi during political debate in Delhi
राहुल गांधी पर बयान से बढ़ा विवाद, उदित राज का तेज प्रताप यादव पर तीखा पलटवार

New Delhi में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासत तेज हो गई है। Tej Pratap Yadav द्वारा Rahul Gandhi पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस नेता Udit Raj ने कड़ा पलटवार किया है। क्या कहा उदित राज ने? कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि: “यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन तेज प्रताप यादव अपरिपक्व हैं। उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।” उन्होंने यह भी कहा कि तेज प्रताप को पहले खुद पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। तेज प्रताप यादव ने क्या कहा था? इससे पहले तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें: सत्ता का लालची बताया कहा कि कांग्रेस पार्टी को संभालना उनके बस की बात नहीं साथ ही उन्होंने Priyanka Gandhi को कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के लिए बेहतर विकल्प बताया। प्रियंका गांधी पर जताया भरोसा तेज प्रताप यादव ने कहा कि: प्रियंका गांधी ही कांग्रेस को बेहतर तरीके से चला सकती हैं उनके नेतृत्व में पार्टी मजबूत हो सकती है इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।  

surbhi अप्रैल 21, 2026 0
Hemant Soren
सीएम हेमंत बंगाल में ममता के समर्थन में करेंगे प्रचार

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी यानी तृणमुल कांग्रेस के समर्थन में प्रचार करेंगे। वह 18 से 20 अप्रैल तक बंगाल दौरे पर रहेंगे, जहां वे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के समर्थन में ताबड़तोड़ चुनावी सभाएं करेंगे। उनकी सभी सभाएं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में होंगी।  झामुमो के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य के मुताबिक, यह दौरा तीन दिनों का होगा और इसमें कई महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।  पार्टी के अन्य नेता भी रहेंगे साथ हेमंत सोरेन खास तौर पर आदिवासी बहुल सीटों पर प्रचार करेंगे, जहां झामुमो का प्रभाव और पकड़ मजबूत है। इस दौरान उनके साथ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे। कल्पना सोरेन के भी चुनाव प्रचार में शामिल होने की संभावना जताई गई है, हालांकि उनका कार्यक्रम अभी तय नहीं हुआ है। झामुमो नहीं लड़ रहा चुनाव झामुमो पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह बंगाल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, बल्कि टीएमसी को समर्थन देगा। पार्टी का मानना है कि भाजपा को रोकने के लिए विपक्षी दलों के बीच एकजुटता जरूरी है। परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर केंद्र पर हमला झामुमो महासिचव सुप्रियो भट्टाचार्य ने संसद के विशेष सत्र और परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना कराए बिना परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ अन्याय होगा।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
Nishikant Dubey apology
बीजू पटनायक पर बयान देकर घिरे निशिकांत दुबे, विवाद बढ़ने पर मांगी बिना शर्त माफी

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में आ गए। इस बार मामला ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता बीजू पटनायक को लेकर दिए गए उनके बयान से जुड़ा है। पिछले सप्ताह मीडिया से बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद अब दुबे को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। निशिकांत दुबे ने 1 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीडिया से बातचीत के दौरान वह नेहरू-गांधी परिवार के संदर्भ में अपनी बात रख रहे थे, लेकिन उसे बीजू पटनायक के खिलाफ टिप्पणी के रूप में समझ लिया गया।   दुबे ने अपनी  पोस्ट में क्या लिखा? अपने पोस्ट में दुबे ने लिखा कि, “पिछले हफ्ते मीडिया से बात करते हुए मैंने नेहरू-गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय श्री बीजू पटनायक जी के संदर्भ में जो कहा, उसका गलत मतलब निकाला गया। पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है। नेहरू जी पर मेरे विचार को बीजू पटनायक पर समझा गया।   निशिकांत दुबे ने अपने बयान पर मांगी माफी  विवाद बढ़ने के बाद निशिकांत दुबे ने अपने बयान पर बिना शर्त माफी भी मांगी। उन्होंने लिखा कि बीजू बाबू हमेशा सम्मानित और ऊंचे कद के नेता रहे हैं और रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह उसके लिए खेद प्रकट करते हैं। बीजू पटनायक ओडिशा की राजनीति और देश की सार्वजनिक जीवन में एक बेहद सम्मानित नाम रहे हैं। ऐसे में उनके बारे में किसी भी विवादित टिप्पणी पर स्वाभाविक रूप से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। फिलहाल, दुबे की माफी के बाद यह मामला कुछ शांत होता दिख रहा है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा अभी भी जारी है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
अनंत सिंह मीडिया से बातचीत करते हुए, विवादित बयान
“भगवान भी CM बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा”, अनंत सिंह के बयान से बिहार में बवाल

पटना/मोकामा, एजेंसियां। बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक बहस का नया कारण बन गया है। उन्होंने कहा कि “भगवान भी मुख्यमंत्री बन जाएं तो मर्डर नहीं रुकेगा।” इस बयान के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।   अपराध पर क्या बोले अनंत सिंह अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में हत्या की घटनाएं पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है, क्योंकि अधिकतर अपराध आपसी रंजिश, निजी विवाद और दुश्मनी के कारण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर घर में पुलिस तैनात नहीं कर सकती, इसलिए हर घटना को रोकना संभव नहीं है।   पुराने बिहार से की तुलना अपने बयान में उन्होंने मौजूदा बिहार की तुलना पुराने दौर से भी की। उनका कहना था कि पहले राज्य में अपहरण और अपराध का डर ज्यादा था, जबकि अब हालात पहले से बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि अगर अब कहीं किडनैपिंग की घटना होती भी है, तो पीड़ित को जल्दी छोड़ दिया जाता है, जो बदलाव का संकेत है।   CM चेहरे पर भी खुलकर बोले अनंत सिंह ने राजनीति पर भी बेबाकी से राय रखी। उन्होंने कहा कि जेडीयू से निशांत कुमार और बीजेपी से सम्राट चौधरी अच्छे मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, उन्होंने नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके जैसा नेता दूसरा नहीं है और उनके काम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।   दंगल और परिवार की राजनीति उन्होंने अपने गांव नदमा में आयोजित होने वाले महा दंगल का भी जिक्र किया, जिसमें 100 से अधिक पहलवानों के भाग लेने और लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई। साथ ही संकेत दिए कि अब वे खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते और अपने बड़े बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहते हैं।   बयान से बढ़ी सियासी हलचल अनंत सिंह के बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष इस मुद्दे को किस तरह उठाते हैं।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
हेमंत सोरेन और नवीन जायसवाल नवदंपति के साथ मुलाकात करते हुए
विधायक नवीन जायसवाल के घर पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन, नवदंपति को दिया आशीर्वाद

रांची। रांची में आयोजित एक आशीर्वाद समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हटिया विधायक नवीन जायसवाल के आवास पहुंचे। यह आयोजन विधायक की पुत्री माही जायसवाल के विवाह उपरांत रखा गया था। मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। परिवार से की मुलाकात इस दौरान हेमंत सोरेन ने विधायक नवीन जायसवाल और उनके परिवार से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। कार्यक्रम में आत्मीयता और पारिवारिक अपनापन देखने को मिला। समारोह का माहौल सादगी, खुशी और गर्मजोशी से भरा रहा, जहां मौजूद सभी लोगों ने नवदंपति को दीं शुभकामनाएं।

Unknown मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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