Indian Army

UN awards medals to 210 Indian peacekeepers in South Sudan, including six women and seven staff officers
दक्षिण सूडान में भारत का बढ़ा मान, 210 शांति सैनिकों को UN मेडल; 6 महिलाएं भी सम्मानित

दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत उत्कृष्ट सेवा के लिए 210 भारतीय शांति सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित किया गया है। इनमें छह महिला शांति सैनिक और सात स्टाफ अधिकारी भी शामिल हैं। यह सम्मान मुश्किल परिस्थितियों में साहस, समर्पण और मानवीय सेवा के लिए दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र मिशन के मुताबिक, जुबा में आयोजित सम्मान समारोह में भारतीय ब्लू हेलमेट्स की सेवाओं को विशेष रूप से सराहा गया। भारतीय सैनिकों ने संकट की परिस्थितियों, मेडिकल इमरजेंसी और लोगों की जान बचाने वाले अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुश्किल हालात में निभाई जिम्मेदारी दक्षिण सूडान लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की जिम्मेदारी केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्थानीय नागरिकों की मदद और आपात परिस्थितियों में राहत पहुंचाना भी इसका अहम हिस्सा है। UNMISS ने भारतीय सैनिकों के साहस और करुणा की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से लोगों की जान बचाने और शांति को बढ़ावा देने में मदद मिली है। UN शांति अभियानों में भारत का लंबा रिकॉर्ड भारत का संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान दशकों पुराना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 1948 से शुरू हुए 71 संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में 2 लाख से अधिक भारतीयों ने सेवा दी है। इस दौरान 160 भारतीय शांति सैनिकों ने अपनी जान भी गंवाई। भारत वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में करीब 4,200 सैन्य और पुलिसकर्मियों का योगदान देता है, जिनमें लगभग 155 महिलाएं शामिल हैं। योगदान देने वाले देशों में भारत दूसरे स्थान पर है। महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारतीय महिलाओं की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2007 में भारत ने लाइबेरिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए पूरी तरह महिला कर्मियों वाली फॉर्म्ड पुलिस यूनिट तैनात की थी। इस टुकड़ी ने सुरक्षा ड्यूटी, रात्रि गश्त और स्थानीय पुलिस की क्षमता बढ़ाने में योगदान दिया था। दक्षिण सूडान में 210 भारतीय शांति सैनिकों को मिला यह सम्मान भारत की अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में लंबे समय से जारी भूमिका को रेखांकित करता है।  

surbhi अगस्त 18, 2026 0
भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास मैत्री-XV में सैनिकों की ट्रेनिंग
भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ आज से शुरू, जंगल और अर्ध-शहरी युद्ध की होगी ट्रेनिंग

बैंकॉक, एजेंसियां। भारत और थाईलैंड के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’ का 15वां संस्करण 18 अगस्त 2026 से थाईलैंड के सूरत थानी स्थित विभावदी रंगसित कैंप में शुरू हो रहा है। यह अभ्यास 31 अगस्त तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग, आपसी तालमेल और संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत करना है।   दोनों देशों के 85-85 सैनिक ले रहे हिस्सा   इस अभ्यास में भारतीय सेना और रॉयल थाई आर्मी के 85-85 जवान हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय दल में मुख्य रूप से 9 गोरखा राइफल्स के सैनिक शामिल हैं, जबकि थाईलैंड की ओर से 5वीं डिवीजन की 25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की तीसरी बटालियन के जवान भाग ले रहे हैं।   आतंकवाद विरोधी अभियानों पर रहेगा जोर   ‘मैत्री-XV’ में जंगल और अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त अभियान चलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। दोनों सेनाएं उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों में इस्तेमाल होने वाली रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगी। प्रशिक्षण में फील्ड एक्सरसाइज, सैन्य चर्चाएं, व्याख्यान, प्रदर्शन और अंत में एक संयुक्त सत्यापन अभ्यास शामिल होगा।   2006 में शुरू हुआ था ‘मैत्री’ अभ्यास   भारत-थाईलैंड ‘मैत्री’ सैन्य अभ्यास की शुरुआत 2006 में हुई थी। यह अभ्यास दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है। पिछले वर्ष इसका 14वां संस्करण मेघालय के उमरोई में आयोजित हुआ था। मौजूदा अभ्यास से दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता, आपसी समझ और विश्वास को और मजबूत करने की उम्मीद है।   भारत-थाईलैंड रक्षा संबंधों के लिए अहम   यह अभ्यास दोनों देशों के बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान सैनिक आधुनिक उपकरणों और तकनीकों से जुड़े अनुभव भी साझा करेंगे। इससे भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान दोनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
नेपाल दौरे पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ
नेपाल दौरे पर पहुंचे सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सहयोग और सीमा सुरक्षा पर होगी अहम चर्चा

काठमांडू, एजेंसियां। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ रविवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नेपाल की राजधानी काठमांडू पहुंचे। उनका यह दौरा 17 से 19 अगस्त 2026 तक है। यात्रा के दौरान भारत और नेपाल के बीच रक्षा सहयोग, सैन्य संबंधों और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।   नेपाली सेना देगी गार्ड ऑफ ऑनर     नेपाल पहुंचने के बाद जनरल धीरज सेठ नेपाली सेना के मुख्यालय जाएंगे। यहां उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इस दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होगी।     राष्ट्रपति भवन में होगा विशेष समारोह     जनरल धीरज सेठ काठमांडू स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष सम्मान समारोह में भी शामिल होंगे। यह समारोह भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही सैन्य परंपरा के तहत आयोजित किया जा रहा है।     नेपाली सेना के ‘जनरल’ का मिलेगा मानद पद     नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल एक विशेष समारोह में जनरल धीरज सेठ को नेपाली सेना के ‘जनरल’ का मानद पद प्रदान करेंगे।   भारत और नेपाल के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद सैन्य रैंक देने की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत सैन्य और ऐतिहासिक रिश्तों का प्रतीक माना जाता है।   रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर जोर     जनरल धीरज सेठ की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और नेपाल दोनों अपने पारंपरिक रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। यात्रा के दौरान सैन्य सहयोग के साथ-साथ सीमा सुरक्षा और दोनों सेनाओं के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
Former CDS Anil Chauhan reveals details about Operation Sindoor and Pakistan seeking ceasefire after military pressure.
'हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था': पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा खुलासा, जानिए क्यों पाकिस्तान ने 8 घंटे में मांगा सीजफायर

नई दिल्ली: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई 2025 की घटनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने जिस तेजी से भारत से सीजफायर की गुहार लगाई, वह उसकी सैन्य स्थिति के तेजी से कमजोर होने का संकेत था। उनके अनुसार, भारतीय सेना ने तब तक अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था, लेकिन पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हो गया। द प्रिंट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत को 48 घंटे में सबक सिखाने जैसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन 10 मई की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई। "हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था" जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा, "10 मई की सबसे बड़ी हैरानी यह थी कि पाकिस्तान ने खुद फोन कर बातचीत की इच्छा जताई। उस समय तक हमने अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।" उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने लगभग आठ घंटे के भीतर ही बातचीत का रास्ता चुन लिया, जबकि भारतीय सेना अपने अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी। भारत ने तुरंत सीजफायर क्यों नहीं माना? पूर्व CDS के अनुसार, भारत चाहता था कि सीजफायर से पहले उसके सभी रणनीतिक सैन्य उद्देश्य पूरे हो जाएं। भारतीय सशस्त्र बलों की योजना थी कि पाकिस्तान के ऐसे सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जहां से भविष्य में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना हो। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के बावजूद कुछ समय तक सैन्य अभियान जारी रखा। पाकिस्तान क्यों हुआ मजबूर? जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस समेत कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हमले किए। इन हमलों के कारण: पाकिस्तान के कई एयरबेस गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। एयरस्ट्रिप प्रभावित होने से लड़ाकू विमानों का संचालन मुश्किल हो गया। पाकिस्तानी वायुसेना की परिचालन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि यदि भारतीय कार्रवाई जारी रही तो उसकी सैन्य स्थिति और कमजोर हो जाएगी। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की सेना को यह भ्रम था कि उसने रातभर भारत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने पूरे समीकरण बदल दिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अब बातचीत ही सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि सैन्य स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी। डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए हुआ संपर्क पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तान ने डीजीएमओ (Director General of Military Operations) हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया। उनके अनुसार, जब यह बातचीत शुरू हुई, तब भी भारतीय सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और भारतीय सेना अपने अभियान पर आगे बढ़ रही थी। ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया? भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस आतंकी हमले में: 26 लोगों की हत्या की गई थी। मृतकों में 25 पर्यटक शामिल थे। आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया। जांच में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका सामने आई। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। पूर्व CDS के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान की वायुसेना को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उसने सीजफायर की पहल की।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
पुंछ के सीमावर्ती गांवों में मिले मोर्टार के गोले
पुंछ के सीमावर्ती गांवों में मोर्टार के गोले मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, इलाके में बढ़ाई गई निगरानी

पुंछ, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक स्थित कुछ सीमावर्ती गांवों में मोर्टार के पुराने गोले मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों में इन संदिग्ध वस्तुओं के मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने लोगों से ऐसी किसी भी वस्तु को छूने से बचने और तुरंत सुरक्षाबलों को सूचना देने की अपील की है।   सीमावर्ती इलाकों में मिले मोर्टार के गोले     प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पुंछ के LoC से सटे कुछ गांवों में ग्रामीणों को मोर्टार के गोले दिखाई दिए। सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर इलाके की घेराबंदी की और संदिग्ध वस्तुओं की जांच शुरू की।   अधिकारियों को आशंका है कि ये गोले पुराने हो सकते हैं और पहले हुई गोलीबारी या सैन्य गतिविधियों के दौरान यहां रह गए होंगे। हालांकि, इनके वहां पहुंचने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।   सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी     घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वहां कोई अन्य संदिग्ध वस्तु मौजूद न हो।   मोर्टार के गोले मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस पहलू की भी जांच कर रही हैं कि क्या ये वस्तुएं हाल की किसी गतिविधि से जुड़ी हैं या लंबे समय से जमीन में पड़ी हुई थीं।   ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील     सुरक्षा अधिकारियों ने सीमावर्ती गांवों के लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई मोर्टार का गोला, विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु दिखाई दे तो उसे छूने या हटाने की कोशिश न करें। ऐसी वस्तु मिलने पर तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को सूचना देने को कहा गया है।   सीमावर्ती इलाकों में पहले भी पुराने और बिना फटे गोला-बारूद मिलने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में विशेषज्ञ टीम ही वस्तु को सुरक्षित तरीके से हटाने या निष्क्रिय करने की कार्रवाई करती है।   जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति     फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां बरामद मोर्टार गोलों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ये गोले कितने पुराने हैं और उनके पुंछ के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचने की वजह क्या है।   घटना के बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
जनरल वी एन शर्मा
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी.एन. शर्मा का निधन, 96 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल विश्वनाथ शर्मा (वी.एन. शर्मा) का शुक्रवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 96 वर्ष के थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे प्राकृतिक कारणों से अंतिम सांस ली। जनरल शर्मा भारतीय सेना के 14वें प्रमुख रहे और उन्होंने मई 1988 से जून 1990 तक सेना प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली।   स्वतंत्र भारत के बाद कमीशन पाने वाले पहले सेना प्रमुख   जनरल वी.एन. शर्मा का सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्हें वर्ष 1950 में 16 लाइट कैवेलरी में कमीशन मिला था। वह स्वतंत्रता के बाद कमीशन पाने वाले उन शुरुआती अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक पहुंच बनाई। सेना प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल मई 1988 से जून 1990 तक रहा।   1987 के भारत-चीन गतिरोध में निभाई अहम भूमिका   जनरल शर्मा को 1987 के सुमदोरोंग चू संकट के दौरान उनकी भूमिका के लिए भी याद किया जाता है। उस समय वह पूर्वी सेना कमान के कमांडर थे। भारत और चीन के बीच तनाव के दौरान उन्होंने वांगडुंग से भारतीय सैनिकों को पीछे हटाने से इनकार करते हुए मजबूत सैन्य रुख अपनाया था।   सैन्य सेवा के बाद भी रहा महत्वपूर्ण योगदान   जनरल वी.एन. शर्मा का सैन्य जीवन भारतीय सेना के महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा। उनके नेतृत्व में सेना ने सीमा सुरक्षा और रणनीतिक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया। उनके निधन पर सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों और पूर्व सैनिकों ने शोक व्यक्त किया है।   दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार   रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल वी.एन. शर्मा का अंतिम संस्कार 2 अगस्त को दिल्ली के बराड़ स्क्वायर में किया जाएगा। उनके निधन से भारतीय सैन्य समुदाय में शोक की लहर है। देश के सैन्य इतिहास में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।    

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
Kargil Vijay Diwas
कारगिल विजय दिवस पर पीएम मोदी ने वीर शहीदों को किया नमन, देशभर में श्रद्धांजलि और सम्मान समारोह आयोजित

नई दिल्ली, एजेंसियां। 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीरों का अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने देशवासियों से शहीदों के बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया।   देशभर में हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम   कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल सहित देशभर के युद्ध स्मारकों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। सेना, अर्धसैनिक बलों, पूर्व सैनिकों, शहीदों के परिजनों और आम नागरिकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को नमन किया। कई राज्यों में शौर्य यात्राएं, स्कूलों में विशेष कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े सांस्कृतिक आयोजन भी आयोजित किए गए।   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी श्रद्धांजलि   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्रास में आयोजित मुख्य समारोह में कहा कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के वीरों का बलिदान भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने जवानों के साहस को नमन करते हुए कहा कि देश उनकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा।   1999 की ऐतिहासिक जीत को किया गया याद   हर वर्ष 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को कारगिल की चोटियों से खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था। कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों की बहादुरी, त्याग और देशभक्ति को याद करने का दिन है, जिनकी वजह से भारत ने अपनी सीमाओं की रक्षा करते हुए विजय प्राप्त की।

abhishek singh जुलाई 26, 2026 0
Viral video falsely claims Agniveers are joining Delhi student protests
Fact Check: क्या अग्निवीर छात्रों के समर्थन में दिल्ली आ रहे हैं? वायरल वीडियो की सच्चाई क्या है

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में अग्निवीर की वर्दी पहने कुछ लोग छात्रों के समर्थन में बयान देते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि अग्निवीर आंदोलन के समर्थन में दिल्ली पहुंचने वाले हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि किसी भी आधिकारिक स्रोत से नहीं हुई है। क्या है वायरल दावा? इंस्टाग्राम पर 'Breakingsatya' नाम के अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में कुछ लोग अग्निवीर जैसी वर्दी पहने दिखाई देते हैं। वीडियो में एक व्यक्ति दावा करता है कि भारतीय सेना छात्रों और युवाओं के साथ खड़ी है। वहीं दूसरा व्यक्ति कहता है कि अग्निवीरों की नई बैच आने के बाद स्थिति बदल जाएगी और दिल्ली पुलिस को जवाब मिलेगा। वीडियो में मौजूद लोगों ने अपने चेहरे मास्क से ढके हुए हैं, जिससे उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? वायरल वीडियो की जांच में इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान या विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली। भारतीय सेना की ओर से ऐसा कोई बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने भी इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। किसी प्रमुख समाचार एजेंसी या विश्वसनीय मीडिया संस्थान ने भी इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा अप्रमाणित है और वीडियो भ्रामक या फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच वायरल हुआ वीडियो यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है। हाल के दिनों में संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव और आंसू गैस की घटनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Family-friendly cars with advanced child safety features, airbags, ISOFIX mounts, and high crash protection ratings.
बच्चों की सुरक्षा के लिए बेस्ट हैं ये 5 कारें, जानें कीमत, सेफ्टी फीचर्स और क्यों हैं फैमिली के लिए बेहतर विकल्प

नई दिल्ली: नई कार खरीदते समय ज्यादातर परिवार माइलेज और कीमत के साथ-साथ सुरक्षा को भी सबसे बड़ी प्राथमिकता देते हैं। खासकर अगर घर में छोटे बच्चे हों, तो मजबूत बॉडी, चाइल्ड सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग वाली कार चुनना बेहद जरूरी हो जाता है। भारतीय बाजार में कई ऐसी कारें उपलब्ध हैं, जिन्हें बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिहाज से बेहतर माना जाता है। इनमें टाटा मोटर्स, स्कोडा और वॉक्सवैगन जैसी कंपनियों के मॉडल शामिल हैं। आइए जानते हैं ऐसी 5 कारों के बारे में जो एडवांस सेफ्टी फीचर्स और बेहतर क्रैश टेस्ट प्रदर्शन के लिए जानी जाती हैं। 1. Tata Safari टाटा सफारी फैमिली SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कारों में से एक है। यह मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों के साथ आती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹13.39 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP) ADAS (लेवल-2) फीचर्स इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक ऑटो होल्ड इमरजेंसी और ब्रेकडाउन कॉल ISOFIX चाइल्ड सीट सपोर्ट 2. Tata Harrier अगर आपकी फैमिली बड़ी है और आप प्रीमियम SUV खरीदना चाहते हैं, तो टाटा हैरियर एक मजबूत विकल्प हो सकती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹12.99 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 7 एयरबैग एडवांस ESP ADAS टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) OMEGARC प्लेटफॉर्म इमरजेंसी कॉलिंग सिस्टम 3. Skoda Kushaq स्कोडा कुशाक कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की लोकप्रिय कार है, जिसमें परिवार की सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.69 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS के साथ EBD ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट मल्टी-कोलिजन ब्रेक TPMS 4. Volkswagen Virtus अगर आप सेडान पसंद करते हैं, तो Volkswagen Virtus सुरक्षा के मामले में मजबूत विकल्प मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹10.70 लाख मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ISOFIX चाइल्ड सीट एंकरेज हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक पार्क डिस्टेंस कंट्रोल 5. Skoda Slavia स्कोडा स्लाविया भी फैमिली सेडान सेगमेंट में सुरक्षा के लिहाज से अच्छी मानी जाती है। शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत: लगभग ₹9.99 लाख इंजन विकल्प: 1.0 लीटर टर्बो पेट्रोल 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल मुख्य सेफ्टी फीचर्स: 6 एयरबैग ABS के साथ EBD सभी सीटों पर 3-पॉइंट सीट बेल्ट ट्रैक्शन कंट्रोल हिल होल्ड कंट्रोल मल्टी-कोलिजन ब्रेक रियर पार्किंग कैमरा ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट बच्चों की सुरक्षा के लिए कार खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कार खरीदते समय केवल एयरबैग की संख्या ही नहीं, बल्कि इन बातों पर भी ध्यान दें: ISOFIX चाइल्ड सीट माउंट की उपलब्धता इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC) ABS और EBD मजबूत क्रैश टेस्ट रेटिंग 3-पॉइंट सीट बेल्ट ADAS जैसे एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस फीचर्स (यदि उपलब्ध हों) अगर आपकी प्राथमिकता परिवार और बच्चों की सुरक्षा है, तो बेहतर क्रैश टेस्ट रेटिंग, मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर और आधुनिक सेफ्टी फीचर्स वाली कार चुनना लंबे समय में अधिक सुरक्षित और फायदेमंद साबित हो सकता है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
A DRDO-developed high-altitude surveillance airship designed for deployment over Ladakh to provide round-the-clock monitoring of India's northern borders.
लद्दाख में हाई-टेक एयरशिप तैनात करेगा भारत, 24x7 निगरानी से सीमा सुरक्षा होगी और मजबूत

नई दिल्ली: भारत अपनी उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप को जल्द ही लद्दाख में तैनात किया जाएगा। यह अत्याधुनिक प्रणाली सीमावर्ती क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखने और सेना को रियल टाइम खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगी। 20 किलोमीटर की ऊंचाई से रखेगा नजर जानकारी के अनुसार, यह एयरशिप लगभग 20 किलोमीटर (करीब 66,000 फीट) की ऊंचाई तक संचालित हो सकेगा। इतनी ऊंचाई से यह सीमावर्ती इलाकों में होने वाली हर गतिविधि पर लगातार नजर रखेगा और किसी भी संदिग्ध हलचल की तत्काल जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाएगा। आधुनिक सेंसर और रडार से लैस एयरशिप में अत्याधुनिक कैमरे, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, रडार और अन्य निगरानी उपकरण लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण दिन और रात, दोनों परिस्थितियों में लंबी दूरी तक निगरानी करने में सक्षम होंगे। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, सैन्य गतिविधियों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का समय रहते पता लगाया जा सकेगा। DRDO ने किया विकसित इस परियोजना का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) कर रहा है। इसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम और कठिन इलाकों में प्रभावी निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है, जहां पारंपरिक निगरानी प्रणालियों को संचालन में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतिम चरण में है परीक्षण रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप का परीक्षण अंतिम चरण में है। परीक्षण सफल होने के बाद इसे सबसे पहले लद्दाख में तैनात किया जाएगा। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसकी तैनाती की जा सकती है। सीमा सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से भारतीय सेना की निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। लगातार निगरानी और रियल टाइम अलर्ट मिलने से घुसपैठ की कोशिशों को समय रहते विफल किया जा सकेगा और किसी भी आपात स्थिति में सेना की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। वैश्विक तकनीक की दिशा में भारत का कदम दुनिया के कई देश पहले से ही उन्नत हवाई निगरानी प्रणालियों का उपयोग कर रहे हैं। अमेरिका लंबे समय से निगरानी एयरशिप, ड्रोन और उपग्रह आधारित नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है, जबकि चीन ने तिब्बत और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने निगरानी ढांचे को मजबूत किया है। रूस के पास भी सीमा सुरक्षा के लिए उन्नत हवाई निगरानी प्रणाली मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप देश की रक्षा तैयारियों को नई तकनीकी क्षमता देगा और सीमाओं की सुरक्षा को अधिक आधुनिक, प्रभावी और भरोसेमंद बनाएगा।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Women engineering graduates applying for Indian Army SSC Tech Women 2026 officer recruitment through the official online portal.
Indian Army SSC Tech Women 2026: महिला इंजीनियरों के लिए भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सुनहरा मौका, 30 पदों पर आवेदन शुरू

भारतीय सेना ने 68वें शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) टेक्निकल महिला कोर्स के लिए आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातकों को सेना में अधिकारी बनने का अवसर मिलेगा। इच्छुक उम्मीदवार 8 जुलाई 2026 से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों का प्रशिक्षण अप्रैल 2027 से ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA), गया (बिहार) में शुरू होगा। 30 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती अभियान के तहत विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं में कुल 30 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा सेवा के दौरान शहीद हुए रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणी में विशेष प्रवेश का प्रावधान भी रखा गया है। भर्ती से जुड़ी प्रमुख जानकारी विवरण जानकारी भर्ती का नाम Indian Army SSC Tech Women 68 Course पद शॉर्ट सर्विस कमीशन (तकनीकी) महिला अधिकारी कुल पद 30 आवेदन शुरू 8 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 6 अगस्त 2026 प्रशिक्षण शुरू अप्रैल 2027 प्रशिक्षण स्थल OTA, गया (बिहार) कौन कर सकता है आवेदन? इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाली उम्मीदवारों को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। उम्मीदवार अविवाहित महिला इंजीनियरिंग स्नातक हो। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत छात्राएं भी आवेदन कर सकती हैं, यदि उनका परिणाम 1 अप्रैल 2027 तक घोषित हो जाए। 1 अप्रैल 2027 को उम्मीदवार की आयु 20 से 27 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 1 अप्रैल 2000 से 31 मार्च 2007 के बीच हुआ होना चाहिए। शहीद रक्षा कर्मियों की विधवाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। ऐसे होगा चयन भारतीय सेना इस भर्ती में उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में करेगी। आवेदन पत्रों की जांच और शॉर्टलिस्टिंग सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची जॉइनिंग लेटर जारी SSB इंटरव्यू लगभग पांच दिनों तक चलेगा, जिसमें उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, मानसिक योग्यता और व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जाएगा। फिजिकल फिटनेस भी होगी जरूरी चयन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को निर्धारित शारीरिक मानकों पर भी खरा उतरना होगा। इसके तहत उम्मीदवार को— 13 मिनट में 2.4 किलोमीटर दौड़ पूरी करनी होगी। कम से कम 15 पुश-अप्स करने होंगे। 2 पुल-अप्स पूरे करने होंगे। 25 सिट-अप्स करने होंगे। तैराकी का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर आवेदन कर सकते हैं— भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट Join Indian Army पर जाएं। Officer Entry Apply/Login विकल्प चुनें। यदि पहले से पंजीकरण नहीं है तो नया रजिस्ट्रेशन करें। आधार या मैट्रिक प्रमाणपत्र के माध्यम से सत्यापन पूरा करें। लॉगिन करने के बाद Short Service Commission (Technical) Women Course का चयन करें। व्यक्तिगत, शैक्षणिक और संपर्क संबंधी जानकारी भरें। यदि पहले SSB में शामिल हुए हैं तो उसका विवरण दर्ज करें। सभी जानकारियां जांचने के बाद आवेदन पत्र सबमिट करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखें। महिला इंजीनियरों के लिए सुनहरा अवसर अगर आप इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं, तो यह भर्ती आपके लिए बेहतरीन अवसर है। इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Sourav Ganguly
ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल हुए सौरव गांगुली

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को उनके 54वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बड़ा सम्मान दिया है। आईसीसी ने उन्हें प्रतिष्ठित ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल करने की घोषणा की। यह फैसला स्कॉटलैंड की राजधानी एडिनबर्ग में आयोजित आईसीसी बोर्ड की वार्षिक बैठक में लिया गया। गांगुली इस सम्मान को हासिल करने वाले कुल 12वें भारतीय क्रिकेटर और पुरुष वर्ग में 10वें भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।   गांगुली ने इस सम्मान पर खुशी जताते हुए आईसीसी और चेयरमैन जय शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि हॉल ऑफ फेम में शामिल होना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के महान खिलाड़ियों के साथ इस प्रतिष्ठित सूची का हिस्सा बनना उनके करियर का यादगार पल है।   कप्तान के रूप में बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जबकि 311 वनडे मुकाबलों में 22 शतकों की मदद से 11,363 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने वनडे में 132 विकेट भी अपने नाम किए। वर्ष 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंतिम टेस्ट खेलने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया।   गांगुली का सबसे बड़ा योगदान क्या क्या है? साल 2000 से 2005 के बीच भारतीय टीम की कप्तानी के दौरान माना जाता है। मैच फिक्सिंग विवाद के बाद उन्होंने टीम इंडिया को नई दिशा दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 नेटवेस्ट ट्रॉफी जीती, 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता बना, 2003 विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा और 2004 में पाकिस्तान में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रचा। 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत भी उनके नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि रही।   संन्यास के बाद गांगुली ने क्रिकेट प्रशासन में अहम भूमिका निभाई। वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष, SA20 में प्रिटोरिया कैपिटल्स के मुख्य कोच तथा आईपीएल और डब्ल्यूपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के क्रिकेट डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Defence Minister Rajnath Singh chairs a Defence Acquisition Council meeting approving major defence procurement proposals to strengthen India's armed forces.
₹52 हजार करोड़ के हथियार खरीद को मंजूरी, सेना को मिलेंगे ड्रोन रोधी सिस्टम, मिसाइलें और कामिकाजे ड्रोन

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Indian Army personnel detain a Pakistani national after foiling an infiltration attempt along the Line of Control in Poonch district
पुंछ में घुसपैठ की कोशिश नाकाम, LoC पार कर भारतीय सीमा में घुसा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार

  Poonch Infiltration Attempt: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए एक पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है। सेना ने उसे भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही हिरासत में ले लिया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य का पता लगाने में जुटी हैं। बालाकोट सेक्टर में हुई गिरफ्तारी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई पुंछ जिले के मेंढर सब-डिवीजन के बालाकोट सेक्टर में की गई। सेना के जवान सीमा पर नियमित निगरानी के दौरान सतर्क थे। इसी दौरान एक व्यक्ति को नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करते देखा गया, जिसके बाद जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। पाकिस्तानी नागरिक की हुई पहचान अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान रईस खान (31) के रूप में हुई है। वह पाकिस्तान के राजल पख्तून क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है और बाजिया जादा खान का बेटा है। प्रारंभिक पूछताछ में उसकी पहचान की पुष्टि की गई है, जबकि उसके भारत में आने के मकसद की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रहीं गहन पूछताछ गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है। खुफिया और सुरक्षा अधिकारी उससे विस्तृत पूछताछ कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह गलती से सीमा पार कर आया था या किसी सुनियोजित घुसपैठ या अन्य गतिविधि के तहत भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और संभावित नेटवर्क की भी जांच कर रही हैं। LoC पर हाई अलर्ट हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बलों ने निगरानी और गश्त को और मजबूत किया है। सेना आधुनिक निगरानी उपकरणों और नियमित गश्त के जरिए किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Congress MP Shashi Tharoor congratulates Lieutenant General Rajesh Pushkar on his appointment as the new General Officer Commanding-in-Chief of the Indian Army's Southern Command.
लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर बने दक्षिणी कमान के नए प्रमुख, शशि थरूर बोले- परिवार और देश के लिए गर्व का क्षण

  नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय सेना की एक अहम नियुक्ति पर खुशी और गर्व व्यक्त किया है। उन्होंने अपने बहनोई लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को भारतीय सेना की दक्षिणी कमान (सदर्न कमांड) का नया जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) नियुक्त किए जाने पर बधाई दी। थरूर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के साथ-साथ पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, शशि थरूर की दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर के भाई हैं। थरूर ने बताया कि उन्होंने फोन पर राजेश पुष्कर से बातचीत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट में राजेश पुष्कर के साथ एक पुरानी तस्वीर और एक वीडियो भी साझा किया। 1 जुलाई से संभालेंगे दक्षिणी कमान की कमान शशि थरूर ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर 1 जुलाई से भारतीय सेना की दक्षिणी कमान का नेतृत्व संभालेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की छह ऑपरेशनल कमांड में दक्षिणी कमान क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ी है और देश के कई महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। 'उनकी सैन्य क्षमता पर पूरा भरोसा' थरूर ने कहा कि राजेश पुष्कर का सैन्य अनुभव, उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और वर्दी के प्रति समर्पण उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए पूरी तरह उपयुक्त बनाता है। उन्होंने लिखा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि वह इस पद की जिम्मेदारियों का निर्वहन सर्वोच्च पेशेवर क्षमता और सम्मान के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि एक सक्षम और समर्पित सैन्य अधिकारी का इतनी महत्वपूर्ण कमान संभालना न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे देश के लिए भरोसे और गर्व की बात है। पिपिंग सेरेमनी की तस्वीर भी की साझा अपने पोस्ट में शशि थरूर ने एक तस्वीर साझा की, जिसे उन्होंने उस समय की बताया जब राजेश पुष्कर को मेजर जनरल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इस पिपिंग सेरेमनी में थरूर और राजेश पुष्कर की पत्नी अनु भी मौजूद थीं। ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो भी किया साझा थरूर द्वारा साझा किए गए वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए दिखाई देते हैं। वीडियो में वह अभियान को भारतीय सेना की महत्वपूर्ण सफलता बताते हैं और कहते हैं कि सेना भविष्य में भी किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। देशवासियों से मांगा समर्थन पोस्ट के अंत में शशि थरूर ने देशवासियों से अपील की कि वे भी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दें। उन्होंने लिखा कि वह देश की सुरक्षा और सेवा की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। पोस्ट का समापन उन्होंने "जय हिंद!" के साथ किया।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Indian Army K-9 Vajra self-propelled howitzer during field deployment and artillery firing exercise.
भारतीय सेना का बड़ा आधुनिकीकरण अभियान, 23,000 करोड़ रुपये में 300 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपें खरीदने की तैयारी

  भारतीय सेना अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने के लिए 300 अतिरिक्त K-9 वज्र-टी स्वचालित हॉवित्जर तोपों की खरीद की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित लागत लगभग 23,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। यदि इस परियोजना को स्वीकृति मिलती है, तो यह भारतीय सेना के हालिया वर्षों के सबसे बड़े तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में शामिल होगी। नई तोपों की तैनाती पाकिस्तान और चीन से लगने वाली सीमाओं पर की जाएगी, जिससे दोनों मोर्चों पर सेना की फायरपावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। एलएंडटी को मिल सकता है निर्माण का जिम्मा रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर इसका निर्माण कार्य लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को मिल सकता है। कंपनी दक्षिण कोरिया की रक्षा निर्माता कंपनी हनव्हा एयरोस्पेस के सहयोग से भारत में K-9 वज्र-टी का निर्माण करती है। नई खरीद के बाद भारतीय सेना के लिए ऑर्डर की गई K-9 वज्र तोपों की कुल संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारी को मजबूती मिलेगी। बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर सेना का फोकस हाल के वर्षों में भारतीय सेना ने लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाली प्रणालियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में मोबाइल और तेज प्रतिक्रिया देने वाली तोप प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसी रणनीति के तहत सेना ऐसी प्रणालियों को प्राथमिकता दे रही है, जो विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में प्रभावी फायर सपोर्ट उपलब्ध करा सकें। क्या है K-9 वज्र की खासियत? K-9 वज्र-टी एक 155 मिमी/52 कैलिबर ट्रैक्ड स्वचालित हॉवित्जर तोप प्रणाली है। यह 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी "शूट एंड स्कूट" क्षमता है। यानी यह लक्ष्य पर गोले दागने के तुरंत बाद अपनी स्थिति बदल सकती है, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचाव आसान हो जाता है। इसके अलावा यह बख्तरबंद सुरक्षा से लैस है और रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से संचालन कर सकती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक युद्ध प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। 2017 में हुआ था पहला सौदा भारत ने K-9 वज्र तोपों के लिए पहला बड़ा अनुबंध वर्ष 2017 में किया था। उस समय 100 तोपों की खरीद के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इनकी आपूर्ति निर्धारित समय से पहले वर्ष 2021 में पूरी कर ली गई थी। बाद में इन तोपों को मुख्य रूप से पाकिस्तान सीमा से लगे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किया गया, जहां इनके प्रदर्शन को सकारात्मक माना गया। 2023 में मिला दूसरा ऑर्डर K-9 वज्र की परिचालन सफलता को देखते हुए दिसंबर 2023 में भारतीय सेना ने 100 अतिरिक्त तोपों की खरीद को मंजूरी दी थी। इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 7,600 करोड़ रुपये थी। इस निर्णय ने स्पष्ट संकेत दिया कि सेना भविष्य की युद्ध रणनीति में इस प्रणाली को महत्वपूर्ण भूमिका देती है। लद्दाख में भी सफल रहे परीक्षण हाल ही में K-9 वज्र के संशोधित शीतकालीन संस्करण का परीक्षण लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किया गया। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, बेहद कम तापमान और कठिन परिस्थितियों में भी इस प्रणाली का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। परीक्षण के सफल परिणामों के बाद उत्तरी सीमाओं पर अतिरिक्त K-9 वज्र इकाइयों की तैनाती की योजना को और बल मिला है। तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा प्रस्तावित खरीद भारतीय सेना के व्यापक तोपखाना आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है। सेना समानांतर रूप से एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS), धनुष तोप और उन्नत पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम जैसी परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि इन आधुनिक प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सेना भविष्य के किसी भी संघर्ष में तेजी से, सटीक और लगातार फायरपावर उपलब्ध कराने में पहले से अधिक सक्षम होगी।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
MBA graduates exploring government job opportunities in banking, PSUs, civil services, and insurance sectors.
MBA के बाद सरकारी नौकरी में बना सकते हैं शानदार करियर, जानिए 4 बेहतरीन विकल्प और संभावित सैलरी

नई दिल्ली: एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवार निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर रुख करते हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में भी MBA प्रोफेशनल्स के लिए कई शानदार अवसर मौजूद हैं। बैंकिंग, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs), प्रशासनिक सेवाएं और बीमा क्षेत्र ऐसे विकल्प हैं, जहां न सिर्फ आकर्षक वेतन मिलता है बल्कि नौकरी की स्थिरता और कई अतिरिक्त सुविधाएं भी प्राप्त होती हैं। आइए जानते हैं MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में उपलब्ध चार प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में। 1. बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर MBA ग्रेजुएट्स के लिए बैंकिंग क्षेत्र सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिना जाता है। RBI Grade B Officer रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में ग्रेड बी अधिकारी का पद बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। यहां वित्तीय प्रबंधन और नीतिगत कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं। अनुमानित शुरुआती वेतन (भत्तों सहित): लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह अधिक जानकारी: RBI की आधिकारिक वेबसाइट सरकारी बैंकों में PO और SO पद सरकारी बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) और स्पेशलिस्ट ऑफिसर (SO) के पदों पर MBA उम्मीदवारों को अवसर मिलते हैं। SEBI और IRDAI जैसे संस्थान वित्तीय रणनीति, निवेश और नियामकीय कार्यों से जुड़े पदों पर भी MBA प्रोफेशनल्स की मांग रहती है। 2. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (PSUs) देश की प्रमुख सरकारी कंपनियां MBA उम्मीदवारों की भर्ती करती हैं। प्रमुख कंपनियां: ONGC NTPC BHEL GAIL इन संस्थानों में मैनेजमेंट ट्रेनी, HR, मार्केटिंग और ऑपरेशंस जैसे पदों पर नियुक्तियां होती हैं। अनुमानित वार्षिक पैकेज: ₹12 लाख से ₹25 लाख तक 3. UPSC और प्रशासनिक सेवाएं MBA ग्रेजुएट्स संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षाओं में भी हिस्सा ले सकते हैं। सिविल सेवा (IAS, IPS, IRS) MBA डिग्री धारक IAS, IPS और IRS जैसे प्रतिष्ठित पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। अनुमानित वेतन (भत्तों सहित): ₹80,000 से ₹1 लाख प्रतिमाह Indian Economic Service (IES) आर्थिक नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण पदों के लिए भी MBA उम्मीदवार अवसर प्राप्त कर सकते हैं। 4. बीमा क्षेत्र में सरकारी नौकरियां LIC और अन्य सरकारी बीमा कंपनियों में MBA प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग रहती है। इन संस्थानों में: रिस्क मैनेजमेंट प्रशासन मैनेजमेंट ऑपरेशनल रोल्स जैसे पदों पर भर्ती की जाती है। अनुमानित शुरुआती वेतन: ₹1 लाख से ₹1.25 लाख प्रतिमाह MBA के बाद सरकारी नौकरी क्यों है अच्छा विकल्प? आकर्षक वेतन नौकरी की सुरक्षा पेंशन और अन्य भत्ते करियर में स्थिरता बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस MBA के बाद सरकारी क्षेत्र में करियर बनाने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। सही तैयारी और उचित परीक्षा चयन के माध्यम से एक सफल और स्थायी करियर बनाया जा सकता है।  

surbhi जून 10, 2026 0
Indian Army captain proposes to his fiancée after pilot training graduation parade in Nashik.
पासिंग आउट परेड के बाद कैप्टन का प्रपोजल बना चर्चा का विषय, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

  नासिक: महाराष्ट्र के नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल में पासिंग आउट परेड के बाद एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला। भारतीय सेना के कैप्टन भारत भारद्वाज ने पायलट के रूप में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपनी मंगेतर को सबके सामने शादी के लिए प्रपोज किया। इस खास मौके का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जहां कई लोगों ने इस पल को प्यार और समर्पण की खूबसूरत मिसाल बताया, वहीं कुछ लोगों ने सेना की वर्दी और पासिंग आउट परेड जैसे औपचारिक कार्यक्रम के दौरान ऐसा करने को लेकर अनुशासन संबंधी सवाल भी उठाए। पासिंग आउट परेड के बाद किया प्रपोज समाचार एजेंसी ANI द्वारा जारी वीडियो में कैप्टन भारत भारद्वाज अपनी वर्दी में घुटनों के बल बैठकर अपनी मंगेतर को प्रपोज करते दिखाई दे रहे हैं। उनकी मंगेतर साड़ी में मौजूद थीं और दोनों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही थी। प्रपोजल स्वीकार किए जाने के बाद साथी अधिकारियों और दोस्तों ने दोनों को बधाई दी। यह पूरा दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी यादगार बन गया। "इस दिन को और खास बनाना चाहता था" ANI से बातचीत में कैप्टन भारत भारद्वाज ने बताया कि पायलट और इंस्ट्रक्टर बनने का दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। उन्होंने कहा, "आज हमारी वर्षों की मेहनत सफल हुई है। मेरे परिवार, खासकर मेरी मां और नाना-नानी के लिए भी यह बेहद खास अवसर था। मैं इस दिन को और यादगार बनाना चाहता था।" कैप्टन भारत ने बताया कि वह और उनकी मंगेतर पिछले पांच वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। उनके अनुसार, शादी का प्रस्ताव रखने के लिए इससे बेहतर अवसर उन्हें नहीं लगा। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या सैन्य समारोह के तुरंत बाद इस तरह का निजी आयोजन उचित था। वहीं कई लोगों ने इसे एक व्यक्तिगत और भावनात्मक क्षण बताते हुए समर्थन किया। बहस का केंद्र यह रहा कि क्या ऐसे अवसर पर व्यक्तिगत भावनाओं का सार्वजनिक प्रदर्शन सैन्य परंपराओं और अनुशासन के अनुरूप है या नहीं। सेना के पूर्व अधिकारियों ने किया समर्थन कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और रक्षा विशेषज्ञों ने कैप्टन भारत का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की पेशेवर क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं है, तो ऐसे मानवीय और सकारात्मक क्षणों को अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। पूर्व सेना अधिकारी K. J. S. Dhillon ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि युवाओं के जीवन के ऐसे खूबसूरत पलों की सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्यार और अपनापन व्यक्त करने के ऐसे अवसरों पर अनावश्यक आलोचना से बचना चाहिए। यादगार पल बना वायरल वीडियो कैप्टन भारत भारद्वाज का यह प्रपोजल वीडियो अब सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। कई लोग इसे देश सेवा और निजी जीवन के बीच संतुलन का खूबसूरत उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सैन्य परंपराओं के संदर्भ में देख रहे हैं। फिलहाल यह वीडियो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इंटरनेट पर लाखों बार देखा जा चुका है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Tourists stranded in Gulmarg Gondola ropeway cabins during rescue operation by Army and disaster response teams
गुलमर्ग में मौत को मात: रोपवे में खराबी से हवा में फंसे 300 पर्यटक, सेना ने बचाई जान

Gulmarg में सोमवार को बड़ा हादसा टल गया। गुलमर्ग गंडोला रोपवे में तकनीकी खराबी आने के बाद करीब 300 पर्यटक हवा में फंस गए। रोपवे के 65 केबिन घंटों तक आसमान में रुके रहे, जिससे पर्यटकों में दहशत फैल गई। सेना, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की संयुक्त टीम ने सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। 500 फुट ऊंचाई पर अटके थे केबिन जानकारी के मुताबिक, कुछ केबिन जमीन से करीब 500 फुट की ऊंचाई पर फंसे हुए थे। खराब मौसम और बारिश के बीच बचाव अभियान चलाना काफी चुनौतीपूर्ण था। तकनीकी खराबी सामने आते ही Gulmarg Gondola सेवा को तुरंत रोक दिया गया। पांच घंटे में 179 लोगों को निकाला गया दोपहर के आसपास खराबी आने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू हुआ। शुरुआती पांच घंटों में 179 पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया था। इसके बाद देर रात तक चले अभियान में बाकी लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाव अभियान में State Disaster Response Force, National Disaster Response Force, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान शामिल रहे। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने की निगरानी जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने पुलिस महानिदेशक Nalin Prabhat को मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। वहीं मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने कहा कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि सभी केबिन सुरक्षित हैं और प्रशिक्षित टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं। बड़ा हादसा टला समय रहते रोपवे सेवा रोक दिए जाने और तेज रेस्क्यू ऑपरेशन की वजह से बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन अब तकनीकी खराबी की वजह की जांच कर रहा है। घटना के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने राहत टीमों और सेना के जवानों की तेजी और साहस की सराहना की है।    

surbhi मई 26, 2026 0
India successfully tests Vayu Astra-1 suicide drone capable of striking targets 100 km away at high altitude
14 हजार फीट की ऊंचाई पर ‘वायु अस्त्र-1’ का कमाल, 100 KM दूर लक्ष्य तबाह करने वाला ड्रोन टेस्ट सफल

भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। पुणे स्थित रक्षा कंपनी Nibe Limited ने अपने अत्याधुनिक ‘वायु अस्त्र-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन (आत्मघाती ड्रोन) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण राजस्थान के Pokhran और उत्तराखंड के Joshimath के मलारी क्षेत्र में किया गया। कंपनी के अनुसार, ‘वायु अस्त्र-1’ ने रेगिस्तानी और अत्यधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। यह ड्रोन 100 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है और रात के अंधेरे में भी लक्ष्य को पहचानकर निशाना साध सकता है। 100 किलोमीटर दूर लक्ष्य पर सटीक हमला निबे लिमिटेड ने बताया कि ‘वायु अस्त्र-1’ ने अपने परीक्षण के दौरान 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को एक ही प्रयास में सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। कंपनी के मुताबिक, इसकी संभावित सीईपी (Circular Error Probable) एक मीटर से भी कम रही, जो इसे बेहद सटीक हथियार बनाती है। ड्रोन में “अटैक एबॉर्ट” और “री-अटैक” जैसी आधुनिक क्षमताएं भी दी गई हैं। यानी मिशन के दौरान लक्ष्य बदलने या दोबारा हमला करने का विकल्प भी मौजूद है। 14 हजार फीट ऊंचाई पर भी शानदार प्रदर्शन उत्तराखंड के मलारी क्षेत्र में हुए परीक्षण के दौरान ‘वायु अस्त्र-1’ को 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर उड़ाया गया। कंपनी का दावा है कि ड्रोन ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरते हुए सफलतापूर्वक मिशन पूरा किया। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम तापमान और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच यह प्रदर्शन भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सटीक हमलों के लिए। रात में भी टैंक को बना सकता है निशाना कंपनी के अनुसार, यह लोइटरिंग म्यूनिशन बख्तरबंद वाहनों और टैंकों पर रात में भी हमला करने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने इन्फ्रारेड (IR) कैमरे की मदद से लक्ष्य को ट्रैक किया और दो मीटर के भीतर सटीक हमला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षमता आधुनिक युद्ध में भारतीय सेना को बड़ी बढ़त दे सकती है। क्या है ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’? लोइटरिंग म्यूनिशन को आम भाषा में “सुसाइड ड्रोन” या “आत्मघाती ड्रोन” कहा जाता है। यह ड्रोन कुछ समय तक हवा में मंडराता रहता है और जैसे ही लक्ष्य मिलता है, सीधे उस पर हमला कर देता है। ‘वायु अस्त्र-1’ इजरायली तकनीक आधारित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम से प्रेरित बताया जा रहा है। इसे दुश्मन के ठिकानों, टैंकों और रणनीतिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। बिना सरकारी खर्च के हुआ परीक्षण कंपनी ने बताया कि यह परीक्षण “नो-कॉस्ट, नो-कमिटमेंट” (NCNC) मॉडल के तहत किया गया। रक्षा मंत्रालय की खरीद प्रक्रिया में इस मॉडल का मतलब होता है कि सरकार परीक्षण के लिए कोई भुगतान नहीं करती और उत्पाद खरीदने की बाध्यता भी नहीं होती। अगर परीक्षण सफल साबित होते हैं और सेना संतुष्ट होती है, तभी आगे खरीद प्रक्रिया शुरू की जाती है। कंट्रोल ट्रांसफर तकनीक का भी प्रदर्शन निबे लिमिटेड ने बताया कि परीक्षण के दौरान ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS) से 70 किलोमीटर दूर स्थित फॉरवर्ड कंट्रोल यूनिट को नियंत्रण सौंपने की क्षमता का भी सफल प्रदर्शन किया गया। यह तकनीक लंबी दूरी के युद्ध अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे ड्रोन को अलग-अलग स्थानों से नियंत्रित किया जा सकता है। रिकवरी क्षमता भी दिखाई कंपनी के अनुसार, मिशन पूरा होने के बाद इस सिस्टम ने रिकवरी क्षमता भी प्रदर्शित की। यानी जरूरत पड़ने पर इसे अगली उड़ानों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। सूर्यास्त्र रॉकेट सिस्टम का भी सफल परीक्षण इससे पहले 20 मई को निबे लिमिटेड ने अपने ‘सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम’ के सफल परीक्षण की घोषणा की थी। ओडिशा के Chandipur स्थित अंतरिम परीक्षण रेंज (ITR) में हुए परीक्षणों में सिस्टम ने सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। कंपनी को जनवरी 2026 में भारतीय सेना की इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट विंडो के तहत इस सिस्टम के विकास और आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिला था। इस परियोजना के तहत 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर रेंज वाले विशेष रॉकेट भी विकसित किए जा रहे हैं।  

surbhi मई 22, 2026 0
Indian Army Apache helicopter and M777 howitzer during joint India-US defense cooperation and support deal.
अमेरिका से भारत की बड़ी रक्षा डील, अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपों को मिलेगा बड़ा सपोर्ट

India और United States के बीच लगभग 40 करोड़ डॉलर की अहम रक्षा डील को मंजूरी मिल गई है। इस समझौते के तहत भारत को अपाचे हेलीकॉप्टरों और एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव, तकनीकी सहायता और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस डील से भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और रक्षा तैयारियां और मजबूत होंगी। अपाचे हेलीकॉप्टरों के लिए 19.82 करोड़ डॉलर की मंजूरी अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत को एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों से जुड़ी सेवाएं और उपकरण बेचने की मंजूरी दे दी गई है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 19.82 करोड़ अमेरिकी डॉलर बताई गई है। इसमें शामिल हैं: तकनीकी सहायता इंजीनियरिंग सपोर्ट लॉजिस्टिक सहायता प्रशिक्षण सेवाएं तकनीकी दस्तावेज रखरखाव संबंधी उपकरण इन सेवाओं को Boeing और Lockheed Martin जैसी अमेरिकी रक्षा कंपनियां उपलब्ध कराएंगी। एम777 हॉवित्जर तोपों को भी मिलेगा सपोर्ट इसके अलावा अमेरिका ने भारत को एम777ए2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों के रखरखाव और सहायता सेवाओं की बिक्री को भी मंजूरी दी है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 23 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। इन सेवाओं की जिम्मेदारी ब्रिटेन की रक्षा कंपनी BAE Systems को दी गई है। भारतीय सेना पहले से कर रही इस्तेमाल अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 हॉवित्जर तोपें पहले से भारतीय सेना के बेड़े का हिस्सा हैं। अपाचे हेलीकॉप्टर अपनी अत्याधुनिक हमला क्षमता और दुश्मन के टैंकों को निशाना बनाने की ताकत के लिए जाने जाते हैं। वहीं एम777 हॉवित्जर तोपें ऊंचाई वाले इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से तैनात की जा सकती हैं। नियमित तकनीकी सहायता और रखरखाव मिलने से इन हथियार प्रणालियों की प्रभावशीलता लंबे समय तक बनी रहेगी। चीन और पाकिस्तान की बढ़ सकती है चिंता रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह डील ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत कर रहा है। चीन और पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रहा है। अपाचे हेलीकॉप्टर और एम777 तोपें पहाड़ी और रणनीतिक क्षेत्रों में भारतीय सेना की ताकत को और बढ़ा सकती हैं। भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी हुई मजबूत यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा और रणनीतिक संबंधों का भी संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। इस तरह की डील से भारत को आधुनिक सैन्य तकनीक और बेहतर ऑपरेशनल सपोर्ट मिलता रहेगा, जबकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी और मजबूत होगी।  

surbhi मई 19, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

JPSC-JSSC aspirants demand permission for hospitalized student leader Devendra Nath Mahto to join protest
झारखंड

अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो को धरना स्थल आने की अनुमति देने की मांग, 12वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

kalpana अगस्त 14, 2026 0