Indian Economy

Indian rupee falling against US dollar with currency notes and forex market trading screen display
डॉलर के सामने कमजोर पड़ा रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची भारतीय करेंसी

United States Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.85 तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह और गिरकर 96.93 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लगातार 13वें कारोबारी दिन रुपये में कमजोरी देखने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के पार गया था और अब गिरावट का सिलसिला जारी है। जानकारों का मानना है कि मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉलर इतना मजबूत क्यों हो रहा है? अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.18% तक पहुंच गई है, जो 2007 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.66% तक पहुंच गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक वहां निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसका असर यह होता है कि उभरते बाजारों से पैसा निकलने लगता है और डॉलर मजबूत हो जाता है। इसी वजह से भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर डालती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ता है। महंगे तेल का असर सिर्फ करेंसी तक सीमित नहीं रहता। इससे: ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है RBI क्या कर रहा है? Reserve Bank of India रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है, ताकि गिरावट बहुत ज्यादा तेज न हो। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं। अगर: डॉलर मजबूत बना रहता है तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं वैश्विक तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। इससे: विदेश यात्रा महंगी हो सकती है आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है विदेशी शिक्षा और ऑनलाइन सेवाएं महंगी पड़ सकती हैं हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
Gold ornaments and temple gold reserves displayed as Finance Ministry denies rumours about monetisation scheme.
Gold Rate Today: क्या सरकार मंदिरों का सोना बेचने जा रही है? वित्त मंत्रालय ने अफवाहों पर दी सफाई

सोने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। दावा किया जा रहा था कि सरकार मंदिरों में रखे गए सोने को मोनेटाइज करने की योजना बना रही है और इसके बदले गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे। लेकिन Ministry of Finance ने इन खबरों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। क्या था दावा? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सरकार मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के पास जमा सोने को “Strategic Gold Reserve” घोषित कर सकती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने की तैयारी हो चुकी है। इन खबरों के वायरल होने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। वित्त मंत्रालय ने क्या कहा? वित्त मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि मंदिरों या धार्मिक संस्थानों के सोने के लिए किसी तरह की नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय के अनुसार: मंदिरों के सोने को लेकर फैलाई जा रही खबरें निराधार हैं सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है मंदिरों के स्तंभों, दरवाजों या ढांचों पर चढ़े सोने को स्ट्रैटजिक रिजर्व घोषित करने की बातें भी झूठी हैं सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक प्रेस रिलीज और सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर जारी जानकारी पर ही भरोसा करें। भारत में कितना सोना मौजूद है? एक अनुमान के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में करीब 50,000 टन सोना मौजूद है, जिसकी कुल कीमत लगभग 10,000 अरब डॉलर आंकी जाती है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। पीएम मोदी की अपील क्यों चर्चा में आई? हाल ही में Narendra Modi ने ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच देशवासियों से: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने खाने के तेल का सीमित उपयोग करने एक साल तक सोना खरीदने से बचने विदेश यात्राएं कम करने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम किया जा सकेगा। सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: पिछले साल भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया सोने का आयात सालाना आधार पर करीब 24% बढ़ा सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते सोना आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ता है। अफवाहों से सावधान रहने की अपील सरकार ने कहा है कि किसी भी नई स्कीम या फैसले की जानकारी हमेशा आधिकारिक माध्यमों से दी जाती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट खबरों से बचने की जरूरत है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Anand Mahindra highlights India’s growing electronics manufacturing and rising MSME industrial strength
12 साल में 10 गुना बढ़ा भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, आनंद महिंद्रा बोले- MSMEs बना रहे नई औद्योगिक ताकत

Anand Mahindra ने भारत की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की असली औद्योगिक ताकत चमकदार हेडलाइन्स या बड़ी कंपनियों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSMEs से बन रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर शुभम मिश्रा की पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की औद्योगिक क्रांति चुपचाप फैक्ट्री फ्लोर्स, वर्कशॉप्स और सप्लायर नेटवर्क में आगे बढ़ रही है। “MSMEs ही भारत की असली ताकत” Anand Mahindra ने कहा कि भारत का भविष्य केवल बड़े कॉर्पोरेट्स पर निर्भर नहीं होगा। देश की औद्योगिक मजबूती उन हजारों मध्यम स्तर के उद्यमों से बनेगी जो धीरे-धीरे विश्वस्तरीय निर्माता बनते जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मैन्युफैक्चरिंग की असली ताकत कभी ग्लैमरस नहीं होती, बल्कि यह फैक्ट्री शेड्स और छोटे वर्कशॉप्स में लगातार तैयार होती है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान नियमों की मांग महिंद्रा ने MSMEs को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर सड़कें, प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क्स और तेज रेग्युलेटरी अप्रूवल्स की जरूरत बताई। उनके मुताबिक Ease of Doing Business सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल फ्रिक्शन कम करने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और तेज हो सकती है। 12 साल में 10 गुना बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन सोशल मीडिया यूजर शुभम मिश्रा के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014 में लगभग 10 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि भारत की प्रगति को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि असली बदलाव सप्लायर इकोसिस्टम और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हो रहा है। Apple सप्लाई चेन में बढ़ी भारत की भूमिका Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में भी भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। पोस्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में iPhone उत्पादन का हिस्सा बढ़कर करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत धीरे-धीरे असेंबलिंग हब से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की तरफ बढ़ रहा है। चीन से की गई तुलना शुभम मिश्रा ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना China के शुरुआती औद्योगिक दौर से की। उनका कहना है कि चीन ने भी 2003 से 2018 के बीच धीरे-धीरे छोटे सप्लायर्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के दम पर खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग ताकत में बदला था। अब भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां छोटे वेंडर्स और Tier-3 सप्लायर्स औद्योगिक विकास की रीढ़ बन रहे हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
India gold spending
सोने में सालाना 6 लाख करोड़ खर्च करता है भारत

मुंबई, एजेंसियां। भारत में हर साल सोने के आयात पर लाखों करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। 2024-26 में यह आंकड़ा 4.89 लाख करोड़ रुपए था, जो 2025-26 में 6.40 लाख करोड़ रुपए रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग गहनों से भी ज्यादा है। भारतीय घरों में दुनिया के टॉप-10 बैंकों से ज्यादा सोना भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है। भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है।

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty gains amid falling crude oil prices and global market rally
कच्चे तेल में गिरावट से शेयर बाजार को राहत, सेंसेक्स-निफ्टी में लौटी तेजी

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों बढ़त के साथ खुले। बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदें मानी जा रही हैं। वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिसकी वजह से निफ्टी 24,400 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स 78,300 के पार खुलने में सफल रहा। बाजार में क्यों दिखी हल्की अस्थिरता? शुरुआती तेजी के बाद बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। GIFT Nifty के संकेतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने बाजार पर दबाव बनाया। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को FIIs ने 5,834 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,836 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की। कच्चे तेल और ग्लोबल मार्केट का असर Brent Crude की कीमतें गिरकर करीब 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलती है क्योंकि इससे आयात बिल कम होने की संभावना रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की बात करें तो अमेरिकी बाजारों में भी शानदार तेजी दर्ज की गई। Nasdaq Composite S&P 500 दोनों इंडेक्स मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखा, जहां Nikkei 225 में 5% से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई। डॉलर की मांग में कमी आने से भारतीय रुपये को भी मजबूती मिली है, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो बाजार 24,700 की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि अगर निफ्टी 24,250 के सपोर्ट लेवल से नीचे फिसलता है, तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में– बैंकिंग सेक्टर फार्मा सेक्टर कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयर इनमें अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों की नजर पूरी तरह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता और वैश्विक संकेतों पर बनी हुई है।  

surbhi मई 7, 2026 0
Indian stock market screen showing Sensex Nifty fluctuations amid Iran US tension and rising crude oil prices
ईरान-अमेरिका तनाव से डरा बाजार: सतर्क रुख में दिखा भारतीय शेयर बाजार, निवेशक कर रहे इंतजार

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आ रहा है। Iran और United States के बीच बढ़ती तनातनी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को बाजार की शुरुआत सुस्त रही। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार ने कुछ हद तक संभलने की कोशिश जरूर की। शुरुआती गिरावट के बाद हल्की रिकवरी सुबह कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले, लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली। सुबह 9:23 बजे तक सेंसेक्स करीब 124 अंकों की बढ़त के साथ 78,618 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24 अंकों की तेजी के साथ 24,377 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में अनिश्चितता का माहौल विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में अस्थिरता की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर विरोधाभासी संकेत हैं। जहां पहले निवेशकों को समझौते की उम्मीद थी, वहीं अब आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को जटिल बना दिया है। इस अनिश्चितता के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका असर ‘India VIX’ इंडेक्स में 5.82% की तेजी के रूप में देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है। किन सेक्टर्स ने दिया सहारा बाजार की सुस्ती के बीच कुछ सेक्टर्स ने मजबूती दिखाई। PSU बैंक, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में खरीदारी देखी गई। इंडिविजुअल शेयरों में Trent, State Bank of India और ICICI Bank ने बाजार को सहारा दिया। वहीं Jio Financial Services, Hindalco Industries और Tata Motors जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स की राय मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक सीजफायर डेडलाइन पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 24,700 के स्तर को पार करना बाजार के लिए जरूरी होगा। फिलहाल विदेशी निवेशकों (FIIs) की खरीदारी जारी है, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) की बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Gold and silver bars with banking documents representing new DGFT import rules in India
Gold-Silver Import Rules 2026: विदेशी बैंकों से लेकर SBI तक–अब किनके पास है सोना-चांदी मंगाने का अधिकार

  नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोने और चांदी के इंपोर्ट को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने नई अधिसूचना जारी कर उन बैंकों की सूची में बदलाव किया है, जिन्हें विदेशों से कीमती धातुएं मंगाने की अनुमति होगी। यह फैसला Foreign Trade Policy 2023 के तहत लिया गया है। कब से लागू होंगे नए नियम? नई संशोधित सूची 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी। यानी अगले तीन वर्षों के लिए सरकार ने सोना-चांदी के इंपोर्ट का एक स्पष्ट और नियंत्रित ढांचा तय कर दिया है। 15 बैंकों को ‘डबल’ अधिकार: सोना और चांदी दोनों का इंपोर्ट Reserve Bank of India (RBI) ने कुल 15 बैंकों को सोना और चांदी दोनों के इंपोर्ट की अनुमति दी है। इनमें शामिल हैं: प्राइवेट सेक्टर बैंक: HDFC Bank ICICI Bank Axis Bank Kotak Mahindra Bank IndusInd Bank Federal Bank Yes Bank RBL Bank Karur Vysya Bank सरकारी बैंक: State Bank of India Punjab National Bank Bank of India Indian Overseas Bank विदेशी बैंक: Deutsche Bank Industrial and Commercial Bank of China सिर्फ सोना इंपोर्ट करने का अधिकार किनके पास? सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी बैंक दोनों धातुओं का इंपोर्ट नहीं कर सकते। इन बैंकों को केवल सोना (Gold) इंपोर्ट करने की अनुमति दी गई है: Union Bank of India Sberbank आम लोगों पर क्या होगा असर? सरकार के इस फैसले का सीधा असर बाजार की पारदर्शिता और कीमतों की स्थिरता पर पड़ेगा। जब सोना-चांदी का इंपोर्ट केवल अधिकृत बैंकों के जरिए होगा, तो: अवैध इंपोर्ट पर लगाम लगेगी कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव कम होगा शुद्धता और सप्लाई चेन बेहतर होगी Directorate General of Foreign Trade ने इस बदलाव को ‘हैंडबुक ऑफ प्रोसीजर 2023’ के तहत लागू किया है, जिससे पूरे सिस्टम को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जा सके।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Rows of newly manufactured cars and motorcycles at an Indian automobile showroom highlighting record vehicle sales.
भारत में ऑटो सेक्टर का धमाका: FY 2025-26 में रिकॉर्ड बिक्री, 46.43 लाख पैसेंजर और 2.17 करोड़ दोपहिया वाहन बिके

भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बार फिर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश में सभी श्रेणियों–पैसेंजर वाहन, दोपहिया, तिपहिया और कमर्शियल वाहनों–की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है। पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में ऐतिहासिक उछाल FY 2025-26 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने नया रिकॉर्ड बनाया: कुल बिक्री: 46.43 लाख यूनिट्स सालाना वृद्धि: 7.9% वहीं, चौथी तिमाही (Q4) में: 13.16 लाख यूनिट्स की बिक्री पिछले साल की तुलना में 13.2% की ग्रोथ यह आंकड़े दिखाते हैं कि भारत में कारों की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है। दोपहिया वाहनों ने भी तोड़ा रिकॉर्ड देश में दोपहिया वाहनों की बिक्री भी नई ऊंचाई पर पहुंची: कुल बिक्री: 2.17 करोड़ यूनिट्स यह सेगमेंट खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ती मांग का संकेत देता है। SIAM अध्यक्ष का बयान SIAM के अध्यक्ष शैलेश चंद्र ने कहा कि: वित्त वर्ष की शुरुआत भले ही धीमी रही हो, लेकिन साल का अंत बेहद शानदार रहा। सभी वाहन श्रेणियों ने पिछले 7 वर्षों में पहली बार किसी एक वित्तीय वर्ष में रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की है। ग्रोथ के पीछे ये रहे बड़े कारण ऑटो सेक्टर की इस जबरदस्त बढ़त के पीछे कई अहम फैक्टर रहे: GST 2.0 सुधारों का सकारात्मक प्रभाव रेपो रेट में कटौती से बढ़ी खरीद क्षमता बढ़ती उपभोक्ता मांग बेहतर फाइनेंसिंग विकल्प क्या संकेत देता है यह आंकड़ा? यह रिकॉर्ड बिक्री दर्शाती है कि: भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता और भरोसा बढ़ा है मिडिल क्लास की क्रय शक्ति मजबूत हुई है ऑटो सेक्टर में भविष्य की ग्रोथ के संकेत सकारात्मक हैं   FY 2025-26 भारत के ऑटो सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। रिकॉर्ड बिक्री यह दिखाती है कि देश में मोबिलिटी की मांग तेजी से बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और भी मजबूत हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
RBI Governor announcing GDP growth cut amid global tensions impacting India’s economic outlook
RBI ने घटाया GDP ग्रोथ अनुमान, वैश्विक तनाव का असर

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की पहली तिमाही के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.8% कर दिया है। यह कटौती ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और खासकर होर्मुज स्ट्रेट में आई बाधा से आर्थिक अनिश्चितता बढ़ी है। क्या कहा RBI गवर्नर ने? RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार: भारत मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष से ग्रोथ पर असर पड़ सकता है होर्मुज स्ट्रेट में बाधा से तेल सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ा है उन्होंने माना कि इन परिस्थितियों का असर भारत की आर्थिक रफ्तार पर पड़ना तय है। FY27 के लिए नया GDP अनुमान RBI ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए ग्रोथ अनुमान में बदलाव किया है: Q1: 6.9% ➝ 6.8% Q2: 7.0% ➝ 6.7% Q3: 7.0% (स्थिर) Q4: 7.2% पूरे FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान करीब 6.9% रखा गया है। क्यों बढ़ा जोखिम? 1. तेल-गैस की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल सप्लाई का अहम रास्ता है। यहां बाधा आने से: क्रूड ऑयल महंगा हो सकता है भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ता है 2. महंगाई का खतरा फिलहाल कोर महंगाई कंट्रोल में है लेकिन खाद्य कीमतों और मौसम का असर बढ़ सकता है 3. ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता ईरान-अमेरिका तनाव से वित्तीय बाजार प्रभावित निवेशक सुरक्षित विकल्प (Safe Haven) की ओर बढ़े डॉलर मजबूत, अन्य मुद्राओं पर दबाव फिर भी भारत की स्थिति क्यों बेहतर? RBI के मुताबिक: भारत की अर्थव्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में अच्छा मोमेंटम वैश्विक झटकों को झेलने की क्षमता बेहतर

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Tata Group companies including Air India aircraft and Tata Neu app visuals showing financial loss concept
टाटा ग्रुप को नए कारोबार से बड़ा झटका! FY26 में ₹29,000 करोड़ तक घाटे का अनुमान

देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह Tata Group के लिए नए कारोबार अब चिंता का कारण बनते दिख रहे हैं। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ग्रुप को अपने नए वेंचर्स से करीब ₹29,000 करोड़ तक का भारी नुकसान हो सकता है, जो शुरुआती अनुमान से लगभग पांच गुना ज्यादा है। शुरुआती अनुमान से कई गुना बढ़ा घाटा रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में इस नुकसान का अनुमान केवल ₹5,700 करोड़ लगाया गया था, लेकिन अब यह बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही इन कंपनियों का कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे FY25 में यह ₹16,550 करोड़ था। इस बढ़ते नुकसान को देखते हुए Natarajan Chandrasekaran के तीसरे कार्यकाल पर फैसला भी हालिया बोर्ड बैठक में टाल दिया गया था। किन कारोबारों से हो रहा है सबसे ज्यादा नुकसान? टाटा ग्रुप के जिन नए वेंचर्स से यह घाटा हो रहा है, उनमें प्रमुख हैं: Air India Tata Digital Tata Electronics Tejas Networks इन सभी सेक्टर्स में भारी निवेश के बावजूद अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल पाया है। एयर इंडिया बना सबसे बड़ा घाटे का कारण ग्रुप की एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया सबसे ज्यादा नुकसान में है। FY26 में इसका घाटा ₹20,000 करोड़ के पार जाने का अनुमान पहले 9 महीनों में ही ₹15,000 करोड़ से ज्यादा नुकसान FY25 में कुल घाटा ₹11,000 करोड़ था एयर इंडिया के पुनर्गठन और विस्तार में भारी निवेश के चलते फिलहाल मुनाफा दूर की बात लग रहा है। टाटा डिजिटल: बड़े निवेश के बावजूद मुनाफा नहीं Tata Digital की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 2019 में शुरू किए गए इस वेंचर में अब तक ₹24,000 करोड़ से ज्यादा निवेश किया जा चुका है, लेकिन यह अब तक लाभ में नहीं आ पाया है। इसके प्रमुख प्लेटफॉर्म्स: BigBasket Tata 1mg Croma Tata Cliq Tata Neu FY26 में टाटा डिजिटल का घाटा ₹5,000 करोड़ तक रहने का अनुमान है, जबकि पहले 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ का नुकसान हो चुका है। अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी कमजोर Tata Electronics का घाटा ₹3,000 करोड़ तक पहुंच सकता है Tejas Networks को ₹1,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है, जबकि पिछले साल यह मुनाफे में थी आगे क्या रणनीति होगी? Noel Tata ने भी नए कारोबार से हो रहे नुकसान पर चिंता जताई है। माना जा रहा है कि जून में होने वाली बोर्ड बैठक में चेयरमैन चंद्रशेखरन इस नुकसान को कम करने के लिए नई रणनीति पेश कर सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Rising crude oil prices chart with RBI building symbol showing inflation and repo rate concerns in India
तेल 100 डॉलर पार, महंगाई का खतरा बढ़ा - अब क्या करेगी RBI?

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे महंगाई के फिर से बेकाबू होने की आशंका गहराती जा रही है। ऐसे माहौल में अब सबकी निगाहें Reserve Bank of India की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर टिकी हैं, जो आज से शुरू हो चुकी है और इसके फैसले 8 अप्रैल को सामने आएंगे। क्यों बढ़ी चिंता? पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, खासकर Iran से जुड़े तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। तेल महंगा → ट्रांसपोर्ट महंगा ट्रांसपोर्ट महंगा → हर चीज महंगी नतीजा → महंगाई में तेजी रुपये पर भी दबाव तेल की कीमतों में तेजी के साथ-साथ रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। हाल ही में भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के पार चली गई थी। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बनाता है, जिससे महंगाई पर दोहरा असर पड़ता है। क्या बढ़ेगा Repo Rate? MPC बैठक का सबसे अहम मुद्दा होगा Repo Rate, जिसे Reserve Bank of India तय करता है। Repo Rate बढ़ा → लोन महंगा EMI बढ़ेगी → आम आदमी पर बोझ हालांकि, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI फिलहाल Repo Rate को 5.25% पर स्थिर रख सकता है, क्योंकि: वैश्विक अनिश्चितता बहुत ज्यादा है महंगाई के ताजा आंकड़ों का इंतजार जरूरी है जल्दबाजी में फैसला अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है विशेषज्ञ क्या कहते हैं? अर्थशास्त्रियों के अनुसार: RBI इस बार “वेट एंड वॉच” रणनीति अपना सकता है अपनी पॉलिसी टिप्पणी में काफी सतर्क रहेगा महंगाई और ग्रोथ दोनों के बीच संतुलन बनाना चुनौती होगा इसके अलावा, संभावित सुपर एल नीनो का असर भी खाद्य महंगाई को बढ़ा सकता है। कब से नहीं बदला Repo Rate? RBI ने पिछले साल फरवरी से अब तक Repo Rate में कुल 1.25% की कटौती की है, लेकिन: अगस्त अक्टूबर फरवरी 2026 की बैठकों में इसे स्थिर रखा गया था। अब सवाल यह है कि क्या इस बार भी RBI यथास्थिति बनाए रखेगा या कोई बड़ा फैसला लेगा।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Stock market screen showing Sensex Nifty fall with Indian rupee strengthening against dollar
छठे हफ्ते भी गिरावट में शेयर बाजार, लेकिन रुपये की दमदार वापसी ने संभाला माहौल

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार छठे सप्ताह भी जारी रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच बाजार दबाव में रहा। हालांकि, हफ्ते के अंत में रुपये की मजबूती और कुछ सेक्टर्स के बेहतर प्रदर्शन ने नुकसान को सीमित करने में मदद की। सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की गिरावट इस सप्ताह BSE Sensex 263.67 अंक यानी 0.35% गिरकर 73,319.55 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 106.5 अंक यानी 0.46% की कमजोरी के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब बाजार में उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा और निवेशकों में सतर्कता बनी रही। किन सेक्टर्स में दिखी सबसे ज्यादा कमजोरी? सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे: Nifty Healthcare और Nifty Pharma में 3% से ज्यादा की गिरावट Nifty Auto, PSU Bank, Private Bank और Consumer Durables में करीब 1% की कमजोरी वहीं, कुछ सेक्टर्स ने बाजार को सहारा दिया: Nifty IT, Metal और Defence इंडेक्स में 2–3% की बढ़त किन कंपनियों को हुआ फायदा-नुकसान? इस सप्ताह Bharti Airtel में सबसे ज्यादा मार्केट कैप गिरावट Sun Pharmaceutical Industries, NTPC Limited और ICICI Bank में भी गिरावट वहीं दूसरी ओर: Tata Consultancy Services Infosys Limited Bharat Electronics Limited इन कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप का हाल BSE Smallcap इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त कुछ शेयरों में 10–20% तक की तेजी देखी गई BSE Midcap इंडेक्स 0.5% गिरा, जिसमें कई फाइनेंशियल और ऑटो स्टॉक्स दबाव में रहे रुपये की ऐतिहासिक वापसी इस हफ्ते भारतीय मुद्रा ने शानदार रिकवरी की। सोमवार को यह पहली बार 95.12 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था लेकिन हफ्ते के अंत तक 171 पैसे मजबूत होकर 93.10 पर बंद हुआ यह पिछले 12 वर्षों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक मजबूती मानी जा रही है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली Foreign Institutional Investors ने सातवें हफ्ते भी बिकवाली जारी रखी इस दौरान ₹29,425 करोड़ के शेयर बेचे वहीं Domestic Institutional Investors ने लगभग ₹29,274 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
ICICI Bank CEO Sandeep Bakhshi addressing IIM Jammu convocation on India economic growth
भारत ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ में: मजबूत ग्रोथ और ग्लोबल भरोसे का संकेत – ICICI CEO संदीप बख्शी

  ICICI बैंक के CEO संदीप बख्शी ने कहा है कि भारत इस समय एक “गोल्डीलॉक्स मोमेंट” में है—यानी ऐसा दौर जहां आर्थिक विकास, स्थिरता और वैश्विक भरोसा संतुलित रूप से एक साथ नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह बात IIM जम्मू के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। क्या है ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’? ऐसा आर्थिक माहौल जो न ज्यादा गर्म (ओवरहीटेड) हो और न ठंडा (सुस्त) संतुलित ग्रोथ, नियंत्रित महंगाई और स्थिर अर्थव्यवस्था निवेश और विकास के लिए आदर्श स्थिति डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना गेमचेंजर बख्शी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की, जिसमें शामिल हैं: आधार (Aadhaar) UPI (Unified Payments Interface) इनके जरिए वित्तीय समावेशन बढ़ा कार्यकुशलता में सुधार हुआ इनोवेशन को बढ़ावा मिला   IIM जम्मू में 520 छात्रों को डिग्री दीक्षांत समारोह में कुल 520 छात्रों को डिग्रियां दी गईं: MBA: 289 छात्र MBA (Healthcare): 77 Executive MBA: 31 IPM: 123 यह संस्थान और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। युवाओं के लिए संदेश संदीप बख्शी ने कहा: भारत में अवसरों की कमी नहीं है लेकिन सफलता के लिए जरूरी है: दृढ़ता (Resilience) अनुकूलनशीलता (Adaptability) सही नजरिया (Right Mindset) AI और इंडस्ट्री पर जोर IIM जम्मू के चेयरमैन मिलिंद पी. कांबले ने कहा: भारत सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बनना चाहता बल्कि मजबूत उद्योग AI साक्षरता शिक्षा और राष्ट्रीय जरूरतों के बीच तालमेल पर भी फोकस कर रहा है  

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
Stock market screen showing Sensex and Nifty surge with green upward trend and investor optimism
शेयर बाजार में जोरदार तेजी: निफ्टी 22,900 के पार, सेंसेक्स 2000 अंक उछला, वैश्विक संकेतों से बढ़ा भरोसा

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिका-ईरान तनाव में संभावित कमी की उम्मीदों के बीच बुधवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में ही निफ्टी 50 ने 22,900 का अहम स्तर पार कर लिया, जबकि बीएसई सेंसेक्स करीब 2000 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। सुबह 10:03 बजे के आसपास निफ्टी 50 599 अंकों यानी 2.69% की बढ़त के साथ 22,930.50 पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स 1,988 अंकों की तेजी के साथ 73,935.73 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक संकेतों का बड़ा असर बाजार में इस उछाल की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से युद्ध समाप्त करने की इच्छा जताने और दोनों देशों के बीच बातचीत के संकेतों ने निवेशकों के मन से अनिश्चितता कम की है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट के रूप में भी दिख रहा है। एक्सपर्ट की राय Geojit Investments Limited के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति की ‘युद्ध समाप्त करने की तत्परता’ और विदेश मंत्री द्वारा अमेरिका के साथ संदेशों के आदान-प्रदान की पुष्टि इस ओर इशारा करती है कि तनाव जल्द कम हो सकता है। बाजार इस संभावित राहत को पहले ही आंकने लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च सीरीज में बैंक निफ्टी में करीब 17% की भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब इस सेक्टर में तेज रिकवरी की संभावना है। खासकर प्राइवेट बैंकिंग शेयर, जो गैर-आधारभूत कारणों से दबाव में थे, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं। टैक्स हार्वेस्टिंग और रिकवरी की उम्मीद 30 मार्च को टैक्स हार्वेस्टिंग के चलते कई सेक्टरों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई थी। अब इन्हीं शेयरों में रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे बाजार को और मजबूती मिल सकती है। ग्लोबल मार्केट्स का सपोर्ट मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। वॉल स्ट्रीट की तेजी और मध्य-पूर्व तनाव में कमी की उम्मीदों ने निवेशकों के सेंटीमेंट को मजबूत किया है। सोने की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला और यह लगभग दो हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। डॉलर में कमजोरी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयान, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के साथ तनाव जल्द कम हो सकता है, ने गोल्ड को सपोर्ट दिया। एफपीआई बनाम डीआईआई संस्थागत निवेशकों की बात करें तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने सोमवार को 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 14,895 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Indian rupee falling against US dollar chart with RBI and SBI economic report concept
गिरते रुपये पर अलर्ट: SBI की रिपोर्ट में RBI से ‘तिजोरी खोलने’ की अपील, 5 बड़े कदम सुझाए

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया ऐतिहासिक दबाव में है। डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को छूने के बाद बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में देश के सबसे बड़े बैंक State Bank of India (SBI) ने एक अहम रिपोर्ट जारी कर Reserve Bank of India (RBI) को तुरंत हस्तक्षेप करने की सलाह दी है। रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है-अब इंतजार नहीं, एक्शन का समय है। क्यों दबाव में है रुपया? रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं: मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की निकासी (FPI outflow) डॉलर की वैश्विक मजबूती वित्त वर्ष 2025-26 में रुपया करीब 9.8% तक गिर चुका है-जो पिछले 14 सालों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। SBI ने RBI को सुझाए ये 5 बड़े कदम 1. फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। SBI का मानना है कि Reserve Bank of India को बाजार में डॉलर बेचकर सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगे। 2. तेल कंपनियों के लिए ‘स्पेशल डॉलर विंडो’ तेल कंपनियां रोजाना भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं। रोज 250–300 मिलियन डॉलर की मांग इससे बाजार पर दबाव बढ़ता है SBI का सुझाव है कि इनके लिए अलग विंडो बनाई जाए, जिससे खुले बाजार पर दबाव कम हो। 3. सट्टेबाजों पर सख्ती रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत फॉरेक्स रिजर्व का उपयोग कर सट्टेबाजों को “सख्त संदेश” देना जरूरी है। RBI के हस्तक्षेप से अनावश्यक गिरावट रोकी जा सकती है बाजार में भरोसा लौटेगा 4. 100 मिलियन डॉलर लिमिट पर पुनर्विचार RBI ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की है। SBI का तर्क: यह नियम पूरे बैंक पर लागू करने के बजाय केवल ट्रेडिंग गतिविधियों पर लागू हो वरना विदेशी निवेशकों के एग्जिट में दिक्कतें आ सकती हैं 5. ऑफशोर मार्केट पर नजर विदेशी बाजारों में रुपये पर दबाव और ज्यादा दिख रहा है। प्रीमियम 3.43% से बढ़कर 4.19% लिक्विडिटी संकट का खतरा SBI ने चेतावनी दी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। क्या सिर्फ भारत ही संकट में है? नहीं। एशिया की कई करेंसी दबाव में हैं: जापानी येन: ~6% गिरावट फिलिपीन पीसो: ~5.7% गिरावट दक्षिण कोरियाई वॉन: ~2.8% गिरावट यह दिखाता है कि समस्या वैश्विक है, लेकिन समाधान के लिए घरेलू नीति अहम होगी। निष्कर्ष रुपये की मौजूदा स्थिति सिर्फ एक आर्थिक संकेत नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक अस्थिरता का असर है। SBI की रिपोर्ट साफ तौर पर RBI से आक्रामक नीति अपनाने की मांग करती है। अब नजर इस बात पर होगी कि Reserve Bank of India इन सुझावों पर कितना और कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
Sensex and Nifty surge after oil prices fall
तेज गिरावट के बाद शेयर बाजार में सुधार: सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, तेल कीमतों में नरमी से राहत

भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को आंशिक सुधार दिखाया। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से निवेशकों को राहत मिली और बाजार में खरीदारी का माहौल बना। सुबह कारोबार के दौरान Nifty50 करीब 1.05% बढ़कर 23,243 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि BSE Sensex 1% से ज्यादा चढ़कर 74,958 के आसपास कारोबार करता दिखा। तेल कीमतों में गिरावट से बाजार को सहारा मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है। ब्रेंट क्रूड, जो गुरुवार को 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, अब घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस गिरावट के पीछे यूरोपीय देशों और जापान द्वारा समुद्री मार्गों की सुरक्षा के प्रयास और अमेरिका द्वारा सप्लाई बढ़ाने के संकेत अहम माने जा रहे हैं। सभी सेक्टरों में दिखी तेजी शुक्रवार को बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली और सभी 16 प्रमुख सेक्टर हरे निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में भी मजबूती रही, जहां क्रमशः 0.8% और 1.3% की बढ़त दर्ज की गई। PSU बैंक और मेटल शेयरों में उछाल पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों में जोरदार वापसी देखने को मिली। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 3.2% की तेजी आई, जबकि State Bank of India के शेयर करीब 3% चढ़े। मेटल सेक्टर में भी तेजी रही और इसमें करीब 2.2% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं Tata Steel के शेयर लगभग 4% उछले, जिसका कारण ब्रोकरेज द्वारा टारगेट प्राइस बढ़ाना बताया जा रहा है। IT और अन्य सेक्टरों में भी सुधार आईटी सेक्टर में भी 1.7% की बढ़त देखी गई, जो गुरुवार की गिरावट के बाद रिकवरी का संकेत है। हालांकि, HDFC Bank के शेयरों पर दबाव बना रहा और इसमें और गिरावट दर्ज की गई। रुपया कमजोर, निवेशकों में सतर्कता इस बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल फिलहाल मध्य पूर्व के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। IPO की हलचल भी तेज इसी बीच SBI Funds Management ने IPO के लिए आवेदन किया है, जिसमें State Bank of India और Amundi अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। यह कदम बाजार में नई हलचल पैदा कर सकता है। आगे कैसा रहेगा बाजार? विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेजी जारी रह सकती है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Indian stock market surge with Sensex and Nifty showing strong gains on trading screens
शेयर बाजार में जोरदार वापसी: सेंसेक्स 700 अंक उछला, निफ्टी 23,200 के पार

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने शानदार वापसी की। गुरुवार को भारी गिरावट के बाद आज बाजार हरे निशान में खुला। Nifty50 23,200 के ऊपर खुला, जबकि BSE Sensex में 700 अंकों से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में तेजी सुबह 9:16 बजे के आसपास निफ्टी 23,229 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो करीब 227 अंक यानी लगभग 1% की बढ़त है। वहीं सेंसेक्स 74,945 के स्तर पर पहुंच गया, जिसमें करीब 738 अंकों की तेजी दर्ज की गई। यह उछाल गुरुवार की 3% से ज्यादा गिरावट के बाद निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। बाजार में ‘उम्मीद बनाम डर’ का माहौल बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। एक तरफ वैश्विक तनाव और महंगाई की चिंता है, तो दूसरी तरफ राहत की उम्मीद भी दिख रही है। हाल के बयानों से संकेत मिला है कि पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है। इसका सकारात्मक असर बाजार पर पड़ा है। किन सेक्टरों में दिखी मजबूती आज के कारोबार में खासकर बैंकिंग, फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार की गिरावट के बाद इन सेक्टरों में ‘बाउंस बैक’ की संभावना पहले से ही थी, जो अब दिखने लगी है। वैश्विक संकेतों का असर एशियाई बाजारों में भी आज तेजी का माहौल रहा, जिससे भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला। वहीं कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बाजारों में सुधार ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और मजबूत डॉलर के कारण वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी गुरुवार को विदेशी निवेशकों (FII) ने करीब 7,558 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 3,864 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभाला। आगे क्या रहेगा ट्रेंड? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो बाजार में और सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। कुल मिलाकर, शुक्रवार की शुरुआत ने यह संकेत जरूर दिया है कि गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी की ताकत मौजूद है, लेकिन आगे का रास्ता अभी भी वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Indian rupee falling against US dollar with currency notes and rising oil prices indicating economic pressure
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, डॉलर के मुकाबले 93 के पार- तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर

भारतीय मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच रुपया शुक्रवार को ऐतिहासिक गिरावट के साथ पहली बार 93 के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में रुपया भारतीय रुपया 93.15 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। क्यों आई रुपया में इतनी बड़ी गिरावट रुपये में यह तेज गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों के चलते देखने को मिली है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज होती है, जिससे रुपया कमजोर होता है। ‘सेफ हेवन’ की ओर भाग रहे निवेशक वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा अमेरिकी डॉलर को मिल रहा है, जो लगातार मजबूत हो रहा है। डॉलर के मजबूत होने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है, जिसमें रुपया भी शामिल है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भी भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जब विदेशी निवेशक अपनी पूंजी निकालते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलते हैं, जिससे रुपये की गिरावट और तेज हो जाती है। अमेरिकी फेड की नीति भी बनी वजह फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर सतर्क रुख ने भी डॉलर को मजबूती दी है। इससे वैश्विक तरलता कम हो रही है और उभरते बाजारों में निवेश आकर्षण घट रहा है। भारत पर क्या होगा असर कमजोर होता रुपया और महंगा कच्चा तेल मिलकर भारत में महंगाई को बढ़ा सकते हैं। खासकर ईंधन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी और आम लोगों की जेब पर भी बोझ पड़ेगा। आगे क्या देखें अब बाजार की नजर तीन अहम कारकों पर रहेगी- पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति   कच्चे तेल की कीमतों का रुख   भारतीय रिजर्व बैंक की संभावित दखलअंदाजी   अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0