नई दिल्ली,एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी का खड़गपुर से रिश्ता सिर्फ नौकरी या क्रिकेट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रिश्ता इंसानियत, अपनापन और वफादारी की मिसाल भी बन गया। ‘कैप्टन कूल’ के नाम से मशहूर धोनी ने अपने प्रोफेशनल जीवन की शुरुआत पश्चिम बंगाल के खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में की थी। इसी दौरान स्टेशन के पास मौजूद थॉमस टी स्टॉल उनकी पसंदीदा जगह बन गई थी। घंटों चाय की दुकान पर बैठते थे धोनी थॉमस के परिवार के मुताबिक, नौकरी और रेलवे क्रिकेट के बीच धोनी अक्सर अपने दोस्तों के साथ इस दुकान पर घंटों बैठते, चाय पीते और बातचीत करते थे। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही शांत और साधारण युवक आगे चलकर विश्व क्रिकेट का सबसे सफल कप्तान बनेगा। कामयाबी के बाद भी नहीं भूले पुराने रिश्ते समय बीतने के साथ धोनी ने 2007 टी20 वर्ल्ड कप, 2011 वनडे वर्ल्ड कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर भारतीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया। 2020 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी खड़गपुर से उनका जुड़ाव कायम रहा। थॉमस की मुश्किल घड़ी में बने सहारा जब थॉमस को गंभीर ब्रेन स्ट्रोक आया और वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे, तब धोनी ने अपने करीबी दोस्त रॉबिन के जरिए लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। परिवार का दावा है कि इलाज में भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई। इतना ही नहीं, जब थॉमस की चाय दुकान पर तोड़फोड़ का खतरा मंडराया, तब भी धोनी ने रेलवे अधिकारियों से बात कर दुकान को बचाने में मदद की।
नई दिल्ली। देश की प्रीमियम ट्रेन सेवा वंदे भारत एक्सप्रेस एक बार फिर खाने की गुणवत्ता को लेकर विवादों में आ गई है। पटना-टाटानगर रूट पर चलने वाली इस ट्रेन में एक यात्री को परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने का मामला सामने आने के बाद रेल मंत्रालय ने कड़ा एक्शन लिया है। वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप यह मामला 15 मार्च 2026 का है, जब पटना के कंटेंट क्रिएटर रितेश कुमार सिंह ने ट्रेन में परोसे गए खाने का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो में दही के कटोरे में साफ तौर पर कीड़े दिखाई दे रहे थे। उन्होंने तुरंत ट्रेन मैनेजर को शिकायत भी दर्ज कराई। दूसरे वीडियो में रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करते नजर आए। टॉर्च की रोशनी में दही की बारीकी से जांच की गई, जबकि आसपास मौजूद अन्य यात्री भी इस घटना को देखकर हैरान रह गए। यात्रियों में नाराजगी, सोशल मीडिया पर उठा मुद्दा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया। सहयात्रियों ने भी मौके पर शिकायत दर्ज कराने और मामले को सार्वजनिक करने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। रेलवे का सख्त रुख मामले की गंभीरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए IRCTC पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही संबंधित सर्विस प्रोवाइडर पर 50 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाते हुए उसका कॉन्ट्रैक्ट भी समाप्त करने का आदेश दिया गया। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गुणवत्ता पर उठे बड़े सवाल यह घटना एक बार फिर ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम ट्रेनों में इस तरह की घटनाएं यात्रियों के भरोसे को कमजोर कर सकती हैं।
Indian Railways दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में शामिल है, जहां हर दिन लाखों यात्री सफर करते हैं। आम धारणा यही है कि रेलवे की कमाई का मुख्य जरिया सिर्फ टिकट होता है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा व्यापक है। रेलवे कई ऐसे स्रोतों से आय अर्जित करता है, जो मिलकर इसे मजबूत आर्थिक ढांचा प्रदान करते हैं। टिकट से होती है सीमित कमाई रेलवे की कुल आय में यात्रियों से मिलने वाला किराया लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक ही होता है। हालांकि रोजाना करोड़ों यात्रियों की आवाजाही के कारण यह आय स्थिर बनी रहती है, लेकिन यह रेलवे की सबसे बड़ी कमाई नहीं है। माल ढुलाई: कमाई का सबसे बड़ा स्तंभ भारतीय रेलवे की आय का सबसे बड़ा हिस्सा माल ढुलाई (Freight) से आता है। कुल कमाई का करीब 70 से 75 प्रतिशत इसी से प्राप्त होता है। कोयला, सीमेंट, उर्वरक, पेट्रोलियम और लौह अयस्क जैसे भारी सामानों को बड़े पैमाने पर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का कार्य रेलवे करता है। बड़ी मात्रा और निरंतर मांग के कारण यह सबसे लाभकारी सेक्टर है। फिल्मों और शूटिंग से भी होती है कमाई रेलवे स्टेशन और ट्रेनें फिल्मों और वेब सीरीज के लिए आकर्षक लोकेशन होती हैं। प्रोडक्शन हाउस इसके लिए रेलवे से अनुमति लेकर शूटिंग करते हैं और इसके बदले शुल्क चुकाते हैं। यह भी रेलवे के लिए एक अतिरिक्त आय स्रोत बन चुका है। कबाड़ की नीलामी से मिलती है रकम पुराने कोच, इंजन और रेल पटरियों को समय-समय पर हटाकर कबाड़ के रूप में नीलाम किया जाता है। इस प्रक्रिया से रेलवे को अच्छी-खासी आमदनी होती है और संसाधनों का पुनः उपयोग भी सुनिश्चित होता है। खानपान सेवाओं से बढ़ती आय IRCTC के माध्यम से ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर खाने-पीने की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इन सेवाओं से भी रेलवे को रोजाना बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्त होता है। विज्ञापन, किराया और पार्किंग से अतिरिक्त कमाई रेलवे स्टेशनों पर लगे विज्ञापन, दुकानों का किराया और पार्किंग फीस भी रेलवे की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बड़े शहरों के स्टेशनों पर यह आय और भी अधिक होती है।
अगर आप ट्रेन से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय रेलवे ने आज रात से लगभग पांच घंटे के लिए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया है। कब तक बंद रहेंगी सेवाएं? रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह सेवाएं 26 मार्च की रात 11:45 बजे से लेकर 27 मार्च की सुबह 4:45 बजे तक बंद रहेंगी। इस दौरान ऑनलाइन और काउंटर—दोनों माध्यमों से टिकट से जुड़ी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? इस निर्धारित रखरखाव कार्य के चलते यात्रियों को कई जरूरी सेवाओं में परेशानी हो सकती है: टिकट बुकिंग और रद्द करने की सुविधा बंद रहेगी पीएनआर स्टेटस चेक नहीं किया जा सकेगा तत्काल टिकट बुकिंग उपलब्ध नहीं होगी रेलवे काउंटर और IRCTC वेबसाइट की सेवाएं प्रभावित रहेंगी ट्रेन चार्टिंग और ई-डिपॉजिट रिसीप्ट (EDR) जैसी सुविधाएं भी बाधित होंगी रेलवे की अपील रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाएं—जैसे टिकट बुकिंग, रद्द करना या स्टेटस चेक—निर्धारित समय से पहले ही पूरा कर लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। क्यों बंद की जा रही हैं सेवाएं? रेलवे के मुताबिक, यह अस्थायी निलंबन सिस्टम के रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड के लिए किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में यात्रियों को तेज, बेहतर और अधिक भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करना है।
मुजफ्फरपुर में फिर निशाने पर वंदे भारत बिहार में एक बार फिर हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस बदमाशों के निशाने पर आ गई। इस बार घटना मुजफ्फरपुर जिले में सामने आई है, जहां अज्ञात लोगों ने चलती ट्रेन पर पत्थर फेंक दिए। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई यात्री घायल नहीं हुआ, लेकिन ट्रेन की खिड़की का शीशा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कांटी–मोतीपुर के बीच हुई घटना जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 26501 गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत एक्सप्रेस गुरुवार शाम मुजफ्फरपुर-गोरखपुर रेलखंड पर चल रही थी। इसी दौरान कांटी और मोतीपुर के बीच असामाजिक तत्वों ने ट्रेन को निशाना बनाते हुए पत्थरबाजी की। इस हमले में कोच C-5 की खिड़की का कांच पूरी तरह टूट गया। बताया जा रहा है कि सुरक्षा कवच वाला शीशा भी इस हमले को नहीं झेल सका। पुलिस और RPF जांच में जुटी घटना के बाद मामले को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बापूधाम मोतिहारी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियां मिलकर पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रेन में मौजूद स्कॉर्ट टीम, गार्ड और ट्रेन मैनेजर से पूछताछ की गई है। साथ ही घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। बताया जा रहा है कि कपरपुरा और कांटी इलाके में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। यात्रियों में बढ़ी दहशत इस घटना के बाद यात्रियों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सबसे आधुनिक और तेज ट्रेनों में शामिल है, ऐसे में उस पर बार-बार हो रहे हमले सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं यह पहली बार नहीं है जब वंदे भारत ट्रेन पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई हो। इससे पहले भी बिहार के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की वारदातें हो चुकी हैं। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं रेलवे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
झारखंड के गुमला जिले को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का मुद्दा एक बार फिर संसद में जोर-शोर से उठा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्रीय बजट सत्र के दौरान लोकसभा में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। गुमला के साथ ‘सौतेला व्यवहार’ का आरोप सांसद ने केंद्र सरकार पर गुमला जिले की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह क्षेत्र आज भी रेलवे सुविधा से वंचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद गुमला को अब तक रेल कनेक्टिविटी क्यों नहीं दी गई। शहीद अल्बर्ट एक्का की धरती, फिर भी उपेक्षित अपने संबोधन में भगत ने याद दिलाया कि गुमला, अल्बर्ट एक्का की जन्मस्थली है, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अद्वितीय वीरता दिखाई थी। इसके बावजूद यह जिला आज भी रेलवे नेटवर्क से जुड़ नहीं पाया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। धार्मिक और पर्यटन स्थलों का किया जिक्र सांसद ने गुमला की समृद्ध धार्मिक विरासत को भी रेखांकित किया। उन्होंने अंजनी धाम, टांगीनाथ धाम और सिरसी-ता नाले जैसे महत्वपूर्ण आस्था केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर रेल संपर्क से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। खनिज संसाधनों के बावजूद विकास बाधित भगत ने कहा कि गुमला बॉक्साइट जैसे खनिज संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इसका समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रेलवे लाइन का निर्माण इस क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। रेल बजट पर भी साधा निशाना केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि रेलवे में भारी बजट आवंटन के बावजूद जमीनी स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “घोषणाएं तो सुपरफास्ट ट्रेन की तरह दौड़ रही हैं, लेकिन असल ट्रेन अभी भी प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी है।” नई रेल लाइन को प्राथमिकता देने की मांग सुखदेव भगत ने रेल मंत्री से गुमला में नई रेलवे लाइन निर्माण को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे न केवल क्षेत्रीय विकास होगा बल्कि रोजगार, व्यापार और पर्यटन को भी गति मिलेगी। यात्रियों के हितों की भी उठाई आवाज सांसद ने आम यात्रियों की समस्याओं को भी उठाया। उन्होंने छात्रों, खिलाड़ियों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रेल छूट को फिर से लागू या मजबूत करने की मांग की, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
होली खत्म होने के बाद भी बिहार के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। घर से वापस काम पर लौटने वालों की भारी संख्या को देखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए 10 होली स्पेशल ट्रेनों के संचालन की अवधि 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। पूर्व मध्य रेल का बड़ा फैसला पूर्व मध्य रेल (ECR) के तहत चल रही इन स्पेशल ट्रेनों को यात्रियों की सुविधा के लिए जारी रखा गया है। पटना जंक्शन, दानापुर और राजेंद्र नगर टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर अब भी यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जिससे यह निर्णय लिया गया। इन ट्रेनों में आनंद विहार-लीकहा बाजार और सहरसा-आनंद विहार जैसी महत्वपूर्ण स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। भीड़ के बावजूद कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई प्रमुख रूटों पर अब भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल बना हुआ है। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट लगातार बढ़ रही है। मैहर धाम जाने वाले श्रद्धालु परेशान चैत्र नवरात्रि के चलते मैहर धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। रेलवे ने 18 से 30 मार्च के बीच मैहर स्टेशन पर 10 ट्रेनों को 5-5 मिनट के ठहराव की अनुमति दी है, जिसमें पूर्णा जंक्शन-पटना एक्सप्रेस और बांद्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इसके बावजूद IRCTC पर टिकट बुकिंग करते ही लंबी वेटिंग लिस्ट सामने आ रही है। ऐसे में यात्रियों के पास ‘तत्काल’ टिकट का विकल्प ही बचा है। बसों का भी लिया जा रहा सहारा यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे के साथ-साथ बसों का संचालन भी किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था 23 मार्च तक जारी रहेगी, जिससे कुछ हद तक यात्रियों को राहत मिल सके। त्योहार और नवरात्रि से बढ़ा दबाव हर साल होली के बाद बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों पर लौटते हैं, जिससे ट्रेनों पर दबाव बढ़ता है। इस बार चैत्र नवरात्रि के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ गई है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। यात्रियों को सलाह रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और टिकट की उपलब्धता की जांच कर के ही सफर करें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।
यात्रियों को मिली बड़ी राहत बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। पटना और थावे के बीच नई फास्ट पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस ट्रेन के शुरू होने से अब दोनों शहरों के बीच यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। ट्रेन करीब 6 घंटे 50 मिनट में यह दूरी तय करेगी, जिससे यात्रियों का समय भी बचेगा और सफर अधिक सुविधाजनक होगा। नई ट्रेन के संचालन को लेकर जानकारी देते हुए Ravi Shankar Prasad ने कहा कि Thawe Temple धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। लंबे समय से लोगों की मांग थी कि पटना से थावे के लिए तेज ट्रेन सेवा शुरू की जाए, जिसे अब पूरा कर दिया गया है। 24 कोच वाली ट्रेन से बढ़ेगी सुविधा Indian Railways के दानापुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार इस फास्ट पैसेंजर ट्रेन में कुल 24 कोच लगाए गए हैं। दानापुर मंडल के सीनियर डीसीएम Abhinav Siddharth ने बताया कि यह ट्रेन पाटलिपुत्र और दीघवारा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से पटना और थावे के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। पटना-थावे ट्रेन की टाइमिंग और स्टॉपेज गाड़ी संख्या 55515 पटना-थावे फास्ट पैसेंजर रोजाना Patna Junction से दोपहर 12:10 बजे रवाना होगी। इसके प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं: फुलवारीशरीफ – 12:13 बजे पाटलिपुत्र – 12:40 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 12:52 बजे दीघवारा – 13:50 बजे गोल्डिनगंज – 14:55 बजे इन स्टेशनों पर रुकते हुए यह ट्रेन शाम 7:00 बजे Thawe पहुंचेगी। वहीं 55516 थावे-पटना फास्ट पैसेंजर रोजाना थावे से रात 8:05 बजे रवाना होगी और अगले दिन निम्न स्टेशनों पर रुकते हुए पटना पहुंचेगी: गोल्डिनगंज – 00:40 बजे दीघवारा – 01:00 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 01:55 बजे पाटलिपुत्र – 02:05 बजे फुलवारीशरीफ – 02:25 बजे यह ट्रेन सुबह 03:20 बजे पटना जंक्शन पहुंचेगी। पुरी-पटना ट्रेन को भी मिला नियमित संचालन रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगातार नई ट्रेन सेवाएं शुरू कर रहा है। इससे पहले भी यात्रियों की मांग को देखते हुए Puri–Patna Express के नियमित संचालन को मंजूरी दी गई थी। इस ट्रेन के अनुसार, यह हर शनिवार को दोपहर 2:55 बजे Puri से रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:45 बजे पटना पहुंचती है। वहीं वापसी में हर रविवार को दोपहर 1:30 बजे पटना से प्रस्थान करती है। धार्मिक और स्थानीय यात्रियों को मिलेगा लाभ पटना-थावे फास्ट पैसेंजर ट्रेन शुरू होने से न सिर्फ रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि इस नई ट्रेन सेवा से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।
होली पर्व समाप्त होने के बाद बिहार से दूसरे राज्यों में लौटने वाले यात्रियों की भारी भीड़ रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिल रही है। ट्रेनों में सीटों की भारी मांग को देखते हुए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। यात्रियों की सुविधा के लिए 28 होली स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। इससे यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। स्टेशनों पर उमड़ी यात्रियों की भीड़ होली के बाद कामकाज के लिए दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और अन्य शहरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। पटना जंक्शन समेत कई प्रमुख स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। स्लीपर और एसी कोच में भी सीटें लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। स्टेशनों पर जीआरपी और आरपीएफ के जवानों के साथ क्विक रिस्पांस टीम को भी तैनात किया गया है। मगध एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, राजेंद्र नगर-एलटीटी, पटना-हटिया, पटना-धनबाद और दानापुर-सिकंदराबाद जैसी ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। रेलवे अधिकारियों ने दी जानकारी पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए पहले से चल रही कई स्पेशल ट्रेनों के परिचालन की अवधि बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि पटना-नई दिल्ली स्पेशल सहित कुल 28 होली स्पेशल ट्रेनों को 31 मार्च तक चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि यात्रियों को सफर में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इन ट्रेनों की अवधि बढ़ाई गई गाड़ी संख्या 03293 पटना–नई दिल्ली स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03294 नई दिल्ली–पटना स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक प्रतिदिन चलेगी। गाड़ी संख्या 03257 दानापुर–आनंद विहार स्पेशल – 15 मार्च से 29 मार्च तक प्रत्येक रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03258 आनंद विहार–दानापुर स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक प्रत्येक सोमवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 03697 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 16 मार्च से 30 मार्च तक सोमवार, मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को संचालित होगी। गाड़ी संख्या 03698 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 17 मार्च से 31 मार्च तक मंगलवार, बुधवार, शनिवार और रविवार को चलेगी। गाड़ी संख्या 02397 शेखपुरा–आनंद विहार स्पेशल – 22 और 29 मार्च को चलाई जाएगी। गाड़ी संख्या 02398 आनंद विहार–शेखपुरा स्पेशल – 23 और 30 मार्च को संचालित होगी। रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों और बढ़ी हुई परिचालन अवधि से होली के बाद घर लौट रहे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।