Indian Railways

भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन का परिचालन
भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू, 26 अगस्त से दौड़ेगी ट्रेन

पटना। बिहार के यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। भागलपुर और अहमदाबाद के बीच नई साप्ताहिक अमृत भारत एक्सप्रेस का नियमित परिचालन शुरू होने जा रहा है। ट्रेन संख्या 19423/19424 भागलपुर-अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस का परिचालन अहमदाबाद से 26 अगस्त 2026 और भागलपुर से 28 अगस्त 2026 से शुरू होगा। यह ट्रेन बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई प्रमुख शहरों को जोड़ते हुए चलेगी। इससे भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को गुजरात आने-जाने के लिए सीधी साप्ताहिक रेल सुविधा मिलेगी।   किस रूट से चलेगी ट्रेन?   भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस किउल, मोकामा, पटना, डीडीयू, सूबेदारगंज, टूंडला, सवाई माधोपुर, कोटा, रतलाम और छायापुरी के रास्ते चलेगी। रेलवे के अनुसार, यह ट्रेन पहले चल रही अहमदाबाद-पटना क्लोन स्पेशल को नियमित अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में परिवर्तित कर शुरू की जा रही है।   22 कोच की होगी ट्रेन   नई अमृत भारत एक्सप्रेस में कुल 22 कोच होंगे। इनमें दो एलएसएलआरडी, एक पैंट्रीकार, 11 साधारण द्वितीय श्रेणी और आठ शयनयान श्रेणी के कोच शामिल हैं।   अहमदाबाद से भागलपुर का समय   ट्रेन संख्या 19423 अहमदाबाद-भागलपुर अमृत भारत एक्सप्रेस 26 अगस्त से प्रत्येक बुधवार को शाम 6:30 बजे अहमदाबाद से रवाना होगी। प्रमुख स्टेशनों पर इसका समय इस प्रकार रहेगा: डीडीयू – गुरुवार रात 9:13 बजे बक्सर – रात 10:30 बजे आरा – रात 11:15 बजे दानापुर – रात 11:50 बजे पटना जंक्शन – शुक्रवार रात 12:43 बजे बख्तियारपुर – रात 1:25 बजे मोकामा – रात 2:08 बजे किउल – रात 3:30 बजे अभयपुर – सुबह 4:01 बजे जमालपुर – सुबह 4:30 बजे सुलतानगंज – सुबह 5:13 बजे भागलपुर – सुबह 6:40 बजे   भागलपुर से शुक्रवार को चलेगी ट्रेन   वापसी में ट्रेन संख्या 19424 भागलपुर-अहमदाबाद अमृत भारत एक्सप्रेस 28 अगस्त से प्रत्येक शुक्रवार को शाम 4:45 बजे भागलपुर से रवाना होगी। यह ट्रेन सुलतानगंज, जमालपुर, अभयपुर, किउल, मोकामा, बख्तियारपुर, पटना, दानापुर, आरा और बक्सर होते हुए शनिवार रात डीडीयू पहुंचेगी। इसके बाद निर्धारित मार्ग से होते हुए रविवार सुबह 5:25 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी।   भागलपुर और गुजरात के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी   नई ट्रेन के नियमित परिचालन से भागलपुर, जमालपुर, सुलतानगंज, किउल, मोकामा और पटना समेत आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को गुजरात के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। खासकर अहमदाबाद और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन उपयोगी साबित हो सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
CAG रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं और पेयजल की कमी
CAG की रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों की बदहाली उजागर, 458 स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी

नई दिल्ली, एजेंसियां। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने भारतीय रेलवे के प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों के ऑडिट में 458 स्टेशनों यानी करीब 89% स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं में कमी पाई गई। इनमें पेयजल, शौचालय, यूरिनल, बैठने की व्यवस्था, पंखे, वाटर कूलर, प्लेटफॉर्म शेल्टर और कूड़ेदान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।   नई दिल्ली, मुंबई और हावड़ा जैसे बड़े स्टेशन भी सवालों के घेरे में     रिपोर्ट की खास चिंता यह है कि कमियां केवल छोटे या कम भीड़ वाले स्टेशनों तक सीमित नहीं हैं। नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), हावड़ा और सियालदह जैसे प्रमुख NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों पर भी बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, स्वच्छता सुविधाएं, कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक यात्री सूचना बोर्ड जैसी आवश्यक सुविधाओं में कमी दर्ज की गई।   CAG के अनुसार NSG-1 श्रेणी के 22 प्रमुख स्टेशनों में से केवल पांच स्टेशन ही न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के निर्धारित मानकों को पूरा कर रहे थे।   आठ स्टेशनों के वाटर कूलर में मिला E. coli     रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ा है। CAG के परीक्षण में आठ स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी के नमूनों में E. coli पाया गया। इनमें कोयंबटूर, पालक्काड जंक्शन, हैदराबाद, CSMT, भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर शामिल हैं।   इसके अलावा 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों से लिए गए प्लेटफॉर्म नल के पानी के नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, जिसमें E. coli भी शामिल है, पाया गया।   पानी की जांच और रखरखाव में भी बड़ी खामियां     CAG ने पाया कि कई स्टेशनों पर पेयजल की नियमित जांच निर्धारित नियमों के मुताबिक नहीं हो रही थी। 59 स्टेशनों पर बैक्टीरियोलॉजिकल जांच, 179 स्टेशनों पर रासायनिक जांच और 78 स्टेशनों पर अवशिष्ट क्लोरीन की जांच नहीं की गई। वहीं 436 स्टेशनों पर बहु-पैरामीटर जल जांच किट उपलब्ध नहीं थीं।   जल टैंकों की सफाई और रखरखाव के रिकॉर्ड भी कई जगह उपलब्ध नहीं थे। CAG ने रेलवे को जल आपूर्ति प्रणाली की निगरानी मजबूत करने और निर्धारित मानकों के तहत पेयजल की व्यापक जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।   रेलवे ने शुरू की सुधार की तैयारी     CAG की रिपोर्ट के बाद रेलवे ने पेयजल व्यवस्था में सुधार के लिए ‘Tank to Tap’ जल फिल्ट्रेशन प्रणाली शुरू करने की योजना बनाई है। इसे करीब 20,000 स्थानों पर लगाने की तैयारी है, जिसमें वाटर कूलर और जल आपूर्ति की निगरानी व्यवस्था भी शामिल होगी। रेलवे ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 18, 2026 0
भारतीय रेलवे के रिकॉर्ड राजस्व और बढ़ी माल ढुलाई
भारतीय रेलवे की कमाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची, FY26 में राजस्व 3.2% बढ़कर ₹2.74 लाख करोड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे की कमाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे का सकल राजस्व रिकॉर्ड ₹2.74 लाख करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के करीब ₹2.65 लाख करोड़ की तुलना में 3.2% अधिक है।   माल ढुलाई से रेलवे को बड़ा सहारा     रेलवे की कमाई में माल ढुलाई की भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। जुलाई 2026 में रेलवे ने 14.13 करोड़ टन माल की ढुलाई की, जो पिछले साल के समान महीने के 12.97 करोड़ टन से करीब 9% अधिक है। कोयला, लौह अयस्क, उर्वरक और खाद्यान्न की ढुलाई में बढ़ोतरी से मालभाड़े की आय को मजबूती मिली।     यात्री सेवाओं से भी आय बढ़ाने का लक्ष्य     वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में रेलवे ने यात्री सेवाओं से ₹87,300 करोड़ और माल ढुलाई से ₹1.89 लाख करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। कुल आंतरिक राजस्व का अनुमान ₹3.02 लाख करोड़ रखा गया है।     2026-27 में भी बढ़ोतरी की उम्मीद     सरकार ने रेलवे के आंतरिक राजस्व में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान करीब 8.4% वृद्धि का अनुमान लगाया है। हालांकि, रेलवे की वित्तीय स्थिति में माल ढुलाई अभी भी सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
Passengers waiting at a busy railway station during the Independence Day travel rush
यात्रियों की भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट से मिलेगी राहत, इन 10 ट्रेनों में जुड़ेंगे अतिरिक्त कोच

चक्रधरपुर: स्वतंत्रता दिवस और उसके आसपास यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दक्षिण-पूर्व रेलवे ने ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने का फैसला किया है। लंबी वेटिंग लिस्ट और कंफर्म टिकट को लेकर यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए 15 से 21 अगस्त के बीच 10 प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जायेंगे। रेलवे के इस फैसले से यात्रियों को अधिक सीटें उपलब्ध होंगी और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। रेलवे के अनुसार, यात्रियों की मांग और ट्रेनों में बढ़ते दबाव को देखते हुए अलग-अलग तिथियों में अतिरिक्त कोच लगाए जायेंगे। इनमें स्लीपर, एसी स्लीपर और चेयर कार श्रेणी के कोच शामिल हैं। इन ट्रेनों में लगेंगे अतिरिक्त कोच 12837 हावड़ा-पुरी एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 12883 रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच की सुविधा मिलेगी। 12884 पुरुलिया-हावड़ा रूपसी बंगला एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त चेयर कार कोच लगाया जायेगा। 18030 शालीमार-मुंबई एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त एसी और नॉन-एसी स्लीपर कोच जोड़े जायेंगे। 18039 शालीमार-पुरी एक्सप्रेस: 16 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18045 शालीमार-चारलपल्ली एक्सप्रेस: 15 से 21 अगस्त तक अतिरिक्त स्लीपर कोच की सुविधा दी जायेगी। 18063 येलाहांका एसी एक्सप्रेस: 20 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18107 राउरकेला-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस: 15 और 16 अगस्त को अतिरिक्त एसी स्लीपर कोच जोड़ा जायेगा। 18603 रांची-गोड्डा एक्सप्रेस: 15, 18 और 20 अगस्त को अतिरिक्त नॉन-एसी स्लीपर कोच लगाया जायेगा। 18641 हटिया-दुर्ग एक्सप्रेस: 18 अगस्त को अतिरिक्त 3-टीयर स्लीपर कोच की सुविधा मिलेगी। वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा राहत स्वतंत्रता दिवस के दौरान ट्रेनों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है। छुट्टियों और त्योहारों के कारण कई ट्रेनों में पहले से ही लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। ऐसे में अतिरिक्त कोच लगने से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और अधिक यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकेगा। रेलवे के इस फैसले से खासकर झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच सफर करने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यात्रियों को सलाह दी गयी है कि यात्रा से पहले अपने टिकट और ट्रेन की स्थिति की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यम से जरूर जांच लें, क्योंकि अतिरिक्त कोच की तारीख और उपलब्धता ट्रेन के अनुसार अलग-अलग है।  

kalpana अगस्त 14, 2026 0
गोरखपुर से हैदराबाद अमृत भारत एक्सप्रेस को रेलवे बोर्ड की मंजूरी
गोरखपुर से हैदराबाद का सफर होगा आसान, अमृत भारत एक्सप्रेस को रेलवे बोर्ड की मंजूरी

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हैदराबाद जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर से हैदराबाद (चेरापल्ली) के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दे दी है। ट्रेन संख्या 22075/22076 का संचालन शुरुआती तौर पर सप्ताह में एक दिन किया जाएगा। यात्रियों की मांग बढ़ने पर इसके फेरे बढ़ाए जा सकते हैं।   गोरखपुर से हैदराबाद के लिए पहली सीधी ट्रेन     रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-हैदराबाद अमृत भारत एक्सप्रेस के संचालन को मंजूरी दे दी है। यह गोरखपुर से हैदराबाद के लिए पहली सीधी ट्रेन होगी। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले करीब 1500 यात्रियों को सीधी रेल सुविधा मिलने की उम्मीद है।   पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रेन के संचालन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। रेलवे की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक इसी महीने से ट्रेन का संचालन शुरू होने की संभावना है।   रविवार को गोरखपुर से चलेगी ट्रेन     गोरखपुर से हैदराबाद जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 22076 रविवार सुबह 8 बजे रवाना होगी और दूसरे दिन शाम करीब 5 बजे हैदराबाद पहुंचेगी।   वहीं, हैदराबाद से गोरखपुर आने वाली ट्रेन संख्या 22075 शुक्रवार रात 9:45 बजे रवाना होगी और तीसरे दिन सुबह 6:25 बजे गोरखपुर पहुंचेगी।   कई प्रमुख स्टेशनों पर मिलेगा ठहराव     गोरखपुर-हैदराबाद अमृत भारत एक्सप्रेस को कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। ट्रेन गोंडा, बाराबंकी, गोमतीनगर, लखनऊ सिटी, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, उरई, झांसी, बीना, भोपाल, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंदरपुर, बल्लारशाह और काजीपेट होते हुए हैदराबाद पहुंचेगी।   22 कोच वाली यह ट्रेन अधिकतम 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेगी। इसमें कुल 1834 यात्रियों के सफर की क्षमता होगी।   यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं     अमृत भारत एक्सप्रेस को आम यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। ट्रेन में CCTV कैमरे, टॉक-बैक सिस्टम, वैक्यूम बायो टॉयलेट और आरामदायक सीट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।   टॉक-बैक सिस्टम के जरिए यात्री आपात स्थिति में लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर से सीधे संपर्क कर सकेंगे।   दिल्ली और मुंबई के बाद हैदराबाद के लिए कनेक्टिविटी     गोरखपुर से दिल्ली और बांद्रा के लिए भी अमृत भारत एक्सप्रेस के संचालन को मंजूरी मिल चुकी है। अब हैदराबाद के लिए सीधी ट्रेन मिलने से पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को दक्षिण भारत की यात्रा में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। नई ट्रेन से गोरखपुर और हैदराबाद के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Peerpainti Jasidih railway project strengthens Bihar Jharkhand connectivity with new 97 km rail line
2700 करोड़ की पीरपैंती-जसीडीह रेल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 97 किमी लंबी नई लाइन से बिहार-झारखंड की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

भागलपुर: बिहार के भागलपुर और आसपास के इलाकों के लिए रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर बड़ी खबर सामने आई है। करीब 2700 करोड़ रुपये की पीरपैंती-जसीडीह नई रेल लाइन परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आई है। इस परियोजना के तहत कुल 97 किलोमीटर लंबा रेल ट्रैक बिछाया जाना है। परियोजना पूरी होने के बाद भागलपुर क्षेत्र से झारखंड के जसीडीह तक रेल संपर्क को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना की प्रगति की जानकारी भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने सोशल मीडिया पर साझा की है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से भागलपुर क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न रेल परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी गई। 97 किमी में 38 किमी रेल लाइन बनकर तैयार पीरपैंती-जसीडीह नई रेल लाइन की कुल लंबाई 97 किलोमीटर है। इसकी स्वीकृत लागत करीब 2700 करोड़ रुपये बताई गई है। परियोजना पर अब तक लगभग 1697 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस परियोजना के लिए 270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। परियोजना की प्रगति में सबसे अहम बात यह है कि प्रस्तावित 97 किलोमीटर में से 38 किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण पूरा होकर परिचालन में आ चुका है। यानी परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अब यात्रियों और रेल परिचालन के लिए उपलब्ध है, जबकि बाकी हिस्से पर काम जारी है। जमीन अधिग्रहण का काम भी जारी इतनी बड़ी रेल परियोजना में जमीन अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण चरण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना के लिए कुल 613 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें से 338 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है। इससे साफ है कि परियोजना के बाकी हिस्से को पूरा करने के लिए अभी भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़े कई चरण पूरे किए जाने बाकी हैं। पुल और आरओबी निर्माण में कितनी प्रगति? पीरपैंती-जसीडीह रेल लाइन परियोजना में कई बड़े और छोटे पुलों के अलावा रोड ओवरब्रिज भी बनाए जा रहे हैं। अब तक: 31 बड़े पुलों में से 3 का निर्माण पूरा हो चुका है। 119 छोटे पुलों में से 45 पूरे हो चुके हैं। 37 रोड ओवरब्रिज में से 25 का निर्माण पूरा हो गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि परियोजना के अलग-अलग निर्माण कार्यों पर काम चल रहा है और कई महत्वपूर्ण संरचनाएं तैयार भी हो चुकी हैं। भागलपुर क्षेत्र की कई रेल परियोजनाओं पर काम पीरपैंती-जसीडीह नई रेल लाइन अकेली परियोजना नहीं है, जिस पर भागलपुर क्षेत्र में काम हो रहा है। सांसद अजय कुमार मंडल के मुताबिक, क्षेत्र में कई दूसरी रेल परियोजनाएं भी चल रही हैं। इनमें भागलपुर-जमालपुर तीसरी लाइन, भागलपुर-दुमका-रामपुरहाट दोहरीकरण और सुल्तानगंज-कटोरिया नई रेल लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। वहीं, पीरपैंती-भागलपुर दोहरीकरण और साहिबगंज-पीरपैंती दोहरीकरण परियोजनाओं के पूरा होने की जानकारी भी साझा की गई है। अमृत भारत स्टेशन योजना से स्टेशनों का भी विकास रेल कनेक्टिविटी के साथ-साथ स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी काम किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कहलगांव, पीरपैंती, सबौर और शिवनारायणपुर स्टेशनों के विकास कार्य पूरे होने की जानकारी दी गई है। वहीं, भागलपुर जंक्शन पर आधुनिक यात्री सुविधाओं के विकास का काम अभी प्रगति पर है। बिहार-झारखंड के बीच आवाजाही को मिल सकता है फायदा पीरपैंती-जसीडीह रेल लाइन परियोजना पूरी होने के बाद इसका असर केवल रेल नेटवर्क तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। भागलपुर क्षेत्र से झारखंड की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। रेल संपर्क मजबूत होने से यात्रियों के समय और यात्रा सुविधा में सुधार के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। खासकर भागलपुर और आसपास के इलाकों के लिए यह परियोजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार और झारखंड के बीच रेल नेटवर्क को और मजबूत करने में भूमिका निभा सकती है। 2700 करोड़ की परियोजना पर अब आगे की नजर लगभग 2700 करोड़ रुपये की इस परियोजना का बड़ा हिस्सा अभी पूरा होना बाकी है। 38 किलोमीटर ट्रैक के चालू होने के बाद अब नजर बाकी हिस्से के निर्माण, जमीन अधिग्रहण और पुल-आरओबी के लंबित कामों पर है। अगर परियोजना के बाकी हिस्सों का निर्माण निर्धारित गति से आगे बढ़ता है, तो आने वाले समय में भागलपुर क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।  

surbhi अगस्त 13, 2026 0
कोसी एक्सप्रेस के AC कोच में आग लगने के बाद रेलवे की कार्रवाई
कोसी एक्सप्रेस के AC कोच में लगी आग, यात्रियों में मची अफरातफरी

सहरसा, एजेंसियां। बिहार के सहरसा जिले में बुधवार, 12 अगस्त 2026 की सुबह बड़ा रेल हादसा टल गया। पूर्णिया कोर्ट से हटिया जा रही कोसी एक्सप्रेस के थर्ड AC इकोनॉमी कोच M-2 में सोनवर्षा कचहरी और सिमरी बख्तियारपुर के बीच अचानक आग लग गई। कोच के पहिए के पास आग की लपटें और धुआं दिखाई देने के बाद यात्रियों में अफरातफरी मच गई।   पहिए के पास दिखाई दी आग की लपटें   जानकारी के अनुसार, कोसी एक्सप्रेस जब सोनवर्षा कचहरी और सिमरी बख्तियारपुर के बीच गुजर रही थी, तभी ट्रेन के M-2 AC थर्ड इकोनॉमी कोच से धुआं निकलने लगा। कोच के नीचे पहिए के पास आग की लपटें भी दिखाई दीं। सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन से पहले फाटक संख्या 19 के गेटमैन ने धुआं और आग की लपटें देखकर तत्काल स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दी। इसके बाद रेलवे अधिकारियों को सतर्क किया गया।   दहशत में ट्रेन से कूदने लगे यात्री   आग और धुआं देखकर कोच में मौजूद यात्रियों के बीच दहशत फैल गई। कुछ यात्री घबराकर ट्रेन से नीचे उतरने और कूदने लगे। सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंचने पर रेलवे कर्मचारियों, चालक, सहायक चालक और गार्ड ने अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग बुझाने की कोशिश शुरू की। फायर ब्रिगेड की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है।   ब्रेक पैड में आग लगने की प्रारंभिक जानकारी   ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे की प्रारंभिक जांच में ब्रेक ब्लॉक/ब्रेक पैड जाम होने के कारण अत्यधिक गर्मी पैदा होने और आग लगने की बात सामने आई है। तकनीकी कर्मचारियों ने प्रभावित हिस्से की जांच और आवश्यक कार्रवाई की। आग प्रभावित कोच को सुरक्षा के मद्देनजर यात्रियों से खाली कराया गया और यात्रियों को दूसरे कोच में स्थानांतरित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कोच को बाद में मानसी जंक्शन तक खाली भेजा गया।   समय रहते टला बड़ा हादसा   रेलवे कर्मचारियों और दमकल कर्मियों की तत्परता से आग पर समय रहते नियंत्रण पा लिया गया। जांच के बाद कोसी एक्सप्रेस को आगे रवाना किया गया। घटना के कारण कुछ समय के लिए यात्रियों में भय का माहौल रहा, लेकिन किसी जनहानि की खबर नहीं है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Kosi Express AC coach catches fire near Simri Bakhtiyarpur station in Bihar, causing panic among passengers.
बिहार में ‘बर्निंग ट्रेन’ बनने से बची कोसी एक्सप्रेस, AC कोच में लगी आग; यात्रियों में मची भगदड़

बिहार में बुधवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा टल गया। पूर्णिया कोर्ट से सहरसा होते हुए हटिया जा रही कोसी एक्सप्रेस के थर्ड एसी इकोनॉमी कोच में अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घटना सोनवर्षा कचहरी और सिमरी बख्तियारपुर के बीच की है। ट्रेन जब तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी एक कोच के पहिये के पास आग की लपटें और धुआं दिखाई दिया। घटना कोसी एक्सप्रेस के थर्ड एसी इकोनॉमी कोच M-2 में हुई। सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन से पहले फाटक संख्या 19 पर तैनात गेटमैन की नजर कोच से निकल रहे धुएं और पहिये के पास दिखाई दे रही आग की लपटों पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी। स्टेशन पहुंचते ही यात्रियों में मची भगदड़ सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया। सुबह करीब 5:30 बजे कोसी एक्सप्रेस सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची। ट्रेन के रुकते ही आग और धुएं को देखकर कई यात्री घबराकर कोच से बाहर निकलने लगे। कुछ ही देर में स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समय रहते आग का पता चल जाना इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण रहा। यदि आग तेजी से फैलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत संभाला मोर्चा ट्रेन के स्टेशन पर रुकने के बाद स्टेशन मास्टर, आरपीएफ जवान, लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड ने अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि आग पर तत्काल पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद करीब 5:35 बजे अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। लगभग 10 मिनट बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब 5:57 बजे आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। जांच के बाद ट्रेन को आगे किया गया रवाना आग बुझने के बाद रेलवे अधिकारियों ने कोच और ट्रेन की स्थिति की जांच की। करीब 6 बजे चालक, सहायक चालक, स्टेशन मास्टर और गार्ड ने ट्रेन को आगे-पीछे कर आवश्यक निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद करीब 6:13 बजे कोसी एक्सप्रेस को आगे के लिए रवाना कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद आरपीएफ इंस्पेक्टर धनंजय कुमार समेत अन्य रेलवे अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। समय पर सूचना मिलने से टला बड़ा हादसा इस घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही गेटमैन ने धुआं और आग की लपटें देख लीं। तत्काल सूचना मिलने के कारण रेलवे कर्मचारियों को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिला और आग को फैलने से पहले नियंत्रित कर लिया गया। कोसी एक्सप्रेस में आग की घटना ने एक बार फिर चलती ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था और समय पर आग की पहचान के महत्व को सामने ला दिया है। फिलहाल यात्रियों को राहत मिली है, जबकि रेलवे की जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
भारतीय रेलवे की नई ट्रेन सेवाएं और ट्रेनों के रूट विस्तार
रेलवे ने दो नई ट्रेनों को दी मंजूरी, यूपी और गुजरात के यात्रियों को बड़ी राहत; 4 ट्रेनों का रूट बढ़ा, 7 के नए ठहराव

नई दिल्ली, एजेंसियां। रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड ने उत्तर प्रदेश और गुजरात में दो नई दैनिक ट्रेन सेवाओं को मंजूरी दी है। इसके साथ ही चार मौजूदा ट्रेनों के मार्ग का विस्तार किया गया है और सात ट्रेनों के अतिरिक्त ठहराव को भी मंजूरी दी गई है। इन फैसलों से उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।   कासगंज-ऐशबाग एक्सप्रेस     रेलवे बोर्ड ने 15312/15311 कासगंज-ऐशबाग एक्सप्रेस को मंजूरी दी है। यह ट्रेन प्रतिदिन चलेगी।   कासगंज से ऐशबाग: ट्रेन नंबर 15312 कासगंज से सुबह 4:20 बजे रवाना होगी और दोपहर 1 बजे ऐशबाग पहुंचेगी। ऐशबाग से कासगंज: वापसी में ट्रेन नंबर 15311 ऐशबाग से दोपहर 2 बजे चलेगी और रात 10:40 बजे कासगंज पहुंचेगी। इसके प्रमुख ठहराव उझानी, बदायूं, बरेली, इज्जतनगर, पीलीभीत, पूरनपुर, मैलानी, गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर, सीतापुर, सिधौली और मोहिबुल्लापुर होंगे। इस ट्रेन से कासगंज, बदायूं, बरेली, पीलीभीत और लखीमपुर क्षेत्र के यात्रियों को लखनऊ आने-जाने में अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।   वलसाड-सूरत MEMU     दूसरी नई ट्रेन 69149 वलसाड-सूरत MEMU है। इसे भी दैनिक सेवा के तौर पर मंजूरी दी गई है।   यह ट्रेन वलसाड से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर शाम 4:40 बजे सूरत पहुंचेगी। इस ट्रेन के ठहराव डूंगरी, जोरावासन, बिलिमोरा, अमलसाड, अंछेली, वेदछा, गांधी स्मृति, नवसारी, मारोली, सचिन, भेस्तान और उधना में होंगे। इससे वलसाड से सूरत के बीच रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी।   वाराणसी सिटी-गोरखपुर एक्सप्रेस अब नेपालगंज रोड तक     रेलवे ने 15132/15131 वाराणसी सिटी-गोरखपुर एक्सप्रेस का मार्ग बढ़ाकर नेपालगंज रोड तक करने को मंजूरी दी है।   अब 15132 वाराणसी सिटी से रात 10:35 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 11:20 बजे नेपालगंज रोड पहुंचेगी। वापसी में 15131 नेपालगंज रोड से शाम 4:15 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 5:30 बजे वाराणसी सिटी पहुंचेगी। विस्तारित मार्ग पर नखहा जंगल, पेपेगंज, कैंपियरगंज, आनंद नगर, सिद्धार्थ नगर, शोहरतगढ़, बढ़नी, तुलसीपुर, बलरामपुर, गोंडा, पयागपुर, बहराइच और रिसिया में ठहराव दिए जाएंगे।   रीवा-जबलपुर एक्सप्रेस का मदन महल तक विस्तार     22189/22190 रीवा-जबलपुर एक्सप्रेस को अब मदन महल तक बढ़ाया गया है।   नई व्यवस्था के तहत 22190 रीवा-मदन महल एक्सप्रेस सुबह 5:45 बजे रीवा से चलेगी और 10:07 बजे मदन महल पहुंचेगी। जबलपुर में इसका ठहराव सुबह 9:46 से 9:51 बजे तक रहेगा। वापसी में 22189 मदन महल-रीवा एक्सप्रेस शाम 5 बजे मदन महल से चलेगी और रात 9:22 बजे रीवा पहुंचेगी।   अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस भी मदन महल तक     रेलवे ने 11265/11266 जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस को भी मदन महल तक बढ़ाने की मंजूरी दी है।   11266 अंबिकापुर-मदन महल एक्सप्रेस सुबह 6:15 बजे अंबिकापुर से चलेगी और दोपहर 3:20 बजे मदन महल पहुंचेगी। जबलपुर में इसका ठहराव दोपहर 2:55 से 3 बजे तक रहेगा। वापसी में 11265 मदन महल-अंबिकापुर एक्सप्रेस दोपहर 12:25 बजे मदन महल से चलेगी और रात 11 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी।   सात ट्रेनों के नए ठहराव भी मंजूर     रेलवे बोर्ड ने सात ट्रेनों के लिए नए स्टेशन पर ठहराव की भी मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं:   15093/15094 अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस — बनबसा 12221/12222 पुणे-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस — अकोला 55331/55332 कासगंज-अछनेरा पैसेंजर — गढ़ी बेरी 12933/12934 बांद्रा टर्मिनस-वटवा कर्णावती एक्सप्रेस — नवसारी 14319/14320 इंदौर-बरेली एक्सप्रेस — डिबाई 20161/20162 पुणे-जबलपुर एक्सप्रेस — खंडवा 63387/63388 जमालपुर-गया MEMU — पवई ब्रह्मस्थान   यात्रियों को क्या फायदा होगा     रेलवे के इन फैसलों से कई छोटे शहर और प्रमुख रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। खास तौर पर कासगंज-बदायूं-बरेली-पीलीभीत-लखनऊ, वलसाड-सूरत, वाराणसी-नेपालगंज रोड और रीवा-जबलपुर-मदन महल रूट के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।   रेलवे के अनुसार नई ट्रेन सेवाओं, रूट विस्तार और नए ठहराव की अलग-अलग अधिसूचना संबंधित रेलवे जोन द्वारा जारी की जाएगी। इसलिए वास्तविक परिचालन तिथि और अंतिम समय-सारणी के लिए संबंधित जोन की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Bihar plans new railway lines worth ₹1,323 crore in three phases to strengthen Patna rail connectivity and reduce congestion.
बिहार में 1323 करोड़ रुपये से बिछेंगी नई रेल लाइनें, तीन फेज में होगा काम; पटना रेल नेटवर्क को मिलेगी बड़ी मजबूती

Bihar New Rail Line Project: बिहार में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और पटना के आसपास बढ़ते रेल यातायात के दबाव को कम करने के लिए बड़े स्तर पर नई रेल लाइनों के निर्माण की योजना तैयार की गई है। करीब 1323 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके तहत बख्तियारपुर से फतुहा, बख्तियारपुर से पुनारख और राजेंद्र नगर से पटना साहिब समेत कई महत्वपूर्ण रेलखंडों पर अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाई जाएंगी। इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई पटरी बिछाना नहीं है, बल्कि पटना के व्यस्त रेल कॉरिडोर में ट्रेनों के परिचालन की क्षमता बढ़ाना, आउटर पर ट्रेनों के इंतजार को कम करना और भविष्य में बढ़ने वाले यात्री एवं माल यातायात के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है। पहले फेज में बख्तियारपुर-फतुहा के बीच 24 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना के पहले चरण में बख्तियारपुर और फतुहा के बीच करीब 24 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस काम पर लगभग 931 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह रेलखंड पहले से ही काफी व्यस्त है। नई लाइन तैयार होने के बाद इस रूट पर ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे मौजूदा ट्रैक पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना के लिए करीब 6.6 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। इसके लिए रेलवे की ओर से मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है। दूसरे फेज में बख्तियारपुर-पुनारख रेलखंड पर काम दूसरे चरण में बख्तियारपुर से पुनारख के बीच करीब 30 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाने की योजना है। इस हिस्से के निर्माण पर लगभग 392 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस रेल लाइन के लिए भी जमीन अधिग्रहण को लेकर रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। नई लाइन तैयार होने के बाद पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। पटना-हावड़ा रूट बिहार के सबसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में शामिल है। इस मार्ग पर यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का भी संचालन होता है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से भविष्य में परिचालन क्षमता बढ़ाने का रास्ता खुलेगा। तीसरे फेज में पटना के प्रमुख रेलखंडों का विस्तार परियोजना के तीसरे चरण में पटना शहर और आसपास के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत दानापुर से पटना जंक्शन के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना है। इसके बाद राजेंद्र नगर टर्मिनल से पटना साहिब तक तीसरी लाइन तथा पटना साहिब से फतुहा के बीच तीसरी और चौथी लाइन तैयार करने का प्रस्ताव है। इस चरण का सीधा असर पटना के प्रमुख रेलवे स्टेशनों और उनके बीच चलने वाले ट्रेनों के परिचालन पर पड़ सकता है। अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध होने से अलग-अलग ट्रेनों के लिए ट्रैक का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा। ट्रेनों के आउटर पर खड़े रहने की समस्या हो सकती है कम पटना और आसपास के रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने के साथ कई बार ट्रेनों को स्टेशन से पहले आउटर पर रोकना पड़ता है। अतिरिक्त रेल लाइनें तैयार होने के बाद इस तरह की परिचालन संबंधी समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। नई लाइनों से एक ही कॉरिडोर पर अलग-अलग ट्रेनों के संचालन के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे। इसका फायदा लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ स्थानीय यात्रियों को भी मिल सकता है। यात्रियों के साथ मालगाड़ियों को भी मिलेगा फायदा इस परियोजना का लाभ केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित नहीं रहेगा। अतिरिक्त रेल क्षमता बनने से मालगाड़ियों के परिचालन के लिए भी अधिक जगह उपलब्ध हो सकती है। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के परिचालन को अलग-अलग स्लॉट में अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। इससे माल ढुलाई की गति और रेल कॉरिडोर की उपयोगिता भी बढ़ सकती है। पटना-हावड़ा रेल मार्ग पर कम होगा दबाव बिहार के लिए पटना-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग पर लगातार बढ़ता यातायात रेलवे के सामने परिचालन संबंधी चुनौती पैदा करता है। नई रेल लाइनों के निर्माण के बाद ट्रेनों के लिए अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे। इससे मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। औसत गति और परिचालन क्षमता में सुधार की उम्मीद अतिरिक्त रेल लाइनें बनने का एक महत्वपूर्ण फायदा ट्रेनों की परिचालन क्षमता में सुधार हो सकता है। जब ट्रेनों के लिए पर्याप्त ट्रैक उपलब्ध होते हैं, तो एक ट्रेन के पीछे दूसरी ट्रेन को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होती है। इससे ट्रेनों की औसत गति और समयबद्ध परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि वास्तविक सुधार परियोजना के पूरा होने और परिचालन व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पटना के रेल नेटवर्क के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना? 1323 करोड़ रुपये की यह परियोजना पटना के आसपास रेल बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। शहर की आबादी, यात्री संख्या और आसपास के क्षेत्रों से पटना आने-जाने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अतिरिक्त रेल लाइनें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। परियोजना के तीनों चरण पूरे होने के बाद पटना के प्रमुख रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होंगे। परियोजना की प्रमुख बातें कुल अनुमानित लागत: करीब 1323 करोड़ रुपये परियोजना: तीन फेज में बख्तियारपुर-फतुहा: 24 किलोमीटर बख्तियारपुर-पुनारख: करीब 30 किलोमीटर दानापुर-पटना जंक्शन: तीसरी और चौथी लाइन राजेंद्र नगर-पटना साहिब: तीसरी लाइन पटना साहिब-फतुहा: तीसरी और चौथी लाइन प्रमुख उद्देश्य: रेल यातायात की क्षमता बढ़ाना और ट्रेनों के दबाव को कम करना कुल मिलाकर, बिहार में प्रस्तावित यह रेल विस्तार परियोजना पटना के आसपास रेल नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में अहम कदम हो सकती है। नई लाइनों के निर्माण से यात्रियों को बेहतर परिचालन, कम इंतजार और अधिक कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि परियोजना के वास्तविक फायदे निर्माण पूरा होने और नई लाइनों पर परिचालन शुरू होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएंगे।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
दानापुर रेलवे स्टेशन के विस्तार और नए पार्किंग एरिया की प्रस्तावित योजना
दानापुर रेलवे स्टेशन का होगा कायाकल्प, पार्किंग और सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार

पटना। बिहार के दानापुर रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी शुरू हो गई है। स्टेशन के विस्तार के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके तहत प्लेटफॉर्म की चौड़ाई बढ़ाने के साथ नया सर्कुलेटिंग एरिया और बड़ा पार्किंग जोन विकसित करने की योजना है। वहीं, खगौल आरओबी से दानापुर स्टेशन गोलंबर तक जाने वाली पुरानी सड़क को बंद कर उसकी जमीन स्टेशन विस्तार में इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव है।   पुरानी सड़क की जमीन से होगा स्टेशन का विस्तार     दानापुर स्टेशन के विस्तार के लिए खगौल आरओबी से स्टेशन गोलंबर तक जाने वाली सड़क की जमीन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। प्रस्ताव के तहत इस मार्ग को बंद कर यहां प्लेटफॉर्म, पार्किंग और सर्कुलेटिंग एरिया का विस्तार किया जाएगा।   रेलवे और संबंधित विभागों के बीच जमीन हस्तांतरण को लेकर जल्द प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।   पटना-बिहटा आने-जाने वालों को मिलेगा वैकल्पिक रास्ता     पुरानी सड़क बंद होने के बाद पटना और बिहटा के बीच आने-जाने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाएगा। वाहनों को बिहटा एलिवेटेड रोड के नीचे बने नए रास्ते से गुजारा जाएगा।   अधिकारियों का मानना है कि इससे यातायात को व्यवस्थित करने और पटना-बिहटा रूट पर जाम कम करने में मदद मिल सकती है। इससे रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है।   प्लेटफॉर्म ए और ए-1 की चौड़ाई होगी दोगुनी से ज्यादा     स्टेशन विस्तार के तहत प्लेटफॉर्म ए और ए-1 को मौजूदा आकार की तुलना में दोगुने से भी अधिक चौड़ा करने की योजना है। इससे यात्रियों को अधिक जगह मिलेगी और ट्रेन के आने-जाने के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा।     पटना जंक्शन से भी बड़ा हो सकता है पार्किंग एरिया     दानापुर स्टेशन के बाहर नया सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग जोन विकसित करने की तैयारी है। प्रस्तावित पार्किंग क्षेत्र पटना जंक्शन के मौजूदा सर्कुलेटिंग एरिया और पार्किंग से भी बड़ा होने की बात कही जा रही है।   यहां दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे स्टेशन आने वाले यात्रियों को वाहन खड़ा करने में आसानी होगी।   रेलवे जल्द भेजेगा एनएचएआई को प्रस्ताव     स्टेशन विस्तार के लिए सड़क की जमीन जरूरी होने के कारण रेलवे की ओर से जल्द ही भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को लिखित प्रस्ताव भेजे जाने की तैयारी है। इसके बाद जमीन हस्तांतरण और वैकल्पिक मार्ग को लेकर रेलवे और एनएचएआई के अधिकारियों के बीच बैठक होगी।   स्टेशन विस्तार और यातायात व्यवस्था में बदलाव की यह योजना पूरी होने के बाद दानापुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ पटना-बिहटा मार्ग पर यातायात व्यवस्था में भी सुधार की उम्मीद है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
Bhabua Road railway station in Kaimur, Bihar amid demand to rename it Maa Mundeshwari Dham station
भभुआ रोड स्टेशन का नाम ‘मां मुंडेश्वरी धाम’ करने का प्रस्ताव नहीं मिला: अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में दी जानकारी

कैमूर: बिहार के कैमूर जिले में स्थित भभुआ रोड रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘मां मुंडेश्वरी धाम’ करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, फिलहाल इस नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत नहीं हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय से रेल मंत्रालय को अभी तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। रेल मंत्री ने भाजपा सांसद शिवेश कुमार के सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। सांसद ने सरकार से पूछा था कि क्या भभुआ रोड रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां मुंडेश्वरी के नाम पर ‘मां मुंडेश्वरी धाम रेलवे स्टेशन’ करने के संबंध में कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। गृह मंत्रालय से प्रस्ताव नहीं मिला अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा को बताया कि वर्तमान में गृह मंत्रालय की ओर से भभुआ रोड रेलवे स्टेशन के नाम में बदलाव को लेकर रेल मंत्रालय से कोई टिप्पणी या विचार नहीं मांगा गया है। इसका सीधा अर्थ है कि नाम बदलने की औपचारिक प्रक्रिया अभी रेल मंत्रालय के स्तर पर शुरू नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर स्टेशन का नाम बदलकर ‘मां मुंडेश्वरी धाम’ करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। नाम बदलने की प्रक्रिया क्या है? रेल मंत्री ने सदन में रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया। मौजूदा दिशा-निर्देशों के अनुसार रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मंजूरी देने का अधिकार गृह मंत्रालय के पास है। किसी स्टेशन का नाम बदलने के लिए संबंधित राज्य सरकार की सिफारिश महत्वपूर्ण होती है। इसके बाद गृह मंत्रालय संबंधित मंत्रालयों और विभागों से टिप्पणियां और सुझाव लेने के बाद नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर निर्णय करता है। इस प्रक्रिया में रेलवे मंत्रालय की भूमिका भी संबंधित प्रस्ताव पर अपनी टिप्पणियां और विचार देने की होती है। मंजूरी के बाद क्या होता है? रेल मंत्री के मुताबिक, गृह मंत्रालय से नाम परिवर्तन की स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित राज्य सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी की जाती है। इसके बाद संबंधित क्षेत्रीय रेलवे की ओर से स्टेशन के नाम में आधिकारिक बदलाव किया जाता है। इसलिए केवल स्थानीय स्तर पर उठने वाली मांग या राजनीतिक प्रतिनिधियों द्वारा मांग किए जाने से स्टेशन का नाम स्वतः नहीं बदला जाता। इसके लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। मां मुंडेश्वरी धाम से जुड़ी है लोगों की आस्था भभुआ रोड स्टेशन का नाम ‘मां मुंडेश्वरी धाम’ करने की मांग का संबंध कैमूर स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां मुंडेश्वरी मंदिर से है। क्षेत्र के लोगों के लिए यह धार्मिक स्थल विशेष आस्था का केंद्र है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि रेलवे स्टेशन का नाम भी मां मुंडेश्वरी धाम के नाम पर रखा जाए, ताकि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को रेलवे स्टेशन के नाम से भी जोड़ा जा सके। हालांकि, रेल मंत्री के राज्यसभा में दिए जवाब के बाद फिलहाल स्थिति साफ है कि गृह मंत्रालय से नाम परिवर्तन संबंधी कोई प्रस्ताव रेल मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ है। अब आगे क्या होगा? अब इस मांग पर आगे की कार्रवाई राज्य सरकार और संबंधित स्तरों से प्रस्ताव भेजे जाने पर निर्भर करेगी। यदि भविष्य में राज्य सरकार की ओर से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव प्रक्रिया में आता है, तो गृह मंत्रालय संबंधित विभागों की राय लेने के बाद इस पर निर्णय कर सकता है। फिलहाल भभुआ रोड रेलवे स्टेशन का आधिकारिक नाम नहीं बदला गया है और ‘मां मुंडेश्वरी धाम’ नामकरण की मांग अभी प्रस्ताव के औपचारिक चरण तक नहीं पहुंची है।  

surbhi अगस्त 8, 2026 0
भारतीय रेलवे का कंटेनर ट्रेन लाइसेंस सुधार
रेलवे का बड़ा सुधार, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को मिलेगा सिंगल ऑल-इंडिया लाइसेंस

रेलवे का बड़ा सुधार, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को मिलेगा सिंगल ऑल-इंडिया लाइसेंस नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस व्यवस्था को आसान बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को देश के अलग-अलग रेल मार्गों पर परिचालन के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। एक सिंगल ऑल-इंडिया लाइसेंस के जरिए पूरे भारतीय रेल नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेन चलाने की सुविधा मिलेगी।   लाइसेंस व्यवस्था हुई आसान   रेल मंत्रालय ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को अनुमति देने से जुड़े मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट (MCA) में संशोधन को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाना और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था से कंटेनर ट्रेन संचालकों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में कारोबार का विस्तार करना आसान होगा। इससे बार-बार अलग-अलग मार्गों के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया भी कम हो सकती है।   पूरे देश में परिचालन की सुविधा   सिंगल ऑल-इंडिया लाइसेंस के तहत पात्र कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर भारतीय रेल नेटवर्क के सभी रेल मार्गों पर परिचालन कर सकेंगे। इससे लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे का यह कदम देश में माल परिवहन को अधिक सुगम और कुशल बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।   माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को फायदा   कंटेनर ट्रेनों के परिचालन में आसानी होने से सड़क और रेल के बीच माल ढुलाई के बेहतर संतुलन में मदद मिल सकती है। कंटेनर आधारित परिवहन बढ़ने से लंबी दूरी के माल परिवहन में रेलवे की भूमिका और मजबूत होने की उम्मीद है। रेलवे के इस सुधार से निजी कंटेनर ट्रेन ऑपरेटरों को नए मार्गों और बाजारों में विस्तार का अवसर मिलेगा। इससे आने वाले समय में रेल माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है।   रेलवे के ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ अभियान का हिस्सा   यह फैसला भारतीय रेलवे में माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और कारोबारी अनुकूल बनाने के लिए किए जा रहे सुधारों से जुड़ा है। सिंगल लाइसेंस व्यवस्था से कंटेनर ट्रेन संचालन की प्रक्रिया को सरल बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
Vande Bharat Express transporting a donor heart from Ankleshwar to Ahmedabad via a green corridor.
वंदे भारत एक्सप्रेस बनी जीवनरक्षक, ग्रीन कॉरिडोर से अंकलेश्वर से अहमदाबाद पहुंचाया गया डोनर हार्

Vande Bharat Donor Heart Transport: गुजरात में वंदे भारत एक्सप्रेस ने एक बार फिर समय के खिलाफ चल रही जिंदगी की जंग में अहम भूमिका निभाई है। पहली बार अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत एक्सप्रेस को विशेष रूप से रोका गया, ताकि एक डोनर हार्ट को बिना देरी के अहमदाबाद स्थित यूएन मेहता अस्पताल पहुंचाया जा सके। ग्रीन कॉरिडोर और हाई-स्पीड रेल नेटवर्क की मदद से यह महत्वपूर्ण अंग तय समय के भीतर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अस्पताल से स्टेशन तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर डोनर हार्ट अंकलेश्वर के स्मृति जयाबेन मोदी मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल से प्राप्त किया गया। हार्ट ट्रांसप्लांट में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए प्रशासन और पुलिस ने अस्पताल से रेलवे स्टेशन तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया। एम्बुलेंस बिना किसी ट्रैफिक बाधा के सीधे स्टेशन पहुंची, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम पहले से वंदे भारत एक्सप्रेस में मौजूद थी। इसके बाद ट्रेन निर्धारित गति से अहमदाबाद के लिए रवाना हुई, जिससे डोनर हार्ट को सुरक्षित और समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका। तीन दिनों में दूसरी बार निभाई जीवनरक्षक भूमिका यह लगातार तीन दिनों में दूसरी बार है जब वंदे भारत एक्सप्रेस ने अंग प्रत्यारोपण मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे पहले सूरत से अहमदाबाद तक भी एक डोनर हार्ट इसी ट्रेन के जरिए पहुंचाया गया था। भारतीय रेलवे के इतिहास में हाल के दिनों में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस का इस तरह अंग प्रत्यारोपण के लिए लगातार उपयोग किया जा रहा है, जिससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में रेलवे की नई भूमिका सामने आई है। सीमित समय में पहुंचाना होता है डोनर हार्ट विशेषज्ञों के अनुसार, किसी डोनर का हृदय शरीर से निकालने के बाद उसे सीमित समय के भीतर दूसरे मरीज तक पहुंचाना बेहद जरूरी होता है। ऐसे मामलों में समय की थोड़ी-सी देरी भी ट्रांसप्लांट की सफलता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज रफ्तार, समय की पाबंदी और प्रशासन की त्वरित व्यवस्था ने इस मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यूएन मेहता अस्पताल में होगा 78वां हार्ट ट्रांसप्लांट डॉक्टरों के अनुसार, अहमदाबाद के यूएन मेहता अस्पताल में इस डोनर हार्ट से 78वां हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम पूरे प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अंजाम देगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रीन कॉरिडोर, आधुनिक परिवहन व्यवस्था और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से अंग प्रत्यारोपण की सफलता की संभावना बढ़ती है। वंदे भारत एक्सप्रेस का इस तरह उपयोग भविष्य में भी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो सकता है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Indian Railways
रेलवे ट्रैक पर मिले शवों की अंत्येष्टि के लिए अब मिलेंगे 7 हजार रुपये, आठ साल बाद बढ़ी राशि

रांची। रेलवे ट्रैक पर दुर्घटना या अन्य परिस्थितियों में मिले लावारिस शवों की अंत्येष्टि के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में बढ़ोतरी की गई है। अब ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए 7,000 रुपये की राशि दी जाएगी। करीब आठ साल बाद अंत्येष्टि सहायता राशि में संशोधन किया गया है। नई व्यवस्था से पुलिस और प्रशासन को लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में मदद मिलेगी।   पहले मिलते थे 3 हजार रुपये   नई व्यवस्था से पहले रेलवे ट्रैक या रेलवे क्षेत्र में मिले लावारिस शवों की अंत्येष्टि के लिए 3,000 रुपये की सहायता राशि निर्धारित थी। लंबे समय से राशि में बदलाव नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार की बढ़ती लागत को देखते हुए इसे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी।   अब राशि बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दी गई है। इससे लकड़ी, कफन और अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था करने में सहायता मिलेगी।   आठ साल बाद हुआ संशोधन   अंत्येष्टि सहायता राशि में यह बदलाव करीब आठ साल बाद किया गया है। इस दौरान अंतिम संस्कार से जुड़ी सामग्री और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी हुई है। नई राशि को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप किया गया है, ताकि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में आर्थिक समस्या कम हो।   लावारिस शवों की अंत्येष्टि में मिलेगी मदद   रेलवे ट्रैक पर मिले शवों की पहचान नहीं होने या परिजनों के तत्काल सामने नहीं आने की स्थिति में पुलिस और प्रशासन को अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे मामलों में नई सहायता राशि से अंत्येष्टि की प्रक्रिया को पूरा करने में आर्थिक मदद मिलेगी।   पहचान और परिजनों की तलाश भी जारी रहेगी   लावारिस शव मिलने के बाद पुलिस की ओर से उसकी पहचान कराने और परिजनों का पता लगाने की प्रक्रिया जारी रहती है। पहचान नहीं होने की स्थिति में निर्धारित नियमों के अनुसार अंतिम संस्कार कराया जाता है। सहायता राशि बढ़ाए जाने से ऐसी परिस्थितियों में प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करने में सुविधा होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य लावारिस शवों की सम्मानजनक अंत्येष्टि सुनिश्चित करना और इसके लिए उपलब्ध सरकारी सहायता को मौजूदा खर्च के अनुरूप बनाना है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Gaya-Chatra Rail Project
गया-चतरा रेल परियोजना में तेजी, बिहार-झारखंड के बीच रेल कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा फायदा

चतरा। बिहार और झारखंड को जोड़ने वाली गया-चतरा नई रेल लाइन परियोजना के काम में तेजी लाने की तैयारी शुरू हो गई है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस रेल परियोजना के पूरा होने से गया और चतरा के बीच सीधा रेल संपर्क मजबूत होगा। इससे यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।   परियोजना से कई इलाकों को मिलेगा रेल संपर्क   गया-चतरा रेल लाइन बनने के बाद बिहार के गया और झारखंड के चतरा के बीच रेल आवागमन आसान होगा। परियोजना से रास्ते में आने वाले ग्रामीण और पिछड़े इलाकों को भी रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। रेल संपर्क बढ़ने से इन क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और कारोबार के लिए बड़े शहरों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।   गया और चतरा के बीच दूरी होगी आसान   वर्तमान में दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग पर काफी निर्भर रहना पड़ता है। नई रेल लाइन बनने के बाद यात्रा का समय कम होने और परिवहन व्यवस्था अधिक सुविधाजनक बनने की उम्मीद है। रेल परियोजना का फायदा बिहार के दक्षिणी हिस्से और झारखंड के उत्तरी इलाकों को भी मिलेगा।   माल परिवहन को भी मिलेगा बढ़ावा   इस रेल लाइन का महत्व केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। क्षेत्र में उपलब्ध खनिज, कृषि उत्पाद और अन्य स्थानीय सामान को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में रेल परिवहन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।   रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद   रेल परियोजना के निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन और रेल नेटवर्क के आसपास व्यापारिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। बिहार और झारखंड के बीच यह रेल संपर्क दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।   परियोजना पूरी होने का इंतजार   गया-चतरा रेल परियोजना को क्षेत्र के लोगों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। निर्माण कार्य में तेजी आने से स्थानीय लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में भूमि, निर्माण और अन्य प्रक्रियाओं के आधार पर काम आगे बढ़ाया जाएगा।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Indore-Manmad railway line project connecting Madhya Pradesh and Maharashtra
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पर बड़ा अपडेट, 309 किमी के नए रूट से मुंबई का सफर होगा आसान; 8 घंटे में पहुंचेगी ट्रेन

Indore–Manmad Rail Line: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित हो रही इस 309 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के लिए मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर से मुंबई की रेल दूरी करीब 200 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रा का समय लगभग 4 से 4.5 घंटे तक घटने की उम्मीद है। अनुमान है कि भविष्य में इंदौर से मुंबई का सफर करीब 8 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। मध्य प्रदेश में तेज हुआ भूमि अधिग्रहण रेल परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कुल 349.789 हेक्टेयर वन भूमि रेलवे को हस्तांतरित की जाएगी। मध्य प्रदेश: 207.3023 हेक्टेयर महाराष्ट्र: 142.4867 हेक्टेयर रेलवे और वन विभाग के बीच आवश्यक सहमति बनने के बाद अब परियोजना को गति मिल रही है। इन जिलों को मिलेगा सीधा लाभ इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण जिले सीधे जुड़ेंगे। इनमें प्रमुख जिले हैं— इंदौर धार खरगोन बड़वानी धुले नासिक मनमाड़ यह रेल कॉरिडोर मालवा और निमाड़ क्षेत्र को महाराष्ट्र के औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों से बेहतर कनेक्टिविटी देगा। मुंबई की दूरी होगी 200 किमी कम नई रेल लाइन बनने के बाद इंदौर और मुंबई के बीच रेलवे मार्ग लगभग 200 किलोमीटर छोटा हो जाएगा। इससे यात्रियों का सफर न केवल तेज होगा, बल्कि माल परिवहन भी अधिक किफायती और आसान बनेगा। रेलवे के अनुसार, आधुनिक ट्रैक और तेज रफ्तार ट्रेनों के संचालन से यात्रा समय में करीब 4 से 4.5 घंटे की बचत हो सकती है। व्यापार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा यह परियोजना केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार और उद्योग के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई रेल लाइन से— मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच माल परिवहन तेज होगा। औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। उत्तर भारत से पश्चिमी और दक्षिण भारत की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना दोनों राज्यों के आर्थिक विकास को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
Indian Railways solar coach with rooftop panels generating electricity for fans, lights and charging points
Solar Coach: हाइड्रोजन ट्रेन के बाद रेलवे का नया प्रयोग, अब ट्रेन की छत पर सोलर पैनल; जानिए कैसे चलेगा Solar Coach

Indian Railways Solar Coach: भारतीय रेलवे लगातार पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में नए प्रयोग कर रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन के बाद अब रेलवे ने सोलर असिस्टेड कोच तैयार किया है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल की इस पहल में ट्रेन के डिब्बे की छत पर हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए गए हैं। खास बात यह है कि ये सोलर पैनल ट्रेन के चलने के दौरान ही नहीं, बल्कि ट्रेन के स्टेशन या यार्ड में खड़े रहने पर भी बिजली पैदा कर सकते हैं। इस बिजली का इस्तेमाल कोच के अंदर पंखे, लाइट और मोबाइल चार्जिंग पॉइंट जैसी सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। कैसे काम करता है Solar Coach? इस सोलर कोच की छत पर Photovoltaic यानी PV पैनल लगाए गए हैं। इन पैनलों की कुल क्षमता करीब 7 kWp बताई गई है। सोलर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करते हैं। इसके बाद यह बिजली कोच में लगे बैटरी बैंक को चार्ज करती है। यही बैटरी यात्रियों के लिए जरूरी बिजली की आपूर्ति करती है। इस व्यवस्था से कोच के: पंखे लाइट मोबाइल चार्जिंग सॉकेट जैसी सुविधाएं संचालित की जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सिस्टम ट्रेन के मौजूदा बिजली सिस्टम को पूरी तरह हटाने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करता है। सामान्य ट्रेन कोच से कितना अलग है? सामान्य कोच में बिजली उत्पादन की एक व्यवस्था एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर पर आधारित होती है। ट्रेन के पहिए घूमते हैं तो यह सिस्टम बिजली पैदा करता है। यानी ट्रेन के चलने पर बिजली उत्पादन होता है। सोलर कोच में स्थिति अलग है। यहां छत पर लगे सोलर पैनल सूरज की रोशनी मिलने पर बिजली पैदा करते हैं, चाहे ट्रेन चल रही हो या खड़ी। इसका मतलब है कि स्टेशन, यार्ड या किसी अन्य स्थान पर ट्रेन के खड़े रहने के दौरान भी सोलर पैनल बैटरी को चार्ज करते रह सकते हैं। रेलवे को क्या फायदा होगा? इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में हो सकता है। अगर सौर ऊर्जा से कोच की कुछ बिजली जरूरतें पूरी होती हैं, तो पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, ट्रेन के खड़े रहने के दौरान भी बिजली का उत्पादन होने से बैटरी चार्जिंग की निरंतरता बेहतर हो सकती है। क्या देशभर में लगेंगे ऐसे Solar Coach? फिलहाल यह एक ट्रायल और तकनीकी पहल के तौर पर देखा जा रहा है। अगर इसका प्रदर्शन सफल रहता है और तकनीक व्यावहारिक व लागत-कुशल साबित होती है, तो भविष्य में रेलवे के दूसरे कोचों में भी इस तरह के सोलर सिस्टम का विस्तार किया जा सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले इसकी बिजली उत्पादन क्षमता, रखरखाव, सुरक्षा, लागत और अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन जैसे पहलुओं का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा। हाइड्रोजन ट्रेन के बाद हरित रेलवे की ओर एक और कदम भारतीय रेलवे पहले से ही ऊर्जा बचत और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई तकनीकों पर काम कर रहा है। ऐसे में सोलर असिस्टेड कोच का प्रयोग रेलवे के हरित परिवहन लक्ष्य की दिशा में एक और पहल है। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में ट्रेन की छत केवल यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने का काम नहीं करेगी, बल्कि सूरज की रोशनी को यात्रियों के लिए उपयोगी बिजली में बदलने का माध्यम भी बन सकती है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Indian Railways launches first direct commercial container freight train from Kolkata Port to Nepal
Indian Railway News: नेपाल के लिए पहली सीधी कंटेनर मालगाड़ी चली, भारत-नेपाल व्यापार को मिल सकता है बड़ा फायदा

Indian Railway News: भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने पहली बार नेपाल के लिए सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी चलाई है। इस मालगाड़ी ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक का सफर पूरा किया। इस ऐतिहासिक मालगाड़ी में 40 टैंक वैगन में कैनोला तेल लदा था। अभी तक दोनों देशों के बीच बड़ी मात्रा में माल की आवाजाही सड़क मार्ग यानी ट्रकों के जरिए होती रही है। ऐसे में सीधी रेल सेवा शुरू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार को गति मिलने की उम्मीद है। कोलकाता पोर्ट से विराटनगर तक पहुंचा माल रेलवे की इस पहली सीधी कमर्शियल सेवा ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक माल पहुंचाया। रेल मंत्रालय के मुताबिक, नई व्यवस्था से माल की आवाजाही में लगने वाला समय, लॉजिस्टिक्स लागत और कार्गो हैंडलिंग का समय कम होने की उम्मीद है। यह सुविधा जोगबनी-विराटनगर ब्रॉडगेज रेल लिंक पर आधारित है, जिसे जून 2023 में शुरू किया गया था। अब इस इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल सीधे कमर्शियल कंटेनर कार्गो के लिए भी किया जा रहा है। भारत-नेपाल व्यापार को कैसे होगा फायदा? सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों के व्यापार के लिए कई स्तरों पर फायदेमंद साबित हो सकती है। पहला फायदा ट्रांजिट टाइम में कमी का है। सड़क मार्ग की तुलना में रेल के जरिए बड़ी मात्रा में माल को व्यवस्थित तरीके से भेजना आसान हो सकता है। इससे सप्लाई चेन अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा फायदा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी का हो सकता है। माल को कई अलग-अलग परिवहन माध्यमों में ट्रांसफर करने की जरूरत कम होने से अतिरिक्त हैंडलिंग और परिवहन खर्च घट सकता है। तीसरा फायदा कार्गो हैंडलिंग में कमी का है। कम हैंडलिंग पॉइंट होने से माल को बार-बार उतारने और चढ़ाने की जरूरत कम होगी, जिससे समय की बचत के साथ नुकसान का जोखिम भी घट सकता है। आयात-निर्यात को मिल सकती है नई रफ्तार रेल मंत्रालय के मुताबिक, इस सेवा से भारत और नेपाल के बीच आयात-निर्यात कार्गो की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। रेल परिवहन बड़े पैमाने पर माल ढुलाई के लिए अपेक्षाकृत तेज, लागत-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे खासतौर पर उन कारोबारियों को फायदा मिल सकता है जो नियमित रूप से बड़ी मात्रा में माल भारत से नेपाल या नेपाल से भारत भेजते हैं। नवंबर 2025 के समझौते के बाद खुला रास्ता सीधी कमर्शियल रेल सेवा शुरू होने की दिशा में नवंबर 2025 में संशोधित Letter of Exchange (LoE) पर हस्ताक्षर महत्वपूर्ण कदम रहा। इसके बाद विराटनगर के लिए सीधी वाणिज्यिक रेल सेवा शुरू करने का रास्ता साफ हुआ। यह कदम केवल परिवहन व्यवस्था में बदलाव नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। भारत-नेपाल कनेक्टिविटी में नया अध्याय भारत और नेपाल के बीच पहले से ही मजबूत आर्थिक और कारोबारी संबंध हैं। ऐसे में सीधी मालगाड़ी सेवा दोनों देशों की सीमा-पार सप्लाई चेन को और मजबूत कर सकती है। अगर यह मॉडल आगे सफल रहता है और ज्यादा तरह के माल को रेल नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो आने वाले समय में भारत-नेपाल व्यापार के लिए रेल परिवहन एक अहम विकल्प बन सकता है। कुल मिलाकर, पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी सिर्फ एक नई रेल सेवा की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत और नेपाल के बीच व्यापार को अधिक तेज, व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
JFWC Exam Special Train
परीक्षार्थियों को राहत! JFWC एग्जाम के लिए रांची रेल मंडल चलाएगा स्पेशल ट्रेनें

रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा (JFWCE-2024) को लेकर रांची रेल मंडल ने परीक्षार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। 19 जुलाई को होने वाली परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए दक्षिण पूर्व रेलवे ने 5 जोड़ी परीक्षा स्पेशल ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। रेलवे का उद्देश्य परीक्षार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना और नियमित ट्रेनों पर बढ़ने वाले दबाव को कम करना है।   कई प्रमुख रूटों पर मिलेगी विशेष रेल सेवा रेलवे के अनुसार, रांची-दुमका-रांची अनारक्षित परीक्षा स्पेशल ट्रेन (08619/08620) 19 और 20 जुलाई को चलेगी। यह ट्रेन मुरी, झालदा, बोकारो स्टील सिटी, धनबाद, जसीडीह और देवघर होते हुए दुमका पहुंचेगी। इसमें कुल 10 कोच होंगे, जिनमें 8 सामान्य और 2 एसएलआर कोच शामिल हैं।   दूसरी विशेष ट्रेन टाटानगर-हजारीबाग रोड-टाटानगर अनारक्षित मेमू परीक्षा स्पेशल (08103/08104) होगी। यह ट्रेन आदित्यपुर, चांडिल, मुरी, बोकारो स्टील सिटी और गोमो होते हुए हजारीबाग रोड तक जाएगी। इस ट्रेन में कुल 8 मेमू कोच लगाए गए हैं।   लंबी दूरी के परीक्षार्थियों के लिए रांची-पटना-रांची परीक्षा स्पेशल (08624/08623) भी चलाई जाएगी। यह ट्रेन 19 जुलाई को रांची से रवाना होकर मुरी, बोकारो स्टील सिटी, गोमो, हजारीबाग रोड, कोडरमा और गया होते हुए पटना पहुंचेगी तथा 20 जुलाई को वापसी करेगी। इसमें 18 कोच होंगे, जिनमें 14 स्लीपर, 2 सामान्य और 2 एसएलआरडी कोच शामिल हैं।   इसके अलावा रांची-गढ़वा रोड-रांची मार्ग पर भी दो जोड़ी अनारक्षित मेमू परीक्षा स्पेशल ट्रेनों (08604/08603 एवं 08602/08601) का संचालन किया जाएगा। ये ट्रेनें पिस्का, लोहरदगा, टोरी, लातेहार, बरवाडीह और डालटनगंज होकर गढ़वा रोड तक जाएंगी।   रेलवे ने की समय पर स्टेशन पहुंचने की अपील रांची रेल मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) श्रेया सिंह ने कहा कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की सुविधा रेलवे की प्राथमिकता है। उन्होंने परीक्षार्थियों से समय पर स्टेशन पहुंचने, रेलवे के दिशा-निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित यात्रा करने की अपील की है। रेलवे का मानना है कि इन विशेष ट्रेनों से हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी और उनकी यात्रा अधिक सुगम होगी।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
India First Hydrogen Train
कैसे चलती है भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन? जानिए इसकी तकनीक, रूट और खासियत

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत ने हरित परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है।   कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?   हाइड्रोजन ट्रेन में इंजन की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है। ट्रेन में लगे टैंकों में संग्रहित हाइड्रोजन गैस फ्यूल सेल के भीतर ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती है, जिससे बिजली पैदा होती है। यही बिजली इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) और गर्मी उत्सर्जित होती है।   किस रूट पर चल रही है ट्रेन?   भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर चलाई जा रही है। यह 10-कोच वाली ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है और इसकी परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटा है।   क्या हैं इसकी खासियतें?   यह ट्रेन पूरी तरह 'मेक इन इंडिया' तकनीक पर आधारित है। रेलवे ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का बौद्धिक संपदा अधिकार भी अपने पास रखा है, जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात किया जा सकेगा। ट्रेन के साथ हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया गया है।   रेलवे के ग्रीन मिशन को मिलेगा बढ़ावा   भारतीय रेलवे का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर डीजल इंजनों का स्वच्छ विकल्प बनेगी। यह परियोजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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