Indonesia News

Powerful 7.8 magnitude earthquake strikes Mindanao, triggering tsunami alerts across Pacific coastal regions.
फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कई देशों में सुनामी अलर्ट जारी

  मनीला: फिलीपींस के दक्षिणी मिंडानाओ क्षेत्र में सोमवार को आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। भूकंप के बाद फिलीपींस, इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप की गहराई महज 10 किलोमीटर थी, जिसके कारण इसके झटके काफी तेज महसूस किए गए। शुरुआती आकलन में भूकंप की तीव्रता अलग-अलग दर्ज की गई, लेकिन बाद में इसे संशोधित कर 7.8 बताया गया। सुनामी की आशंका से बढ़ी चिंता भूकंप के तुरंत बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने संभावित समुद्री लहरों को लेकर अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी उथली गहराई पर आए शक्तिशाली भूकंप से समुद्र में बड़ी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं, जो तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (PHIVOLCS) ने चेतावनी दी है कि कुछ तटीय क्षेत्रों में सामान्य ज्वार स्तर से एक मीटर या उससे अधिक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इंडोनेशिया समेत कई देशों में अलर्ट इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने भी अपने उत्तर-पूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की है। इसके अलावा ताइवान, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी और पश्चिमी प्रशांत महासागर के अन्य देशों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। अधिकारियों ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे किसी भी आपातकालीन निर्देश का तुरंत पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तीव्रता के भूकंप के बाद कई दिनों तक आफ्टरशॉक महसूस किए जा सकते हैं। फिलीपींस की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों और दिनों में क्षेत्र में और झटके आ सकते हैं। अभी तक बड़े नुकसान की सूचना नहीं फिलीपींस और इंडोनेशिया में प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कुछ इमारतों में दरारें आई हैं और कई लोग घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। अब तक किसी बड़े स्तर की तबाही या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है क्षेत्र फिलीपींस और इंडोनेशिया दोनों प्रशांत महासागर के उस भूगर्भीय क्षेत्र में स्थित हैं जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर शक्तिशाली भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी भूगर्भीय सक्रियता के कारण इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Massive ash cloud rises after Mount Dukono volcanic eruption in Indonesia killing several hikers
इंडोनेशिया में ज्वालामुखी विस्फोट से बड़ा हादसा, 3 टूरिस्ट की दर्दनाक मौत

इंडोनेशिया में एक खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट ने बड़ा हादसा पैदा कर दिया. Mount Dukono ज्वालामुखी में हुए विस्फोट के दौरान कम से कम तीन हाइकर्स की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को बचाकर नीचे लाया गया. हादसे के बाद आसमान में करीब 10 किलोमीटर ऊंचाई तक राख और धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया. चेतावनी के बावजूद पहुंचे थे हाइकर्स स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, ज्वालामुखी के आसपास के इलाके को पहले ही “नो-गो जोन” घोषित किया गया था. वैज्ञानिकों और प्रशासन ने दिसंबर से लगातार चेतावनी जारी कर रखी थी कि लोग क्रेटर के आसपास न जाएं, क्योंकि वहां भूकंपीय गतिविधियां तेजी से बढ़ रही थीं. इसके बावजूद करीब 20 हाइकर्स का समूह ज्वालामुखी की ढलानों पर पहुंच गया. इनमें 9 पर्यटक सिंगापुर के बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी इंडोनेशियाई नागरिक थे. अचानक फटा ज्वालामुखी रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को अचानक ज्वालामुखी में तेज विस्फोट हुआ और गर्म राख, धुआं तथा गैस का गुबार तेजी से ऊपर उठा. विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि राख लगभग 10 किलोमीटर तक आसमान में फैल गई. हादसे में: 2 सिंगापुर के पर्यटकों और 1 स्थानीय नागरिक की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि कई लोग किसी तरह नीचे उतरने में सफल रहे, लेकिन मृतकों के शव अभी भी पहाड़ी इलाके में फंसे हुए हैं. 15 लोग सुरक्षित बचाए गए Agence France-Presse की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने बताया कि अब तक 15 हाइकर्स को सुरक्षित नीचे लाया जा चुका है. हालांकि कुछ लोगों के बारे में शुरुआती घंटों में जानकारी स्पष्ट नहीं थी. पुलिस ने गाइड और एक पोर्टर को हिरासत में लिया है. उन पर प्रतिबंधित इलाके में लोगों को ले जाने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. सोशल मीडिया कंटेंट के लिए लिया जोखिम? स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया वीडियो और तस्वीरें बनाने के लिए जोखिम भरे इलाकों में पहुंच जाते हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार: “स्थानीय लोग खतरे को समझते हैं और वहां जाने से बचते हैं, लेकिन कई विदेशी पर्यटक सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं.” पहले ही जारी थी चेतावनी Center for Volcanology and Geological Hazard Mitigation ने पहले ही पर्यटकों को मालुपांग वारिरांग क्रेटर से कम से कम 4 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी थी. वैज्ञानिकों ने वहां बढ़ती भूकंपीय गतिविधि और संभावित विस्फोट का खतरा बताया था. “रिंग ऑफ फायर” में स्थित है इंडोनेशिया इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय सक्रिय देशों में शामिल है. यह देश प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं. देश में लगभग 130 सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद हैं और कई इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाती है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Rescue teams at train collision site near Jakarta after deadly crash in Bekasi Timur
जकार्ता के पास भीषण ट्रेन हादसा, 14 लोगों की मौत, 80 से ज्यादा घायल

Jakarta के पास इंडोनेशिया में एक दर्दनाक रेल हादसे में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा बेकासी तिमुर स्टेशन के पास हुआ। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एक कम्यूटर ट्रेन स्टेशन के पास रुकी हुई थी। तभी पीछे से आ रही लंबी दूरी की Argo Bromo Anggrek ट्रेन उससे टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कम्यूटर ट्रेन का पिछला डिब्बा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह डिब्बा महिलाओं के लिए आरक्षित था। राहत और बचाव अभियान पूरा PT Kereta Api Indonesia के अधिकारियों के अनुसार, सभी यात्रियों को मलबे से निकाल लिया गया है। बचाव दल ने पुष्टि की है कि अब किसी अन्य यात्री के फंसे होने की आशंका नहीं है। कितने लोग प्रभावित हुए? 14 लोगों की मौत 84 लोग घायल सभी घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया लंबी दूरी की ट्रेन में सवार सभी 240 यात्री सुरक्षित बताए गए हैं। हादसे की वजह क्या थी? रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन के पास एक टैक्सी रेलवे ट्रैक पर फंस गई थी, जिससे सिग्नलिंग और परिचालन व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि, हादसे के सही कारणों की जांच जारी है। National Transportation Safety Committee और पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं। इंडोनेशिया में रेल हादसे आम इंडोनेशिया के पुराने रेल नेटवर्क में इस तरह की दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। जनवरी 2024 में भी पश्चिम जावा में दो ट्रेनों की टक्कर में कई लोगों की जान गई थी।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
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अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0