आईपीएल 2026 में बुधवार को खेले गए मुकाबले में Virat Kohli ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाई। Royal Challengers Bengaluru की ओर से खेलते हुए विराट ने नाबाद 105 रन की शानदार पारी खेली और टीम को Kolkata Knight Riders के खिलाफ 6 विकेट से यादगार जीत दिलाई। इस जीत के साथ आरसीबी अंक तालिका में शीर्ष पर पहुंच गई। कोहली-पडिक्कल की साझेदारी बनी मैच का टर्निंग प्वाइंट मैच के बाद केकेआर कप्तान Ajinkya Rahane ने हार का दर्द जाहिर करते हुए विराट कोहली की जमकर तारीफ की। रहाणे ने कहा कि विराट और देवदत्त पडिक्कल की साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने कहा कि इस जीत का सबसे बड़ा श्रेय विराट को जाता है, क्योंकि उन्होंने दबाव की स्थिति में शानदार बल्लेबाजी की और टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। ‘विराट जैसे खिलाड़ी गलती की सजा देते हैं’ रहाणे ने माना कि मैच के दौरान विराट कोहली का कैच छोड़ना टीम को भारी पड़ गया। उन्होंने कहा कि नया बल्लेबाज उस विकेट पर आसानी से रन नहीं बना सकता था, लेकिन विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौके का पूरा फायदा उठाना जानते हैं। केकेआर कप्तान ने कहा कि उनकी टीम की फील्डिंग पूरे टूर्नामेंट में अच्छी रही है, लेकिन इस मुकाबले में अहम मौके हाथ से निकल गए। उनके मुताबिक, रन चेज में विराट कोहली सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में से एक हैं और उन्हें दूसरा मौका देना हमेशा महंगा पड़ता है। देवदत्त पडिक्कल की भी हुई तारीफ रहाणे ने Devdutt Padikkal की बल्लेबाजी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पडिक्कल इस सीजन लगातार अच्छी लय में नजर आए हैं और उन्होंने विराट के साथ मिलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कार्तिक त्यागी की मेहनत से खुश दिखे रहाणे हार के बावजूद रहाणे ने युवा तेज गेंदबाज Kartik Tyagi की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कार्तिक लगातार मेहनत कर रहे हैं और उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका साफ माइंडसेट है। रहाणे के अनुसार, गेंदबाजी के दौरान कार्तिक को पूरी तरह पता होता है कि उन्हें क्या करना है, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए सकारात्मक संकेत है।
आईपीएल 2026 में Delhi Capitals की हालत एक झटके में बदलती नजर आई, जब टीम Royal Challengers Bengaluru के खिलाफ महज 75 रन पर सिमट गई। इस करारी हार से टीम का नेट रन रेट भी बुरी तरह प्रभावित हुआ, लेकिन पूर्व भारतीय क्रिकेटर Piyush Chawla ने टीम को घबराने के बजाय संयम बनाए रखने की सलाह दी है। “यह घबराने का समय नहीं है” चावला ने स्पष्ट कहा कि टीम को अभी पैनिक करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, टूर्नामेंट की शुरुआत में दिल्ली कैपिटल्स ने अच्छा प्रदर्शन किया था और कुछ खराब मैचों से पूरी टीम की क्षमता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने कहा कि टीम को एक साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए और नए सिरे से शुरुआत करनी चाहिए। खराब फॉर्म और गिरता प्रदर्शन दिल्ली कैपिटल्स ने सीजन की शुरुआत लगातार दो जीत के साथ की थी, लेकिन इसके बाद अगले छह मैचों में टीम को सिर्फ एक जीत मिली। फील्डिंग में गलतियां, खासकर अहम मौकों पर कैच छोड़ना, टीम के लिए भारी पड़ा। हाल ही में Punjab Kings के खिलाफ मैच में भी आसान कैच छूटने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। ड्रेसिंग रूम का माहौल है अहम चावला का मानना है कि जब चीजें टीम के पक्ष में नहीं होतीं, तो खिलाड़ियों के बीच नकारात्मकता बढ़ने लगती है। ऐसे में ड्रेसिंग रूम का माहौल सकारात्मक बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि टीम को एकजुट रहना होगा और एक-दूसरे पर दोषारोपण करने के बजाय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना होगा। प्लेऑफ की उम्मीद अभी बाकी हालांकि लगातार हार से दिल्ली की स्थिति कमजोर हुई है, लेकिन टीम अभी भी टूर्नामेंट से बाहर नहीं हुई है। चावला ने याद दिलाया कि पिछले सीजन में भी टीम ने अच्छी शुरुआत के बाद लय खो दी थी और प्लेऑफ से चूक गई थी। इस बार इतिहास बदलने के लिए खिलाड़ियों को सकारात्मक सोच के साथ मैदान में उतरना होगा। कप्तानी और लीडरशिप की भूमिका चावला ने खासतौर पर टीम के लीडरशिप ग्रुप पर जोर देते हुए कहा कि कप्तान और सीनियर खिलाड़ियों को आगे आकर टीम को संभालना होगा। उनके मुताबिक, इस समय स्किल से ज्यादा मानसिक मजबूती और सकारात्मक रवैया जरूरी है।
आईपीएल 2026 के मुकाबले में Lucknow Super Giants को Rajasthan Royals के खिलाफ 40 रनों की करारी हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज Jofra Archer की घातक गेंदबाजी ने लखनऊ की बल्लेबाजी को पूरी तरह से झकझोर दिया। 160 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम मात्र 119 रनों पर सिमट गई। हार के बाद कप्तान Rishabh Pant काफी निराश नजर आए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके पास इस हार का कोई ठोस जवाब नहीं है। “जवाब बाहर नहीं, अंदर ढूंढने होंगे” – पंत मैच के बाद पंत ने स्वीकार किया कि टीम पिच को सही तरीके से समझने में असफल रही। उन्होंने कहा कि बल्लेबाजी यूनिट ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया, जिससे टीम को भारी नुकसान हुआ। पंत ने कहा, “मेरे पास इस हार का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। हमें अपने अंदर झांककर सुधार करना होगा। बल्लेबाजों को थोड़ा समय लेकर खेलना चाहिए था।” उन्होंने यह भी माना कि वह खुद अपनी पारी को लंबा नहीं खींच पाए, जो टीम के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। पंत के मुताबिक, पूरी बल्लेबाजी इकाई को जिम्मेदारी लेनी होगी और गलतियों से सीखना होगा। गेंदबाजों की तारीफ, उम्मीदें बरकरार पंत ने टीम के गेंदबाजों के प्रदर्शन, खासकर Mohammed Shami की सराहना की। उन्होंने कहा कि कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं, जिन पर टीम आगे काम कर सकती है। उन्होंने भरोसा जताया कि अभी टूर्नामेंट में काफी मैच बाकी हैं और टीम वापसी कर सकती है। “पहले से अंदाजा था कि गेंद स्विंग करेगी” – रियान पराग वहीं राजस्थान के कप्तान Riyan Parag ने जीत के बाद कहा कि पिच गेंदबाजों के अनुकूल थी और उन्हें पहले से अंदाजा था कि गेंद स्विंग करेगी। उन्होंने Nandre Burger और जोफ्रा आर्चर की शानदार लाइन-लेंथ की जमकर तारीफ की और टीम के सकारात्मक माहौल को जीत का अहम कारण बताया। ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ जडेजा का खास बयान मैच में अहम भूमिका निभाने वाले Ravindra Jadeja ने नाबाद 43 रन बनाकर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब जीता। उन्होंने यह अवॉर्ड अपनी पत्नी रिवाबा जडेजा को समर्पित किया। जडेजा ने कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए आसान नहीं थी और गेंद लगातार सीम और स्विंग कर रही थी। उन्होंने हालात के अनुसार धैर्य से खेलते हुए टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
अहमदाबाद: Kagiso Rabada ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही रणनीति और हालात की समझ से मैच का रुख बदला जा सकता है। Gujarat Titans के इस तेज गेंदबाज ने Kolkata Knight Riders के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। पिच ने बदला गेम प्लान मैच के बाद रबाडा ने खुलासा किया कि टीम ने पिच को ध्यान में रखते हुए खास रणनीति बनाई थी। पावरप्ले में ही उन्होंने और Mohammed Siraj ने 3-3 ओवर डाले, जो आमतौर पर कम ही देखने को मिलता है। रबाडा के मुताबिक, पिच में नमी थी और गेंद थोड़ी दो-तरफा व्यवहार कर रही थी, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट नहीं खेल पाए। इसका फायदा गेंदबाजों को मिला और पावरप्ले में ही KKR 37/3 पर सिमट गई। ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ बना ताकत रबाडा ने कहा कि उनके करियर में हमेशा से ‘एक्स्ट्रा बाउंस’ उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उनका मानना है कि हर गेंदबाज की अपनी खासियत होती है–जहां सिराज लो बाउंस पिच पर खतरनाक साबित होते हैं, वहीं उछाल वाली पिचें रबाडा के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं। इस मैच में भी पिच पर मौजूद अतिरिक्त उछाल ने उन्हें विकेट लेने में मदद की और उन्होंने 3/29 का शानदार प्रदर्शन किया। डेथ ओवर्स में कसी लगाम गुजरात टाइटंस के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में बेहतरीन नियंत्रण दिखाया। जहां KKR का स्कोर 200 के पार जाता दिख रहा था, वहीं आखिरी चार ओवरों में सिर्फ 23 रन देकर उन्हें 180 पर रोक दिया गया। जीत सबसे जरूरी, रनरेट बाद में हालांकि GT को 181 रन का लक्ष्य हासिल करने में 19.4 ओवर लग गए, जिससे नेट रनरेट पर सवाल उठे। लेकिन रबाडा का मानना है कि टीम के लिए सबसे अहम जीत होती है, न कि रनरेट। उन्होंने कहा, “सबसे जरूरी जीत है। नेट रनरेट अपने आप बेहतर हो जाएगा। टूर्नामेंट अभी लंबा है और आगे सुधार का पूरा मौका है।” आगे की रणनीति रबाडा ने भरोसा जताया कि टीम के पास तेज रन बनाने की क्षमता है और सही समय पर टीम अपनी गति भी बढ़ाएगी। उनका कहना है कि बल्लेबाजों को अपनी प्राकृतिक खेल शैली पर भरोसा करना चाहिए।
आईपीएल 2026 में एक ऐसा मुकाबला देखने को मिला जिसने क्रिकेट फैंस को हैरान कर दिया। वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से दुनिया के दिग्गज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को भी चौंका दिया। महज 15 साल के इस युवा खिलाड़ी ने जिस अंदाज में बल्लेबाजी की, उसने मैच का रुख ही बदल दिया। गुवाहाटी में दिखा तूफानी खेल राजस्थान रॉयल्स और मुंबई इंडियंस के बीच खेले गए इस मुकाबले में शुरुआत से ही राजस्थान का दबदबा रहा। बारिश के कारण मैच 11 ओवर का कर दिया गया, लेकिन इस छोटे मुकाबले में भी बड़े रिकॉर्ड बन गए। वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 14 गेंदों में 39 रन ठोक दिए, जिसमें 5 शानदार छक्के शामिल थे। खास बात यह रही कि उन्होंने बुमराह की पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए। जायसवाल के साथ मिलकर मचाया कहर यशस्वी जायसवाल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 32 गेंदों में नाबाद 77 रन बनाए। दोनों की जोड़ी ने मिलकर सिर्फ 5 ओवर में 80 रन जोड़ दिए और टीम को 11 ओवर में 150 रन के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। मुंबई की टीम रही बेबस 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की टीम कभी मैच में वापसी नहीं कर पाई और 9 विकेट खोकर सिर्फ 123 रन ही बना सकी। तीन मैच में वैभव का प्रदर्शन CSK के खिलाफ: 17 गेंद में 52 रन GT के खिलाफ: 18 गेंद में 31 रन MI के खिलाफ: 14 गेंद में 39 रन क्यों खास है ये पारी? इतनी कम उम्र में दुनिया के टॉप गेंदबाज के खिलाफ इस तरह की बल्लेबाजी ने वैभव सूर्यवंशी को रातों-रात स्टार बना दिया है। उनकी निडर बल्लेबाजी ने यह दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद मजबूत है।
गुवाहाटी। IPL के 19वें सीजन में एमएस धोनी के बिना उतरी चेन्नई सुपर किंग्स ने हार से शुरुआत की। टीम को राजस्थान रॉयल्स ने 8 विकेट से हरा दिया। गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में सोमवार को RR ने बॉलिंग चुनी। CSK 19.4 ओवर में 127 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। RR ने 12.1 ओवर में 2 ही विकेट खोकर टारगेट हासिल कर लिया। वैभव की 15 गेंदों पर फिफ्टी वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 गेंद पर फिफ्टी लगा दी, वे 52 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने 4 चौके और 5 छक्के लगाए। बॉलिंग में रवींद्र जडेजा, जोफ्रा आर्चर और नांद्रे बर्गर ने 2-2 विकेट लिए। चेन्नई से जैमी ओवरटन टॉप स्कोरर रहे, उन्होंने 43 रन बनाए। अंशुल कम्बोज को 2 विकेट मिले। धोनी इंजर्ड होकर बाहर CSK के पूर्व कप्तान एमएस धोनी इंजरी के कारण 2 सप्ताह के लिए बाहर हो गए हैं। साउथ अफ्रीका के डेवाल्ड ब्रेविस भी इंजरी के कारण 3 मैच नहीं खेल सकेंगे। ऋतुराज गायकवाड कप्तानी कर रहे हैं, वहीं संजू सैमसन को ओपनिंग पोजिशन मिली। दोनों पहले मुकाबले में 6-6 रन ही बना सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।