कांग्रेस ने इज़राइल और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल के प्रति कथित रूप से एकतरफा समर्थन भारत की पारंपरिक विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और ऐतिहासिक रुख के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन की नीति पर चलता रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा से दूर जाती दिखाई दे रही है। नेतन्याहू के कथित बयान का हवाला देकर कांग्रेस ने उठाए सवाल यह राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयराम रमेश ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक कथित बयान का हवाला दिया। कांग्रेस नेता के अनुसार, नेतन्याहू ने एक सम्मेलन में कहा था कि दुनिया के कई देशों में इज़राइल की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भारत अब भी उसके समर्थन में खड़ा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल के सबसे मजबूत वैश्विक समर्थकों में शामिल नजर आते हैं। कांग्रेस ने लगाया गाजा और ईरान मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व की लक्षित हत्या की कभी सार्वजनिक निंदा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा में जारी इज़राइली सैन्य अभियान, लेबनान पर हमलों और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के कथित विस्थापन जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जयराम रमेश ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। फरवरी 2026 की मुलाकात का भी किया जिक्र कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की फरवरी 2026 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस मुलाकात के कुछ समय बाद इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। कांग्रेस ने सीधे तौर पर इन घटनाओं के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया, लेकिन सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल जरूर उठाए। ‘यह पूरे भारत की राय नहीं’, कांग्रेस ने कहा जयराम रमेश ने कहा कि नेतन्याहू का यह कहना कि भारत इज़राइल के समर्थन में खड़ा है, पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी और उनके राजनीतिक तंत्र का नजरिया हो सकता है, लेकिन देश के करोड़ों लोग फिलिस्तीनी जनता के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पश्चिम एशिया में शांति तथा न्यायपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जनता हमेशा मानवाधिकार, शांति और संतुलित कूटनीति के साथ खड़ी रही है। केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, गाजा की स्थिति, ईरान-इज़राइल तनाव और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार की ओर से अभी नहीं आया जवाब कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Donald Trump ने एक बार फिर अपने बयान से वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने दावा किया कि इजरायल में उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत है और अगर वह चाहें तो वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं। रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “इस समय इजरायल में मेरी लोकप्रियता 99% है। मैं वहां प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ सकता हूं।” “मेरे पास 99% समर्थन है” ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें इजरायल में भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में उन्हें एक सर्वे मिला, जिसमें उनकी लोकप्रियता 99 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “शायद यह काम खत्म करने के बाद मैं इजरायल जाऊं और वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव लड़ूं।” हालांकि ट्रंप ने इस दौरान किसी सर्वे एजेंसी या आधिकारिक पोल का नाम नहीं बताया। ईरान पर हमले को लेकर क्या बोले ट्रंप? ईरान को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल किसी समझौते को मौका देना चाहते हैं और जल्दबाजी में सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा, “हमें स्ट्रेट खोलनी होगी और वह तुरंत खुल जाएगी। हम इसे एक मौका देने जा रहे हैं। मुझे कोई जल्दी नहीं है। मैं कम से कम लोगों की मौत देखना चाहता हूं।” ट्रंप का इशारा Strait of Hormuz की ओर माना जा रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का बेहद अहम समुद्री मार्ग है। नेतन्याहू को बताया “शानदार इंसान” प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने Benjamin Netanyahu की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। वह वही करेंगे जो मैं कहूंगा। वह एक शानदार व्यक्ति हैं। यह मत भूलिए कि वह युद्धकालीन प्रधानमंत्री रहे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू के साथ इजरायल में सही व्यवहार नहीं किया जा रहा है। ईरान को फिर दी चेतावनी इससे पहले ट्रंप ईरान को लेकर भी सख्त चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो “एक और बड़ा हमला” हो सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है। ट्रंप और नेतन्याहू पर इनाम की चर्चा इसी बीच ईरान में ट्रंप और नेतन्याहू को लेकर एक नए विवाद ने भी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष इब्राहिम अजीजी ने एक नए विधेयक का जिक्र किया है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बिल का नाम “इस्लामिक रिपब्लिक की सैन्य और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई” रखा गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस प्रस्ताव में ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वाले व्यक्ति या संगठन को करोड़ों डॉलर का इनाम देने की बात कही गई है। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि और संसदीय प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप के बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।
US–Iran–Israel War Update: इजरायल के लेबनान पर हमले जारी रहने के बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई का अहम बयान सामने आया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे भी नहीं हटेगा। क्या बोले खामेनेई? “हमने युद्ध नहीं चाहा और हम इसे नहीं चाहते…” “लेकिन किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकार नहीं छोड़ेंगे” “इस संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को हम एक ही मानते हैं” उनके इस बयान को सीधे तौर पर लेबनान में इजरायल के हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है। इजरायल का रुख अब भी सख्त इजरायली पीएम पहले ही कह चुके हैं: “लेबनान में कोई सीजफायर लागू नहीं” हिज़्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी होर्मुज स्ट्रेट पर चेतावनी खामेनेई ने बड़ा संकेत देते हुए कहा: ईरान होर्मुज स्ट्रेट को संभालने का तरीका बदल सकता है जनता से अपील: सड़कों पर आकर अपनी आवाज उठाएं इसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। बैकग्राउंड क्या है? 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत के दिन ही अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसके बाद मुज्तबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए, सिर्फ लिखित संदेशों के जरिए संवाद हेल्थ को लेकर भी अटकलें कुछ रिपोर्ट्स में दावा: खामेनेई कोमा जैसी स्थिति में है ईरान के कोम शहर में इलाज जारी हालांकि, सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। Israel ने Lebanon पर ऐसा भीषण हमला किया है, जिसे पिछले 30 वर्षों का सबसे बड़ा सैन्य अभियान बताया जा रहा है। सीजफायर के बीच हमला, हालात बेकाबू Iran और अमेरिका के बीच हुए संघर्षविराम के महज 24 घंटे के भीतर यह हमला हुआ। इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होता और उसका निशाना ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के ठिकाने हैं। 10 मिनट में 100 से ज्यादा हमले रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक हवाई हमले किए। इस ऑपरेशन में करीब 50 फाइटर जेट शामिल थे। राजधानी बेरूत और दक्षिणी लेबनान के कई शहरों में भारी तबाही देखी गई। 250 से ज्यादा मौतें, 1100 घायल हमलों में अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1100 से ज्यादा लोग घायल हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अस्पतालों में अफरातफरी का माहौल है और कई लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। रिहायशी इलाकों पर भारी तबाही सबसे ज्यादा नुकसान घनी आबादी वाले इलाकों में हुआ है। कई ऊंची इमारतें ध्वस्त हो गईं, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। साइदा और बालबेक जैसे शहरों में जनाजों और रिहायशी क्षेत्रों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें हैं। रक्तदान की अपील, राहत कार्य जारी घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लेबनान रेडक्रॉस ने लोगों से रक्तदान की अपील की है। बचाव दल लगातार मलबा हटाकर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की चेतावनी, बढ़ सकता है संकट हमलों के बाद Iran ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने हमले नहीं रोके, तो वह संघर्षविराम से पीछे हट सकता है। इसके साथ ही Strait of Hormuz को फिर से बंद करने की धमकी भी दी गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। नेतन्याहू का बयान इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि यह कार्रवाई देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है और इसमें लेबनान को शामिल नहीं किया गया था। वैश्विक चिंता बढ़ी इस हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट को फिर अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात जल्द नहीं संभले, तो यह संघर्ष क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। ईरान-अमेरिका सीजफायर के बावजूद लेबनान में जारी यह हिंसा दिखाती है कि क्षेत्र में शांति अभी दूर है। लगातार बढ़ती हिंसा और बड़े पैमाने पर जनहानि वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
ईरान-इजरायल तनाव के बीच खतरनाक बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी लेकर खाड़ी में फंसा भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुका है और अब भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत की ओर लौट रहा है। ‘ग्रीन सान्वी’ के बाद ‘ग्रीन आशा’ ने पार किया रास्ता डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अप्रैल को एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित निकलने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया। इसके साथ ही इस खतरनाक क्षेत्र में अब केवल एक भारतीय जहाज ‘जग विक्रम’ बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया है कि ‘जग विक्रम’ भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है, ताकि वह सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र से बाहर निकल सके। 28 फरवरी के बाद बढ़ा खतरा गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बेहद संवेदनशील हो गया था। इस दौरान कई तेल और गैस से भरे जहाज इस इलाके में फंस गए थे। कुछ जहाजों पर हमले भी हुए, जिससे यह मार्ग लगभग बंद हो गया था। हालांकि, अब राजनयिक प्रयासों और सुरक्षा इंतजामों के चलते धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। कब पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’? करीब 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल को गुजरात के भरूच जिले के दहेज बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BW TYR नामक एलपीजी कैरियर फिलहाल मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना माल उतार रहा है। एक अन्य जहाज BW ELM को चेन्नई के एन्नोर पोर्ट की ओर मोड़ा गया है। पहले भी पहुंचे कई जहाज पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ करीब 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के कांडला पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की। अब भी खाड़ी में मौजूद हैं कई भारतीय जहाज शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल: 16 भारतीय जहाज फारसी खाड़ी में 4 जहाज ओमान की खाड़ी में 1 जहाज अदन की खाड़ी में 2 जहाज लाल सागर में मौजूद हैं इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। 20,000 भारतीय नाविकों की मौजूदगी रिपोर्ट के अनुसार, पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 20,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें: 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 433 फारसी खाड़ी में 95 ओमान की खाड़ी में तैनात हैं 5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नौसेना की निगरानी में ऑपरेशन भारतीय नौसेना लगातार इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पार होना भारत के लिए बड़ी राहत है, जबकि अब सभी की नजरें ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरान की नई रणनीति मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव का संकेत दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने घोषणा की है कि अब ईरान किसी भी पड़ोसी देश पर हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी देश की जमीन से ईरान पर हमला किया गया, तो तेहरान जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। “ईरान किसी के सामने सरेंडर नहीं करेगा” अपने संबोधन में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ कहा कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि देश न तो Israel और न ही United States के सामने आत्मसमर्पण करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी जनता और सरकार अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। पड़ोसी देशों से जताया खेद राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने बयान में पड़ोसी देशों को लेकर नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान जिन पड़ोसी देशों को हमलों का सामना करना पड़ा, उसके लिए उन्हें खेद है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान की तरफ से अब ऐसे हमले नहीं किए जाएंगे और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। माफी के साथ रखी अहम शर्त हालांकि इस माफी के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त भी जोड़ी गई है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान ईरान की नई सुरक्षा नीति का संकेत हो सकता है, जिसमें वह सीधे टकराव से बचते हुए अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। खामेनेई की मौत से बढ़ा तनाव हाल के सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक और सैन्य तनाव और बढ़ गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान के भीतर सत्ता संतुलन और आगे की रणनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता इस संकट के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता बढ़ गई है। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां तनाव और बढ़ता है या मार्ग बंद होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। क्षेत्रीय शांति की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा बयान विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह बयान मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
सोशल मीडिया पर धुएं के वीडियो वायरल, सरकार ने दी सफाई मध्य पूर्व में जारी ईरान से जुड़े तनाव के बीच शनिवार को दुबई में कई जगह धमाकों की आवाज़ सुनाई देने की खबर सामने आई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के ऊपर धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया, जिसके बाद अफवाहों का दौर शुरू हो गया। हालांकि दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर किसी प्रकार की घटना नहीं हुई है और स्थिति पूरी तरह सामान्य है। शहर में गिरे मलबे से हुई छोटी घटना, कोई घायल नहीं सरकारी बयान के मुताबिक शहर में एक मामूली घटना उस समय हुई जब किसी हमले के मलबे का हिस्सा गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवाई अड्डे के आसपास तेज धमाके की आवाज सुनाई दी थी, जिसके कुछ देर बाद आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। कई स्थानीय निवासियों ने भी शहर के अलग-अलग हिस्सों में विस्फोट जैसी आवाजें सुनने की बात कही है। हवाई यातायात पर पड़ा असर, उड़ानों में 60 से 90 मिनट की देरी फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, दुबई के हवाई क्षेत्र में उस समय सामान्य से कम विमान दिखाई दिए। वहीं एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर कई उड़ानों के आगमन और प्रस्थान का शेड्यूल जारी रहा, लेकिन औसतन 60 से 90 मिनट की देरी दर्ज की गई। एयरलाइंस की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया कि दुबई के अलावा अबू धाबी के ज़ायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, शारजाह एयरपोर्ट, अक्रोटिरी एयरपोर्ट और फुजैरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी उड़ान संचालन जारी है। इन शहरों से दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद के लिए वापसी उड़ानें भी संचालित की जा रही हैं ताकि भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट सकें। पिछले हफ्ते भी हमले से हुआ था नुकसान बीते शनिवार को भी दुबई एयरपोर्ट के एक हिस्से में हमले के कारण चार कर्मचारियों के घायल होने और एक कॉनकोर्स के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की ओर से किए गए हमलों में पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब जैसे प्रमुख इलाकों को भी निशाना बनाया गया था। वहीं मंगलवार को ड्रोन के मलबे से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास परिसर में आग लगने की घटना भी सामने आई थी। ईरान-इजरायल संघर्ष में बढ़ता तनाव इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान में भी शनिवार सुबह कई विस्फोटों की खबर आई। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने इजरायल को 151 मिलियन डॉलर के नए हथियार सौदे को मंजूरी दे दी है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने कहा है कि देश अपनी रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। ऐसे में मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना फिलहाल कम दिखाई दे रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।