मुठभेड़ के बाद पुलिस का एक्शन, आरोपियों को रांची लाया गया धनबाद: झारखंड में अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गुर्गों को धनबाद से रांची शिफ्ट कर दिया गया है। ये सभी आरोपी रांची एयरपोर्ट स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में शामिल बताए जा रहे हैं। रांची एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम रविवार को धनबाद पहुंची और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दो आरोपियों को अपने साथ रांची ले गई। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भागाबांध में हुई थी पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ जानकारी के मुताबिक, 16 मार्च को धनबाद के भागाबांध इलाके में पुलिस और प्रिंस खान गिरोह के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में तीन अपराधी घायल हो गए थे। घायलों में पलामू के चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर और वासेपुर के लाला टोला निवासी अफजल अमन उर्फ बाबर उर्फ राजा खान शामिल हैं। इनके अलावा विक्की डोम भी इस मुठभेड़ में घायल हुआ था। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही रांची भेजे गए आरोपी मुठभेड़ के बाद सभी घायलों को इलाज के लिए धनबाद के SNMMCH अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज पूरा होने के बाद जैसे ही उन्हें छुट्टी मिली, रांची पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें अपने कब्जे में ले लिया और रांची शिफ्ट कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से रांची में पूछताछ की जाएगी, जिससे मामले के कई अहम खुलासे हो सकते हैं। एक आरोपी पहले ही भेजा जा चुका है जेल इस केस में घायल तीसरे आरोपी विक्की डोम को धनबाद पुलिस पहले ही न्यायिक हिरासत में जेल भेज चुकी है। वहीं बाकी आरोपियों को अब रांची लाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। रेस्टोरेंट में फायरिंग और हत्या का गंभीर आरोप पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों पर रांची एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के एक रेस्टोरेंट में फायरिंग करने और एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद पुलिस ने तेजी दिखाते हुए मुठभेड़ के जरिए इन्हें पकड़ लिया था। अब इस पूरे मामले में पुलिस अन्य फरार अपराधियों की भी तलाश कर रही है। अपराधियों पर सख्ती जारी, पुलिस का अभियान तेज झारखंड पुलिस लगातार संगठित अपराध के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है। इस कार्रवाई को भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
रांची। रांची के हैवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (HEC) के आवासीय परिसर में अवैध कब्जा तेजी से बढ़ रहा है। कब्जाधारियों के सामने HEC प्रबंधन असहाय नजर आ रहा है। कंपनी की आर्थिक तंगी और सुरक्षा की कमी का फायदा उठाकर कब्जाधारियों ने करोड़ों की जमीन पर अवैध निर्माण कर लिया है। हालांकि रांची नगर निगम ने कुछ क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को ध्वस्त करके कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। लेकिन इसके बावजूद, HEC की भूमि पर नए अवैध निर्माणों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। अर्थिक तंगी और सुरक्षा की कमी HEC के पास सुरक्षा कर्मियों की टीम होते हुए भी, संसाधनों की कमी के कारण जमीन की निगरानी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रही है। गाड़ियों के लिए तेल तक नहीं होने की स्थिति में निरीक्षण धीमा है, जिससे कब्जाधारियों को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने का मौका मिल रहा है। नोटिस और चेतावनी HEC ने नगर प्रशासन विभाग के माध्यम से सभी निवासियों को नोटिस जारी कर चेतावनी दी है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण अपराध हैं और इन्हें कभी भी ध्वस्त किया जा सकता है। रोजाना नए कब्जे और कोशिशें HEC परिसर में रोजाना नए अवैध निर्माण हो रहे हैं। पिछले एक साल में कब्जों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। बिरसा चौक, सेक्टर-2, पंचमुखी मंदिर, और अन्य स्थानों पर खाली जमीन पर तेजी से निर्माण हो रहा है। कंपनी ने अवैध निर्माणों की पहचान और रोकथाम के लिए 50 अस्थायी कर्मचारियों को तैनात किया है। लेकिन विभिन्न प्रयासों के बावजूद, निर्माण कार्यों पर प्रभावी रूप से रोक नहीं लगाई जा सकी है।
रांची। राजधानी रांची में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी की खबरों के बीच जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि शहर में गैस की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। गुरुवार देर शाम उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में गैस सिलेंडरों की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गैस कंपनियों के अधिकारियों के साथ पूरे जिले की स्थिति पर चर्चा की गई। प्रशासन ने बताया कि गैस की सप्लाई सामान्य है, लेकिन एक साथ बड़ी संख्या में बुकिंग होने से अस्थायी परेशानी जरूर हुई है। लोगों से अपील की गई है कि वे घबराकर बार-बार गैस बुकिंग न करें। ज्यादा बुकिंग से बढ़ा सिस्टम पर दबाव बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने एक साथ गैस की बुकिंग कर दी, जिससे सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ गया और बुकिंग प्रक्रिया प्रभावित हो गई। Indian Oil Corporation (इंडेन गैस) के अधिकारियों ने बताया कि भारी ट्रैफिक के कारण सर्वर को अपग्रेड किया जा रहा है। यह काम तेजी से चल रहा है और जल्द ही बुकिंग प्रक्रिया पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। हर दिन हजारों सिलेंडरों की हो रही डिलीवरी अधिकारियों के अनुसार रांची में गैस की सप्लाई पहले की तरह जारी है। इंडेन गैस के करीब डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के बीच प्रतिदिन लगभग 10,500 सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। वहीं Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited के करीब 25-25 हजार उपभोक्ताओं को मिलाकर रोजाना 2,000 से अधिक सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है। जरूरत पड़ने पर 5 लीटर का छोटा सिलेंडर बैठक में बताया गया कि आपात स्थिति में उपभोक्ता 5 लीटर का छोटा गैस सिलेंडर भी ले सकते हैं। यह सिलेंडर एचपीसीएल और बीपीसीएल के माध्यम से बाजार में उपलब्ध है। उपभोक्ता आधार कार्ड दिखाकर इसे प्राप्त कर सकते हैं। PNG कनेक्शन लेने का भी विकल्प बैठक में यह भी बताया गया कि रांची में 24 हजार से अधिक घरों में पीएनजी गैस पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध है। Gas Authority of India Limited (GAIL) के अधिकारियों ने बताया कि जिन अपार्टमेंट में पीएनजी पाइपलाइन लगी है, वहां रहने वाले लोग टोल-फ्री नंबर 18001231211 पर कॉल कर नया कनेक्शन ले सकते हैं। कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी डीसी भजंत्री ने कहा कि गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी या अवैध भंडारण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी को ऐसी जानकारी मिलती है तो वह अबुआ साथी हेल्पलाइन (9430328080) पर सूचना दे सकता है। शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी रांची सदर, जिला आपूर्ति पदाधिकारी समेत तेल कंपनियों और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
पश्चिमी सिंहभूम (झारखंड): रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को तार-तार करने वाली एक ह्रदयविदारक घटना हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र से सामने आई है। यहाँ एक चचेरे चाचा ने अपनी ही 15 वर्षीय भतीजी के विश्वास का गला घोंटते हुए उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक का माहौल पैदा कर दिया है। विश्वासघात और वारदात की पूरी कहानी घटना की शुरुआत तब हुई जब वह मासूम किशोरी सहज भाव से अपने चचेरे चाचा के घर गई थी। आरोपी ने पहले से ही मन में दुर्भावना पाल रखी थी। उसने किशोरी का मन बहलाने के लिए उसे मोबाइल पर फिल्में और वीडियो दिखाने का लालच दिया। सुनसान जगह का फायदा: कमरे में कुछ देर तक उसे मोबाइल में उलझाए रखने के बाद, आरोपी उसे बहला-फुसलाकर घर से दूर एक एकांत खलिहान में ले गया। हैवानियत: खलिहान की तन्हाई का फायदा उठाकर आरोपी ने अपनी चचेरी भतीजी के साथ जबरदस्ती की और उसके सम्मान को पैरों तले रौंद दिया। खौफनाक धमकी: दुष्कर्म के बाद जब किशोरी सहम गई, तो आरोपी ने उसे और उसके पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी ताकि वह अपना मुँह न खोले। साहस और न्याय की पुकार इतनी बड़ी त्रासदी और आरोपी की धमकियों के बावजूद, नाबालिग पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने माता-पिता को पूरी सच्चाई बता दी। परिजनों ने बिना देर किए हाटगम्हरिया पुलिस से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेनू ने तुरंत एक विशेष टीम गठित करने का निर्देश दिया। पुलिस की सक्रियता का परिणाम यह रहा कि: छापेमारी: पुलिस ने संभावित ठिकानों पर दबिश दी और आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया। जेल: आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मेडिकल जांच: कानून के प्रावधानों के तहत पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें। बयान: जल्द ही अदालत में पीड़िता का धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया जाएगा।
रांची: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब झारखंड में भी दिखने लगा है। संभावित आपूर्ति संकट और बाजार में फैल रही आशंकाओं के कारण राज्य के कई शहरों में LPG गैस की किल्लत की स्थिति बनती जा रही है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में खासतौर पर 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई फिलहाल सीमित कर दी गई है। कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अस्थायी रोक जानकारी के मुताबिक तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर फिलहाल अघोषित रूप से रोक लगा दी है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन गैस एजेंसियों को मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि अगले आदेश तक कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई सीमित रखी जाए। घरेलू सिलेंडर को दी जा रही प्राथमिकता तेल कंपनियों का कहना है कि घरेलू गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की गई है। इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित न हो। हालांकि अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों के मेस और अन्य जरूरी संस्थानों को कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई जारी रखने की बात कही गई है। लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और शादी-समारोह जैसे आयोजनों पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है। रोजाना हजारों सिलेंडरों की होती है सप्लाई राजधानी रांची में इंडियन ऑयल से जुड़ी गैस एजेंसियों के माध्यम से रोजाना 150 से लेकर 1000 तक कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई होती है। औसतन 500 सिलेंडर प्रतिदिन के हिसाब से केवल एक कंपनी की आपूर्ति लगभग 2.25 लाख सिलेंडरों के रोटेशन पर आधारित होती है। इसके अलावा भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और अन्य तेल कंपनियां भी गैस की आपूर्ति करती हैं। फिलहाल एजेंसियों को घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। पैनिक बुकिंग से अचानक बढ़ी मांग गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार असली समस्या गैस की कमी नहीं, बल्कि पैनिक बुकिंग है। मिडिल ईस्ट में तनाव की खबरों के बाद लोगों ने घबराहट में बड़ी संख्या में सिलेंडर बुक कराना शुरू कर दिया है। पहले जहां रोजाना 350 से 400 घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2300 से 2500 तक पहुंच गई है। इतनी अधिक मांग के कारण गैस एजेंसियों पर भारी दबाव बन गया है। कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में उछाल गैस की कमी की चर्चाओं के बीच रांची में कॉमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर सिलेंडर सरकारी दर से कहीं अधिक कीमत पर बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। डोरंडा स्थित एक रेस्टोरेंट संचालक आदित्य भूषण सिंह के अनुसार पहले कॉमर्शियल सिलेंडर करीब 1800 रुपये में मिल जाता था, लेकिन अब कुछ सप्लायर इसे 2600 रुपये तक में देने की बात कर रहे हैं। प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी रांची में गैस आपूर्ति को लेकर बढ़ रही परेशानी के बीच जिला प्रशासन ने व्यवस्था को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी है। उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर एसडीओ कुमार रजत ने पेट्रोलियम कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ ऑनलाइन बैठक की। बैठक में तय किया गया कि दो गैस बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य होगा। साथ ही बुकिंग के दो से तीन दिनों के भीतर होम डिलिवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा 5 और 2 किलो के छोटे सिलेंडर बिना बुकिंग के उपलब्ध कराने का भी फैसला लिया गया है। अन्य जिलों में भी दिख रही कमी राजधानी के अलावा खूंटी और लोहरदगा जैसे जिलों में भी LPG सिलेंडर की कमी देखने को मिल रही है। खूंटी में गैस की खेप पहुंचते ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग गईं। वहीं लोहरदगा के गैस वितरकों का कहना है कि जमशेदपुर से सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण समस्या पैदा हुई है। शादी के मौसम में बढ़ी परेशानी शादी-विवाह के मौसम में गैस की कमी से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। कई परिवारों को खाना बनाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और गैस वितरण व्यवस्था को सामान्य बनाने के प्रयास जारी हैं। यदि कोई एजेंसी या वितरक कालाबाजारी करते पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल घायलों से मिलने उनके गांव पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी ली। स्थल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, यह घटना रंका प्रखंड के विश्रामपुर क्षेत्र स्थित बरवाही गांव की है। यहां मंडल डैम के विस्थापितों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास योजना के तहत प्रशासनिक टीम स्थल निरीक्षण करने पहुंची थी। निरीक्षण के लिए उपायुक्त दिनेश यादव और पुलिस अधीक्षक अमन कुमार का काफिला गांव में पहुंचा था। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने प्रशासनिक वाहनों के काफिले को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। JMM ने प्रशासन पर लगाया आरोप घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटी ने इस पूरे मामले को प्रशासन की “बर्बर कार्रवाई” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग किया, जिससे कई आदिवासी ग्रामीण घायल हो गए। घायलों से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल घटना की जानकारी मिलने के बाद JMM जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाही गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और पूरी घटना की जानकारी ली। इस टीम में पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रौशन कुमार पाठक, सचिव शरीफ अंसारी, युवा अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष फरीद खान, मनोज तिवारी, सुनील गौत्तम, बीरेंद्र साव और धर्मेंद्र कुमार दुबे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने घटना में घायल महिला मरियम तिर्की से भी मुलाकात की और उनसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। पुनर्वास को लेकर पहले से नाराज हैं ग्रामीण स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
झारखंड के East Singhbhum जिले के Potka प्रखंड में होली के दिन दो अलग-अलग स्थानों पर हत्या की घटनाओं से इलाके में दहशत फैल गई। एक मामले में बुजुर्ग महिला की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी गई, जबकि दूसरे मामले में एक अज्ञात युवती का जला हुआ शव जंगल से बरामद हुआ। जंगल में मिला जला हुआ शव पहली घटना Kowali Police Station क्षेत्र के बानाकाटा जंगल की है। यहां पुलिस को करीब 22–35 वर्ष की एक युवती का आंशिक रूप से जला हुआ शव मिला। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। पुलिस को शक है कि युवती की हत्या करने के बाद सबूत मिटाने के लिए शव को आग के हवाले किया गया। घटनास्थल के पास से शराब की बोतल भी बरामद की गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और युवती की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। बुजुर्ग महिला की गला रेतकर हत्या दूसरी घटना पोटका के कलिकापुर इलाके के हाड़पाघुटू गांव के पास की है, जहां एक बुजुर्ग महिला का शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान 60 से 75 वर्ष के बीच की सुभाषिनी नायक के रूप में हुई है। उनकी गला रेतकर हत्या की गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार सुभाषिनी नायक जंगल से लकड़ी और पत्ते इकट्ठा कर बेचकर अपना जीवन यापन करती थीं। उनका शव गांव के पास एक पगडंडी के किनारे मिला, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस, जांच शुरू घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मामलों में शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल दोनों घटनाओं के पीछे के कारण स्पष्ट नहीं हैं और हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि दोनों घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं। इलाके में दहशत का माहौल एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर हत्या की वारदात सामने आने से पूरे पोटका इलाके में डर और तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस आसपास के इलाकों में पूछताछ कर रही है और संदिग्ध लोगों की तलाश की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।