गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना अहिल्यापुर थाना क्षेत्र के चिकसोरिया गांव की है, जहां पुलिस की छापेमारी के दौरान ग्रामीणों और आरोपित के परिजनों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। इस हमले में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। गुप्त सूचना पर पहुंची थी साइबर पुलिस जानकारी के अनुसार, चामलिटी गांव निवासी साइबर अपराधी चुरामण मंडल अपने ससुराल चिकसोरिया गांव में छिपकर रह रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद गिरिडीह साइबर थाना की टीम उसे गिरफ्तार करने के लिए गांव पहुंची थी। पुलिस ने जैसे ही कार्रवाई शुरू की, चुरामण मंडल को इसकी भनक लग गई। भीड़ ने किया विरोध, आरोपी भाग निकला पुलिस के पहुंचते ही आरोपी और उसके सहयोगियों ने ग्रामीणों को इकट्ठा कर विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन का शीशा टूट गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी मौके का फायदा उठाकर चुरामण मंडल अपने साथियों के साथ फरार हो गया। कई लोगों पर दर्ज हुआ मामला अहिल्यापुर थाना प्रभारी ऐनुल हक खान ने बताया कि साइबर अपराधी की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही थी, लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस कार्रवाई में बाधा डालते हुए हमला कर दिया। इस मामले में 5 से 7 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर हमला करने और अपराधी को भगाने में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फरार साइबर अपराधी चुरामण मंडल और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए जिलेभर में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही तीन मासूम बेटियों की बेरहमी से धारदार हथियार से हत्या कर दी। घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के तुरुकडीहा गांव की है, जहां सोमवार सुबह इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पूरे इलाके में सनसनी जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता नंदू यादव ने धारदार हथियार से अपनी तीनों बेटियों पर हमला कर दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जुट गए। हत्या के कारणों का खुलासा बाकी मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ जीतबाहन उरांव और मुफ्फसिल थाना प्रभारी श्याम किशोर महतो पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता नंदू यादव को गिरफ्तार कर लिया है। एसडीपीओ जीतबाहन उरांव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हत्या के पीछे के कारणों का अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है
साहिबगंज। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजमहल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजमहल थाना क्षेत्र के फुलवरिया पटाल बगीचा इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने 13.7 ग्राम एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स बरामद किया है। इस कार्रवाई में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक को क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम गठित की गई और योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया गया। पुलिस को देखकर भागा आरोपी, तलाशी में मिला ड्रग्स छापेमारी के दौरान पुलिस टीम जब फुलवरिया पटाल बगीचा पहुंची, तो एक युवक संदिग्ध गतिविधि करते हुए भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 13.7 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया। पूछताछ में उसकी पहचान मुर्गीटोला निवासी 29 वर्षीय फकरुद्दीन शेख उर्फ मिंटु के रूप में हुई। पूछताछ के दौरान फकरुद्दीन ने इस कारोबार में फुलवरिया निवासी सलमान शेख की संलिप्तता की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सलमान शेख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों से ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क और अन्य जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 27 के तहत मामला दर्ज किया है। एसडीपीओ ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद एमडीएमए कहां से लाई गई थी और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को रांची से चाईबासा जेल शिफ्ट किया जायेगा। कई गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी और फिलहाल रांची की होटवार (बिरसा मुंडा) केंद्रीय कारागार में बंद रिया सिन्हा को अब चाईबासा जेल में शिफ्ट किये जाने का आदेश जारी हो गया है। सुरक्षा व्यवस्था और जेल के भीतर से आपराधिक गतिविधियों के संचालन की आशंकाओं को देखते हुए जेल प्रशासन ने यह बड़ा फैसला लिया है। जेल आईजी के आदेश के बाद कार्रवाई सुजीत सिन्हा गिरोह की कमान संभालने और रंगदारी व लेवी वसूलने के आरोपों में घिरी रिया सिन्हा को रांची जेल से हटाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक जेल आईजी के आदेश के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए रिया सिन्हा को चाईबासा मंडल कारा भेजने का निर्णय लिया गया है। जेल से नेटवर्क ऑपरेट करने की आशंका जेल प्रशासन की कोशिश है कि राजधानी रांची की जेल में रहकर रिया सिन्हा अपने नेटवर्क को संचालित न कर सके। रिया सिन्हा पर अपने पति सुजीत सिन्हा के इशारे पर जेल के बाहर गिरोह को ऑपरेट करने, कोयला कारोबारियों और ठेकेदारों से रंगदारी (लेवी) वसूलने के गंभीर आरोप हैं। रंगदारी और लेवी वसूली के गंभीर आरोप पुलिस जांच में यह बात सामने आई थी कि सुजीत सिन्हा जेल से ही प्रिंस खान गिरोह और अन्य अपराधियों के साथ मिलकर रंगदारी का नेटवर्क चला रहा था और रिया सिन्हा जेल के बाहर से उसकी मदद कर रही थी। इसके बाद रांची पुलिस ने रिया सिन्हा को गिरफ्तार किया था। हाई सिक्योरिटी निगरानी में रहेगी रिया सिन्हा गैंगस्टर सुजीत सिन्हा खुद राज्य की बेहद सुरक्षित मानी जाने वाली दुमका या अन्य हाई-सिक्योरिटी जेलों में शिफ्ट किया जाता रहा है। अब उसकी पत्नी रिया सिन्हा पर भी प्रशासन की पैनी नजर है। रिया सिन्हा को चाईबासा जेल शिफ्ट करने से उसके स्थानीय नेटवर्क और गुर्गों से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। चाईबासा जेल शिफ्ट होने के बाद रिया सिन्हा पर चौबीसों घंटे सीसीटीवी (CCTV) और महिला कक्षपालों के जरिए कड़ी नजर रखी जाएगीताकि वह किसी भी बाहरी व्यक्ति या मोबाइल फोन के संपर्क में न आ सके।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मधुबन थाना क्षेत्र के दलान चलकरी गांव में मंगलवार देर रात घर में सो रहे एक दंपती पर अज्ञात हमलावरों ने हमला कर दिया। इस हमले में पति की मौके पर मौत हो गई, जबकि उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई। घायल महिला का इलाज धनबाद के एक अस्पताल में चल रहा है। रात में घर में घुसे हमलावर जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान 45 वर्षीय पतिया हांसदा के रूप में हुई है। घटना मंगलवार रात करीब 12:30 बजे की बताई जा रही है। उस समय पतिया हांसदा और उनकी पत्नी परनी मरांडी अपने घर में सो रहे थे। इसी दौरान अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। चीख-पुकार सुनकर पहुंचे ग्रामीण मृतक के रिश्तेदारों ने बताया कि रात में घर से रोने और चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्होंने देखा कि पतिया हांसदा और उनकी पत्नी खून से लथपथ पड़े हुए थे, जबकि घर में मौजूद बच्चे रो रहे थे। इसके बाद तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। अस्पताल में पति को मृत घोषित किया गया सूचना मिलते ही डुमरी एसडीपीओ आबिद खान और मधुबन थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। दोनों घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने पतिया हांसदा को मृत घोषित कर दिया। वहीं उनकी पत्नी की गंभीर हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर किया गया। हत्या के कारणों की जांच में जुटी पुलिस पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। मृतक के परिजनों का कहना है कि पतिया हांसदा मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे और उनकी किसी से दुश्मनी की जानकारी नहीं है। डुमरी एसडीपीओ आबिद खान ने बताया कि हत्या के पीछे के कारणों और हमलावरों की पहचान का पता लगाया जा रहा है। पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और जल्द ही मामले का खुलासा करने का दावा कर रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और शोक का माहौल है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में सामने आए ऑनर किलिंग के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में 26 मई को हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। आरोप है कि पिता ने अपनी ही बेटी की टांगी से हमला कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया है। आपत्तिजनक फोटो बना हत्या की वजह पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पिता को अपनी बेटी की एक कथित आपत्तिजनक तस्वीर मिली थी। तस्वीर देखने के बाद वह गुस्से में आ गया और आवेश में आकर बेटी पर टांगी से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच में सामने आई नई कहानी मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलीं। जांच में पता चला कि युवती का प्रेमी उससे रिश्ता खत्म करना चाहता था। आरोप है कि इसी उद्देश्य से उसने युवती को जंगल में बुलाया और एक अन्य व्यक्ति के साथ उसकी तस्वीर खिंचवाई। पुलिस के अनुसार, बाद में यह तस्वीर युवती के माता-पिता को भेजी गई। तस्वीर देखने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और अंततः यह घटना घटित हुई। पुलिस ने इस मामले में युवती के प्रेमी और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। प्रेमी पर उकसाने का आरोप लेस्लीगंज थाना प्रभारी उत्तम कुमार राय ने बताया कि जांच में प्रेमी की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उस पर युवती के पिता को जानबूझकर उकसाने और युवती के खिलाफ दुष्प्रचार करने का आरोप है। इसी आधार पर उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। पुलिस कर रही है विस्तृत जांच पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या यह पूरी साजिश पूर्व नियोजित थी। फिलहाल मुख्य आरोपी पिता न्यायिक हिरासत में है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर समाज में सम्मान के नाम पर होने वाले अपराधों और पारिवारिक हिंसा की गंभीर समस्या को उजागर करती है।
पलामू। जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र के चिल्हो खुर्द गांव में पारा शिक्षक उदय सिंह की हत्या के बाद लोगों का आक्रोश शनिवार को खुलकर सामने आया। सैकड़ों ग्रामीणों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने छतरपुर थाना पहुंचकर घेराव किया और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने भारत माता चौक को करीब तीन घंटे तक जाम कर दिया, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। गिरफ्तारी और मुआवजे की मांग प्रदर्शनकारियों ने हत्या में शामिल सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक सभी दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिकारियों ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी गणेश महतो, अंचल अधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी आशीष कुमार साहू और पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि काफी देर तक लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। एक आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी पुलिस अंचल निरीक्षक द्वारिका राम ने बताया कि मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है ताकि किसी भी दोषी को कानून से बचने का मौका न मिले। परिजनों ने जताई साजिश की आशंका मृतक के बेटे बिपिन सिंह ने आरोप लगाया कि हत्या में कई लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल एक गिरफ्तारी हुई है। वहीं, पत्नी तेतरी देवी ने इसे सुनियोजित साजिश बताते हुए सभी दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की। इलाके में तनाव बरकरार घटना के बाद चिल्हो खुर्द और आसपास के क्षेत्रों में तनाव का माहौल है। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गुमला। गुमला जिले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव आखिरकार मुख्यधारा में लौट आया है। हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी जैसे गंभीर मामलों में वांछित रामदेव उरांव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। दो दर्जन से अधिक मामलों में था आरोपी जानकारी के अनुसार, रामदेव उरांव के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या, रंगदारी वसूलने, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। वर्ष 2002 के आसपास से वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और गुमला सहित आसपास के कई क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था। उसके नाम से लोगों में भय का माहौल बना रहता था। पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने सरेंडर करने का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर नजर रखने में जुटी हुई थी। इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रामदेव उरांव से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल करने की तैयारी में हैं। लोगों ने ली राहत की सांस रामदेव उरांव के सरेंडर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का खौफ बना हुआ था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उसके आत्मसमर्पण के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था और मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल बेहतर बनेगा।
सिमडेगा। झारखंड के सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में मंईयां सम्मान योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डोर-टू-डोर सत्यापन अभियान के दौरान यह सामने आया कि एक पुरुष ने महिलाओं के नाम पर योजना की राशि अवैध रूप से प्राप्त की। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी ने एक साल तक उठाई सरकारी राशि जांच में पता चला कि टिनगीना निवासी पंकज नाग ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ लिया। उसने जून 2025 से मार्च 2026 तक लगातार अपने खाते में हर महीने 2500 रुपये प्राप्त किए। इस तरह उसने करीब एक वर्ष में कुल 30,000 रुपये की सरकारी राशि हड़प ली। यह पूरी राशि मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं के नाम पर दी जानी थी। सीएससी आईडी का दुरुपयोग, प्रज्ञा केंद्र संचालक भी आरोपी जलडेगा बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, आरोपी ने प्रज्ञा केंद्र संचालक कुमार चाणक्य की सीएससी आईडी का उपयोग कर फर्जी आवेदन किया था। इसी आधार पर योजना का लाभ लिया गया। मामले में दोनों को नामजद आरोपी बनाया गया है। प्रशासन ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जलडेगा थाना में कांड संख्या 33/26 के तहत मामला दर्ज कराया है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई और जांच जारी प्रशासन ने आरोपी से 30,000 रुपये की रिकवरी कर राशि नजारत में जमा करा दी है। साथ ही संबंधित बैंक खाते को भी होल्ड कर दिया गया है। इसके अलावा तत्कालीन पंचायत सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के चिनिया थाना क्षेत्र में जंगल से नर कंकाल मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। यह मामला मसरा गांव के लामी घुटरा जंगल का है, जहां ग्रामीणों ने क्षत-विक्षत हालत में मानव कंकाल देखा। घटनास्थल से मोबाइल के टूटे टुकड़े, कपड़े और बेल्ट भी बरामद किए गए हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और अवशेषों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि मसरा गांव निवासी जय मंगल सिंह पिछले 15 दिनों से लापता था। परिजनों के अनुसार, 13 मई की रात गांव के ही सुदामा सिंह के साथ उसका विवाद हुआ था, जिसके बाद से वह अचानक गायब हो गया। मृतक के पिता सुकन सिंह ने बताया कि उन्हें लगा था कि बेटा काम के सिलसिले में कहीं बाहर चला गया होगा, इसलिए थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। केंदू पत्ता तोड़ने गए ग्रामीणों ने दी सूचना बुधवार सुबह कुछ ग्रामीण केंदू पत्ता तोड़ने जंगल पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर जंगल में पड़े नर कंकाल पर पड़ी। यह खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर चिनिया थाना प्रभारी Biku Kumar Rajak पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से मिले सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। परिजनों ने कपड़ों और अन्य सामान के आधार पर शव की पहचान जय मंगल सिंह के रूप में की है। मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए सुदामा सिंह को हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। घटना के बाद पूरे इलाके में भय और चर्चा का माहौल बना हुआ है।
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले में पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राहुल दुबे गैंग से जुड़े छह अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक किशोर को भी निरुद्ध किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल बरामद किए हैं। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत के निर्देश पर पतरातु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में गठित विशेष छापेमारी दल ने की। पुलिस के अनुसार अपराधी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी पुलिस को 25 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि पतरातु थाना क्षेत्र में कुछ अपराधी संगठित होकर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक देशी लोडेड पिस्टल, 34 जिंदा राउंड, दो मैगजीन, तीन मोटरसाइकिल और छह मोबाइल फोन बरामद किए। कई गोलीबारी मामलों में शामिल होने की बात कबूली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अपराधियों ने पूछताछ में रेलवे फ्लाईओवर, ओसम डेयरी प्लांट और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट में हुई गोलीबारी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास साव, विशाल कुमार, बिंदु कुमार रवि, हीरालाल कुमार, दिगंबर प्रजापति उर्फ डेगन और एहतेसाम अंसारी उर्फ दुलर्भ के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि विकास साव और दिगंबर प्रजापति के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाएंगे आरोपी इस मामले में पतरातु थाना कांड संख्या 126/26 के तहत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। कार्रवाई में एसडीपीओ पतरातु राघवेंद्र शर्मा समेत कई थाना प्रभारी और तकनीकी शाखा के पुलिसकर्मी शामिल थे।
रांची। रांची के टाटीसिलवे थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। 21 वर्षीय युवती ने एक डॉक्टर पर दांत के इलाज के दौरान अश्लील हरकत और छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इलाज के दौरान डॉक्टर ने की अश्लील हरकत जानकारी के अनुसार यह घटना टाटीसिलवे बैंक मोड़ स्थित एक क्लिनिक की बताई जा रही है। अनगड़ा क्षेत्र की रहने वाली युवती इलाज के लिए डॉक्टर के पास पहुंची थी। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान डॉक्टर ने मर्यादा की सीमाएं पार करते हुए उसके साथ गलत व्यवहार किया और आपत्तिजनक सवाल पूछे। जोर-जोर से चिल्लाने लगी पीड़िता के अनुसार उसने डॉक्टर की हरकतों का विरोध किया, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर वह घबरा गई और जोर-जोर से चिल्लाने लगी। शोर सुनकर डॉक्टर ने उसे छोड़ दिया। इसके बाद युवती किसी तरह क्लिनिक से बाहर निकली और घर पहुंचकर परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। फिर युवती अपने परिवार के साथ टाटीसिलवे थाना पहुंची और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है। पुलिस जुटी मामले की जांच मे टाटीसिलवे थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
खूंटी। खूंटी में सरकारी ट्रेजरी से जुड़े कथित गबन मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए एक लेखपाल और शुभम कुमार नामक व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि सरकारी खजाने से करीब 22.69 लाख रुपये अवैध रूप से निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। त्रिस्तरीय जांच में सामने आई गड़बड़ी मामले का खुलासा जिला प्रशासन द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद हुआ। जांच टीम में मजिस्ट्रेट विपिन चंद्र विश्वास, ट्रेजरी ऑफिसर शिव कुमार सिंह और अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया था। जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी राशि को नियमों की अनदेखी कर शुभम कुमार के खाते में भेजा गया। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। उपायुक्त के निर्देश पर दर्ज हुई FIR जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देश पर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस ने तेज की जांच ऋषभ गर्ग ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। बैंक खातों, ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। ट्रेजरी सिस्टम पर उठे सवाल इस घटना के सामने आने के बाद सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। सरकारी खजाने की राशि निजी खाते में पहुंचने से ट्रेजरी सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम अब पूरे नेटवर्क और संभावित साजिश की जांच में जुटी हुई है।
धनबाद। वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान के सबसे बड़े राजदार मेजर उर्फ सैफी की गिरफ्तारी के बाद अब धनबाद पुलिस के रडार पर प्रिंस खान का भाई गोपी है। पुलिस ने प्रिंस खान के पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने की तैयारी कर लीहै। पूछताछ में सैफी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि प्रिंस खान अब दुबई छोड़कर पाकिस्तान में आतंकियों की पनाह में पहुंच चुका है। अब उसका भाई गोपी खान दुबई से ही बैठकर इस पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा है। प्रिंस का साला रितिक और आदिल भी इस समय दुबई में ही मौजूद हैं। प्रिंस खान के परिवार और करीबियों पर शिकंजा इस नए इनपुट के बाद पुलिस अब प्रिंस खान के परिवार और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने जा रही है। सैफी ने कबूला है कि रंगदारी से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम को प्रिंस ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया है। इस खुलासे के बाद गैंग को आर्थिक रूप से मदद करने वाले तमाम रिश्तेदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। माता-पिता के बयानों पर पुलिस को शक मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बीते दिनों प्रिंस के माता-पिता से करीब 5 घंटे तक कड़ी पूछताछ की थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया है कि उनका अपने बेटों से कोई संबंध नहीं है, लेकिन पुलिस को उनके इस बयान पर भरोसा नहीं है। पुलिस कमिश्नर और संबंधित एजेंसियां सैफी से मिले इनपुट्स के आधार पर शहर में सक्रिय गैंग के स्लीपर सेल और अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी और कड़ियों का सत्यापन कर रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों की मदद लेगी धनबाद पुलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रिंस खान के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों (जैसे एनआईए या सीबीआई) की मदद ली जा रही है। पुलिस का मानना है कि दुबई में बैठा गोपी खान नेटवर्क को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। गोपी के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और धमकी देने के 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। गोपी के खिलाफ सख्त इंटरनेशनल एक्शन के लिए धनबाद पुलिस जल्द ही पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजेगी। बंटी और गॉडविन पर पुलिस की नजर हाल के दिनों में कई नए मुकदमों में नामजद होने के बावजूद प्रिंस का भाई बंटी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। पुलिस को अंदेशा है कि वह भी अपने भाइयों की तरह देश छोड़कर भागने की फिराक में हो सकता है, लिहाजा उस पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। वहीं, चाईबासा जेल में बंद गॉडविन पर भी कड़ी नजर है, क्योंकि पुलिस को शक है कि वह जेल के भीतर से ही नए अपराधियों को प्रिंस के गैंग में शामिल करने का खेल रच रहा है। जेल प्रशासन से गॉडविन से मिलने आने वाले हर शख्स का ब्योरा मांगा गया है। व्यवसायी ने खुद को गैंग से अलग बताया इधर, वासेपुर-भूली रोड के रहने वाले कबाड़ गोदाम संचालक सैयद मोहम्मद आरिफ खान उर्फ गोल्डन ने सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से खुद पर लग रहे आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे प्रिंस के गुर्गे नहीं हैं, बल्कि एक साधारण व्यवसायी हैं, जो कड़ी मेहनत से परिवार चलाते हैं। उनका इस आपराधिक सिंडिकेट से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।
रांची। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा और हजारीबाग समेत कई इलाकों के करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, जबकि आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने खलारी थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे और भतीजे को BCCL में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए भरोसा जीत लिया और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक दिखाए। मेडिकल जांच और ट्रेनिंग का नाटक पीड़ितों के अनुसार, युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और फिर मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और कथित ट्रेनिंग प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। अभ्यर्थियों को पोस्टिंग लिस्ट दिखाकर विश्वास दिलाया गया कि उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है, लेकिन बाद में किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला। नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चला गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह चलाया। लोगों को पहले नौकरी का लालच दिया गया और फिर उनसे नए उम्मीदवार जोड़ने को कहा गया। इसी तरह रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे जुटाकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए। बंगाल और धनबाद से जुड़े तार मामले में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी सागर चक्रवर्ती और धनबाद के सिजुआ निवासी मुस्तकीम अंसारी के नाम सामने आए हैं। दोनों खुद को राजनीतिक प्रभाव वाला व्यक्ति बताते थे। पुलिस के अनुसार, कई आरोपियों के मोबाइल बंद हैं और उनकी तलाश जारी है। खलारी थाना पुलिस ने कहा है कि पैसों के लेनदेन का सत्यापन किया जा रहा है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रामगढ़। रामगढ़ के सिरका बुध बाजार क्षेत्र में कथित देह व्यापार के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में पांच महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। घटना के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों के विरोध के बाद हुई कार्रवाई जानकारी के अनुसार गुरुवार देर शाम स्थानीय ग्रामीणों को क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कुछ लोगों को पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस सभी को थाना ले गई और पूछताछ शुरू की। मामले में थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नवीन प्रकाश पांडेय के स्वलिखित बयान पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। मोबाइल जांच में मिले कथित साक्ष्य पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें कथित तौर पर देह व्यापार से जुड़े कुछ साक्ष्य मिले हैं। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है। परिजनों ने कार्रवाई पर उठाए सवाल इधर गिरफ्तार रवि कुमार और विनोद कुमार के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का दावा है कि दोनों मजदूरी का काम करते हैं और ट्रैक्टर से ईंट गिराने के लिए इलाके में गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने भीड़ के दबाव में बिना पर्याप्त जांच के दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और आरोपियों की भूमिका स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल इलाके में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है।
रांची। रांची में मॉनिटर लिजर्ड (विषखोपड़ा) के अंगों की तस्करी के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने गुरुवार को शहर के मेन रोड स्थित एक होटल में छापेमारी के दौरान की। पुलिस ने होटल के कमरे से मॉनिटर लिजर्ड के 30 गुप्त अंग बरामद किए हैं, जिन्हें अवैध रूप से बेचने की तैयारी की जा रही थी। होटल नटराज में हुई छापेमारी वन विभाग के अनुसार, WCCB को गुप्त सूचना मिली थी कि डेली मार्केट क्षेत्र के होटल नटराज में कुछ लोग “हत्था जोड़ी” नाम से मॉनिटर लिजर्ड के अंगों की तस्करी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर गठित टीम होटल पहुंची और कमरा नंबर 203 की तलाशी ली। जांच के दौरान कमरे में रखे एक काले प्लास्टिक बैग से मॉनिटर लिजर्ड के अंग बरामद हुए। मौके पर मौजूद तीन लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने बरामद सामान के बारे में जानकारी होने से इनकार किया। बाद में होटल प्रबंधन ने बताया कि कमरा 203 और 206 पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर निवासी विष्णु कुमार गुप्ता के नाम से बुक किए गए थे। इसके बाद तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर वन विभाग कार्यालय ले जाया गया। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई वन विभाग ने बताया कि आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधित 2022) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मॉनिटर लिजर्ड अनुसूची-1 के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति है और इसके शिकार, संग्रहण तथा व्यापार को गंभीर अपराध माना जाता है। अंधविश्वास से जुड़ा है अवैध कारोबार मॉनिटर लिजर्ड के अंगों की तस्करी मुख्य रूप से अंधविश्वास के कारण की जाती है। इसके अंगों को “हत्था जोड़ी” बताकर तांत्रिक क्रियाओं और कथित औषधीय उपयोग के नाम पर बेचा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस अवैध व्यापार के कारण वन्यजीवों की संख्या पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
रामगढ़। रामगढ़ के चर्चित रजरप्पा ज्वेलरी लूटकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने मुख्य आरोपी सुभानी अंसारी उर्फ ललका की पत्नी और दामाद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दोनों की निशानदेही पर लूटे गए सोना-चांदी के आभूषण भी बरामद किए हैं। इस मामले में अब तक कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दिनदहाड़े हुई थी करोड़ों की लूट गौरतलब है कि 21 अप्रैल 2026 को Shiv Shankar Jewellers में हथियारबंद अपराधियों ने दिनदहाड़े धावा बोलकर करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण लूट लिए थे। घटना रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर-रजरप्पा मोड़ पर हुई थी। लूट के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। घटना के बाद Mukesh Kumar Lunayat के निर्देश पर SIT का गठन किया गया था। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 180 आभूषण, एक पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस, तीन बाइक और एक चारपहिया वाहन बरामद किया था। गुप्त सूचना पर हुई गिरफ्तारी पुलिस को 10 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि मुख्य आरोपी के घर में लूट का सामान छिपाकर रखा गया है। इसके बाद छापेमारी कर बरकट्ठी निवासी नाजमा खातून और उसके दामाद शहनवाज हुसैन को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके घर से करीब 49 ग्राम सोना और 1.35 किलोग्राम चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज रामगढ़ एसपी ने बताया कि मामले की जांच और छापेमारी लगातार जारी है। इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का मास्टरमाइंड माने जा रहे कुख्यात अंतरराज्यीय अपराधी Vibhash Paswan की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर बाकी लूटे गए आभूषण भी बरामद कर लिए जाएंगे।
बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है। गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
खूंटी। झारखंड के खूंटी की आदिवासी युवती को 17 साल तक दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया। युवती से घरेलू मजदूरी कराई गयी। साथ ही उसका यौन शोषण भी किया गया। इस दौरान उसका गर्भपात कराये जाने की बात भी सामने आई है। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। काम दिलाने के बहाने दिल्ली ले जाई गई थी युवती ने बताया कि साल 2009 में जेटा मुंडा नामक व्यक्ति उसे काम दिलाने के बहाने दिल्ली लाया था। उस समय वह 14 साल की थी। उसे कोहाट एन्क्लेव स्थित मधु अग्रवाल के घर पर घरेलू काम के लिए सौंप दिया गया। युवती का आरोप है कि उस दौरान उसे अपने परिवार से बात तक नहीं करने दिया गया और उसके पिता की मौत की खबर भी उससे छिपाई गई। मालिक की बहू बेटी ने युवती का गर्भपात कराया दिल्ली पुलिस से की गई शिकायत के मुताबिक घर में काम करने वाले एक व्यक्ति ने डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब वह गर्भवती हुई तो मकान मालिक की बहू और बेटी ने उसका गर्भपात करवा दिया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि हाल ही में छत पर नहाते समय एक अन्य युवक ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया। जिसे मालिक ने CCTV में देख लिया था, लेकिन कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। नवंबर 2025 में जब पीड़िता का भाई उसे लेने आया तो उसे 10,000 रुपये देकर वापस भेज दिया गया। खूंटी पुलिस कर रही जांच अब 9 अप्रैल 2026 को जब परिजन दोबारा आए तो मालिक ने 17 साल की मजदूरी के बदले मात्र 1.40 लाख रुपये का डीडी और 15,000 रुपये नकद देकर मामला खत्म करने का दबाव बनाया। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है। दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना में मामला दर्ज होने की सूचना मिलते ही खूंटी पुलिस सक्रिय हो गई है। महिला थाना सह एएचटीयू थाना प्रभारी फुलमनी टोप्पो ने बताया कि दिल्ली में दर्ज शिकायत के आधार पर खूंटी पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि यह पुराना मामला है और खूंटी जिले में कभी शिकायत दर्ज नही कराया गया था।
धनबाद। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में हुई भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हाई-प्रोफाइल हत्या के तार अब धनबाद से जुड़ रहे हैं। इस मामले की जांच अब झारखंड के धनबाद तक पहुंच गई है। बीते 6 मई की रात अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चंद्रनाथ की जान ले ली थी। इस सनसनीखेज मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस उस वक्त हैरान रह गई जब मौके से बरामद बाइक का नंबर एक सेलकर्मी के नाम पर दर्ज मिला। पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम तुरंत धनबाद के चासनाला पहुंची और संबंधित व्यक्ति से घंटों पूछताछ की। लेकिन, गहन छानबीन और सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद ये साफ हो गया कि सेलकर्मी का इस हत्याकांड से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि शूटरों ने फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। फर्जी नंबर प्लेट का खुलासा विभाष भट्टाचार्य ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर पर ही खड़ी है। जब पुलिस ने मौके पर जाकर जांच की, तो पाया कि अपराधियों की बाइक और विभाष की बाइक के मॉडल और रंग में जमीन-आसमान का अंतर था। विभाष के कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज ने यकीन दिलाया कि वारदात के समय वे ड्यूटी पर थे। अपराधियों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए विभाष की बाइक के नंबर का क्लोन तैयार किया था। चंद्रनाथ रथ की कार को घेरकर बाइक और कार सवार अपराधियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। इस हमले में चंद्रनाथ रथ की मौत हो गई, जबकि उनका चालक गंभीर रूप से घायल हुआ। राज्य सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए सात सदस्यीय SIT का गठन किया है। असली अपराधियों की तलाश जारी विभाष भट्टाचार्य को निर्दोष पाए जाने पर पुलिस ने छोड़ दिया है। अब जांच का पूरा ध्यान उन शूटरों पर है जिन्होंने इतनी चालाकी से फर्जी नंबर प्लेट का उपयोग किया। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराधियों को विभाष की बाइक का नंबर कैसे मिला और इस बड़ी साजिश के पीछे मुख्य मास्टरमाइंड कौन है। दरअसल, धनबाद में SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) का मुख्य कार्यालय चासनाला में स्थित हैं, जो कोलियरीज प्रभाग (Collieries Division) के अंतर्गत आते हैं। इसी ऑफिस में विभाष की पोस्टिंग है। विभाष ने पुलिस को बताया कि उनकी बाइक घर में ही खड़ी है। जब पुलिस ने विभाष के घर जाकर बाइक की जांच की और उनके कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि विभाष घटना के वक्त अपने कार्यालय में ड्यूटी पर थे। कोलकाता में किसने चलाई गोलियां ? चंद्रनाथ रथ हत्या मामला क्या है? पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई। 6 मई 2026 की रात लगभग 10:30 बजे मध्यमग्राम के दोहारिया में अपराधियों ने चंद्रनाथ की कार पर अंधाधुंध फायरिंग की। बाइक और कार से हमलावर आए थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया था। अपराधियों की बाइक (WB 44D 1990) का नंबर झारखंड के धनबाद (चासनाला) में रहने वाले एक सेलकर्मी का निकला।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।