Jharkhand government news

Advocate General Rohitashya Roy
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नवनियुक्त महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय की शिष्टाचार भेंट

रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सोमवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड के नवनियुक्त महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच राज्य से जुड़े विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक विषयों पर संक्षिप्त चर्चा भी हुई।मुख्यमंत्री आवास में हुई इस औपचारिक भेंट के दौरान महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने नई जिम्मेदारी मिलने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई और शुभकामनाएं देते हुए सफल कार्यकाल की कामना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य के महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में उनकी विशेषज्ञता सरकार को प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करेगी।   रोहितश्य रॉय अब झारखंड सरकार का पक्ष न्यायिक मंचों पर रखेंगे महाधिवक्ता के रूप में रोहितश्य रॉय अब झारखंड सरकार का पक्ष उच्च न्यायालय सहित अन्य न्यायिक मंचों पर रखेंगे। इसके अलावा वे राज्य सरकार के प्रमुख विधिक सलाहकार की भूमिका भी निभाएंगे और संवैधानिक, प्रशासनिक तथा अन्य महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में सरकार को आवश्यक सलाह देंगे।मुख्यमंत्री और महाधिवक्ता की यह मुलाकात औपचारिक शिष्टाचार भेंट रही, लेकिन इसे राज्य सरकार और विधिक तंत्र के बीच बेहतर समन्वय तथा प्रभावी कानूनी रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई नियुक्ति के बाद यह उनकी मुख्यमंत्री से पहली आधिकारिक मुलाकात थी।

anjali kumari जून 16, 2026 0
Jharkhand census 2026
सीएम हेमंत और कल्पना ने पूरी की अपनी स्व गणना, कहा- जनगणना से योजनाओं को मिलेगी नई दिशा

रांची।  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक मई को रांची स्थित अपने आवासीय कार्यालय में जनगणना 2027 के तहत स्व गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उनकी धर्मपत्नी और विधायक कल्पना सोरेन भी उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर समस्त राज्यवासियों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी जिम्मेदारी निभाएं और सक्रिय रूप से भागीदारी करें। अधिकारियों ने दी जानकारी मुख्यमंत्री को जनगणना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण की विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि 1 मई से 15 मई तक स्व गणना का कार्य चलेगा, जिसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक मकानों के सूचीकरण और गणना का कार्य पूरे राज्य में किया जाएगा। इस अभियान के दौरान प्रगणक और संबंधित कर्मी घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे, जिसकी प्रशासनिक तैयारियां सभी जिलों में शुरू कर दी गई हैं। सटीक जानकारी से योजनाएं सफल होंगीः सीएम इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने का काम नहीं है, बल्कि यह आम जनता के भविष्य को सही दिशा देने का एक मजबूत आधार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सटीक आंकड़ों की मदद से ही राज्य सरकार की योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से पात्र व्यक्तियों और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकेगा। क्षेत्रीय भाषा के जानकारों को करें शामिलः मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सुझाव दिया कि इस कार्य में क्षेत्रीय भाषाओं के जानकार पदाधिकारियों और कर्मियों को भी शामिल किया जाए, ताकि सूचनाओं का आदान प्रदान सटीक हो सके। उन्होंने जनगणना 2027 की तकनीकी पहल की सराहना की और राज्यवासियों से इस राष्ट्रीय कार्य को सफल बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर भारत सरकार के जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक प्रभात कुमार, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Unknown मई 1, 2026 0
JPSC governor statement
JPSC: परीक्षा में गड़ब़ड़ी पर राज्यपाल गंभीर, पूछा कैसे और क्यों हुई

रांची। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने हाल में जेपीएससी द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में त्रुटियों, गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने सख्त कदम उठाते हुए इस संबंध में पूरी रिपोर्ट तलब की है।  राज्यपाल ने जेपीएससी को कड़ा पत्र लिख कर पूछा है कि ये गड़बड़ियां कैसे हुईं। राज्यपाल ने कहा है कि सहायक वन संरक्षक की मुख्य परीक्षा तथा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में त्रुटियों एवं प्रारंभिक रूप से जारी उत्तर-कुंजी में गलत उत्तरों के संबंध में विभिन्न माध्यमों से तथ्य प्रकाश में आए हैं। इस प्रकार की त्रुटियां न केवल अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। ऐसे मामले आयोग की साख पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हैं, जो कि अत्यंत ही चिंताजनक है। जांच करायें और दोषियों पर कार्रवाई करे राज्यपाल ने आयोग को निदेशित किया है कि उक्त प्रकरणों की समुचित जाँच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु परीक्षा प्रक्रिया में आवश्यक सुधारात्मक एवं सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाने का सख्त निर्देश दिया है। राज्यपाल ने अपेक्षा व्यक्त की है कि आयोग पारदर्शिता, शुचिता एवं उच्च मानकों को बनाए रखते हुए परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करे, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास सुदृढ़ हो सके। यहां मालूम हो कि राज्यपाल संवैधानिक संस्था जेपीएससी का राज्य में सर्वेसर्वा होते हैं। लेकिन, हाल के दिनों में जेपीएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और त्रुटियों से अभ्यर्थियों में भारी निराशा, असंतोष और आक्रोश है। लगातार त्रुटि और गड़बड़ी से जेपीएससी के साथ साथ झारखंड सरकार की साख पर भी सवाल खड़ा हुआ है

Unknown मई 1, 2026 0
jharkhand treasury scam
झारखंड में ट्रेजरी घोटाले के बाद, अब होमगार्ड्स के वेतन भुगतान के लिए नए नियम लागू

रांची। झारखंड के बोकारो, हजारीबाग और रांची में सामने आए करोड़ों रुपये के ट्रेजरी घोटाले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। इस घोटाले के बाद सरकार अब वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर बेहद सतर्क हो गई है। खासकर वेतन भुगतान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में होमगार्ड्स के कर्तव्य भत्ते की निकासी को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं।   सत्यापन के बाद ही होगा भुगतान होमगार्ड डीजी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब बिना सत्यापन के किसी भी होमगार्ड को वेतन या भत्ता नहीं दिया जाएगा। वित्त विभाग के निर्देश के अनुसार, हर होमगार्ड को निर्धारित प्रपत्र भरकर अपनी सभी जानकारी और दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके बाद ही वेतन निकासी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सभी जिला समादेष्टाओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में तैनात होमगार्ड्स से आवश्यक कागजात इकट्ठा कर उनका सत्यापन सुनिश्चित करें।   अनिवार्य दस्तावेज और जानकारी नई व्यवस्था के तहत होमगार्ड्स को अपने पे आईडी, नाम, सैन्य संख्या, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, आधार और पैन नंबर, बैंक खाता विवरण और IFSC कोड जैसी जानकारियां देनी होंगी। इसके साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक या कैंसिल चेक की स्वप्रमाणित प्रतियां जमा करनी होंगी। इसके अलावा एक घोषणा पत्र भी देना होगा, जिसमें होमगार्ड यह प्रमाणित करेगा कि दी गई सभी जानकारी सही है और गलत पाए जाने पर वह स्वयं जिम्मेदार होगा।   पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगेगी। ट्रेजरी घोटाले के बाद यह कदम प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी तरह की सख्ती लागू की जा सकती है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
justice amitabh gupta
झारखंड के नये लोकायुक्त होंगे जस्टिस अमिताभ गुप्ता, 5 साल से खाली है पद

रांची। झारखंड हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस अमिताभ गुप्ता झारखंड के नए लोकायुक्त होंगे। राज्यपाल की सहमति के बाद कागजी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। गुरुवार को ही इससे संबंधित अधिसूचना जारी हो सकती है। इसके बाद लोकायुक्त के रूप में उन्हें शपथ दिलाने संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लोकायुक्त को राज्यपाल शपथ दिलाते हैं।   1997 से न्यायिक सेवा में हैं जस्टिस गुप्ता जस्टिस अमिताभ गुप्ता 1997 में न्यायिक सेवा में आए थे और संयुक्त बिहार के समय एडीजे के रूप में योगदान दिए थे। इसके बाद वे धनबाद, दुमका में भी पदस्थापित रहे। रांची में सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश पशुपालन रहे जस्टितस अमिताभ गुप्ता वर्ष 2013 में झारखंड हाईकोर्ट के जज बने थे और 30 मई 2021 को वहीं से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन के रूप में उन्होंने कार्य किया था। वे झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रहे जानकारी के अनुसार वह झारखंड सरकार के विधि सचिव भी रह चुके हैं। 31 मई 1959 को जस्टिस अमिताभ गुप्ता का जन्म हुआ था। उन्होंने साहिबगंज के संत जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई करने के बाद हिंदू कॉलेज से स्नातक व दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। जून 2021 से खाली है पद झारखंड के लोकायुक्त का पद जून 2021 से रिक्त पड़ा है। तब जस्टिस डीएन उपाध्याय लोकायुक्त थे। कोरोना महामारी के चलते उनका निधन हो गया था, उसके बाद से ही यह पद रिक्त पड़ा है। पांच साल से लोकायुक्त का पद रिक्त रहने के कारण भ्रष्टाचार के करीब तीन हजार मामले लंबित पड़े हुए हैं।  लोकायुक्त का पद खाली रहने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल हुई थी, जिसपर सुनवाई चलती रही। 20 अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है। बताया जा रहा है कि सुनवाई के पूर्व लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
Jharkhand DA hike
झारखंड में राज्यकर्मियों का DA 5% बढ़ा

रांची। झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों के हित में बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने राज्यकर्मियों का महंगाई भत्ता 5 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। झारखंड कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट सचिव वंदना दादेल ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशन भोगियों के महंगाई भत्ते में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसके तहत इन सभी को 252 की जगह 257 प्रतिशत महंगाई भत्ता देय होगा। वहीं पांचवां वेतनमान के तहत वेतन और पेंशन लेने वालों के भी महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की गई है। इन्हें अब तक 466 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था, जिसे बढ़ा कर 474 प्रतिशत कर दिया है।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
jharkhand illegal houses
झारखंड में अवैध मकान होंगे नियमित

रांची। झारखंड कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत राज्य में अवैध रूप से बने मकानों को नियमित करने निर्णय लिया गया है। नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सरकार ने यह तय किया है कि रांची सहित पूरे राज्य में 10 मीटर ऊंचाई तक के आवासीय भवन, यानी जी प्लस टू तक के मकानों को नियमित किया जाएगा। यानी जिन मकानों का नक्शा नहीं है अब वे भी नियमित होंगे। इस योजना के तहत अधिकतम 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल तक के भवन शामिल होंग नियमितीकरण के लिए शुल्क भी तय किया गया है। आवासीय भवनों के लिए न्यूनतम 10,000 रुपये और गैर-आवासीय भवनों के लिए 20,000 रुपये शुल्क रखा गया है। इस फैसले से हजारों मकान मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक कानूनी अड़चनों का सामना कर रहे थे।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
Jharkhand Information Commissioner 2026
झारखंड में ये 5 लोग बनेंगे सूचना आयुक्त

रांची। झारखंड को जल्द ही पांच सूचना आयुक्त मिलेंगे। इनके नाम लगभग तय हैं। इनमें दो पत्रकार अनुज सिन्हा व धर्मवीर सिन्हा, कांग्रेस महासचिव अमूल्य नीरज खलखो, झामुमो आईटी सेल के प्रभारी तनुज खत्री और भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के नाम शामिल हैं। लोकभवन पहुंची फाइल जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 25 मार्च को चयन समिति की बैठक में इन नामों का चयन हो चुका है। इस बैठक में सीएम के अलावा नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन शामिल थे। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने राज्यपाल संतोष गंगवार की स्वीकृति के लिए फाइल लोकभवन भेज दी है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद नियुक्ति की अधिसूचना जारी होगी। 335 आवेदन आये थे मुख्य सूचना आयुक्त के लिए 35 और सूचना आयुक्त के लिए करीब 300 आवेदन चयन समिति के पास आए थे। फिलहाल मुख्य सूचना आयुक्त के लिए किसी का नाम नहीं भेजा गया है।  6 साल से खाली हैं पद राज्य में 6 साल से मुख्य ससूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के सभी पद खाली हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दबाव के बाद इस नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आई है। 7 अप्रैल तक जारी होगी अधिसूचना झारखंड के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने पिछली सुनवाई में मामले में सरकार से जवाब मांगा है। इस पर महाधिवक्ता ने बताया कि चयन समिति की बैठक हो चुकी है। सात अप्रैल तक इन पदों पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। अब 13 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई होगी।

Unknown अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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