रांची। झारखंड में मानसून की गतिविधियां तेज हो गई हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), सरायकेला-खरसावां, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और हजारीबाग समेत कई जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। कुछ जिलों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने (वज्रपात) की संभावना जताई गई है। रांची समेत कई शहरों में बदला मौसम राजधानी रांची में सुबह से ही बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की स्थिति बनी हुई है। वहीं जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो समेत कई इलाकों में भी मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। वज्रपात को लेकर लोगों को सावधानी की सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान खुले मैदान, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचें। किसानों को भी मौसम खराब होने पर खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है। बारिश से किसानों को राहत, जलभराव की बढ़ी चिंता मानसून की अच्छी बारिश से धान और अन्य खरीफ फसलों को फायदा मिलने की उम्मीद है। हालांकि लगातार तेज बारिश होने पर शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की संभावना है। प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है।
अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार (6 जुलाई) को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले की जांच के बीच आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफों के साथ-साथ विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के मठ मणिराम छावनी में आयोजित होगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी नियमित और पदेन सदस्यों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वर्चुअली शामिल हो सकते हैं अध्यक्ष सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन भी स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग ले सकते हैं। बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विचार किया जा सकता है— महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के सौंपे गए इस्तीफे। दान राशि के कथित गबन मामले में SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट। ट्रस्ट के प्रशासनिक और भविष्य के निर्णयों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे। ट्रस्ट के नियम क्या कहते हैं? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार— कोई भी ट्रस्टी कम से कम एक महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। ट्रस्ट अगली बैठक में उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय लेता है। यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप हो, तो उसे हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। वर्तमान में ट्रस्ट के 12 सदस्य निर्णय प्रक्रिया में शामिल हैं। किसी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए कम से कम 8 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होगा। VHP ने क्या कहा? इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कथित दान गबन विवाद से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रशासनिक फैसलों के लिए वीएचपी जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। सभी की नजर बैठक के फैसले पर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर जांच जारी है। ऐसे में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट क्या फैसला लेता है और SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
रांची। अलनीनो के प्रभाव से झारखंड में इस वर्ष मानसून कमजोर पड़ गया है, जिसका सीधा असर खेती और जल संसाधनों पर दिखाई देने लगा है। राज्य में अब तक केवल 129 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम है। बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों, खासकर धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालात को देखते हुए राज्य सरकार लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है और कृषि विभाग हर 15 दिन में खरीफ खेती की तैयारियों का आकलन कर रहा है। बारिश के आकड़े क्या कहते है? बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक राज्य में 417 मिमी वर्षा हो चुकी थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा महज 129 मिमी तक सिमट गया है। राजधानी रांची में अब तक 205 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां 600 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। पश्चिम सिंहभूम में इस बार केवल 136 मिमी और गढ़वा जिले में महज 18 मिमी बारिश हुई है। राज्य का कोई भी जिला सामान्य वर्षा के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। कम बारिश का सबसे अधिक असर धान की खेती पर पड़ा है। पिछले वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह तक लगभग 95 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हो चुकी थी, जबकि इस बार अब तक केवल तीन हजार हेक्टेयर में ही रोपाई हो सकी है। यह रोपाई भी मुख्य रूप से संताल परगना के कुछ जिलों तक सीमित है। दक्षिणी छोटानागपुर और कोल्हान जैसे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में भी रोपाई की रफ्तार बेहद धीमी है। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि अलनीनो के कारण सामान्य से करीब 50 प्रतिशत कम वर्षा चिंता का विषय है। हालांकि सरकार ने संभावित सुखाड़ की आशंका को देखते हुए पहले ही सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया कि झारखंड देश का पहला राज्य है, जिसने संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अपना कंटिन्जेंसी प्लान समय रहते केंद्र सरकार को भेज दिया है। सरकार का दावा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।
रांची। झारखंड में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 45 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है। अगले चार दिनों में बारिश की उम्मीद भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राज्य के कई जिलों में अगले चार दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। 7 जुलाई तक कई इलाकों में बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और वज्रपात की भी चेतावनी जारी की गई है। इससे बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। खेती पर दिखने लगा असर बारिश की कमी के कारण धान समेत खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, प्रशासन किसानों को मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और मौसम के अनुसार खेती से जुड़े निर्णय लेने की सलाह दे रहा है। रांची समेत कई जिलों को मिल सकती है राहत मौसम विभाग के अनुसार रांची, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग, धनबाद और आसपास के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे तापमान में गिरावट आएगी और उमस भरी गर्मी से भी लोगों को राहत मिलने की संभावना है।
रांची। झारखंड में लंबे इंतजार के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय होने लगा है। रविवार दोपहर से मौसम का मिजाज बदला और कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सोमवार सुबह से राजधानी रांची सहित 20 से अधिक जिलों में बादलों का डेरा बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य में आज से मानसूनी गतिविधियां तेज होंगी और दोपहर बाद अच्छी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया मौसम विभाग ने बताया कि मानसून 4 जुलाई तक सक्रिय रह सकता है। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश, वज्रपात और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। विशेष रूप से 30 जून और 1 जुलाई को उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज के अलावा रांची, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, खूंटी, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। बारिश के कारण बारिश के कारण अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 18 मिमी बारिश सरायकेला में दर्ज की गई, जबकि बहरागोड़ा का अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रहा। रांची का अधिकतम तापमान 3.5 डिग्री गिरकर 30.7 डिग्री सेल्सियस और हजारीबाग का तापमान 4.9 डिग्री की गिरावट के साथ 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्यभर में अच्छी बारिश होगी। उन्होंने किसानों को खेतों में जलजमाव से बचाव की सलाह दी है, क्योंकि अधिक पानी से धान की नर्सरी, मक्का, अरहर और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, खुले स्थानों पर जाने से बचने और वज्रपात के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की भी अपील की गई है। 1 जून से अब तक झारखंड में सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा में और सबसे अधिक सिमडेगा में रिकॉर्ड की गई है।
रांची। झारखंड में मानसून की गतिविधियां लगातार जारी हैं, लेकिन राज्य के सभी जिलों में बारिश समान रूप से नहीं हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से अब तक सबसे कम वर्षा गढ़वा जिले में दर्ज की गई है। वहीं बुधवार को रांची, गुमला, जमशेदपुर, जामताड़ा और चाईबासा समेत कई इलाकों में तेज हवा के साथ झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। जामताड़ा में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत बुधवार देर रात जामताड़ा जिले के बिंदापाथर थाना क्षेत्र स्थित चरकादाहा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। मृतकों की पहचान विनय सोरेन (50) और विश्वकर्मा टुडू (17) के रूप में हुई है। सभी एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। अचानक तेज बारिश शुरू होने पर वे एक मिट्टी के घर की ओट में खड़े हो गए, तभी घर पर बिजली गिर गई और यह हादसा हो गया। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। कई जिलों में यलो अलर्ट, तीन जिलों में हीट वेव की चेतावनी मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए राज्य के कई जिलों में गरज, वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट जारी किया है। दूसरी ओर गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में हीट वेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी गई है। गढ़वा में सामान्य से 98 मिमी कम बारिश बारिश के आंकड़ों के अनुसार, गढ़वा में अब तक केवल 1.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई है, जो सामान्य से 98 मिमी कम है। साहिबगंज में 3.2 मिमी और चतरा में 6.8 मिमी बारिश हुई है। वहीं दुमका में 124.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य के करीब है। पिछले 24 घंटों में सर्वाधिक 71.4 मिमी बारिश गुमला के रायडीह में रिकॉर्ड की गई। राज्य का सबसे अधिक तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस डाल्टेनगंज और सबसे कम न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस लातेहार में दर्ज किया गया।
रांची: झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब तेजी से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं, जिसके कारण कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। अनुमान है कि अगले चार से पांच दिनों के भीतर मॉनसून राज्य के शेष हिस्सों में भी पूरी तरह फैल जाएगा। इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य में सबसे अधिक 46.4 मिमी बारिश तिलैया डीवीसी (कोडरमा) में रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा चंदवा में 45.2 मिमी और कांके (रांची) में 42.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहा। सक्रिय मौसम प्रणाली का दिख रहा असर मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार समुद्र तल पर बना मौसमी टर्फ पश्चिम राजस्थान से गंगेटिक पश्चिम बंगाल तक झारखंड से होकर गुजर रहा है। इसी वजह से राज्य में एक मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय है, जिसका प्रभाव आने वाले कुछ दिनों तक बना रह सकता है। रविवार शाम अचानक बदला मौसम रविवार को दिनभर राजधानी रांची में तेज धूप रही और तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। हालांकि शाम करीब छह बजे के बाद मौसम ने अचानक करवट ली और शहर के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई। देर रात तक कई क्षेत्रों में गरज और चमक के साथ बारिश होती रही। सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए बंद रही बिजली भारी बारिश के दौरान रांची के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधे घंटे से एक घंटे तक बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद रखी गई, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। कई इलाकों में हुआ जलभराव तेज बारिश के कारण राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में पानी भर गया। सेवा सदन पथ, जयपाल सिंह स्टेडियम के आसपास का क्षेत्र, हलधर प्रेस गली, मेन रोड, लालजी हिरजी रोड और स्टेशन रोड सहित कई जगहों पर जलजमाव की स्थिति देखने को मिली, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। 15 से 17 जून तक कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार: 15 जून: आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या मेघ गर्जन की संभावना है। 16 जून: राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 17 जून: उत्तर-पश्चिमी हिस्से को छोड़कर राज्य के अन्य क्षेत्रों में कहीं-कहीं बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून की सक्रियता बढ़ने से आने वाले दिनों में झारखंड के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा और व्यापक हो सकता है।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 11 जून से प्री-मानसून गतिविधियां तेज होंगी और कई जिलों में आंधी, वज्रपात तथा बारिश की संभावना है। राजधानी रांची में बुधवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। खूंटी में 11 मिमी और रांची व आसपास के इलाकों में लगभग 3 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने 11 जून के लिए रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं, वज्रपात और बारिश की संभावना जताई गई है। रांची में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। 12 जून को कई इलाकों में भारी बारिश के आसार 12 जून को बोकारो, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और दुमका जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं रांची, खूंटी, हजारीबाग, कोडरमा, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम में आंधी, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इन जिलों के लिए भी मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 13 जून को भी जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार 13 जून को राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। दुमका, जामताड़ा, देवघर, धनबाद, साहिबगंज, पाकुड़ और गोड्डा जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है। चार दिन बाद झारखंड में दस्तक देगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मानसून अगले चार दिनों में संताल परगना क्षेत्र के रास्ते झारखंड में प्रवेश कर सकता है। इसके साथ ही राज्यभर में बारिश की गतिविधियां बढ़ने और तापमान में गिरावट आने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।