हजारीबाग। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हजारीबाग के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और भारतीय जनता पार्टी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करती है। सीआईडी जांच पर उठाए सवाल बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार द्वारा कराई जा रही सीआईडी जांच केवल खानापूर्ति है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे ही परीक्षा अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकेगी। अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग मरांडी ने मांग की कि JPSC और JSSC में कार्यरत सभी संबंधित अधिकारियों और पदाधिकारियों को तत्काल पदमुक्त कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। अभय तिवारी मामले का किया जिक्र प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने हाल ही में गिरफ्तार अभय तिवारी का भी उल्लेख किया। मरांडी ने दावा किया कि जांच में सामने आया है कि उसके परिवार के कुछ सदस्यों को हालिया भर्ती परीक्षाओं में नौकरी मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे भर्ती घोटाले की ओर इशारा करता है और इसकी गहन जांच आवश्यक है। छात्रों के आंदोलन को बताया जायज मरांडी ने कहा कि राज्यभर में छात्र परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांगें उचित हैं। उनके अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई तो युवाओं का सरकारी भर्ती परीक्षाओं से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि JPSC और JSSC जैसी महत्वपूर्ण भर्ती एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बजाय भर्ती प्रक्रिया को विवादों में डाल रही हैं, इसलिए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
1733 पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन हुए अमान्य, तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी गलतियों के कारण कार्रवाई रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के तहत जमा किए गए 59,457 ऑनलाइन आवेदन रद्द कर दिए हैं। आयोग ने बताया कि ये आवेदन विभिन्न तकनीकी और प्रक्रिया संबंधी कारणों से अमान्य किए गए हैं। इस भर्ती के माध्यम से झारखंड की जेलों में 1733 कक्षपाल (वार्डर) पदों पर नियुक्ति की जानी है। सबसे ज्यादा आवेदन अधूरे रहने के कारण रद्द JSSC के अनुसार, बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं की। 41,526 अभ्यर्थियों ने सिर्फ रजिस्ट्रेशन किया, लेकिन अंतिम आवेदन जमा नहीं किया। 14,403 अभ्यर्थियों ने आवेदन तो भरा, लेकिन परीक्षा शुल्क जमा नहीं किया। 2,378 अभ्यर्थियों ने शुल्क जमा किया, लेकिन फोटो और हस्ताक्षर अपलोड नहीं किए। 1,150 अभ्यर्थियों के एक से अधिक आवेदन पाए गए, जिनमें पहले जमा किए गए आवेदन रद्द कर दिए गए। 1733 कक्षपाल पदों पर होनी है नियुक्ति झारखंड सरकार की अधियाचना के आधार पर JSSC ने कक्षपाल प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। यह भर्ती जेल विभाग में खाली पड़े 1733 पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है। अभ्यर्थियों को आयोग की सलाह आयोग ने अभ्यर्थियों से कहा है कि भविष्य में आवेदन करते समय सभी चरणों को ध्यानपूर्वक पूरा करें। रजिस्ट्रेशन के बाद आवेदन जमा करना, शुल्क भुगतान और जरूरी दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य है। भर्ती प्रक्रिया आगे जारी रहेगी आवेदन जांच पूरी होने के बाद अब योग्य अभ्यर्थियों की सूची के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रद्द किए गए आवेदनों के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सभी विभागों में रिक्तियों का आकलन कर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अधिक से अधिक सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,51,968 नियमित पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,87,610 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। यानी बड़ी संख्या में पद अब भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में हैं, जिससे सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी को मिली तेजी लाने की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पहले से विज्ञापित पदों की परीक्षाएं जल्द कराने और चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। विभागों से प्राप्त रिक्तियों के आधार पर नई अधियाचनाएं भी भेजी जाएंगी। इन पदों पर होगी नियुक्ति भर्ती अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और मेडिकल स्टाफ, तथा सड़क, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों के लिए अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो स्वतंत्रता दिवस के आसपास करीब 25 हजार नई नियुक्तियां की घोषणा की जा सकती है। वित्त मंत्री ने क्या कहा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी सरकार ने मानव संसाधन की कमी दूर करने पर इतने बड़े स्तर पर ध्यान दिया है। उनके अनुसार वर्तमान कार्यकाल में 40 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और सरकार आने वाले वर्षों में स्वीकृत पदों को अधिकतम संख्या में भरने के लिए तेजी से काम करेगी। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली यह भर्ती न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सिविल सेवा मुख्य (लिखित) परीक्षा 2025 की तिथियों में बदलाव कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि मुख्य परीक्षा की पहले घोषित तिथियां झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा से टकरा रही थीं। इससे दोनों परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता। अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग ने संशोधित परीक्षा कार्यक्रम जारी किया है। नई तारीखों पर होगी मुख्य परीक्षा संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 01/2026) अब 21, 22 और 23 जुलाई को आयोजित की जाएगी। पहले यह परीक्षा 18, 19 और 20 जुलाई को प्रस्तावित थी। आयोग के अनुसार, इस परीक्षा में कुल 2,204 अभ्यर्थी शामिल होंगे। बैकलॉग परीक्षाओं का भी जारी हुआ कार्यक्रम आयोग ने बैकलॉग मुख्य परीक्षाओं की नई तिथियां भी घोषित की हैं। बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2023 (विज्ञापन संख्या 06/2026) का आयोजन 25, 26 और 27 जुलाई को किया जाएगा। वहीं, बैकलॉग मुख्य परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या 05/2026) 1, 2 और 3 अगस्त को आयोजित होगी। आयोग ने जारी की महत्वपूर्ण सलाह JPSC ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यही संशोधित कार्यक्रम प्रभावी रहेगा। हालांकि, यदि भविष्य में कोई अपरिहार्य परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो परीक्षा तिथियों में फिर से बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है। वेबसाइट पर रखें नजर आयोग ने उम्मीदवारों से कहा है कि परीक्षा से जुड़े सभी नवीनतम अपडेट, प्रवेश पत्र और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं के लिए नियमित रूप से JPSC की आधिकारिक वेबसाइट देखते रहें, ताकि किसी भी बदलाव की जानकारी समय पर मिल सके और परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो।
रांची। झारखंड में सचिवालय स्टेनोग्राफर भर्ती का इंतजार कर रहे एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। करीब दो साल से लंबित 455 पदों पर प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा अधियाचना (रिक्विजिशन) वापस लेने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने भर्ती का विज्ञापन निरस्त करने की घोषणा की है। दो साल से चल रही थी भर्ती प्रक्रिया यह भर्ती 454 नियमित और एक बैकलॉग सहित कुल 455 पदों के लिए निकाली गई थी। वर्ष 2024 में जेएसएससी ने विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थी परीक्षा तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन परीक्षा आयोजित होने से पहले ही पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त कर दी गई। सरकार ने वापस ली अधियाचना जेएसएससी की ओर से जारी सूचना के अनुसार, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने 23 जून 2026 को आयोग को पत्र भेजकर इस भर्ती से संबंधित अधियाचना वापस ले ली। चूंकि किसी भी सरकारी भर्ती की प्रक्रिया विभाग से प्राप्त अधियाचना के आधार पर ही संचालित होती है, इसलिए अधियाचना वापस लेने के बाद आयोग के पास भर्ती जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बचा। इसी कारण विज्ञापन को निरस्त कर दिया गया। रद्द करने की वजह अब भी स्पष्ट नहीं भर्ती रद्द करने के पीछे क्या कारण रहे, इस बारे में सरकार या आयोग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। जेएसएससी ने अपने नोटिस में केवल इतना कहा है कि सरकार द्वारा अधियाचना वापस लिए जाने के कारण भर्ती विज्ञापन रद्द किया जा रहा है। ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और वे सरकार से इस फैसले पर स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों में बढ़ी निराशा करीब दो वर्षों से परीक्षा की तैयारी कर रहे और परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार भविष्य में इन पदों के लिए नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करती है या नहीं। फिलहाल भर्ती रद्द होने से हजारों युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
रांची। झारखंड में इंटरमीडिएट पास युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सुनहरा अवसर आया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने झारखंड इंटरमीडिएट स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस परीक्षा के माध्यम से विभिन्न विभागों में कुल 326 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। किस विभाग में कितने पद इस भर्ती अभियान में कई विभागों के पद शामिल हैं — स्वास्थ्य पर्यवेक्षक (स्वास्थ्य विभाग) — 137 पद बहुद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता (स्वास्थ्य विभाग) — 62 पद मत्स्यकी तकनीकी सहायक (मत्स्य निदेशालय) — 41 पद कीट संग्रहकर्ता — 32 पद वेटनरी/चिकित्सा सहायक (नगर विकास एवं आवास विभाग) — 27 पद कनीय क्षेत्रीय अन्वेषक (अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, योजना विकास विभाग) — 27 पद आवेदन की तिथि और शुल्क इच्छुक अभ्यर्थी 20 जुलाई 2026 से 19 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए परीक्षा शुल्क मात्र 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जो इसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं के लिए भी सुलभ बनाता है। कैसे करें आवेदन अभ्यर्थी JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। भर्ती से जुड़ी पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 जून को 1018 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देंगे। यह नियुक्ति पत्र वितरण समारोह प्रोजेक्ट भवन में होगा। इन सभी अभ्यर्थियों का चयन पहले ही हो चुका है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से समारोह का आयोजन किया जायेगा। नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी 1018 अभ्यर्थियों का चयन झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने किया है। इनमें प्राथमिक विद्यालय (कक्षा 1 से 5) और मध्य विद्यालय (कक्षा 6 से 8) के लिए चयनित शिक्षक शामिल हैं। आयोग की अनुशंसा के बाद सभी अभ्यर्थियों की जिला स्तर पर काउंसलिंग की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अब केवल नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार है।
रांची। रांची से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए दो अहम अपडेट सामने आए हैं। Jharkhand Public Service Commission (JPSC) ने ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती में Pharm-D डिग्रीधारियों को आवेदन का मौका दिया है, वहीं Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) ने उत्पाद सिपाही परीक्षा 2023 का मॉडल आंसर जारी कर दिया है। Pharm-D अभ्यर्थियों के लिए खुला आवेदन का रास्ता JPSC ने स्वास्थ्य विभाग की सहमति के बाद बड़ा फैसला लेते हुए Pharm-D डिग्रीधारियों को ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इसके लिए आयोग ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को फिर से खोल रहा है। अभ्यर्थी 30 अप्रैल से 15 मई शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, केवल वही उम्मीदवार पात्र होंगे जिन्होंने 18 फरवरी 2026 तक अपनी डिग्री पूरी कर ली थी। भर्ती प्रक्रिया की प्रमुख तारीखें इस भर्ती के तहत 30 पदों को भरा जाएगा। परीक्षा शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 10 मई तय की गई है, जबकि आवेदन की हार्ड कॉपी 28 मई तक जमा करनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे। उत्पाद सिपाही परीक्षा का मॉडल आंसर जारी दूसरी ओर, JSSC ने उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के लिए प्रथम, द्वितीय और तृतीय पत्र का औपबंधिक मॉडल उत्तर जारी कर दिया है। इससे अभ्यर्थी अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं। आपत्ति दर्ज करने का अंतिम मौका आयोग ने उम्मीदवारों को 4 मई तक ऑनलाइन माध्यम से आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया है। निर्धारित समय के बाद या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थियों को मिली राहत इन दोनों फैसलों से राज्य के हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है। जहां एक ओर नए उम्मीदवारों के लिए अवसर बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
रांची। झारखंड विशेष सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 5 से 7 मई के बीच होगी। रांची के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में होने वाली यह परीक्षा सीबीटी मोड में ली जाएगी। जेएसएसी ने 3,451 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। अभ्यर्थियों को परीक्षा तिथि की जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल पर भेज दी जायेगी। 2 दिन पहले डाउनलोड होंगे एडमिट कार्डः अभ्यर्थी परीक्षा से 2 दिन पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आवेदन संख्या और जन्मतिथि लगेगी। आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया है कि वे परीक्षा केंद्र पर एडमिट कार्ड की 2 अतिरिक्त फोटोकॉपी और 2 पासपोर्ट साइज फोटो लेकर जाएं। परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग या किसी प्रकार की गड़बड़ी करने पर कड़ी कार्रवाई होगी। अभ्यर्थियों के लिए निर्देश जारीः आयोग ने अभ्यर्थियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े नियम लागू गये हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम-2023 के तहत कार्रवाई की जायेगी। आयोग ने यह भी कहा कि परीक्षा से जुड़ी अपडेट पाने के लिए अभ्यर्थी वेबसाइट देखते रहें।
झारखंड में जेल वार्डर (कक्षपाल) के 1733 पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है। Jharkhand High Court ने इस मामले की सुनवाई करते हुए भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी और Jharkhand Staff Selection Commission (JSSC) तथा राज्य सरकार से जवाब मांगा है। गुरुवार को न्यायमूर्ति Deepak Roshan की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। मुमताज अंसारी समेत अन्य अभ्यर्थियों ने भर्ती विज्ञापन को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। आयु सीमा को लेकर विवाद याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में अधिकतम आयु सीमा की गणना अगस्त 2025 से करने का प्रावधान किया गया है, जो नियमों के अनुरूप नहीं है। अभ्यर्थियों के मुताबिक पहली नियुक्ति के लिए आयु की गणना 1 अगस्त 2019 से की जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि सरकार के अपने ही नियमों के विपरीत भर्ती प्रक्रिया संचालित की जा रही है। अदालत ने इन दलीलों को गंभीर मानते हुए फिलहाल भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी। सितंबर 2025 में जारी हुआ था विज्ञापन JSSC ने सितंबर 2025 में जेल वार्डर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 9 जनवरी से 8 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार के वादे के बावजूद आयु सीमा में कोई विशेष छूट नहीं दी गई। कुल 1733 पदों पर भर्ती JSSC की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार कुल 1733 पदों पर भर्ती होनी थी। इसमें अलग-अलग श्रेणियों के पद शामिल हैं, जिनमें पुरुष, महिला और भूतपूर्व सैनिकों के लिए भी आरक्षण रखा गया था। चयन प्रक्रिया और वेतन जेल वार्डर भर्ती के लिए चयन प्रक्रिया तीन चरणों में प्रस्तावित थी- शारीरिक दक्षता परीक्षा लिखित परीक्षा चिकित्सीय जांच शारीरिक परीक्षा में दौड़ को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। चयनित उम्मीदवारों को वेतनमान स्तर-2 के तहत लगभग 19,900 रुपये से 63,200 रुपये तक वेतन मिलने का प्रावधान है। अब अदालत में अगली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या इसमें बदलाव किया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।