1534 – ऑटोमन सेना ने उत्तर पश्चिमी फारस में ताबरिज पर कब्जा किया। 1645 – अलेक्सेई रोमानोव अपने पिता माइकल की जगह रूस के शासक बने। 1660 - शिवा काशिद शिवाजी ने शिवाजी महाराज और परिणामी मराठी साम्राज्य पर संकट को टालने के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया (12-13 जुलाई 1960)। 1700 - कांस्टेंटिनोपल की संधि शांति की स्थापना के बाद रूसी-तुर्की युद्ध हुआ। 1771 – ब्रिटेन के विख्यात नाविक जेम्ज़ कुक की पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्ध की ऐतिहासिक खोज-यात्रा तीन वर्ष के बाद समाप्त हुई। 1772 - कैप्टन जेम्स कुक ने दक्षिणी सागर की दूसरी यात्रा शुरु की। 1787 - संयुक्त राज्य अमेरिका की कांग्रेस उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए नियमों को नियंत्रित करने के लिए नॉर्थवेस्ट अध्यादेश की पुष्टि की। 1830 – राजा राम मोहन राय और अलैकजेंडर डफ ने पांच छात्रों के साथ स्कॉटिश चर्च कॉलेज शुरू किया था (1803 का भी वर्ण है इसलिए कन्फर्म कर लें)। 1832 – हेनरी स्कूलक्रॉफ्ट ने मिनेसोटा में मिसीसिपी नदी के स्रोत की खोज की। 1863 – न्यूयार्क में सिविल वार ड्रॉफ्ट के विरोधियों के दंगे में एक हजार से अधिक लोग घायल हुए। 1871- क्रिस्टल पैलेस लंदन में विश्व का पहला चैम्पियनशिप बिल्ली शो हैरिसन वेयर द्वारा आयोजित किया गया। 1878 – बर्लिन कांग्रेस ने यूरोपीय शक्तियों के बीच बाल्कन देशों का बँटवारा किया। 1879 – बुल्गारिया में नेशनल गाडर्स यूनिट की स्थापना हुई। 1882 – रूस में ट्रेन के पटरी से उतर जाने के कारण 200 लोगों की मौत हो गई। 1887 – स्कॉटलैंड में दूसरा रेल पुल शुरु हुआ जिसका प्रयोग आज भी जारी है। 1897 – मारकोनी ने बेतार संदेश के लिए अमेरिकी पेटेंट हासिल किया (कन्फर्म नहीं)। 1905 – कलकत्ता के बांग्ला साप्ताहिक संजीवनी द्वारा पहली बार ब्रिटिश सामानों की होली जलाने / बहिष्कार का सुझाव दिया गया। 1908 – लंदन में चौथा आधुनिक ओलंपिक खेल शुरु हुआ। 1918 – टोकायाम की खाड़ी में जापानी युद्धपोत में विस्फोट हुआ। जिसमें 500 लोगों की मौत हुई। 1923 – कैलिफोर्निया के शहर लॉस एंजिलिस में माउंट हिल्स के पास जमीन की कीमतों को बढ़ाने के लिए प्रचार के मकसद से 'Hollywood' लिखा गया था। 1925 - वॉल्ट डिज़नी ने इडाहो शहर में लिलियन बाउंड्स के साथ शादी की। 1929 – जतिन्द्र नाथ दास ने ऐतिहासिक भूख हड़ताल की शुरुआत की। 1945 – मैक्सिको मरुस्थल में पहला परमाणु बम परिक्षण के लिए लाया गया। 1947 – ‘इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट’ ब्रिटिश पार्लियामेंट में पारित हुआ। 1954 – अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जेनेवा में वियतनाम के बँटवारे पर सहमत हुए। 1974 – हेडिंग्ले में भारत ने अपना पहला वनडे मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला। 1971 – मोरक्को के बागी नेताओं को मौत की सजा दी गई थी। 1977 – आपातकाल के दौरान भारत रत्न, पद्म विभूषण आदि जैसे लोक सम्मान वापस लिये गये। 1992 - यीत्ज़ाक राबिन इस्राइल के प्रधानमंत्री बने। 1998– भारत के लिएंडर पेस ने हॉल आफ़ फ़ेम टेनिस चैंपियनशिप में अपने जीवन का प्रथम ए.टी.पी. ख़िताब जीता। 1998 - ब्राजील ने सी.टी.बी.टी. एवं एन.पी.टी. पर हस्ताक्षर किया। 2000 – अमेरिका और वियतनाम ने बड़े व्यापार अनुबंध पर हस्ताक्षर किये। 2000 - फिजी में महेन्द्र चौधरी समेत 18 बंधक रिहा। 2001 - वर्ष 2008 के ओलम्पिक खेलों की मेजबानी चीन (बीजिंग) को सौंपी गयी। 2004 - रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने साइबेरिया और देश के सुदूर पूर्ववर्ती इलाकों के विकास के लिए भारत से और मज़बूत संबंधों की इच्छा जताई। 2006 - परमाणु बम निर्माण सम्बन्धी ईरान मसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को सुपुर्द। 2008 - अमेरिका में ग्रीन पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व डेमोक्रेट सिंथिया मैक्किनी को अपना उम्मीदवार बनाया। 2009 - शी वुल्फ शकीरा ने अपने आठवें एल्बम की शुरुआत की। 2011 – देश की आर्थिक राजधानी मुंबई तिहरे बम धमाकों से दहल उठी थी। ये धमाके मुंबई के झवेरी बाजार, ओपेरा हाउस और दादर में हुए थे। 2016 - यूनाइटेड किंगडम की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसदों द्वारा थेरेसा मई प्रधानमंत्री चुनी गयी। 2019 - मेघालय देश का पहला राज्य बना जहां जल नीति बनाई गई । 2019 - सोमालिया के होटल में आतंकी हमले में अमेरिकी व ब्रिटिश नागरिकों समेत 26 की मौत हुई। 2020 - भारतवंशी चंद्रिका प्रसाद संतोखी को लैटिन अमेरिकी देश सूरीनाम का राष्ट्रपति चुन लिया गया। 2021 - विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ताजिकिस्तान की दो दिन की यात्रा पर दुशाम्बे पहुँचे। 2021 - पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत स्थित कुर्रम में आतंकी हमला हुआ , सेना के कैप्टन समेत 12 सैनिकों की मौत, 15 से अधिक घायल हुए। 2022 - दिखा:धरती के सबसे करीब आया चंद्रमा , साल का सबसे बड़ा सुपरमून दिल्ली-अजमेर समेत दुनियाभर में 15% ज्यादा चमकीला चांद दिखा। 2022 - राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक श्री जी. अशोक कुमार की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति की 43वीं बैठक का आयोजन किया गया। 2022 - चीन और पाकिस्तान द्वारा सी गार्डियंस-2 समुद्री अभ्यास (10 से 13 जुलाई ) आयोजित किया गया। 2022 - भारत में बांग्लादेश के अगले उच्चायुक्त के तौर पर मुस्तफिजुर रहमान नियुक्त किए गए। 2023 - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय फ्रांस यात्रा के लिए रवाना हुए। 2023 - रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल लड़ाकू विमान और तीन स्कॉर्पीन श्रेणी की पारंपरिक पनडुब्बियां खरीदने की योजना को मंजूरी दी। 2023 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को फ्रांस के सर्वोच्च पुरस्कार ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। 2024 - भारत ने पाकिस्तान को पांच विकेट से हराया, WCL 2024 का खिताब जीता। 2024 - प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के मुंबई में इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (आईएनएस) टावर्स का उद्घाटन किया। 2025 - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए 4 सदस्यों को नॉमिनेट किया। 2025 - तमिलनाडु के तिरुवल्लूर रेलवे स्टेशन के पास डीजल से भरी मालगाड़ी में भीषण आग लगी। 13 जुलाई को जन्मे व्यक्ति 1814 - सुप्रसिद्ध भानुभक्त आचार्य एक नेपाली लेखक, कवि और अनुवादक थे। 1932 - बीना राय - हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। 1933 - भीष्म नारायण सिंह - असम और मेघालय के राज्यपाल रहे। 1939 - प्रकाश मेहरा - हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्माता एवं निर्देशक का जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर में हुआ था। 1941 - टी. कल्पना देवी - आठवीं लोकसभा की सदस्य। 1941 - सुनीता जैन - हिन्दी और अंग्रेज़ी की आधुनिक कहानीकार और उपन्यासकार। 1944 - ज़ोरामथंगा भारतीय राज्य मिज़ोरम के पूर्व एवं नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री । 1945 – ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट खिलाड़ी एस्ले मैलेट का जन्म सिडनी में हुआ। वे दाएं हाथ के बल्लेबाज व ऑफ ब्रैक गेंदबाज थे। 1947 - अस्ताद देबू एक भारतीय समकालीन नर्तक और कोरियोग्राफर थे। 1984 - उर्वशी शर्मा भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री एवं मॉडल हैं। 13 जुलाई को हुए निधन 1994 - कृष्ण गुंडोपंत गिंदे उर्फ के.जी. गिंडे एक भारतीय शास्त्रीय गायक और शिक्षक थे। 1995 – बंगाली उपन्यासकार / लेखिका आशापूर्णा देवी का निधन हुआ। 2013 - शर्मिला रेगे भारतीय समाजशास्त्री और लेखिका थी। 2021 - यशपाल शर्मा भारतीय क्रिकेट टीम के एक पूर्व खिलाड़ी थे। 2023 - अमेरिकी अभिनेत्री कार्लिन ग्लिन का 83 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2024 - बुल्गारियाई फुटबॉल गोलकीपर इलिया वालोव का 62 वर्ष की आयु में फेफड़ों की बीमारी से निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी अभिनेता जेम्स बी. सिकिंग का 90 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2025 - पद्मश्री से सम्मानित साउथ सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और पूर्व विधायक कोटा श्रीनिवास राव (83) का निधन हुआ। 2025 - कर्नाटक के प्रसिद्ध और वरिष्ठ पत्रकार के. बी. गणपति (85) का निधन हुआ। 13 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव आचार्य श्री विद्यानन्द जी आचार्य पद (जैन)। वीर शिवा काशिद पुण्य दिवस (12-13 जुलाई , महाराष्ट्र)। श्री कृष्ण गुंडोपंत गिंडे उर्फ के. जी. गिंडे पुण्यतिथि। स्वामी कल्याण देव शुक्रताल (पुण्य दिवस , कन्फर्म नहीं)। शहीद दिवस / "Martyrs' Day" (काश्मीर)। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।