June 15 in History

Important Events
Important Events: 15 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1215 – इंग्लैंड के किंग जॉन ने मैग्नाकार्टा शांति समझौते को अपनी मंजूरी दी। 1381 – लंदन में अंग्रेजी किसान विद्रोह को कुचला गया। 1389 – कोसोवो के युद्ध में औटोमन (तुर्की) साम्राज्य ने सर्बिया को हराया। 1664 – अमेरिका में न्यू जर्सी की स्थापना हुई। 1667 – पहली बार इंसान का ब्‍लड ट्रांस्‍फ्यूजन डॉ Jean-Baptiste Denys ने किया। 1703 - राजकुमार ई रकोक्ज़ी ने फ्रांस में हंगरी विद्रोह शुरू किया। 1762 – आस्ट्रिया में कागजी मुद्रा का चलन शुरू हुआ। 1785 – दुनिया की पहली हवाई दुर्घटना, बैलून से यात्रा कर रहे दो फ्रांसीसी नागरिकों की मौत। 1804 - अमेरिकी संविधान में 12 वीं संशोधन की पुष्टि हुई, जो न्यायिक शक्ति के विनियमन से संबंधित है। 1815 - इतिहास में सबसे प्रसिद्ध गेंद, "रिचमंड की गेंद "रसेल्स में आयोजित की गयी थी। 1836 – अर्कांसस अमेरिका का 25वां राज्य बना।  1846 – संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने अमेरिका और कनाडा के बीच सीमा विवाद को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर किया। 1846 - लासेंस्टन चर्च व्याकरण स्कूल पहली बार तस्मानिया में खोला गया। 1864 - अमेरिकी कांग्रेस ने काले सैनिकों के लिए वेतन को समान करने वाला कानून बनाया। 1866 – प्रशिया ने ऑस्ट्रिया पर आक्रमण किया। 1867 - अटलांटिक केबल क्वार्ट्ज सोना खान मोंटाना में स्थापित किया गया। 1871 - फीबे कूज़िन एक अमेरिकी महाविद्यालयीन लॉ स्कूल की पहली महिला स्नातक बनी। 1877 - 15 जून हेनरी ओसियन फ्लीपीर वेस्ट पॉइंट मिलिट्री एकेडमी से स्नातक होने वाला प्रथम अफ्रीकी, अमेरिकी बना। 1896 – भूकंप के बाद आए सूनामी में जापान के सानरिकू तट पर करीब 22 हजार लोगों की मौत हो गई। 1907 - हेग में दूसरी बार हेग शांति सम्मेलन आयोजित किया गया। 1908- कलकत्ता शेयर बाज़ार की शुरुआत हुई। 1917 – ग्रेट ब्रिटेन ने 1916 के ईस्टर विद्रोह के दौरान कब्जाए गये सभी क्षेत्रों को छोड़ने का संकल्प लिया। 1926 - विश्व न्यायालय ने द हेग शहर में अपना ग्यारहवे सत्र की शुरुआत की। 1947 – अखिल भारतीय कांग्रेस ने ब्रिटिश योजना के भारत विभाजन प्रस्ताव को स्वीकार किया। 1951 - न्यू मैक्सिको में, एरिज़ोना, कैलिफ़ोर्निया, ओरेगन, वाशिंगटन और ब्रिटिश कोलंबिया, आग में हजारों एकड़ वनों को नष्ट कर दिया। 1954 – स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में यूरोप के फुटबॉल संगठन UEFA (यूनियन ऑफ यूरोपियन फुटबाल एसोसिएशन) का गठन हुआ। 1971 – ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री मारग्रेट थैचर ने स्कूलों में मुक्त दूध देने की योजना खत्म करने का प्रस्ताव रखा। 1977 – स्पेन में 1936 के बाद पहली बार स्वतंत्र चुनाव संपन्न हुये। 1982 - फ़ाकलैंड में अर्जेन्टीना की सैनाओं का ब्रिटिश सेना के समक्ष समर्पण। 1988 – नासा ने स्‍पेस व्‍हेकिल S-213 लॉन्‍च किया। 1991 – दसवीं लोक सभा चुनाव में कांग्रेस को जीत हासिल हुयी।  1994 - सं.रा. अमेरिका ने सल्फ़र डाईआक्साइड गैस के वायुमंडल में उत्सर्जन को कम कर अम्ल वर्षा रोकने हेतु 26 यूरोपीय देशों और कनाडा के बीच हुए समझौते में शामिल होने से इन्कार किया। 1994 - इस्रायल और वैटीकन सिटी में राजनयिक संबंध स्थापित। 1997 - आठ मुस्लिम देशों द्वारा इस्तांबुल में डी-8 नामक संगठन का गठन। 1999 - लाकरबी पैन एम. विमान दुर्घटना के लिए लीबिया पर मुकदमा चलाये जाने की अमेरिकी अनुमति। 2001 - शंघाई -पांच शिखर सम्मेलन बीजिंग में सम्पन्न, शंघाई पांच अब शंघाई सहयोग संगठन बना, भारत व पाकिस्तान दोनों को सदस्यता न देने का निर्णय। 2002 - कनाडा के हैलीफ़ेक्स (नोवा स्कॉटिया) में जी-8 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक शुरू। 2004 - ब्रिटेन के साथ परमाणु सहयोग को राष्ट्रपति बुश की स्वीकृति मिली।  2004 - पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की आत्मकथा 'माई लाइफ़' बेस्ट सेलर बनी। 2005 - जमैका के आसफा पावेल का एथेंस में 8.77 सेकेण्ड का समय लेकर 100 मीटर फर्राटा दौड़ में नया विश्व रिकार्ड। 2006 - भारत और चीन ने पुराना सिल्क रूट खोलने का निर्णय लिया। 2008 - आक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पहली बार अल्ट्रावायलेट प्रकाश का विस्फोट कर बड़े सितारों की अंतिम स्थिति देखी। 2012 - एप्पल आई कंप्यूटर ने एक रिकॉर्ड $ 374.500 की बिक्री हुई। 2019 - भारत में स्कूलों में बच्चों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने वाली अक्षय पात्र योजना को बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ग्लोबल चैंपियनशिप अवार्ड मिला । 2019 - हांगकांग की नेता कैरी लैम ने विवादित प्रत्यर्पण कानून को अनिश्चित समय के लिए टाल दिया। 2020 - दोपहर 1 से शाम 4 बजे के बीच कच्छ में भूकंप के दो और झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इनकी तीव्रता 4.6 व 4.1 रही। भूकंप का केंद्र भचाऊ था। 2020 - पाक सेना ने जम्मू संभाग में अखनूर के केरी बट्टल, राजौरी, नौशहरा और कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में भारी गोलाबारी की। भारतीय सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। 2020 - अंतर्राष्ट्रीय और बहु-हितधारक पहल के लिए भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए वैश्विक भागीदारी (GPAI) में इसके संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल हो गया। 2021 - ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि चीन ने स्वशासित द्वीप ताइवान की तरफ 28 लड़ाकू विमान भेजे। 2022 - भारत ने ओडिशा के चांदीपुर में 250 किलोमीटर से अधिक की स्ट्राइक रेंज वाली पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 2022 - मेघालय के चेरापूंजी में सुबह साढ़े आठ बजे समाप्त हुए 24 घंटों के दौरान 811.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई (27 साल में जून की सर्वाधिक वर्षा)। 2023 - अरब सागर से उठा समुद्री तूफान बिपरजॉय ने गुजरात में लैंडफॉल किया। 2023 - जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा एनकाउंटर में सुरक्षाबलों ने सीमापार से आए 5 आतंकी मार गिराया। 2023 - हैदराबाद में जी-20 के कृषि कार्य समूह (एडब्ल्यूजी) के तहत मंत्रियों की 3 दिवसीय बैठक शुरू हुई। 2023 - भारतीय नौसेना का आउटरीच कार्यक्रम जुलै लद्दाख (हैलो लद्दाख , 15 से 23 जून) शुरू हुआ। 2023 - पेरू में डेंगू बुखार के रिकॉर्ड तोड़ प्रकोप के कारण 248 लोगों की मौत व 146,000 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य मंत्री रोसा गुटियरेज़ को इस्तीफा देना पड़ा।   15 जून को जन्मे व्यक्ति   1884 - तारकनाथ दास - भारत के प्रसिद्ध क्रान्तिकारियों में से एक थे। 1899 - देवी प्रसाद राय चौधरी- पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध चित्रकार एवं मूर्तिकार। 1899 - राजेन्द्र सिंहजी जडेजा - भारतीय थल सेना के प्रथम थल सेनाध्यक्ष थे। 1911 - के.के. हेब्बार के रूप में लोकप्रिय कटिंगेरी कृष्णा हेब्बार एक मशहूर कलाकार थे। 1912 - श्रीमन्नारायण अग्रवाल - प्रसिद्ध साहित्यकार और जमनालाल बजाज के जमाई थे। 1917 - सज्जाद हुसैन - भारतीय हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार थे। 1929 - सुरैया - प्रसिद्ध अभिनेत्री और गायिका। 1932 - ज़िया फ़रीदुद्दीन डागर - भारत के मशहूर ध्रुपद गायक। 1937 - अण्णा / अन्ना हज़ारे - गांधीवादी विचारधारा पर चलने वाले एक समाजसेवक। 1950 - लक्ष्मी मित्तल - स्टील किंग के नाम से पहचान रखने वाले भारतीय उद्योगपति। 1953 - कंभमपति हरिबाबू - भाजपा से जुड़े राजनेता। 1964 - जी. किशन रेड्डी - भाजपा के राजनीतिज्ञ। 1976 - नंदीगम सुरेश एक भारतीय राजनीतिज्ञ जो बापतला से लोकसभा सांसद बने। 1995 - मनिका बत्रा - राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टेबल टेनिस सितारों में से एक।   15 जून को हुए निधन   1878 - शिव दयाल साहब - दीक्षित हिन्दू संप्रदाय 'राधा स्वामी सत्संग' के संस्थापक। 2014 - सरदार फजलुल करीम बांग्लादेश में एक विद्वान, अकादमिक, दार्शनिक और निबंधकार थे। 2014 - पंजाब के पूर्व मंत्री खुशाल बहल का 87 साल की उम्र में निधन। 2022 - ऊर्दू के मशहूर साहित्यकार गोपी चंद नारंग (91) का निधन हुआ। 2023 - ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स की पूर्व सदस्य ग्लेंडा जैक्सन (87) का निधन हुआ। 2023 - स्पेनिश सड़क साइकिल चालक अंटोनिओ जिमेनेज़ क्वाइल्स (88) का निधन हुआ। 2023 - स्कॉटिश पेशेवर फुटबॉलर गॉर्डन मैकक्वीन (70) का निधन हुआ। 2023 - ऑस्ट्रेलियाई वाइन निर्माता और व्यापारी सर जेम्स गिल्बर्ट हार्डी (90) का निधन हुआ।   15 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   मेला श्री शीलावन्ती जी (भवानी , पठानकोट , पंजाब)। श्री भुन्तर मेला (कुल्लू 15 से  17 जून)। श्री महेश्वरी जयन्ती ( ज्येष्ठ शुक्ल नवमी , माहेश्वरी समाज )। गुरुदेव डॉ॰ रामचन्द्र दत्तात्रेय रानडे पुण्यतिथि (मराठी कलेण्डर अनुसार)। श्री अन्ना हज़ारे जन्म दिवस। आसियान डेंगू दिवस (कन्फर्म नहीं )। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस (World Elder Abuse Awareness Day)। वैश्विक पवन दिवस (Global Wind Day)।   कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari जून 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0