ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल गया है। लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम ने आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री पद संभाल लिया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह ली, जिन्होंने किंग चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद पद छोड़ा। इसके बाद राजा ने एंडी बर्नहैम को नई सरकार बनाने का निमंत्रण दिया और उन्होंने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। कौन हैं एंडी बर्नहैम? 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम ब्रिटेन की लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। वह लंबे समय तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे और इससे पहले स्वास्थ्य, संस्कृति तथा वित्त से जुड़े मंत्रालयों में भी काम कर चुके हैं। जुलाई 2026 में उन्हें लेबर पार्टी का नया नेता चुना गया, जिसके बाद उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। कीर स्टारमर की जगह संभाली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले कीर स्टारमर ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर विदाई भाषण दिया और फिर बकिंघम पैलेस जाकर किंग चार्ल्स III को अपना इस्तीफा सौंपा। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसके बाद एंडी बर्नहैम को सरकार बनाने का न्योता मिला। नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां एंडी बर्नहैम के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपनी नई कैबिनेट का गठन करना और लेबर पार्टी की गिरती लोकप्रियता को संभालना है। हाल के महीनों में पार्टी को जनसमर्थन में कमी का सामना करना पड़ा है, जबकि दक्षिणपंथी नेता निगेल फराज की पार्टी का प्रभाव बढ़ा है। बर्नहैम ने अपने पहले संबोधन में महंगाई, बेघर लोगों की समस्या और राष्ट्रीय स्थिरता को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल करने का संकेत दिया। दस साल में छठे प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के छठे प्रधानमंत्री बने हैं। राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहे ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन लगातार चर्चा का विषय रहा है। 2029 में होंगे अगले आम चुनाव ब्रिटेन में अगला आम चुनाव 2029 में प्रस्तावित है। इसलिए प्रधानमंत्री बदलने का मतलब यह नहीं है कि देश में दोबारा आम चुनाव होंगे। मौजूदा संसद अपना कार्यकाल पूरा करेगी और नई सरकार उसी संसद के भीतर काम करेगी। भारत ने दी बधाई भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंडी बर्नहैम को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दोनों देशों के संबंध आगे भी मजबूत होंगे।
लंदन, एजेंसियां। ब्रिटेन की सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहैम सोमवार को आधिकारिक रूप से यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व की औपचारिक घोषणा के बाद अब वह मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की जगह लेंगे। बर्नहैम ने संकेत दिए हैं कि नई सरकार के गठन के साथ ही वह अपनी कैबिनेट का भी ऐलान करेंगे। सोमवार को होगा सत्ता हस्तांतरण ब्रिटेन की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सोमवार को कीर स्टारमर अपना इस्तीफा किंग चार्ल्स तृतीय को सौंपेंगे। इसके बाद एंडी बर्नहैम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा और वह प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे। कैबिनेट गठन पर तेज अटकलें एंडी बर्नहैम ने कहा है कि उनकी कैबिनेट में पार्टी के सभी वर्गों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व होगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रियों के नामों पर अंतिम फैसला अभी किया जा रहा है और पूरी सूची सोमवार को ही घोषित की जाएगी। ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में वित्त मंत्री और गृह मंत्री समेत कई अहम पदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 'नई राजनीति' का दिया संदेश लेबर पार्टी के नेता बनने के बाद अपने पहले संबोधन में बर्नहैम ने कहा कि उनकी सरकार देश में "नई राजनीति" की शुरुआत करेगी। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को अधिक अधिकार देने, आर्थिक विकास को गति देने, सामाजिक आवास बढ़ाने और लोगों का राजनीति पर भरोसा बहाल करने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया। कई चुनौतियों के साथ संभालेंगे जिम्मेदारी प्रधानमंत्री बनने के बाद एंडी बर्नहैम के सामने धीमी आर्थिक वृद्धि, महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार और वैश्विक कूटनीतिक चुनौतियों जैसे कई बड़े मुद्दे होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई कैबिनेट और शुरुआती फैसले उनकी सरकार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
वॉशिंगटन/लंदन: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा नीति, आव्रजन (इमिग्रेशन) और अमेरिका के साथ संबंधों को संभालने के तरीके ने स्टार्मर को राजनीतिक रूप से भारी नुकसान पहुंचाया। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि वह एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने खुद उन्हें नुकसान पहुंचाया।" 'पवनचक्कियों के चक्कर में खुद को नुकसान पहुंचाया' ट्रंप ने ब्रिटेन की ऊर्जा नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि स्टार्मर सरकार ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के बजाय पर्यावरणीय कारणों से उत्तरी सागर (North Sea) में तेल और गैस संसाधनों के दोहन को सीमित कर दिया। उन्होंने कहा, "ब्रिटेन अपनी अधिकांश ऊर्जा खरीदता है। जानते हैं कहां से? नॉर्वे से। और नॉर्वे को तेल कहां से मिलता है? उत्तरी सागर से। ब्रिटेन के पास इसका बेहतर हिस्सा है, लेकिन वे पवनचक्कियों और पर्यावरणीय नीतियों के कारण उसे छोड़ना चाहते हैं।" ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी नीतियों ने ब्रिटेन को ऊर्जा के मामले में कमजोर बनाया है। नाटो और ईरान मुद्दे पर भी जताई नाराजगी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि स्टार्मर एक तरह से उनके मित्र थे, लेकिन उन्होंने नाटो और ईरान से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका का पर्याप्त समर्थन नहीं किया। ट्रंप ने दावा किया कि साइप्रस स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे के उपयोग को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद पैदा हो गए थे। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा कि हम द्वीप पर उतरने की अनुमति नहीं दे सकते। ऐसा पहली बार हुआ था। आखिरकार वे मान गए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।" ट्रंप के मुताबिक, इस मामले ने भी स्टार्मर की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया। पहले ही कर चुके थे इस्तीफे की भविष्यवाणी डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कीर स्टार्मर के इस्तीफे की भविष्यवाणी कर दी थी। उनका कहना था कि ब्रिटेन में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की नीतियों से जनता की नाराजगी स्टार्मर के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही थी। दबाव के बीच दिया इस्तीफा कीर स्टार्मर ने सोमवार को लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। उन्होंने कहा है कि नए नेता और प्रधानमंत्री के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। पिछले कुछ महीनों में लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष, स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में खराब प्रदर्शन तथा लगातार गिरती लोकप्रियता ने स्टार्मर पर दबाव बढ़ा दिया था। एंडी बर्नहैम बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री ब्रिटेन की राजनीति में अब सबसे ज्यादा चर्चा अनुभवी लेबर नेता और ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम के नाम को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि संसद में उनकी वापसी के बाद वे प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो पिछले एक दशक में ब्रिटेन को सातवां प्रधानमंत्री मिल सकता है, जो देश की राजनीति में बढ़ती अस्थिरता को भी दर्शाता है।
लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि नए प्रधानमंत्री के चयन तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। इसके साथ ही स्टार्मर ने लेबर पार्टी के नेता पद से भी इस्तीफा दे दिया है। गिरती लोकप्रियता और बढ़ते दबाव के बीच लिया फैसला जुलाई 2024 में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाकर सत्ता में लाने वाले कीर स्टार्मर पिछले दो वर्षों से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद पर थे। उनके कार्यकाल के दौरान सरकार और लेबर पार्टी दोनों की लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती राजनीतिक चुनौतियों और पार्टी के भीतर असंतोष के बीच उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया है। एंडी बर्नहैम की जीत बनी टर्निंग पॉइंट राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हाल ही में हुए एक विशेष चुनाव में स्टार्मर के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माने जाने वाले एंडी बर्नहैम की जीत ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए। ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम सोमवार को सांसद के रूप में शपथ लेने वाले हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें सर्वसम्मति से लेबर पार्टी का नया नेता चुना जाएगा या पार्टी के भीतर नेतृत्व के लिए मुकाबला होगा। वेस स्ट्रीटिंग भी ठोक सकते हैं दावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, जिन्होंने पिछले महीने अपने पद से इस्तीफा दिया था, उन्होंने भी संकेत दिए हैं कि यदि लेबर पार्टी में नेतृत्व चुनाव होता है तो वह भी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। इससे पार्टी में नेतृत्व की दौड़ और दिलचस्प होने की संभावना है। पिछले कई दिनों से लग रही थीं अटकलें कीर स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही थीं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की थी। वहीं, मंत्री पीटर काइल ने रविवार को कहा था कि स्टार्मर राजनीतिक परिस्थितियों, चुनौतियों और अवसरों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। नए नेतृत्व की ओर बढ़ेगी लेबर पार्टी स्टार्मर के इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी नए नेतृत्व की तलाश में जुटेगी। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी। फिलहाल, कीर स्टार्मर नए नेता और प्रधानमंत्री के चयन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।
ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के भीतर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी बीच ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम ने मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर ब्रिटिश संसद में वापसी कर ली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत प्रधानमंत्री स्टार्मर के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है। मेकरफील्ड उपचुनाव ने बदला राजनीतिक समीकरण शुक्रवार सुबह घोषित नतीजों में एंडी बर्नहैम ने दक्षिणपंथी रिफॉर्म यूके पार्टी के उम्मीदवार को भारी अंतर से पराजित कर संसद में प्रवेश किया। उनकी जीत को केवल एक उपचुनाव की सफलता नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। ब्रिटेन के नियमों के अनुसार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल होने के लिए संसद का सदस्य होना आवश्यक है। ऐसे में मेकरफील्ड उपचुनाव बर्नहैम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। बर्नहैम बोले- यह बदलाव की रात है जीत के बाद एंडी बर्नहैम ने कहा कि देश की राजनीति अपने उद्देश्य के अनुरूप काम नहीं कर रही है और जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा, "हर कोई महसूस कर सकता है कि हमारा देश वहां नहीं है, जहां उसे होना चाहिए था। आज की रात एक नए बदलाव की शुरुआत हो सकती है। यह एक ऐसी राजनीति की शुरुआत है, जो एकता और उम्मीद पर आधारित होगी।" बर्नहैम ने अपनी जीत को देश की राजनीति के लिए "टर्निंग पॉइंट" करार दिया। क्यों बढ़ी कीर स्टार्मर की मुश्किलें? साल 2024 में कीर स्टार्मर के नेतृत्व में लेबर पार्टी ने 14 वर्षों बाद भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। सरकार बनने के बाद से उनकी लोकप्रियता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को कई क्षेत्रों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि विपक्षी दलों ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। इससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि एंडी बर्नहैम को पार्टी के एक प्रभावशाली वर्ग द्वारा संभावित वैकल्पिक नेता के रूप में देखा जा रहा है। क्या आने वाला है 'लीडरशिप चैलेंज'? बर्नहैम की संसद में वापसी के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जल्द ही पार्टी नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की स्थिति और कमजोर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबर पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति ब्रिटेन की राजनीति को नए दौर में ले जा सकती है और आने वाले दिनों में सत्ताधारी दल के अंदर नेतृत्व संघर्ष तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन की राजनीति में बढ़ी अनिश्चितता एंडी बर्नहैम की जीत ने ब्रिटिश राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपनी गिरती लोकप्रियता और चुनावी झटकों से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बर्नहैम का उभार लेबर पार्टी के भीतर सत्ता संतुलन बदलने की क्षमता रखता है। आने वाले सप्ताह ब्रिटेन की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं और यह स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या लेबर पार्टी अपने वर्तमान नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी या फिर देश को एक नए प्रधानमंत्री की ओर ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper इस सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी। भारत पहुंचने से पहले वह चीन की यात्रा करेंगी। उनका यह दौरा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने और प्रमुख साझेदार देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) के अनुसार, यात्रा के दौरान मंत्रिस्तरीय स्तर की बैठकों में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका में इबोला प्रकोप जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में कूपर गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। दोनों नेता भारत-ब्रिटेन संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक के बाद कूपर व्यापार, निवेश और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद करेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। FTA के बाद संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कूपर का यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर के लगभग एक वर्ष बाद हो रहा है। पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने इसे एक महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित समझौता बताया था, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा और बल विशेषज्ञों का मानना है कि कूपर की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती दे सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ब्रिटेन रक्षा, व्यापार, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
United Kingdom की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। सत्तारूढ़ Labour Party के 70 से अधिक सांसदों ने प्रधानमंत्री Keir Starmer से इस्तीफा देने की मांग की है। यह दबाव स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद बढ़ा है, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। चुनावी हार के बाद बढ़ा संकट रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सबसे बड़ा झटका वेल्स में लगा, जहां पार्टी ने 1999 के बाद पहली बार वेल्श संसद पर अपना नियंत्रण खो दिया। यह सत्ता अब Plaid Cymru के हाथों में चली गई। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगा है कि क्या स्टार्मर 2029 के आम चुनाव तक पार्टी का नेतृत्व जारी रख पाएंगे। चार सहयोगियों के इस्तीफे से बढ़ा दबाव सोमवार को संकट तब और गहरा गया जब स्टार्मर के चार मंत्री सहयोगियों ने इस्तीफा दे दिया। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ नेताओं ने निजी तौर पर नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत पर चर्चा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि: Yvette Cooper Shabana Mahmood जैसे वरिष्ठ मंत्रियों ने भी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद सत्ता के “सुव्यवस्थित हस्तांतरण” पर विचार करने की सलाह दी है। क्या स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है? लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, नेतृत्व के खिलाफ औपचारिक चुनौती शुरू करने के लिए 81 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। फिलहाल 70 से ज्यादा सांसद खुलकर विरोध में आ चुके हैं, इसलिए राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर असंतोष और बढ़ा तो स्टार्मर के खिलाफ औपचारिक नेतृत्व चुनौती भी शुरू हो सकती है। स्टार्मर ने इस्तीफे से किया इनकार बढ़ते दबाव के बावजूद Keir Starmer ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। लंदन में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा: “मुझे पता है कि कुछ लोग मुझ पर शक कर रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें गलत साबित करूंगा।” स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह पार्टी में भरोसा बहाल करने और सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। 2024 में मिली थी बड़ी जीत स्टार्मर जुलाई 2024 में बड़ी जीत के साथ सत्ता में आए थे। उन्होंने 14 साल पुराने Conservative Party शासन को खत्म कर लेबर पार्टी को सत्ता में वापसी दिलाई थी। हालांकि सत्ता में आने के बाद उन्हें: आर्थिक सुस्ती महंगाई और जीवन-यापन संकट ऊर्जा कीमतों राजनीतिक विवादों को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है।
ब्रिटेन के सम्राट Charles III और महारानी Camilla चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर अमेरिका पहुंच गए हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब हाल ही में व्हाइट हाउस संवाददाता डिनर में गोलीबारी हुई और ईरान को लेकर अमेरिका-ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव देखा जा रहा है। ऐतिहासिक दौरा यह किंग चार्ल्स के शासनकाल का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण विदेशी दौरा माना जा रहा है। यह यात्रा अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। ब्रिटिश सम्राट की यह अमेरिका यात्रा पिछले दो दशकों में पहली है। ट्रंप से निजी मुलाकात वॉशिंगटन पहुंचने के बाद किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने राष्ट्रपति Donald Trump और प्रथम महिला Melania Trump से निजी मुलाकात की। ट्रंप लंबे समय से ब्रिटिश शाही परिवार के प्रशंसक रहे हैं। कार्यक्रम में क्या खास? अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करेंगे व्हाइट हाउस में भव्य राजकीय भोज न्यूयॉर्क में 9/11 स्मारक पर श्रद्धांजलि वर्जीनिया में पर्यावरण संरक्षण परियोजनाओं का दौरा किंग चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले इतिहास के केवल दूसरे ब्रिटिश सम्राट बनेंगे। सुरक्षा के बीच जारी दौरा हाल ही में White House Correspondents' Association Dinner में हुई गोलीबारी के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है। Buckingham Palace ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ समीक्षा के बाद यात्रा को तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने का फैसला किया। ईरान मुद्दे पर तनाव ईरान को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हालिया मतभेदों ने इस यात्रा को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर सार्वजनिक नाराजगी जताई थी, हालांकि हाल के दिनों में उनके बयान कुछ नरम पड़े हैं। कैंसर उपचार के बीच सक्रियता 77 वर्षीय किंग चार्ल्स कैंसर का इलाज करा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वे अपने सार्वजनिक दायित्वों को निभा रहे हैं। "स्पेशल रिलेशनशिप" की परीक्षा ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer की सरकार इस दौरे को अमेरिका और ब्रिटेन के बीच "स्पेशल रिलेशनशिप" को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए 51 देशों की बैठक के बाद फैसला होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर खतरे को देखते हुए अब यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा की है कि दोनों देश मिलकर एक बहुराष्ट्रीय (Multinational) रक्षा मिशन का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना होगा। यह फैसला 51 देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें कई देशों ने इस मिशन में सहयोग देने की इच्छा जताई है। मिशन होगा पूरी तरह शांतिपूर्ण और रक्षात्मक ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि यह मिशन किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा समुद्री मार्गों की निगरानी और बारूदी सुरंगों (माइन) को हटाना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मिशन तब पूरी तरह लागू होगा जब क्षेत्र में चल रहा संघर्ष समाप्त हो जाएगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है अहम? होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का परिवहन होता है। हाल ही में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से बढ़ी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हाल के संघर्ष के दौरान ईरान पर इस जलमार्ग को बाधित करने के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया कि यह मार्ग अब पूरी तरह खुला है। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि समुद्री रास्ते फिर से चालू हो गए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे “जरूरत के समय कमजोर” बताया। ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त अगुवाई कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस मिशन में दर्जनों देश शामिल हो सकते हैं। कई देशों ने अपने सैन्य और तकनीकी संसाधन देने की पेशकश भी की है। मैक्रों ने कहा कि हालात में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन अभी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जर्मनी समेत कई देशों का समर्थन जर्मनी ने भी इस मिशन का समर्थन करते हुए कहा है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका की भागीदारी इस मिशन को और मजबूत बना सकती है। अगले हफ्ते आएगा पूरा रोडमैप ब्रिटेन सरकार ने बताया है कि इस मिशन की विस्तृत योजना अगले हफ्ते लंदन में होने वाली सैन्य बैठक के बाद सार्वजनिक की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।