पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित खान सर फायरिंग विवाद मामले में शुक्रवार को पटना सिविल कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के निदेशक रौशन आनंद की जमानत याचिका पर फैसला फिलहाल टल गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए निर्धारित की है। वहीं खान सर के दोनों निजी सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दी हैं। रौशन आनंद की बेल पर सोमवार को होगी सुनवाई रौशन आनंद ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे बाद में एडीजे-33 की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। सुनवाई के दौरान विरोधी पक्ष की ओर से बहस नहीं हो सकी। उनके अधिवक्ता ने अतिरिक्त समय की मांग करते हुए टाइम पीटिशन दायर किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय कर दी। खान सर के बॉडीगार्ड्स को नहीं मिली राहत मामले में खान सर के दोनों निजी सुरक्षा गार्डों की जमानत याचिका पर मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास अनुराग वर्मा की अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे दोनों सुरक्षा गार्डों को फिलहाल न्यायिक राहत नहीं मिल सकी। खान सर को पहले मिल चुकी है अंतरिम राहत इस मामले में आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास के आरोपी फैसल खान उर्फ खान सर को पहले ही अदालत से राहत मिल चुकी है। पटना सिविल कोर्ट ने उनके खिलाफ 'नो कोर्सिव एक्शन' का आदेश जारी किया है। इसका अर्थ है कि अगली सुनवाई या नए आदेश तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। 2 जून की घटना के बाद दर्ज हुई थीं दो एफआईआर यह पूरा मामला 2 जून को पटना के मुसल्लहपुर स्थित खान ग्लोबल स्टडीज कोचिंग सेंटर में हुए हंगामे, पथराव, मारपीट और कथित फायरिंग से जुड़ा है। घटना के बाद कदमकुआं थाना पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की थीं। पहली एफआईआर में रौशन आनंद समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि दूसरी प्राथमिकी सोशल मीडिया पर वायरल फायरिंग वीडियो के आधार पर दर्ज की गई थी। मामले की जांच अभी जारी है।
पटना, एजेंसियां। पटना से बड़ी खबर आ रही है। ग्लोबल स्टडीज के संचालक खान सर ने पटना सिविल कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इसके साथ ही उनके वकील ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। खान सर पर हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट का आरोप लगा है। आत्मरक्षा में की गई थी फायरिंग कोर्ट में खान सर के वकील ने कहा कि खान सर के गार्डस ने किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आत्मरक्षा में फायरिंग की थी। फायरिंग में किसी को भी कोई चोट नहीं आई थी। फिलहाल सरेंडर का प्रोसेस किया जा रहा है। इसके बाद एंट्रीसिपेट्री बेल के लिए आवेदन दिया जाएगा।
पटना, एजेंसियां। पटना के मशहूर कोचिंग टीचर और यूट्यूबर खान सर के कोचिंग सेंटर के बहार हुए मामले में रोज नया ट्विस्ट सामने आ रहा है। दरअसल 2 जून 2026 की रात उनके कोचिंग संस्थान के बाहर हुई हिंसक घटना ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर मामला कोचिंग सेंटर पर हमले का बताया गया था, लेकिन बाद में एक वायरल वीडियो और पुलिस जांच के बाद खुद खान सर के खिलाफ भी मामला दर्ज हो गया है। क्या है मामला? बात दे 2 जून की रात पटना के कदमकुआं-मुसल्लहपुर इलाके में स्थित खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर हंगामा हुआ। आरोप है कि कुछ लोगों ने कोचिंग सेंटर पर हमला किया, पत्थरबाजी की और एक सुरक्षा गार्ड को घायल कर दिया। शुरुआती बयान में खान सर ने दावा किया था कि उनके संस्थान के बाहर 8 –10 राउंड फायरिंग हुई और इसके पीछे प्रतिद्वंद्वी कोचिंग से जुड़े लोगों का हाथ बताया गया।पुलिस ने शुरुआती जांच में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया, जिनमें एक प्रतिद्वंद्वी कोचिंग संस्थान का संचालक भी शामिल था। लेकिन बाद में 3 जून की सुबह खान सर मीडिया से बातचीत के दौरान फायरिंग की बात से पलट गए। और कहा कि बीते रात मौके पर बहुत अफरा तफरी मच गई थी इसलिए वे स्तिथि को समझ नहीं पाए। लेकिन बड़ा ट्विस्ट तब आया जब घटना के कुछ समय बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें कथित तौर पर खान सर के दो गार्ड हवा में फायरिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने दोनों गार्डों को हिरासत में लेकर पूछताछ कि। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ में दोनों गार्डों ने बताया कि फायरिंग उन्होंने खान सर के कहने पर की थी। पुलिस के अनुसार गार्डों ने बयान दिया कि खान सर ने उनसे कहा था, "तुम फायर करो, बाकी मैं संभाल लूंगा।" इसी बयान के आधार पर पुलिस ने खान सर के खिलाफ FIR दर्ज की। खान सर पर कौन-कौन से आरोप लगे हैं? हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) से संबंधित धाराएं, आर्म्स एक्ट के प्रावधान, और कथित रूप से उकसाने/निर्देश देने से जुड़े आरोप लगाए हैं। हालांकि अंतिम दोष सिद्ध होना अदालत और जांच पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह आरोप हैं, साबित अपराध नहीं। फिलहाल क्या है स्तिथि? वर्तमान स्तिथि की बात करे तो खान सर पर आर्म्स एक्ट और हत्या की कोशिश के तहत केस दर्ज किया गया है। इस बीच माना जा रहा है कि कभी भी खान सर की गिरफ्तारी हो सकती है। शुक्रवार को मामला दर्ज होने के बाद ही उनकी गिरफ्तारी होने की संभावना थी। लेकिन शुक्रवार को पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी। जानकारी के मुताबिक जानकारी के मुताबिक, खान सर की कोचिंग के बाहर शुक्रवार रात 10 बजे से शनिवार की सुबह तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। लेकिन पुलिस अब तक खान सर को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। खान सर की कोचिंग के बाहर शुक्रवार की रात ही बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे। इस दौरान कदमकुआं थाने की पुलिस भी पहुंची थी। पुलिस ने छात्रों से घर जाने की अपील की। लेकिन छात्र कोचिंग के बाहर सुबह तक डटे रहे। रातभर में 4 से 5 बार कदमकुआं थाने की पुलिस आई। लेकिन खान सर की गिरफ्तारी के लिए नहीं बल्कि छात्रों को समझाने के लिए। कई बार पुलिस ने आकर अनाउंसमेंट किया- हट जाइए, लौट जाइए। लेकिन छात्र नहीं माने। इससे पहले भी शुक्रवार को लॉ एंड ऑर्डर को लेकर आईजी ऑफिस में हाई लेवल मीटिंग हुई थी। इसके बाद छात्रों से अपील की गई थी कि वे किसी के भी बहकावे में ना आएं। ऐसे में आज मामले में क्या कुछ एक्शन लिया जाता है, यह देखने वाली बात होगी
पटना, एजेंसियां। पटना स्थित अपने कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और फायरिंग विवाद के बीच खान सर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने फायरिंग को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बताया और कहा कि हालात ऐसे थे कि सुरक्षा गार्डों को कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस के पहुंचने से पहले बिगड़ चुके थे हालात खान सर ने कहा कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद नहीं थी और उसे पहुंचने में समय लगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक पुलिस नहीं पहुंची थी, तब तक सुरक्षा गार्ड क्या करते। उनके अनुसार सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और उन्होंने वही किया। ‘गार्ड ने किसी व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया’ फायरिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर खान सर ने कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा गार्ड ने किसी व्यक्ति को निशाना बनाकर गोली नहीं चलाई, बल्कि आत्मरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई थी। गार्ड के साथ मारपीट का आरोप खान सर ने बताया कि उनके गार्ड के साथ हमलावरों ने बुरी तरह मारपीट की थी। उनका कहना था कि गार्ड को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। ऐसी स्थिति में सुरक्षा कर्मियों से निष्क्रिय रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। भावुक हुए खान सर छात्रों से बातचीत के दौरान खान सर ने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनके साथ कोई बड़ी घटना हो जाए। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “ये लोग चाहते हैं कि खान सर के फोटो पर माला चढ़ जाए।” CCTV फुटेज दिखाकर दी सफाई विवाद के बीच खान सर छात्रों को CCTV फुटेज दिखाकर पूरी घटना समझाते नजर आए। वहीं फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। दोनों गार्डों से पूछताछ की गई है और उनके हथियार सत्यापन के लिए जब्त कर लिए गए हैं। मामले में नई एफआईआर दर्ज कर जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।