कोलकाता: कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NSCBI Airport) परिसर स्थित ऐतिहासिक गौरीपुर जामा मस्जिद में बाहरी लोगों के प्रवेश और सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एयरपोर्ट प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा किसी भी अन्य विषय से अधिक महत्वपूर्ण है। शुभेंदु अधिकारी बोले- संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सर्वोपरि पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक में भाजपा की संगठनात्मक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जिन स्थानों का सामरिक और सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व होता है, वहां बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोलकाता हवाई अड्डा संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं: अधिकारी शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह फैसला किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी समुदायों को कानून के दायरे में रहकर अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की पूरी स्वतंत्रता है। बकरीद और मुहर्रम जैसे आयोजनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नियमों का पालन होने पर किसी तरह की समस्या नहीं होती। क्या है पूरा मामला? एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, हवाई अड्डा परिसर के भीतर रनवे के निकट स्थित करीब 136 वर्ष पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इसी कारण शनिवार से तीन दिनों के लिए मस्जिद में सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक लगाई गई है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। भाजपा विधायक ने उठाए सुरक्षा के सवाल दमदम उत्तर से भाजपा विधायक सौरभ सिकदर ने भी इस मुद्दे पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि एयरपोर्ट परिसर उच्च सुरक्षा क्षेत्र है, जहां प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक पहचान जरूरी होती है। उन्होंने दावा किया कि नमाज के लिए आने वाले बाहरी लोगों की सुरक्षा जांच पर्याप्त नहीं होती। सिकदर ने यह भी कहा कि मस्जिद की मौजूदा स्थिति के कारण एयरपोर्ट के दोनों रनवे के विस्तार और पूर्ण उपयोग में भी बाधा आती है। मस्जिद समिति ने जताई आपत्ति मस्जिद समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने प्रवेश पास रोके जाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट प्रशासन के साथ बातचीत जारी थी, ऐसे में नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने मस्जिद को 135 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए कहा कि समिति सभी पक्षों के साथ बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। सुरक्षा बनाम धार्मिक व्यवस्था पर बहस कोलकाता एयरपोर्ट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर अब सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां एयरपोर्ट प्रशासन और भाजपा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं, वहीं मस्जिद समिति बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रही है। फिलहाल मरम्मत कार्य पूरा होने तक प्रतिबंध जारी रहेगा।
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शुक्रवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। रनवे पर खड़े अमीरात एयरलाइंस के विमान के पास काम कर रहे दो ग्राउंड स्टाफ अचानक आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और दोनों कर्मचारियों को तत्काल चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, हादसा उस समय हुआ जब अमीरात एयरलाइंस की एक फ्लाइट कोलकाता हवाई अड्डे पर उतर चुकी थी और ग्राउंड स्टाफ विमान से यात्रियों का सामान उतारने के कार्य में जुटे थे। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ अचानक बिजली गिरी, जिसकी चपेट में दोनों कर्मचारी आ गए। विमान और उसमें मौजूद यात्रियों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा। अधिकारियों के अनुसार, दोनों घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है। दक्षिण बंगाल में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट इस बीच, अलीपुर मौसम विभाग ने कोलकाता सहित पूरे दक्षिण बंगाल में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के 10 जिलों के लिए 'येलो अलर्ट' घोषित किया है। मौसम विभाग के मुताबिक, सप्ताहांत में बारिश की तीव्रता और बढ़ सकती है। शनिवार और रविवार को कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका है, जबकि यह स्थिति अगले सप्ताह मंगलवार तक बनी रह सकती है। जलजमाव से प्रभावित हुआ जनजीवन लगातार हो रही बारिश के कारण कोलकाता के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई प्रमुख सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम ने विशेष नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) सक्रिय कर दिया है। सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और विभिन्न इलाकों की निगरानी सीसीटीवी तथा ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है।
TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज, इनमें ₹440 करोड़ कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान एक महिला बेहोश हो गई। TMC कार्यकर्ता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे थे, जो दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर लौट रहे थे। अभिषेक के एक समर्थक ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग एयरपोर्ट पर आए और TMC कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करने लगे। समर्थक का दावा है कि उनके हाथों में अंडे थे और बाद में उन्होंने हथियार भी निकाले। उन्होंने सवाल उठाया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार अंदर कैसे पहुंचे। 31 मई को भी अभिषेक के साथ मारपीट हुई थी इससे पहले भी 31 मई को पश्चिम बंगाल के सोनारपुर दक्षिण में अभिषेक से मारपीट हुई थी। यहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ित टीएमसी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। TMC के 3 बैंक एकाउंट फ्रीज वहीं, शुक्रवार देर रात TMC के HDFC बैंक के 3 अकाउंट्स 50200059108322, 50200063079047, 50200063079034 को फ्रीज किया गया। इनमें कुल मिलाकर लगभग ₹440 करोड़ जमा हैं।
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर एक गंभीर सुरक्षा चूक सामने आई, जब पार्किंग क्षेत्र में खड़े इंडिगो के विमान से एक कार टकरा गई। यह घटना उस समय हुई जब विमान गुवाहाटी के लिए उड़ान संख्या 6E 6663 के तहत तैयार किया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पार्किंग बे में खड़ी एक कार अचानक अनियंत्रित होकर आगे बढ़ी और सीधे विमान के इंजन से जा टकराई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इसे एक बड़ी सुरक्षा चूक माना जा रहा है। घटना के तुरंत बाद संबंधित विमान को एहतियातन ग्राउंडेड कर दिया गया और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई। एयरलाइन ने यात्रियों की असुविधा को देखते हुए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की, ताकि उड़ान संचालन प्रभावित न हो। इंडिगो ने अपने बयान में कहा है कि विमान को दोबारा सेवा में शामिल करने से पहले उसकी गहन तकनीकी जांच और आवश्यक रखरखाव किया जाएगा, साथ ही इस पूरे मामले में एयरपोर्ट अधिकारियों के साथ मिलकर जांच की जा रही है। इस घटना ने एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और वाहन नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते आने वाले दिनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त किए जाने की संभावना जताई जा रही ।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विमान गुरुवार को खराब मौसम की वजह से कोलकाता एयरपोर्ट पर तय समय पर लैंड नहीं कर सका। मुख्यमंत्री बीरभूम दौरे से लौट रही थीं, लेकिन जैसे ही उनका विमान दमदम पहुंचने वाला था, मौसम अचानक बिगड़ गया। तेज आंधी, बारिश और खराब विजिबिलिटी के कारण विमान को एयरपोर्ट पर उतरने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस वजह से विमान को आसमान में कुछ देर तक चक्कर लगाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने गुरुवार दोपहर बीरभूम जिले के पांडवेश्वर इलाके में एक बैठक की थी। इसके बाद वह आंदल से विमान के जरिए कोलकाता के लिए रवाना हुईं। विमान को शाम 4:10 बजे दमदम स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना था, लेकिन मौसम ने अचानक करवट ले ली और लैंडिंग टालनी पड़ी। रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्धारित समय के बाद भी विमान काफी देर तक नहीं उतर पाया, जिससे कुछ समय के लिए हलचल का माहौल बन गया। राणाघाट, कैखाली, सोनारपुर और डायमंड हार्बर के ऊपर चक्कर सूत्रों के अनुसार, खराब मौसम की वजह से मुख्यमंत्री का विमान राणाघाट, कैखाली, सोनारपुर और डायमंड हार्बर के ऊपर काफी देर तक मंडराता रहा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की ओर से विमान को तब तक इंतजार करने को कहा गया, जब तक मौसम और रनवे की स्थिति सुरक्षित न हो जाए। ऐसे हालात में पायलट आमतौर पर विमान को होल्डिंग पैटर्न में रखते हैं, ताकि उतरने के लिए सही समय मिल सके। मौसम विभाग ने पहले ही जारी किया था अलर्ट इस पूरे घटनाक्रम के बीच मौसम विभाग की भूमिका भी अहम रही। विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि दमदम ही नहीं, बल्कि उत्तर 24 परगना और आसपास के बड़े इलाके में मौसम खराब रह सकता है। तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई गई थी। इसी अलर्ट के बाद एयरपोर्ट और प्रशासनिक एजेंसियां पहले से सतर्क थीं। सुरक्षा को प्राथमिकता, घबराने की बात नहीं हालांकि इस घटना से कुछ देर के लिए चिंता जरूर बढ़ी, लेकिन इसे सामान्य एविएशन सेफ्टी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। खराब मौसम के दौरान विमान को लैंडिंग से रोकना यात्रियों और क्रू की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम होता है। मुख्यमंत्री के विमान के साथ भी यही एहतियात बरता गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।