अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में रुकावटों के बीच देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर भारतीय तेल कंपनियों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और इंडियन ऑयल (IOC) ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। कंपनियों ने क्या कहा? तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से कहा: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है सप्लाई चेन सामान्य रूप से काम कर रही है लोगों को घबराकर खरीदारी करने की कोई जरूरत नहीं BPCL का बयान भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने कहा कि: पेट्रोल-डीजल की कमी की खबरें पूरी तरह गलत हैं कंपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है ईंधन की निर्बाध आपूर्ति जारी है HPCL ने भी किया साफ हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने ग्राहकों से अपील की: “देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य खपत जारी रखें।” क्यों फैली अफवाह? 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद: खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तेल और गैस टैंकरों में देरी की खबरें आईं इसी के चलते लोगों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ने लगी। सरकार और पीएम का संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में कहा था कि: खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं हालांकि, फिलहाल देश में सप्लाई सामान्य बनी हुई है। क्या करें उपभोक्ता? अफवाहों पर भरोसा न करें घबराकर ज्यादा ईंधन खरीदने से बचें सामान्य तरीके से ही उपयोग जारी रखें
नई दिल्ली,एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। एलपीजी से भरा भारतीय जहाज ‘नंदा देवी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के Vadinar Port पहुंच गया है। यह जहाज लगभग 46,500 मीट्रिक टन तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर आया है, जो देश की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। खतरनाक समुद्री मार्ग पार कर पहुंचा जहाज ‘नंदा देवी’ दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर भारत पहुंचा है। इस क्षेत्र में Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना भारत के लिए रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। पहले भी पहुंच चुका है एक जहाज इससे पहले एक अन्य जहाज ‘शिवालिक’ भी एलपीजी लेकर Mundra Port पहुंच चुका है। लगातार दो जहाजों का सुरक्षित आगमन यह दर्शाता है कि भारत ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में सफलता हासिल की है। ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना बड़ी चुनौती भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% और कच्चे तेल का करीब 88% आयात करता है। इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। ऐसे में क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सप्लाई बाधित होने का खतरा बना रहता है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। नाविकों की सुरक्षा पर भी फोकस हालांकि दो जहाज सुरक्षित पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में कई भारतीय जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार और नौसेना लगातार उनकी निगरानी कर रही हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं। आगे की रणनीति पर टिकी नजरें विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नंदा देवी’ का सफल आगमन भारत की मजबूत रणनीतिक योजना और कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। अब आने वाले दिनों में अन्य जहाजों के सुरक्षित आगमन पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
नई दिल्ली,एजेंसियां। मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध और तेल संकट की स्थिति के बीच, भारतीय केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश में कच्चा तेल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया कि देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पेट्रोल पंप सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि LPG और CNG की 100 फीसदी सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। कमर्शियल LPG की सप्लाई प्राथमिकता सुजाता शर्मा ने बताया कि कई राज्यों में कमर्शियल LPG का वितरण शुरू कर दिया गया है, जिसमें अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा, LPG की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए राज्य सरकारें कार्रवाई कर रही हैं। LPG से PNG पर शिफ्ट हो सकते हैं उपभोक्ता उन्होंने यह भी बताया कि जो उपभोक्ता LPG से PNG पर शिफ्ट होना चाहते हैं, वे कस्टमर केयर से संपर्क कर सकते हैं। PNG कंपनियों ने नए उपभोक्ताओं के लिए विशेष ऑफर जारी किए हैं। भारत आ रहा है LPG शिप भारत सरकार के शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव ने जानकारी दी कि भारतीय ध्वज वाला जहाज 'जग लाडकी' 81,000 टन मुरबान कच्चे तेल के साथ भारत के रास्ते में सुरक्षित रूप से आ रहा है और जल्द ही मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा। इसके साथ ही, एक अन्य शिवालिक LPG शिप भी भारत की ओर बढ़ रहा है और 16 मार्च को भारत पहुंचेगा।
रायपुर: देश के कई हिस्सों में रसोई गैस को लेकर अफरातफरी के माहौल के बीच Chhattisgarh में प्रशासन ने जमाखोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमों ने राज्यभर में 102 जगहों पर छापेमारी कर 741 LPG सिलेंडर जब्त किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में घरेलू LPG, पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और इनके वितरण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उच्चस्तरीय बैठक में समीक्षा राज्य के मुख्य सचिव Vikas Sheel ने 12 मार्च को खाद्य विभाग की सचिव Reena Baba Saheb Kangale और तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। बैठक में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए गए। कई राज्यों में लंबी कतारें शुक्रवार को देश के कई शहरों में LPG सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। कुछ जगहों से होटल और भोजनालय बंद होने तथा गैस की जमाखोरी की भी खबरें सामने आई हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने बार-बार कहा है कि देश में LPG की कोई कमी नहीं है। PNG कनेक्शन अपनाने की अपील सरकार ने पाइप के जरिए मिलने वाली रसोई गैस यानी Piped Natural Gas (PNG) सुविधा के करीब रहने वाले करीब 60 लाख परिवारों से इस विकल्प को अपनाने की अपील की है, ताकि सिलेंडर पर दबाव कम हो सके। कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद घरेलू गैस की आपूर्ति बाधित नहीं होगी। उन्होंने बताया कि 5 मार्च से अब तक घरेलू LPG उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि संकट का फायदा उठाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
देश में LPG आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जनता के साथ लगातार संपर्क में रहें और किसी भी तरह की गलत जानकारी या घबराहट फैलाने की कोशिशों पर कड़ी नजर रखें। सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सबसे अहम है कि सरकार और मंत्री सीधे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं, ताकि किसी तरह की अफवाह या भ्रम की स्थिति न बने। जनता से संपर्क बनाए रखने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से लगातार संवाद बनाए रखें। जनता की चिंताओं को सुनें, उन्हें वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं और जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी करते रहें। ‘भारत की तैयारियां मजबूत हैं’ प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि भारत की तैयारियां कई पड़ोसी देशों और अन्य राष्ट्रों की तुलना में अधिक मजबूत हैं और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वैश्विक परिस्थिति से जुड़ी चुनौती प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा हालात सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है। ऐसे में भारत की रणनीति भी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की जा रही है। अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर बैठक में यह भी कहा गया कि जो लोग मौजूदा स्थिति को लेकर अनावश्यक घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाए। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी को तुरंत रोका जाए और सही तथ्य लोगों तक पहुंचाए जाएं। सोशल मीडिया पर तथ्य आधारित जवाब देने के निर्देश प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विपक्ष या अन्य स्रोतों से फैलाए जा रहे दावों का तुरंत और तथ्य आधारित जवाब दिया जाए, ताकि गलत सूचनाओं से माहौल खराब न हो।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने लगा है। खासतौर पर रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने के बाद भारत सरकार एक्शन मोड में आ गई है। रसोई गैस और कच्चे तेल की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए सरकार और भारतीय ऊर्जा कंपनियां नए वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों की तलाश में जुट गई हैं। दरअसल, भारत खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता रहा है। लेकिन ईरान-इजरायल तनाव के चलते इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बाधित होने की आशंका के बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया, रूस, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने की रणनीति तैयार की है। रूस बना बड़ा वैकल्पिक स्रोत ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च के पहले 11 दिनों में रूस से भारत का तेल आयात करीब 50% बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है, जबकि फरवरी में यह लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन था। भारतीय कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation और Reliance Industries ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल के सौदे किए हैं। हालांकि अब रूस तेल पर पहले जैसी छूट नहीं दे रहा है। इस बीच अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए भारत को अस्थायी छूट भी दी है। अमेरिका से भी बढ़ी खरीद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने के लिए अमेरिका से भी तेल और गैस की खरीद बढ़ाई है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी GAIL India ने अमेरिकी कंपनियों के साथ एलएनजी (LNG) की बड़ी डील की है, ताकि घरेलू बाजार में गैस की संभावित कमी को पूरा किया जा सके। लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से भी आयात भारत अब ऐसे रास्तों से तेल मंगा रहा है जो Strait of Hormuz पर निर्भर नहीं हैं। पहली बार भारत ने दक्षिण अमेरिकी देश Guyana से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। बताया जा रहा है कि Indian Oil Corporation और Hindustan Petroleum ने वहां से करीब 40 लाख बैरल तेल मंगवाया है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका के Nigeria और Angola से भी अतिरिक्त तेल की खेप मंगाई जा रही है। प्राकृतिक गैस के नए स्रोत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में लगभग 25% तक की कमी को देखते हुए भारत ने कई नए देशों से संपर्क किया है। सरकार ने Algeria, Norway और Canada से एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति के लिए बातचीत शुरू की है। बताया जा रहा है कि नए स्रोतों से खरीदे गए दो बड़े एलएनजी कार्गो इस समय भारत की ओर आ रहे हैं। होर्मुज पर निर्भरता घटाने की रणनीति भारत अब अपनी तेल जरूरतों का लगभग 70% हिस्सा ऐसे समुद्री मार्गों से मंगाने लगा है जो होर्मुज के बाहर हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा करीब 55% था। देश फिलहाल करीब 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र, खासकर मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम की जा सके। साथ ही सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए रिफाइनरियों को गैस उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं। भारत की ऊर्जा जरूरतें भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है और अपनी लगभग 88% तेल जरूरतें विदेशों से पूरी करता है। देश में प्रतिदिन करीब 5.8 मिलियन बैरल तेल की खपत होती है। इसमें से लगभग 25 से 27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देशों से Strait of Hormuz के रास्ते आता रहा है। इसके अलावा भारत अपनी करीब 55% एलपीजी और लगभग 30% एलएनजी भी आयात करता है, जिसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, सीएनजी और घरेलू रसोई गैस के रूप में होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच भारत द्वारा ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण भविष्य में आपूर्ति सुरक्षा के लिहाज से एक अहम रणनीतिक कदम साबित हो सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।