Madhya Pradesh news

Bhojshala complex in Dhar after High Court verdict recognizing it as Maa Saraswati temple
भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हैदराबाद के विधायक टी राजा सिंह ने PM मोदी से की ‘भव्य मंदिर’ बनाने की अपील

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला परिसर को मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी का मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को यहां पूजा का अधिकार दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह परिसर राजा भोज से जुड़ा हुआ है। इस फैसले के बाद हैदराबाद के गोशामहल से विधायक T. Raja Singh ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से अपील करते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर की तरह भोजशाला में भी भव्य मंदिर का निर्माण कराया जाना चाहिए। ‘124 साल के संघर्ष के बाद मिला फैसला’ टी राजा सिंह ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि यह फैसला हिंदू समुदाय के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी हिंदू संगठनों ने लगातार इस मुद्दे को उठाया और करीब 124 साल बाद हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला आया है। उन्होंने कहा, “जिस तरह अयोध्या में राम मंदिर बना, उसी तरह भोजशाला मंदिर का भी भव्य निर्माण होना चाहिए। केवल भारत ही नहीं, विदेशों से भी लोग यहां दर्शन करने आएंगे।” 98 दिन तक चला था वैज्ञानिक सर्वे भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में पांच याचिकाएं और तीन इंटरवेंशन आवेदन दाखिल किए गए थे। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने 15 मई को यह फैसला सुनाया। इससे पहले अदालत के आदेश पर 2024 में परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे कराया गया था। हिंदू पक्ष के वकीलों के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले में लगातार 24 दिनों तक सुनवाई की थी और 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष के वकील ने फैसले को बताया ऐतिहासिक हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार देते हुए भोजशाला परिसर को राजा भोज से जुड़ा स्थल माना है। उन्होंने बताया कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को परिसर के संरक्षण की जिम्मेदारी जारी रखने का निर्देश दिया है। साथ ही पहले का वह आदेश भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। लंदन संग्रहालय में रखी प्रतिमा की वापसी पर भी निर्देश अदालत ने उस प्रतिमा की वापसी की मांग पर भी सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है, जो फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में रखी हुई बताई जाती है। वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को भी सरकार के सामने अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि देने पर भी विचार करने को कहा गया है। क्या है भोजशाला विवाद? धार स्थित भोजशाला परिसर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद का केंद्र रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। 1935 में धार रियासत ने मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी थी। 1995 में हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की इजाजत दी गई। 2003 में यह व्यवस्था फिर लागू हुई। 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार एक साथ पड़ने पर विवाद बढ़ा। 2022 में हिंदू पक्ष ने अदालत में नई याचिकाएं दाखिल कीं। 2024 में कोर्ट के आदेश पर 98 दिनों तक सर्वे हुआ। 15 मई 2026 को हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाया। ‘अब वहां केवल पूजा होगी’ हिंदू पक्ष के वकीलों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद अब भोजशाला परिसर में केवल हिंदू पूजा-अर्चना होगी। साथ ही सरकार को स्थल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस फैसले के बाद देशभर में राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष आगे की कानूनी रणनीति पर विचार कर रहा है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Security tightened near Bhojshala complex in Dhar ahead of Madhya Pradesh High Court verdict
भोजशाला विवाद पर आज आ सकता है हाई कोर्ट का फैसला, डिप्टी सीएम बोले- ‘शांति से स्वीकार करें निर्णय’

Madhya Pradesh के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद पर आज बड़ा फैसला आ सकता है। Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 15 मई की तारीख तय की है। फैसले से पहले प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, प्रशासन ने की शांति की अपील धार जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि भोजशाला परिसर Archaeological Survey of India यानी ASI द्वारा संरक्षित स्मारक है। प्रशासन सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर लगातार नजर बनाए हुए है। किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा का बयान मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम Jagdish Devda ने कहा कि सरकार कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि जो भी निर्णय आए, उसे शांति और संयम के साथ स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि धार में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। क्या है भोजशाला-कमाल मौला विवाद? धार स्थित भोजशाला को हिंदू समुदाय माता वाग्देवी यानी देवी सरस्वती का मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसके अलावा जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि यह परिसर मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल का हिस्सा रहा है। ASI सर्वे में क्या सामने आया? ASI ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की थी। रिपोर्ट में संकेत दिए गए कि परिसर में मौजूद संरचना से पहले यहां परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल इमारत मौजूद थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान विवादित ढांचे के निर्माण में पुराने मंदिरों के हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल किया गया था। हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख इस बात के प्रमाण हैं कि परिसर मूल रूप से मंदिर था। 98 दिनों तक चला था सर्वे हाई कोर्ट ने 11 मार्च 2024 को ASI को वैज्ञानिक सर्वेक्षण का आदेश दिया था। इसके बाद 22 मार्च 2024 से सर्वे शुरू हुआ, जो करीब 98 दिनों तक चला। ASI ने 15 जुलाई 2024 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में जमा की थी। अब सभी की नजर हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Rescue teams search Bargi Dam after cruise capsized in storm, Madhya Pradesh
मध्यप्रदेश: बरगी डैम क्रूज हादसे के बाद सख्त कार्रवाई, जांच के आदेश, संचालन पर रोक

बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नर्मदा नदी पर बने इस बांध में गुरुवार (30 अप्रैल) शाम अचानक आई तेज आंधी की चपेट में आकर एक क्रूज पलट गया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। सीएम मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश मोहन यादव ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस हादसे की जांच पर्यटन विभाग द्वारा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सीएम ने बताया कि राहत और बचाव कार्य में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमों ने मिलकर अभियान चलाया। क्रूज संचालन पर फिलहाल रोक हादसे के बाद सरकार ने राज्य में सभी क्रूज संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी है। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि जांच पूरी होने तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा। सेना के गोताखोर भी अभियान में शामिल घटना के बाद जिला प्रशासन के अनुरोध पर सेना की गोताखोर टीमों को मौके पर बुलाया गया। इन टीमों ने राहत कार्य में अहम भूमिका निभाई और कई शवों को बरामद किया। बहादुर स्थानीय लोगों को मिलेगा सम्मान सीएम मोहन यादव ने कहा कि हादसे के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Rescue teams recover mother and child after tragic Jabalpur boat accident
जबलपुर नाव हादसा: 4 साल के बेटे को सीने से लगाए मिली मां, मंजर देख रो पड़े लोग

जबलपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। रेस्क्यू टीम को एक मां और उसके 4 साल के बेटे के शव मिले, जो आखिरी पल तक एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। दिल दहला देने वाला दृश्य शुक्रवार (1 मई) को चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब मां-बेटे के शव पानी से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। दोनों के शरीर पर लाइफ जैकेट बंधी हुई थी, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और माहौल गमगीन हो गया। बरगी डैम में हुआ हादसा यह हादसा बरगी डैम के जलाशय में गुरुवार (30 अप्रैल) को हुआ। करीब 29 लोगों को लेकर जा रही एक क्रूज नाव अचानक आए तेज तूफान और हवाओं की वजह से पलट गई। हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और रेस्क्यू ऑपरेशन घटना के बाद SDRF, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। बचाव अभियान लगातार जारी है और लापता लोगों की तलाश की जा रही है। मौके पर पहुंचे राज्य के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह भी इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे अचानक तेज हवाएं चलने लगीं और जलाशय का पानी उफान पर आ गया। यात्रियों ने खतरा भांपते हुए नाव को किनारे ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर दी गई। कुछ ही देर में नाव असंतुलित होकर पलट गई। स्थानीय लोगों ने बचाई कई जानें हादसे के बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाया। रस्सियों की मदद से कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, खासकर वे लोग जिन्होंने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। हालांकि, कई लोगों को बचाया नहीं जा सका। जांच और सवाल इस हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों और नाव संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर किन लापरवाहियों की वजह से यह हादसा हुआ।  

surbhi मई 1, 2026 0
Burnt residential house and damaged electric car after deadly fire incident in Indore colony
इंदौर अग्निकांड: इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग से उठी चिंगारी ने ली 7 जिंदगियां, रात के सन्नाटे में मचा कोहराम

इंदौर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को सदमे में डाल दिया है। बुधवार तड़के करीब 3 से 4 बजे के बीच बंगाली चौराहे के पास स्थित एक रिहायशी कॉलोनी में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के 7 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से झुलस गए। कैसे शुरू हुआ मौत का सिलसिला प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसे की जड़ एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की चार्जिंग से जुड़ी है। पुगलिया परिवार ने अपनी इलेक्ट्रिक कार को घर के बाहर चार्जिंग पर लगाया था। देर रात तक चार्जिंग जारी रही, इसी दौरान चार्जिंग पॉइंट में अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। देखते ही देखते कार आग का गोला बन गई और लपटें तेजी से घर के भीतर फैल गईं। घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों तक आग पहुंचते ही जोरदार धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। सोते रह गए लोग, नहीं मिला बचने का मौका हादसे के वक्त सभी लोग गहरी नींद में थे। धमाकों और आग की तेजी इतनी ज्यादा थी कि लोगों को संभलने या बाहर निकलने का समय तक नहीं मिला। संकरी गलियों और तेज लपटों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भी काफी मुश्किलें आईं। बताया जा रहा है कि घर में किसी पारिवारिक कार्यक्रम के कारण कई रिश्तेदार भी ठहरे हुए थे, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ गई। राहत कार्य और प्रशासन की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही दमकल और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने में काफी समय लगा। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और गैस सिलेंडर विस्फोट को मुख्य कारण माना जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रिक कार की बैटरी में आग लगने की संभावना की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। उठते सवाल: क्या टल सकता था हादसा? यह दर्दनाक हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है- क्या रातभर बिना निगरानी के EV चार्जिंग सुरक्षित है?   क्या घरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मानकों के अनुरूप है?   क्या अग्नि सुरक्षा उपायों की अनदेखी इस त्रासदी की वजह बनी?   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चार्जिंग सिस्टम में सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता या समय रहते बिजली आपूर्ति बंद की जाती, तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0