1460 – स्विट्जरर्लैंड में बेसल यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। 1716 – रुस और प्रशिया की सेनाओं ने उत्तरी जर्मनी के विस्मार पर कब्जा किया। 1722 – जेकब रोजरविन ने पूर्वी आयरलैंड की खोज की। 1818 – अमेरिकी संसद में राष्ट्रीय ध्वज में लाल रंग की तेरह पट्टी और बीस स्टार रखने का फैसला लिया गया। 1850 – लॉस एंजिलिस को शहर के रूप में शामिल किया गया। 1858 – ह्ययूज रोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध करने के बाद झांसी की रानी लक्ष्मीबाई झांसी से निकलकर काल्पी पहुंची और बाद में ग्वालियर की ओर चली गई। 1905 – हिमाचल प्रदेश के कांगडा जिले में भूकंप से करीब बीस हजार लोगों की मौत हुई। 1910 – दार्शनिक श्री अरविन्दो पांडिचेरी (अब पुड्डुचेरी) पहुंचे जहां उन्होंने योग और आध्यात्मिक केन्द्र खोला। 1916 – अमेरिकन सीनेट ने प्रथम विश्व युद्ध में हिस्सा लेने को मंजूरी दी। 1941 – जर्मनी की सेना ने लीबिया के बेनगाजी शहर पर कब्जा किया। 1944 – ब्रिटिश सेना ने इथोपिया के आदिश अबाबा पर कब्जा किया। 1949 - उत्तरी अटलांटिक सैन्य संगठन (NATO) की स्थापना हुई जो शीतयुद्ध के शुरुआती दौर का नतीजा थी। 1960 – अफ्रीकी देश सेनेगल ने फ्रांस से स्वतंत्रता हासिल करने की घोषणा की। 1968 – अमेरिका के मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की गोली मारकर हत्या। मार्टिन लूथर किंग को अमेरिका का गांधी भी कहते हैं। 1975 – बिल गेट्स और पॉल एलन के बीच में हुए समझौते के फलस्वरूप माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना हुई। 1979 - पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फ़ाँसी। 1994 - तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा द्वारा तिब्बती बालक उग्येन थिनली दोरजी को नये कर्मापा के रूप में घोषणा। 1997 - क्रयशक्ति की क्षमता की दृष्टि से विश्व बैंक ने भारत को विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश घोषित किया (1994 का भी वर्णन मिलता है कन्फर्म कर लें)। 2001 - चीन का अमेरिका विमान व चालक दल लौटाने से इन्कार । 2001 - फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति एरुत्रादा के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल। 2002 – अफगानिस्तान में भूस्खलन के कारण 150 लोगों की मौत हो गई। 2004 - भारत-नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर माओवादियों ने 18 भारतीय तेल टैंकरों में आग लगाई। 2006 - ईराक के अपदस्थ राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पर नये आरोप लगे। 2008 - दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना ने भाजपा सदस्यता स्वीकार किया। 2008 - पाकिस्तान की नई सरकार ने सेना के ख़ुफिया प्रमुख के पद से मेजर जनरल नदीम को हटाया। 2010 - माओवादियों द्वारा किए गए उड़ीसा, भारत के कोरापुट ज़िले में बारुदी सुरंग विस्फोट में दस सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गयी। 2013 – महाराष्ट्र के ठाणे में अवैध रूप से निर्मित इमारत गिरने से तक़रीबन 80 लोग मारे गए। 2013 – छत्तीसगढ़ में एक कुल्हाड़ी-हत्या कांड में नौ लोग मारे गए। 2019 - छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीमा सुरक्षा बल के चार जवान शहीद। 2019 - इथोपियन प्लेन क्रैशः बोइंग एमरजैंसी रूल फॉलो करने के बावजूद विमान कंट्रोल नहीं कर सके पायलट। 2019 - प्रधानमंत्री मोदी को मिला यूएई का सबसे बड़ा सम्मान 'जायेद मेडल' संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति खलीफा बिन जायेद अल नाहयान ने सम्मानित किया। 2020 - सोलोमन द्वीप पर आये शक्तिशाली तूफान में एक नौका में सवार 28 लोग लापता हो गये। 2020 - कोरोना महामारी के चलते जान गंवाने वाले मरीजों और चिकित्साकर्मियों की याद में चीन में तीन मिनट का मौन रख कर राष्ट्रीय शोक दिवस मनाया गया। 2021 - बांग्लादेश सरकार ने सभी सार्वजनिक यातायात निलंबित करने की घोषणा की। 2021 - मंगल की सतह पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के हेलिकॉप्टर Ingenuity ने लैंड किया , इसके साथ ही यह दूसरे ग्रह की धरती पर उतरने वाला पहला रोटरक्राफ्ट बना। 2022- लोकसभा में Criminal Procedure (Identification) Bill (दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक 2022) पारित हुआ। 2022 - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद को देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया। 2023 - राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने घोषणा की कि राजस्थान राइट टू हेल्थ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। 2023 - सिक्किम के नाथुला इलाके में मंगलवार को हुए भीषण हिमस्खलन में सात पर्यटकों की मौत व 11 गम्भीर रूप से घायल हुए। 2023 - पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मैनहटन कोर्ट में पेशी से पहले गिरफ्तार कर लिया गया व करीब 1.22 लाख डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश भी दिया। 2023 - फिनलैंड NATO में शामिल हो 31वां सदस्य बना। 2024 - हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया व उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसके झटके महसूस किये गये। 2024 - सरकारी मीडिया ने आज बताया कि संदिग्ध सुन्नी मुस्लिम आतंकवादियों ने दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स मुख्यालय पर हमला कर कम से कम 11 ईरानी सुरक्षा बल सदस्यों की हत्या कर दी व 16 अन्य को जान गंवानी पड़ी। 4 अप्रॅल को जन्मे व्यक्ति 1889 - माखन लाल चतुर्वेदी - हिन्दी जगत् के कवि, लेखक, पत्रकार। 1904 – प्रसिद्ध गायक कुंदन लाल सहगल का जन्म हुआ। 1905 - नृपेन चक्रबर्ती - त्रिपुरा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री व 'कम्युनिस्ट आन्दोलन' के पितृ पुरुष। 1908 – अमरीका के लेखक रिचर्ड राइट का जन्म हुआ वे अश्वेत अमरीकी व्यक्ति थे। 1922 – अमेरिकी संगीतकार एलमर बर्नस्टाइन का जन्म हुआ। 1933 - बापू नादकर्णी - पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी । 1949 – भारत की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री परवीन बॉबी का जन्म गुजरात के जुनागढ़ में हुआ। 1969 - पल्लवी जोशी - भारतीय फ़िल्म तथा टेलीविजन अभिनेत्री। 1972 - लीसा रे - भारतीय अभिनेत्री एवं फैशन मॉडल। 1976 - सिमरन - भारतीय अभिनेत्री । 1979 – अंग्रेजी फिल्मों के एक अभिनेता हीथ लैजर का जन्म हुआ। 4 अप्रॅल को हुए निधन 1924 - गंगाधर मेहरे - उड़िया भाषा के प्रसिद्ध कवि थे। 1987 - अज्ञेय, सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन - हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार। 1995 - हंसा मेहता - भारत की प्रसिद्ध समाजसेवी, स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षाविद। 2019 - वेदवती वैदिक - प्रमुख उपनिषदों के आख्यानों, अवधारणाओं, पदों, और शब्दों की युक्तियुक्त व्याख्याकार। 2020 - दिग्गज अभिनेता फॉरेस्ट कॉम्पटन का COVID-19 संक्रमण के कारण निधन। 2021 - दिग्गज अभिनेत्री शशिकला ओम प्रकाश सहगल (88) का निधन हुआ। 2021 - भारतीय क्रिकेट की शुरुआती महिला कमेंटेटर चंद्रा नायडू (88) का निधन हुआ। 2021 - खलील इस्माइल मकरानी, गुजरात, भारत के एक कवि और उपन्यासकार थे। 2021 - पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और गुजरात के वांकानेर दिग्विजय सिंह झाला (88) का निधन हुआ। 2022 - क्रोएशियाई बास्केटबॉल सेंटर और कोच पेटार स्कैन्सी (78) का निधन हुआ। 2023 - डेनिश फुटबॉल गोलकीपर बिर्गर जेन्सेन (72) का निधन हुआ। 2024 - राजस्थान में भीलवाड़ा जिले की मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे विवेक धाकड़ ने आत्महत्या की। 4 अप्रॅल के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव श्री एकवीरा देवी पालखी समारोह (कार्ला)। पं. श्री माखनलाल चतुर्वेदी जयन्ती। श्री नृपेन चक्रबर्ती स्मृति दिवस। श्री सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय' स्मृति दिवस। खदान जागरूकता हेतु अन्तर्राष्ट्रीय दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।