March 28 historical events

Important Event
Important Event: 28 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1561 – अकबर ने मालवा की राजधानी सांरगपुर पर हमला कर बाजबहादुर को हरा दिया था। 1795 – पोलैंड का विभाजन हुआ। 1809 – मेडलिन युद्ध में फ्रांस के हाथों स्पेन की हार हुई। 1854 – ब्रिटेन और फ्रांस ने रूस के खिलाफ क्रीमिया युद्ध की घोषणा की। 1914 – जापानी जहाज 'कामागाटामारु  हांगकांग से 372 युवकों को लेकर कनाडा के वेंकूवर के लिए रवाना हुआ। इनमें अधिकतर सिख युवक थे। 1917 – प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान महिलाओं की सेना सहायक कोर की स्थापना हुई। 1922 – अमेरिकी आविष्कारक ब्रेडली ए. फिस्के ने माइक्रोफिल्म पठन यंत्र का पेटेंट कराया। 1930 – तुर्की के बहुत से शहरों का नाम बदला गया। इसी दिन से राजधानी 'अंगोरा' को 'अंकारा' और 'कॉन्सटानिनोपल' का नाम बदल कर 'इंस्तांबुल' कर दिया गया। 1939 – जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने पोलैंड के साथ एक दूसरे पर आक्रमण नहीं करने संबंधी पांच साल पुराने समझौते को तोड़ा। 1939 – स्पेन में गृहयुद्ध समाप्त हुआ।   1941 – नजरबंदी में रह रहे नेताजी सुभाषचंद्र बोस कलकत्ता से भागकर बर्लिन पहुंचे। 1959 – चीन ने तिब्बत की सरकार भंग की और पांचेन लामा को पदासीन किया। 1962 – सीरिया में सैन्य विद्रोह के बाद राष्ट्रपति नाजिम अल-कुद्सी देश छोड़कर भागे। 1965 – डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग ने काले अमेरिकियों के अधिकारों के लिए एलाबामा की राजधानी मॉटगुमरी में 25 हजार लोगों के साथ मार्च निकाला। 1972 – तत्कालीन सोवियत रूस ने परमाणु परीक्षण किया। 1981 – थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इंडोनेशियाई आतंकवादियों ने एक विमान का अपहरण कर लिया। 1982 – अल सल्वाडोर में संविधान सभा चुनने के लिए पहली बार स्वतंत्र चुनाव हुए। 1999 – विनस विलियम्स ने बहन सेरेने को हराकर लिप्टन कप जीता। 115 साल में यह पहला मौका आया। 2000 - वेस्टइंडीज के कोर्टनी वाल्स ने 435 विकेट लेकर कपिल देव का रिकार्ड तोड़ा। 2005 - इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में शक्तिशाली भूकम्प से भारी तबाही। 2006 - अमेरिका ने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित अपना वाणिज्य दूतावास बंद किया। 2007 - अमेरिका में सीनेट ने इराक से सेना वापसी को मंजूरी प्रदान की। 2008 - केन्द्र सरकार ने चालीस उत्पादों के निर्यात से रियासतें समाप्त करने की घोषणा की। 2011- देश में बाघों की संख्या बढ़ी। वर्ष 2006 में इनकी संख्या 1411 थी जो 21 फ़ीसदी बढ़कर 1706 हो गई है। 2013 – इंटरनेट पर इतिहास का सबसे बड़ा हमला हुआ। दुनियाभर में इंटरनेट की रफ्तार धीमी। 2015- साइना नेहवाल दुनिया की नंबर एक महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। 2019 - अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को मिला ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का बोडले मैडल (27 मार्च भी हो सकती है तारीख )। 2019 - बांग्लादेश: ढाका में 22 मंजिला इमारत में लगी आग, 25 लोगों की मौत, 70 घायल। 2019 - अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ताओं / वैज्ञानिकों ने शरीर से बिजली बनाने की तकनीक खोजी। 2020 - केंद्र ने कोविड - 19 महामारी से निपटने के लिए एक विशेष राष्‍ट्रीय कोष पी.एम. केयर्स बनाया। प्रधानमंत्री ने लोगों से इसमें योगदान देने की अपील की, अभिनेता अक्षय कुमार ने  25000000₹ देकर मिशाल पेश की । 2020 -  “अर्थ ऑवर”  सायंकाल को 8:30 से 9:30 बजे के बीच मनाया गया आमतौर पर मार्च के अन्तिम शनिवार को मनाते हैं। 2021 - भारत और अमरीकी नौसेनाओं के बीच दो दिन का पासेक्स अभ्‍यास बंगाल की खाड़ी में शुरू हुआ। 2021 - पीएम मोदी के दौरे के खिलाफ इस्लामिक गुटों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। 2021 - भारत ने 6 करोड़ से अधिक कोविड-19 टीकों के साथ ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। 2022 - प्रमोद सावंत ने सोमवार को लगातार दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2022 - त्रिपुरा के एक समुदाय को जनजातियों की सूची में शामिल करने के लिए लाया गया संशोधित संविधान आदेश विधेयक लोकसभा में पारित हुआ। 2022 - राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में नागरिक अलंकरण समारोह II में वर्ष 2022 के लिए 74 विशिष्ट हस्तियों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए। सूची में 4 पद्म विभूषण, 17 पद्म भूषण और 107 पद्म श्री शामिल। 2023 - भारत को पहला 'अग्निवीर बैच' मिला , INS चिल्का पर पासिंग परेड हुई। 2023 - क्वांटम तकनीक में नवीनतम प्रगति शिक्षण के लिए आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय क्वांटम संचार सम्मेलन का नई दिल्ली में समापन हुआ। 2023 - जी20 के सांस्‍कृतिक कार्य समूह (CWG) ने वैश्विक विषयगत वेबिनार सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण व बहाली आयोजित किया। 2024 - भारत में निर्मित स्वदेशी तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमान ने आज अपनी सफलतापूर्ण पहली उड़ान भरी।   28 मार्च को जन्मे व्यक्ति   1868 – प्रसिद्ध रूसी साहित्यकार मैक्सिम गोर्की का जन्म हुआ। 1896 - गोरख प्रसाद - गणितज्ञ, हिंदी विश्वकोश के संपादक तथा हिंदी में वैज्ञानिक साहित्य के बहुप्रतिभ लेखक थे। 1965 - बिश्वेश्वर टुडू - राज्य मंत्री भारत ,  (जनजातीय मामलों के मंत्रालय , जल शक्ति मंत्रालय)। 1972 - एबिय जे जोस, भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता। 1982 - सोनिया अग्रवाल, भारतीय अभिनेत्री।   28 मार्च को हुए निधन   1552 - गुरु अंगद देव, सिक्खों के दूसरे गुरु (29 मार्च का भी वर्णन इसलिए कन्फर्म नहीं)। 1941 - कावासजी जमशेदजी पेटिगारा, भारतीय पुलिस आयुक्त। 1959 - काला वेंकटराव, दक्षिण भारत के एक प्रमुख राजनैतीक कार्यकर्त्ता थे। 1961 - छत्ता सिंह - प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय थल सेना की 9वीं भोपाल इनफैंट्री में सिपाही थे। 1969 - सं.रा. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति आइजनहावर का निधन। 1995 - हरी देव जोशी - राजस्थान के भूतपूर्व सातवें मुख्यमंत्री थे। 2002 - एफ़. एन. सूजा - जाने-माने भारतीय चित्रकार थे। 2006 - वेथाथिरी महर्षि, भारतीय दार्शनिक। 2006 - बंसीलाल - हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और स्वतन्त्रता सेनानी। 2008 - आस्कर विजेता व पटकथा लेखक ऐबीमैन का निधन। 2012 - पीएस अप्पू- एक भारतीय सिविल सेवक थे जो लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निर्देशक पद से सेवानिवृत्त हुए। 2023 - अमेरिकी फुटबॉल अधिकारी बिल लेवी (76) का  निधन हुआ। 2023 - जर्मन फ़ुटबॉल खिलाड़ी मैनफ़्रेड शेफ़र (80) का  निधन हुआ। 2024 - तमिलनाडु के इरोड से मौजूदा लोकसभा सांसद MDMK के ए. गणेशमूर्ति (77) का निधन हुआ। 2024 - बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हुई।   28 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   माँ हिंगलाज जयन्ती (चैत्र कृष्ण त्रयोदशी , कुछ पंचांग में चतुर्दशी का भी वर्णन)। मेला पृथुदक पिहोवा तीर्थ (हरियाणा , चैत्र बदी चौदस)। गुरु श्री अंगद देव ज्योति ज्योत / स्मृति दिवस (तारीखानुसार - कन्फर्म नहीं)। श्री गोरखप्रसाद गणितज्ञ जयन्ती। चौ. बंसीलाल स्मृति दिवस। श्री हरी देव जोशी स्मृति दिवस। राष्ट्रीय नौवहन दिवस।   कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की  कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Anjali Kumari मार्च 28, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0