कैरेबियाई देश Cuba इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में 22 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है और ईंधन की भारी कमी ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी बीच John Ratcliffe की हवाना यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि क्यूबा पर बढ़ते अमेरिकी दबाव का संकेत भी हो सकता है। बे ऑफ पिग्स के बाद फिर चर्चा में अमेरिका-क्यूबा संबंध करीब छह दशक पहले Bay of Pigs Invasion के जरिए अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो सरकार को हटाने की कोशिश की थी। अब एक बार फिर क्यूबा में राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। CIA प्रमुख जॉन रैटक्लिफ ने हवाना में क्यूबा के शीर्ष खुफिया और राजनीतिक अधिकारियों से मुलाकात की। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने आंतरिक मंत्री लाजारो अल्वारेज कैसास और राउल कास्त्रो परिवार से जुड़े अधिकारियों से भी बातचीत की। ट्रंप प्रशासन का ‘कड़ा संदेश’ रिपोर्ट्स के अनुसार, रैटक्लिफ ने क्यूबा नेतृत्व को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का संदेश दिया कि अमेरिका आर्थिक और सुरक्षा सहयोग पर गंभीर बातचीत तभी करेगा, जब हवाना “मौलिक बदलाव” के लिए तैयार होगा। बताया जा रहा है कि अमेरिका एक तरफ मानवीय सहायता और राहत पैकेज की पेशकश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने क्यूबा पर ऊर्जा दबाव भी बढ़ा दिया है। तेल आपूर्ति पर असर, बढ़ा संकट अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनावों के कारण क्यूबा को वेनेजुएला समेत अन्य स्रोतों से मिलने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते देश में डीजल और ईंधन की भारी कमी हो गई है। क्यूबा के ऊर्जा मंत्री विसेंटे डे ला ओ लेवी ने स्वीकार किया है कि देश गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कई शहरों में लंबी बिजली कटौती लागू करनी पड़ी है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। अमेरिका क्यूबा में क्या चाहता है? विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका लंबे समय से क्यूबा में एक अधिक “मित्रवत” और पश्चिम समर्थक शासन चाहता रहा है। ट्रंप प्रशासन के दौरान क्यूबा के खिलाफ सख्त नीति अपनाई गई थी। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio भी लंबे समय से हवाना के कम्युनिस्ट नेतृत्व के आलोचक रहे हैं। रुबियो का मानना रहा है कि क्यूबा का मौजूदा कम्युनिस्ट ढांचा खुद को सुधार नहीं सकता और वहां राजनीतिक बदलाव जरूरी है। क्या सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रहा क्यूबा? अब तक अमेरिका या क्यूबा की ओर से “सत्ता परिवर्तन” को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन CIA प्रमुख की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब देश आर्थिक संकट, ऊर्जा संकट और जन असंतोष से जूझ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आर्थिक हालात और बिगड़े, तो क्यूबा में राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।
व्यापार, ईरान और ताइवान मुद्दे पर हुई बड़ी बातचीत Donald Trump और Xi Jinping के बीच गुरुवार को बीजिंग में हाई-प्रोफाइल शिखर वार्ता हुई। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव, ईरान संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता तेजी से बढ़ रही है। बैठक की शुरुआत बीजिंग के Great Hall of the People में औपचारिक स्वागत समारोह के साथ हुई। इस दौरान सैन्य सम्मान दिया गया और बच्चों ने चीन तथा अमेरिका के झंडे लहराकर दोनों नेताओं का स्वागत किया। ट्रंप ने की शी जिनपिंग की तारीफ वार्ता की शुरुआत में ट्रंप ने शी जिनपिंग की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध पहले से बेहतर दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्रंप ने कहा, “आप एक महान नेता हैं। लोग शायद मुझे यह कहते हुए पसंद न करें, लेकिन मैं फिर भी कहता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्ते “पहले से ज्यादा मजबूत” हो सकते हैं। वहीं शी जिनपिंग ने भी नरम रुख अपनाते हुए कहा कि चीन और अमेरिका को “प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार” बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थिर चीन-अमेरिका संबंध पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद हैं और टकराव दोनों देशों को नुकसान पहुंचाएगा। व्यापार और टैरिफ विवाद पर फोकस बैठक में व्यापार और टैरिफ विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच लगाए गए जवाबी टैरिफ से वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है। दोनों पक्ष फिलहाल एक अस्थायी व्यापार समझौते को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। वैश्विक बाजार भी इस बैठक पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर पड़ सकता है। ईरान युद्ध और तेल संकट पर भी चर्चा ईरान-इजरायल संघर्ष और Hormuz Strait में बढ़ते तनाव को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर अपना प्रभाव इस्तेमाल कर क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद करे। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। AI, सेमीकंडक्टर और ताइवान भी एजेंडे में दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर तकनीक और ताइवान मुद्दे को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि इन विषयों पर भी शिखर वार्ता में विस्तृत चर्चा हुई। ट्रंप के साथ अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio, रक्षा मंत्री Pete Hegseth, कारोबारी Elon Musk और Nvidia CEO Jensen Huang भी चीन पहुंचे हैं। वैश्विक बाजारों की नजर इस बैठक पर विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से किसी बड़े समझौते की संभावना भले कम हो, लेकिन दोनों देश तनाव को और बढ़ने से रोकने की कोशिश जरूर कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस वार्ता का असर वैश्विक राजनीति, व्यापार और बाजारों पर देखने को मिल सकता है।
वॉशिंगटन में दो दिन तक चलेगी अहम बैठक Lebanon और Israel के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए गुरुवार से अमेरिका में नई शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। वॉशिंगटन में होने वाली इस बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम (Ceasefire) अब समाप्ति के करीब पहुंच चुका है। हालांकि सीजफायर औपचारिक रूप से अभी लागू माना जा रहा है, लेकिन इस दौरान भी इजरायली हवाई हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायली हमलों में 22 लोगों की मौत लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार को इजरायल ने दक्षिण और पूर्वी लेबनान में करीब 40 स्थानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 22 लोगों की जान गई, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। राजधानी Beirut सहित कई शिया बहुल इलाकों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। लगातार हो रहे हमलों से आम नागरिकों में भय और गुस्सा बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने जताई थी ऐतिहासिक समझौते की उम्मीद पिछले महीने 23 अप्रैल को दोनों देशों के प्रतिनिधि व्हाइट हाउस में मिले थे। उस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी और उम्मीद जताई थी कि जल्द ही इजरायल और लेबनान के नेताओं के बीच ऐतिहासिक शिखर बैठक होगी। हालांकि लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने साफ कहा था कि जब तक इजरायली हमले बंद नहीं होते और सुरक्षा समझौता नहीं बनता, तब तक ऐसी बैठक संभव नहीं है। हिज्बुल्लाह पर कार्रवाई को लेकर दबाव इजरायल लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान समर्थित संगठन Hezbollah के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हाल ही में कहा था कि “जो भी इजरायल को धमकी देगा, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च से अब तक लेबनान में इजरायली हमलों में 2800 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। अमेरिका की मध्यस्थता में होगी बातचीत इस बार होने वाली वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio शामिल नहीं होंगे, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप चीन दौरे पर हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यस्थों की टीम दोनों देशों के प्रतिनिधियों के साथ दो दिनों तक बातचीत करेगी। लेबनान की ओर से विशेष दूत Simon Karam हिस्सा लेंगे, जबकि इजरायल का प्रतिनिधित्व उसके अमेरिका स्थित राजदूत Yechiel Leiter करेंगे। क्षेत्रीय तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित ईरान-इजरायल संघर्ष और लेबनान में जारी हिंसा का असर अब पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र पर दिखाई दे रहा है। तेल आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक बाजारों पर भी इसका दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में संघर्ष और गंभीर रूप ले सकता है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा- देश की स्थिति बेहद गंभीर Cuba में ऊर्जा संकट अब चरम पर पहुंच गया है। देश के ऊर्जा मंत्री Vicente de la O Levy ने कहा है कि क्यूबा में डीजल और फ्यूल ऑयल पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने सरकारी मीडिया से बातचीत में बताया कि देश का पावर ग्रिड “क्रिटिकल स्थिति” में पहुंच गया है और ईंधन का कोई रिजर्व नहीं बचा है। हवाना में 20 से 22 घंटे तक बिजली कटौती राजधानी Havana में हालात सबसे ज्यादा खराब बताए जा रहे हैं। कई इलाकों में रोजाना 20 से 22 घंटे तक बिजली गुल रहने की खबर है। लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ बुधवार को कई जगहों पर लोगों ने प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर बिजली बहाल करने की मांग की। अस्पताल, स्कूल और पर्यटन व्यवस्था प्रभावित ईंधन संकट का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पताल सामान्य तरीके से काम नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कई स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद करने पड़े हैं। पर्यटन उद्योग, जो क्यूबा की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार माना जाता है, वह भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिका के प्रतिबंधों से बढ़ा संकट रिपोर्ट के मुताबिक, क्यूबा आमतौर पर Venezuela और Mexico से तेल आयात करता था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईंधन सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ की चेतावनी दिए जाने के बाद तेल आपूर्ति लगभग रुक गई। अमेरिका ने हाल के दिनों में क्यूबा के अधिकारियों पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने क्यूबा को 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता की पेशकश की, जिसे क्यूबा सरकार ने खारिज कर दिया। सौर ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता ऊर्जा मंत्री ने बताया कि क्यूबा फिलहाल घरेलू कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिन्यूएबल एनर्जी के सहारे बिजली व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहा है। पिछले दो वर्षों में देश ने 1300 मेगावॉट सोलर पावर क्षमता स्थापित की है, लेकिन ग्रिड अस्थिरता के कारण उसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
Iran ने अमेरिका के साथ जारी तनाव खत्म करने के लिए एक नया चरणबद्ध प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump इससे संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। इससे युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को झटका लगा है। ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया? ईरान की तीन-स्तरीय योजना में शामिल हैं: पहले अमेरिका-इज़राइल के साथ युद्धविराम फिर Strait of Hormuz में नौवहन बहाल करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना उसके बाद परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर बातचीत तेहरान चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर चर्चा युद्ध खत्म होने और समुद्री विवाद सुलझने के बाद हो। अमेरिका क्यों नाराज? वॉशिंगटन का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अलग नहीं किया जा सकता। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि किसी भी समझौते की शुरुआत ही परमाणु हथियारों के मुद्दे से हो। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने की क्षमता दे। होर्मुज बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। यहां जारी तनाव से वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है। कूटनीति की राह कठिन प्रस्ताव पर गतिरोध के कारण इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता भी टल गई। इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं, जिससे निकट भविष्य में समझौते की संभावना कमजोर दिख रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को तय समय से पहले हासिल कर रहा है और अब ऑपरेशन अपने अंतिम पड़ाव में है। रुबियो ने कहा, “हम अपने हर लक्ष्य पर तय समय से आगे चल रहे हैं। अब हमें फिनिश लाइन साफ दिखाई दे रही है।” उन्होंने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को आधुनिक दौर का बेहद कुशल सैन्य अभियान बताते हुए कहा कि इसे इतिहास में इसकी टैक्टिकल क्षमता के लिए याद किया जाएगा। सैन्य लक्ष्यों को किया स्पष्ट रुबियो ने उन अटकलों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका के लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की वायुसेना, नौसेना, मिसाइल फैक्ट्रियों और लॉन्च सिस्टम को निष्क्रिय करना था, जिसमें अमेरिका को बड़ी सफलता मिली है। ईरान पर सख्त टिप्पणी विदेश मंत्री ने ईरान की तुलना उत्तर कोरिया से करते हुए कहा कि वह ऐसे रास्ते पर था, जहां उसकी मिसाइलें सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपनी जनता के संसाधनों का इस्तेमाल विकास के बजाय हथियारों और आतंकवाद पर किया, जिससे देश की हालत खराब हो गई है। कूटनीति पर भी दिया जवाब युद्ध को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्तों को पूरी तरह अपनाया था। “राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा बातचीत को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन ईरान को बातचीत के नाम पर समय बर्बाद करने की अनुमति नहीं दी जा सकती,” उन्होंने कहा। रुबियो ने यह भी कहा कि ईरान के पास 60% संवर्धित यूरेनियम रखने का कोई उचित कारण नहीं है और यह सीधे तौर पर परमाणु हथियार कार्यक्रम की ओर इशारा करता है। होर्मुज और NATO पर सख्त रुख रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र बताते हुए कहा कि वहां वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। साथ ही NATO पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए गठबंधन के तहत अपने यूरोपीय ठिकानों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, तो यह व्यवस्था एकतरफा बनकर रह जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।