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Meta Muse Image AI tool generating realistic images from text prompts while raising concerns over user privacy and digital identity.
Meta का नया AI टूल 'Muse Image' लॉन्च, मिनटों में बनाएगा रियल जैसी तस्वीरें, लेकिन प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में Meta ने एक नया इमेज जनरेशन मॉडल Muse Image पेश किया है। कंपनी का दावा है कि यह टूल केवल टेक्स्ट प्रॉम्प्ट के आधार पर कुछ ही सेकंड में बेहद वास्तविक (Realistic) तस्वीरें तैयार कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मौजूदा तस्वीरों को एडिट करने और कई इमेज को मिलाकर नया विजुअल बनाने की भी क्षमता रखता है। हालांकि, इस नई तकनीक के साथ प्राइवेसी और यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है। क्या है Meta का Muse Image? Muse Image एक AI आधारित इमेज जनरेशन मॉडल है, जो यूजर द्वारा दिए गए टेक्स्ट निर्देशों (Prompt) को समझकर नई तस्वीरें तैयार करता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यूजर समुद्र किनारे बने आधुनिक घर की तस्वीर चाहता है, तो उसे केवल उसका विवरण लिखना होगा। इसके बाद AI उसी आधार पर नई इमेज तैयार कर देगा। इसकी खास बात यह है कि यह सिर्फ नई तस्वीरें ही नहीं बनाता, बल्कि कई रेफरेंस इमेज को मिलाकर नया डिजाइन तैयार करने और पहले से मौजूद तस्वीरों में बदलाव करने की सुविधा भी देता है। किन प्लेटफॉर्म पर मिलेगा यह फीचर? Meta ने Muse Image को अपने AI इकोसिस्टम का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह फीचर Meta AI ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा रहा है। अमेरिका में इसे Instagram Stories के साथ भी जोड़ा गया है, जबकि कुछ देशों में WhatsApp पर इसकी सीमित सुविधा शुरू की गई है। कंपनी भविष्य में इसे Facebook और Marketplace जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। अभी यूजर इस सुविधा का मुफ्त उपयोग कर सकते हैं, हालांकि भविष्य में सीमित उपयोग के बाद सब्सक्रिप्शन मॉडल लागू किया जा सकता है। क्यों बढ़ा प्राइवेसी को लेकर विवाद? Muse Image का सबसे चर्चित फीचर वह है, जिसमें किसी व्यक्ति के Instagram यूजरनेम के आधार पर उसकी सार्वजनिक (Public) प्रोफाइल पर मौजूद तस्वीरों से नई AI इमेज तैयार की जा सकती है। यही सुविधा अब विवाद का कारण बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल AI इमेज बनाने में किया जाता है, तो इससे प्राइवेसी और डिजिटल पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं। क्या हो सकता है गलत इस्तेमाल? तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की सुविधा पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया तो इसका गलत उपयोग भी संभव है। AI की मदद से तैयार होने वाली तस्वीरें अब पहले से कहीं अधिक वास्तविक दिखाई देती हैं। ऐसे में भविष्य में असली और AI से बनी तस्वीरों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। इससे फर्जी तस्वीरें, गलत जानकारी और डिजिटल पहचान से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। 'ऑप्ट-आउट' सिस्टम पर भी उठे सवाल Muse Image को लेकर एक और चिंता इसका ऑप्ट-आउट सिस्टम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस व्यवस्था में यदि कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका सार्वजनिक कंटेंट AI मॉडल के लिए इस्तेमाल हो, तो उसे स्वयं सेटिंग्स में जाकर यह विकल्प बंद करना होगा। ऐसे में कई लोगों को यह जानकारी भी नहीं होगी कि उनकी सार्वजनिक तस्वीरों का उपयोग AI प्रशिक्षण या इमेज जनरेशन के लिए किया जा सकता है। AI के साथ बढ़ रही जिम्मेदारी भी AI आधारित इमेज जनरेशन तकनीक क्रिएटिविटी के नए अवसर जरूर खोल रही है, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, यूजर की सहमति और डिजिटल पहचान की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी तेजी से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक के विस्तार के साथ कंपनियों को पारदर्शी नीतियां अपनानी होंगी, ताकि नई सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहे और यूजर्स की निजता भी सुरक्षित रह सके।  

surbhi जुलाई 10, 2026 0
WhatsApp new feature
Samsung Galaxy A27 5G भारत में लॉन्च, Google Gemini AI और 6 साल के अपडेट के साथ आया नया स्मार्टफोन

नई दिल्ली, एजेंसियां। Samsung ने भारतीय बाजार में अपना नया Galaxy A27 5G स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस मिड-रेंज फोन में पहली बार Google Gemini AI, Circle to Search, Perplexity AI सपोर्ट और 6 साल तक Android OS व सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। फोन की शुरुआती कीमत ₹28,999 रखी गई है और इसकी बिक्री 3 जुलाई से शुरू होगी।   Snapdragon 6 Gen 3 और 120Hz AMOLED डिस्प्ले   Galaxy A27 5G में 6.7 इंच का Full HD+ Super AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोन में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 प्रोसेसर, 5,000mAh बैटरी और 25W फास्ट चार्जिंग की सुविधा मिलती है।   AI फीचर्स और दमदार कैमरा   स्मार्टफोन में 50MP OIS प्राइमरी कैमरा, 5MP अल्ट्रा-वाइड, 2MP मैक्रो और 12MP फ्रंट कैमरा दिया गया है। AI फीचर्स में Google Gemini, Circle to Search, Object Eraser और अन्य स्मार्ट टूल्स शामिल हैं, जो यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाते हैं।   6 साल तक मिलेगा सॉफ्टवेयर सपोर्ट   Samsung ने Galaxy A27 5G के लिए 6 Android OS अपग्रेड और 6 साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि लंबे समय तक अपडेट मिलने से यूजर्स को बेहतर सुरक्षा और नए फीचर्स का लाभ मिलता रहेगा।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
WhatsApp username feature
WhatsApp के Username फीचर पर भारत सरकार सख्त, Meta को नोटिस; लॉन्च पर फिलहाल रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने Meta को नोटिस जारी कर फिलहाल इस फीचर को भारत में लॉन्च नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही कंपनी से तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि इस फीचर से साइबर धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के खतरे को कैसे रोका जाएगा।   सरकार को किस बात की चिंता?   सरकार का मानना है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर की जगह केवल Username के जरिए संपर्क कर सकेंगे, तो जालसाज सरकारी संस्थानों, कंपनियों या प्रसिद्ध लोगों जैसे नामों का इस्तेमाल कर लोगों को ठग सकते हैं। इसी कारण सरकार ने फीचर की सुरक्षा और गोपनीयता व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा शुरू की है।   WhatsApp ने दी सफाई   WhatsApp ने कहा है कि Username फीचर पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) होगा। यूजरनेम सार्वजनिक रूप से सर्च नहीं किए जा सकेंगे और मशहूर हस्तियों, सरकारी संस्थानों व बड़े ब्रांड्स के नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि उनकी नकल न हो सके। कंपनी ने यह भी कहा कि संदिग्ध गतिविधियों और बार-बार फर्जी यूजरनेम बनाने की कोशिशों को ब्लॉक किया जाएगा।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Meta AI pendant wearable device concept that records conversations and provides AI assistance
Meta ला रही है AI पेंडेंट! गले में पहनकर करेगा बातचीत रिकॉर्ड, शर्ट पर भी लगा सकेंगे यूजर्स

सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बड़ा नाम बन चुकी Meta अब एक नए AI-पावर्ड वियरेबल डिवाइस पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी एक ऐसे स्मार्ट AI पेंडेंट की टेस्टिंग की तैयारी कर रही है जिसे यूजर्स गले में पहन सकेंगे या अपनी शर्ट पर क्लिप कर सकेंगे। यह डिवाइस केवल एक एक्सेसरी नहीं होगा, बल्कि बातचीत को सुनने, रिकॉर्ड करने और उसे व्यवस्थित करने में सक्षम AI असिस्टेंट की तरह काम करेगा। Meta का नया AI पेंडेंट क्या करेगा? लीक हुए एक इंटरनल मेमो के अनुसार, Meta अगले एक साल के भीतर इस डिवाइस की टेस्टिंग शुरू कर सकती है। बताया जा रहा है कि यह तकनीक उस AI पेंडेंट पर आधारित होगी जिसे Limitless AI ने विकसित किया था। Limitless का डिवाइस यूजर्स की बातचीत को रिकॉर्ड और प्रोसेस कर सकता था। इसे दो तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता था: गले में पेंडेंट की तरह पहनकर शर्ट या कपड़ों पर क्लिप लगाकर इसके जरिए AI असिस्टेंट आसपास की बातचीत को कैप्चर करता था और बाद में उसे व्यवस्थित जानकारी के रूप में उपलब्ध कराता था। Meta ने क्यों खरीदी थी Limitless? 2025 के आखिर में Meta ने Limitless का अधिग्रहण किया था। कंपनी का मानना था कि इस तकनीक की मदद से AI आधारित हार्डवेयर जैसे: स्मार्ट ग्लासेज स्मार्ट वॉच AI असिस्टेंट डिवाइस को तेजी से विकसित किया जा सकेगा। Meta लंबे समय से AI को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है और यह पेंडेंट उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बातचीत रिकॉर्ड करने पर उठ सकते हैं सवाल AI पेंडेंट का सबसे चर्चित फीचर इसकी बातचीत रिकॉर्ड करने की क्षमता है। हालांकि यही फीचर इसकी सबसे बड़ी चुनौती भी बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे डिवाइस को लेकर तीन प्रमुख चिंताएं सामने आती हैं: प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा बातचीत रिकॉर्ड होने की पारदर्शिता संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का जोखिम पिछले कुछ AI वियरेबल डिवाइस भी इन्हीं कारणों से बड़े पैमाने पर लोकप्रिय नहीं हो सके थे। AI वियरेबल्स पर बढ़ रहा है दांव AI हार्डवेयर को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। Meta के अलावा OpenAI सहित कई बड़ी टेक कंपनियां ऐसे उपकरण विकसित कर रही हैं जो स्मार्टफोन के बाद अगली बड़ी तकनीकी क्रांति बन सकते हैं। कंपनियों का मानना है कि भविष्य में AI सिर्फ मोबाइल ऐप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे पहनने वाले डिवाइसों के जरिए लोगों के साथ लगातार जुड़ा रहेगा। "Wearables for Work" भी ला सकती है Meta रिपोर्ट्स के अनुसार Meta केवल AI पेंडेंट तक सीमित नहीं रहने वाली। कंपनी अपने AI-संचालित स्मार्ट ग्लासेज पोर्टफोलियो का भी विस्तार कर रही है। इसके अलावा Meta "Wearables for Work" नाम से एक नई सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है, जो विशेष रूप से: कॉर्पोरेट यूजर्स ऑफिस कर्मचारियों एंटरप्राइज ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। क्या बदल सकता है AI का भविष्य? यदि Meta का यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो AI असिस्टेंट को इस्तेमाल करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। स्मार्टफोन निकालने की जरूरत के बिना यूजर्स सीधे अपने पहनने वाले डिवाइस के जरिए नोट्स, बातचीत और जानकारी को मैनेज कर सकेंगे। हालांकि इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि Meta प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान किस तरह करती है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Meta’s AI and cloud computing plans after major employee layoffs
8 हजार कर्मचारियों की छंटनी के बाद बड़ा संकेत: अब AWS को टक्कर दे सकती है Meta

Meta के सीईओ Mark Zuckerberg ने संकेत दिए हैं कि कंपनी जल्द ही क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस में एंट्री कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो Meta सीधे Amazon Web Services (AWS) और Microsoft Azure जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती देगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब Meta हाल ही में दुनियाभर में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और कंपनी AI सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। शेयरहोल्डर मीटिंग में दिया बड़ा संकेत Meta की वार्षिक शेयरहोल्डर मीटिंग के दौरान मार्क जुकरबर्ग से पूछा गया कि क्या कंपनी क्लाउड कंप्यूटिंग बाजार में उतरने की योजना बना रही है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह विकल्प “पूरी तरह संभव” है। उन्होंने बताया कि कई कंपनियां लगातार Meta से कंप्यूटिंग पावर और API सेवाएं खरीदने को लेकर संपर्क कर रही हैं। जुकरबर्ग के मुताबिक, लगभग हर सप्ताह ऐसी मांगें सामने आ रही हैं। आखिर क्या होता है क्लाउड कंप्यूटिंग? क्लाउड कंप्यूटिंग वह तकनीक है जिसके जरिए कंपनियां इंटरनेट के माध्यम से सर्वर, डेटा स्टोरेज और नेटवर्क सेवाएं उपलब्ध कराती हैं। आज OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini जैसे AI टूल्स भी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही चलते हैं। फिलहाल Amazon, Microsoft और Google इस क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। Meta अब तक इस बिजनेस से दूर रही है, लेकिन AI की बढ़ती मांग कंपनी को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है। AI पर अरबों डॉलर खर्च करेगी Meta रिपोर्ट के मुताबिक Meta इस साल AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर पर 125 से 145 अरब डॉलर तक खर्च करने की तैयारी में है। कंपनी का फोकस बड़े AI मॉडल्स और कंप्यूटिंग क्षमता को मजबूत करने पर है। हालांकि जुकरबर्ग ने साफ किया कि फिलहाल कंपनी के पास अतिरिक्त क्लाउड क्षमता उपलब्ध नहीं है। लेकिन यदि भविष्य में अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो जाता है, तो Meta क्लाउड सेवाएं बेचने के बाजार में उतर सकती है। AI की बढ़ती मांग बना रही नया बाजार AI सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को भारी कंप्यूटिंग पावर की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से क्लाउड और डेटा सेंटर बिजनेस का महत्व तेजी से बढ़ा है। हाल ही में Anthropic के अधिकारियों ने भी कहा था कि कंप्यूटिंग क्षमता उनकी कंपनी के लिए “सबसे महत्वपूर्ण संसाधन” बन चुकी है। छंटनी के बाद AI पर फोकस Meta ने 20 मई को लगभग 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इसके अलावा करीब 7,000 कर्मचारियों को AI-केंद्रित टीमों में ट्रांसफर किया गया है। कंपनी ने लागत कम करने के लिए हजारों ओपन जॉब रोल्स भी बंद किए हैं। हालांकि मार्क जुकरबर्ग ने कहा है कि इस साल कंपनी की ओर से और बड़े स्तर पर छंटनी की संभावना नहीं है।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0