नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। होर्मुज स्ट्रेट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नाविकों की मौत और ओमान के डुक्म बंदरगाह पर एक अन्य भारतीय नागरिक की मृत्यु का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका की कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद न तो माफी मांगी गई और न ही भारत सरकार ने कोई सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश को आदेशात्मक भाषा स्वीकार नहीं करनी चाहिए। ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ कहकर साधा निशाना कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ बताते हुए कहा कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने चुप है और एक ‘आज्ञाकारी नौकर’ की तरह व्यवहार कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा रही है। उन्होंने लिखा कि विदेशी ताकतें भारतीय नागरिकों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि सरकार मौन बनी हुई है। राहुल गांधी ने इसे देश के सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भारतीय नागरिक की मौत का भी उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक जहाज पर सवार भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन की मौत का मुद्दा भी उठाया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, निशांत उर्थनाथन की मृत्यु बीमारी के कारण हुई और उनका पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस घटना का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विदेशों में मुश्किल परिस्थितियों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए सरकार को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ा है तनाव हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिसके कारण भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले भी क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश नीति को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। सियासी बहस तेज राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है। कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक राहुल गांधी की ताजा टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में देश की राजनीति और कूटनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। सोना और चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। पिछले कुछ दिनों से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची कीमतों में अब नरमी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में गिरावट दर्ज की गई है। शादी-ब्याह के सीजन और निवेश के लिहाज से यह खरीदारों के लिए राहत भरा समय माना जा रहा है। प्रमुख शहरों में सोने के भाव 11 जून 2026 को दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,49,010 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,36,600 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,48,860 प्रति 10 ग्राम रही। वहीं चेन्नई में सोना सबसे महंगा रहा, जहां 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,550 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। चांदी की कीमतों में भी नरमी सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में चांदी का भाव ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम रहा। जबकि चेन्नई, भुवनेश्वर, हैदराबाद और केरल में चांदी ₹2.60 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार करती नजर आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते चांदी में अभी भी उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कीमतों में बदलाव की क्या है वजह? विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों की स्थिति, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मांग का सीधा असर सोना-चांदी की कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी बुलियन बाजार को प्रभावित किया है। खरीदारी से पहले रखें ये सावधानियां सोना खरीदते समय BIS हॉलमार्क की जांच जरूर करें और मेकिंग चार्ज की तुलना करें। वहीं चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता और पक्का बिल लेना न भूलें। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा नरमी के बीच समझदारी से खरीदारी करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
तेहरान। अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव का सबसे बड़ा असर अब आम ईरानी नागरिकों की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ती महंगाई, जरूरी वस्तुओं की कमी और आर्थिक अनिश्चितता ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि लोग अब रोटी और राशन तक किस्तों (EMI) पर खरीदने को मजबूर हैं। राजधानी तेहरान के 52 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मेहदी बताते हैं कि उन्होंने मोहल्ले की दुकान से उधार राशन लिया था, लेकिन अगले दिन भुगतान करने पहुंचे तो सामान का बिल लगभग दोगुना हो चुका था। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण वेतन महीने के बीच में ही खत्म हो जाता है। युद्ध के बाद आसमान छूती कीमतें हालिया संघर्ष के बाद ईरान में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार— कुकिंग ऑयल की कीमतों में 430% तक बढ़ोतरी अंडों के दाम 345% तक बढ़े चावल 287% महंगा हुआ दूध की कीमतों में 139% की वृद्धि आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध, प्रतिबंधों और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर ने महंगाई को और अधिक गंभीर बना दिया है। EMI पर राशन और सुपरमार्केट खरीदारी देश के कई हिस्सों में लोग अब खाद्य सामग्री और घरेलू जरूरत का सामान उधार या किस्तों में खरीद रहे हैं। तेहरान, इस्फहान, मशहद और अहवाज जैसे शहरों में परिवारों की सबसे बड़ी चिंता अब सुरक्षा नहीं बल्कि रोजमर्रा का खर्च बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घर का बजट संभालना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और बचत लगभग समाप्त हो चुकी है। सरकार विरोधियों का भी बदला रुख युद्ध शुरू होने के बाद कुछ लोगों को उम्मीद थी कि राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब सरकार के समर्थक और विरोधी दोनों ही आर्थिक संकट और युद्ध की कीमत चुका रहे हैं। तेहरान की पर्यावरण विशेषज्ञ लीदा कहती हैं कि बातचीत और कूटनीति ही देश को बचाने का रास्ता है। उनके अनुसार युद्ध ने जान-माल का भारी नुकसान पहुंचाया है और इसका लाभ किसी को नहीं मिला। विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विरोधी समूह भी अब सैन्य टकराव की जगह राजनीतिक समाधान की वकालत करने लगे हैं। इंटरनेट बंदी के बाद सामने आईं त्रासदी की कहानियां संघर्ष के दौरान लंबे समय तक इंटरनेट सेवाएं बाधित रहीं। संचार बहाल होने के बाद सोशल मीडिया पर युद्ध से प्रभावित परिवारों की दर्दनाक कहानियां सामने आने लगीं। इन्हीं में से एक हामेद मिर्जाई की कहानी ने लोगों को झकझोर दिया। उन्होंने बताया कि तेहरान के रेसालत स्क्वायर इलाके पर हुए हमले में उनकी पत्नी, माता-पिता समेत परिवार के 12 सदस्यों की मौत हो गई। इंटरनेट बंद होने के कारण उन्हें इस त्रासदी की जानकारी कई दिनों बाद मिल सकी। दवाओं का संकट, फार्मेसियों में राशन जैसी व्यवस्था युद्ध का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में दवाओं की भारी कमी की खबरें हैं। डॉक्टरों को केवल अत्यंत आवश्यक दवाएं लिखने की सलाह दी गई है। इस्फहान के एक चिकित्सक के अनुसार कई फार्मेसियां सीमित मात्रा में दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। वहीं हीमोफीलिया मरीजों के लिए जीवनरक्षक दवाओं का भंडार लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। उद्योगों पर भी पड़ा असर मशहद के पास स्थित कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। कच्चे माल की कमी और आपूर्ति बाधित होने के कारण कई कर्मचारियों को अस्थायी अवकाश पर भेजा गया है। विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों प्रभावित हुए हैं। युद्ध से पहले भी आर्थिक संकट में था ईरान विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट केवल युद्ध का परिणाम नहीं है। ईरान पहले से ही आर्थिक दबाव, मुद्रा अवमूल्यन और बढ़ती महंगाई से जूझ रहा था। दिसंबर 2025 में महंगाई और मुद्रा संकट के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। उस समय ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार उस अवधि में महंगाई दर 42 प्रतिशत से अधिक थी, जबकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई थी। अनिश्चित भविष्य के बीच राहत की तलाश लगातार बढ़ती महंगाई, रोजगार संकट, दवाओं की कमी और युद्ध की आशंकाओं के बीच आम ईरानी नागरिक राहत और स्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं। हालात में जल्द सुधार के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ और आर्थिक प्रतिबंध जारी रहे, तो आने वाले महीनों में ईरान की आर्थिक चुनौतियां और गहरी हो सकती हैं।
ओमान की खाड़ी में एक नाटकीय समुद्री घटना के दौरान 24 भारतीय नाविकों की जान बाल-बाल बच गई। एमटी मारिवेक्स नामक ऑयल टैंकर में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आग लग गई, जिसके चलते चालक दल को आपातकालीन सहायता के लिए एसओएस संदेश भेजना पड़ा। बाद में ओमानी अधिकारियों और बचाव दल ने हेलीकॉप्टर की मदद से सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना ओमान के मसिराह द्वीप के निकट समुद्री क्षेत्र में हुई, जहां टैंकर अचानक आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल ने तत्काल मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की पुष्टि की अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, एमटी मारिवेक्स कथित तौर पर ईरान से जुड़े प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत पर तैनात एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजन और स्टीयरिंग सेक्शन को निशाना बनाकर कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह हमला जहाज को रोकने के उद्देश्य से किया गया था ताकि वह आगे ईरानी जलक्षेत्र की ओर न बढ़ सके। आग लगते ही चालक दल ने भेजा SOS हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। दोपहर करीब 1:30 बजे चालक दल ने आपातकालीन संदेश भेजकर सहायता मांगी। केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, उस समय जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे। स्थिति तेजी से बिगड़ती देख चालक दल ने जहाज के सुरक्षित हिस्से में शरण ली और बचाव दल के पहुंचने का इंतजार किया। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। ऑडियो संदेश में चालक दल ने बताई भयावह स्थिति घटना के दौरान जहाज से भेजे गए कुछ ऑडियो संदेशों में चालक दल के सदस्य घबराहट और संकट की स्थिति में मदद मांगते सुनाई दिए। एक संदेश में कथित तौर पर कहा गया, "जहाज पर आग लगी हुई है, पोत डूबने की स्थिति में है। इंजन रूम पर हमला हुआ है और जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो गया है।" इन संदेशों के सामने आने के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल बचाव अभियान तेज कर दिया। लाइफबोट्स भी हुईं क्षतिग्रस्त चालक दल के अनुसार, हमले और आग के कारण जहाज की कुछ लाइफबोट्स भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि जहाज के पिछले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो गया। स्थिति गंभीर होने पर सभी नाविक जहाज के अगले हिस्से में एकत्र हुए, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए निकाला गया। बाद में सभी को सुरक्षित रूप से ओमान के मसिराह द्वीप पहुंचाया गया। भारतीय स्वामित्व वाला नहीं था जहाज शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एमटी मारिवेक्स किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्व वाला जहाज नहीं था। जहाज पर तैनात सभी 24 चालक दल के सदस्य भारतीय नागरिक थे। अधिकारियों के अनुसार, जहाज पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल था और उस पर ईरान से जुड़े कारोबारी संबंधों के आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था मारिवेक्स समुद्री डेटाबेस के अनुसार, एमटी मारिवेक्स को पिछले वर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था। अमेरिका का आरोप है कि जहाज का संबंध ईरान के तेल व्यापार नेटवर्क से था। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में जहाज ने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली बंद करने और समुद्री निगरानी से बचने जैसी गतिविधियां भी की थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार ने शुरू किया समन्वय घटना के बाद भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिकता सभी नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच सुनिश्चित करना है। क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी का इलाका पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ रही है। एमटी मारिवेक्स पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मध्य पूर्व के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय नाविकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
तेहरान: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। दक्षिणी बेरूत पर इजराइली हवाई हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान ने इजराइल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजराइली सेना के अनुसार, रविवार रात कई इलाकों में एयर रेड सायरन बजाए गए और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश जारी किए गए। इजराइली सेना (IDF) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों का समय रहते पता लगा लिया गया था, जिसके बाद देश की वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया। सेना का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। कई इलाकों में बजाए गए सायरन आईडीएफ के मुताबिक, संभावित हमले की चेतावनी मिलने के बाद उत्तरी इजराइल समेत कई क्षेत्रों में सायरन बजाए गए। सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को बंकरों और सुरक्षित स्थानों में रहने की सलाह दी। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। सीजफायर के बाद पहला सीधा हमला 8 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम के बाद यह इजराइल पर ईरान का पहला प्रत्यक्ष मिसाइल हमला माना जा रहा है। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी, लेकिन अब संघर्ष फिर से सैन्य कार्रवाई के स्तर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। बेरूत हमले के बाद बढ़ा तनाव इससे पहले इजराइल ने दक्षिणी बेरूत के कई इलाकों में हवाई हमले किए थे। ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसका जवाब दिया जाएगा। इसके बाद तेहरान ने अमेरिका के साथ चल रही कुछ कूटनीतिक वार्ताओं को भी रोकने का फैसला किया। रामत डेविड एयर बेस को निशाना बनाने का दावा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए इजराइल के रामत डेविड एयर बेस को निशाना बनाया। इजराइल ने इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। ईरान की चेतावनी मिसाइल हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि इजराइल आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो जवाब और अधिक कठोर होगा। दूसरी ओर इजराइली सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। क्षेत्रीय स्थिरता पर बढ़ी चिंता विश्लेषकों का मानना है कि बेरूत एयरस्ट्राइक और उसके बाद हुए मिसाइल हमलों ने अप्रैल में लागू युद्धविराम को कमजोर कर दिया है। यदि दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद 10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं की अपील और ईरान के साथ जारी गंभीर बातचीत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, Tamim bin Hamad Al Thani, Mohammed bin Salman और Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने उनसे सीधे संपर्क कर सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टालने का अनुरोध किया था। “समझौते की संभावना बढ़ी” ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर जारी बयान में कहा कि खाड़ी देशों की ईरान के साथ “गंभीर बातचीत” चल रही है और कूटनीतिक समाधान की संभावना पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका कुछ समय इंतजार करे तो बातचीत के जरिए ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके। “उम्मीद है हमला हमेशा के लिए टल जाए” ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सैन्य कार्रवाई को “कुछ समय के लिए” रोका है और उम्मीद जताई कि शायद इसकी जरूरत कभी न पड़े। उन्होंने कहा, “अगर बिना बमबारी के मामला सुलझ जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका बड़े सैन्य अभियान के लिए तैयार रहेगा। अमेरिकी सेना को अलर्ट रहने के निर्देश ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन Daniel Caine और अमेरिकी सेना को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता पिछले कुछ महीनों में कतर, सऊदी अरब और यूएई पर ईरान समर्थित हमलों का दबाव बढ़ा है। ईरान ने 28 फरवरी के बाद हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। ऐसे में खाड़ी देशों का एकजुट होकर अमेरिका से सैन्य कार्रवाई टालने का अनुरोध करना क्षेत्रीय तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान फिर मध्यस्थ की भूमिका में रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बताया गया है कि ईरान का संशोधित शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया। हालांकि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, नए प्रस्ताव में पहले की तुलना में केवल सीमित बदलाव किए गए हैं। परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बना हुआ है। अमेरिका का दावा है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है और वह परमाणु हथियार क्षमता की दिशा में बढ़ सकता है। वहीं ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे हटने से इनकार कर दिया है। तेहरान प्रतिबंधों में राहत, जब्त संपत्तियों की वापसी और भविष्य में सैन्य कार्रवाई न होने की गारंटी की मांग कर रहा है। CENTCOM ने जारी रखी नाकेबंदी इस बीच United States Central Command (CENTCOM) ने कहा है कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर लागू प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रही है। CENTCOM के अनुसार, अब तक 85 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का पालन सुनिश्चित किया जा सके। कूटनीति और सैन्य दबाव दोनों जारी अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है, लेकिन साथ ही सैन्य विकल्पों को भी खुला रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पश्चिम एशिया की स्थिति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के चीन दौरे से लौटने के बाद एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका ईरान पर दोबारा बड़े हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा मुख्यालय Pentagon संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी में जुटा हुआ है। ‘शांति प्रस्ताव पसंद नहीं आया’ रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से भेजे गए हालिया शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने खारिज कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर कहा, “मैंने उस प्रस्ताव को देखा और उसकी पहली लाइन ही मुझे पसंद नहीं आई, इसलिए मैंने उसे फेंक दिया।” ट्रंप के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0’ की तैयारी? अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले संघर्ष के दौरान रोके गए “Operation Epic Fury” को नए रूप में फिर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर “Operation Epic Fury 2.0” नाम की किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली सेनाएं संयुक्त युद्धाभ्यास और सैन्य तैयारियों में लगी हुई हैं। अगले सप्ताह हमले की आशंका? मध्य पूर्व के कुछ अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि सैन्य तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं और जरूरत पड़ने पर अगले सप्ताह की शुरुआत में कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र तनाव के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कई देश चाहते हैं कि वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए इस समुद्री मार्ग को खुला रखा जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। सीजफायर के बाद फिर बढ़ा तनाव पिछले महीने संघर्षविराम के बाद कुछ समय के लिए हालात शांत हुए थे, लेकिन अब दोनों पक्षों के बयानों और सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा, जबकि अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। दुनिया की नजर मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिका, ईरान, इजरायल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ती गतिविधियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। किसी आधिकारिक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को फिर से सक्रिय कर दिया है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री सुरक्षा चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे दो टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी है और अब तक 13 भारतीय पोत इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं। दो एलपीजी टैंकर सुरक्षित भारत की ओर रवाना बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव Mukesh Mangal ने बताया कि ‘सिमी’ नाम का एलपीजी टैंकर 13 मई को होर्मुज स्ट्रेट पार कर गया। वहीं ‘एनवी सनशाइन’ टैंकर ने भी गुरुवार को सुरक्षित रूप से यह मार्ग पार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों जहाज भारत के लिए एलपीजी लेकर आ रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अहम मानी जा रही है। कांडला और मंगलूरु पहुंचेंगे टैंकर मार्शल द्वीप के ध्वज वाला ‘सिमी’ टैंकर करीब 19,965 टन एलपीजी लेकर भारत आ रहा है। इसके 16 मई को Kandla पहुंचने की संभावना है। वहीं वियतनाम के ध्वज वाला ‘एनवी सनशाइन’ संयुक्त अरब अमीरात की रुवैस रिफाइनरी से 46,427 टन एलपीजी लेकर रवाना हुआ है और इसके 18 मई को Mangaluru पहुंचने की उम्मीद है। दोनों जहाजों में मौजूद एलपीजी Indian Oil Corporation यानी IOC का बताया जा रहा है। अब तक 13 भारतीय जहाजों ने पार किया मार्ग अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह समुद्री क्षेत्र कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद अब तक कुल 13 भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें देश गरिमा, शिवालिक, ग्रीन सान्वी, नंदा देवी, पाइन गैस और एमवी सर्वशक्ति जैसे पोत शामिल हैं। हालांकि अभी भी खाड़ी क्षेत्र में करीब 12 भारतीय जहाज फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ओमान के पास हमले में डूबी भारतीय नौका इसी बीच भारत के ध्वज वाली ‘हाजी अली’ नाम की मशीनी पाल नौका ओमान के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हो गई। हमले के बाद लकड़ी से बनी इस पारंपरिक नौका में आग लग गई और बाद में यह समुद्र में डूब गई। यह नौका सोमालिया से UAE के शारजाह जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक नौका पर सवार चालक दल के सभी 14 सदस्यों को ओमान तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचा लिया है। चालक दल सुरक्षित, भारत लाने की तैयारी अधिकारियों ने बताया कि सभी चालक दल के सदस्यों को ओमान के डिब्बा बंदरगाह पहुंचाया गया है और उनकी स्थिति सुरक्षित है। भारत सरकार ओमान प्रशासन और भारतीय दूतावास के संपर्क में है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर बनी हुई है नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई विदेशी जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका आर्थिक दबाव भी तेजी से बढ़ रहा है। United States Department of Defense (पेंटागन) ने हाल ही में इस संघर्ष की लागत 29 अरब डॉलर बताई है। खास बात यह है कि दो हफ्ते पहले यही अनुमान 25 अरब डॉलर था। यानी केवल 14 दिनों में खर्च का अनुमान 4 अरब डॉलर बढ़ गया। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार नए आंकड़ों में हथियारों की मरम्मत, पुराने उपकरणों को बदलने और सैन्य ऑपरेशन की लागत को शामिल किया गया है। विशेषज्ञ बोले- असली खर्च कहीं ज्यादा हो सकता है हालांकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार द्वारा बताए जा रहे आंकड़े वास्तविक लागत से काफी कम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पहले जारी किए गए 25 अरब डॉलर के अनुमान में मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान और उनकी मरम्मत का खर्च पूरी तरह शामिल नहीं था। इसी वजह से अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिकी प्रशासन जनता के सामने युद्ध की वास्तविक आर्थिक तस्वीर नहीं रख रहा। हार्वर्ड विशेषज्ञ ने जताई 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च की आशंका Harvard Kennedy School की सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ Linda Bilmes ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर कम से कम 1 ट्रिलियन डॉलर का बोझ डाल सकता है। उनके मुताबिक इतिहास बताता है कि युद्धों की वास्तविक लागत शुरुआती अनुमानों से कई गुना ज्यादा होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इराक युद्ध को शुरू में सस्ता बताया गया था, लेकिन बाद में उसकी लागत 5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा पहुंच गई। क्यों तेजी से बढ़ रहा है सैन्य खर्च? विशेषज्ञों के अनुसार युद्ध की लागत कई स्तरों पर बढ़ती है। अल्पकालिक खर्च मिसाइल और बम इंटरसेप्टर सिस्टम लड़ाकू विमानों का रखरखाव सैनिकों का वेतन और तैनाती सबसे महंगी चीज- हथियारों की रिप्लेसमेंट कॉस्ट उदाहरण के तौर पर, सेना के स्टॉक में मौजूद Tomahawk missile की पुरानी लागत करीब 20 लाख डॉलर थी, लेकिन अब उसी मिसाइल को दोबारा बनाने या खरीदने में 35 लाख डॉलर तक खर्च हो रहा है। दीर्घकालिक खर्च सैन्य ठिकानों की मरम्मत नई रक्षा तकनीकों की खरीद मध्य पूर्व में तैनात लगभग 55,000 अमेरिकी सैनिकों की स्वास्थ्य सेवाएं पूर्व सैनिक कल्याण (Veterans Care) विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध खत्म होने के बाद भी इसका आर्थिक बोझ कई वर्षों तक बना रहता है। आम अमेरिकी नागरिक पर भी पड़ रहा असर युद्ध का असर अब अमेरिकी आम जनता की जिंदगी में भी दिखाई देने लगा है। ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर तनाव कम नहीं हुआ तो अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है। इसका सीधा असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। अमेरिकी वायुसेना का KC-135 Stratotanker इमरजेंसी सिग्नल भेजने के बाद अचानक रडार से गायब हो गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। 7700 कोड भेजते ही गायब हुआ विमान फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस टैंकर विमान ने कतर के पास उड़ान के दौरान “7700” स्क्वॉक कोड ट्रांसमिट किया। यह एक अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी सिग्नल होता है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब विमान किसी गंभीर संकट का सामना कर रहा हो। इसके कुछ ही समय बाद विमान रडार से गायब हो गया। आखिरी लोकेशन: होर्मुज़ जलडमरूमध्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान ने अपनी ऊंचाई कम की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के ऊपर सिग्नल खो दिया। माना जा रहा है कि यह उस समय एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग मिशन पर था और किसी सैन्य बेस की ओर बढ़ रहा था। एक घंटे बाद पूरी तरह बंद हुआ सिग्नल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरजेंसी कोड भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद विमान का ट्रांसपोंडर सिग्नल पूरी तरह बंद हो गया। हालांकि केवल सिग्नल खोना किसी दुर्घटना की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इमरजेंसी अलर्ट के बाद ऐसा होना चिंता बढ़ा रहा है। क्या हो सकती हैं वजहें? विशेषज्ञों के अनुसार 7700 कोड कई कारणों से ट्रिगर हो सकता है, जैसे: तकनीकी खराबी इंजन या सिस्टम फेल होना आग लगना मेडिकल इमरजेंसी बाहरी खतरा या हमले की आशंका फिलहाल किसी भी वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नहीं मिला कोई मलबा या SOS संकेत अब तक न तो किसी मलबे का पता चला है, न ही कोई डिस्टेस कॉल (SOS) या रेस्क्यू ऑपरेशन की पुष्टि हुई है। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स की संख्या भी स्पष्ट नहीं है, हालांकि KC-135 आमतौर पर सीमित क्रू के साथ उड़ान भरता है। क्यों अहम है यह घटना? होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य या तकनीकी घटना का असर सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे में इस अमेरिकी टैंकर विमान का अचानक गायब होना रणनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तनाव के बीच बढ़ी चिंता ईरान-अमेरिका तनाव के बीच इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं–क्या यह तकनीकी खराबी थी या किसी बड़े घटनाक्रम का संकेत? फिलहाल सभी की नजरें आधिकारिक बयान और आगे आने वाली जानकारी पर टिकी हैं।
‘रोल प्ले’ के नाम पर रची गई खौफनाक साजिश बेंगलुरु से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जिसने सभी को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय किरण की हत्या उसकी प्रेमिका प्रेमा ने बेहद सुनियोजित तरीके से की। आरोपी ने ‘रोल प्ले’ का बहाना बनाकर किरण को अपने घर बुलाया, जहां पहले उसे रस्सी से बांधा गया और फिर उस पर केरोसिन डालकर आग लगा दी गई। रिश्ते में दरार और जलन बनी हत्या की वजह पुलिस के अनुसार, किरण और प्रेमा एक मोबाइल सर्विस स्टोर में साथ काम करते थे और दोनों के बीच प्रेम संबंध था। प्रेमा इस रिश्ते को शादी तक ले जाना चाहती थी, लेकिन किरण इससे दूरी बनाने लगा था। मामला तब और बिगड़ गया जब किरण ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड से दोबारा संपर्क किया और उसके साथ जन्मदिन मनाया। यह बात प्रेमा को नागवार गुजरी और इसी से उसके मन में बदले की भावना पैदा हुई। पहले से की थी हत्या की पूरी तैयारी जांच में सामने आया है कि प्रेमा ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बना ली थी। उसने पेट्रोल, केरोसिन और रस्सी का इंतजाम पहले ही कर लिया था। इसके बाद उसने अकेले में मिलने के बहाने किरण को अपने घर बुलाया और वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद मची अफरा-तफरी घटना के बाद आसपास के लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूचना मिलने पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। किरण के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और पूछताछ में प्रेमा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस जांच जारी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रिश्तों में बढ़ती असुरक्षा और भावनात्मक असंतुलन किस तरह खतरनाक रूप ले सकता है।
सीजफायर के बीच फिर शुरू हो सकती है बातचीत Donald Trump ने ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अगले 36 से 72 घंटों में शांति वार्ता को लेकर “अच्छी खबर” आ सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच दूसरी दौर की बातचीत की संभावना बन रही है, हालांकि स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। पाकिस्तान बना मध्यस्थ, बैकचैनल बातचीत तेज Pakistan इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद के जरिए बैकचैनल डिप्लोमेसी जारी है, जिससे बातचीत दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच सीजफायर अभी तक काफी हद तक कायम है, जो सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ईरान से ‘एकजुट प्रस्ताव’ का इंतजार Donald Trump ने हाल ही में सीजफायर को आगे बढ़ाने का ऐलान किया था और कहा था कि अमेरिका, Iran की ओर से एक “संयुक्त प्रस्ताव” का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही आगे की वार्ता शुरू होगी। हालांकि, ईरान ने अभी तक नए दौर की बातचीत में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हमले, बढ़ी चिंता इस बीच Strait of Hormuz में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तीन जहाजों पर हमला किया, जिनमें से दो को कब्जे में ले लिया गया। यह इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां बढ़ती गतिविधियां वैश्विक चिंता का कारण बन रही हैं। लेबनान में भी जारी हिंसा Lebanon में भी स्थिति स्थिर नहीं है। दक्षिणी इलाके में एक वाहन पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई। यह हमला सीजफायर लागू होने के बावजूद हुआ, जिससे क्षेत्रीय शांति पर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों की राय: उम्मीद और खतरे दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ बातचीत की संभावना बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर जारी हिंसा शांति प्रक्रिया को कमजोर कर सकती है। अगर अगले 72 घंटों में सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो यह मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
दक्षिणी लेबनान में फिर भड़की हिंसा, सीजफायर पर सवाल इजरायल और लेबनान के बीच जारी अस्थायी सीजफायर के बावजूद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमले में एक महिला पत्रकार सहित कुल 5 लोगों की मौत हो गई है। इस घटना ने पहले से ही कमजोर चल रहे सीजफायर समझौते पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमला लेबनान के अत-तिरी गांव और आसपास के इलाकों में किया गया, जहां दो वाहनों और बाद में एक इमारत को निशाना बनाया गया। पत्रकारों पर हमला, अमल खलील की मौत घटना के दौरान दो पत्रकार मौके पर कवरेज के लिए पहुंचे थे, तभी दूसरा हवाई हमला हुआ। इस हमले में दोनों पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में मलबे से निकालने के दौरान महिला पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई। अमल खलील स्थानीय मीडिया संस्थान “अल-अखबार” के लिए काम करती थीं। उनकी मौत के बाद मीडिया जगत में शोक की लहर है और पत्रकार सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। इजरायली सेना का दावा – हिज्बुल्लाह को बनाया निशाना इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बयान जारी करते हुए कहा है कि यह हमला हिज्बुल्लाह की गतिविधियों के जवाब में किया गया। सेना के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में दो संदिग्ध लोग इजरायली सैनिकों के करीब पहुंच रहे थे, जिसके बाद खतरे को देखते हुए कार्रवाई की गई। इजरायल का दावा है कि हिज्बुल्लाह सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है और सैन्य ठिकानों के पास गतिविधियां बढ़ा रहा है। लेबनान ने लगाया आरोप, पत्रकारों पर हमला निंदनीय लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इजरायली हमले की कड़ी निंदा की है। वहीं सूचना मंत्री ने कहा कि बचाव कार्य के दौरान भी हमला किया गया, जो बेहद गंभीर और अस्वीकार्य है। सरकार ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता और मानवीय सुरक्षा पर हमला बताया है। सीजफायर पर फिर मंडराया संकट इस ताजा घटना के बाद इजरायल-लेबनान सीजफायर एक बार फिर खतरे में दिख रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों पर अनिश्चितता गहराती जा रही है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान के परमाणु ठिकानों को “पूरी तरह तबाह” कर दिया गया है, जिससे बातचीत की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ का दावा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों को खाक कर दिया गया है। उनके मुताबिक, इन ठिकानों को दोबारा उपयोग में लाना अब बेहद मुश्किल होगा और इसके लिए लंबा समय लगेगा। उन्होंने इस दौरान अमेरिकी मीडिया–खासकर CNN–पर भी निशाना साधते हुए “फेक न्यूज” करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी उपलब्धियों को जानबूझकर कम करके दिखाया जा रहा है। ईरान का पलटवार–‘धमकियों में बातचीत नहीं’ ईरान ने ट्रंप के इन दावों और दबाव की रणनीति को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका बातचीत को “आत्मसमर्पण” में बदलना चाहता है, जिसे तेहरान कभी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो ईरान भी अपने नए सैन्य कदम उठाने के लिए तैयार है और “मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोल सकता है।” सीजफायर पर भी असमंजस इस बीच ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि 22 अप्रैल को खत्म हो रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में वे नहीं हैं। इससे क्षेत्र में फिर से टकराव बढ़ने की आशंका गहरा गई है। हालांकि पहले यह योजना थी कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल–जिसमें जेडी वेंस और जैरेड कुशनर जैसे नाम शामिल थे–इस्लामाबाद जाकर बातचीत करेगा, लेकिन ईरान की अनिच्छा के कारण यह पहल अधर में लटकी हुई है। बढ़ता तनाव, घटती बातचीत की उम्मीद एक तरफ अमेरिका सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर ईरान सख्त रुख अपनाए हुए है। ऐसे में साफ संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल कूटनीतिक रास्ता मुश्किल होता जा रहा है और हालात फिर से टकराव की ओर बढ़ सकते हैं।
Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की अटकलों के बीच तेहरान ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव और धमकियों के बीच किसी भी वार्ता को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान का तीखा बयान ईरानी संसद (मजलिस) के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा: “ट्रंप घेराबंदी और युद्धविराम तोड़कर बातचीत की मेज़ को आत्मसमर्पण की मेज़ बनाना चाहते हैं या फिर युद्ध को सही ठहराना चाहते हैं।” ग़ालिबाफ़ ने साफ कहा कि ईरान “धमकियों के साये में बातचीत” नहीं करेगा। ‘मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोलने की तैयारी’ ग़ालिबाफ़ ने अपने बयान में संकेत दिया कि ईरान सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा: “पिछले दो हफ्तों से हमने मैदान-ए-जंग में नए पत्ते खोलने की तैयारी कर ली है।” यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप की रणनीति पर सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं और समझौते की बात कर रहे हैं। लेकिन ईरान का आरोप है कि: अमेरिका एक तरफ बातचीत की बात करता है दूसरी तरफ सैन्य दबाव और नाकेबंदी जारी रखता है पाकिस्तान में वार्ता पर अनिश्चितता Islamabad में दूसरे दौर की बातचीत की तैयारियां चल रही हैं। अमेरिका ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा: अभी तक वार्ता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है ईरान फिलहाल स्थिति का आकलन कर रहा है पहले दौर की बातचीत का संदर्भ ईरान और अमेरिका के बीच पहले दौर की बातचीत पहले ही हो चुकी है, जिसमें Mohammad Bagher Ghalibaf ने ईरान का नेतृत्व किया था। हालांकि, वह वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
US Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता फिलहाल स्थगित हो गई है, क्योंकि ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल किसी भी बातचीत में शामिल होने के मूड में नहीं है। इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत की खबर सामने आई है। ईरान ने बातचीत से किया इनकार ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने साफ कहा है कि तेहरान के पास फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी नए दौर की वार्ता की कोई योजना नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में शांति वार्ता की कोशिशें तेज थीं और मध्यस्थता की तैयारी चल रही थी। मुनीर-ट्रंप फोन कॉल में क्या हुआ? रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में बताया गया कि: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव वार्ता के लिए सबसे बड़ा रोड़ा है ईरान की स्थिति के कारण बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है बताया जा रहा है कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर “गंभीरता से विचार करने” की बात कही है। होर्मुज संकट बना मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में: अमेरिका ने ईरानी ध्वज वाले मालवाहक पोत को रोका ईरान ने इसे “समुद्री डकैती” बताया दोनों देशों के बीच समुद्री तनाव और बढ़ गया अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरानी जहाज “तुस्का” को रुकने की चेतावनी दी गई और फिर उसे नियंत्रित कर लिया गया। अमेरिका का दावा है कि: जहाज प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था अमेरिकी मरीन ने उसे सुरक्षित रूप से कब्जे में लिया वहीं ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पहली बार नाकेबंदी के बाद बड़ी घटना अमेरिकी नाकेबंदी अभियान शुरू होने के बाद यह पहली बड़ी घटना है जब किसी ईरानी पोत को सीधे रोका गया है। ईरान का कहना है कि यह: समुद्री डकैती जैसा कदम है और युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन है सीजफायर पर भी खतरा ईरान और अमेरिका के बीच जारी 14 दिनों का सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है। ऐसे में: वार्ता की अनिश्चितता बढ़ गई है होर्मुज तनाव ने स्थिति और जटिल बना दी है पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी सवाल उठ रहे हैं
मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। Gulf of Oman में United States और Iran के बीच सीधा सैन्य टकराव जैसी स्थिति बन गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरानी मर्चेंट शिप पर कार्रवाई के बाद तेहरान ने जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिकी युद्धपोतों की ओर ड्रोन भेजे हैं। क्या हुआ ओमान की खाड़ी में? ईरानी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार: अमेरिकी सेना ने ईरान के एक व्यापारिक जहाज़ को निशाना बनाया जहाज़ को रोककर उसे वापस ईरानी समुद्री सीमा में भेजने की कोशिश की गई इस कार्रवाई को ईरान ने “उकसावे वाली” कार्रवाई बताया इसके जवाब में: ईरान की सेना और Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिकी युद्धपोतों की दिशा में ड्रोन तैनात किए IRGC का दावा है कि अमेरिकी नौसेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, जिससे स्थिति और धुंधली बनी हुई है। होर्मुज और खाड़ी की रणनीतिक अहमियत Strait of Hormuz और Gulf of Oman वैश्विक तेल व्यापार के सबसे अहम मार्गों में गिने जाते हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव सीधे तेल कीमतों और सप्लाई पर असर डाल सकता है इसी वजह से इस क्षेत्र में बढ़ती हर गतिविधि को वैश्विक स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है। जहाज़ ‘टूस्का’ पर कार्रवाई अमेरिका ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसने ‘टूस्का’ नाम के ईरानी जहाज़ को रोक लिया है। United States Central Command (CENTCOM) के अनुसार कई बार चेतावनी देने के बाद भी जहाज़ नहीं रुका इसके बाद अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने उसके इंजन रूम पर फायरिंग की जहाज़ को निष्क्रिय कर अमेरिका ने अपने कब्जे में ले लिया इस कार्रवाई की पुष्टि Donald Trump ने भी की है। ईरान का पलटवार और आरोप ईरान ने इस पूरी घटना को “समुद्री डकैती” करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा साथ ही, ईरान ने कुछ विदेशी टैंकरों को भी रास्ते से वापस भेजा है, जिससे तनाव और बढ़ गया है। सीजफायर पर भी सवाल ईरान ने आरोप लगाया है कि 8 अप्रैल को घोषित युद्धविराम का अमेरिका ने उल्लंघन किया है। तेहरान का कहना है कि पहले अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाए तभी किसी भी तरह की बातचीत संभव होगी यानी कूटनीतिक रास्ते फिलहाल कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। क्या बढ़ सकता है युद्ध? विशेषज्ञ मानते हैं कि हालात बेहद नाजुक हैं: दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं छोटे-छोटे टकराव बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं ड्रोन, नौसैनिक कार्रवाई और नाकेबंदी–तीनों मिलकर जोखिम बढ़ा रहे हैं ओमान की खाड़ी में हुआ यह घटनाक्रम सिर्फ एक क्षेत्रीय झड़प नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का संकेत हो सकता है। एक ओर अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखा रहा है, तो दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि: क्या यह टकराव कूटनीति से सुलझेगा या फिर मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है
वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए 51 देशों की बैठक के बाद फैसला होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और समुद्री व्यापार पर खतरे को देखते हुए अब यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने एक बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने घोषणा की है कि दोनों देश मिलकर एक बहुराष्ट्रीय (Multinational) रक्षा मिशन का नेतृत्व करेंगे, जिसका उद्देश्य समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखना होगा। यह फैसला 51 देशों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया है, जिसमें कई देशों ने इस मिशन में सहयोग देने की इच्छा जताई है। मिशन होगा पूरी तरह शांतिपूर्ण और रक्षात्मक ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि यह मिशन किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होगा। इसका उद्देश्य केवल: वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा समुद्री मार्गों की निगरानी और बारूदी सुरंगों (माइन) को हटाना होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह मिशन तब पूरी तरह लागू होगा जब क्षेत्र में चल रहा संघर्ष समाप्त हो जाएगा। होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों है अहम? होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से बड़े पैमाने पर तेल और गैस का परिवहन होता है। हाल ही में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से बढ़ी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, हाल के संघर्ष के दौरान ईरान पर इस जलमार्ग को बाधित करने के आरोप लगे थे। हालांकि बाद में ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया कि यह मार्ग अब पूरी तरह खुला है। उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि समुद्री रास्ते फिर से चालू हो गए हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने नाटो की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसे “जरूरत के समय कमजोर” बताया। ब्रिटेन और फ्रांस की संयुक्त अगुवाई कीर स्टारमर और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इस मिशन में दर्जनों देश शामिल हो सकते हैं। कई देशों ने अपने सैन्य और तकनीकी संसाधन देने की पेशकश भी की है। मैक्रों ने कहा कि हालात में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन अभी सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जर्मनी समेत कई देशों का समर्थन जर्मनी ने भी इस मिशन का समर्थन करते हुए कहा है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका की भागीदारी इस मिशन को और मजबूत बना सकती है। अगले हफ्ते आएगा पूरा रोडमैप ब्रिटेन सरकार ने बताया है कि इस मिशन की विस्तृत योजना अगले हफ्ते लंदन में होने वाली सैन्य बैठक के बाद सार्वजनिक की जाएगी।
हॉर्मुज संकट के बाद ट्रंप का तीखा बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर था, तब NATO ने कोई प्रभावी मदद नहीं की, लेकिन स्थिति सामान्य होने के बाद सहायता की पेशकश की गई। “अब आपकी मदद की जरूरत नहीं” – ट्रंप एरिजोना में आयोजित Turning Point USA कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि NATO ने अमेरिका से तब संपर्क किया जब हालात लगभग स्थिर हो चुके थे। उन्होंने कहा कि अगर मदद चाहिए थी, तो “दो महीने पहले चाहिए थी, अब नहीं।” ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “वे उस समय पूरी तरह बेकार साबित हुए जब हमें उनकी जरूरत थी। लेकिन सच यह है कि हमें उनकी जरूरत कभी नहीं थी, उन्हें हमारी जरूरत थी।” हॉर्मुज संकट और वैश्विक तनाव यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक सुर्खियों में रहा। यह वही समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। हालांकि अब स्थिति कुछ हद तक स्थिर बताई जा रही है, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नाटो को बताया ‘पेपर टाइगर’ ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में NATO को “पेपर टाइगर” तक कह दिया। उन्होंने लिखा कि संकट के दौरान संगठन कमजोर और निष्क्रिय रहा, लेकिन अब जब स्थिति सुधर रही है, तो मदद की बात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर NATO को सहयोग करना ही है, तो वे “तेल ले जाने के लिए जहाज भर सकते हैं।” क्षेत्रीय देशों की तारीफ अपने बयान में ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों की तारीफ भी की। उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों ने संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। ईरान और हॉर्मुज को लेकर स्थिति ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि युद्धविराम अवधि में सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा। हालांकि अमेरिका ने इस क्षेत्र में कड़ा रुख बनाए रखा है और नौसैनिक दबाव जारी है। ट्रंप का यह बयान एक बार फिर अमेरिका और NATO के बीच मतभेद को उजागर करता है। साथ ही यह भी दिखाता है कि हॉर्मुज संकट ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों पर गहरा असर डाला है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।