रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम केंद्र, रांची ने 23 से 25 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। 23 जुलाई को लातेहार और आसपास के क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा रांची, बोकारो, गुमला, हजारीबाग, खूंटी, रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां और कोडरमा समेत कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ मेघ गर्जन और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, 24 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून का असर बना रहेगा। उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गिरिडीह, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। वहीं 25 जुलाई को लातेहार, चतरा और मध्य झारखंड से सटे उत्तर-पश्चिमी इलाकों में भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो 1 जून से 22 जुलाई 2026 के बीच झारखंड में 299.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षापात 414.9 मिलीमीटर होना चाहिए था। यानी राज्य में अब तक 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा, चतरा, पाकुड़, देवघर, कोडरमा और गोड्डा जैसे जिलों में दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की आगामी सक्रियता से वर्षा की कमी कुछ हद तक पूरी होने की उम्मीद है, हालांकि किसानों और आम लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
रांची। झारखंड में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार, कई जिलों में भारी बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है 20 जुलाई को हजारीबाग, रामगढ़, रांची, लोहरदगा, चतरा और लातेहार जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। वहीं, 21 जुलाई को रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा और लातेहार में भी भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा 22 से 25 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। वज्रपात और हादसों में पांच की मौत इधर, रविवार को वज्रपात और अन्य हादसों में पांच लोगों की मौत हो गई। सरायकेला के नुवागोड़ा गांव में आकाशीय बिजली गिरने से रोशनी सुरीन और सोनू सरदार (32) की जान चली गई। चंपुआ थाना क्षेत्र के विष्णुपुर गांव में किसान मोहन चरण गिरि (55) की भी वज्रपात से मौत हो गई। गोमिया के तेनुघाट डैम में मछली पकड़ने गए संतोष केवट उर्फ डमडम केवट (34) की डूबने से मौत हो गई, जबकि गुमला जिले के सिसई में जयंती देवी (56) की जान ठनका गिरने से चली गई। 24 घंटे में कई स्थानों पर हुई बारिश पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। धनबाद के राजदह में सर्वाधिक 76.8 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा हेंदेगिर (67.2 मिमी), नवाडीह (67 मिमी), जगन्नाथपुर (65 मिमी), पुटकी (57.2 मिमी) और राजधनवार (48.8 मिमी) में भी उल्लेखनीय बारिश हुई। राजधानी रांची में करीब दो घंटे तक हुई लगातार बारिश से कांके रोड, रातू रोड और बरियातू सहित कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई, जबकि मेन रोड, धुर्वा और डोरंडा में हल्की बारिश दर्ज की गई।
रांची। झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले तीन दिनों तक मौसम के तेवर बदले रहेंगे। रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश, मेघगर्जन और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है। रांची सहित कई जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार से राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो गया है। रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा बोकारो, धनबाद, कोडरमा, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। 18 और 19 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर शनिवार और रविवार को भी मानसून सक्रिय रहेगा। 18 जुलाई को रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और खूंटी में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं 19 जुलाई को दक्षिण-पश्चिमी और मध्य झारखंड के इलाकों, विशेषकर रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा और लातेहार में कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश और वज्रपात की आशंका बनी रहेगी। अब तक सामान्य से 40 प्रतिशत कम हुई बारिश मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जुलाई तक झारखंड में औसतन 216.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य वर्षा 359.8 मिमी होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पिछले 24 घंटे में बोकारो सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
रांची। झारखंड में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 17 जुलाई से राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। अगले तीन दिनों तक कई जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। आज इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट शुक्रवार को पूरे राज्य में बादल छाए रहने और अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। वहीं रांची, हजारीबाग, रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और खूंटी में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा रांची, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, सरायकेला-खरसावां, पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज सहित कई जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने और वज्रपात की भी आशंका है। 18 और 19 जुलाई को भी बना रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के अनुसार, 18 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहेगी। हजारीबाग, रामगढ़, रांची, लोहरदगा, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और खूंटी में कहीं-कहीं तेज बारिश हो सकती है। वहीं 19 जुलाई को दक्षिण-पश्चिमी और मध्य झारखंड के इलाकों, विशेषकर रांची, गुमला, खूंटी, लोहरदगा और लातेहार में भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। अब भी सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश बीते 24 घंटे में बोकारो राज्य का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं लातेहार में न्यूनतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। मौसम केंद्र के अनुसार, 1 जून से 17 जुलाई तक झारखंड में औसतन 216.8 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि सामान्य वर्षा 359.8 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी राज्य में अब तक करीब 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि अगले तीन दिनों में होने वाली बारिश से वर्षा की कमी कुछ हद तक कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के लिए रेड वार्निंग जारी की गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद पुरी जिला प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को सरकारी और निजी सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट आईएमडी ने बुधवार के लिए मयूरभंज, क्योंझर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, खुरधा, कटक, नयागढ़, अंगुल, ढेंकनाल, बौध, गंजम और कंधमाल जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।वहीं बालेश्वर, देवगढ़, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, बारगढ़, सोनपुर, बलांगीर, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा और गजपति जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष एडवाइजरी रथ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आईएमडी ने कहा है कि तेज बारिश या आकाशीय बिजली की स्थिति में लोग किसी पक्के भवन में शरण लें। पेड़ों, बिजली के खंभों या अस्थायी ढांचों के नीचे खड़े होने से बचें। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह समुद्र में मौसम खराब रहने की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को 17 जुलाई तक ओडिशा तट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार इस दौरान समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चल सकती हैं। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ निम्न दबाव आईएमडी के मुताबिक, बुधवार सुबह उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना है। अगले दो दिनों में इसके उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। पुरी में जलभराव की स्थिति मंगलवार शाम से पुरी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही है। भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया है। भगवान जगन्नाथ मंदिर के सामने स्थित ग्रैंड रोड, जहां रथ यात्रा के दौरान रथ खींचे जाते हैं, वहां भी पानी जमा हो गया। प्रशासन ने जलनिकासी के लिए अग्निशमन विभाग की टीमों को लगाया है। आईएमडी के अनुसार, बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों में पुरी शहर में 143.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे अधिक रही। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 17 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया है। यह एक दिवसीय सम्मेलन द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के सभागार में आयोजित होगा। इसमें झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकार हिस्सा लेंगे। सम्मेलन को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करेंगे और मीडिया से सीधे संवाद भी करेंगे। चुनावी रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर होगा मंथन सुबह 9 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत डीजी (मीडिया) आशीष गोयल के संबोधन से होगी, जिसमें चुनाव में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद IIIDEM के महानिदेशक राकेश कुमार वर्मा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में डीजी (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना चुनाव आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देंगी। वहीं, डीडीजी (लॉ) विजय कुमार पांडे चुनाव संबंधी संवैधानिक प्रावधानों और हाल के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा अपूर्वा कुमार सिंह इलेक्ट्रोरल रोल, मतदान प्रक्रिया और मतगणना प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुति देंगे। पत्रकारों को मिलेगा सवाल पूछने का अवसर सम्मेलन का सबसे अहम आकर्षण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष संबोधन होगा, जिसमें वे चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के महत्व पर अपने विचार रखेंगे। उनके संबोधन के बाद शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें पत्रकार सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल पूछ सकेंगे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य से 10 से 12 पत्रकार इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकारों को निर्वाचन प्रक्रिया, कानून, तकनीक और आयोग की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे भविष्य में चुनाव संबंधी खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता मजबूत होगी।
पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। मौसम विभाग ने गुरुवार को दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। खासकर कोलकाता सहित आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं तटीय क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है। बंगाल की खाड़ी में बना नया निम्न दबाव मौसम विभाग के अनुसार, एक निम्न दबाव क्षेत्र के समाप्त होने के बाद बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है। यह प्रणाली बंगाल-ओडिशा तट के पास केंद्रित है और ओडिशा के रास्ते आगे बढ़ रही है। इसके प्रभाव से पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश होने की संभावना है। बारिश से खेती को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। बुधवार सुबह से ही कई क्षेत्रों में लगातार बारिश दर्ज की गई है। तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट रथ यात्रा के दिन दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इनमें तीन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। मछुआरों को समुद्र में जाने पर रोक निम्न दबाव के प्रभाव को देखते हुए मछुआरों को 19 जुलाई तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की आशंका के कारण यह एहतियाती कदम उठाया गया है। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण बंगाल में अगले शनिवार से बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। हालांकि उत्तर बंगाल में रविवार से फिर बारिश बढ़ने की संभावना है। उत्तर बंगाल के पांच जिलों के लिए रविवार और सोमवार को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
कोलकाता: बदलते मौसम और लगातार बढ़ती जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) ने एक नई पहल शुरू की है। निगम शहर के 50 से अधिक जलजमाव प्रभावित इलाकों में विशेष भूमिगत जलाशय (अंडरग्राउंड रिजर्वायर) बना रहा है। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को संग्रहित कर उसे फिल्टर करने के बाद भूजल स्तर को रिचार्ज करना है। 50 से अधिक इलाकों में शुरू हुआ काम नगर निगम के ड्रेनेज विभाग ने शहर के 50 से अधिक ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या होती है। इन स्थानों पर भूमिगत जलाशय तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें भारी बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी एकत्र किया जाएगा। इसके बाद आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणाली से पानी को साफ कर पाइपलाइन के जरिए जमीन के भीतर भेजा जाएगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। दो समस्याओं का एक साथ समाधान नगर निगम का कहना है कि इस परियोजना से दो बड़े लाभ होंगे। पहला, बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव कम होगा और दूसरा, लगातार गिर रहे भूजल स्तर को दोबारा बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश हो रही है, जिससे शहर का पुराना ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। 70 से 90 मीटर की गहराई तक भेजा जाएगा पानी ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिल्टर किया गया बारिश का पानी विशेष पाइपों के माध्यम से जमीन के भीतर 70 से 90 मीटर की गहराई तक स्थित प्राकृतिक रेतीली परतों में पहुंचाया जाएगा। इससे केवल स्वच्छ पानी ही भूजल में जाएगा और जल स्रोतों का प्राकृतिक पुनर्भरण (रिचार्ज) होगा। क्यों जरूरी है यह परियोजना कोलकाता में हाल के वर्षों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने लगी है। कई बार शहर का ड्रेनेज नेटवर्क एक घंटे में जितना पानी निकाल सकता है, उससे कहीं अधिक पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इससे लंबे समय तक जलभराव बना रहता है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर निगम का मानना है कि नई परियोजना जलभराव की समस्या को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगी, लेकिन इसकी गंभीरता को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। सफल होने पर पूरे शहर में होगा विस्तार ड्रेनेज विभाग ने बताया कि फिलहाल इस योजना को 50 से 55 जलभराव वाले क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। परियोजना के परिणामों का आकलन करने के बाद इसे कोलकाता के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी विस्तार दिया जाएगा। नगर निगम को उम्मीद है कि यह पहल न केवल मानसून के दौरान नागरिकों को राहत देगी, बल्कि भविष्य में शहर के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
रांची। झारखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही कई इलाकों में वज्रपात और 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और बोकारो सहित कई जिलों में भारी वर्षा हो सकती है। कुछ स्थानों पर कम समय में तेज बारिश होने से जलभराव और निचले इलाकों में परेशानी बढ़ने की आशंका है। किसानों और आम लोगों के लिए सलाह लगातार बारिश से किसानों को धान की बुआई में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बिजली गिरने और तेज हवाओं को देखते हुए खेतों में काम करने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन ने लोगों से पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने तथा मौसम खराब होने पर सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। अगले कुछ दिन रहेगा सक्रिय मानसून IMD के अनुसार झारखंड में 12 से 14 जुलाई तक मानसून सक्रिय रहेगा और कई जिलों में रुक-रुक कर बारिश जारी रह सकती है। मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी भारत में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े कम दबाव के क्षेत्र और उससे बनी चक्रवाती परिसंचरण के असर से दोनों राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों के लिए बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। झारखंड से बंगाल तक मौसम का बदला मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में ज्यादा असर की आशंका पश्चिम बंगाल के उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं झारखंड के कई जिलों में भी तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवा चलने की चेतावनी दी गई है। IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित भारी बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और बिजली आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून की सक्रिय स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून के सक्रिय होने और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच गंगा नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसे देखते हुए पटना जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संवेदनशील घाटों और निचले क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जबकि बाढ़ से निपटने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बढ़ाई निगरानी जल संसाधन विभाग के केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। अधिकारियों को तटबंधों की नियमित निगरानी, संभावित कटाव वाले स्थानों का निरीक्षण और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों पर प्रशासन की विशेष नजर पटना के नदी किनारे बसे इलाकों और घाटों पर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। स्थानीय अधिकारियों को लोगों को समय-समय पर स्थिति से अवगत कराने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव दलों को भी अलर्ट मोड में रखा गया है। नेपाल की बारिश का बिहार पर असर नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गंगा की सहायक नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही तो बिहार की कई नदियों में जलस्तर और बढ़ सकता है, इसलिए प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। लोगों से सतर्क रहने की अपील प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। साथ ही नदी में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में मानसून की सक्रियता के चलते लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और नदियों के जलस्तर बढ़ने की चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा मौसम विभाग के अनुसार, इलाम, झापा, पंचथर, धनकुटा, मोरंग, सुनसरी, सप्तरी, डडेलधुरा और डोटी सहित कई जिलों में छोटी नदियों और पहाड़ी जलधाराओं का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का बढ़ा खतरा लगातार बारिश के कारण नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। कई सड़कों पर आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क बाधित होने की भी सूचना है। प्रशासन ने स्थानीय निकायों और राहत एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील नेपाल सरकार ने नदी किनारे रहने वाले लोगों, पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों और यात्रियों से मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखने की अपील की है। लोगों को खराब मौसम के दौरान नदी-नालों को पार न करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। मानसून अभी और रहेगा सक्रिय नेपाल के मौसम विभाग का कहना है कि देशभर में मानसून सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है। ऐसे में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं का खतरा बना रहेगा। भारत के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ सकता है असर विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश का असर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है। नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में वृद्धि होने पर निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए संबंधित एजेंसियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज क्षेत्र में कालिंदी नदी के तटबंध (बांध) का करीब 300 फुट हिस्सा धंस जाने से आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। घटना के बाद साहेबखाली और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि बांध और कमजोर हुआ तो नदी का पानी गांवों, कृषि भूमि और मछली पालन के तालाबों में घुस सकता है। साहेबखाली इलाके में बढ़ी लोगों की चिंता स्थानीय लोगों के मुताबिक, कालिंदी नदी का यह तटबंध पहले से ही कमजोर स्थिति में था। लगातार कटाव और बारिश के बीच अचानक करीब 300 फुट हिस्से में धंसाव होने से हालात गंभीर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपाय करने की मांग की है ताकि संभावित बाढ़ से जान-माल की रक्षा की जा सके। आयला और अम्फान जैसी तबाही का डर ग्रामीणों ने वर्ष 2009 के चक्रवात आयला और 2020 के चक्रवात अम्फान को याद करते हुए कहा कि उन आपदाओं के दौरान भी तटबंध टूटने से भारी नुकसान हुआ था। उनका कहना है कि अस्थायी मरम्मत की बजाय कालिंदी नदी के किनारे स्थायी कंक्रीट तटबंध बनाया जाए, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन ने सिंचाई विभाग को किया अलर्ट हिंगलगंज के बीडीओ देवदास गंगोपाध्याय ने बताया कि तटबंध धंसने की सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग को अवगत करा दिया गया है। विभाग की टीम आवश्यक कदम उठाने की तैयारी में जुटी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें मौके से प्रारंभिक रिपोर्ट मिली है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आवश्यकता पड़ने पर आपदा प्रबंधन टीम भी भेजी जाएगी। मरम्मत कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद प्रशासन का कहना है कि प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच के बाद मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। साथ ही नदी के जलस्तर और तटबंध की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि मानसून के दौरान तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि थोड़ी भी लापरवाही आसपास के गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है।
पटना, एजेंसियां। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार को बिहार के कई जिलों के लिए भारी बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज़ हवाओं का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, पटना, बेतिया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, मधुबनी और आसपास के जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश और खराब मौसम की संभावना है। 60 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं IMD के अनुसार, कई इलाकों में 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं। भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, यातायात प्रभावित होने और बिजली गिरने की घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े न होने तथा बिजली चमकने के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। प्रशासन को भी संभावित आपदा से निपटने के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून रहेगा सक्रिय IMD के अनुसार, सक्रिय मानसून के प्रभाव से बिहार में अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रह सकता है। उत्तर बिहार के कई जिलों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को आवश्यक तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मुंबई: महाराष्ट्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सोमवार (6 जुलाई) को भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन के कारण मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराना मुंबई-पुणे हाईवे दोनों को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया। प्रशासन ने अगली सूचना तक दोनों शहरों के बीच यात्रा न करने की सलाह दी है। दोनों प्रमुख मार्गों पर यातायात पूरी तरह बंद पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक एडवाइजरी के अनुसार, लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और पुराने हाईवे पर दोनों दिशाओं में वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यदि उनकी यात्रा जरूरी नहीं है, तो फिलहाल उसे स्थगित कर दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। बाढ़ और जलभराव से हालात गंभीर अधिकारियों के मुताबिक, मावल और ताम्हिणी घाट क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। इससे मुंबई और पुणे को जोड़ने वाले वैकल्पिक मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर एक कंक्रीट का खंभा गिरने के बाद 'कनेक्टिंग लिंक' और 'मिसिंग लिंक' के बीच का हिस्सा भी यातायात के लिए बंद कर दिया गया है। वहीं, पुराने मुंबई-पुणे हाईवे पर कई स्थानों पर घुटनों तक पानी भर जाने के कारण वहां भी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है। भूस्खलन के बाद राहत-बचाव अभियान जारी पुलिस ने बताया कि लोहगढ़ किले के पास पाटन गांव में भूस्खलन की घटना सामने आई है। सूचना मिली है कि एक परिवार मलबे में फंस गया है, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर अभियान चला रहे हैं। पुणे में स्कूल बंद लगातार खराब मौसम को देखते हुए पुणे जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। 'मिसिंग लिंक' परियोजना भी प्रभावित अधिकारियों के अनुसार, सोमवार तड़के खोपोली-कुसगांव के पास 'मिसिंग लिंक' परियोजना की सुरंग-2 के बाहर भूस्खलन हुआ, जिससे एक्सप्रेसवे पर यातायात बाधित हो गया। गौरतलब है कि करीब 13 किलोमीटर लंबा 'मिसिंग लिंक' बाईपास दो महीने पहले ही शुरू किया गया था। इस परियोजना से मुंबई और पुणे के बीच यात्रा का समय लगभग 25 से 30 मिनट कम हो गया था। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम सामान्य होने तक मुंबई-पुणे मार्ग पर यात्रा से बचें। साथ ही, यात्रा करने से पहले ट्रैफिक और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट अवश्य जांच लें। लगातार बारिश को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं निगरानी का काम जारी है।
रांची। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने झारखंड में अगले दो दिनों तक भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवा की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी रांची सहित लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां समेत कई जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई इलाकों में तेज बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र और सक्रिय मानसून के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। पिछले 24 घंटों में सिमडेगा में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि मेदिनीनगर राज्य का सबसे गर्म शहर रहा। प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी भारी बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े न होने, नदी-नालों से दूर रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। किसानों को भी मौसम अपडेट पर नजर रखने और खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने को कहा गया है। अगले सप्ताह तक जारी रह सकती है बारिश IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, झारखंड में मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। 6 से 8 जुलाई के बीच भी राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: देश में सामान्य से कम बारिश और अल नीनो के प्रभाव के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने लगी है। स्थिति की समीक्षा के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वर्षा की कमी से प्रभावित जिलों में जिला स्तर पर कंटीजेंसी प्लान (आकस्मिक योजना) को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में खरीफ बुवाई, मानसून की प्रगति, अल नीनो के संभावित प्रभाव, उर्वरकों की उपलब्धता, खाद्यान्न भंडारण और फसल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। खरीफ बुवाई में 25 फीसदी की कमी कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष जून तक 236.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष यह घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी पिछले साल की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिसका असर खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्रियों के साथ होगी समीक्षा बैठक बैठक में निर्णय लिया गया कि वर्षा की कमी से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अलग से बैठक कर कंटीजेंसी प्लान के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकारों को संभावित सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। 210 जिले अब भी वर्षा की कमी से प्रभावित कृषि मंत्रालय के अनुसार, देशभर में वर्षा की कमी की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की पहचान की गई थी। इनमें से हाल की बारिश के बाद 52 जिलों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन 210 जिले अब भी कमजोर मानसून की मार झेल रहे हैं। वहीं, आठ जिले पूरी तरह सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। कृषि मंत्री ने दिए सतत निगरानी के निर्देश केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अल नीनो के संभावित प्रभावों पर लगातार नजर रखी जाए और तैयार की गई कार्ययोजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर सलाह, बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मानसून की प्रगति पर मौसम विभाग की नजर बैठक में भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जानकारी दी कि अगले दो से तीन दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ने की संभावना है। पूरे मौसम के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान बरकरार है। जलाशयों में जलस्तर चिंता का विषय बैठक में बताया गया कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण पिछले वर्ष की तुलना में कम है। महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में हाल में बारिश हुई है, लेकिन जलाशयों का स्तर अभी भी संतोषजनक नहीं माना जा रहा है। सूखे की स्थिति पर लगातार नजर कृषि मंत्रालय ने बताया कि फसल मौसम निगरानी समूह की साप्ताहिक बैठकों के माध्यम से सूखे की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। अब तक 15 राज्यों ने इस संबंध में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) की तैयारियों की समीक्षा के साथ-साथ दलहन, तिलहन, कपास, बागवानी फसलों की बुवाई, मंडी कीमतों और खाद्यान्नों के बफर स्टॉक की स्थिति का भी आकलन किया गया।
पटना: बिहार में मॉनसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में मौसम और अधिक बिगड़ सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को राज्य के 18 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए तेज बारिश, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी है। वहीं नेपाल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण उत्तर बिहार की प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा भी गहराने लगा है। इन 18 जिलों में जारी हुआ येलो अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, कैमूर, रोहतास, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, खगड़िया, भागलपुर, मुंगेर, बांका और जमुई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर वज्रपात (बिजली गिरने) की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की है। अगले चार दिनों तक जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार राज्य में अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। 4 जुलाई को उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों के साथ दक्षिण बिहार के कई हिस्सों में भी बारिश होने की संभावना है। वहीं 5 और 6 जुलाई को लगभग पूरे बिहार के लिए आंधी, बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। लगातार सक्रिय मॉनसून के कारण कई इलाकों में भारी वर्षा हो सकती है। बारिश के बावजूद उमस से नहीं मिली राहत पिछले 24 घंटों के दौरान बक्सर, जमुई, पटना, किशनगंज, बेगूसराय और खगड़िया समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि बारिश के बावजूद लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत नहीं मिल सकी। पटना सहित अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश और उमस दोनों का असर एक साथ देखने को मिल सकता है। नेपाल में भारी बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब बिहार की नदियों पर भी दिखाई देने लगा है। कोसी, बागमती और उत्तर बिहार की कई अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यदि नेपाल में इसी तरह बारिश जारी रही तो कई नदियां जल्द ही खतरे के निशान के करीब या उससे ऊपर पहुंच सकती हैं। इससे उत्तर बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है। लोगों से सतर्क रहने की अपील मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली चमकने के समय खुले स्थानों पर न रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। किसानों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि अगले कुछ दिन मौसम की दृष्टि से संवेदनशील रह सकते हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है और इसका असर पूरे राज्य में देखने को मिल रहा है। मंगलवार रात से मौसम ने करवट ली है, जिसके बाद कई जिलों में बारिश शुरू हो गई। बुधवार सुबह बेगूसराय समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने 1 से 4 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश, तेज हवा और मेघ गर्जन की संभावना जताई है। 13 जिलों में ऑरेंज, 25 जिलों में येलो अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार के लिए पटना सहित 13 जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं 25 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। अगले पांच दिन ऐसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। बारिश के कारण अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और बिजली चमकने के समय खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। बारिश से मिली राहत, एक महिला की मौत बीते 24 घंटों के दौरान खगड़िया, समस्तीपुर, सासाराम और जमुई में अच्छी बारिश दर्ज की गई। हालांकि औरंगाबाद में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। राजधानी पटना में दिनभर बादल छाए रहे और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहावना बना दिया। अब भी सामान्य से 46% कम बारिश मौसम विभाग के अनुसार, 30 जून तक बिहार में 87.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य औसत 163.3 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब तक राज्य में सामान्य से 46 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि पिछले 24 घंटों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं, खासकर उत्तर और उत्तर-पूर्वी बिहार में। विभाग के अनुसार 2 जुलाई को पटना, नालंदा, गया, जहानाबाद, नवादा, भोजपुर, बक्सर, रोहतास, औरंगाबाद और कैमूर समेत कई जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। इससे किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रांची। झारखंड में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। झमाझम बारिश होते ही पुरे राज्य के लोगो को उमस और गर्मी से राहत मिली है। बता दे मौसम विभाग के अनुसार 1 जुलाई को रांची की अधिकतम और सबसे कम तापमान 28 डिग्री और 21 डिग्री सेल्सियस का अनुमान है। मानसून सक्रिय होते ही राज्य के कुछ हिस्से में अच्छी बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक बारिश 67.4 मिमी मेदिनीनगर में दर्ज हुई। रांची के अलावा इन राज्यों में होगी बारिश इसके अलावा रांची में 20 मिमी और चाईबासा में 14 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विज्ञानं केंद्र के अनुसार आज और 2 जुलाई को देवघर समेत दुमका , गोड्डा, जामतारा, पाकुड़, साहिबगंज, बोकारो ,धनबाद और अन्य जगहों में भारी बारिश होने की संभावना है। रांची का पारा 5.5 डिग्री गिरा बारिश होने से झारखंड के लगभग सभी जिलों में मंगलवार को अधिकतम तापमान में कमी आई है। झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार की तुलना में मंगलवार को 5.5 डिग्री सेल्सियस की कमी आ गई है। रांची का अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री हो गया है। वहीं मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री रहा। मौसम विभाग के अनुसार मौसम विभाग के अनुसार, तीन से पांच तक मेघ गर्जन और वज्रपात हो सकते हैं, जबकि बारिश की कमी रह सकती है। छह जुलाई से राज्य के कई इलाकों में फिर से भारी बारिश हो सकती है। 30 जून तक पूरे झारखंड में कितनी % बारिश हुई मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, एक जून से 30 जून तक पूरे झारखंड में 54% कम बारिश हुई है, जबकि रांची में 26% कम बारिश हुई है। रांची में इस दौरान सामान्य तौर पर 197.6 मिमी बारिश होती है, लेकिन अब तक यहां 146.9 मिमी बारिश ही हुई है। सबसे खराब स्थिति दुमका की है। यहां शून्य बारिश हुई है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में जुलाई की शुरुआत मानसून की जोरदार बारिश के साथ होने जा रही है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) ने 1 से 3 जुलाई तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश, तेज आंधी और वज्रपात की आशंका जताते हुए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। 1 जुलाई को उत्तर और पश्चिम बिहार में सबसे ज्यादा असर मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई को उत्तर और पश्चिम बिहार में मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहेगा। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं पटना समेत राज्य के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की संभावना है। 2 जुलाई को भी जारी रहेगा बारिश का दौर 2 जुलाई को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम बिहार के कई जिलों, जिनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद शामिल हैं, के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात की आशंका जताई गई है। अन्य जिलों में येलो अलर्ट के तहत हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। 3 जुलाई को दक्षिण और मध्य बिहार में बढ़ेगा असर 3 जुलाई को मानसून का प्रभाव दक्षिण और मध्य बिहार की ओर शिफ्ट होगा। इस दौरान पटना, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, नालंदा, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय और बेगूसराय में भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, कोशी और सीमांचल क्षेत्र के कई जिलों, जैसे पूर्णिया, अररिया, कटिहार, किशनगंज, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में मौसम अपेक्षाकृत सामान्य रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और आकाशीय बिजली के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।