Western Railway ने मुंबई के Bandra East स्थित गरीब नगर इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई तेज कर दी है। रेलवे के अनुसार, अभियान का करीब 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पर पथराव और बुलडोजर रोकने की कोशिश के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बुलडोजर रोकने की कोशिश, पुलिस पर पथराव मंगलवार को करीब 150 लोगों की भीड़ ने डिमोलिशन टीम और पुलिस पर हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और सीमेंट ब्लॉक फेंककर बुलडोजर रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि हिंसा अचानक भड़का विरोध नहीं था, बल्कि एक “पूर्व-नियोजित साजिश” का हिस्सा प्रतीत होती है। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर गंभीर धाराएं लगाने की बात कही है, जिनमें हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा भी शामिल है। रेलवे की कार्रवाई क्यों जरूरी? पश्चिम रेलवे के अनुसार, बांद्रा स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित करीब 500 अवैध संरचनाओं को हटाया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि अब तक लगभग 5,000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। इस भूमि का उपयोग 5वीं और 6वीं रेल लाइन के विस्तार और Bandra Terminus के विकास के लिए किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना मुंबई की रेल कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मस्जिद गिराने को लेकर विवाद कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय मस्जिद को गिराए जाने का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया है। प्रतिवादियों के वकीलों ने दावा किया कि धार्मिक स्थल को बिना उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के हटाया गया। उनका कहना है कि Bombay High Court के मूल आदेश में धार्मिक स्थलों को हटाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। वहीं, प्रभावित परिवारों ने ईद से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार से पहले बड़ी संख्या में परिवारों को बेघर कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही कार्रवाई रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पात्र परिवारों को पहले ही पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई 23 मई तक जारी रह सकती है। इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
Blinkit एजेंट के साथ विवाद पर 10 दिन बाद सामने आईं एक्ट्रेस फिल्म Uri: The Surgical Strike में नजर आ चुकीं Riva Arora ने एक डिलीवरी एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्ट्रेस ने दावा किया कि Blinkit के एक डिलीवरी एजेंट ने उनके और उनके परिवार के साथ बदसलूकी की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। यह घटना 26 अप्रैल की बताई जा रही है, लेकिन अब जाकर उन्होंने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। घर के बाहर शुरू हुआ विवाद रीवा अरोड़ा के मुताबिक, घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की है, जब Blinkit का डिलीवरी एजेंट उनके घर ऑर्डर लेकर पहुंचा। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही एजेंट का व्यवहार रूखा और अनुचित था। एक्ट्रेस ने कहा कि जब उन्होंने एजेंट के रवैये पर प्रतिक्रिया दी तो मामला शांत होने के बजाय और बिगड़ गया। उनकी मां निशा अरोड़ा ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि एजेंट लगातार बदतमीजी करता रहा। लिफ्ट में भी जारी रही अभद्रता रीवा ने बताया कि जब उनकी बहन की मुलाकात एजेंट से लिफ्ट में हुई, तब भी वह आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता रहा। परिवार ने कई बार उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं। एक्ट्रेस के अनुसार, “यह सिर्फ एक बार की टिप्पणी नहीं थी। वह लगातार हमारे लिए अपमानजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था।” मामला बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया रीवा अरोड़ा ने कहा कि बहस पहले घर के दरवाजे पर शुरू हुई और बाद में नीचे तक पहुंच गई। जब एजेंट वहां से जाने की कोशिश करने लगा, तब परिवार ने उसे रोक लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि Mumbai Police मौके पर जल्दी पहुंची और तुरंत कार्रवाई की। फिलहाल मामला संबंधित अधिकारियों के जरिए देखा जा रहा है। Blinkit से भी की गई शिकायत एक्ट्रेस ने यह भी पुष्टि की कि इस मामले में Blinkit के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्तर पर जवाबदेही तय होना भी जरूरी है और वे अब कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही हैं। कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं रीवा अरोड़ा Riva Arora ने कम उम्र में ही कई बड़ी फिल्मों में काम किया है। वह Bharat और Gunjan Saxena: The Kargil Girl जैसी फिल्मों में भी दिखाई दे चुकी हैं।
तुर्की से भारत पहुंचा कुख्यात ड्रग माफिया अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर सलीम डोला को तुर्की से भारत लाया गया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन में यह बड़ी सफलता मिली है। मंगलवार सुबह विशेष विमान से उसे दिल्ली लाया गया। फिलहाल दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियां उससे गहन पूछताछ कर रही हैं। शुरुआती जांच के बाद उसे मुंबई पुलिस के हवाले किया जाएगा। इस्तांबुल में हुई थी गिरफ्तारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय एजेंसियों द्वारा साझा की गई खुफिया जानकारी के आधार पर तुर्की की सुरक्षा एजेंसियों ने हाल ही में इस्तांबुल में सलीम डोला को गिरफ्तार किया था। लंबे समय से वह भारतीय एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। सुरक्षा कारणों से उसके प्रत्यर्पण की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा गया। डोंगरी से दुबई तक बनाया साम्राज्य सलीम डोला का अपराध जगत में सफर मुंबई के डोंगरी इलाके से शुरू हुआ था। बाद में वह दुबई चला गया, जहां से उसने अपने ड्रग्स कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया। उसका नेटवर्क भारत, दुबई, तुर्की और कई अन्य देशों तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह सिंथेटिक ड्रग्स के बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। डी-कंपनी से जुड़े तार जांच में सामने आया है कि सलीम डोला के तार दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से जुड़े हुए हैं। एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में ड्रग तस्करी और अंडरवर्ल्ड के गठजोड़ से जुड़े कई अहम राज खुल सकते हैं। उसके पास कथित तौर पर सऊदी अरब का पासपोर्ट भी था, जिससे वह विभिन्न देशों में आसानी से आवाजाही करता था। परिवार और सहयोगियों पर पहले ही कसा जा चुका है शिकंजा भारतीय एजेंसियां पिछले कई महीनों से सलीम डोला के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही थीं। अक्टूबर 2025 में उसके करीबी सहयोगी मोहम्मद सलीम सोहेल शेख को दुबई से भारत लाया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में उसके बेटे ताहिर डोला समेत परिवार के चार सदस्यों को भी गिरफ्तार किया गया था। एक लाख रुपये का था इनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने सलीम डोला पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी था। मुंबई पुलिस और इंटरपोल लगातार उसकी तलाश में जुटे थे। कई बड़े खुलासों की उम्मीद सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि सलीम डोला से पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी, डी-कंपनी के नेटवर्क और विदेशों में फैले आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। यह गिरफ्तारी भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
19 वर्षीय युवती ने लगाए गंभीर आरोप, आरोपी निजी कंपनी में करता था काम मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उस पर अपनी पूर्व महिला सहकर्मी को लगातार परेशान करने, उसका पीछा करने और अश्लील तस्वीरें व वीडियो भेजने के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। ऑफिस WhatsApp ग्रुप से मिला नंबर पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसने जिस टेली-कॉलिंग कंपनी में काम किया था, वहां आरोपी से कभी सीधे बातचीत नहीं हुई थी। लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद आरोपी ने उसका मोबाइल नंबर कथित तौर पर ऑफिस के WhatsApp ग्रुप से हासिल किया और उसे मैसेज व कॉल करना शुरू कर दिया। लगातार अश्लील मैसेज और मानसिक प्रताड़ना युवती के अनुसार, आरोपी लगातार आपत्तिजनक संदेश और अश्लील सामग्री भेजता रहा। उसने कई बार चेतावनी दी, लेकिन आरोपी ने हरकतें बंद नहीं कीं। इसके बाद मामला और गंभीर होता चला गया। इंटरफेथ रिलेशन का दबाव डालने का आरोप पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी उस पर एक अंतरधार्मिक संबंध बनाने का दबाव डालता था। उसके मुताबिक आरोपी ने कई बार आपत्तिजनक बातें कही और उसे रिश्ते के लिए मनाने की कोशिश की। गिरफ्तारी और पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने आरोपी के खिलाफ महिला की गरिमा भंग करने, पीछा करने और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) से जुड़े कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 77 (गोपनीयता का उल्लंघन), 78 (पीछा करना), 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले शब्द या व्यवहार) समेत IT एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं मामले की जांच जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपी ने अन्य महिलाओं को भी इसी तरह परेशान किया था। यह घटना महाराष्ट्र में चल रहे एक अन्य संवेदनशील मामले के बीच सामने आई है, जिसमें IT सेक्टर की कुछ कंपनियों में महिला कर्मचारियों से जुड़े उत्पीड़न के आरोप भी चर्चा में हैं।
एक्स्टेसी पिल्स सप्लाई का खुलासा मुंबई में हुए दर्दनाक ड्रग ओवरडोज मामले में पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। Mumbai के गोरेगांव में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान दो MBA छात्रों की संदिग्ध मौत के मामले में अब जांच तेज हो गई है। कौन है गिरफ्तार आरोपी? पुलिस के मुताबिक, 21 वर्षीय शुभ अग्रवाल को ठाणे जिले के कल्याण इलाके से गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह कॉन्सर्ट में ड्रग्स सप्लाई करने वाले नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और मौके पर एक्स्टेसी पिल्स उपलब्ध करवा रहा था। बताया गया कि उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन अब उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अब तक 8 आरोपी गिरफ्तार इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें 5 कथित ड्रग सप्लायर और 3 कॉन्सर्ट आयोजकों से जुड़े लोग शामिल हैं। पुलिस ने 12 लोगों के बयान भी दर्ज किए हैं और ड्रग्स के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। कैसे हुई थी घटना? यह घटना 11 अप्रैल को गोरेगांव में आयोजित एक म्यूजिक कॉन्सर्ट के दौरान हुई थी। जानकारी के अनुसार, करीब 20-22 छात्रों का एक समूह इस कार्यक्रम में शामिल हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कुछ छात्रों ने कॉन्सर्ट में जाने से पहले ही एक्स्टेसी ड्रग्स का सेवन किया था, जबकि कार्यक्रम के दौरान शराब भी पी गई। दो छात्रों की मौत, एक का इलाज जारी ड्रग्स और शराब के सेवन के बाद दो MBA छात्रों (एक युवक और एक युवती) की 12 अप्रैल को मौत हो गई। वहीं एक अन्य छात्र का इलाज मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गैर इरादतन हत्या समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया है। अब जांच का फोकस ड्रग्स की सप्लाई चेन का पता लगाने और सभी आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने पर है। बढ़ती चिंता: पार्टियों में ड्रग्स का खतरा मुंबई में हाल के वर्षों में पार्टियों और कॉन्सर्ट्स में ड्रग्स के इस्तेमाल के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह घटना एक बार फिर युवाओं में बढ़ते नशे के खतरे को उजागर करती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।