NEET Exam

Dharmendra Pradhan Nishikant Dubey
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर निशिकांत दुबे का बयान, बोले- बच्चों को आंदोलन नहीं, पढ़ाई पर देना चाहिए ध्यान

देवघर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को आंदोलनों में शामिल करने के बजाय उनकी पढ़ाई पर ध्यान दें, ताकि वे भविष्य में आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकें।   'शिक्षा से ही मिली पहचान'   निशिकांत दुबे ने कहा कि वह स्वयं गांव के एक स्कूल से पढ़कर देश के सांसद बने हैं और आज भी नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाती है और युवाओं को अपना भविष्य बनाने पर ध्यान देना चाहिए।   धर्मेंद्र प्रधान के काम की सराहना   सांसद ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उनके अनुसार, उन्होंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि छात्रों के बीच बने भ्रम को दूर करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला लिया।   उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में नीट परीक्षा को पहले से अधिक पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित कराया गया। कभी-कभी अभिभावकों को भी बच्चों की भावनाओं के आगे झुकना पड़ता है और इसी भावना के तहत यह निर्णय लिया गया।   JPSC मामले में झारखंड सरकार पर हमला   निशिकांत दुबे ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े मामले में राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि धांधली के कारण आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को हटाया गया, लेकिन अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।   दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग   पोड़ैयाहाट में डीएसओ की गिरफ्तारी और मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

abhishek singh जुलाई 25, 2026 0
Mallikarjun Kharge on Narendra Modi
खरगे का प्रधानमंत्री मोदी पर हमला, बोले- प्रदर्शन में घायल युवाओं की आंखों में देखकर उनकी पीड़ा समझें

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि सरकार को प्रदर्शन कर रहे युवाओं की परेशानियों को समझना चाहिए और उन छात्रों की स्थिति देखनी चाहिए जो आंदोलन के दौरान घायल हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे "सड़कों पर लहूलुहान हुए युवाओं की आंखों में देखें और उनकी पीड़ा महसूस करें।"   छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना   खरगे ने कहा कि युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी मांग रखने का अधिकार है और सरकार को उनके साथ संवाद करना चाहिए।   प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल   खरगे ने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए।   सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी तकरार   NEET परीक्षा, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार जैसे मुद्दों को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह छात्रों की मांगों पर स्पष्ट जवाब दे। वहीं, सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी तरह की अनियमितता पर कार्रवाई की जाएगी।   संसद में भी उठ सकता है मुद्दा   छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का मामला संसद के मानसून सत्र में भी उठने की संभावना है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि सभी विषयों पर नियमों के अनुसार चर्चा की जा सकती है। फिलहाल NEET और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और सरकार-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
NEET परीक्षा रद्द करने की मांग करते तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय
'पूरी तरह खत्म हो NEET परीक्षा सिस्टम', दिल्ली प्रदर्शन के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय का बड़ा बयान

चेन्नई/नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद और दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। विजय ने कहा कि NEET परीक्षा प्रणाली छात्रों और उनके परिवारों पर दबाव बढ़ा रही है और इसे समाप्त करना ही समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।   विजय ने छात्रों के प्रदर्शन का किया समर्थन   तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने दिल्ली में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ संवाद की अपील की।   NEET को बताया छात्रों के लिए परेशानी का कारण   विजय ने कहा कि केंद्रीकृत प्रवेश परीक्षा व्यवस्था खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए चुनौती बन रही है। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में राज्यों की भूमिका मजबूत होनी चाहिए और मेडिकल शिक्षा में प्रवेश के लिए ऐसी प्रणाली होनी चाहिए जिससे सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर मिल सके।   तमिलनाडु में पहले से जारी है NEET विरोध   तमिलनाडु में NEET को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विरोध रहा है। राज्य के कई राजनीतिक दलों का तर्क है कि यह परीक्षा ग्रामीण क्षेत्रों और सरकारी स्कूलों से आने वाले छात्रों के लिए कठिनाई पैदा करती है। विजय की ताजा टिप्पणी ने इस मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में ला दिया है।   राहुल गांधी के समर्थन में भी बोले विजय   विजय ने दिल्ली में NEET मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों और विपक्ष की आवाज को सुना जाना चाहिए।   केंद्र सरकार से टकराव बढ़ने के संकेत   विजय के बयान के बाद NEET को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। केंद्र सरकार जहां राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मेडिकल प्रवेश व्यवस्था को जरूरी बताती रही है, वहीं तमिलनाडु सहित कुछ राज्य इसे लेकर लगातार आपत्ति जताते रहे हैं।   NEET सुधार को लेकर देशभर में चर्चा तेज   छात्रों के प्रदर्शन, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दों के बीच NEET व्यवस्था में सुधार की मांग लगातार उठ रही है। अब नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और छात्रों की मांगों पर होने वाली चर्चा पर है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
Parliament Session
संसद का मानसून सत्र जारी, विपक्ष ने NEET, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का आज का दिन भी हंगामेदार रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे, महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और विभिन्न राज्यों की हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के कदमों का बचाव किया।   NEET और परीक्षा प्रणाली पर विपक्ष के सवाल   विपक्षी सांसदों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की मांग की। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी कई सुझाव दिए गए।   महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से जवाब की मांग   सदन में विपक्ष ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, ईंधन की लागत और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आम जनता महंगाई के दबाव का सामना कर रही है और इस पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जवाब में सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और रोजगार सृजन के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।   कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी तीखी बहस   विपक्ष ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। कई सांसदों ने सुरक्षा व्यवस्था और राज्यों में बढ़ते अपराध के मुद्दे उठाए। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।   हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुई कार्यवाही   विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सूचीबद्ध कार्यों पर चर्चा की गई।   सरकार ने विकास कार्यों का दिया ब्यौरा   सत्र के दौरान सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी कार्यों और विकास योजनाओं की प्रगति पर भी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर संसद में चर्चा जारी रहेगी। वहीं विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी बैठकों में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाता रहेगा।

abhishek singh जुलाई 23, 2026 0
Dharmendra Pradhan Statement
NEET विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही बढ़ाने का दिया भरोसा

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है। उन्होंने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि छात्रों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।   परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की तैयारी   धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधार शुरू कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना को कम किया जा सके।   संसद में चर्चा के लिए सरकार तैयार   शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार संसद में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने दे, ताकि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो सके और आवश्यक निर्णय लिए जा सकें।   छात्रों को दिया भरोसा   धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें मेहनत करने वाले छात्रों के साथ पूरा न्याय हो सके।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Rahul Gandhi Protest
NEET विवाद को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद रिहा किया

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया, हालांकि कुछ समय बाद सभी को रिहा कर दिया गया।   NEET मुद्दे पर सरकार को घेरा   प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है और छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। पार्टी ने सरकार से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और जवाबदेह बनाने की मांग की।   पुलिस ने एहतियातन लिया हिरासत में   दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।   राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज   इस घटनाक्रम के बाद NEET विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। कांग्रेस ने छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

abhishek singh जुलाई 22, 2026 0
Candidate checking NEET UG 2026 OMR answer sheet and recorded responses online before filing an objection on the NTA portal.
NEET UG 2026: NTA ने जारी की OMR शीट की स्कैन कॉपी, 15 जुलाई तक दर्ज करा सकते हैं आपत्ति

NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका (OMR Answer Sheet) और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थी अब अपनी OMR शीट का मिलान कर सकते हैं और किसी भी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हुई OMR शीट NTA ने NEET UG 2026 की स्कैन की गई OMR उत्तर पुस्तिका और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स को आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर अपलोड कर दिया है। इसके अलावा, OMR शीट की स्कैन कॉपी उम्मीदवारों के पंजीकृत ईमेल आईडी पर भी भेजी गई है। उम्मीदवारों को आवेदन संख्या और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करना होगा। सुरक्षा के लिए OTP आधारित टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन भी लागू किया गया है। कब तक कर सकते हैं आपत्ति दर्ज? रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया 13 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि: 15 जुलाई 2026 प्रति प्रश्न शुल्क: ₹200 भुगतान का माध्यम: डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग निर्धारित समय सीमा के बाद या शुल्क जमा किए बिना भेजी गई किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। किन मामलों में दर्ज कर सकते हैं चुनौती? NTA ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह सुविधा केवल रिकॉर्डेड OMR रिस्पॉन्स में किसी त्रुटि को चुनौती देने के लिए उपलब्ध है। उत्तर कुंजी (Answer Key) पर आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अब उत्तर कुंजी से संबंधित कोई नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे करें OMR रिस्पॉन्स चैलेंज उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन कर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकते हैं- NTA की आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं। आवेदन संख्या और पासवर्ड से लॉगिन करें। मोबाइल नंबर या ईमेल पर प्राप्त OTP से सत्यापन पूरा करें। "View/Challenge OMR Sheet & Recorded Responses" विकल्प पर क्लिक करें। स्कैन की गई OMR शीट और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स का मिलान करें। यदि कोई त्रुटि मिले तो संबंधित प्रश्न चुनकर आपत्ति दर्ज करें। प्रत्येक चुनौती के लिए ₹200 का ऑनलाइन शुल्क जमा करें। भुगतान के बाद Submit Challenge पर क्लिक करें। भविष्य के लिए आवेदन की रसीद डाउनलोड कर सुरक्षित रखें। सही आपत्ति होने पर क्या मिलेगा रिफंड? यदि उम्मीदवार द्वारा दर्ज की गई आपत्ति जांच के दौरान सही पाई जाती है, तो संबंधित ₹200 प्रोसेसिंग शुल्क वापस (Refund) कर दिया जाएगा। कब हुई थी NEET UG 2026 की पुनर्परीक्षा? NTA ने NEET UG 2026 Re-Exam का आयोजन 21 जून 2026 को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक कराया था। इससे पहले 3 मई 2026 को आयोजित मूल परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। पुनर्परीक्षा में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
CJP Delhi High Court
दिल्ली हाई कोर्ट से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को राहत, X अकाउंट बहाल करने का आदेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को बड़ी राहत देते हुए उसके X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट को बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत अकाउंट को ब्लॉक किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध कानून द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ही लगाया जा सकता है और उसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।   NEET परीक्षा के संदर्भ में ब्लॉक किया गया था अकाउंट सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि NEET परीक्षा के दौरान किसी भी तरह की अफवाह, भ्रम या अशांति फैलने से रोकने के उद्देश्य से अकाउंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया गया था। सरकार का तर्क था कि दोबारा परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं को नियंत्रित करना जरूरी था।   हालांकि अदालत ने माना कि NEET परीक्षा से जुड़ी परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और जिस आधार पर अकाउंट ब्लॉक किया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रहा। इसी आधार पर कोर्ट ने ब्लॉक आदेश निरस्त कर अकाउंट बहाल करने का निर्देश दिया।   जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 18 दिनों से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। संगठन की मांग है कि NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय की जाए तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी की जाए। इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।   राजनीतिक दल बनने की अटकलें तेज सोशल मीडिया पर चर्चा के बीच संगठन के भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि CJP के संस्थापक ने फिलहाल इसे युवाओं का एक दबाव समूह बताया है और कहा है कि अभी राजनीतिक दल बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, यदि भविष्य में संगठन चुनाव आयोग में पंजीकरण कराता है, तो चुनाव चिह्न का फैसला आयोग के नियमों और उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले के बाद संगठन का X अकाउंट फिर से सक्रिय होगा, जबकि उसका आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
NEET-UG 2026
NEET-UG 2026: जमशेदपुर में कड़ी निगरानी के साथ होगी नीट परीक्षा

जमशेदपुर। जमशेदपुर में 21 जून को आयोजित होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में परीक्षा संचालन से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर केवल सरकारी कर्मियों को ही इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में नियुक्त किया जाएगा।   पूरी परीक्षा प्रक्रिया की होगी वीडियोग्राफी परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रवेश से पहले सघन फ्रिस्किंग की जाएगी और पूरी परीक्षा प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके अलावा परीक्षा से एक दिन पहले सभी परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज कर सील कर दिया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।   भीड़ नियंत्रण और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परीक्षा के दिन शहर में सुचारु यातायात और भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। प्रमुख चौक-चौराहों तथा परीक्षा केंद्रों के बाहर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी।   8 केंद्रों पर होगी परीक्षा, 4 हजार से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल जिले के छह शिक्षण संस्थानों में कुल आठ परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 4,000 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक ही प्रवेश मिलेगा। इसके बाद किसी भी परिस्थिति में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।   इन केंद्रों पर आयोजित होगी परीक्षा परीक्षा एलबीएसएम कॉलेज करनडीह, जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेंस, राजकीय आदिवासी हाई स्कूल सीतारामडेरा और एलबीएसएम कॉलेज गोलमुरी सहित कुल आठ केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।   अधिकारियों ने की तैयारियों की समीक्षा बैठक में सिटी एसपी ललित मीणा, एसडीएम धालभूम अर्णव मिश्रा, एएसपी ऋषभ त्रिवेदी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर राहुलजी आनंदजी समेत विभिन्न कॉलेजों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को सुरक्षित, पारदर्शी और कदाचारमुक्त तरीके से संपन्न कराना है।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Students and youth protest against alleged exam irregularities, demanding accountability from the Education Ministry.
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, CJP ने 13 जून तक दिया अल्टीमेटम; देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

  नई दिल्ली: परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध और तेज कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 13 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो देशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। परीक्षाओं में गड़बड़ी का लगाया आरोप बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि नीट (NEET), सीबीएसई (CBSE) और सीयूईटी (CUET) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है और सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। दीपके ने कहा कि युवा वर्ग अब अपनी समस्याओं को लेकर मुखर हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग कर रहा है। 13 जून तक का समय, फिर शुरू होगा आंदोलन सीजेपी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री को 13 जून तक इस्तीफा देने का समय दिया गया है। मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में संगठन देशभर में विरोध-प्रदर्शन शुरू करेगा। दीपके ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत पुणे से की जाएगी, जहां 11 जून को शाम चार बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसके बाद लखनऊ, अमृतसर, जयपुर, बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। 20 जून को दिल्ली कूच की तैयारी संगठन ने 20 जून को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की है। अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो देशभर से छात्र और युवा दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं इस अभियान का नेतृत्व करेंगे और छात्रों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील करेंगे। "एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित" अभिजीत दीपके ने दावा किया कि विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं में सामने आई समस्याओं के कारण एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उनके मुताबिक, छात्रों के हितों की रक्षा के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है और संबंधित अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जंतर-मंतर प्रदर्शन का भी किया जिक्र सीजेपी संस्थापक ने बताया कि 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था, जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा और प्रभावी समाधान की आवश्यकता है। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस अल्टीमेटम और आंदोलन की घोषणा पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, संगठन ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Rahul Gandhi and Dharmendra Pradhan clash over CBSE and NEET exam controversy during political debate
CBSE और NEET विवाद पर आमने-सामने आए राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान

सीबीएसई और नीट परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाये हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार करते हुए राहुल गांधी को चुनावी हार से हताश बताया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा- राहुल गांधी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं लगती केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि CBSE ने पहले ही इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और सभी प्रक्रियाएं भारत सरकार की खरीद नीति के अनुसार पूरी की गई हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राहुल गांधी पर हमला करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “लगातार चुनावी हार के कारण राहुल गांधी हताश नजर आते हैं। उन्होंने SIR का विरोध किया, EVM का विरोध किया और डिजिटल इंडिया का भी विरोध किया। ऐसा लगता है कि वे भारत की वैज्ञानिक प्रगति के साथ खड़े नहीं हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी की बयानबाजी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित लगती है। ‘यह राजनीति करने का समय नहीं’, शिक्षा मंत्री की अपील धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परीक्षा से जुड़े विवाद के कारण छात्रों और अभिभावकों में पहले से ही तनाव है और इस समय राजनीति करने से स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से यदि किसी प्रकार की असुविधा हुई है, तो मैं स्वयं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। लेकिन अभी सबसे जरूरी बात यह है कि छात्रों का मानसिक तनाव और न बढ़े।” केंद्रीय मंत्री ने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से अपील की कि वे ऐसे बयान देने से बचें, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़े। राहुल गांधी ने उठाये CBSE कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी चयन पर सवाल राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शिक्षा मंत्री पर पलटवार करते हुए कहा कि व्यक्तिगत हमला करने से सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। उन्होंने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान जी, आप मुझ पर जितना चाहें हमला कर सकते हैं, लेकिन इससे आप अपने अपराधों से बरी नहीं होंगे और न ही यह मुझे 18.5 लाख बच्चों के लिए जवाब मांगने से रोक पाएगा।” राहुल गांधी ने CBSE के OSM कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भी सवाल उठाये। उन्होंने पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट COEMPT नाम की कंपनी को क्यों दिया गया, जबकि उसी कंपनी का पुराना नाम Globarena पहले से विवादों में रहा है। उन्होंने सवाल किया कि इस कंपनी का चयन किसके आदेश पर किया गया, बैकग्राउंड जांच क्यों नहीं हुई और कंपनी के प्रबंधन तथा केंद्र सरकार के बीच क्या संबंध हैं। राहुल गांधी बोले- दोनों ही स्थिति में सरकार जिम्मेदार राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार ने बैकग्राउंड जांच की थी और फिर भी कंपनी को काम दिया गया, तो यह गंभीर लापरवाही है। वहीं अगर जांच नहीं की गई, तो यह और भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही परिस्थितियों में सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार को वास्तव में छात्रों की चिंता होती, तो इतने बड़े विवाद के बाद शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही पद से हटा दिया गया होता। परीक्षा विवाद पर बढ़ी राजनीतिक गर्मी CBSE और NEET से जुड़े विवाद पहले ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी और धर्मेंद्र प्रधान के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को और राजनीतिक बना दिया है। एक तरफ विपक्ष परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि वह किसी भी अनियमितता को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi मई 29, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0