New Delhi

Poets and Urdu shayars reciting poetry during a Hindi-Urdu literary event at Jawaharlal Nehru University in New Delhi.
JNU में सजा हिन्दी-उर्दू का साहित्यिक मंच, कवि सम्मेलन और मुशायरे में गूंजे कविता-शायरी के रंग

नई दिल्ली स्थित Jawaharlal Nehru University के सभागार में आयोजित मुशायरा और कवि सम्मेलन में हिन्दी और उर्दू साहित्य का खूबसूरत संगम देखने को मिला। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था रौशनाई द्वारा आयोजित महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह में देशभर के साहित्यकारों, शायरों, कवियों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ समारोह की शुरुआत गायिका एवं साहित्यकार डॉ. किरण तिवारी ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ की। इसके बाद संस्था के संरक्षक एवं पीएफ कमिश्नर आलोक यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। रौशनाई की संस्थापक एवं शायरा सिया सचदेव ने संस्था की स्थापना के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए कहा कि यह मंच प्रेम, विश्वास, संघर्ष और उम्मीद के मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास है। नुसरत मेहदी को मिला महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान समारोह के दौरान Nusrat Mehdi को उर्दू भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके योगदान के लिए महेंद्र सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेश शर्मा ने सम्मान की परंपरा, उसके उद्देश्य तथा स्वर्गीय महेंद्र सिंह के व्यक्तित्व और समाजसेवा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अल्पना सुहासिनी ने किया। कवियों और शायरों ने बांधा समां मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपनी कविताओं और शायरी का पाठ किया। इनमें प्रमुख रूप से: डॉ. अखलाक आहन सुधाकर पाठक डॉ. किरण तिवारी अमित शुक्ला ज्योति जुल्का पुष्प राज अभिषेक शर्मा आरिश रईस शामिल रहे। उनकी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को साहित्य और भाषा की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का संदेश दिया। भारतीय भाषाओं के संरक्षण का लिया संकल्प कार्यक्रम के समापन पर सिया सचदेव ने कहा कि रौशनाई भविष्य में भी हिन्दी, उर्दू सहित भारतीय भाषाओं के साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ऐसे आयोजनों का सिलसिला जारी रखेगी।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Prescription medicines displayed at a pharmacy counter, highlighting new government restrictions on the sale of medicines containing more than 12% ethyl alcohol.
AI से बन रहीं फर्जी डॉक्टर की पर्चियां! क्या सरकार के नए दवा नियमों के सामने बनेगी नई चुनौती?

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाओं की बिना डॉक्टर की पर्ची बिक्री पर रोक लगा दी है। इस फैसले का चिकित्सा विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार किए जाने की संभावना नए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चुनौती बन सकती है। डॉक्टर ने बताया AI से बढ़ी नई चुनौती दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरन गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी के बढ़ते चलन के बीच AI का दुरुपयोग भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार, अब AI की मदद से नकली डॉक्टर की पर्चियां तैयार करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। ऐसे में केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऑनलाइन दवा बिक्री की प्रभावी निगरानी और सत्यापन व्यवस्था भी जरूरी होगी। बच्चों पर पड़ सकता है गंभीर असर डॉ. गुप्ता ने कहा कि अल्कोहल युक्त दवाओं का असर हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन बच्चों में इसका प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता अनजाने में ऐसी दवाएं बच्चों को दे देते हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने बच्चों के लिए शुगर-फ्री और कम जोखिम वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। नए नियमों का स्वागत, लेकिन लागू करना चुनौती डॉ. गुप्ता का कहना है कि सरकार का फैसला सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार, दवा विक्रेताओं, ऑनलाइन फार्मेसी प्लेटफॉर्म और अभिभावकों सभी को जिम्मेदारी के साथ नियमों का पालन करना होगा। क्या है सरकार का नया नियम? स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 12 प्रतिशत से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाओं की बिक्री पर नए प्रतिबंध लागू किए हैं। नए नियमों के तहत: 12% से अधिक इथाइल अल्कोहल वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर की पर्ची नहीं बेची जा सकेंगी। ऐसी दवाओं की बिक्री केवल वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर होगी। बिना लाइसेंस या निर्धारित प्रक्रिया के इन दवाओं की बिक्री पर रोक रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार का कहना है कि कुछ अल्कोहल युक्त दवाओं का दुरुपयोग नशे के उद्देश्य से किए जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी वजह से इन दवाओं की बिक्री को अधिक नियंत्रित करने का निर्णय लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन की डिजिटल जांच और सत्यापन प्रणाली मजबूत नहीं की गई, तो AI से तैयार फर्जी पर्चियां इस व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन सकती हैं।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Supreme Court of India building in New Delhi, where a petitioner was escorted out after allegedly creating a disturbance during a court hearing.
Supreme Court में सुनवाई के दौरान हंगामा, याचिकाकर्ता ने फेंके दस्तावेज; सुरक्षाकर्मियों ने कोर्ट से बाहर निकाला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति पैदा हो गई, जब एक याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर अदालत में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और अपने दस्तावेज हवा में उछाल दिए। स्थिति बिगड़ने पर कोर्ट के निर्देश पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया। सुनवाई के दौरान बढ़ा विवाद यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था। सुनवाई न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, याचिकाकर्ता काला कोट पहनकर अदालत पहुंचा था, हालांकि उसने अधिवक्ताओं वाला बैंड नहीं पहना था। सुनवाई के दौरान उसने अदालत के प्रति आक्रामक रुख अपनाया। जज से कहा- "मैं आपको आदेश देता हूं" सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर कहा, "न्यायिक सेवक महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें।" इस पर न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा, "क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?" अभद्र भाषा और दस्तावेज फेंकने का आरोप बताया गया कि इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी ओर से सब कुछ रिकॉर्ड पर है। आरोप है कि उसने इसके बाद अभद्र भाषा का प्रयोग किया और अपने मामले से जुड़े दस्तावेज अदालत कक्ष में हवा में उछाल दिए। स्थिति बिगड़ते देख कोर्ट की सुरक्षा में तैनात कर्मी तुरंत आगे आए और अदालत के निर्देश पर याचिकाकर्ता को कोर्टरूम से बाहर ले गए। सुनवाई सामान्य रूप से जारी रही याचिकाकर्ता को बाहर ले जाने के बाद अदालत की कार्यवाही सामान्य रूप से जारी रही। फिलहाल इस घटना को लेकर पीठ की ओर से खुली अदालत में कोई अलग आदेश पारित नहीं किया गया है। हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने पहुंचा था याचिकाकर्ता इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने आया था। हालांकि सुनवाई के दौरान उसके व्यवहार के कारण कुछ समय के लिए अदालत का माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना के बाद कोर्ट की कार्यवाही बिना किसी अन्य व्यवधान के आगे बढ़ाई गई।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Lord Krishna with Radha, Sudama, Arjuna, and Govardhan, symbolizing love, friendship, duty, and righteousness.
भगवान श्रीकृष्ण: हर रिश्ते को प्रेम, कर्तव्य और सम्मान से निभाने वाले आदर्श पुरुष

भगवान श्रीकृष्ण को सनातन धर्म में केवल विष्णु के अवतार के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे आदर्श व्यक्तित्व के रूप में भी देखा जाता है जिन्होंने जीवन के हर रिश्ते को प्रेम, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाया। मित्रता, परिवार, प्रेम, गुरु-भक्ति और धर्म पालन—हर क्षेत्र में उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण उनके बाल सखा सुदामा हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद श्रीकृष्ण ने सुदामा का हमेशा सम्मान किया और बिना किसी अपेक्षा के उनकी सहायता की। वहीं अर्जुन के साथ उनका रिश्ता केवल मित्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने जीवन के कठिन समय में उनके मार्गदर्शक और सारथी बनकर धर्म का मार्ग दिखाया। श्रीदामा और बड़े भाई बलराम के साथ भी श्रीकृष्ण का संबंध प्रेम, विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम भक्ति का प्रतीक श्रीकृष्ण और राधा का संबंध भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह प्रेम सांसारिक इच्छाओं से ऊपर उठकर आत्मा और परमात्मा के मिलन का संदेश देता है। वृंदावन की गोपियों के साथ उनकी रासलीला भी ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण की भावना को दर्शाती है। परिवार के प्रति निभाई हर जिम्मेदारी धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख रानियां थीं—रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति, भद्रा और लक्ष्मणा। उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सदैव संतुलित ढंग से निर्वहन किया और सभी के प्रति समान सम्मान का भाव रखा। माता-पिता और भाई के प्रति अटूट सम्मान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के घर हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। उन्होंने दोनों परिवारों के प्रति समान प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता दिखाई। बड़े भाई बलराम के साथ उनका रिश्ता भी आदर्श भाईचारे का उदाहरण माना जाता है, जिसमें सहयोग, विश्वास और सम्मान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। हर रिश्ते में निभाया कर्तव्य श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में बुआ कुंती, बहन सुभद्रा, भांजे अभिमन्यु और पांडवों के साथ हर संबंध को पूरी जिम्मेदारी से निभाया। महाभारत के कठिन समय में उन्होंने अपने प्रियजनों को सही मार्ग दिखाया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का किया अंत जहां श्रीकृष्ण ने प्रेम और करुणा का संदेश दिया, वहीं अधर्म और अन्याय के विरुद्ध कठोर रुख भी अपनाया। उन्होंने कंस, शिशुपाल, नरकासुर और कालिय नाग जैसे अत्याचारियों का अंत कर समाज में धर्म और न्याय की स्थापना की। आदर्श शिष्य और जनरक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण कर आदर्श शिष्य होने का उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरु-दक्षिणा के रूप में उन्होंने उनके पुत्र को वापस लाकर अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया। वहीं, गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्होंने वृंदावनवासियों की रक्षा की और यह संदेश दिया कि सच्चा नेतृत्व हमेशा अपने लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्पित होता है। श्रीकृष्ण का जीवन देता है यह संदेश भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन सिखाता है कि किसी भी रिश्ते की नींव प्रेम, विश्वास, सम्मान और कर्तव्य पर टिकी होती है। मित्रता हो, परिवार हो, गुरु का सम्मान हो या समाज के प्रति जिम्मेदारी—हर संबंध को ईमानदारी और निष्ठा से निभाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Doctors at Indraprastha Apollo Hospital in New Delhi perform a successful liver transplant on twin brothers from the Philippines with liver donations from their mother and uncle.
फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को दिल्ली में मिली नई जिंदगी, मां और मामा ने किया लिवर दान

नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को नई जिंदगी दी है। जन्मजात गंभीर बीमारी से जूझ रहे दोनों बच्चों का सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उनकी मां और मामा ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया। जन्मजात बीमारी से जूझ रहे थे दोनों बच्चे एएनआई के मुताबिक, फिलीपींस के जुड़वां भाई केली और टायलर जन्म से ही 'कोलेडोकल सिस्ट' (Choledochal Cyst) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे। यह बीमारी पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) को प्रभावित करती है और समय के साथ लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चों का लिवर इस बीमारी से इतना प्रभावित हो चुका था कि उनके इलाज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। एक लाख में एक को होती है यह बीमारी इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि जुड़वां बच्चों में एक साथ इस बीमारी का होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी लगभग एक लाख बच्चों में किसी एक को होती है। इनमें भी केवल करीब 10 प्रतिशत मरीजों में लिवर इतना खराब होता है कि प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। मां और मामा बने जीवनदाता इलाज के दौरान बच्चों के माता-पिता ने लिवर दान करने की इच्छा जताई। जांच में पिता चिकित्सकीय रूप से दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद बच्चों की मां और उनके मामा ने आगे आकर अपने-अपने लिवर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दान किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों बच्चों का सफल ट्रांसप्लांट किया, जिसके बाद उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब सामान्य जीवन जी सकेंगे दोनों भाई डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि लिवर मानव शरीर का ऐसा अंग है, जो समय के साथ दोबारा विकसित होने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि दानदाता और मरीज, दोनों का लिवर धीरे-धीरे सामान्य आकार में लौट आता है। सफल सर्जरी के बाद केली और टायलर पूरी तरह स्वस्थ हैं और अब सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकेंगे। भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता को मिली नई पहचान अस्पताल का कहना है कि यह दुर्लभ ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट भारत की उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अंग प्रत्यारोपण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को एक बार फिर मजबूत किया है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
BSF and Border Guard Bangladesh officials meet in New Delhi for border security talks.
भारत-बांग्लादेश सीमा वार्ता आज से, अवैध घुसपैठियों की वापसी के मुद्दे पर होगी अहम चर्चा

  भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा सुरक्षा और समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सोमवार से नई दिल्ली में उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो रही है। Border Security Force (बीएसएफ) और Border Guard Bangladesh (बीजीबी) के महानिदेशकों की 57वीं द्विवार्षिक बैठक 8 से 11 जून तक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और अवैध घुसपैठियों की वापसी जैसे संवेदनशील विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। नई दिल्ली में जुटेंगे दोनों देशों के सीमा सुरक्षा प्रमुख चार दिवसीय सम्मेलन में बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बीजीबी प्रमुख Mohammad Ashrafuzzaman Siddiqui करेंगे, जबकि भारतीय पक्ष की अगुवाई बीएसएफ महानिदेशक Praveen Kumar करेंगे। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। अवैध प्रवासियों की वापसी रहेगा प्रमुख एजेंडा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भारत में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया को लेकर माना जा रहा है। बांग्लादेश ने इस विषय पर अपनी आपत्तियां जताई हैं और इसे वार्ता में प्रमुखता से उठाने की बात कही है। बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार Salahuddin Ahmed ने कहा है कि सीमा की मौजूदा स्थिति, द्विपक्षीय सहयोग और अवैध प्रवासियों की वापसी का मुद्दा बैठक में प्रमुख रूप से उठाया जाएगा। वहीं भारत का कहना है कि केवल सत्यापित अवैध घुसपैठियों को स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए बांग्लादेश भेजा जाता है। सीमा अपराध और तस्करी पर भी होगी बातचीत सम्मेलन में सीमा पार अपराध, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध घुसपैठ और सीमा पर होने वाली अन्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और विश्वास बढ़ाने के उपायों पर भी विचार कर सकते हैं। 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा बनी चुनौती भारत और Bangladesh के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसमें से करीब 860 किलोमीटर हिस्से में अभी भी बाड़ नहीं लगी है, जिसके कारण सुरक्षा एजेंसियों के सामने निगरानी और अवैध आवाजाही रोकने की चुनौती बनी रहती है। पांच दशक पुराना संवाद तंत्र भारत और बांग्लादेश के बीच महानिदेशक स्तर की सीमा वार्ताओं की शुरुआत 1975 में हुई थी। वर्ष 1975 से 1992 तक यह बैठक हर साल आयोजित की जाती थी, जबकि 1993 से इसे द्विवार्षिक स्वरूप दिया गया। सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में यह तंत्र दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Border Security Force personnel patrolling the India-Bangladesh border amid rising cross-border tensions.
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा विवाद, ‘पुशबैक’ आरोपों ने बढ़ाई कूटनीतिक चिंता

  भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा प्रबंधन को लेकर नया विवाद सामने आया है। बांग्लादेश ने आरोप लगाया है कि पिछले 24 घंटों में भारत की ओर से लोगों को उसकी सीमा में भेजने के कई प्रयास किए गए, जिन्हें उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने विफल कर दिया। करीब 4,000 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर हालात को देखते हुए बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने निगरानी बढ़ा दी है और अवैध प्रवेश के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। झिनाइदाह क्षेत्र की घटना बनी तनाव की वजह बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, झिनाइदाह जिले के सीमा क्षेत्र में कुछ लोगों को कथित रूप से सीमा पार कराने की कोशिश की गई थी। सुरक्षा बलों ने समय रहते हस्तक्षेप कर इस प्रयास को रोकने का दावा किया है। इस घटना ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील सीमा मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। शेख हसीना के बाद बदलते रिश्तों पर नया दबाव पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंध नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसे समय में सीमा से जुड़ा यह विवाद द्विपक्षीय संबंधों के लिए नई चुनौती बन सकता है। ढाका का कहना है कि किसी भी नागरिक की वापसी स्थापित कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं के तहत होनी चाहिए, न कि एकतरफा कार्रवाई के माध्यम से। दिल्ली में होने वाली बैठक से समाधान की उम्मीद सीमा विवाद के बीच 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में दोनों देशों के सीमा सुरक्षा प्रमुखों की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में अवैध आव्रजन, सीमा सुरक्षा और नागरिकों की वापसी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच बढ़ती गलतफहमियों को दूर करने का महत्वपूर्ण अवसर हो सकती है। सीमाई तनाव के बीच बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सीमा विवाद के समानांतर बांग्लादेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला है। अवामी लीग की वरिष्ठ नेता Selina Hayat Ivy को जमानत मिलने के बाद रिहा कर दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण संकेत देता है। अवामी लीग पर प्रतिबंध को लेकर बढ़ी बहस International Crisis Group ने बांग्लादेश सरकार से अवामी लीग पर संभावित प्रतिबंध लगाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। संगठन का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी प्रमुख राजनीतिक ताकतों की भागीदारी जरूरी है। सीमा सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता दोनों बड़ी चुनौती भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ता तनाव और बांग्लादेश के भीतर जारी राजनीतिक हलचल दोनों देशों के संबंधों पर असर डाल सकती है। अब निगाहें नई दिल्ली में होने वाली वार्ता और ढाका की राजनीतिक दिशा पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा तय कर सकती हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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