इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर जिले के जिवानी क्षेत्र में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड के एक कैंप पर कथित आत्मघाती हमले का दावा किया गया है। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने कहा है कि उसके आत्मघाती हमलावर ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसमें 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार, सेना या किसी आधिकारिक एजेंसी ने अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। BLA ने क्या दावा किया? BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच के नाम से जारी बयान में कहा गया है कि संगठन की मजीद ब्रिगेड ने ग्वादर जिले के जिवानी के पनवान इलाके में स्थित पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि आत्मघाती हमलावर पहले सुरक्षा कैंप के भीतर प्रवेश करने में सफल रहे और इसके बाद विस्फोट किया, जिससे भारी नुकसान हुआ। जिवानी क्यों है महत्वपूर्ण? जिवानी, ग्वादर जिले का एक रणनीतिक तटीय क्षेत्र है। यह अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिहाज से अहम माना जाता है। वायरल वीडियो पर नहीं हुई पुष्टि हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @Bahotblch नाम के अकाउंट से साझा किया गया है। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हमले का है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी है। पाकिस्तान की ओर से नहीं आया बयान हमले के दावे के बावजूद पाकिस्तान सरकार, सेना या सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। इसलिए हताहतों की संख्या और घटना के वास्तविक स्वरूप की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
मुंबई, एजेंसियां। सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही सेंसर बोर्ड (CBFC) से जुड़े विवाद की खबरों पर आखिरकार मेकर्स ने चुप्पी तोड़ दी है। हाल के दिनों में दावा किया जा रहा था कि फिल्म का सर्टिफिकेशन रोक दिया गया है और यह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) में अटक गई है। इन खबरों के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर प्रशंसकों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी। इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सलमान खान फिल्म्स (SKF) ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्रोडक्शन हाउस ने स्पष्ट किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजा ही नहीं गया है। ऐसे में सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म रोकने या सर्टिफिकेट देने से इनकार करने जैसी खबरें पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं। आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा सलमान खान फिल्म्स ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जारी बयान में कहा कि फिल्म को लेकर प्रसारित की जा रही अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। मेकर्स ने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी केवल सलमान खान फिल्म्स के अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही साझा की जाएगी। क्या है मामला ? गौरतलब है कि निर्देशक अपूर्व लाखिया की इस फिल्म का शुरुआती नाम 'बैटल ऑफ गलवान' था। फिल्म 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है। बाद में कहानी के व्यापक भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया गया। फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह, अभिलाष चौधरी और अंकुर भाटिया अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। पहले इसकी रिलीज अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे आगे बढ़ा दिया गया। फिलहाल निर्माता नई रिलीज डेट तय करने में जुटे हैं। ऐसे में मेकर्स ने साफ कर दिया है कि सेंसर बोर्ड से जुड़े विवाद की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और फिल्म की आधिकारिक प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब यात्रियों से भरी एक बस गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना में कई अन्य लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में आठ यात्रियों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। दुर्गम मोड़ पर अनियंत्रित होकर खाई में गिरी बस प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस बलूचिस्तान के शेरानी जिले से होते हुए पेशावर जा रही थी। जैसे ही वाहन डेरा इस्माइल खान जिले में पहुंचा, पहाड़ी क्षेत्र के एक खतरनाक मोड़ पर चालक बस से नियंत्रण खो बैठा और बस गहरी खाई में जा गिरी। अधिकारियों का मानना है कि ब्रेक फेल होने की वजह से यह हादसा हुआ, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। हादसे की जांच शुरू प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी इलाकों में खराब सड़कें, दुर्गम भूभाग, प्रतिकूल मौसम और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण अक्सर गंभीर सड़क हादसे होते रहते हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई या चालक की लापरवाही भी इसकी वजह बनी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जताया शोक पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। राष्ट्रपति ने संबंधित अधिकारियों को घायलों के बेहतर इलाज और हर संभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ रहे सड़क हादसे खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाकों में सड़क दुर्घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब सड़क ढांचा, पुराने वाहन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी ऐसे हादसों की प्रमुख वजह हैं। हालिया दुर्घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Pakistan Double Earthquake: पाकिस्तान में शनिवार सुबह कुछ ही घंटों के अंतराल पर दो बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप सुबह करीब 6:15 बजे आया, जबकि दूसरा झटका करीब 8:30 बजे दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों की तीव्रता 5 मैग्नीट्यूड से अधिक रही। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आए झटकों से लोगों में दहशत का माहौल है। बलूचिस्तान के पास था दूसरे भूकंप का केंद्र नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, दूसरे भूकंप की तीव्रता 5.5 मापी गई। वहीं, यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इसका केंद्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बरखान शहर से करीब 63 किलोमीटर दूर था। EMSC और USGS के अनुसार भूकंप की गहराई करीब 35 किलोमीटर थी, जबकि NCS ने इसकी गहराई 40 किलोमीटर दर्ज की है। भारतीय समयानुसार यह भूकंप सुबह करीब 8:36 बजे महसूस किया गया। कुछ घंटे पहले आया था पहला झटका इससे पहले शनिवार सुबह करीब 6:15 बजे पाकिस्तान में 5.3 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, पहले भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 75 किलोमीटर की गहराई में था। एक ही दिन में दो बार आए भूकंप के झटकों के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं की है। दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ी भूकंपीय गतिविधियां जून महीने में दुनिया के कई देशों में लगातार भूकंप दर्ज किए गए हैं। हाल ही में फिलीपींस और वेनेजुएला में भी तेज भूकंप आए थे। अब पाकिस्तान में लगातार दो झटकों ने एक बार फिर भूकंपीय गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आखिर क्यों आते हैं भूकंप? पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित है। ये प्लेटें पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्म मैग्मा पर लगातार गति करती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं या उनके बीच दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तो अचानक बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है और धरती हिलने लगती है, जिसे हम भूकंप कहते हैं। इसके अलावा ज्वालामुखी विस्फोट, बड़े बांधों का निर्माण और खनन जैसी मानवीय गतिविधियां भी छोटे स्तर के भूकंप पैदा कर सकती हैं। P-वेव और S-वेव क्या होती हैं? भूकंप के दौरान दो प्रमुख प्रकार की तरंगें उत्पन्न होती हैं। P-वेव (Primary Wave) सबसे तेज गति से चलने वाली तरंग होती है। यह ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती है और सबसे पहले महसूस होती है। S-वेव (Secondary Wave) अपेक्षाकृत धीमी होती है, लेकिन सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। यह केवल ठोस पदार्थों में ही यात्रा कर सकती है और धरती को ऊपर-नीचे तथा दाएं-बाएं हिलाती है, जिससे इमारतों को अधिक क्षति होती है। भारत में भूकंप के कितने जोन हैं? भारत में भूकंप के जोखिम के आधार पर अब छह भूकंपीय जोन निर्धारित किए गए हैं। जोन VI (उच्चतम जोखिम): पूरे हिमालयी क्षेत्र, जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर भारत तक। जोन V (बहुत अधिक जोखिम): कच्छ का रण (गुजरात) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह। जोन IV (उच्च जोखिम): दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्से। जोन III (मध्यम जोखिम): केरल, गोवा, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण भारत के कई हिस्से। जोन II (कम जोखिम): राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के शेष क्षेत्र। जोन I (नगण्य जोखिम): नए वर्गीकरण के बाद इस श्रेणी के अधिकांश क्षेत्रों को अब जोन II में शामिल कर दिया गया है।
इस्लामाबाद/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन के बीच हालात लगातार बिगड़ने के दावे सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों, ट्रक चालकों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन ने खाद्य सामग्री, ईंधन और दवाओं की आपूर्ति सीमित कर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की है। पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई इलाकों में आवश्यक वस्तुओं की कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन और बंद के कारण आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। राजधानी मुजफ्फराबाद सहित कई शहरों में बाजार बंद हैं और इंटरनेट सेवाओं में भी रुकावट की खबरें सामने आई हैं। खाद्य सामग्री और दवाओं की कमी का दावा स्थानीय निवासियों का कहना है कि आटा, चावल, दाल, चीनी, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की उपलब्धता लगातार कम होती जा रही है। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि राशन डिपो पर कई दिनों तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें आवश्यक वस्तुएं नहीं मिल रही हैं, जबकि खुले बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। ईंधन संकट से बढ़ी मुश्किलें ईंधन की कमी भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कई जिलों में पेट्रोल पंप बंद होने की खबरें हैं। वाहन चालकों का दावा है कि उन्हें ब्लैक मार्केट से ऊंचे दामों पर पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है, जिससे आम लोगों और व्यापारियों दोनों की परेशानियां बढ़ गई हैं। जरूरी सामान लाने वालों को रोके जाने के आरोप रिपोर्टों के अनुसार, कई लोग आवश्यक सामान खरीदने के लिए पाकिस्तान के अन्य शहरों जैसे रावलपिंडी और इस्लामाबाद जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का आरोप है कि लौटते समय उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयां और ईंधन लेकर PoK में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने चेकपोस्ट पर उनके वाहनों को रोककर सामान वापस ले जाने या फेंकने के लिए दबाव बनाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने का दावा स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आवश्यक वस्तुओं से भरे कई ट्रकों को रास्ते में रोके जाने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। ट्रक चालकों का कहना है कि कई वाहन घंटों और कुछ मामलों में कई दिनों तक रास्ते में खड़े रहे, जिससे खराब होने वाला सामान भी नुकसान का शिकार हुआ। पाकिस्तान प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार पाकिस्तान प्रशासन ने खाद्य सामग्री और ईंधन की आपूर्ति रोकने के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है और किसी भी वाहन को जानबूझकर नहीं रोका गया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कुछ रणनीतिक कदम उठाए गए हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या है पूरे विवाद की वजह? PoK में मौजूदा आंदोलन की शुरुआत विधानसभा की उन 12 आरक्षित सीटों को लेकर हुई, जो भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर से आए शरणार्थियों के लिए निर्धारित हैं। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करता है। इसी मुद्दे को लेकर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। बाद में पाकिस्तान सरकार ने JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। आंदोलन के और तेज होने के संकेत रिपोर्टों के अनुसार, PoK के कई शहरों और कस्बों में प्रदर्शन लगातार फैल रहे हैं। आंदोलनकारी संगठन दावा कर रहे हैं कि रावलाकोट में चल रहे धरने में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए हैं। JAAC ने आने वाले दिनों में रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़े मार्च का भी आह्वान किया है। इस बीच क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक फ्रांसीसी महिला और उसके पांच बच्चे कथित तौर पर लगभग एक दशक तक अलग-थलग और कैद जैसी परिस्थितियों में रहने को मजबूर रहे। परिवार को तब राहत मिली, जब महिला के एक बेटे ने किसी तरह घर से बाहर निकलकर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला खैबर पख्तूनख्वा के पहाड़ी क्षेत्र बारा का है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार को लंबे समय तक बाहरी दुनिया से काटकर रखा गया था और महिला के पति पर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे हैं। बेटे ने पुलिस तक पहुंचाई जानकारी अधिकारियों के मुताबिक, परिवार के एक बच्चे ने साहस दिखाते हुए घर से बाहर निकलकर पुलिस को अपनी स्थिति के बारे में बताया। सूचना मिलने के बाद 18 जून को पुलिस ने संबंधित घर पर छापा मारा। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो 54 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक सिल्वी यास्मीना और उनके पांच बच्चे एक छोटे और जर्जर कमरे में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि परिवार की हालत बेहद खराब थी और कुछ सदस्यों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए। रेस्क्यू के बाद सभी को तत्काल पेशावर स्थित महिला आश्रय गृह में भेजा गया, जहां उन्हें चिकित्सा और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। महिला ने लगाए गंभीर आरोप जांच के दौरान सिल्वी यास्मीना ने अपने पति पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें और उनके बच्चों को वर्षों तक स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार नहीं मिला। महिला के अनुसार, परिवार को लगातार भय और दबाव में रखा गया तथा पति द्वारा नियमित रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्हें लगने लगा था कि उनका और उनके बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो चुका है। महिला ने कहा कि परिवार को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग कर दिया गया था। बच्चों की पढ़ाई भी हुई प्रभावित पुलिस अधिकारियों के अनुसार, परिवार के सदस्यों को अन्य लोगों से मिलने-जुलने की अनुमति नहीं थी। महिला ने बताया कि 2014 में ऑस्ट्रेलिया से पाकिस्तान आने के बाद परिवार पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। जानकारी के मुताबिक, परिवार के दो बड़े बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट गई, जबकि पाकिस्तान में जन्मे तीन छोटे बच्चों का कभी किसी स्कूल में दाखिला नहीं कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर इसका गंभीर असर पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में हुई थी शादी पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, सिल्वी यास्मीना और उनके पति की मुलाकात ऑस्ट्रेलिया में हुई थी। दोनों ने वर्ष 2003 में विवाह किया था और कुछ वर्षों तक वहीं रहे। बाद में 2014 में परिवार अपने दो बड़े बच्चों के साथ पाकिस्तान आ गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि पाकिस्तान आने के बाद परिवार किन परिस्थितियों में रह रहा था और कथित उत्पीड़न कब से शुरू हुआ। पति हिरासत में, जांच जारी पुलिस ने महिला के पति को हिरासत में ले लिया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न सबूत जुटाए जा रहे हैं तथा मामले से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। इस बीच, फ्रांसीसी दूतावास को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। महिला और उनके बच्चों ने फ्रांस लौटने की इच्छा जताई है। संबंधित अधिकारियों के बीच उनकी वापसी को लेकर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। मानवाधिकारों को लेकर उठे सवाल इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा तथा मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लंबे समय तक घरेलू हिंसा और सामाजिक अलगाव का एक गंभीर मामला माना जाएगा। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने चर्चित बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच और उनके दो सहयोगियों को हत्या तथा आतंकवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। क्वेटा स्थित एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने यह फैसला सुनाते हुए महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह और बलाच कादिर को दोषी माना। अदालत के फैसले के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भीड़ को उकसाने का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने कथित रूप से एक भीड़ को उकसाया था, जिसने अर्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि घटना के दौरान हिंसा फैलाने और सुरक्षा बलों के खिलाफ माहौल बनाने में आरोपियों की भूमिका थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत ने उन्हें हत्या और आतंकवाद से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। कौन हैं महरंग बलोच? 33 वर्षीय महरंग बलोच बलूचिस्तान की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में गिनी जाती हैं। वह बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख हैं और लंबे समय से बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी, मानवाधिकार उल्लंघन और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही हैं। महरंग बलोच को पिछले वर्ष मार्च में कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद देश और विदेश में कई मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई थी। मानवाधिकार आयोग ने उठाए सवाल फैसले के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने मामले की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। आयोग का कहना है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपनाया जा रहा रवैया चिंता का विषय है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। आयोग ने कहा कि मानवाधिकारों की वकालत करने वाले लोगों के साथ चरमपंथियों जैसा व्यवहार किए जाने की धारणा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। BYC ने फैसले को बताया राजनीतिक बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने अदालत के फैसले की कड़ी आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि यह फैसला बलोच समुदाय की आवाज दबाने और मानवाधिकार आंदोलनों को कमजोर करने की कोशिश है। संगठन ने कहा कि महरंग बलोच लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपने समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg ने भी इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने मुकदमे को न्याय का मजाक बताते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी मामले पर चिंता व्यक्त की है और पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है। मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ी बहस महरंग बलोच को सजा सुनाए जाने के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकारों, नागरिक स्वतंत्रताओं और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार और जांच एजेंसियां इसे कानून के अनुसार हुई कार्रवाई बता रही हैं, वहीं मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असहमति की आवाजों को दबाने की धारणा लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चुनौती बन सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मामले का प्रभाव केवल बलूचिस्तान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पाकिस्तान में मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर चल रही व्यापक बहस को भी प्रभावित करेगा।
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।
वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।
मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुधवार को पाकिस्तानी सेना का एक MI-17 हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हादसे में हेलिकॉप्टर में सवार 21 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की आशंका है। पाकिस्तानी सेना ने अभी तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है। उड़ान भरने के कुछ देर बाद हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, हेलिकॉप्टर ने मुजफ्फराबाद से उड़ान भरी थी और वह नीलम घाटी क्षेत्र की ओर जा रहा था। उड़ान के कुछ ही समय बाद हेलिकॉप्टर में तकनीकी खराबी आने की सूचना मिली। पायलट ने आपातकालीन लैंडिंग का प्रयास किया, लेकिन विमान सुरक्षित नहीं उतर सका और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नीलम घाटी में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती थी प्रस्तावित स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नीलम घाटी क्षेत्र में विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर चल रहे विवाद और विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे जा रहे थे। बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर में सवार सुरक्षाकर्मी इसी मिशन का हिस्सा थे। हादसे की जांच के आदेश पाकिस्तानी सेना ने दुर्घटना की वजहों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि तकनीकी और परिचालन संबंधी सभी पहलुओं की जांच की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने जताया शोक पाकिस्तानी सेना प्रमुख Asim Munir ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतक सैनिकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए दुर्घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने व्यक्त की संवेदना पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari और प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी हादसे पर शोक व्यक्त किया है। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि देश सुरक्षा बलों के योगदान और बलिदान को हमेशा याद रखेगा। क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान जारी हादसे के बाद सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है और दुर्घटनास्थल से मलबा हटाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
नई दिल्ली: पाकिस्तान ने पांचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले वार्षिक धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए 737 भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा जारी किया है। पाकिस्तान उच्चायोग ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। बयान के अनुसार, यह धार्मिक यात्रा 10 जून से 19 जून तक आयोजित की जाएगी। इस दौरान भारतीय श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित सिख धर्म के प्रमुख और ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेक सकेंगे। प्रमुख गुरुद्वारों में करेंगे दर्शन पाकिस्तान उच्चायोग के मुताबिक, तीर्थयात्री अपनी यात्रा के दौरान गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब और गुरुद्वारा करतारपुर साहिब समेत कई पवित्र सिख तीर्थस्थलों के दर्शन करेंगे। पाक उच्चायोग ने दी शुभकामनाएं भारत में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त साद अहमद वाराइच ने सभी श्रद्धालुओं को सफल और सुरक्षित यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा जारी करना वर्ष 1974 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत पाकिस्तान की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। एसजीपीसी को मिले 541 श्रद्धालुओं के वीजा इस बीच, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को 541 सिख श्रद्धालुओं के वीजा प्राप्त हुए हैं। ये श्रद्धालु गुरु अर्जन देव की शहादत की वर्षगांठ के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेकेंगे। 10 जून को रवाना होगा जत्था एसजीपीसी की धर्म प्रचार समिति के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने बताया कि संस्था ने कुल 561 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में जमा कराए थे। वीजा स्वीकृत होने के बाद श्रद्धालुओं का जत्था 10 जून को एसजीपीसी मुख्यालय से पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। उन्होंने कहा कि जिन श्रद्धालुओं के वीजा मंजूर हो गए हैं, वे 9 जून को कार्यालय समय के दौरान एसजीपीसी कार्यालय से अपने पासपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। धार्मिक यात्राओं के जरिए कायम है संवाद भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद धार्मिक तीर्थयात्राओं का सिलसिला जारी है। सिख श्रद्धालुओं की यह यात्रा दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संपर्क को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में विधानसभा चुनाव से पहले हिंसा की एक बड़ी घटना सामने आई है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) की एक चुनावी रैली के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चुनावी रैली में चली गोलियां मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिलगित के तांगीर क्षेत्र में PML-N की चुनावी रैली आयोजित की गई थी। इसी दौरान हवाई फायरिंग की जा रही थी, तभी एक व्यक्ति के हाथ से AK-47 राइफल फिसल गई और गोलियां सीधे भीड़ की ओर चल गईं। पुलिस के मुताबिक, गोली लगने से एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान एक अन्य व्यक्ति ने दम तोड़ दिया। इस तरह मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई। वायरल हुआ घटना का वीडियो घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि रैली में शामिल एक व्यक्ति राइफल को लोड कर हवा में फायरिंग करता है। कुछ ही क्षण बाद हथियार उसके नियंत्रण से बाहर हो जाता है और गोलियां भीड़ की दिशा में चलने लगती हैं। वीडियो में मौके पर मौजूद लोगों के बीच भगदड़ और अफरा-तफरी भी साफ दिखाई देती है। फुटेज से यह भी संकेत मिलता है कि रैली में एक से अधिक लोगों द्वारा फायरिंग की जा रही थी। पुलिस ने शुरू की जांच स्थानीय पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। पीड़ित परिवारों के लिए सहायता का ऐलान पाकिस्तान सरकार में कश्मीर मामलों के मंत्री अमीर मकाम ने मृतकों और घायलों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। उन्होंने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। 7 जून को होने हैं चुनाव गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून 2026 को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 10 जिलों की 24 सीटों पर मतदान होना है। चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत ने चुनावों को बताया अवैध भारत लगातार कहता रहा है कि गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है तथा पाकिस्तान का वहां कब्जा अवैध है। इसी कारण भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान में कराए जा रहे चुनावों का विरोध करते हुए कहा है कि ऐसे कदम क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते।
पाकिस्तान के चर्चित मोटरवे गैंगरेप मामले में दोषी ठहराए गए दो आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2020 में हुई इस घटना ने पूरे पाकिस्तान को झकझोर दिया था और देशभर में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। रात के सफर के दौरान बच्चों के सामने हुई थी दरिंदगी 9 सितंबर 2020 को फ्रांसीसी-पाकिस्तानी मूल की एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट-लाहौर मोटरवे से गुजर रही थी। देर रात कार का ईंधन खत्म होने के कारण परिवार सड़क किनारे फंस गया। इसी दौरान दो हमलावर वहां पहुंचे, कार का शीशा तोड़ा और महिला को जबरन बाहर खींच लिया। आरोपियों ने बच्चों के सामने हथियार के बल पर महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। वारदात के बाद उन्होंने नकदी, गहने और बैंक कार्ड लूटकर मौके से फरार हो गए। डीएनए और मोबाइल डेटा बने गिरफ्तारी की सबसे बड़ी कड़ी घटना के बाद पुलिस ने व्यापक जांच शुरू की। मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से मिले डीएनए नमूनों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। जांच के दौरान पीड़िता ने भी दोनों आरोपियों की पहचान की थी। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी शफकत अली ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करने वाला बयान भी दिया था। 2021 में सुनाई गई थी मौत की सजा मामले की सुनवाई के बाद मार्च 2021 में आतंकवाद निरोधक अदालत ने आबिद अली और शफकत अली को दोषी करार दिया था। अदालत ने दोनों को सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, डकैती और आतंकवाद से जुड़े अपराधों में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा उन्हें अन्य मामलों में भी लंबी जेल की सजा दी गई थी। पुलिस अधिकारी के बयान ने भी खड़ा किया था विवाद घटना के बाद उस समय के लाहौर पुलिस प्रमुख उमर शेख का बयान भी विवादों में आ गया था। उन्होंने महिला के रात में यात्रा करने और दूसरा रास्ता न चुनने को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान की देशभर में आलोचना हुई और इसे पीड़िता को दोषी ठहराने की कोशिश बताया गया। बचाव पक्ष की दलीलें अदालत ने नहीं मानीं हाई कोर्ट में अपील करते हुए दोषियों के वकीलों ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी में कई विरोधाभास हैं और प्रस्तुत साक्ष्य पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि डीएनए रिपोर्ट, डिजिटल सबूत और गवाहियों के आधार पर आरोप पूरी तरह साबित होते हैं। अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद मस्क की प्रतिक्रिया चर्चा में लाहौर हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद अमेरिकी उद्योगपति Elon Musk ने सोशल मीडिया पर इसकी सराहना की। उन्होंने एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान को बधाई दी और कहा कि पश्चिमी देशों में भी ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। फैसले ने फिर छेड़ी सख्त सजा बनाम सुधार की बहस इस फैसले के बाद एक बार फिर अपराधियों को कठोर दंड देने और सुधारात्मक न्याय की अवधारणा पर बहस तेज हो गई है। जहां पाकिस्तान में अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी, वहीं कई पश्चिमी देशों में मृत्युदंड समाप्त किया जा चुका है और वहां अपराधियों के पुनर्वास पर अधिक जोर दिया जाता है।
पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत से सिंधु जल संधि बहाल करने की अपील की है। ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन में पाकिस्तान ने कहा कि इस संधि को रोकना दुनिया के कई देशों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की गुहार सम्मेलन में पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री Musadik Malik ने भारत पर साझा जल संसाधनों को राजनीति से जोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार नदियों पर एकतरफा फैसले कई देशों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकते हैं। पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने की अपील की। पहलगाम हमले के बाद भारत ने लिया था बड़ा फैसला भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल था। भारत का कहना था कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इसके बाद से दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। क्या है सिंधु जल संधि? Indus Waters Treaty भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए थे। यह संधि लंबे समय तक दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार रही है। पाकिस्तान ने क्या चेतावनी दी? पाकिस्तान ने कहा कि अगर उसके हिस्से का पानी रोका गया तो इसे गंभीर कदम माना जाएगा। पाकिस्तान का दावा है कि उसकी खेती और पानी की जरूरतें काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं। जल संकट और बढ़ती चिंता सम्मेलन में पाकिस्तान ने जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी उठाया। पाकिस्तान का कहना है कि वह उन देशों में शामिल है जो ग्लोबल वार्मिंग और पानी की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है और आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और चर्चा में रह सकता है।
अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने ईरान-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताता है, लेकिन उसका इजराइल के प्रति रवैया हमेशा विरोधी रहा है। ग्राहम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए पाकिस्तान से अब्राहम समझौते को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। ईरानी सैन्य विमानों को लेकर भी किया दावा लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि ईरानी सैन्य विमान पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक सबूत सार्वजनिक नहीं किया। उनका बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान के पुराने बयान का किया जिक्र ग्राहम ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के एक पुराने बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान कभी अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा क्योंकि उसे इजराइल पर भरोसा नहीं है। अमेरिकी सांसद ने कहा कि भले यह बयान पुराना हो, लेकिन पाकिस्तान की सोच आज भी वैसी ही दिखाई देती है। ट्रम्प की अपील का जवाब देने को कहा ग्राहम ने कहा कि अब पाकिस्तान को Donald Trump की उस अपील पर जवाब देना चाहिए, जिसमें मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान खुद को क्षेत्र में शांति का समर्थक बताता है, तो उसे अपने रुख को साफ करना चाहिए। क्या है अब्राहम समझौता? Abraham Accords के तहत कुछ अरब देशों ने इजराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और इजराइल को आधिकारिक मान्यता दी थी। इस समझौते के जरिए मध्य पूर्व में नए राजनीतिक और आर्थिक सहयोग की शुरुआत हुई थी। अमेरिका चाहता है कि और मुस्लिम देश भी इसमें शामिल हों। पाकिस्तान अब तक समझौते से दूर पाकिस्तान अब तक अब्राहम समझौते का हिस्सा नहीं बना है। पाकिस्तान लंबे समय से कहता आया है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना वह इजराइल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान की आधिकारिक नीति यही रही है कि स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बनने के बाद ही इजराइल के साथ संबंधों पर विचार किया जाएगा। मध्य पूर्व तनाव के बीच बढ़ी कूटनीतिक चर्चा ईरान-इजराइल तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की राजनीति और कूटनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Donald Trump की अपील के बावजूद Pakistan ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल Abraham Accords का हिस्सा नहीं बनेगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जो देश की “मूल विचारधारा” के खिलाफ हो। ट्रंप ने मुस्लिम देशों से की थी अपील मिडिल ईस्ट में नए कूटनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे ट्रंप ने हाल ही में कई मुस्लिम और अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ संभावित समझौते के बाद मध्य पूर्व में स्थायी शांति का नया दौर शुरू हो सकता है। ट्रंप ने Saudi Arabia, Qatar, पाकिस्तान, Turkey, Egypt, Jordan और Bahrain जैसे देशों से इस समझौते में शामिल होने की अपील की थी। पाकिस्तान ने क्या कहा? पाकिस्तानी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ऐसे किसी समझौते में शामिल नहीं होगा, जो उसकी बुनियादी विचारधारा से टकराता हो। उन्होंने कहा, “हमारा रुख पूरी तरह साफ है। यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है।” आसिफ ने इजरायल के साथ किसी संभावित समझौते पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान दुनिया के उन गिने-चुने देशों में है, जिसके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक नहीं लिखा जाता। सऊदी अरब भी अपने रुख पर कायम सऊदी अरब ने भी अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा है कि जब तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं मिलती, वह इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर आगे नहीं बढ़ेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, रियाद का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान उसकी पहली प्राथमिकता है। ट्रंप ने दी थी चेतावनी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अगर ईरान के साथ समझौता सफल नहीं हुआ तो क्षेत्र फिर बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने इसे “मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण समझौता” बताते हुए कहा कि अमेरिका अब्राहम अकॉर्ड्स का दायरा और बढ़ाना चाहता है। ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया कि भविष्य में ईरान भी इस ढांचे का हिस्सा बन सकता है। क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स? अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए समझौते हैं, जिनके तहत कई अरब देशों ने इजरायल के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंध सामान्य किए थे। United Arab Emirates और बहरीन इस समझौते को स्वीकार करने वाले पहले देश थे। बाद में मोरक्को और सूडान जैसे देश भी इससे जुड़े। ट्रंप का दावा है कि इससे क्षेत्रीय व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा मिला है।
Baloch Liberation Army ने पहली बार अपनी महिला ब्रिगेड का वीडियो जारी किया है। करीब 11 मिनट लंबे इस वीडियो में संगठन की महिला कमांडर शायनाज बलोच नजर आईं, जिन्हें BLA ने अपने प्रमुख चेहरों में शामिल बताया है। वीडियो में शायनाज हथियारबंद महिला लड़ाकों के साथ दिखाई देती हैं। कहीं पहाड़ी इलाकों में ट्रेनिंग चलती नजर आती है तो कहीं हथियारों के साथ गाड़ियां दिखाई देती हैं। वीडियो को BLA के प्रचार मंच ‘हक्काल’ के जरिए जारी किया गया। कौन हैं शायनाज बलोच? रिपोर्ट्स के मुताबिक, शायनाज बलोच Kech District के टंप इलाके की रहने वाली हैं। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई The Oasis School से की और बाद में टंप डिग्री कॉलेज से एफएससी की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान वह Baloch Students Organization-Azad से जुड़ी रहीं। यह संगठन लंबे समय से बलोच राष्ट्रवादी राजनीति में सक्रिय माना जाता है। वीडियो में क्या बोलीं शायनाज? वीडियो में शायनाज बलोच ने कहा कि वह पिछले सात वर्षों से BLA से जुड़ी हुई हैं और एक साधारण लड़ाके से नेतृत्व की भूमिका तक पहुंची हैं। उन्होंने दावा किया कि संगठन में उन्हें कभी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बलोच महिलाओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि “सम्मान और पहचान एक आजाद बलूचिस्तान से जुड़ी हुई है।” क्यों अहम माना जा रहा है यह वीडियो? विश्लेषकों के मुताबिक, किसी महिला को पहली बार खुले तौर पर “कमांडर” के रूप में सामने लाना BLA के लिए बड़ा प्रतीकात्मक बदलाव माना जा रहा है। अब तक संगठन में नेतृत्व की भूमिका मुख्य रूप से पुरुषों के हाथ में रही है। ऐसे में शायनाज की सार्वजनिक मौजूदगी यह संकेत मानी जा रही है कि संगठन महिलाओं को भी अग्रिम नेतृत्व में लाने की कोशिश कर रहा है। शारी बलोच के बाद बढ़ी चर्चा बलोच उग्रवादी संगठनों में महिलाओं की भूमिका को लेकर सबसे बड़ी चर्चा अप्रैल 2022 में हुई थी, जब Shari Baloch ने कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के पास आत्मघाती हमला किया था। उस हमले में तीन चीनी शिक्षकों और एक पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हुई थी। इसके बाद बलोच महिला लड़ाकों की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हुई। बलूचिस्तान में बढ़ रहा तनाव Balochistan में पिछले कुछ वर्षों में अलगाववादी हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार बढ़ी है। हाल ही में BLA ने क्वेटा में एक ट्रेन पर हमला करने का दावा किया था। संगठन लगातार पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ हमले करता रहा है, जबकि पाकिस्तान इन समूहों को आतंकी संगठन मानता है और उनके खिलाफ सैन्य अभियान चलाता है।
Marco Rubio के भारत दौरे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अमेरिका भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रूबियो को भारत भेजा गया, ताकि प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत सरकार को संतुष्ट किया जा सके। भारत दौरे पर क्या बोले नजम सेठी सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप में नजम सेठी एक टीवी चर्चा के दौरान कहते दिखाई दे रहे हैं कि अमेरिका को अब भारत के साथ अपने संबंध फिर से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है।” “भारत ने अमेरिका को संदेश दिया” नजम सेठी ने दावा किया कि भारत ने रूबियो के स्वागत को लेकर प्रोटोकॉल के जरिए अमेरिका को नाराजगी का संकेत दिया। उनके मुताबिक, जब रूबियो भारत पहुंचे तो S. Jaishankar उन्हें रिसीव करने नहीं गए और उनकी जगह विदेश मंत्रालय के एक निचले स्तर के अधिकारी को भेजा गया। सेठी ने कहा कि यह भारत की तरफ से अमेरिका को संदेश देने का तरीका था कि “हम आपसे खुश नहीं हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल्स और इंडियन-अमेरिकन समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेठी के मुताबिक, ईरान संघर्ष के दौरान भारत अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और Israel के करीब दिखाई दिया, लेकिन अमेरिका ने खुलकर भारत की सराहना नहीं की। इसी वजह से अब रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने मोदी की खुलकर की तारीफ भारत दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने मंच से ट्रंप से फोन पर बात कराई। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं और भारत अमेरिका पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। विदेश मंत्री का पद क्यों अहम माना जाता है? अमेरिका में विदेश मंत्री का पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है। Marco Rubio वर्तमान ट्रंप प्रशासन में प्रमुख कूटनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति के बाद सत्ता के उत्तराधिकार क्रम में विदेश मंत्री चौथे स्थान पर होता है। ऐसे में किसी देश की यात्रा और वहां शीर्ष नेताओं से मुलाकात को अमेरिकी विदेश नीति के बड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत दौरे के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी और एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों को लेकर कड़ी फटकार लगाई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास “नरसंहार और हिंसा से कलंकित” रहा है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। UNSC की खुली बहस में भारत का कड़ा बयान सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और नागरिकों की मौत, विस्थापन, अस्पतालों व स्कूलों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। ड्रोन और नई तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि शहरी इलाकों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। भारत ने कहा कि AI और स्वायत्त सैन्य तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और किसी भी बहाने से नागरिकों पर हमलों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अफगानिस्तान में हिंसा का मुद्दा उठाया पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि हिंसा और नरसंहार के आरोपों से घिरा देश भारत पर टिप्पणी कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई में अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। भारतीय दूत के अनुसार, UNAMA दस्तावेजों में दर्ज 95 घटनाओं में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया है। अस्पताल पर हमले का भी जिक्र भारत ने आरोप लगाया कि रमजान के दौरान काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तान ने हवाई हमला किया था। भारत के मुताबिक, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 घायल हुए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अस्पताल को किसी भी स्थिति में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता। 1971 के घटनाक्रम की दिलाई याद भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की सेना पर लगे अत्याचारों का भी जिक्र किया। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन हुए थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड उसकी आंतरिक विफलताओं और हिंसक नीतियों को दर्शाता है। नागरिकों की सुरक्षा पर भारत का जोर अपने संबोधन के अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जम्मू-कश्मीर मुद्दे को उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार, आतंकवाद और हिंसा से जुड़ा रहा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय मंच से टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की खुली बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए सीमा पार हिंसा और उकसावे का सहारा लेता रहा है। भारत ने पाकिस्तान को बताया पाखंडी हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि पाकिस्तान एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की बात करता है, जबकि दूसरी ओर मासूम नागरिकों को निशाना बनाने का इतिहास रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमजान के महीने में पाकिस्तान ने काबुल स्थित ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हवाई हमला किया था, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए और घायल हुए। भारत के प्रतिनिधि के मुताबिक, यह हमला तरावीह की नमाज के बाद हुआ था, जब मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी अस्पताल को सैन्य ठिकाना बताकर हमला करना बेहद अमानवीय और कायराना कृत्य है। 1971 का भी किया जिक्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र में 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी उल्लेख किया। पर्वथनेनी ने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान की सेना पर बड़े पैमाने पर अत्याचार और महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड रखने वाला देश अगर मानवाधिकारों और कश्मीर पर भाषण देता है तो यह पूरी तरह विडंबनापूर्ण है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा पाकिस्तान द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना अनुचित है। UNSC में बढ़ा तनाव भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में हुई यह तीखी बहस ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आरोपों का मजबूती से जवाब देता रहेगा।
Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।