भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को आतंकवाद, सीमा पार हिंसा और अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों को लेकर कड़ी फटकार लगाई। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास “नरसंहार और हिंसा से कलंकित” रहा है और उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। UNSC की खुली बहस में भारत का कड़ा बयान सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की वार्षिक खुली बहस में बोलते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और नागरिकों की मौत, विस्थापन, अस्पतालों व स्कूलों पर हमलों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। ड्रोन और नई तकनीकों के दुरुपयोग पर चिंता हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि शहरी इलाकों में मिसाइलों, बमों और विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उन्होंने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। भारत ने कहा कि AI और स्वायत्त सैन्य तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में होना चाहिए। पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और किसी भी बहाने से नागरिकों पर हमलों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अफगानिस्तान में हिंसा का मुद्दा उठाया पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि यह विडंबना है कि हिंसा और नरसंहार के आरोपों से घिरा देश भारत पर टिप्पणी कर रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि 2026 के शुरुआती तीन महीनों में पाकिस्तान की सीमा पार कार्रवाई में अफगानिस्तान में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। भारतीय दूत के अनुसार, UNAMA दस्तावेजों में दर्ज 95 घटनाओं में से 94 घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया है। अस्पताल पर हमले का भी जिक्र भारत ने आरोप लगाया कि रमजान के दौरान काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर पाकिस्तान ने हवाई हमला किया था। भारत के मुताबिक, इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 घायल हुए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अस्पताल को किसी भी स्थिति में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता। 1971 के घटनाक्रम की दिलाई याद भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की सेना पर लगे अत्याचारों का भी जिक्र किया। हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन हुए थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड उसकी आंतरिक विफलताओं और हिंसक नीतियों को दर्शाता है। नागरिकों की सुरक्षा पर भारत का जोर अपने संबोधन के अंत में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। भारत ने कहा कि वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए आतंकवाद और नागरिकों पर हमलों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जम्मू-कश्मीर मुद्दे को उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि जिस देश का इतिहास नरसंहार, आतंकवाद और हिंसा से जुड़ा रहा हो, उसे भारत के आंतरिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय मंच से टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित UNSC की खुली बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह अपनी घरेलू विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए सीमा पार हिंसा और उकसावे का सहारा लेता रहा है। भारत ने पाकिस्तान को बताया पाखंडी हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि पाकिस्तान एक ओर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की बात करता है, जबकि दूसरी ओर मासूम नागरिकों को निशाना बनाने का इतिहास रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमजान के महीने में पाकिस्तान ने काबुल स्थित ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हवाई हमला किया था, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए और घायल हुए। भारत के प्रतिनिधि के मुताबिक, यह हमला तरावीह की नमाज के बाद हुआ था, जब मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी अस्पताल को सैन्य ठिकाना बताकर हमला करना बेहद अमानवीय और कायराना कृत्य है। 1971 का भी किया जिक्र भारत ने संयुक्त राष्ट्र में 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी उल्लेख किया। पर्वथनेनी ने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान की सेना पर बड़े पैमाने पर अत्याचार और महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोप लगे थे। उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड रखने वाला देश अगर मानवाधिकारों और कश्मीर पर भाषण देता है तो यह पूरी तरह विडंबनापूर्ण है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है तथा पाकिस्तान द्वारा इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना अनुचित है। UNSC में बढ़ा तनाव भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में हुई यह तीखी बहस ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा पार आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। भारत ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आरोपों का मजबूती से जवाब देता रहेगा।
Pakistan के अशांत Balochistan प्रांत में सुरक्षा बलों ने बड़ा आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हुए 35 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। इसके साथ ही तीन वरिष्ठ कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया है। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता Shahid Rind ने रविवार रात क्वेटा में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह ऑपरेशन मंगला जरघून क्षेत्र में 13 मई से चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले चार दिनों में सुरक्षा बलों ने कई ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए आतंकियों के बेस कैंप भी नष्ट कर दिए। TTP और प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ कार्रवाई प्रवक्ता के मुताबिक यह अभियान प्रतिबंधित संगठन Tehrik-i-Taliban Pakistan (TTP) और बलूचिस्तान में सक्रिय उसके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ चलाया गया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों कमांडर “हाई-प्रोफाइल” और संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। रिंद ने कहा कि यह कार्रवाई पहले गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर की गई। कई आतंकी ठिकाने तबाह सुरक्षा बलों ने मंगला जरघून इलाके में आतंकवादियों के कई ठिकानों और बेस कैंपों को भी नष्ट कर दिया। प्रवक्ता ने बताया कि प्रांत के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त अभियान जारी हैं। इन अभियानों का मकसद आतंकवादी नेटवर्क के संचालकों, वित्तीय समर्थकों और उनके सहयोगियों तक पहुंचना है। पाकिस्तानी सेना की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान हालांकि, Pakistan Army ने अब तक इस ताजा अभियान पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इससे पहले 12 मई को बलूचिस्तान के बरखान जिले में एक अन्य सैन्य अभियान के दौरान एक मेजर समेत पांच पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (ISPR) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम सात आतंकवादी भी मारे गए थे। बलूचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और आतंकवादी हमलों से प्रभावित रहा है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में बढ़ती हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों के कारण पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में सैन्य और खुफिया अभियानों को और तेज कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ हुए संघर्षविराम को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा बयान दिया है। चीन यात्रा से लौटते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्धविराम कराकर “पाकिस्तान पर एहसान किया” है। ट्रंप के इस बयान के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। सीजफायर में पाकिस्तान की अहम भूमिका का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और Iran के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान ने बैकचैनल संपर्कों के जरिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद ने ईरान के पांच सूत्रीय प्रस्ताव को वॉशिंगटन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसके बाद युद्धविराम की दिशा में प्रगति हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ और संवाद मंच के रूप में पेश करने की कोशिश की है। शहबाज शरीफ और इशाक डार की तारीफ ट्रंप ने बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar की भी तारीफ की। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह संकेत भी दिया कि अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में पाकिस्तान से लगातार सहयोग की उम्मीद करता है। होर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के लिए यह संघर्षविराम सिर्फ कूटनीतिक सफलता नहीं बल्कि आर्थिक जरूरत भी था। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव से तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने का खतरा था, जिसका असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता था। युद्धविराम के बाद पाकिस्तान को अपने ऊर्जा मार्ग सुरक्षित रखने में राहत मिली है। ट्रंप के बयान के क्या मायने? ट्रंप का “पाकिस्तान पर एहसान” वाला बयान पाकिस्तान के लिए मिश्रित संकेत माना जा रहा है। एक ओर इससे इस्लामाबाद की कूटनीतिक भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत भी दिया है कि पाकिस्तान को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर सीमा पार आतंकवाद, पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अफगान सीमा और आतंकवाद पर भी इशारा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने हालिया सुरक्षा घटनाओं का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को अपनी सीमाओं पर सुरक्षा मजबूत करने का संदेश दिया। हाल ही में Bannu में पुलिस चौकी पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं। क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल मध्य पूर्व में जारी तनाव, होर्मुज संकट और अमेरिका-ईरान संबंधों के बीच पाकिस्तान की भूमिका ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति को नई दिशा दे दी है। फिलहाल अमेरिकी और पाकिस्तानी सरकारों की ओर से बैकचैनल कूटनीति के कई पहलुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ट्रंप के बयान ने इस मुद्दे को वैश्विक चर्चा का विषय बना दिया है।
भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर हाल में आई कुछ अहम टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। Rashtriya Swayamsevak Sangh के महासचिव Dattatreya Hosabale और पूर्व सेना प्रमुख Manoj Naravane के बयानों पर पाकिस्तान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए’ RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख जारी रहना चाहिए। उनके बयान के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने भी लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की समस्याएं काफी हद तक समान हैं। लोगों के बीच संपर्क बेहतर संबंध बनाने में मदद कर सकते हैं।” पाकिस्तान ने क्या कहा? इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए Ministry of Foreign Affairs के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन्हें “सकारात्मक संकेत” बताया। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत में समझदारी की आवाजें और मजबूत होंगी। पिछले कई वर्षों से जो आक्रामक बयानबाजी और तनाव देखने को मिला है, वह खत्म होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान संवाद को एक विकल्प के रूप में स्वीकार किए जाने का स्वागत करता है। बैकचैनल बातचीत पर टिप्पणी से इनकार ताहिर अंद्राबी ने बैकचैनल या अनौपचारिक संपर्कों को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “अगर मैं बैकचैनल पर टिप्पणी करूंगा, तो वह बैकचैनल नहीं रहेगा। इस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।” पाकिस्तान में RSS को कैसे देखा जाता है? पाकिस्तान में RSS को आमतौर पर एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसका भारत की मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था से करीबी संबंध माना जाता है। ऐसे में RSS नेतृत्व की ओर से संवाद पर दिया गया बयान पाकिस्तान में विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या बदल सकते हैं भारत-पाक संबंध? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक तनाव शामिल हैं। हालांकि, संवाद और लोगों के बीच संपर्क को लेकर आई हालिया टिप्पणियां भविष्य में कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। भारत सरकार की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Pakistan के Khyber Pakhtunkhwa प्रांत में मंगलवार को बड़ा आत्मघाती हमला हुआ। लक्की मारवत जिले के नौरंग बाजार इलाके में हुए इस विस्फोट में कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरे ऑटो रिक्शा में धमाका किया। धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा अधिकारी और महिला समेत कई लोगों की मौत अधिकारियों के अनुसार मृतकों में दो सुरक्षा अधिकारी और एक महिला भी शामिल हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। धमाका नौरंग बाजार के फाटक चौक इलाके में हुआ, जो उस समय काफी भीड़भाड़ वाला क्षेत्र था। गंभीर घायलों को पेशावर और बन्नू रेफर किया गया घायलों को पहले सराय नौरंग के तहसील मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में जिन लोगों की हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें Bannu और Peshawar के अस्पतालों में रेफर किया गया। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक कई घायलों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। अस्पतालों में आपातकाल घोषित विस्फोट के बाद इलाके के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई। सभी डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को तत्काल ड्यूटी पर बुलाया गया। राहत एवं बचाव एजेंसी Rescue 1122 की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री Mohammad Suhail Afridi ने घटना पर दुख जताते हुए पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि प्रांतीय सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज समेत हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है। बाजार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, जबकि हमले के पीछे शामिल नेटवर्क की तलाश जारी है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपने नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को उतरने की अनुमति दी थी, ताकि उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब पाकिस्तान खुद को तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा था। क्या है दावा? अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल की शुरुआत में, जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सीजफायर की घोषणा की, उसके तुरंत बाद ईरान ने अपने कई सैन्य विमान पाकिस्तान भेजे। बताया गया कि ये विमान रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (PAF Base Nur Khan) पर उतारे गए। रिपोर्ट में दावा है कि इनमें ईरानी एयरफोर्स का RC-130 जासूसी विमान भी शामिल था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने अपने सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए यह कदम उठाया। पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा गंभीरता से विचार करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पहले के इजरायल विरोधी बयानों को देखते हुए ऐसी खबर पूरी तरह असंभव नहीं लगती। ग्राहम के बयान के बाद इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान ने क्या कहा? हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया है। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है, इसलिए वहां ऐसी किसी गतिविधि को गुप्त रखना संभव नहीं है। पाकिस्तानी अधिकारी ने दावा किया कि एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों के उतरने की खबरें गलत और भ्रामक हैं। अफगानिस्तान भेजे गए कुछ नागरिक विमान रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि उन विमानों में सैन्य संसाधन भी शामिल थे या नहीं। क्यों अहम है यह मामला? अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो इससे कई बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं— क्या पाकिस्तान पर्दे के पीछे ईरान की मदद कर रहा था? क्या उसकी मध्यस्थ की भूमिका निष्पक्ष थी? क्या इससे अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर असर पड़ेगा? फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का भारतीय सेना पर किया गया तंज अब उन्हीं पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली बरसी पर भारतीय सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर टिप्पणी करने के बाद पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर ही उनकी जमकर आलोचना हो रही है. दरअसल, 7 मई को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पहलगाम आतंकी हमले के बाद की रणनीतिक स्थिति और सैन्य तैयारियों पर जानकारी दी थी. इस दौरान अधिकारियों ने अंग्रेजी भाषा में मीडिया को संबोधित किया, जिस पर पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ISPR के प्रमुख अहमद शरीफ चौधरी ने सवाल उठाए. “अंग्रेजी में क्यों बोले?” : पाक प्रवक्ता का तंज अहमद शरीफ चौधरी ने भारतीय अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा, “आपको अंग्रेजी में बोलने के लिए किसने कहा? क्या आप दुनिया को अपनी कहानी सुनाना चाहते हैं?” उन्होंने दावा किया कि भारतीय सैन्य अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नैरेटिव बनाने के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन उनका यह बयान पाकिस्तान में ही विवाद का कारण बन गया. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी ने खोली पोल पाकिस्तानी सेना के पूर्व अधिकारी और वर्तमान पत्रकार मेजर आदिल फारूक राजा (रिटायर्ड) ने ISPR प्रमुख के बयान को “पाखंड” बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना में उच्च स्तर से लेकर निचले स्तर तक अधिकांश आधिकारिक संचार अंग्रेजी में ही होता है. मेजर राजा ने कहा, “उर्दू का इस्तेमाल सिर्फ पाकिस्तान की जनता को भ्रमित करने और प्रोपोगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है. असल रणनीतिक दस्तावेज और सूचनाएं अंग्रेजी में तैयार होती हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में अंग्रेजी एक “लिंक लैंग्वेज” के तौर पर इस्तेमाल होती है, इसलिए सैन्य ब्रीफिंग अंग्रेजी में देना कोई असामान्य बात नहीं है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर उठाए सवाल मेजर आदिल राजा ने पाकिस्तान सेना से यह भी पूछा कि वह “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान हुए नुकसान की पूरी जानकारी जनता से क्यों छिपा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना केवल “एकतरफा कहानी” पेश कर रही है और जनता को वास्तविक स्थिति नहीं बताई जा रही. सोशल मीडिया पर भी कई पाकिस्तानी यूजर्स ने सेना से सवाल किए कि आखिर नुकसान और विफलताओं को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा. सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस अहमद शरीफ चौधरी के बयान के बाद पाकिस्तान में भाषा, सैन्य पारदर्शिता और मीडिया नैरेटिव को लेकर बहस तेज हो गई है. कई यूजर्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मामलों और सैन्य कूटनीति में अंग्रेजी का इस्तेमाल सामान्य बात है, इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है. वहीं कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान सेना वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाषा जैसे विषयों को उछाल रही है.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ताउंसा शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 331 बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। इस घटना ने पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में लापरवाही बनी संक्रमण की वजह? बीबीसी की जांच में सामने आया कि THQ ताउंसा अस्पताल में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी। मरीजों को लगाने वाली सिरिंज दोबारा इस्तेमाल की जा रही थीं एक ही दवा की शीशी (मल्टी-डोज वायल) से कई बच्चों को इंजेक्शन दिए गए 32 घंटे की अंडरकवर रिकॉर्डिंग में: 10 बार सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल देखा गया 4 मामलों में वही दवा दूसरे बच्चों को दी गई विशेषज्ञों ने बताया बेहद खतरनाक संक्रामक रोग विशेषज्ञ Dr Altaf Ahmed के मुताबिक: सिरिंज का पिछला हिस्सा भी वायरस फैला सकता है सिर्फ नई सुई लगाने से खतरा खत्म नहीं होता यह तरीका HIV संक्रमण फैलाने के लिए बेहद खतरनाक है अन्य गंभीर खामियां भी उजागर जांच में अस्पताल की कार्यप्रणाली पर और भी सवाल उठे: 66 बार बिना स्टरलाइज्ड ग्लव्स के इंजेक्शन लगाए गए मेडिकल वेस्ट को बिना सुरक्षा के संभाला गया इस्तेमाल की गई सुइयां और दवाइयां खुले में पाई गईं कैसे सामने आया मामला? इस पूरे मामले का खुलासा 8 साल के बच्चे मोहम्मद अमीन की मौत के बाद हुआ। उसकी बहन असमा भी HIV पॉजिटिव पाई गई परिवार का आरोप है कि अस्पताल में संक्रमित सुई के कारण बच्चों को यह संक्रमण हुआ सबसे पहले निजी डॉक्टर Gul Qaiserani ने इस पैटर्न को पहचाना। उन्होंने बताया कि संक्रमित बच्चों में से अधिकांश का इलाज उसी अस्पताल में हुआ था। आंकड़े क्या बताते हैं? 97 संक्रमित बच्चों में से सिर्फ 4 की माताएं HIV पॉजिटिव थीं इससे संकेत मिलता है कि संक्रमण मां से नहीं, बल्कि अन्य कारणों से फैला आधे से ज्यादा मामलों में कारण: दूषित सुई (Contaminated Needle) प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। नए सुपरिटेंडेंट Dr Qasim Buzdar ने कहा कि: वीडियो पुराना या स्टेज्ड हो सकता है वहीं, स्थानीय सरकार का कहना है कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ कि संक्रमण का स्रोत वही अस्पताल है। हालांकि, एक लीक रिपोर्ट में अस्पताल में: दवाओं की कमी IV फ्लूइड का दोबारा इस्तेमाल खराब साफ-सफाई जैसी गंभीर कमियां सामने आईं। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले Pakistan में इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं: 2019: सिंध के रतोदेरो में सैकड़ों बच्चे HIV पॉजिटिव 2021 तक संख्या 1500 पहुंची कराची में भी 84 बच्चों के संक्रमित होने का मामला विशेषज्ञ Dr Fatima Mir के अनुसार: यह पूरे सिस्टम में संक्रमण नियंत्रण की कमजोरी को दिखाता है जरूरत से ज्यादा इंजेक्शन देने की प्रवृत्ति भी एक बड़ा कारण है कितना खतरनाक है सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल? संक्रमित खून सीधे दूसरे मरीज में पहुंच सकता है HIV जैसे वायरस तेजी से फैल सकते हैं नई सुई लगाने के बावजूद जोखिम बना रहता है ताउंसा का यह मामला केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। सैकड़ों बच्चों का संक्रमित होना एक गंभीर चेतावनी है कि इन्फेक्शन कंट्रोल, मेडिकल सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को तुरंत मजबूत करना बेहद जरूरी है।
तिरुवंतपुरम, एजेंसियां। सबरीमाला मंदिर में सामने आए कथित घी घोटाले की जांच को पूरा करने के लिए Kerala High Court ने विजिलेंस ब्यूरो को 30 दिन का अतिरिक्त समय दे दिया है। अदालत ने कहा कि जांच में कई नए पहलू सामने आने के कारण समय बढ़ाना जरूरी था। विजिलेंस की दलील के बाद मिला विस्तार Vigilance and Anti-Corruption Bureau Kerala ने अदालत में बताया कि मामले में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के कई और कर्मचारी संदिग्ध पाए गए हैं, जिनकी भूमिका की जांच अभी बाकी है। इसी आधार पर जांच एजेंसी ने अतिरिक्त समय की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। 33 लोगों के खिलाफ दर्ज है FIR जांच एजेंसी ने शुरुआत में 33 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि मंदिर में बेचे गए घी पैकेट की बिक्री से प्राप्त राशि को देवस्वोम खाते में जमा नहीं किया गया, जिससे वित्तीय गड़बड़ी सामने आई। अभिलेखों की गड़बड़ी बनी बड़ी चुनौती जांच में यह भी पाया गया कि टीडीबी द्वारा रिकॉर्ड का अनुचित और लापरवाह रखरखाव किया गया, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अदालत ने इसे गंभीर बाधा बताया और विस्तृत जांच के निर्देश दिए। लाखों का राजस्व नुकसान सामने आया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 16,628 घी पैकेट की बिक्री राशि जमा नहीं की गई, जबकि बाद की अवधि में 22,565 पैकेट की कमी भी पाई गई। इससे लाखों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। कोर्ट का सख्त निर्देश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जांच एजेंसी को सभी संदिग्धों की भूमिका स्पष्ट करने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। साथ ही अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है।
US Iran Talks Islamabad: अमेरिका और ईरान के बीच 11 अप्रैल को होने वाली अहम वार्ता से पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को पूरी तरह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में बदल दिया गया है। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम ‘रेड ज़ोन’ पूरी तरह सील संसद, दूतावास और होटल इलाके में सीमित एंट्री शहरभर में चेकपॉइंट्स और सशस्त्र पुलिस तैनात कई सड़कों पर आवागमन बंद, रूट डायवर्ट दो दिन का पब्लिक हॉलिडे गुरुवार और शुक्रवार को इस्लामाबाद में छुट्टी स्कूल, दुकानें बंद सड़कों पर कम भीड़ रखने की रणनीति आसमान में भी सुरक्षा कवच PAF ने C-130 विमान और IL-78 टैंकर तैनात किए फाइटर जेट्स ईरानी प्रतिनिधिमंडल को एस्कॉर्ट करते दिखे AWACS सिस्टम से हवाई निगरानी उद्देश्य: किसी भी संभावित हमले, खासकर इजरायली खतरे को रोकना अमेरिकी टीम पहले से मौजूद 30 सदस्यीय अमेरिकी एडवांस टीम पहुंच चुकी पाकिस्तान ने दिया फुलप्रूफ सिक्योरिटी का भरोसा हालांकि, कुछ अमेरिकी नेताओं ने सुरक्षा पर चिंता जताई वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए आगमन पर वीजा एयरपोर्ट पर स्पेशल हेल्प डेस्क एंट्री प्रोसेस को बनाया गया आसान क्यों अहम है ये वार्ता? 14 दिन के सीजफायर के बाद पहली बड़ी बातचीत पूरी दुनिया की नजरें इस मीटिंग पर पाकिस्तान के लिए डिप्लोमैटिक टेस्ट
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल (VoA) सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इस फैसले से कतर जाने वाले पाकिस्तानियों को अब पहले से वीजा लेना अनिवार्य हो गया है। पाकिस्तान को क्यों लगा झटका? कतर में स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने अपने नागरिकों को जारी एडवाइजरी में कहा है कि: बिना पूर्व वीजा के कतर पहुंचने पर एंट्री रोकी जा सकती है एयरपोर्ट पर यात्रियों को वापस भेजा भी जा सकता है मौजूदा हालात को देखते हुए यह सुविधा फिलहाल निलंबित है विशेषज्ञ मानते हैं कि क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक संतुलन की कोशिशों के बीच पाकिस्तान की स्थिति कमजोर पड़ती दिख रही है। भारत को मिल रही राहत जहां पाकिस्तान के लिए नियम सख्त हुए हैं, वहीं भारत के साथ कतर के मजबूत संबंधों का असर साफ दिख रहा है। भारतीय नागरिकों के लिए: वीजा ऑन अराइवल सुविधा जारी 30 दिन का फ्री वीजा मिल रहा है जरूरत पड़ने पर वीजा अवधि बढ़ाई भी जा सकती है यह फैसला ऐसे समय में भी बरकरार है जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है। भारतीय यात्रियों के लिए जरूरी शर्तें कतर जाने वाले भारतीयों को कुछ नियमों का पालन करना होगा: पासपोर्ट कम से कम 6 महीने वैध हो रिटर्न या आगे की यात्रा का टिकट होना जरूरी होटल बुकिंग या रहने की व्यवस्था का प्रमाण हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य क्षेत्रीय तनाव का असर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब खाड़ी देशों की नीतियों पर भी दिखने लगा है। कतर का यह फैसला सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों से जुड़ा माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित विश्व जल दिवस से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग उठाई, लेकिन भारत ने स्पष्ट शब्दों में इसे खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि जब तक वह आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संधि की पवित्रता की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना जरूरी है। पाकिस्तान की अपील, भारत का जवाब पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उस कार्यक्रम में उठाया, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित जल और स्वच्छता सुनिश्चित करना था। पाकिस्तान ने खुद को पीड़ित पक्ष के रूप में पेश करते हुए संधि बहाल करने की मांग की। हालांकि, भारत ने इसे भटकाने वाली रणनीति बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने कहा कि उसने हमेशा एक जिम्मेदार ऊपरी-तटीय देश की भूमिका निभाई है, लेकिन जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होती है। भारत ने क्यों निलंबित की संधि गौरतलब है कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि को भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से बताया गया। इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल कूटनीतिक स्तर पर दबाव बनाया, बल्कि जल समझौते को भी निलंबित कर दिया। ‘आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती संधि’ हरीश ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान ने वर्षों से आतंकवाद को एक सरकारी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे हजारों निर्दोष भारतीयों की जान गई। उन्होंने कहा, “हमारे धैर्य और सद्भावना का पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ा। इसलिए भारत को मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।” संधि में बदलाव की जरूरत पर भी उठे सवाल भारत ने यह भी कहा कि पिछले 65 वर्षों में तकनीक, जनसंख्या और पर्यावरण में बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे संधि में संशोधन की आवश्यकता थी। लेकिन पाकिस्तान ने इस पर चर्चा से इनकार कर दिया। भारत का जल प्रबंधन पर जोर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह भी दोहराया कि वह जल प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर गंभीर है। सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ योजना के तहत देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जा चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।