PM Narendra MODI

CJP founder Abhijeet Deepke reacts to Prime Minister Narendra Modi's exam reform video on social media
PM Modi के नए वीडियो पर CJP का तंज, अभिजीत दीपके बोले- 'देश के भविष्य से ज्यादा स्किन दिख रही ब्राइट'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परीक्षा सुधार कानून पर जारी नए वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर सोशल मीडिया के जरिए तंज कसा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए लिखा, "देश के भविष्य से ज्यादा आपकी स्किन चमक रही है।" दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर बहस जारी है। परीक्षा सुधार कानून को लेकर जारी किया था वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (30 जुलाई) को सेल्फी स्टाइल में एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने हाल ही में पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को देश की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनाना है ताकि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके। वीडियो में प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कराने वाले "पेपर माफिया" को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और सख्त कानूनी प्रावधानों के जरिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। CJP लगातार उठा रही है पेपर लीक का मुद्दा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले कई महीनों से परीक्षा पेपर लीक के मामलों को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का कहना है कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। CJP की मांग है कि पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भर्ती परीक्षाओं में जवाबदेही तय की जाए। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री के वीडियो पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। संसद से मिला नए कानून को मंजूरी पेपर लीक की घटनाओं के बाद केंद्र सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 अब संसद से पारित हो चुका है। राज्यसभा ने गुरुवार को ध्वनिमत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी। इससे पहले लोकसभा भी इसे पारित कर चुकी थी। नए कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने या ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई कर युवाओं का विश्वास बहाल करना है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो और उस पर अभिजीत दीपके की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों को लेकर बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर समर्थक परीक्षा सुधार कानून का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और छात्र संगठनों का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिक्रिया
नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री मोदी पर बयान, बोले- "जो खुद अनपढ़ हैं वो पढ़ाई की अहमियत क्या जाने"; बयान पर सियासी बहस तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने शिक्षा और राजनीति को लेकर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि जो व्यक्ति खुद शिक्षा के महत्व को नहीं समझता, वह शिक्षा व्यवस्था को लेकर सही फैसले कैसे ले सकता है। नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को "गंभीरता से नहीं लेते"। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।   शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दे पर रखी राय   नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश में शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।   प्रधानमंत्री मोदी पर की टिप्पणी   अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा और नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की अहमियत वही व्यक्ति बेहतर समझ सकता है जिसने खुद शिक्षा को महत्व दिया हो। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।   बयान पर शुरू हुई राजनीतिक बहस   नसीरुद्दीन शाह के बयान के बाद भाजपा समर्थकों और विपक्षी नेताओं के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा समर्थकों ने इसे राजनीतिक टिप्पणी बताते हुए आलोचना की, जबकि कुछ विपक्षी समर्थकों ने इसे शिक्षा और लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा बताया।   पहले भी राजनीतिक मुद्दों पर बोल चुके हैं नसीरुद्दीन शाह   नसीरुद्दीन शाह पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। वह कई बार सरकार की नीतियों, सामाजिक माहौल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बयान दे चुके हैं। उनके बयानों पर अक्सर चर्चा और विवाद दोनों देखने को मिलते हैं।   शिक्षा और राजनीति पर बहस जारी   नसीरुद्दीन शाह के ताजा बयान ने एक बार फिर शिक्षा, नेतृत्व और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे एक कलाकार की सामाजिक चिंता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे राजनीतिक आरोप के रूप में देख रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
Arvind Kejriwal addressing students during the NEET protest at Jantar Mantar in New Delhi
'मोदी जी के अपने बच्चे नहीं, इसलिए छात्रों का दर्द नहीं समझते'— केजरीवाल का PM पर हमला, बोले- डटे रहो, तानाशाह को झुकना पड़ेगा

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। जंतर-मंतर पहुंचे केजरीवाल ने कहा कि छात्रों के साथ हुई कार्रवाई गलत है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। केजरीवाल ने कहा, "मोदी जी के अपने बच्चे नहीं हैं, इसलिए वह बच्चों का दर्द नहीं समझते। ये सभी हमारे बच्चे हैं। बच्चों को पीटना सही नहीं है।" छात्रों से बोले- डटे रहो, जीत आपकी होगी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं छात्रों से कहना चाहता हूं कि वे डटे रहें। दुनिया के सबसे बड़े तानाशाह को भी जनता के सामने झुकना पड़ता है।" शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की तीन प्रमुख मांगें हैं— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। देश में पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली लागू हो। पेपर लीक की घटनाओं पर स्थायी रोक लगाई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। हिरासत में लिए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद की मांग केजरीवाल ने मंदिर मार्ग और संसद मार्ग थाने का दौरा करने के बाद कहा कि हिरासत में लिए गए छात्रों को लंबे समय से बैठाकर रखा गया है। उन्होंने नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा को पत्र लिखकर मांग की कि प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर की प्रतियां और हिरासत में लिए गए लोगों की सूची तुरंत सार्वजनिक की जाए, ताकि छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सके। AAP ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों को लेकर चिंता जताते हुए केजरीवाल ने कहा कि देश के भविष्य के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बीच आम आदमी पार्टी ने प्रदर्शन से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। पार्टी का कहना है कि इसके जरिए लापता छात्रों का पता लगाने और घायलों तक चिकित्सीय सहायता पहुंचाने में मदद की जाएगी। छात्रों के मुद्दे पर तेज हुई सियासत छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद राजधानी दिल्ली में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
PM Modi Foreign Visit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से तीन देशों के दौरे पर जाएंगे, इंडो-पैसिफिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के छह दिवसीय दौरे पर जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की पुष्टि करते हुए बताया कि दौरे का उद्देश्य हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।   तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से होगी मुलाकात   दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकी और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।   न्यूजीलैंड दौरा रहेगा सबसे खास   यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की आधिकारिक यात्रा होगी। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा, कृषि और लोगों के आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए कई अहम समझौतों पर चर्चा हो सकती है।   व्यापार और निवेश पर रहेगा विशेष जोर   ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष फोकस रहेगा।

anjali kumari जुलाई 4, 2026 0
Iranian President Masoud Pezeshkian invites PM Narendra Modi to attend Ayatollah Ali Khamenei’s state funeral ceremonies.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे पीएम मोदी? ईरान के राष्ट्रपति ने भेजा विशेष निमंत्रण

  तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता रहे Ayatollah Ali Khamenei के अंतिम संस्कार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा है। भारत सरकार की ओर से अब तक इस निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 5 से 9 जुलाई तक होंगे अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई के अंतिम संस्कार से संबंधित धार्मिक और राजकीय कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रमों का आयोजन तेहरान, कोम और मशहद सहित कई प्रमुख शहरों में किया जाएगा। बताया जा रहा है कि 5, 6 और 7 जुलाई को तेहरान और कोम में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित होंगी, जबकि अंतिम और सबसे बड़ा कार्यक्रम 9 जुलाई को मशहद में रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी प्रतिनिधियों के पहुंचने की संभावना है। तीन दशक तक ईरान की राजनीति के केंद्र में रहे खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की राजनीति और शासन व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली नेता रहे। उनकी अगुवाई में ईरान ने कई क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया। रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त सैन्य हमले के दौरान उनकी मृत्यु हुई थी। इसके बाद से देश में राजनीतिक संक्रमण और नई नेतृत्व व्यवस्था को लेकर चर्चाएं जारी हैं। भारत-ईरान संबंधों पर टिकी निगाहें विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं, तो यह भारत और ईरान के संबंधों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जाएगा। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर लंबे समय से रणनीतिक सहयोग रहा है। अंतिम निर्णय भारत सरकार के आधिकारिक कार्यक्रम और कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदला क्षेत्रीय माहौल इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए अंतरिम समझौते के बाद पश्चिम एशिया में तनाव कुछ कम होता दिखाई दे रहा है। समझौते के तहत दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है। होर्मुज स्ट्रेट में फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही समझौते के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही भी फिर से शुरू हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी तेल पर लागू कुछ प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का लाइसेंस जारी किया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। पीएम मोदी की मौजूदगी पर बनी रहेगी नजर अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के इस विशेष निमंत्रण को स्वीकार करते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह हाल के वर्षों में भारत और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्कों में से एक माना जाएगा।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Donald Trump Narendra Modi Meeting
G7 Summit 2026: एवियन में 16 महीने बाद होगी मोदी-ट्रंप की महाबैठक, 'नाविकों की मौत' और टैरिफ विवाद के बीच रिश्तों का 'कड़ा इम्तिहान'

नई दिल्ली, एजेंसियां। फ्रांस के जी-7 मंच पर बुधवार शाम 6:15 बजे भारत और अमेरिका के दिग्गज नेता आमने-सामने होंगे। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच होने वाली इस वार्ता में रक्षा, व्यापार और हालिया कूटनीतिक असहमतियों पर बेबाक चर्चा होने की उम्मीद है।   फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) इस वक्त पूरी दुनिया की कूटनीतिक हलचलों का केंद्र बना हुआ है। इसी वैश्विक मंच के इतर, बुधवार (17 जून 2026) की शाम 6:15 बजे (भारतीय समयानुसार) एक ऐसी द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।   भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद आधिकारिक तौर पर आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे। यह मुलाकात महज एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह उन तमाम असहजताओं और तनावों को दूर करने का एक बड़ा 'टेस्ट' है, जो हाल के महीनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच पनपे हैं।   तनाव के साये में कूटनीतिक संवाद   भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी भले ही मजबूत हो, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस रिश्ते पर गहरा दबाव डाला है। पिछले सप्ताह ओमान के करीब एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी नौसेना की सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी।   माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस संवेदनशील मुद्दे को ट्रंप के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे। इसके अतिरिक्त, एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों में सख्ती, बाजार पहुंच में अड़चनें, रक्षा सौदों में देरी और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के अतिशयोक्तिपूर्ण दावों ने भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता पैदा की है।   व्यापारिक समझौते और तकनीक की बिसात   तनाव के बावजूद, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीदें भी जिंदा हैं। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसने एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने न सिर्फ कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम किया, बल्कि रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए दंडात्मक शुल्कों को भी हटा लिया था।   आज की बैठक में दोनों नेता इसी नींव पर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी खड़ी करने की कोशिश करेंगे। एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन जैसे आधुनिक विषय भी मजबूती से शामिल रहेंगे।   जी-7 का कड़ा रुख: यूक्रेन से लेकर इंडो-पैसिफिक तक मोदी-ट्रंप की यह बैठक उस जी-7 सम्मेलन के बीच हो रही है, जिसने कई वैश्विक मोर्चों पर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सदस्य देशों ने कीव पर हुए उस हालिया विनाशकारी रूसी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई और एक ऐतिहासिक कैथेड्रल को भारी नुकसान पहुंचा। जी-7 ने यूक्रेन की दृढ़ता की सराहना करते हुए अपना अटूट समर्थन दोहराया है।   इसके साथ ही, पूर्वी और दक्षिण चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए नेताओं ने एक 'मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक' की वकालत की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 'चाइना शॉक' का जिक्र करते हुए जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के लिए यूरोप और दुनिया को चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता घटानी होगी, जो आर्थिक संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी है।   पश्चिम एशिया और ईरान पर ऐतिहासिक सहमति   वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी एक अहम विषय होगा। जी-7 के मंच से एक बड़ी राहत की खबर यह भी आई कि सदस्य देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और मध्यस्थों के सहयोग से हुए 'अमेरिका-ईरान समझौते' का जोरदार स्वागत किया है। इस समझौते को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।   अब देखना यह है कि जब प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप वार्ता की मेज पर बैठेंगे, तो क्या वे इन जटिल वैश्विक समीकरणों और द्विपक्षीय मतभेदों को सुलझाकर भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई रफ्तार दे पाएंगे।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Shekhar Suman
'लू में औंधा हो गया कॉकरोच का मुखिया', शेखर सुमन के व्यंग्य ने बटोरी सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   शेखर सुमन ने शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए।   अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।"   शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।"   शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

abhishek singh जून 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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