झाड़ग्राम: पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम जिले में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। बिनपुर थाना क्षेत्र में स्थित सीआईएफ (Counter Insurgency Force) कैंप के पास ड्यूटी पर तैनात एक जवान की बंदूक से कथित तौर पर दुर्घटनावश गोली चल गई, जिसकी चपेट में आकर दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए कोलकाता रेफर किया गया है। काम से लौट रहे थे दोनों मजदूर पुलिस के अनुसार, घायल मजदूरों की पहचान शुभदीप घोष और अमित मंडल के रूप में हुई है। दोनों बीरभूम जिले के दुबराजपुर थाना क्षेत्र के रामचंद्रपुर गांव के रहने वाले हैं और झाड़ग्राम के बिनपुर-1 ब्लॉक स्थित एक बालू खदान में मजदूरी करते हैं। घटना के समय दोनों काम खत्म कर अपने ठिकाने लौट रहे थे। CIF कैंप के पास हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, बेतकुंदरी स्थित दहिजुड़ी CIF कैंप के पास ड्यूटी पर तैनात जवानों ने मजदूरों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान एक जवान की बंदूक से अचानक गोली चल गई। गोली लगने से दोनों मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली चलने की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। दोनों को कोलकाता किया गया रेफर हादसे में शुभदीप घोष के सीने के पिछले हिस्से और बाएं पैर में गोली लगी, जबकि अमित मंडल के बाएं पैर में गोली लगी। दोनों को तत्काल झाड़ग्राम गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कोलकाता रेफर कर दिया गया। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने के बाद झाड़ग्राम जिला पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। जिला पुलिस अधीक्षक मानव सिंगला ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह मामला दुर्घटनावश गोली चलने का प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि घटना की सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं हुई। पुलिस का बयान एसपी मानव सिंगला ने कहा कि फिलहाल इलाके की स्थिति पूरी तरह सामान्य है। पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छतरपुर: बागेश्वर धाम के पीठाधीश धीरेंद्र शास्त्री के छोटे भाई शालिग्राम गर्ग पर जमीन विवाद के दौरान एक व्यक्ति पर गोली चलाने का आरोप लगा है। घटना के बाद छतरपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनका अपने भाई और परिवार से कोई संबंध नहीं है तथा कानून को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने खुद को किया अलग मामला सामने आने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उनका न केवल अपने भाई बल्कि परिवार से भी कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून अपना काम करे और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि उन्हें हर मामले में न घसीटा जाए। जमीन विवाद के दौरान हुई गोलीबारी छतरपुर पुलिस के अनुसार, घटना मंगलवार को राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव में हुई। जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद गोली चलने की घटना हुई। घायल युवक मोतीलाल कुशवाहा ने आरोप लगाया कि शालिग्राम गर्ग और उसके साथ मौजूद अन्य लोगों ने उस पर हमला किया, लाठी से मारपीट की और कई राउंड फायरिंग की। उसका आरोप है कि आरोपी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। घायल का आरोप घायल युवक ने दावा किया कि शालिग्राम गर्ग ने स्वयं उस पर गोली चलाई। उसके अनुसार, हमले के दौरान उसे गोली लगी और लाठी से भी पीटा गया, जिससे उसके कान पर भी चोट आई। उसने आरोप लगाया कि गांव की कई जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने शुरू की जांच छतरपुर के पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को जिला अस्पताल भेजा गया। प्रारंभिक जांच में घायल के शरीर में गोली लगने की पुष्टि हुई है। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चार आरोपियों के खिलाफ FIR पुलिस के अनुसार, मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है। इनमें तीन नामजद आरोपी शामिल हैं, जिनमें शालिग्राम गर्ग का नाम भी है, जबकि एक आरोपी की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र में एक युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि खोए हुए मोबाइल फोन को ओझा-गुनी के जरिए खोजने का झांसा देकर युवती को बुलाया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस पुलिस के अनुसार, पीड़िता भागलपुर जिले के सनोखर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। महिला ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि महागामा थाना क्षेत्र के लौगांय गांव निवासी मो. अकरम और उसके साथियों ने खोया हुआ मोबाइल ढूंढने के नाम पर उसे झांसे में लिया। इसके बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। एसआईटी गठित, पांच आरोपी गिरफ्तार मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (महागामा) के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। जांच के दौरान मुख्य आरोपी मो. अकरम को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर चार अन्य आरोपियों को भी दबोच लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक टोटो और चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। अन्य आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष और तेज गति से पूरी कर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रांची। रांची के वीआईपी इलाके अशोक नगर में गुरुवार तड़के एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। शहर के चर्चित बिल्डर निशित केसरी के आवास पर चोर घुसने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा में तैनात एक बॉडीगार्ड अपनी AK-47 राइफल लेकर जांच करने बाहर निकला। इसी दौरान अचानक राइफल से मिसफायर हो गया और निकली गोली उसी बॉडीगार्ड को जा लगी। घायल सुरक्षा कर्मी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। रात दो बजे मिली थी चोर घुसने की सूचना पुलिस के अनुसार घटना रात करीब दो बजे की है। बिल्डर के आवास में संदिग्ध गतिविधि और चोर के दाखिल होने की सूचना मिलने पर सुरक्षा में तैनात बॉडीगार्ड हथियार लेकर परिसर की जांच करने निकला। गेट के पास पहुंचते ही अचानक AK-47 से गोली चल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रारंभिक जांच में इसे मिसफायर का मामला माना जा रहा है। पुलिस कर रही हर पहलू की जांच रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि घायल बॉडीगार्ड को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गोली किन परिस्थितियों में चली और क्या यह पूरी तरह तकनीकी खराबी या लापरवाही का मामला था। साथ ही, चोर के घर में घुसने की सूचना की भी जांच की जा रही है। घटना ने राजधानी के सबसे सुरक्षित और वीआईपी माने जाने वाले अशोक नगर इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस क्षेत्र को उच्च सुरक्षा वाला माना जाता है, वहां चोरी की आशंका और उसके बाद हुई यह दुर्घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और मामले के हर पहलू की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
Telangana News: तेलंगाना के निर्मल जिले के एक सरकारी डिग्री कॉलेज में सेमेस्टर परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े जाने पर एक छात्र ने कथित तौर पर प्रिंसिपल पर हमला कर दिया। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेमेस्टर परीक्षा के दौरान हुआ विवाद घटना मंगलवार को निर्मल जिले के भैंसा स्थित गोपाल राव पाटिल सरकारी डिग्री कॉलेज में हुई। जानकारी के अनुसार, प्रिंसिपल परीक्षा की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक छात्र को कथित रूप से नकल करते हुए देखा। प्रिंसिपल ने छात्र को नकल करने से रोका और उससे पूछताछ की। आरोप है कि इस बात से नाराज छात्र ने पहले बहस की और फिर कॉलेज परिसर में ही प्रिंसिपल पर शारीरिक हमला कर दिया। घटना से कॉलेज में मची अफरा-तफरी हमले की घटना के बाद कॉलेज परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। फैकल्टी सदस्यों और छात्रों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला। घटना के बाद शिक्षकों की सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन बनाए रखने को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुलिस ने दर्ज किया मामला प्रिंसिपल की शिकायत के आधार पर पुलिस ने छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है और कॉलेज के कर्मचारियों, शिक्षकों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। शिक्षकों की सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद शिक्षण संस्थानों में परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और नकल रोकने के लिए बनाए गए नियमों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा ड्यूटी निभाने वाले स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाने की जरूरत है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुरुलिया: पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के एक स्कूल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि 11वीं की एक छात्रा के तुलसी की माला पहनने और माथे पर तिलक लगाने पर स्कूल प्रबंधन ने आपत्ति जताई और बाद में उसे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) भेज दिया। हालांकि, स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। परिवार ने लगाए गंभीर आरोप छात्रा के परिवार का कहना है कि वह नियमित रूप से तुलसी की माला पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर स्कूल जाती थी। इसी बात पर स्कूल अधिकारियों ने आपत्ति जताई और परिवार को स्कूल बुलाया गया। परिजनों का आरोप है कि बातचीत के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला और अगले ही दिन छात्रा का ट्रांसफर सर्टिफिकेट व्हाट्सऐप के जरिए भेज दिया गया। परिवार ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका पर भी लगाए आरोप छात्रा की मां का आरोप है कि एक शिक्षिका बार-बार उनकी बेटी की तुलसी की माला और तिलक पर आपत्ति जताती थीं तथा माला नहीं पहनने की सलाह देती थीं। स्कूल प्रबंधन ने आरोपों से किया इनकार स्कूल प्रशासन ने कहा कि छात्रा को अब तक आधिकारिक रूप से ट्रांसफर सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। प्रबंधन का दावा है कि तुलसी की माला पहनने पर कोई प्रतिबंध नहीं है और किसी छात्र को धार्मिक प्रतीकों के कारण निशाना नहीं बनाया गया। स्कूल का कहना है कि मामला केवल विद्यालय के अनुशासन और नियमों के पालन से जुड़ा है तथा सभी छात्रों पर समान नियम लागू होते हैं। पुलिस कर रही है जांच छात्रा के परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि विवाद धार्मिक प्रतीकों को लेकर था या स्कूल के अनुशासन से जुड़े किसी अन्य मुद्दे के कारण उत्पन्न हुआ। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
हरिद्वार: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और एसआईटी जांच के बाद सामने आए खुलासों के बीच अब देश के अन्य प्रमुख मंदिरों ने भी सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में हरिद्वार के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर प्रबंधन ने पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते पहनना अनिवार्य कर दिया है। चढ़ावे में पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करना है। अब ड्यूटी के दौरान कोई भी पुजारी जेब वाला कुर्ता नहीं पहन सकेगा। महंत रवींद्र पुरी ने बताई वजह मंदिर के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा, "आजकल मंदिरों को बदनाम करने की कोशिशें हो रही हैं। इसलिए हमने एक विशेष समिति बनाई है। कोई भी पुजारी चढ़ावा अपनी जेब में नहीं रखेगा। मंदिर में आने वाला हर दान जनकल्याण के कार्यों में उपयोग होगा। इसी उद्देश्य से पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते अनिवार्य किए गए हैं।" चढ़ावे की निगरानी करेगी 7 सदस्यीय समिति मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति दान और चढ़ावे की नियमित निगरानी करेगी तथा पूरे सिस्टम की समीक्षा करेगी। गड़बड़ी मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर चढ़ावे में हेरफेर, गबन या अन्य अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित पुजारी या कर्मचारी के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद यह फैसला देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हैदराबाद: तेलंगाना के निजामाबाद जिले में एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, एक महिला ने अपने प्रेमी और एक अन्य सहयोगी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची। आरोप है कि घायल पति को पहले छत से धक्का दिया गया और जब वह बच गया, तो उसके शरीर में कैनुला के जरिए कथित तौर पर टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा इंजेक्ट कर उसकी हत्या कर दी गई। मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। खाड़ी देश से लौटे पति की मौत पर मां को हुआ शक पुलिस के मुताबिक, मृतक की पहचान 35 वर्षीय प्रशांत के रूप में हुई है, जो एक खाड़ी देश में काम करता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब 1 जुलाई को प्रशांत की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उन्हें बेटे की मौत की सूचना तो मिली, लेकिन उसके भारत लौटने या बीमार होने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने बहू पर संदेह जताया। पुलिस जांच में सामने आया प्रेम प्रसंग तकनीकी साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड की जांच में पुलिस को पता चला कि प्रशांत की पत्नी संध्या का अनिल नामक व्यक्ति से कथित प्रेम संबंध था। जांच के अनुसार, दोनों को लगता था कि प्रशांत उनके रिश्ते में बाधा है। इसके बाद उन्होंने वेंकट साई नामक व्यक्ति की मदद से हत्या की योजना बनाई। पहले छत से धक्का, फिर अस्पताल से घर लाकर हत्या पुलिस के अनुसार, 29 जून को वेंकट साई ने प्रशांत को शराब पिलाई और उसे इमारत की छत पर ले जाकर नीचे धक्का दे दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद प्रशांत की जान बच गई। इसके बाद उसे सरकारी और फिर निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में इलाज के दौरान ही घर वापस ले आए। कैनुला के जरिए कथित तौर पर टॉयलेट क्लीनर और दवा दी जांच में आरोप है कि घर लौटने के बाद भी प्रशांत के जीवित रहने पर संध्या ने अस्पताल में लगे कैनुला के जरिए उसके शरीर में कथित तौर पर टॉयलेट क्लीनर और बेहोशी की दवा का मिश्रण इंजेक्ट किया। इसके बाद उसे चारपाई से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। तीनों आरोपी गिरफ्तार पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान संध्या, अनिल और वेंकट साई ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। तीनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले में घरेलू विवाद का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के पिपराही नावाडीह गांव में शराब खरीदने के लिए पत्नी से पैसे नहीं मिलने पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान नंद यादव के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 400 रुपये की मांग पर बढ़ा विवाद जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात नंद यादव शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचने के बाद उसने पत्नी से शराब खरीदने के लिए 400 रुपये मांगे। पत्नी द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि नंद यादव ने कथित तौर पर पत्नी के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वह अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर परिजनों और ग्रामीणों को शक हुआ। जब दरवाजा नहीं खुला तो ग्रामीणों ने उसे तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां नंद यादव गंभीर हालत में मिला। अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित ग्रामीणों ने तत्काल उसे रामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस कर रही मामले की जांच रामगढ़ थाना प्रभारी ओमप्रकाश शाह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पति-पत्नी के बीच पैसे को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद यह घटना हुई। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव, अवसाद या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद परिजन, मित्र या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें। समय पर मदद मिलना जीवन बचा सकता है।
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। एक महिला पर अपने पति की हत्या कर शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाने का आरोप लगा है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी महिला ने खुद ही पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पुलिस ने जांच के दौरान बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां से शव बरामद हुआ। गुमशुदगी की शिकायत ने खोला हत्या का राज पुलिस के मुताबिक, 45 वर्षीय सुरेंद्र शर्मा के लापता होने की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पत्नी रूबी शर्मा के बयानों पर संदेह हुआ। पूछताछ में विरोधाभास मिलने पर पुलिस ने घर की तलाशी ली और बाथरूम का फर्श खुदवाया, जहां सुरेंद्र का शव दबा मिला। शव दबाकर ऊपर डाल दिया था कंक्रीट सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) अमीषा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रूबी शर्मा ने कथित तौर पर पति की हत्या करने के बाद शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दबा दिया और ऊपर से कंक्रीट डालकर सबूत मिटाने की कोशिश की। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए उससे पूछताछ की जा रही है। शराब और घरेलू विवाद की बात सामने आई प्रारंभिक जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने पूछताछ में बताया कि पति की शराब की लत और आए दिन होने वाले घरेलू विवादों से परेशान होकर उसने करीब डेढ़ महीने पहले हत्या की थी। पुलिस अभी इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। पड़ोसियों को पहले से था शक स्थानीय निवासी गौरव दीक्षित ने बताया कि सुरेंद्र शर्मा और उनकी पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होते थे। सुरेंद्र मूल रूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले थे और पिछले नौ वर्षों से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में परिवार के साथ रह रहे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, जब सुरेंद्र कई दिनों तक दिखाई नहीं दिए तो उन्होंने रूबी शर्मा से कई बार उनके बारे में पूछा, लेकिन वह हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर बात टाल देती थी। इसी वजह से आसपास के लोगों को शक होने लगा था। पुलिस कर रही है मामले की विस्तृत जांच पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या के कारणों और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में शुक्रवार देर रात एक बस को रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। कार्यकर्ताओं को शक था कि बस में सवार व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय हैं। हालांकि पुलिस की जांच में यह आशंका गलत साबित हुई और मामला शांत हो गया। शक के आधार पर रोकी गई बस प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सूचना मिलने के बाद बस को रोक लिया और एक यात्री से पूछताछ करते हुए उसके साथ बदसलूकी की। इस दौरान कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित यात्री की पहचान की जांच शुरू की। पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति को अभिषेक बनर्जी का PA समझा जा रहा था, वह सुमित रॉय नहीं बल्कि शरीफुल आलम निकला। पुलिस ने बताया कि शरीफुल आलम पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी रह चुके हैं। वर्तमान में वह दक्षिण दिनाजपुर जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (Information & Cultural Affairs) में कार्यरत हैं। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बस को आगे जाने की अनुमति दे दी और स्थिति सामान्य हो गई। भाजपा ने क्या कहा? गंगारामपुर नगर भाजपा अध्यक्ष वृंदावन घोष ने कहा कि स्थानीय लोगों को संदेह था कि वाहन में अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय मौजूद हैं। उन्होंने कहा, "जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने पुलिस प्रशासन को सूचित किया। जांच के दौरान पता चला कि वह व्यक्ति सुमित रॉय नहीं है, बल्कि पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात अधिकारी रह चुका है। गलतफहमी दूर होने के बाद पुलिस ने वाहन को जाने दिया।" तनाव के बीच हुई घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म है। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों के बीच कई टकराव और विरोध-प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में गंगारामपुर की यह घटना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई है और पहचान की पुष्टि होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।
दुमका। झारखंड के दुमका जिले के सरैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित चीलरा गांव में 15 वर्षीय किशोरी पूजा कुमारी का शव घर के पास स्थित एक कुएं से बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। किशोरी पिछले 18 जून से लापता थी। परिजनों ने काफी तलाश के बाद 20 जून को सरैयाहाट थाना में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कई दिनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। बुधवार को ग्रामीणों ने गांव के समीप स्थित कुएं में शव देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रेम प्रसंग की चर्चा के बीच ऑनर किलिंग की आशंका मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब जांच के दौरान किशोरी के एक युवक के साथ प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। इसके बाद क्षेत्र में ऑनर किलिंग की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिस स्थान से शव बरामद हुआ, वह मृतका के घर और गांव के बेहद करीब है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शव की स्थिति भी संदिग्ध थी और किशोरी की जीभ बाहर निकली हुई थी। इससे दम घुटने या हत्या की आशंका और गहरा गई है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है। हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलने पर एसआई विकेश मेहरा और एएसआई मनोज सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। थाना प्रभारी राजेंद्र यादव ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस प्रेम प्रसंग, पारिवारिक विवाद और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। साथ ही कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक प्रभावशाली नेता हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बाद इलाके की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। डेबरा ब्लॉक पंचायत समिति के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुमायूं कबीर को डेबरा थाना पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस ने अभी तक उनके खिलाफ दर्ज आरोपों का आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया है। शिकायतों के आधार पर हुई कार्रवाई पुलिस के अनुसार, हुमायूं कबीर के खिलाफ कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मामला किस प्रकृति का है और किन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। जिले की राजनीति में बढ़ी हलचल एक प्रभावशाली टीएमसी नेता की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम मेदिनीपुर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय स्तर पर भी इस कार्रवाई को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने कहा- जांच जारी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगी हुई है। आरोपों पर अब भी सस्पेंस हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं। ऐसे में मामले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। आगे क्या? जिले के राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब पुलिस जांच की दिशा और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है। इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों का इंतजार किया जा रहा है।
पुणे, एजेंसियां। पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच आगे बढ़ने के साथ नए खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर पहले से हत्या की पूरी साजिश रची थी। जांच में सामने आया है कि 18 जून को लोहागढ़ किले पर वारदात से ठीक पहले सिया ने पानी पीने के बहाने जमीन पर बैठकर चेतन को पूर्व-निर्धारित इशारा किया। इसके बाद चेतन ने कथित तौर पर केतन को खाई में धक्का दे दिया। पुलिस का मानना है कि यह इशारा इसलिए किया गया ताकि गिरते समय केतन सिया का सहारा न पकड़ सके। रिहर्सल, स्कूटर और डिजिटल सबूतों पर जांच पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले दोनों आरोपियों ने पुणे के एक कैफे में मुलाकात कर हत्या की योजना बनाई थी। सीसीटीवी फुटेज से इस मुलाकात की पुष्टि हुई है। पुलिस का दावा है कि वारदात से पहले दोनों ने इसकी रिहर्सल भी की थी, हालांकि उस स्थान की तलाश जारी है। वहीं चेतन ने पुणे से करीब 100 किलोमीटर दूर लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए कार के बजाय स्कूटर का इस्तेमाल किया, ताकि टोल प्लाजा से बचा जा सके और आवाजाही पर कम संदेह हो। सीक्रेट कॉल और डिलीट चैट से खुल सकते हैं राज फॉरेंसिक जांच में पुलिस को पता चला है कि घटना से करीब 34 मिनट पहले सिया ने चेतन को फोन किया था। जांच एजेंसियों को शक है कि इस कॉल में उसने अपनी सटीक लोकेशन और आसपास पर्यटकों की स्थिति की जानकारी दी थी। इसके अलावा दोनों आरोपियों ने व्हाट्सएप चैट, इंस्टाग्राम संदेश और वॉयस नोट्स समेत कई डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट कर दिए थे। अब साइबर विशेषज्ञ इन डिलीट डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं, जिन्हें पुलिस इस मामले के सबसे अहम सबूतों में से एक मान रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि 14 जून को केतन की हत्या की पहली कोशिश नाकाम रही थी, जबकि 18 जून को आरोपियों ने दूसरी बार योजना को अंजाम दिया।
कोलकाता: कोलकाता के चर्चित तारातला गोदाम शेड हादसे में जांच तेज हो गई है। गुरुवार को पुलिस ने पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व ओएसडी (Officer on Special Duty) कालीचरण बनर्जी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। पुलिस फिलहाल कालीचरण बनर्जी से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विवादित भवन योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद हुई कार्रवाई गुरुवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तारातला हादसे का मुद्दा उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यदि कालीचरण बनर्जी से पूछताछ की जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा। इसके कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने कालीचरण बनर्जी को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। निर्माण योजना की मंजूरी पर उठे सवाल जांच का केंद्र उस भवन की स्वीकृति प्रक्रिया है, जिसके ढहने से यह हादसा हुआ। आरोप है कि कालीचरण बनर्जी की मंजूरी के बिना कोलकाता नगर निगम (KMC) में कोई भी निर्माण योजना आगे नहीं बढ़ती थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि संबंधित भवन की योजना किन परिस्थितियों में मंजूर की गई और क्या नियमों की अनदेखी की गई थी। फिरहाद हकीम पर भी लगे आरोप विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी ने कुछ दस्तावेज लहराते हुए दावा किया कि भवन की योजना पर तत्कालीन मेयर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उनका आरोप है कि संरचनात्मक खामियों के बावजूद परियोजना को मंजूरी दी गई। इन आरोपों पर फिरहाद हकीम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तृणमूल ने आरोपों को बताया राजनीतिक तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कालीचरण बनर्जी को लेकर लगाए जा रहे दावे तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए नाम पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी दस्तावेजों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तारातला हादसे को लेकर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल जारी है, जबकि इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी लगातार गरमाती जा रही है।
पुणे, एजेंसियां। महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस में जांच के दौरान एक नया मोड़ सामने निकलकर आया है। पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी अब एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। दोनों के बयानों में विरोधाभास आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। पूछताछ में बदले दोनों आरोपियों के बयान पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सिया गोयल ने दावा किया कि पूरी योजना चेतन चौधरी ने बनाई थी, जबकि चेतन ने आरोप लगाया कि हत्या की साजिश सिया ने रची और उसने केवल उसके कहने पर उसका साथ दिया। दोनों के अलग-अलग दावों के कारण जांच एजेंसियां अब डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों का मिलान कर रही हैं। SIT जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा में इस केस की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि SIT पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और विस्तृत जांच करेगी। प्री-वेडिंग वीडियो आया सामने इस बीच सोशल मीडिया पर केतन अग्रवाल और सिया गोयल का एक प्री-वेडिंग वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में दोनों शादी की तैयारियों के दौरान खुश नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। सिया की मां की भावुक प्रतिक्रिया सिया गोयल की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि उनकी बेटी अदालत में दोषी साबित होती है तो उसे कानून के तहत सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनका यह बयान पूरे मामले में नया भावनात्मक पहलू जोड़ रहा है। पुलिस जुटा रही सबूत पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि हत्या की साजिश किसने रची और वारदात में किसकी क्या भूमिका थी।
गढ़वा। गढ़वा थाना क्षेत्र के सुखबाना गांव में 13 वर्षीय छात्रा का शव तालाब से मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। छात्रा स्कूल से घर लौटने के बाद रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। दो दिन बाद शनिवार सुबह उसका शव तालाब में मिलने से हत्या की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्कूल से लौटने के बाद हो गई थी लापता मृतका की पहचान मेराल थाना क्षेत्र के दलेली गांव निवासी खुशबू कुमारी (13) के रूप में हुई है। उसके पिता बजरंगी साह गढ़वा शहर में मजदूरी करते हैं और सुखबाना गांव में किराये के मकान में परिवार के साथ रहते हैं। खुशबू शहर के शालीग्राम अग्रवाल मध्य विद्यालय में पढ़ती थी। परिजनों के अनुसार, गुरुवार को सुबह करीब साढ़े 11 बजे खुशबू स्कूल से घर लौटी थी। उसने अपना स्कूल बैग घर में रखा, लेकिन इसके बाद वह कहीं चली गई। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था। शाम तक उसके घर नहीं लौटने पर परिवार ने आसपास तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। तालाब में मिला शव, गले में था दुपट्टा शनिवार सुबह ग्रामीणों ने सुखबाना गांव के एक तालाब में शव तैरता देखा और इसकी सूचना पुलिस व परिजनों को दी। मौके पर पहुंचे परिवार ने शव की पहचान खुशबू के रूप में की। शव को बाहर निकालने पर उसके गले में दुपट्टा कसकर लिपटा मिला, जिससे गला घोंटकर हत्या किए जाने की आशंका और गहरा गई। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हत्या की आशंका, जांच में जुटी पुलिस सूचना मिलते ही गढ़वा थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि स्कूल से लौटने के बाद खुशबू कहां गई, किसके संपर्क में थी और किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
रांची। रांची के कोकर खोरहाटोली से 9 मई को लापता हुई 18 माह की मासूम आदिति पांडेय का 36 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने से परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। रविवार को भारी बारिश के बावजूद परिजन और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और कोकर चौक जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में आदिति के पोस्टर और कटआउट लेकर नारेबाजी की तथा बच्ची को जल्द से जल्द सकुशल बरामद करने की मांग की। बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन कोकर चौक पर हुए प्रदर्शन के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलने पर सदर थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों को समझाकर जाम हटाने का प्रयास किया। हालांकि परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने जल्द परिणाम नहीं मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। परिजनों ने जताई अपहरण की आशंका आदिति के परिवार का कहना है कि बच्ची किसी नाले में नहीं गिरी थी, बल्कि उसका अपहरण किया गया है। उनका आरोप है कि पुलिस अब तक मामले की गंभीरता के अनुरूप कार्रवाई नहीं कर सकी है। परिजनों का कहना है कि 36 दिन बीत जाने के बावजूद जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। एक लाख के इनाम के बावजूद नहीं मिला सुराग आदिति की तलाश के लिए रांची पुलिस ने उसके बारे में सूचना देने वाले को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी। इसके अलावा पुलिस, एनडीआरएफ और नगर निगम की टीम ने खोरहाटोली से नामकुम तक नाले में व्यापक खोज अभियान भी चलाया। तलाशी के दौरान कुछ हड्डियां बरामद हुई थीं, जिन्हें शुरुआती जांच में किसी जानवर की हड्डियां माना गया। अंतिम पुष्टि के लिए उन्हें डीएनए जांच के लिए भेजा गया है, लेकिन रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। गौरतलब है कि 9 मई की शाम आदिति अपने घर के बाहर खेल रही थी। कुछ देर बाद उसकी मां बाहर आईं तो बच्ची वहां नहीं थी। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला, जिसके बाद पिता मनीष पांडेय ने सदर थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस की जांच जारी है, लेकिन 36 दिन बाद भी आदिति का कोई सुराग नहीं मिलने से परिवार की चिंता और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
पलामू। झारखंड के पलामू जिले के पांडू थाना क्षेत्र में 15 दिनों से लापता महिला का कंकाल जंगल से मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मृतका की पहचान भटवलिया गांव निवासी सुनीता देवी के रूप में हुई है, जो 29 मई को जंगल में लकड़ी चुनने गई थीं और उसके बाद घर वापस नहीं लौटी थीं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। लकड़ी चुनने गई थी, फिर नहीं लौटी घर जानकारी के अनुसार, सुनीता देवी अक्सर हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के लोहबंधा-माहूर जंगल में लकड़ी चुनने जाती थीं। 29 मई को भी वह रोज की तरह जंगल गई थीं, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। मवेशी चराने गए ग्रामीणों को मिली लाश शुक्रवार को पांडू और हुसैनाबाद थाना क्षेत्रों की सीमा से लगे जंगल में कुछ ग्रामीण मवेशी चराने पहुंचे। इस दौरान उन्हें इलाके से तेज दुर्गंध आने का एहसास हुआ। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां एक महिला का कंकाल पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पांडू थाना पुलिस और मृतका के परिजन घटनास्थल पर पहुंचे। कपड़ों के आधार पर हुई पहचान परिजनों ने शव के पास मिले कपड़ों के आधार पर महिला की पहचान सुनीता देवी के रूप में की। बिश्रामपुर के एसडीपीओ चिरंजीवी कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया कपड़ों के आधार पर पहचान की गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस परिजनों के आवेदन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी और सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। मेदिनीनगर में ट्रेन की चपेट में आने से महिला की मौत उधर, मेदिनीनगर टाउन थाना क्षेत्र के शांतिपुरी इलाके में एक अन्य हादसे में लक्ष्मी देवी नामक महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वह छतरपुर थाना क्षेत्र के खाटीन गांव की रहने वाली थीं और अपनी बेटी से मिलने मेदिनीनगर जा रही थीं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक बेहद सुनियोजित और क्रूर त्रिस्तरीय मानव तस्करी यानी थ्री-टियर ट्रैफिकिंग नेटवर्क के निशाने पर हैं। यह नेटवर्क केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिस्टम के रूप में काम करता है, जो गांवों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर, धोखे से या दबाव में लेकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचाता है। वहां उन्हें घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या जबरन विवाह जैसे अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है। हालिया आंकड़े इस भयावह सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि बिहार अब देश के प्रमुख “सोर्स स्टेट” में शामिल हो चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े: बिहार में गुमशुदगी का बढ़ता संकट बिहार में हर साल हजारों बच्चे लापता हो रहे हैं। यहां हर वर्ष औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 14,699 तक पहुंच गया। किशोरियां सबसे अधिक निशाने पर गायब होने वाले कुल बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत संख्या 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की है। 2023 के आंकड़े और भी चिंताजनक साल 2023 में कुल 12,299 लापता बच्चों में से लगभग 75 प्रतिशत केवल लड़कियां थीं, यानी हर चार में से तीन बच्चियां थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़े पिछले दो वर्षों में पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर हजारों बेटियों को बचाया है। 2024-25 में 1,970 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और 2025-26 में 1,492 लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। कैसे काम करता है त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क यह पूरा सिंडिकेट तीन अलग-अलग स्तरों पर बेहद संगठित तरीके से काम करता है। लेवल-1: लोकल ट्रैपर्स (स्थानीय एजेंट) गांवों में स्थानीय युवाओं को एजेंट बनाकर लड़कियों को निशाना बनाया जाता है। दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है। 1 से 2 महीने के भीतर टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। परिवार से दूर कर भरोसे में लेकर लड़कियों को गांव से बाहर निकालना होता है। लेवल-2: ट्रांजिट एजेंट (परिवहन गिरोह) जैसे ही लड़की गांव से बाहर निकलती है, उसे दूसरे नेटवर्क को सौंप दिया जाता है। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर हैंडओवर कर दिया जाता है। फिर उन्हें नशा देकर या धमकी देकर नियंत्रण में रखा जाता है। इसके बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है। लेवल-3: खरीद-बिक्री करने वाला नेटवर्कः महानगरों में यह अंतिम और सबसे खतरनाक स्तर सक्रिय होता है। लड़कियों को अज्ञात स्थानों पर कैद रखा जाता है एवं मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है। फिर पहचान मिटाकर जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेच दिया जाता है। हाल की घटनाएं: कैसे रची गई तस्करी की साजिशः केस-1: हैदराबाद कनेक्शन रूपा (बदला हुआ नाम) साहेबगंज की 19 वर्षीय रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने घर से निकली थी। सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया। केस-2: सिकंदराबाद तक अपहरणः प्रीति (बदला हुआ नाम) कोचस की 15 वर्षीय छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गयी। दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया। नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया। बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ। केस-3: मोबाइल नंबर का जालः संजना (बदला हुआ नाम) मोतिहारी के पिपरा की 18 वर्षीय संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गयी। वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी करायी गयी। जबरन शादी की तैयारी थी, पर पुलिस ने उसे बचा लिया। केस-4: कोलकाता में बेचने की कोशिशः गोपालगंज के महम्मदपुर की 22 वर्षीय रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी। इसके बाद नहीं लौटी। आरोपी उसे शादी व नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी। 15 दिन बाद बरामद हुई। केस-5: हैदराबाद से रेस्क्यूः सीवान जामो बाजार की 21 वर्षीय रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गयी। मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया। हैदराबाद-सिकंदराबाद से रेस्क्यू की गयी 6 लड़किया पिछले छह माह में सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही छह से अधिक लड़कियों को बराबद किया गया है। ये लड़कियां बिहार के विभिन्न जिलों से आयी थीं। उन्हें शादी या स्थायी नौकरी देने का झांसा दिया गया था। पहले उन्हें 12-12 घंटे का काम दिया गया और बाद में शादी के लिए बेचने की तैयारी की जा रही थी।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना के दानापुर थाना क्षेत्र स्थित ताराचक इलाके में रविवार देर रात आपसी रंजिश को लेकर हुई गोलीबारी ने एक किशोर की जान ले ली, जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है। मृतक की पहचान 16 वर्षीय नितिन कुमार के रूप में हुई है, जो बिहटा के मुस्तफापुर का रहने वाला था। वह अपनी मां के साथ दानापुर स्थित ननिहाल में किराये के मकान में रहता था। परिजनों के अनुसार, बदमाशों ने घर से कुछ दूरी पर नितिन को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दो अन्य लोग भी हुए घायल गोलीबारी में आनंद बाजार निवासी 68 वर्षीय विजय कुमार और सन्नी कुमार भी घायल हो गए। विजय कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया, जबकि सन्नी कुमार का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। दोनों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुबह के विवाद ने शाम को लिया हिंसक रूप पुलिस के अनुसार, दोनों गुटों के बीच सुबह भी मारपीट हुई थी। पुरानी दुश्मनी और तनाव के कारण शाम होते-होते विवाद और बढ़ गया तथा दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग हुई, जिसमें नितिन की जान चली गई। घटनास्थल से मिले कई अहम साक्ष्य पुलिस ने मौके से आठ खोखे, शराब की बोतलें, लाठी और लोहे की रॉड बरामद की हैं। बरामद सामग्री से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पहले से टकराव की तैयारी में थे। घटना के बाद एफएसएल टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया है। एसआईटी का गठन, आरोपियों की तलाश जारी मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। सिटी एसपी पश्चिमी ने बताया कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। वहीं बेटे की मौत से नितिन की मां सदमे में हैं। परिवार का कहना है कि एक साल पहले सड़क दुर्घटना में बड़े बेटे की भी मौत हो चुकी थी और अब नितिन के निधन से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।