Political Controversy

Ram Mandir Donation
राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का हमला, बोले- ‘महाकाल मंदिर में भी हो रही चंदा चोरी’

भोपाल, एजेंसियां। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा संग्रह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कार्यक्रम में शामिल हुए दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि चंदे में गड़बड़ी हुई है और इसे "आस्था के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और अब इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे।   'आस्था के साथ हुई चोरी, कोर्ट जाऊंगा' दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है, क्योंकि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल धन की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी का मामला है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घरों और मंदिरों के बाहर "चंदा चोरों से सावधान" जैसे बैनर लगाएं।   महाकाल मंदिर और बीजेपी पर लगाए आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भी चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में महाकाल मंदिर की जमीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था को आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है।   राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से चंदा जुटाया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि वह इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे।   हालांकि, दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी या संबंधित मंदिर ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद आगे और तेज होने की संभावना है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Tamil Nadu Politics
तमिलनाडु में सियासी बवाल, TVK विधायक को 35 करोड़ के ऑफर का दावा

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के विधायक एन. इलैयाराजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी छोड़ने और सरकार के खिलाफ जाने के लिए 35 करोड़ रुपये का लालच दिया गया। विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के भाई अशोक कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।   विधायक का आरोप- पार्टी बदलने के लिए मिला ऑफर एन. इलैयाराजा का आरोप है कि उन्हें कई बार संपर्क कर सत्तारूढ़ दल छोड़ने के लिए दबाव बनाया गया। शिकायत में कहा गया है कि सरकार गिराने की कथित साजिश के तहत उन्हें 35 करोड़ रुपये की पेशकश की गई और इनकार करने पर धमकियां भी दी गईं। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।   जांच में सामने आए नए दावे पुलिस के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में शामिल एक आरोपी नरेश ने कथित तौर पर बताया कि उसने विधायक से संपर्क करने से पहले चेन्नई में अशोक कुमार से मुलाकात की थी। उसने यह भी दावा किया कि उसने अशोक कुमार और वी. सेंथिल बालाजी के कहने पर विधायक से संपर्क किया था। इन्हीं बयानों के आधार पर पुलिस ने अशोक कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।   राजनीतिक माहौल पहले से गर्म यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद बनी गठबंधन सरकार की स्थिरता को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। TVK को चुनाव में 108 सीटें मिली थीं और कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से पार्टी ने सरकार बनाई थी। दूसरी ओर, डीएमके लगातार सरकार के बहुमत और स्थिरता पर सवाल उठाती रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Vijay Political Party
'5 साल नहीं चलेगी विजय सरकार', स्टालिन का बड़ा दावा- 3 से 6 महीने में हो सकता है सत्ता परिवर्तन

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि मौजूदा सरकार अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अगले तीन से छह महीने के भीतर राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं और मध्यावधि चुनाव की नौबत भी आ सकती है।   चेन्नई में आयोजित डीएमके के एक कार्यक्रम में, जहां विभिन्न दलों के पांच हजार से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, स्टालिन ने कहा कि टीवीके अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। उनके अनुसार, सरकार उन राजनीतिक दलों के समर्थन से चल रही है जो पहले डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की स्थिति कमजोर है और उसका भविष्य सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है।   स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनीतिक हालात कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा और जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पांच साल इंतजार करने के बजाय संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को अभी से मजबूत करना चाहिए।   स्टालिन का यह बयान  स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विधानसभा चुनाव में बहुमत से पीछे रहने के बाद टीवीके ने कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से सरकार बनाई थी। हाल ही में वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके ने भी डीएमके गठबंधन से अलग होकर टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे राज्य की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Posters describing Rahul Gandhi as "missing" displayed in Delhi, sparking a political controversy between the BJP and Congress.
दिल्ली में राहुल गांधी को लेकर लगे 'गुमशुदा' पोस्टरों पर सियासत तेज, बीजेपी का हमला

  नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर लगाए गए 'गुमशुदा' पोस्टरों ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है। शहर के कई इलाकों में लगाए गए इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ उन्हें "गुमशुदा" बताया गया है और उनकी विदेश यात्राओं को लेकर तंज कसा गया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पोस्टरों में क्या लिखा है? दिल्ली में लगाए गए पोस्टरों में बड़े अक्षरों में "गुमशुदा" लिखा गया है। पोस्टर में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ लिखा गया है: नाम: राहुल गांधी पहचान: हमेशा विदेश में पाए जाते हैं। किसी पब में हो सकते हैं, किसी बीच पर हो सकते हैं। तलाश जारी है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उन्हें "पर्यटन का नेता" और "लापता राहुल बाबा" बताया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में बिना छुट्टी लिए लगातार काम किया है, जबकि राहुल गांधी महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसरों पर अक्सर विदेश यात्राओं पर चले जाते हैं। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जब संसद, देश या उनकी पार्टी को उनकी जरूरत होती है, तब राहुल गांधी विदेश में होते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का खर्च किस स्रोत से उठाया जाता है। अर्जुन राम मेघवाल ने भी किया हमला केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी पोस्टरों के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का तरीका "झूठ बोलो और फिर भाग जाओ" जैसा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई बार ऐसे मुद्दों पर राजनीति करते हैं, जिनसे देश में भ्रम और अशांति फैलती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नीति या परीक्षा व्यवस्था पर सुझाव हैं तो उन्हें रचनात्मक तरीके से रखा जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया पोस्टर विवाद पर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बना रह सकता है। दिल्ली में लगे इन पोस्टरों ने एक बार फिर राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Rameshwar Oraon ED Summons
रामेश्वर उरांव को ईडी समन पर गरमाई सियासत, बंधु तिर्की का बीजेपी पर तीखा हमला

रांची। झारखंड के कथित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया है। झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षामंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए कर रही है।   'समन से बाल भी बांका नहीं होगा' बंधु तिर्की ने कहा कि डॉ. रामेश्वर उरांव एक सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं और ईडी के समन से उनका "बाल भी बांका नहीं होगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। तिर्की ने दावा किया कि उन्हें भी पहले बिना ठोस तथ्यों के मामलों में फंसाकर जनता के बीच गलत संदेश देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता भाजपा की कार्यशैली और राजनीतिक रणनीति को अच्छी तरह समझती है।   भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप पूर्व मंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी के कई नेताओं पर भी भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उन मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता भानु प्रताप शाही का नाम लेते हुए कहा कि जिन पर पहले घोटालों के आरोप लगे, वे भाजपा में शामिल होने के बाद "पाक-साफ" हो गए। बंधु तिर्की ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में भ्रष्टाचार के पैसे से जमीन खरीदने और संपत्ति बनाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन उन पर कोई जांच नहीं हो रही।   उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि ईडी या अन्य एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। तिर्की ने कहा कि 2 अगस्त को रांची में होने वाला आदिवासी महाजुटान भाजपा को जनता की वास्तविक ताकत का एहसास करा देगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इस कार्रवाई से डरने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Youth Congress workers in Varanasi display Rahul Gandhi as Lord Parashuram during his 56th birthday celebrations on the Ganga ghat.
राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने पर विवाद, BJP बोली- यह हिंदू धर्म का अपमान

  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के 56वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किया गया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। वाराणसी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन वाराणसी में गंगा घाट पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस दौरान उनकी एक तस्वीर प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी के एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति दिखाई गई। कार्यकर्ताओं ने तस्वीर पर दूध अर्पित कर जन्मदिन मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। BJP ने जताई कड़ी आपत्ति भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित करना हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हिंदू परंपराओं का लगातार अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय-समय पर हिंदू परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कई अवसरों पर हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संविधान और समानता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था। राजनीतिक बहस तेज राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में विभिन्न दल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Falta violence case
फाल्टा हिंसा मामले में टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने 16 जून को फाल्टा थाना क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसके दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस पर पथराव तथा हमले की घटनाएं सामने आईं।   पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक थाना परिसर के आसपास जमा हो गए थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बचने के लिए पास के तालाब में भी कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।   भारत-नेपाल सीमा से पकड़ा गया था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को इससे पहले भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कम से कम सात आपराधिक केस दर्ज बताए जाते हैं। वह फाल्टा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।   हिंसा मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियां फाल्टा हिंसा मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने थाने का घेराव कर हिरासत में बंद जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला भी किया गया।   इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शुवेंदु अधिकारी  ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले के संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 12 पुलिस हिरासत और 13 न्यायिक हिरासत में हैं।

anjali kumari जून 20, 2026 0
Abhishek Banerjee associate
भूमि घोटाले में अभिषेक बनर्जी के करीबी पर वारंट, हैदराबाद में कास्टिंग एजेंट पर केस

कोलकाता, एजेंसियां। देश के अलग-अलग राज्यों से सोमवार को कई अहम घटनाएं सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल के कथित भूमि घोटाले में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय के खिलाफ अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं, हैदराबाद में एक फिल्म अभिनेत्री की शिकायत पर कास्टिंग एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर, राजस्थान के अजमेर में औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई।   भूमि घोटाले में सुमित रॉय पर गिरफ्तारी वारंट पश्चिम बंगाल के कथित भूमि घोटाले की जांच के दौरान अदालत ने सुमित रॉय के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस का कहना है कि रॉय लगातार जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और कई प्रयासों के बावजूद उनका पता नहीं चल सका। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार पूर्व मेदिनीपुर विधायक सुजय हाजरा से पूछताछ के दौरान सुमित रॉय का नाम सामने आया था। जांच एजेंसियां अब कथित भूमि सौदों और वित्तीय लेन-देन में उनकी भूमिका की जांच कर रही हैं।   हैदराबाद में कास्टिंग एजेंट पर मामला दर्ज हैदराबाद में एक 26 वर्षीय फिल्म अभिनेत्री की शिकायत पर पुलिस ने एक कास्टिंग एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अभिनेत्री का आरोप है कि फिल्म में काम दिलाने के बाद एजेंट ने उनका 90 हजार रुपये का पारिश्रमिक नहीं दिया। शिकायत के मुताबिक, भुगतान के बहाने आरोपी ने उन्हें एक स्थान पर बुलाया और कार में कथित तौर पर उनके साथ बदसलूकी की। घटना जनवरी 2026 की बताई जा रही है, जबकि शिकायत 12 जून को दर्ज कराई गई। बंजारा हिल्स पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी को जल्द पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।   अजमेर के औद्योगिक क्षेत्र में भीषण आग राजस्थान के अजमेर शहर के मखुपुरा औद्योगिक क्षेत्र में रविवार देर रात भीषण आग लग गई। आग की लपटों से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। फायर ऑफिसर गौरव तंवर ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है और मामले की जांच जारी है।

anjali kumari जून 15, 2026 0
Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस की छापेमारी

कोलकता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार तड़के बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी थी। पुलिस का उद्देश्य उनके कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की तलाश करना बताया गया, जो कथित तौर पर फरार हैं।   तड़के 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, टीम सुबह करीब 3 बजे आवास पर पहुंची। शुरुआत में दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन जवाब न मिलने पर घंटों इंतजार किया गया। इसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की मदद से मुख्य द्वार का ताला तोड़कर पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, महिला कर्मी और केंद्रीय बल तैनात रहे।   टीएमसी का विरोध और आरोप टीएमसी ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने जबरन ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और तलाशी ली। छापेमारी के दौरान चार घंटे से अधिक समय तक कार्रवाई चली और सुबह तक सुरक्षा बल परिसर में मौजूद रहे।   ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत अपने आवास से अभिषेक बनर्जी के घर पहुंचीं। कुछ देर बाद संयुक्त टीम वहां से रवाना हो गई।   लगातार जांच एजेंसियों के समन अभिषेक बनर्जी को आने वाले दिनों में कई जांच एजेंसियों के सामने पेश होना है। 14 से 16 जून के बीच उन्हें विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले, शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह घटना राज्य की सियासत में नए विवाद और तनाव का कारण बन गई है।

anjali kumari जून 13, 2026 0
TMC leader Abhishek Banerjee faces CID notice in alleged forged signature investigation in West Bengal.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन, CID ने कोलकाता आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसी की टीम ने उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, CID एक ऐसे मामले की जांच कर रही है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक दस्तावेज पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज में कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर रही है। क्या है पूरा मामला? विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक दस्तावेज को लेकर सवाल उठे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद मामले की शिकायत जांच एजेंसियों तक पहुंची और CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। CID ने जारी किया तीसरा नोटिस जांच एजेंसी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने के बाद अब उन्हें तीसरा नोटिस जारी किया गया है। CID अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस नए समन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विवाद भी तेज मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। आगे क्या? अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के समक्ष कब पेश होते हैं और CID की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Justice Markandey Katju and Mahua Moitra amid social media debate over the reported Ishq Karo Party.
महुआ मोइत्रा को ‘इश्क करो पार्टी’ में शामिल होने का ऑफर? जस्टिस काटजू और TMC सांसद को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

  नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश Markandey Katju द्वारा कथित तौर पर शुरू की गई ‘इश्क करो पार्टी’ को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद Mahua Moitra का नाम भी चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल दावों को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ‘इश्क करो पार्टी’ को लेकर क्या है दावा? सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने ‘इश्क करो पार्टी’ (IKP) नामक एक राजनीतिक मंच की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि इस मंच का उद्देश्य समाज में बढ़ती नफरत और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ प्रेम, सामाजिक एकता और संवाद को बढ़ावा देना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, काटजू ने लोगों से जाति, धर्म और क्षेत्रीय विभाजन से ऊपर उठकर सामाजिक सद्भाव के लिए काम करने की अपील की है। महुआ मोइत्रा का नाम क्यों आया चर्चा में? कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि काटजू ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को भी इस नए राजनीतिक मंच से जुड़ने का न्योता दिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्होंने पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और टीएमसी के भीतर चल रही कथित चुनौतियों का जिक्र किया। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित जवाब वायरल दावों में यह भी कहा गया कि महुआ मोइत्रा ने जस्टिस काटजू की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कथित जवाब में उन्होंने अपने राजनीतिक रुख और विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि संबंधित पोस्ट या बयान दोनों पक्षों के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इन दावों की सत्यता को लेकर सवाल बने हुए हैं। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार राजनीतिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा जरूर है, लेकिन अभी तक न तो जस्टिस मार्कंडेय काटजू की ओर से और न ही महुआ मोइत्रा की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है, जिससे वायरल दावों की पुष्टि हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में राजनीतिक हस्तियों से जुड़े कई दावे तेजी से वायरल हो जाते हैं, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। क्यों चर्चा में है मामला? ‘इश्क करो पार्टी’ नाम की वजह से सोशल मीडिया पर बहस तेज। महुआ मोइत्रा का नाम जुड़ने से राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ी। वायरल दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं। दोनों पक्षों की ओर से स्पष्ट बयान आने का इंतजार। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित है तथा वायरल दावों की सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Nathwani nomination
नाथवानी के नामांकन पर घमासान, कांग्रेस का प्रदर्शन

रांची। राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच को लेकर झारखंड विधानसभा परिसर में बुधवार को राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। सुबह 11 बजे के बाद विधानसभा के प्रभारी सचिव एवं रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार के कार्यालय कक्ष में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र की वैधता को लेकर सुनवाई शुरू हो गई है। इसे लेकर विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर नेताओं तथा समर्थकों की भारी भीड़ जुटी हुई है। लेकिन, इस प्रदर्शन में झामुमो कहीं नजर नहीं आ रहा है। जबकि, झारखंड में झामुमो इंडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है।  कांग्रेस कर रही नामांकन रद्द करने की मांग विधानसभा के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता परिमल नाथवानी का नामांकन रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय कक्ष के बाहर कांग्रेस विधायकों और नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा, उनके प्रस्तावक नमन बिक्सल कोंगाड़ी, विधायक राजेश कच्छप, जेएससीए अध्यक्ष अजय नाथ शाहदेव समेत कई वरिष्ठ नेता मौके पर मौजूद हैं। कांग्रेस की ओर से नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील भी पहुंचे नामांकन पत्र की सुनवाई को लेकर कांग्रेस ने अपनी कानूनी तैयारी भी मजबूत की है। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वकील को विशेष रूप से रांची बुलाया गया है, जो सुनवाई के दौरान कांग्रेस का पक्ष रखेंगे। दूसरी ओर परिमल नाथवानी की तरफ से भाजपा विधायक नवीन जायसवाल समेत कई वरिष्ठ नेता रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के पास मौजूद हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नामांकन पत्रों की जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर क्या फैसला लेते हैं।

anjali kumari जून 10, 2026 0
BJP leader Kailash Vijayvargiya speaks on Meenakshi Natarajan nomination controversy before Rajya Sabha polls.
कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान: “हमें कांग्रेस के लोगों ने ही दी जानकारी”, मीनाक्षी नटराजन नामांकन रद्द पर बढ़ा सियासी विवाद

  मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस बीच भाजपा नेता और राज्य सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। उन्होंने संकेत दिया कि नामांकन में कथित खामियों की जानकारी भाजपा को कांग्रेस के ही भीतर से मिली हो सकती है। “जानकारी हमें तेलंगाना से मिली”—कैलाश विजयवर्गीय कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नामांकन से जुड़ी अहम जानकारियां तेलंगाना से सामने आईं, जहां कांग्रेस की सरकार है। उन्होंने कहा, “हमें तेलंगाना से पेपर्स मिले। वहीं से जानकारी मिली कि नामांकन पत्र में कुछ त्रुटियां हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस के लोग ही यह जानकारी साझा कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति और आपसी मतभेद भी सामने आते हैं। कांग्रेस का पलटवार: लोकतंत्र पर हमला कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि नामांकन रद्द करना राजनीतिक दबाव का परिणाम है और यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस फैसले पर आपत्ति दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मीनाक्षी नटराजन का आरोप: “लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है” मीनाक्षी नटराजन ने भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारा, तभी से राजनीतिक दबाव बढ़ने लगा था। भाजपा का दावा: प्रक्रिया के तहत हुआ फैसला भाजपा का कहना है कि नामांकन रद्द होना पूरी तरह चुनावी प्रक्रिया और नियमों के अनुसार हुआ है। पार्टी नेताओं ने कहा कि दस्तावेजों में कथित त्रुटियों को लेकर आपत्ति दर्ज की गई थी, जिसके बाद जांच में नामांकन रद्द किया गया। चुनाव आयोग पहुंचा विवाद इस मामले को लेकर कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग भी पहुंचा और फैसले पर आपत्ति जताई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। 18 जून को वोटिंग मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है। उससे पहले यह विवाद राज्य की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Congress leader Meenakshi Natarajan reacts after Rajya Sabha nomination rejection amid political controversy.
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का आरोप—‘सीट चोरी’; चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर हंगामा, सियासत गरमाई

  भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के बाद राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए “सीट चोरी” का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र पर हमला कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। मंगलवार को कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचा और औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। पार्टी ने चेतावनी दी है कि वह इस मामले को अदालत में भी चुनौती देगी। सचिन पायलट ने उठाए गंभीर सवाल कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि यह बेहद दुर्लभ मामला है कि बिना स्पष्ट और ठोस आधार के किसी उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया गया हो। उन्होंने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ न कोई FIR है और न ही कोई आपराधिक चार्जशीट दाखिल है। पायलट ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। मीनाक्षी नटराजन का आरोप—‘वोट से आगे अब सीट की चोरी’ नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव में उनका नामांकन खारिज किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले “वोट चोरी” की बात होती थी, लेकिन अब मामला “सीट चोरी” तक पहुंच गया है। नटराजन ने दावा किया कि उन्हें पर्याप्त सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। नामांकन रद्द करने का क्या है आधार? सूत्रों के अनुसार, भाजपा प्रत्याशी पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में एक लंबित आपराधिक मामले की जानकारी नहीं दी थी। बताया गया कि तेलंगाना की एक अदालत में CrPC की धारा 223 के तहत एक मामला दर्ज है, जिसका उल्लेख नामांकन पत्र में नहीं किया गया। इसी आधार पर निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन रद्द करने का निर्णय लिया। भाजपा ने फैसले को बताया सही मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हुई है और नियमों के तहत ही आपत्ति दर्ज की गई थी। कांग्रेस का पलटवार कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि नटराजन के खिलाफ न कोई एफआईआर है और न ही कोई आपराधिक मुकदमा लंबित है। तन्खा के अनुसार केवल CrPC की धारा 223 के तहत एक नोटिस जारी हुआ था, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। चुनाव आयोग में शिकायत, अदालत जाने की तैयारी कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तनाव मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल इस मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Money Laundering Case
बड़गाईं जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सीएम हेमंत सोरेन को झटका, डिस्चार्ज याचिका खारिज

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं जमीन और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत से बड़ी राहत नहीं मिली है। पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मामला अब ट्रायल की प्रक्रिया की ओर बढ़ सकता है।   यह मामला रांची के बड़गाईं क्षेत्र स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जिसकी जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को लेकर कार्रवाई की थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले में स्वयं को निर्दोष बताते हुए अदालत से आरोपमुक्त किए जाने की मांग की थी।   दिसंबर 2025 में दाखिल की गई थी याचिका मुख्यमंत्री की ओर से 5 दिसंबर 2025 को विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है और उन्हें मामले से मुक्त किया जाना चाहिए। इस पर अदालत ने ईडी और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें विस्तार से सुनी थीं।   पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज कर दिया।   ट्रायल का रास्ता हुआ साफ कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का अर्थ यह है कि अदालत को प्रथम दृष्टया मामले में सुनवाई जारी रखने के पर्याप्त आधार दिखाई दिए हैं। अब इस मामले में आरोप तय करने और ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।   राजनीतिक और कानूनी नजरें मामले पर यह मामला लंबे समय से राज्य की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के ताजा फैसले के बाद एक बार फिर इस प्रकरण पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि मुख्यमंत्री पक्ष की ओर से आगे की कानूनी रणनीति को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में अगली सुनवाई कब होती है और ट्रायल की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Unknown जून 8, 2026 0
Owaisi Statement
सड़क पर नमाज को लेकर ओवैसी का हमला, कहा- अगर नमाज गलत है तो धार्मिक जुलूसों पर भी हो रोक

नई दिल्ली, एजेंसियां। सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और धार्मिक आयोजनों को लेकर चल रही बहस के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र और राज्य सरकारों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यदि सड़कों पर नमाज पढ़ना गलत माना जाता है, तो सभी धर्मों के त्योहारों, जुलूसों और सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों पर भी समान नियम लागू किए जाने चाहिए।   'अनुच्छेद 25 सभी को धार्मिक स्वतंत्रता देता है' एक 'ईद मिलाप' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला दिया, जो नागरिकों को अपने धर्म का पालन और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि नमाज को लेकर आपत्ति जताने वाले लोग अन्य धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर चुप्पी साध लेते हैं, जो स्पष्ट रूप से दोहरे मानदंड को दर्शाता है। ओवैसी ने कहा, "अगर सड़क पर नमाज गलत है, तो हर धर्म के त्योहारों के दौरान सड़क पर निकलने वाले जुलूस भी गलत होने चाहिए। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।"   मांस और शराब की दुकानों को लेकर भी उठाए सवाल AIMIM प्रमुख ने कुछ राज्यों में धार्मिक त्योहारों के दौरान मांस और चिकन की दुकानों को बंद करने के फैसलों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी समुदाय के त्योहार पर मांस की दुकानों को बंद किया जाता है, तो रमजान के दौरान 30 दिनों के लिए शराब की दुकानें भी बंद की जानी चाहिए।   अजान और नमाज पर आपत्ति को बताया पक्षपात ओवैसी ने आरोप लगाया कि रमजान और बकरीद जैसे मुस्लिम त्योहारों के दौरान जानबूझकर अजान और नमाज के मुद्दे उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान भी सड़कें घेर ली जाती हैं, लेकिन उन पर वैसी आपत्ति नहीं की जाती जैसी नमाज को लेकर की जाती है।   हालिया विवादों के बीच आया बयान ओवैसी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक सभाओं को लेकर कई राज्यों में प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने कहा था कि नमाज निर्धारित स्थानों पर और व्यवस्थित तरीके से पढ़ी जानी चाहिए। वहीं पश्चिम बंगाल में ईद की एक बड़ी नमाज को सार्वजनिक सड़क की बजाय दूसरे स्थल पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया था।

Unknown मई 30, 2026 0
Mamata Banerjee shares Girgiti poem amid TMC rebellion and Bengal political turmoil
‘गिरगिटी’ कविता से ममता बनर्जी का बड़ा सियासी संदेश, बागी नेताओं पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के बाद सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष और इस्तीफों के बीच मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने अब कविता के जरिए अपने विरोधियों और बागी नेताओं को संदेश दिया है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ‘गिरगिटी’ शीर्षक से एक कविता साझा की, जिसे राजनीतिक गलियारों में पार्टी के भीतर ‘रंग बदलने वाले’ नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है। दूसरी ओर बीजेपी सांसद सौमित्र खान के उस दावे ने बंगाल की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि टीएमसी के कई सांसद और विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं। फेसबुक पर साझा की गयी ‘गिरगिटी’ कविता, पार्टी के भीतर मचा सियासी हलचल ममता बनर्जी द्वारा साझा की गई कविता को लेकर बंगाल की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। कविता में ‘गिरगिट’ का प्रतीक इस्तेमाल करते हुए उन्होंने ऐसे लोगों पर निशाना साधा है, जो परिस्थिति के अनुसार अपना रंग और रुख बदल लेते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कविता सीधे तौर पर उन नेताओं के लिए संदेश है, जो हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं या टीएमसी छोड़ने के संकेत दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने कविता में लिखा कि गिरगिट तो केवल अपनी आजीविका बचाने के लिए रंग बदलता है, लेकिन कुछ लोग निजी स्वार्थ और राजनीतिक फायदे के लिए पल भर में अपना चरित्र बदल लेते हैं। मुश्किल समय में पार्टी छोड़ने वालों पर ममता का तीखा हमला कविता में ममता बनर्जी ने उन नेताओं पर भी नाराजगी जतायी, जिन पर पार्टी के कठिन दौर में कार्यकर्ताओं को अकेला छोड़ने का आरोप लग रहा है। उन्होंने संकेतों में कहा कि कुछ नेताओं ने सत्ता और व्यक्तिगत सुविधाओं के लिए अपने आत्मसम्मान और राजनीतिक प्रतिबद्धता से समझौता कर लिया। कविता के अंतिम हिस्से में उन्होंने ‘समय के पहिये’ का जिक्र करते हुए चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ता है और गद्दारों को एक दिन अपनी असली कीमत समझ में आ जाती है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान का बड़ा दावा, कहा- टीएमसी के कई नेता संपर्क में ममता बनर्जी की कविता के बीच बीजेपी सांसद सौमित्र खान के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। सौमित्र खान ने दावा किया कि टीएमसी के 20 सांसद और करीब 50 विधायक पार्टी से नाराज हैं और वे बीजेपी के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी आलाकमान की ओर से संकेत मिल जाये, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि टीएमसी का संगठन अंदर से कमजोर हो चुका है और पार्टी में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। टीएमसी में बढ़ते इस्तीफों और नाराजगी ने बढ़ायी नेतृत्व की चिंता हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर कई नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आयी है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा सुशांत घोष, अरूप चक्रवर्ती और इंद्रनील सेन जैसे नेताओं ने भी पार्टी के कामकाज और कथित ‘वीवीआईपी कल्चर’ पर सवाल उठाये हैं। बागी नेताओं का आरोप है कि राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती विवाद और आरजी कर अस्पताल मामले जैसे मुद्दों ने जनता के बीच पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व इन मामलों से प्रभावी तरीके से निपटने में विफल रहा है। टीएमसी ने बीजेपी के दावों को बताया अफवाह और राजनीतिक माइंडगेम टीएमसी नेतृत्व ने बीजेपी सांसद सौमित्र खान के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि बीजेपी केवल भ्रम फैलाने और राजनीतिक माइंडगेम खेलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि टीएमसी पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के बड़े नेताओं या विधायकों के बीजेपी में जाने की बात निराधार है। सौगत रॉय ने दावा किया कि विपक्ष जानबूझकर पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर टीएमसी मजबूत स्थिति में है। 2026 चुनाव के बाद बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में जिस तरह से बयानबाजी, इस्तीफे और दल-बदल की चर्चाएं तेज हुई हैं, उसने राज्य की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी कविता और राजनीतिक संदेशों के जरिए पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी लगातार टीएमसी में टूट का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बंगाल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Former Nepal Prime Minister Sher Bahadur Deuba and Arzu Rana Deuba during a public event
नेपाल के पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर रोक

Sher Bahadur Deuba और उनकी पत्नी Arzu Rana Deuba को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत मिली है। Supreme Court of Nepal ने उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। सोमवार को जस्टिस महेश शर्मा पौडेल और नित्यानंद पांडे की बेंच ने दंपती की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी वारंट जारी करने में उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। काठमांडू जिला अदालत ने जारी किया था वारंट Kathmandu District Court ने 6 अप्रैल को देउबा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उस समय दोनों इलाज के लिए विदेश में थे। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक दोनों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। इंटरपोल ने भी ठुकराया अनुरोध नेपाल पुलिस ने देउबा दंपती के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने के लिए इंटरपोल से संपर्क किया था। हालांकि, इंटरपोल ने दस्तावेजों को अपर्याप्त बताते हुए यह अनुरोध खारिज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने किया था हमला पिछले साल जेन-जी प्रदर्शनकारियों ने देउबा के घर के बाहर प्रदर्शन किया था। इस दौरान हिंसा भी हुई, जिसमें दंपती घायल हो गए थे। सोशल मीडिया पर उस समय एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें नेपाली मुद्रा और अमेरिकी डॉलर जलाते हुए दिखाए गए थे। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग विभाग ने मामले की जांच शुरू की और फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराई।  

surbhi मई 26, 2026 0
TMC MP Kakoli Ghosh Dastidar resigns as Barasat district president amid growing internal party tensions.
TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, काकोली घोष दस्तिदार ने छोड़ा जिला अध्यक्ष पद

All India Trinamool Congress में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद Kakoli Ghosh Dastidar ने बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने क्षेत्र में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा, लेकिन साथ ही पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर भी सवाल उठाए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन के बाद टीएमसी के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। काकोली घोष का इस्तीफा इसी कड़ी में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। I-PAC और नई रणनीति पर सवाल काकोली घोष दस्तिदार ने राज्य टीएमसी अध्यक्ष Subrata Bakshi को भेजे अपने इस्तीफे में कहा कि पार्टी को फिर से पुराने तरीके की “सड़क की राजनीति” में लौटना चाहिए। उन्होंने इशारों में Indian Political Action Committee (I-PAC) और पार्टी में उभरे नए राजनीतिक ढांचे पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि ईमानदार और पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ पहले की तरह काम करने से पार्टी की छवि दोबारा मजबूत हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर I-PAC की भूमिका पर सवाल है, जिसे टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के करीबी रणनीतिक ढांचे से जोड़ा जाता है। “पुराने कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार ठीक नहीं था” पत्रकारों से बातचीत में काकोली घोष ने कहा कि I-PAC से जुड़े कुछ युवा कार्यकर्ताओं का रवैया पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मानजनक नहीं था। उन्होंने कहा, “मैंने I-PAC को नियुक्त नहीं किया था, लेकिन मैंने देखा कि वे हम जैसे पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार करते थे।” पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर भी जताई चिंता काकोली घोष दस्तिदार ने पार्टी में बढ़ते अपराधीकरण और भ्रष्टाचार को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं से लोगों में डर और असंतोष बढ़ा है और राजनीति में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी की सीटें घटकर 80 तक पहुंच जाना उनके लिए स्वीकार करना कठिन है। उन्होंने साफ किया कि वह पार्टी नहीं छोड़ रही हैं और एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करती रहेंगी। ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती हैं काकोली घोष Mamata Banerjee की करीबी मानी जाने वाली काकोली घोष दस्तिदार बारासात से चार बार सांसद रह चुकी हैं। वह पार्टी के महिला संगठन में भी अहम जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। हाल ही में उन्हें लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था और उनकी जगह Kalyan Banerjee को नियुक्त किया गया।  

surbhi मई 25, 2026 0
Bhojpuri Magahi controversy
भोजपुरी-मगही को लेकर बनी कमेटी में ही विवाद

रांची। जेटेट भाषा विवाद सुलझाने के लिए बनी पांच मंत्रियों की उच्चस्तरीय समिति की बैठक में सहमति नहीं बन पाई। सत्ता पक्ष दो भागों में बंट गया। कांग्रेस और राजद का विचार झामुमो के विपरीत रहा। कमेटी में तीन मंत्री मगही भोजपुरी एवं अंगिका को जेटेट परीक्षा में शामिल करने के पक्ष में रहे, जबकि दो मंत्री इसके विरोध में थे। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, ग्रामीण मंत्री दीपिका पांडेय और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा, जेटेट में भोजपुरी, मगही और अंगिका जरूरी है। जबकि, नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार और पेयजल-स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। कमेटी के संयोजक राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मंत्रियों के विचार से मुख्यमंत्री को अवगत करा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ही इस विषय पर अंतिम निर्णय लेंगे। नहीं बन सकी सहमति कमेटी की बैठक वैचारिक मतभिन्नता पर ही समाप्त हुई। कैबिनेट की बैठक में भी राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने साफ कहा था कि झारखंड के कई जिलों में ये भाषाएं गांव-गांव में बोली जाती हैं, ऐसे में इसे जेटेट से अलग रखना न्यायोचित नहीं, जबकि झामुमो ने इस विचार को खारिज कर दिया। उच्च स्तरीय कमेटी में भी झामुमो एक ओर और कांग्रेस-राजद दूसरी ओर खड़े रहे, फलत: सहमति नहीं बन पाई।   50 लाख से अधिक लोग बोलते हैं भोजपुरी-मगही। भोजपुरी-मगही बोलनेवालों की संख्या बांग्ला और ओड़िया भाषियों से अधिक। 1928 में जॉर्ज ग्रियर्सन लिखित “लैग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया” के अनुसार मैथिली भाषा देवघर, दुमका, साहेबगंज, पाकुड़ एवं गोड्डा जिले में बोली जाती है। संथाल में कुरमाली बोलने वालों की संख्या दो लाख से अधिक है। जेटेट में वर्ष 2012 तक भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाएं शामिल थीं। करीब 40 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने वर्ष 2012 में इन भाषाओं की दी थी परीक्षा।   कांग्रेस और राजद के मंत्रियों की अनुशंसा 1 पलामू, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद बोकारो, गोड्डा, देवघर में भोजपुरी, मगही भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल किया जाए। 2 रांची, जमशेदपुर, बोकारो, गोड्डा, साहेबगंज, धनबाद, सरायकेला-खरसावां जिले में मैथिली एवं अंगिका भाषा को शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 के अंतर्गत जोड़ा जाए। 3 जुलाई, 2026 मे संभावित शिक्षक पात्रता की परीक्षा में इन भाषाओं को शामिल करने के बाद ही परीक्षा आयोजित हो। 4 राज्य में प्रशासनिक स्तर पर भाषायी संतुलन बनना आवश्यक है, ताकि झारखंड में रहने वाले जनजातीय और गैर जनजातीय वर्ग के हितों की रक्षा हो सके। विवाद सलटाने के लिए बनी कमेटी में ही विवाद बैठक में सुदिव्य कुमार ने कमेटी में नए सदस्यों की मांग उठाई। कहा, समिति में अल्पसंख्यक और जनजातीय मंत्री को भी शामिल किया जाए। भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मसलों पर व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी है, ताकि सभी वर्गों की राय को महत्व मिल सके। इस पर राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि यह उच्च स्तरीय समिति भाषा और जाति के नाम पर नहीं बनाई गई है। यदि सीएम कोई एक्सटेंशन करेंगे तो देखा जाएगा, फिलहाल यह अंतिम बैठक में है। इसे यहीं समाप्त किया जाए।

Unknown मई 23, 2026 0
ED officials conduct action against AAP leader Deepak Singla in alleged bank fraud and money laundering case.
AAP नेता दीपक सिंगला गिरफ्तार, केजरीवाल और आतिशी ने बताया राजनीतिक साजिश

नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।  

surbhi मई 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0