Political Controversy

Shivanand Tiwari reacts to HD Kumaraswamy's remarks on Sonia Gandhi amid political controversy in Bihar
सोनिया गांधी पर कुमारस्वामी की टिप्पणी से गरमाई सियासत, शिवानंद तिवारी ने पूछा- ‘क्या सत्ता संकट में है?’

पटना: सोनिया गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की टिप्पणी पर बिहार में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने कुमारस्वामी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सत्ता पक्ष के एक मंत्री को विपक्ष की नेता के मूल को लेकर सवाल उठाने की जरूरत क्यों पड़ी। शिवानंद तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी के इटली मूल को लेकर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन ऐसे सवालों का राजनीतिक परिणाम हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल किया कि क्या सरकार किसी राजनीतिक संकट का सामना कर रही है? कुमारस्वामी के बयान पर तिवारी का पलटवार शिवानंद तिवारी के मुताबिक, कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उनके इटली मूल का जिक्र किया था। तिवारी ने कहा कि कुमारस्वामी को यह भी याद रखना चाहिए कि 2018 में कांग्रेस के समर्थन से ही वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच गठबंधन हुआ था और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। तिवारी ने यह भी याद दिलाया कि एचडी कुमारस्वामी के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे। ‘कुमारस्वामी को भारतीय परंपरा की जानकारी नहीं’ सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर सवाल उठाए जाने को लेकर शिवानंद तिवारी ने भारतीय पारिवारिक परंपराओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में विवाह के बाद महिला की पहचान उसके पति के परिवार से जुड़ती है। तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ, लेकिन भारतीय से विवाह के बाद वह भारत की बहू बनीं। उन्होंने इसी संदर्भ में 2004 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जनता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले गठबंधन को सत्ता की जिम्मेदारी दी थी। पीएम पद छोड़ने का भी किया जिक्र शिवानंद तिवारी ने सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद से जुड़े फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2004 में गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी के पास प्रधानमंत्री बनने का अवसर था, लेकिन उन्होंने खुद यह पद स्वीकार नहीं किया और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। तिवारी ने कहा कि जिस पद को हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय तक संघर्ष होता रहा, सोनिया गांधी ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। ‘सत्ता के लोग विपक्ष से सवाल करने लगें तो...’ शिवानंद तिवारी ने कुमारस्वामी की टिप्पणी को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सवाल विपक्ष की ओर से सरकार से किए जाते हैं, लेकिन जब सत्ता में बैठे लोग विपक्ष से सवाल करने लगें तो इसे अलग नजरिए से देखा जा सकता है। उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि क्या सरकार के सामने कोई राजनीतिक संकट है? हालांकि, सत्ता में संकट होने का यह दावा शिवानंद तिवारी की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे सरकार की स्थिति को लेकर किसी आधिकारिक पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Jitan Ram Manjhi responds to Tejashwi Yadav during a political exchange in Bihar
जीतन राम मांझी का तेजस्वी यादव पर पलटवार, बोले- ‘इतना जल्दी नहीं मरूंगा’, ‘कुछ न कुछ पदार्थ लिए हुए हैं’

बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई। गया में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद मांझी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह अभी इतनी जल्दी मरने वाले नहीं हैं और बिहार की जनता के लिए उन्हें अभी कई काम करने हैं। मांझी ने तेजस्वी यादव के बयान पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसी बातें करने से लगता है कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” उनके इस बयान के बाद बिहार में सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं। ‘इतना जल्दी हम मरने वाले नहीं हैं’ जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें अभी बिहार और यहां की जनता के लिए बहुत काम करना है। उन्होंने कहा कि जनता की दुआएं उनके साथ हैं और वह सक्रिय राजनीति में बने रहकर जनहित के मुद्दों पर काम करते रहेंगे। मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने को लेकर कहा कि उन्हें अभी श्रद्धांजलि देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि वह पूरी तरह सक्रिय हैं और आने वाले समय में भी जनता के बीच रहकर काम करेंगे। तेजस्वी के बयान पर तीखा तंज मांझी ने तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर व्यक्तिगत तंज भी किया। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति इस तरह की बातें नहीं करता और तेजस्वी के बयान से उन्हें लगा कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” मांझी की यह टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का नया मुद्दा बन सकती है। बिहार में पहले से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है और इस नए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है। तेजस्वी के पुराने कार्यकाल पर भी निशाना केंद्रीय मंत्री ने तेजस्वी यादव के साथ काम करने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उनके पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। मांझी ने शिक्षा और विकास के मुद्दे पर पुराने दौर की तुलना मौजूदा सरकार से की। उन्होंने कहा कि पहले “चरवाहा विद्यालय” की चर्चा होती थी, जबकि अब राज्य में डिग्री कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर काम हो रहा है। मांझी ने बिहार में विकास योजनाओं और नए शैक्षणिक संस्थानों को सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश किया। गया की विकास परियोजनाओं का किया जिक्र मांझी ने गया और बोधगया से जुड़ी प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर से जुड़े काम का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर 20 अगस्त को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होनी है। उनके मुताबिक, इन योजनाओं से गया और बोधगया में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सकती है। ‘डबल इंजन सरकार’ को बताया विकास की वजह जीतन राम मांझी ने केंद्र और बिहार में एनडीए सरकार को विकास की रफ्तार बढ़ाने वाला बताया। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य में समान गठबंधन होने से बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है। इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि तेजस्वी यादव की श्रद्धांजलि वाली टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत बयानबाजी से आगे बढ़कर बिहार के विकास मॉडल और पिछली सरकारों के कामकाज की तुलना तक पहुंच गया है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Tamil Nadu Chief Minister Vijay apologizes over minister's reference to former CM Karunanidhi
तमिलनाडु विधानसभा में करुणानिधि के नाम पर विवाद, सीएम विजय बोले- ‘मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं’

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार, 17 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के नाम के उल्लेख को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विधानसभा में एक मंत्री द्वारा करुणानिधि का बिना सम्मानजनक संबोधन के सीधे नाम लिए जाने पर डीएमके विधायकों ने आपत्ति जताई। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हस्तक्षेप किया और मंत्री की टिप्पणी पर माफी मांगते हुए विवाद को शांत करने की कोशिश की। मंत्री की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद विधानसभा में स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने चुनावों में कथित तौर पर वोट के बदले पैसे बांटने की पुरानी राजनीति का जिक्र किया। मंत्री ने अपने बयान में ‘तिरुमंगलम फॉर्मूला’ का भी उल्लेख किया और दावा किया कि पिछले चुनावों में कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में एक वोट के बदले 1,500 रुपये तक बांटे जाने की बात सामने आई थी। इसी चर्चा के दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के वरिष्ठ नेता एम. करुणानिधि का सीधे नाम लिया। मंत्री ने उनके नाम के साथ ‘कलैग्नर’ या ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ जैसे सम्मानजनक संबोधन का इस्तेमाल नहीं किया। डीएमके विधायकों ने जताई आपत्ति मंत्री के इस तरीके पर डीएमके विधायकों ने विधानसभा में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि करुणानिधि जैसे पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनीतिक नेता का सदन में उल्लेख करते समय स्थापित परंपरा के अनुरूप सम्मानजनक संबोधन किया जाना चाहिए। मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने माना कि करुणानिधि के नाम का जिस तरह उल्लेख किया गया, वह उचित नहीं था। सीएम विजय ने मांगी माफी मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा, “मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं।” उनके इस हस्तक्षेप के बाद सदन में बढ़ते विवाद को शांत करने की कोशिश की गई। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव को चर्चा में ला दिया है। चुनावी राजनीति का मुद्दा भी उठा विधानसभा में हुई बहस सिर्फ करुणानिधि के नाम के संबोधन तक सीमित नहीं रही। मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने पुराने चुनावों में कथित धनबल और वोट खरीदने की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मौजूदा सरकार की तुलना पूर्व की चुनावी व्यवस्था से करते हुए दावा किया कि वर्तमान सरकार बिना पैसे बांटे वोट हासिल कर सत्ता में आई है। हालांकि, उनके इन राजनीतिक दावों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। विवाद से क्या संदेश? तमिलनाडु की राजनीति में करुणानिधि का नाम बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पर उनके नाम के संबोधन को लेकर उठा विवाद केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मर्यादा और सदन की परंपराओं का मुद्दा बन गया। मुख्यमंत्री विजय का तत्काल हस्तक्षेप और माफी मांगना बताता है कि सरकार इस विवाद को आगे बढ़ने से रोकना चाहती थी। अब देखना होगा कि डीएमके और अन्य विपक्षी दल इस मामले को आगे राजनीतिक मुद्दा बनाते हैं या मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद विवाद समाप्त हो जाता है।  

surbhi अगस्त 18, 2026 0
Jan Suraaj leader Uday Singh warns Pappu Yadav over remarks against Prashant Kishor amid rising political tensions in Bihar.
पप्पू यादव को जन सुराज की खुली चेतावनी, उदय सिंह बोले- भाषा पर नियंत्रण रखें, वरना उसी अंदाज में मिलेगा जवाब

पटना: बिहार की राजनीति में जन सुराज और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बीच जुबानी जंग तेज होती दिख रही है। जन सुराज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने पप्पू यादव को सार्वजनिक रूप से चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने जन सुराज के नेताओं या पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी जारी रखी, तो उन्हें उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। उदय सिंह ने कहा कि वह अब तक इस मुद्दे पर चुप रहे हैं, लेकिन पप्पू यादव की टिप्पणियां उनकी चुप्पी तोड़ने की स्थिति पैदा कर रही हैं। उन्होंने पप्पू यादव से अपनी भाषा और राजनीतिक सीमाओं का ध्यान रखने की सलाह दी। उदय सिंह बोले- मेरी चुप्पी को कमजोरी न समझें जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें पप्पू यादव की ओर से प्रशांत किशोर को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की जानकारी मिली है। उनके मुताबिक, राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अनुचित भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा। उदय सिंह ने संकेत दिया कि यदि ऐसी टिप्पणियां दोबारा जारी रहीं तो वह अब तक बनाए रखी गई चुप्पी खत्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद पप्पू यादव के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह लंबे समय से पप्पू यादव की राजनीतिक गतिविधियों और उनके बयानों पर नजर रखते रहे हैं, लेकिन सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचते रहे। अब उन्होंने पप्पू यादव को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है। 'अपनी सीमा समझें और अपने काम पर ध्यान दें' उदय सिंह ने पप्पू यादव को पूर्णिया की स्थानीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि पूर्णिया में कई गंभीर समस्याएं हैं और सांसद को उन मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी नेता को हर मुद्दे में हस्तक्षेप करने के बजाय अपने राजनीतिक दायरे में काम करना चाहिए। उदय सिंह के बयान से साफ है कि जन सुराज अब पप्पू यादव की प्रशांत किशोर को लेकर की गई टिप्पणियों पर आक्रामक रुख अपना रहा है। प्रशांत किशोर पर टिप्पणी बनी विवाद की वजह विवाद की शुरुआत पप्पू यादव की ओर से प्रशांत किशोर को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पप्पू यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन में प्रशांत किशोर को 'बहरूपिया' बताया था। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को लेकर तेजस्वी यादव पर भी सवाल उठाए थे। पप्पू यादव का आरोप था कि तेजस्वी यादव की राजनीतिक रणनीति और कथित लापरवाही का फायदा प्रशांत किशोर को मिला और इसी वजह से जन सुराज को बांकीपुर में जीत हासिल हुई। जन सुराज की ओर से इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई है। पार्टी का कहना है कि प्रशांत किशोर और पार्टी के अन्य नेताओं के बारे में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। बांकीपुर की जीत के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद बिहार की राजनीति में जन सुराज की सक्रियता और चर्चा दोनों बढ़ी हैं। चुनावी नतीजे के बाद पार्टी को लेकर राजनीतिक दलों की बयानबाजी भी तेज हुई है। इसी माहौल में पप्पू यादव और जन सुराज के बीच बयानबाजी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक तरफ पप्पू यादव अपनी राजनीतिक स्थिति और पूर्णिया के मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं, वहीं जन सुराज बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अब पप्पू यादव के जवाब पर नजर उदय सिंह ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा है कि जन सुराज या प्रशांत किशोर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी होने पर पार्टी की ओर से जवाब दिया जाएगा। ऐसे में अब राजनीतिक नजरें पप्पू यादव की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। बिहार की राजनीति में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। ऐसे में पप्पू यादव और जन सुराज के बीच यह तकरार आगे बढ़ती है या दोनों पक्ष इसे यहीं रोक देते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
BJP leader Khushbu Sundar reacts to Udhayanidhi Stalin's alleged remark about actress Trisha
उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी पर खुशबू सुंदर का पलटवार, बोलीं- हिम्मत है तो खुलकर नाम लीजिए

Tamil Nadu Politics: अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर ने अभिनेत्री तृषा को लेकर उदयनिधि स्टालिन की कथित दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी में हिम्मत है तो इशारों में नहीं, बल्कि खुलकर नाम लेकर बात करनी चाहिए। खुशबू ने इस तरह की टिप्पणियों को महिलाओं का अपमान बताया। तृषा को लेकर टिप्पणी पर बढ़ा विवाद सोमवार (3 अगस्त) को तंजावुर में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने "तृषा-तृषा" के नारे लगाए। इसके जवाब में उदयनिधि स्टालिन ने मुस्कुराते हुए कथित तौर पर दोहरे अर्थ वाली टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे अभिनेत्री तृषा पर टिप्पणी माना, जिसके बाद मामला विवादों में आ गया। खुशबू सुंदर ने क्या कहा? एक मीडिया बातचीत में खुशबू सुंदर ने कहा कि उन्हें उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी पर कोई हैरानी नहीं हुई। उन्होंने कहा, "अगर किसी में हिम्मत है तो इशारों में नहीं, बल्कि खुलकर नाम लेकर बात करनी चाहिए। किसी महिला पर सार्वजनिक मंच से इस तरह की टिप्पणी करना बेहद शर्मनाक है।" 'महिलाओं के प्रति भेदभाव डीएमके की विरासत' खुशबू सुंदर ने आरोप लगाया कि डीएमके की राजनीति में महिलाओं के प्रति भेदभाव और सेक्सिस्ट सोच लंबे समय से मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह खुद भी पहले कई बार महिलाओं के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि युवा नेता होने के नाते उदयनिधि स्टालिन अलग सोच रखेंगे, लेकिन उनकी टिप्पणी बेहद निराशाजनक रही। हिरासत के बाद रिहा हुए उदयनिधि तृषा को लेकर विवादित टिप्पणी के मामले में उदयनिधि स्टालिन को मंगलवार (4 अगस्त) को महिला की गरिमा का अपमान करने समेत कई आरोपों में हिरासत में लिया गया था। पूछताछ के बाद उन्हें उसी दिन शाम को रिहा कर दिया गया। 'राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं का अपमान गलत' खुशबू सुंदर ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए महिलाओं को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, "किसी महिला का अपमान करके कोई मजबूत नेता नहीं बन जाता। अगर आप खुद को जननेता कहते हैं, तो अपनी भाषा और व्यवहार में भी वही गरिमा दिखनी चाहिए।" उदयनिधि स्टालिन की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है, जबकि इस पूरे मामले पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
Udhayanidhi Stalin faces backlash over alleged double meaning remark involving actress Trisha Krishnan
तृषा पर डबल मीनिंग टिप्पणी से घिरे उदयनिधि स्टालिन, कंगना और चिन्मयी ने जताई नाराजगी; महिला सम्मान पर उठे सवाल

नई दिल्ली: तमिलनाडु में डीएमके नेता और पूर्व अभिनेता उदयनिधि स्टालिन की अभिनेत्री तृषा कृष्णन को लेकर की गई कथित डबल मीनिंग टिप्पणी पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बयान को लेकर राजनीतिक और फिल्मी जगत से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत तथा गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी स्टालिन की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है। विवाद की शुरुआत 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित एक रैली के दौरान हुई। कार्यक्रम में उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ की ओर से अभिनेत्री तृषा कृष्णन के नाम के नारे लगाए गए। आरोप है कि इसके बाद स्टालिन ने ऐसा तंज किया, जिसे सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में डबल मीनिंग टिप्पणी के तौर पर देखा गया। स्टालिन ने बाद में अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनका संदर्भ कावेरी नदी के पानी से था। हालांकि, उनकी सफाई के बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आया और महिला सम्मान तथा राजनीतिक बहस में निजी टिप्पणियों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे। कंगना रनौत ने जताई कड़ी आपत्ति अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने उदयनिधि स्टालिन की हिरासत को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सार्वजनिक मंचों पर अश्लील या भद्दे मजाक को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना था कि किसी सभ्य समाज में सार्वजनिक तौर पर गाली-गलौज या डबल मीनिंग और अश्लील मजाक स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। कंगना ने स्टालिन की हिरासत और बाद में जमानत पर रिहाई का जिक्र करते हुए इसे एक ऐसा उदाहरण बताया, जिससे सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार को लेकर संदेश जाना चाहिए। चिन्मयी श्रीपदा ने राजनीति में महिलाओं को घसीटने पर उठाया सवाल गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राजनीतिक बहस में महिलाओं को घसीटे जाने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं को महिलाओं को राजनीतिक मुद्दों के बीच लाने के बजाय वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। चिन्मयी ने अपने पोस्ट में तमिलनाडु की राजनीति में पहले सामने आए कुछ विवादित बयानों का भी संदर्भ दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक मंचों पर महिलाओं के बारे में भद्दी भाषा का इस्तेमाल पहले भी होता रहा है और ऐसी भाषा को लंबे समय तक सामान्य मानने की प्रवृत्ति रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब किसी बयान के दो अर्थ निकाले जा सकते हों, तो बाद में पूरी जिम्मेदारी सुनने वालों की समझ पर डाल देना कितना उचित है। चिन्मयी ने जयललिता के संदर्भ का भी किया जिक्र चिन्मयी ने अपने बयान में तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि पुरानी राजनीतिक पीढ़ी में महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा के इस्तेमाल के कई उदाहरण रहे हैं और ऐसे बयानों को राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक नई पीढ़ी के नेताओं से अपेक्षा की जानी चाहिए कि वे सार्वजनिक संवाद का स्तर बेहतर करें, न कि पुरानी राजनीतिक भाषा को दोहराएं। खुशबू सुंदर भी पहले जता चुकी हैं नाराजगी इस विवाद पर अभिनेत्री और बीजेपी नेता खुशबू सुंदर भी पहले प्रतिक्रिया दे चुकी हैं। उन्होंने कथित टिप्पणी को बेहद घटिया और शर्मनाक बताते हुए कहा था कि राजनीतिक मतभेदों के नाम पर महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। खुशबू सुंदर ने इस तरह की भाषा को लेकर राजनीतिक संस्कृति पर भी सवाल उठाए थे। अब कंगना रनौत और चिन्मयी श्रीपदा की प्रतिक्रिया आने के बाद यह विवाद और व्यापक हो गया है। क्या कहा था उदयनिधि स्टालिन ने? मामला 3 अगस्त को तंजावुर में कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित रैली से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टालिन मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साध रहे थे। इसी दौरान भीड़ से तृषा कृष्णन के नाम के नारे लगाए गए। इसके बाद स्टालिन ने पानी से जुड़ा एक तंज किया, जिसे आलोचकों ने अभिनेत्री तृषा को लेकर डबल मीनिंग टिप्पणी के रूप में देखा। हालांकि, स्टालिन की ओर से बाद में सफाई दी गई कि उनका इशारा कावेरी के पानी से संबंधित था। यही सफाई अब विवाद के केंद्र में है। एक पक्ष इसे राजनीतिक भाषण में कावेरी जल विवाद का संदर्भ बता रहा है, जबकि आलोचक इसे अभिनेत्री को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी मान रहे हैं। पुलिस कार्रवाई और जमानत से भी बढ़ा विवाद विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन को पुलिस ने हिरासत में लिया और उनके खिलाफ छह धाराओं में मामला दर्ज किए जाने की बात सामने आई। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई से पहले ही उन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। फिलहाल इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—राजनीतिक मंचों पर नेताओं की भाषा की मर्यादा क्या होनी चाहिए और क्या राजनीतिक विरोध के दौरान किसी महिला अभिनेता या सार्वजनिक हस्ती को निजी टिप्पणियों का निशाना बनाया जाना उचित है? यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के सम्मान, राजनीतिक संवाद की भाषा और नेताओं की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी आ गए हैं।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Bangladesh NCP leader Nahid Islam reacts to Sheikh Hasina's reported plan to return to the country
'एयरपोर्ट से सीधे फांसी तक ले जाएंगे', शेख हसीना की वापसी की इच्छा पर नाहिद इस्लाम का विवादित बयान

Bangladesh Politics: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वतन वापसी को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। छात्र आंदोलन से जुड़े नेता और नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के कन्वेनर नाहिद इस्लाम ने विवादित बयान देते हुए कहा कि यदि शेख हसीना देश लौटती हैं तो उन्हें "एयरपोर्ट से सीधे फांसी के तख्ते तक ले जाया जाएगा।" दिसंबर में देश लौटने की जताई थी इच्छा अगस्त 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद से शेख हसीना भारत में रह रही हैं। हाल ही में उन्होंने इच्छा जताई थी कि वह दिसंबर 2026 तक बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। उनके इस बयान के बाद नाहिद इस्लाम की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। 3 अगस्त को दिया विवादित बयान 3 अगस्त को ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में नाहिद इस्लाम ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक समझौते के तहत शेख हसीना को वापस भी लाया जाता है, तब भी जुलाई आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजन और आंदोलनकारी तब तक विरोध जारी रखेंगे, जब तक उन्हें सजा नहीं मिल जाती। आंदोलन का उद्देश्य सत्ता परिवर्तन नहीं था नाहिद इस्लाम ने कहा कि छात्र आंदोलन किसी व्यक्ति को सत्ता में लाने के लिए नहीं, बल्कि तानाशाही, भ्रष्टाचार और रंगदारी की राजनीति को समाप्त करने के लिए किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बावजूद आम लोगों की समस्याओं में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। सरकार पर भी साधा निशाना उन्होंने कहा कि देश में अब भी भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, बिजली और गैस की कमी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में मारे गए लोगों और घायलों के परिवारों के लिए सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। 2024 के आंदोलन के बाद बदली थी सत्ता अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना की लगभग 15 वर्ष पुरानी सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उनके आधिकारिक आवास पर भी हमला किया था, जिसके बाद वह हेलीकॉप्टर से देश छोड़कर भारत आ गई थीं। फिलहाल, नाहिद इस्लाम के बयान पर शेख हसीना या उनके दल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बयान ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
Kangana Ranaut faces social media debate over old statement about finding a Pakistani groom
कंगना रनौत के पुराने वीडियो पर फिर छिड़ी बहस, पाकिस्तानी दूल्हे की तलाश वाले बयान को लेकर सोशल मीडिया पर निशाना

नई दिल्ली: अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। हाल ही में उनके ‘जागृत हिंदू’ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा अपनाने की इच्छा से जुड़े बयान के बाद उनका एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कंगना पाकिस्तान से अपने लिए जीवनसाथी तलाशने की बात करती नजर आती हैं। पुराने वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स उनके पुराने और हालिया बयानों की तुलना कर रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो कब का है और किस संदर्भ में बनाया गया था, इसे समझना भी जरूरी है। पुराने बयान को वर्तमान राजनीतिक विचारों के साथ जोड़कर देखने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। पुराने वीडियो में क्या कहती नजर आईं कंगना? वायरल वीडियो में एक पत्रकार कंगना से उनके लिए पाकिस्तान से लड़का तलाशने की बात करती नजर आती हैं। इसके जवाब में कंगना ने शादी के लिए 30 की उम्र के आसपास के व्यक्ति को पसंद करने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि वह व्यक्ति उनके बारे में ज्यादा नहीं जानता हो, तब भी उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी। कंगना ने उस बातचीत में सामान्य पारिवारिक जीवन जीने की इच्छा जताते हुए अपने खाना बनाने के शौक का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि वह चिकन कोरमा और चिकन मखनी जैसी डिश बना सकती हैं और भारतीय तथा मुगलई खाना बनाना उन्हें आता है। पुराने बयान पर अब क्यों हो रही चर्चा? इस वीडियो के दोबारा सामने आने की टाइमिंग ने इसे खास बना दिया है। कंगना ने हाल ही में एक वीडियो में खुद को ‘मॉडरेट हिंदू’ बताते हुए कहा था कि वह अब आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा को अपनाना चाहती हैं और एक ‘जागृत हिंदू’ बनना चाहती हैं। इसी बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनका पुराना वीडियो सामने लाकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कुछ लोगों ने उनके पुराने बयान और मौजूदा राजनीतिक रुख के बीच विरोधाभास बताया, जबकि कुछ का कहना है कि किसी व्यक्ति के पुराने निजी विचारों को वर्षों बाद उसके वर्तमान राजनीतिक विचारों के खिलाफ इस्तेमाल करना उचित नहीं है। सोनाक्षी सिन्हा पर बयान के बाद बढ़ा विवाद कंगना का ताजा विवाद अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को लेकर दिए गए उनके बयान से भी जुड़ा है। कंगना ने बिना नाम लिए फिल्म इंडस्ट्री की कुछ महिलाओं के राजनीतिक और धार्मिक विचारों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि कुछ हिंदू महिलाएं धर्म और राजनीति के मामले में खुद को तटस्थ रखती हैं, लेकिन मुस्लिम व्यक्ति से संबंध या शादी के बाद उनकी राजनीतिक सोच बदल जाती है। इसी टिप्पणी को सोशल मीडिया यूजर्स ने सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल से जोड़कर देखा। इसके बाद कंगना के पुराने वीडियो को सोशल मीडिया पर दोबारा साझा किया जाने लगा। क्या पुराने बयान से मौजूदा विचारधारा तय होती है? यह इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति के पुराने बयान को उसके वर्तमान विचारों के संदर्भ में देखना स्वाभाविक है, लेकिन किसी पुराने निजी या मजाकिया बातचीत को वर्तमान राजनीतिक विचारधारा का अंतिम प्रमाण मानना भी सावधानी की मांग करता है। कंगना के पुराने वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना और सवाल उठ रहे हैं, लेकिन उनके पुराने बयान और वर्तमान राजनीतिक रुख के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष दर्शकों और मतदाताओं पर छोड़ना अधिक उचित होगा। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक विचारधारा, निजी जीवन और सार्वजनिक बयानों के बीच संबंध को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।  

surbhi अगस्त 4, 2026 0
Bhumi Pednekar faces social media backlash after objecting to abusive language against PM Modi
भूमि पेडनेकर के बयान पर विवाद: पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा पर जताई आपत्ति, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पूछे तीखे सवाल

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भूमि ने आपत्ति जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि असहमति और विरोध दर्ज कराते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ही उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी के खिलाफ भाषा पर भूमि ने जताई आपत्ति भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए विरोध-प्रदर्शनों से सामने आए कुछ वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई। उनका कहना था कि देश के युवाओं को अपनी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते समय अपमानजनक या गाली-गलौज वाली भाषा से बचना चाहिए। भूमि ने देश की संस्कृति और सार्वजनिक संवाद में सम्मानजनक भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस तरह हम अपने परिवार के बड़ों से बात करते हैं, क्या सार्वजनिक जीवन में भी संवाद की एक मर्यादा नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने युवाओं से शिक्षा और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने तथा एकता के साथ आगे बढ़ने की अपील की। बयान के बाद सोशल मीडिया पर घिरीं अभिनेत्री भूमि के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने उनके इस विचार का समर्थन किया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद अपशब्दों से बचना चाहिए, लेकिन कई अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठाई गई थी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि भूमि ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो टिप्पणी की, लेकिन प्रदर्शन से जुड़े दूसरे विवादित पहलुओं पर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान को 'चुनिंदा' बताया और कहा कि किसी भी मुद्दे को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम पर बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियां बेहद तीखी भी रहीं। कुछ लोगों ने अभिनेत्री पर 'जमीनी हकीकत से दूर' होने का आरोप लगाया, जबकि कुछ यूजर्स ने यह सवाल किया कि क्या सम्मान की अपील करने से पहले सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। विवाद के बीच असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे सामने आते हैं। पहला, किसी भी लोकतांत्रिक विरोध में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ भाषा की मर्यादा का सवाल। दूसरा, प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन और पुलिस के व्यवहार को लेकर उठाए जा रहे सवाल। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना और विरोध प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं, किसी व्यक्ति या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसक या अपमानजनक भाषा को लेकर सवाल उठाना भी अलग मुद्दा है। दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा की जा सकती है। यही वजह है कि भूमि पेडनेकर के बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद यह विवाद उस समय सामने आया है जब NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल ने भी अलग बहस को जन्म दिया। भूमि पेडनेकर ने इसी पहलू पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं से संयमित और सम्मानजनक भाषा अपनाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरे घटनाक्रम के सभी पक्षों पर बात करनी चाहिए या नहीं। सोशल मीडिया की बहस ने बढ़ाई चर्चा भूमि पेडनेकर के बयान के बाद सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि NEET-UG 2026 से जुड़ा विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक भाषा, पुलिस कार्रवाई, सार्वजनिक संवाद और सेलिब्रिटी की भूमिका जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल इस विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतांत्रिक असहमति में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन भाषा और संवाद की मर्यादा को लेकर बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही, किसी भी विवाद को समझने के लिए आरोपों, प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।  

surbhi अगस्त 3, 2026 0
BJP MP Sakshi Maharaj speaks during an event while commenting on Congress leader Rahul Gandhi.
राहुल गांधी पर साक्षी महाराज का विवादित बयान, 'विदेशी मूल' की टिप्पणी से गरमाई सियासत

Sakshi Maharaj on Rahul Gandhi: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की नागरिकता और उनकी मां सोनिया गांधी के विदेशी मूल का जिक्र करते हुए कहा कि "विदेशी महिला से पैदा हुआ बालक कभी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता और उसे देश की बागडोर नहीं दी जा सकती।" उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 'विदेशी मूल' को लेकर की टिप्पणी साक्षी महाराज ने अपने बयान में राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी के विदेशी मूल का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी महिला से जन्मा व्यक्ति देश का सच्चा राष्ट्रभक्त नहीं हो सकता। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दिल बहलाने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है," और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की चर्चाओं को केवल कल्पना बताया। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति के हाथों में नहीं होना चाहिए, जिसकी पृष्ठभूमि पर सवाल उठते हों। हालांकि, उन्होंने अपने बयान के समर्थन में कोई कानूनी या संवैधानिक आधार प्रस्तुत नहीं किया। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो साक्षी महाराज का यह बयान सामने आने के बाद इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। कई लोगों ने इस टिप्पणी का समर्थन किया, जबकि विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने इसे व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी बताते हुए आलोचना की। राजनीतिक माहौल हुआ गर्म बीजेपी सांसद के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहले से जारी राजनीतिक टकराव के बीच इस बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले समय में दोनों दलों के बीच जुबानी जंग को और तेज कर सकते हैं। पहले भी विवादों में रहे हैं साक्षी महाराज यह पहली बार नहीं है जब साक्षी महाराज अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले भी वे कई बार अपने विवादित और तीखे राजनीतिक बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुके हैं। इस बार राहुल गांधी और उनके परिवार को लेकर की गई टिप्पणी ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।  

kalpana अगस्त 3, 2026 0
Sudesh Berry praising PM Modi and criticizing CJP during a controversial podcast interview
PM मोदी को ‘विष्णु अवतार’ बताकर बोले सुदेश बैरी, CJP पर जमकर बरसे; विवादित बयानों का वीडियो वायरल

बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बैरी अपने एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ‘विष्णु अवतार’ तक बताया। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने CJP और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचकों पर बेहद तीखी और आपत्तिजनक भाषा में निशाना साधा। उनके बयान से जुड़े कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पीएम मोदी की तुलना भगवान विष्णु से की ‘अकंपनी अक्की’ नाम के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सुदेश बैरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग ईश्वर को देखे बिना उनकी पूजा करते हैं, उसी तरह वह भी पीएम मोदी का सम्मान करते हैं। अभिनेता ने प्रधानमंत्री को ‘विष्णु अवतार’ बताते हुए कहा कि वह उनके पैर धोकर पीना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। CJP पर तीखे हमले पॉडकास्ट के दौरान सुदेश बैरी ने CJP और उससे जुड़े लोगों पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने पार्टी और उसके आंदोलनकारियों के लिए कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग देश को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं। अभिनेता ने यह भी दावा किया कि CJP के अध्यक्ष ने उन्हें फोन कर आंदोलन से जुड़ने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर फोन ब्लॉक कर दिया। बैरी ने कहा कि वह इस राजनीतिक गतिविधि का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे क्लिप सुदेश बैरी के पॉडकास्ट में दिए गए बयानों के कुछ हिस्से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद उनके बयान पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग उनके प्रधानमंत्री के समर्थन वाले बयान की चर्चा कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स उनके द्वारा राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठा रहे हैं। पीएम मोदी के आलोचकों पर भी निशाना अभिनेता ने उन लोगों की भी आलोचना की जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ गाली-गलौज करना उचित नहीं है। हालांकि, इसी दौरान उन्होंने खुद CJP और उसके समर्थकों के खिलाफ कई बेहद तीखे और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसके कारण उनके बयान को लेकर विवाद और तेज हो गया है। बयान पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा सुदेश बैरी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश में राजनीतिक मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर तीखी बयानबाजी लगातार चर्चा में रहती है। ऐसे में किसी अभिनेता का किसी प्रधानमंत्री के समर्थन में इस तरह खुलकर सामने आना और साथ ही विरोधी समूह पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना सोशल मीडिया बहस का विषय बन गया है। फिलहाल, वायरल क्लिप्स को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। पूरे मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि वायरल वीडियो के छोटे-छोटे हिस्सों के बजाय अभिनेता के पूरे पॉडकास्ट संदर्भ को देखकर ही उनके बयान का आकलन किया जाए।  

surbhi जुलाई 30, 2026 0
नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिक्रिया
नसीरुद्दीन शाह का प्रधानमंत्री मोदी पर बयान, बोले- "जो खुद अनपढ़ हैं वो पढ़ाई की अहमियत क्या जाने"; बयान पर सियासी बहस तेज

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने एक बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने शिक्षा और राजनीति को लेकर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि जो व्यक्ति खुद शिक्षा के महत्व को नहीं समझता, वह शिक्षा व्यवस्था को लेकर सही फैसले कैसे ले सकता है। नसीरुद्दीन शाह ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी को "गंभीरता से नहीं लेते"। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस शुरू हो गई है।   शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दे पर रखी राय   नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश में शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करता है और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।   प्रधानमंत्री मोदी पर की टिप्पणी   अभिनेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिक्षा और नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की अहमियत वही व्यक्ति बेहतर समझ सकता है जिसने खुद शिक्षा को महत्व दिया हो। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।   बयान पर शुरू हुई राजनीतिक बहस   नसीरुद्दीन शाह के बयान के बाद भाजपा समर्थकों और विपक्षी नेताओं के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा समर्थकों ने इसे राजनीतिक टिप्पणी बताते हुए आलोचना की, जबकि कुछ विपक्षी समर्थकों ने इसे शिक्षा और लोकतांत्रिक बहस का हिस्सा बताया।   पहले भी राजनीतिक मुद्दों पर बोल चुके हैं नसीरुद्दीन शाह   नसीरुद्दीन शाह पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। वह कई बार सरकार की नीतियों, सामाजिक माहौल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बयान दे चुके हैं। उनके बयानों पर अक्सर चर्चा और विवाद दोनों देखने को मिलते हैं।   शिक्षा और राजनीति पर बहस जारी   नसीरुद्दीन शाह के ताजा बयान ने एक बार फिर शिक्षा, नेतृत्व और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर उनके समर्थक इसे एक कलाकार की सामाजिक चिंता बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे राजनीतिक आरोप के रूप में देख रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 23, 2026 0
Abhishek Banerjee
गाड़ी पर लटकने के मामले में अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, कोलकाता पुलिस फिर भेजेगी नोटिस

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें गाड़ी पर सुरक्षाकर्मियों के लटककर यात्रा करने के मामले में बढ़ती नजर आ रही हैं। कोलकाता पुलिस उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और जवाब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में पुलिस अब उन्हें एक नया नोटिस जारी करने की तैयारी में है, जिसमें स्पष्ट रूप से उन दस्तावेजों और जानकारियों का उल्लेख किया जाएगा, जो अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।   कालीघाट थाना पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट दरअसल, कालीघाट थाना पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट के कथित उल्लंघन के मामले में अभिषेक बनर्जी को नोटिस भेजकर आवश्यक दस्तावेज जमा करने को कहा था। जवाब देने की समय-सीमा समाप्त होने के बाद अभिषेक ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से पुलिस को कुछ दस्तावेज सौंपे। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण जानकारियां अब भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।   यह मामला बागुईहाटी निवासी राजीव सरकार की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अभिषेक बनर्जी के काफिले में दो सुरक्षाकर्मी वाहन के दरवाजे से बाहर लटककर यात्रा कर रहे थे, जो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 123 और धारा 184 का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता ने इसे खतरनाक और कानून के विरुद्ध बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।   जांच के दौरान  जांच के दौरान पुलिस ने वाहन खरीदने की तारीख, चालक की पहचान और पता, तथा वाहन से लटक रहे सुरक्षाकर्मियों की पहचान संबंधी जानकारी मांगी थी। पुलिस का कहना है कि इन सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले हैं, इसलिए जल्द ही नया नोटिस जारी किया जाएगा।   उधर, अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई मामलों में जांच एजेंसियों के दायरे में हैं। उन पर विभिन्न भ्रष्टाचार मामलों में ईडी और सीबीआई की जांच चल रही है। इसके अलावा अन्य कानूनी मामलों में भी उनकी भूमिका की जांच जारी है। ऐसे में इस नए प्रकरण ने उनकी राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
CP Singh
वित्त मंत्री की सुरक्षा विवाद पर गरमाई सियासत, सीपी सिंह बोले- दोबारा सुरक्षा लें तो लोग हंसेंगे

रांची। झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सुरक्षा व्यवस्था लौटाए जाने के मुद्दे पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक सीपी सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि वित्त मंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था छोड़ दी है, तो भविष्य में सरकार दोबारा सुरक्षा उपलब्ध कराए, तब भी उन्हें उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए, अन्यथा लोग उनका मजाक उड़ाएंगे।   सीपी सिंह ने कहा  सीपी सिंह ने कहा कि किसी मंत्री का अपनी ही सरकार के खिलाफ पत्र लिखना और उसे सार्वजनिक करना कई सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि ऐसे मामलों का समाधान सरकार के भीतर होना चाहिए, न कि मीडिया के माध्यम से। उन्होंने कहा कि सरकार के वरिष्ठ मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जवाब तक नहीं देते, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे मामले में डीजीपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई होनी चाहिए।   भाजपा विधायक ने कहा भाजपा विधायक ने कहा कि फिलहाल वित्त मंत्री बिना सुरक्षा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं और जनता भी इसे देख रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार बाद में उन्हें फिर से सुरक्षा उपलब्ध कराती है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से यह कहना चाहिए कि वे बिना सुरक्षा के ही जनता की सेवा करेंगे। तभी उनके फैसले की गंभीरता साबित होगी।   सीपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन डीजीपी एमवी राव के कार्यकाल में उनके बयान के बाद रातोंरात उनके आवास से हाउस गार्ड हटा लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी मुख्यमंत्री को ही प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनके तबादले और पदस्थापन का अधिकार मुख्यमंत्री के पास होता है।   उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की अधिक मौजूदगी कई बार खतरे को भी बढ़ाती है। स्वयं उन्होंने कई यात्राएं बिना सुरक्षा के की हैं। सीपी सिंह ने कहा कि यदि वित्त मंत्री वास्तव में संयुक्त सचिव के पत्र से आहत होकर यह कदम उठा रहे हैं तो उन्हें अपने फैसले पर कायम रहना चाहिए। अन्यथा यदि वे बाद में सुरक्षा स्वीकार करते हैं तो यह केवल राजनीतिक दिखावा माना जाएगा और उनकी छवि पर सवाल उठेंगे।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Ram Mandir Donation
राम मंदिर चंदा विवाद पर दिग्विजय सिंह का हमला, बोले- ‘महाकाल मंदिर में भी हो रही चंदा चोरी’

भोपाल, एजेंसियां। राम मंदिर चढ़ावा और चंदा संग्रह से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में महिला कांग्रेस द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ कार्यक्रम में शामिल हुए दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि चंदे में गड़बड़ी हुई है और इसे "आस्था के साथ धोखा" बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और अब इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे।   'आस्था के साथ हुई चोरी, कोर्ट जाऊंगा' दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके वकील ने उन्हें कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है, क्योंकि उन्होंने भी मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि यह केवल धन की नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था की चोरी का मामला है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने घरों और मंदिरों के बाहर "चंदा चोरों से सावधान" जैसे बैनर लगाएं।   महाकाल मंदिर और बीजेपी पर लगाए आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में भी चंदे की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के कार्यकाल में महाकाल मंदिर की जमीन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी संस्था को आवंटित की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और मंदिर परिसर से जुड़े विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है।   राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट पर भी उठाए सवाल दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से चंदा जुटाया गया, लेकिन उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज पर भी सवाल उठाए तथा कहा कि वह इस पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देंगे।   हालांकि, दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी या संबंधित मंदिर ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विवाद आगे और तेज होने की संभावना है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Tamil Nadu Politics
तमिलनाडु में सियासी बवाल, TVK विधायक को 35 करोड़ के ऑफर का दावा

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के विधायक एन. इलैयाराजा ने आरोप लगाया है कि उन्हें पार्टी छोड़ने और सरकार के खिलाफ जाने के लिए 35 करोड़ रुपये का लालच दिया गया। विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पूर्व डीएमके मंत्री वी. सेंथिल बालाजी के भाई अशोक कुमार के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।   विधायक का आरोप- पार्टी बदलने के लिए मिला ऑफर एन. इलैयाराजा का आरोप है कि उन्हें कई बार संपर्क कर सत्तारूढ़ दल छोड़ने के लिए दबाव बनाया गया। शिकायत में कहा गया है कि सरकार गिराने की कथित साजिश के तहत उन्हें 35 करोड़ रुपये की पेशकश की गई और इनकार करने पर धमकियां भी दी गईं। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।   जांच में सामने आए नए दावे पुलिस के अनुसार, इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में शामिल एक आरोपी नरेश ने कथित तौर पर बताया कि उसने विधायक से संपर्क करने से पहले चेन्नई में अशोक कुमार से मुलाकात की थी। उसने यह भी दावा किया कि उसने अशोक कुमार और वी. सेंथिल बालाजी के कहने पर विधायक से संपर्क किया था। इन्हीं बयानों के आधार पर पुलिस ने अशोक कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है।   राजनीतिक माहौल पहले से गर्म यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद बनी गठबंधन सरकार की स्थिरता को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। TVK को चुनाव में 108 सीटें मिली थीं और कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से पार्टी ने सरकार बनाई थी। दूसरी ओर, डीएमके लगातार सरकार के बहुमत और स्थिरता पर सवाल उठाती रही है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 2, 2026 0
Vijay Political Party
'5 साल नहीं चलेगी विजय सरकार', स्टालिन का बड़ा दावा- 3 से 6 महीने में हो सकता है सत्ता परिवर्तन

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि मौजूदा सरकार अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अगले तीन से छह महीने के भीतर राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं और मध्यावधि चुनाव की नौबत भी आ सकती है।   चेन्नई में आयोजित डीएमके के एक कार्यक्रम में, जहां विभिन्न दलों के पांच हजार से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, स्टालिन ने कहा कि टीवीके अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। उनके अनुसार, सरकार उन राजनीतिक दलों के समर्थन से चल रही है जो पहले डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की स्थिति कमजोर है और उसका भविष्य सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है।   स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनीतिक हालात कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा और जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पांच साल इंतजार करने के बजाय संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को अभी से मजबूत करना चाहिए।   स्टालिन का यह बयान  स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विधानसभा चुनाव में बहुमत से पीछे रहने के बाद टीवीके ने कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से सरकार बनाई थी। हाल ही में वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके ने भी डीएमके गठबंधन से अलग होकर टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे राज्य की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Posters describing Rahul Gandhi as "missing" displayed in Delhi, sparking a political controversy between the BJP and Congress.
दिल्ली में राहुल गांधी को लेकर लगे 'गुमशुदा' पोस्टरों पर सियासत तेज, बीजेपी का हमला

  नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर लगाए गए 'गुमशुदा' पोस्टरों ने राजनीतिक विवाद को हवा दे दी है। शहर के कई इलाकों में लगाए गए इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ उन्हें "गुमशुदा" बताया गया है और उनकी विदेश यात्राओं को लेकर तंज कसा गया है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पोस्टरों में क्या लिखा है? दिल्ली में लगाए गए पोस्टरों में बड़े अक्षरों में "गुमशुदा" लिखा गया है। पोस्टर में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ लिखा गया है: नाम: राहुल गांधी पहचान: हमेशा विदेश में पाए जाते हैं। किसी पब में हो सकते हैं, किसी बीच पर हो सकते हैं। तलाश जारी है। इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए उन्हें "पर्यटन का नेता" और "लापता राहुल बाबा" बताया। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में बिना छुट्टी लिए लगातार काम किया है, जबकि राहुल गांधी महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसरों पर अक्सर विदेश यात्राओं पर चले जाते हैं। पूनावाला ने आरोप लगाया कि जब संसद, देश या उनकी पार्टी को उनकी जरूरत होती है, तब राहुल गांधी विदेश में होते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का खर्च किस स्रोत से उठाया जाता है। अर्जुन राम मेघवाल ने भी किया हमला केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी पोस्टरों के मुद्दे पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का तरीका "झूठ बोलो और फिर भाग जाओ" जैसा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी कई बार ऐसे मुद्दों पर राजनीति करते हैं, जिनसे देश में भ्रम और अशांति फैलती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नीति या परीक्षा व्यवस्था पर सुझाव हैं तो उन्हें रचनात्मक तरीके से रखा जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया पोस्टर विवाद पर कांग्रेस की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद सत्र और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बना रह सकता है। दिल्ली में लगे इन पोस्टरों ने एक बार फिर राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Rameshwar Oraon ED Summons
रामेश्वर उरांव को ईडी समन पर गरमाई सियासत, बंधु तिर्की का बीजेपी पर तीखा हमला

रांची। झारखंड के कथित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया है। झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षामंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए कर रही है।   'समन से बाल भी बांका नहीं होगा' बंधु तिर्की ने कहा कि डॉ. रामेश्वर उरांव एक सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं और ईडी के समन से उनका "बाल भी बांका नहीं होगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। तिर्की ने दावा किया कि उन्हें भी पहले बिना ठोस तथ्यों के मामलों में फंसाकर जनता के बीच गलत संदेश देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता भाजपा की कार्यशैली और राजनीतिक रणनीति को अच्छी तरह समझती है।   भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप पूर्व मंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी के कई नेताओं पर भी भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उन मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता भानु प्रताप शाही का नाम लेते हुए कहा कि जिन पर पहले घोटालों के आरोप लगे, वे भाजपा में शामिल होने के बाद "पाक-साफ" हो गए। बंधु तिर्की ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में भ्रष्टाचार के पैसे से जमीन खरीदने और संपत्ति बनाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन उन पर कोई जांच नहीं हो रही।   उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि ईडी या अन्य एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। तिर्की ने कहा कि 2 अगस्त को रांची में होने वाला आदिवासी महाजुटान भाजपा को जनता की वास्तविक ताकत का एहसास करा देगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इस कार्रवाई से डरने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Youth Congress workers in Varanasi display Rahul Gandhi as Lord Parashuram during his 56th birthday celebrations on the Ganga ghat.
राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने पर विवाद, BJP बोली- यह हिंदू धर्म का अपमान

  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के 56वें जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित कार्यक्रम ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित किया गया, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है। वाराणसी में अनोखे अंदाज में मनाया गया जन्मदिन वाराणसी में गंगा घाट पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का जन्मदिन प्रतीकात्मक हिंदू रीति-रिवाजों के साथ मनाया। इस दौरान उनकी एक तस्वीर प्रदर्शित की गई, जिसमें उन्हें भगवान परशुराम के स्वरूप में दिखाया गया था। तस्वीर में राहुल गांधी के एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में भारतीय संविधान की प्रति दिखाई गई। कार्यकर्ताओं ने तस्वीर पर दूध अर्पित कर जन्मदिन मनाया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। BJP ने जताई कड़ी आपत्ति भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कांग्रेस के लिए राहुल गांधी भगवान हो सकते हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित करना हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर हिंदू परंपराओं का लगातार अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने समय-समय पर हिंदू परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और मान्यताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में "हिंदू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कई अवसरों पर हिंदू धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद पर समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में दिखाने का उद्देश्य सामाजिक न्याय, संविधान और समानता के संदेश को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना था। राजनीतिक बहस तेज राहुल गांधी के जन्मदिन समारोह के दौरान सामने आई इस तस्वीर ने एक बार फिर धर्म और राजनीति के संबंधों पर बहस छेड़ दी है। भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि कांग्रेस समर्थक इसे प्रतीकात्मक राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब देश में विभिन्न दल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Falta violence case
फाल्टा हिंसा मामले में टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने 16 जून को फाल्टा थाना क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसके दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस पर पथराव तथा हमले की घटनाएं सामने आईं।   पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक थाना परिसर के आसपास जमा हो गए थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बचने के लिए पास के तालाब में भी कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।   भारत-नेपाल सीमा से पकड़ा गया था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को इससे पहले भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कम से कम सात आपराधिक केस दर्ज बताए जाते हैं। वह फाल्टा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।   हिंसा मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियां फाल्टा हिंसा मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने थाने का घेराव कर हिरासत में बंद जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला भी किया गया।   इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शुवेंदु अधिकारी  ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले के संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 12 पुलिस हिरासत और 13 न्यायिक हिरासत में हैं।

anjali kumari जून 20, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0