Political News India

West Bengal Rajya Sabha By Election
पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को होगा उपचुनाव

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों के लिए निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा कर दी है। इन सीटों पर 24 जुलाई 2026 को मतदान कराया जाएगा। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और इसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। यह उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों को भरने के लिए कराया जा रहा है।   चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार तीनों सीटों पर एक साथ मतदान और मतगणना होगी। राज्यसभा की इन आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए निर्वाचन प्रक्रिया तय समय के भीतर पूरी की जाएगी। राजनीतिक दृष्टि से यह उपचुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के घटनाक्रमों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।   राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस्तीफा देने वाले तीनों पूर्व सांसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर सकते हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है, लेकिन इस्तीफे के बाद उनकी भाजपा नेताओं के साथ लगातार मुलाकातें और पार्टी के पक्ष में दिए गए बयान इस संभावना को मजबूत कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो चुनाव दिलचस्प हो सकता है।   जानकारों का क्या है कहना? जानकारों का मानना है कि विधानसभा में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर भाजपा इन सीटों पर अपनी रणनीति के साथ उतर सकती है। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।   क्या है मामला? गौरतलब है कि सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक के राज्यसभा कार्यकाल की अवधि मार्च 2029 तक थी, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक शेष था। तीनों नेताओं ने जून 2026 में राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही तृणमूल कांग्रेस से भी दूरी बना ली थी। अब 24 जुलाई को होने वाला उपचुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Maharashtra politics
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल, एक ही फ्लाइट में दिखे देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे

मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजनीति में शनिवार को उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे मुंबई से नागपुर जाने वाली एक ही फ्लाइट में सफर करते नजर आए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं।   एक फ्लाइट, कई राजनीतिक चर्चाएं   फडणवीस और उद्धव ठाकरे का एक ही विमान में सफर करना इसलिए चर्चा का विषय बन गया क्योंकि दोनों लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। विमान में मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सामान्य शिष्टाचार निभाया, लेकिन इस तस्वीर ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।   बीजेपी ने अटकलों को किया खारिज   बीजेपी ने इस घटना को महज संयोग बताते हुए कहा कि दोनों नेता राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, दुश्मन नहीं। पार्टी नेताओं ने किसी भी तरह की राजनीतिक बातचीत या नए समीकरण बनने की अटकलों को खारिज किया है।   नागपुर दौरे पर उद्धव ठाकरे   उद्धव ठाकरे नागपुर दौरे पर पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने पहुंचे हैं। उन्होंने जल्द ही नागपुर में एक बड़ी जनसभा आयोजित करने का भी ऐलान किया है, जिसे आगामी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।   पहले से गरम है महाराष्ट्र की राजनीति   हाल के दिनों में शिवसेना (यूबीटी) के कई नेताओं और सांसदों के दल बदलने की खबरों के बीच महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही गरम है। ऐसे माहौल में फडणवीस और उद्धव ठाकरे की यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

anjali kumari जून 27, 2026 0
Rajya Sabha elections update
राज्यसभा चुनाव: इंडी गठबंधन के विधायक पहुंचे विधानसभा, थोड़ी देर में करेंगे मतदान

रांची। इंडी गठबंधन के विधायक राज्यसभा चुनाव में मतदान करने झारखंड विधानसभा पहुंच चुके हैं। वहीं,  राज्यसभा चुनाव में एनडीए के सभी विधायकों ने अपना वोट डाल दिया है। इंडी गठबंधन के विधायकों ने अब तक मतदान शुरू नहीं किया है। विधानसभा के कमरा नंबर 42 में मतदान की प्रक्रिया जारी है। बता दें कि झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। मतदान सुबह नौ बजे से शुरू हुआ है, जो शाम चार बजे तक चलेगा। वहीं, पांच बजे के बाद मतगणना होगी। रात आठ बजे तक नतीजे घोषित कर दिये जायेंगे।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Rajya Sabha Elections
राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए एनडीए ने विधायकों को होटल में किया शिफ्ट

रांची। झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। क्रॉस वोटिंग की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपने सभी विधायकों को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में ठहराने का फैसला किया है। चुनाव संपन्न होने तक सभी विधायक एक साथ इसी होटल में रहेंगे और यहीं से चुनावी रणनीति तैयार की जाएगी।   एक साथ रहेंगे, एक साथ करेंगे मतदान गठबंधन नेतृत्व ने सभी एनडीए विधायकों को निर्धारित समय तक होटल पहुंचने के निर्देश दिए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मतदान तक सभी विधायक एक ही स्थान पर रहेंगे, ताकि संगठनात्मक एकजुटता बनी रहे और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोका जा सके। मतदान के दिन सभी विधायक होटल से एक साथ विधानसभा के लिए रवाना होंगे। इस दौरान उन्हें राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया और वरीयता क्रम के अनुसार वोट डालने का प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।   परिमल नथवाणी की जीत पर पूरा जोर एनडीए इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए प्रथम वरीयता के 28 मतों की आवश्यकता होती है। फिलहाल एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के 21 तथा आजसू, लोजपा और जदयू के एक-एक विधायक शामिल हैं।   चार अतिरिक्त वोट जुटाने की रणनीति बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए एनडीए को अभी चार और वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि होटल में आयोजित बैठकों के दौरान इन्हीं अतिरिक्त मतों के समर्थन को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी। गठबंधन नेतृत्व का उद्देश्य न केवल अपने विधायकों को एकजुट रखना है, बल्कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की राजनीतिक टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की संभावना को भी पूरी तरह खत्म करना है। ऐसे में राज्यसभा चुनाव से पहले एनडीए की यह बाड़ेबंदी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

anjali kumari जून 16, 2026 0
Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी के घर पुलिस की छापेमारी

कोलकता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार तड़के बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी थी। पुलिस का उद्देश्य उनके कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की तलाश करना बताया गया, जो कथित तौर पर फरार हैं।   तड़के 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, टीम सुबह करीब 3 बजे आवास पर पहुंची। शुरुआत में दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन जवाब न मिलने पर घंटों इंतजार किया गया। इसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की मदद से मुख्य द्वार का ताला तोड़कर पुलिस घर के अंदर दाखिल हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, महिला कर्मी और केंद्रीय बल तैनात रहे।   टीएमसी का विरोध और आरोप टीएमसी ने इस कार्रवाई को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस ने जबरन ताला तोड़कर घर में प्रवेश किया और तलाशी ली। छापेमारी के दौरान चार घंटे से अधिक समय तक कार्रवाई चली और सुबह तक सुरक्षा बल परिसर में मौजूद रहे।   ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत अपने आवास से अभिषेक बनर्जी के घर पहुंचीं। कुछ देर बाद संयुक्त टीम वहां से रवाना हो गई।   लगातार जांच एजेंसियों के समन अभिषेक बनर्जी को आने वाले दिनों में कई जांच एजेंसियों के सामने पेश होना है। 14 से 16 जून के बीच उन्हें विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले, शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य मामलों में पूछताछ के लिए बुलाया गया है। यह घटना राज्य की सियासत में नए विवाद और तनाव का कारण बन गई है।

anjali kumari जून 13, 2026 0
BJP MLA Raju Singh
बीजेपी विधायक राजू सिंह को बड़ा झटका, गैर इरादतन हत्या मामले में दोषी करार

पटना, एजेंसियां। बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें तत्काल हिरासत में लेने का आदेश भी जारी किया है। यह मामला वर्ष 2018 की एक न्यू ईयर पार्टी में हुई फायरिंग से जुड़ा है, जिसमें एक महिला डॉक्टर की जान चली गई थी।   अदालत ने राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी माना है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह फैसला सुनाया। सजा की अवधि पर फैसला अलग से सुनाया जा सकता है।   पत्नी समेत तीन अन्य आरोपियों को मिली राहत इस मामले में कोर्ट ने राजू सिंह की पत्नी रेनू सिंह, राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर उन्हें राहत प्रदान की। जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2018 को दिल्ली के फतेहपुर बेरी क्षेत्र में आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान जश्न में फायरिंग की गई थी। इस दौरान चली गोली से डॉ. अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिनकी बाद में मौत हो गई। घटना के बाद फतेहपुर बेरी थाने में मामला दर्ज किया गया था।   राजनीतिक सफर भी रहा चर्चा में राजू सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वे विभिन्न राजनीतिक दलों—जेडीयू, लोजपा और वीआईपी—से जुड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे। वर्ष 2022 में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था। उनकी पत्नी रेणु सिंह भी राजनीति में सक्रिय हैं और पूर्वी चंपारण से एमएलसी रह चुकी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद राजू सिंह के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

Unknown जून 6, 2026 0
JMM Rajya Sabha Ticket
JMM ने बैजनाथ राम को थमाया राज्यसभा चुनाव का टिकट

रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी सरगर्मी के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने एक प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। पार्टी विधायक बैजनाथ राम को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है।  पार्टी का कहना है कि देर शाम तक दूसरे प्रत्याशी की भी घोषणा हो सकती है। मालूम हो कि आज शाम ही प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही झामुम ने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी है।

Unknown जून 6, 2026 0
Rajya Sabha Elections
राज्यसभा चुनावः JMM नाराज, कांग्रेस मांग रही माफी

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने जा रहे चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रवीण झा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके बाद से ही झारखंड का सियासी गलियारा गरमाया हुआ है। अंदर खाने से खबरें आ रही हैं कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा कांग्रेस के इस कदम से नाराज हैं। इसके बाद से ही प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं की नींद उड़ी हुई है। कई कांग्रेस नेता तो सार्वजनिक रूप माफी भी मांग रहे हैं। उधर विपक्षी खेमा इसे लेकर मजे ले रहा हैं।  दरअसल, राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद से ही कांग्रेस एक सीट की मांग कर रही थी। वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने साफ इशारा दे दिया था कि उसे दोनों सीटें चाहिए। कांग्रेस प्रभारी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2-3 दिन में जबाव देने की बात कही थी, लेकिन उनकी चुप्पी भी मामले में सस्पेंस बढ़ाती जा रही थी। इसी बीच कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली से ही झारखंड में प्रत्याशी दिये जाने की घोषणा कर दी।  कांग्रेस द्वारा दिल्ली से राज्यसभा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद झामुमो ने नाराजगी व्यक्त की। झामुमो और कांग्रेस में तनातनी बढ़ गई है। गुरुवार रात कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा के बाद शुक्रवार को झामुमो विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने कहा कि एकतरफा प्यार कब तक चलेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सभी सरकारी कार्यक्रमों को स्थगित कर अपने आवास पर पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की बैठक की। केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन फैसला लेने के लिए अधिकृत करीब दो घंटे चली बैठक में सभी नेताओं ने एक सुर में दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने का सुझाव दिया। साथ ही केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन को इस पर फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया। इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार कौन होंगे, यह निर्णय भी मुख्यमंत्री लेंगे। अब झामुमो में अंजनी सोरेन, विनोद कुमार पांडेय, फागू बेसरा और प्रणव वर्मा के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। झामुमो नेता कांग्रेस से नाराज बैठक के बाद मंत्री हफीजुल हसन और योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि हमने अपनी भावनाओं से केंद्रीय अध्यक्ष को अवगत करा दिया है। इसमें दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की सलाह दी गई है। इसके लिए हेमंत सोरेन को अधिकृत कर दिया गया है। वहीं पूर्व मंत्री बैजनाथ राम के अनुसार-कांग्रेस ने कहा था कि मुख्यमंत्री की पसंद का प्रत्याशी होगा। फिर अचानक प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर दी। कांग्रेस के इस कदम पर सबने नाराजगी जताई। हम पूरे त्याग के साथ एकतरफा प्यार करते आ रहे हैं : सुप्रियो झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन में हम पूरे त्याग के साथ एकतरफा प्यार करते आ रहे हैं। वर्ष 2019 में सिर्फ एक विधायक वाले राजद के सत्यानंद भोक्ता को मंत्री बनाया। कांग्रेस को चार मंत्री पद मिले। वर्ष 2024 में भी कांग्रेस को चार मंत्री पद मिले। इसके बावजूद इन दोनों दलों ने बिहार विधानसभा चुनाव में वादाखिलाफी की। पहले राजद ने दरकिनार किया, फिर कांग्रेस ने भी साथ नहीं दिया। असम विधानसभा चुनाव में भी हमें दरकिनार किया गया। 2024 का लोकसभा चुनाव में झामुमो की बदौलत कांग्रेस को दोनों सीटें मिलीं। विधानसभा चुनाव में भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन को 56 सीटें आईं। इस हिसाब से दोनों सीटों पर झामुमो का दावा बनता है। कांग्रेस ने जब कहा था कि सीएमओ की पंसद का उम्मीदवार होगा, तो अंतिम निर्णय पर पहुंचने के पहले प्रत्याशी क्यों घोषित कर दिया गया। झामुमो से दूरी पाटने के लिए सीएम से मिलेंगे : प्रदीप... कांग्रेस विधायक दल की शुक्रवार शाम बैठक हुई। इसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति तय की गई। बैठक के बाद विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि झामुमो के साथ जो थोड़ी बहुत दूरी दिख रही है, उसे दूर करने के लिए कांग्रेस नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलेंगे। कांग्रेस का तर्क उधर, झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्‌टाचार्य के एक तरफा प्यार वाले बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा-प्रत्याशी की घोषणा से पहले प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्‌टी विक्रमार्क ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी मुख्यमंत्री से बात की थी। इसके बाद प्रत्याशी की घोषणा की गई। कमलेश ने कहा कि गठबंधन से राज्यसभा चुनाव के लिए दो प्रत्याशी होंगे और दोनों ही जीतेंगे।  कांग्रेस नेताओं ने मांगी माफी इधर, झारखंड मुक्ति मोर्चा की  नाराजगी पर कांग्रेस के कई नेताओं ने माफी मांग ली है। प्रदेश प्रभारी के राजू के साथ कांग्रेस विधायक दल के नेताओं की हुई बैठक के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री का दिल दुखा है, तो हम क्षमा प्रार्थी हैं। उन्होंने गठबंधन में किसी दरार से साफ इंकार किया। वहीं, बोकारो से कांग्रेस की विधायक श्वेता सिंह ने भी लगभग इसी प्रकार का बयान दिया। उन्होंने कहा कि झामुमो का दिल दुखा है, तो वह  क्षमा प्रार्थी हैं। वहीं विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस और झामुमो के बीच की खाई को पाटने की कोशिश की जा रही है। अब प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू मुख्यमंत्री से मिल कर गिला-शिकवा दूर करने की कोशिश करेंगे, ताकि गठबंधन में आयी दरार के नहीं पटने पर भी राज्य की जनता के बीच यह संदेश जा सके कि कांग्रेस ने गठबंधन को बनाए रखने के लिए अपना धर्म निभाया। अब गठबंधन धर्म का पालन करने की जिम्मेदारी झामुमो पर है।

Unknown जून 6, 2026 0
Jharkhand Assembly
जिस कांग्रेस ने परिसीमन का विरोध किया, उसी के नेता ने झारखंड में विधानसभा सीटें बढ़ाने के लिए पीएम को पत्र लिखा

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव विनय सिन्हा दीपू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य विधानसभा की सीटों की संख्या 81 से बढ़ाकर 150 करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे आदिवासी, मूलवासी, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति समेत सभी वर्गों को बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा। दिलचस्प बात है कि पिछले दिनों लोकसभा में परिसीमन को लेकर पेश बिल का कांग्रेस और विपक्षी दलों ने विरोध किया था, जिसके कारण यह बिल पास नहीं हो सका। अब उसी कांग्रेस के नेता झारखंड सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।  आदिवासी-मूलवासी हितों के लिए सीटें बढ़ाने की मांग विनय सिन्हा दीपू ने कहा कि आगामी परिसीमन को लेकर राज्य के आदिवासी और मूलवासी समाज में चिंता है। उनका मानना है कि जनसंख्या के बदलते आंकड़ों के कारण कई पारंपरिक जनजातीय सीटों पर असर पड़ सकता है, जिससे इन समुदायों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होने की आशंका है। विनय सिन्हा दीपू ने पत्र में लिखा है कि झारखंड का क्षेत्रफल करीब 79 हजार वर्ग किलोमीटर है और राज्य के कई हिस्से जंगलों व पहाड़ी इलाकों में स्थित हैं। मौजूदा व्यवस्था में एक विधानसभा क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है जिससे जनप्रतिनिधियों के लिए सभी क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। विधानसभा सीटें बढ़ाने के पीछे का तर्क कांग्रेस नेता विनय सिन्हा दीपू का तर्क है कि विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रों का आकार छोटा होगा और जनप्रतिनिधि लोगों की समस्याओं पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। साथ ही संताल परगना, कोल्हान और दक्षिणी छोटानागपुर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में आरक्षित सीटों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।

Unknown जून 2, 2026 0
West Bengal Cabinet
बंगाल में शुभेंदु सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार, 35 मंत्रियों ने ली शपथ

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन के बाद सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार का पहला और अब तक का सबसे बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार को नई सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।   कई प्रमुख नेताओं को मिली मंत्रिमंडल में जगह नए मंत्रिमंडल में कई चर्चित और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। शपथ लेने वालों में स्वपन दासगुप्ता, अशोक डिंडा, मनोज ओरांव, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, मालती रॉय, इंद्रनील खान, गौरीशंकर घोष, कल्याण चक्रवर्ती, राजेश महतो, अर्जुन सिंह और तापस राय जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कई नेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।   चुनावी जीत के बाद सरकार का बड़ा कदम हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस के लगभग 15 वर्षों के शासन का अंत किया था। सत्ता संभालने के बाद यह पहला बड़ा मंत्रिमंडलीय विस्तार है, जिससे सरकार प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।   विभागों के बंटवारे पर जल्द होगा फैसला सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के आवंटन को लेकर भी जल्द महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। पहली बार विधायक बने कई नेताओं को भी मंत्री पद देकर सरकार ने नए चेहरों पर भरोसा जताया है। संभावित रूप से शंकर घोष, शारद्वत मुखोपाध्याय, दुधकुमार मंडल और अन्य नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।   मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक दिन पहले सोशल मीडिया मंच एक्स पर मंत्रिमंडल विस्तार की जानकारी साझा की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सरकार की कार्यक्षमता बढ़ाने और चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

Unknown जून 1, 2026 0
Siddaramaiah Resignation
कर्नाटक: CM सिद्दारमैया ने दिया इस्तीफा, डीके शिवकुमार होंगे अगले मुख्यमंत्री

बेंगलुरु, एजेंसियां। CM सिद्दारमैया  ने गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी आलाकमान के निर्देश पर वे पद छोड़ देंगे। सिद्धारमैया ने कहा, “हाईकमान ने कल मुझे इस्तीफा देने को कहा, इसलिए मैंने अपना पद छोड़ दिया। अब नए मुख्यमंत्री को काम करने का अवसर मिलना चाहिए।”   राज्यपाल के सचिव को  दिया इस्तीफा  उन्होंने दोपहर करीब 3 बजे लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा सौंपा। उस समय उनके साथ उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार  भी मौजूद थे। राज्यपाल थावरचंद गहलोत पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से हैं।इससे पहले सिद्धारमैया ने अपने आवास पर मंत्रियों के साथ नाश्ता बैठक की, जिसमें उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी। बैठक के दौरान भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जब डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। कर्नाटक सरकार के मंत्री H. K. Patil ने बताया कि बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन गई है और वे राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

Unknown मई 28, 2026 0
Rajya Sabha Seat
राज्यसभा की एक सीट रहेगी सोरेन परिवार के पास!

रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की सियासत में इस बार पारिवारिक प्राथमिकता दिखनेवाली है। झामुमो ने अपनी रणनीति में गुरुजी की खाली सीट उनके परिवार में ही रखने की सोची है। संकेत मिल रहे हैं कि गुरुजी की खाली हुई सीट पर उनका ही परिवार दावा मजबूत कर रहा है। किसी महिला सदस्य को मिल सकता है मौका जानकारी के मुताबिक पार्टी इस बार परिवार की किसी महिला सदस्य को राज्यसभा भेजने की तैयारी में है। आधिकारिक तौर पर भले ही चुप्पी साधी गई हो, लेकिन अंदरखाने यह लगभग तय माना जा रहा है कि यह मौका परिवार के भीतर ही जाएगा। परिवार की महिलाओं के नाम पर मंथन पार्टी के अंदर जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें गुरुजी की बेटी अंजलि सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन की पहली पत्नी हेमलता सोरेन प्रमुख हैं। इन तीनों में से कोई भी अब तक राज्यसभा नहीं पहुंची हैं, ऐसे में पार्टी एक नया चेहरा सामने लाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे में सीएम हेमंत की बहन अंजलि सोरेन का दावा मजबूत दिखता है।  रूपी सोरेन दौड़ से बाहर गुरुजी की पत्नी रूपी सोरेन का नाम भी संभावित दावेदारों में आ सकता था, लेकिन उनकी लगातार खराब सेहत के कारण फिलहाल उन्हें इस दौड़ से बाहर माना जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी अन्य महिला सदस्यों पर फोकस कर रही है। अंदरखाने में बात हो रही पक्की हालांकि पार्टी के नेता सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक बातचीत में अधिकतर पदाधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस बार परिवार की महिला सदस्य को ही प्राथमिकता मिलेगी। कौन हैं अंजलि सोरेन मुख्यमंत्री की बड़ी बहन अंजलि सोरेन ओडिशा में सक्रिय राजनीति में जुड़ी हुई हैं। वे वहां लंबे समय से झामुमो की ओडिशा इकाई के साथ काम कर रही हैं। वह मयूरभंज जिले के रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं। मयूरभंज क्षेत्र में वे आदिवासी समुदायों के बीच काम करने, उनकी संस्कृति को बढ़ावा देने और स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती हैं। जेएमएम और राज्यसभा सदस्य का पुराना नाता राज्यसभा और जेएमएम सदस्यों का पुराना नाता है।  बात सोरेन परिवार की करें तो शिबू सोरेन सोरेन परिवार में सबसे अधिक गुरुजी तीन अलग-अलग अवधि में उच्च सदन में रहे हैं। उनका अंतिम कार्यकाल अगस्त 2025 तक था। वहीं गुरुजी के दूसरे बेटे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2009 में राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में राज्य स्तर पर केंद्रित हो गए। बसंत सफल नहीं रहे, पर पत्नी का हो सकता है गुड लक इनके अलावा बसंत सोरेन ने 2016 में राज्यसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन वे जीत नहीं सके। पार्टी से बात करें तो केडी सिंह झामुमो के कोटे से राज्यसभा सांसद थे। 2014 में इस्तीफा दे दिया था। वहीं स्टीफन मरांडी भी सदस्य रहे हैं। इनका कार्यकाल समय से पहले ही समाप्त हो गया था। वर्तमान में झामुमो से महुआ माजी और सरफराज अहमद राज्यसभा सदस्य हैं। सीएम से मिले धीरज, नाथवाणी भी संपर्क मे कांग्रेस नेता धीरज साहू ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से एक-दो बार मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि धीरज साहू ने मुख्यमंत्री से राज्यसभा की दूसरी सीट देने का आग्रह किया है। वहीं उद्योगपति परिमल नाथवाणी भी झामुमो से संपर्क की कोशिश में हैं। नाथवाणी ने कहा कि झामुमो ने सहयोग किया कि तो वे एक बार फिर झारखंड से राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

Unknown मई 25, 2026 0
Fuel Price Hike
पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ते दाम को लेकर मंत्री इरफान अंसारी ने सीएम को लिखा पत्र

रांची। झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स  ने राज्य में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक ईंधन बाजार में अस्थिरता के बीच झारखंड में ईंधन संकट ने आम लोगों के साथ-साथ उद्योग और परिवहन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस बीच मंत्री इरफ़ान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।   उद्योग और परिवहन पर सबसे ज्यादा असर चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कमी से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। एक ओर ईंधन की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि डीजल की कमी के कारण फैक्ट्रियों में जनरेटर तक नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उद्योग संचालन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन उद्योग पेट्रोल-डीजल पर सबसे अधिक निर्भर है। ऐसे में ईंधन संकट से माल ढुलाई, सप्लाई और बाजार व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। चैंबर ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर झारखंड में ईंधन की समुचित और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।   राजधानी में कई पेट्रोल पंप हुए ड्राई रांची सहित राज्य के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और अव्यवस्था देखी जा रही है। कई पेट्रोल पंपों के ड्राई होने की खबरों के बीच लोगों में चिंता बढ़ गई है। बढ़ती भीड़ के कारण पंपों पर तनावपूर्ण स्थिति बन रही है।   मंत्री इरफान अंसारी ने सीएम को लिखा पत्र स्थिति को गंभीर मानते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में ईंधन संकट पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा बढ़ाने और जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। मंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी हाल में लोगों को परेशानी में नहीं छोड़ा जाएगा।

Unknown मई 16, 2026 0
West Bengal CM Suvendu Adhikari after resigning from Nandigram assembly seat in Kolkata
बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने छोड़ी नंदीग्राम सीट, कहा- ‘नंदीग्राम हमेशा मेरे दिल में रहेगा’

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए कहा कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल का हिस्सा है। इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, “नंदीग्राम मेरे दिल में है। यहां की जनता ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जहां भी रहूं, नंदीग्राम के विकास के लिए हमेशा काम करता रहूंगा।” दो सीटों से जीत के बाद लिया फैसला शुभेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। अब इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना है और इसे लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि नंदीग्राम से उपचुनाव में उम्मीदवार कौन होगा। बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा नंदीग्राम नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। उस जीत को बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना गया था। इसके बाद भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की। केंद्र की योजनाओं को लेकर बड़ा बयान इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की हर योजना का लाभ बंगाल के गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। नंदीग्राम के विकास का किया वादा शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नंदीग्राम के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नंदीग्राम को विकास के मॉडल के रूप में तैयार करना चाहती है। विपक्ष ने उठाए सवाल वहीं, विपक्ष इस इस्तीफे को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नंदीग्राम सीट छोड़ने के पीछे भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी हो सकती है। राज्य की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नंदीग्राम उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और क्या यह सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का बड़ा रणक्षेत्र बनेगी।  

surbhi मई 16, 2026 0
Abhishek Banerjee
अभिषेक बनर्जी पर नफरत फैलाने और अशांति भड़काने का आरोप, FIR दर्ज

कोलकाता, एजेंसियां। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। बिधाननगर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह पहला मौका बताया जा रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई है।   सोशल एक्टिविस्ट की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला पुलिस सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम आने के अगले दिन सोशल एक्टिविस्ट राजीव सरकार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कई सार्वजनिक रैलियों में भड़काऊ बयान दिए, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच तनाव और वैमनस्य फैल सकता है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को भाषणों के वीडियो लिंक और संबंधित सामग्री भी सौंपी।   कई गैर-जमानती धाराएं लगाई गईं बिधाननगर साइबर क्राइम थाना ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। सेक्शन 192 के तहत अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया है। वहीं सेक्शन 196 के तहत विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाने का मामला दर्ज हुआ है, जो गैर-जमानती धारा है। इसके अलावा सेक्शन 351(2) के तहत डराने-धमकाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा सेक्शन 353(1)(c) के तहत झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं।   जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत भी कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता के अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) और 125 भी अभिषेक बनर्जी पर लगाई गई हैं। शिकायत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए कुछ बयानों का भी उल्लेख किया गया है।   राजनीतिक हलकों में तेज हुई बहस इस मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इसे चुनाव प्रचार में मर्यादा उल्लंघन का परिणाम बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। फिलहाल अभिषेक बनर्जी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Unknown मई 16, 2026 0
Mamata Banerjee addresses TMC leaders after Bengal election defeat at her Kalighat residence meeting
बंगाल में हार के बाद पहली बार बोलीं ममता बनर्जी, कहा- ‘जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वो स्वतंत्र हैं’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’  ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।  

surbhi मई 16, 2026 0
Sanjeev Arora Arrest
ED की बड़ी कार्रवाई, पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा गिरफ्तार

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। सुबह से ही चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके आवास पर ईडी की टीम छापेमारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि करीब 20 गाड़ियों में पहुंची टीम ने लंबे समय तक तलाशी अभियान चलाया। पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई है। इससे पहले लुधियाना स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी।   भगवंत मान ने बीजेपी पर साधा निशाना ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “पंजाब गुरुओं और भगत सिंह की धरती है, इसे कोई झुका नहीं सकता।” मान ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय ईडी और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करती है।   अरविंद केजरीवाल का भी केंद्र पर हमला आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने भी ईडी की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब को राजनीतिक रूप से दबाने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा पहले भी पंजाब के किसानों और राज्य के अधिकारों के खिलाफ काम करती रही है और अब ईडी की रेड के जरिए दबाव बनाया जा रहा है।   पंजाब में लगातार बढ़ रही ED की सक्रियता हाल ही में मोहाली और चंडीगढ़ में भी ईडी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें कुछ कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है।   राजनीतिक माहौल हुआ गर्म संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति और गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।

Unknown मई 9, 2026 0
Makhanlal Sarkar
कौन हैं माखनलाल सरकार? जिनका पीएम मोदी ने मंच पर छुए पैर सम्मान

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक पल देखने को मिला। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता Makhanlal Sarkar के पैर छुए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और गले लगाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखते ही पूरे समारोह में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।   कौन हैं माखनलाल सरकार? माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा के शुरुआती दौर के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। आजादी के बाद उन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1952 में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान वे जनसंघ संस्थापक Syama Prasad Mukherjee के साथ मौजूद थे। उस समय उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। 1980 में भाजपा के गठन के बाद माखनलाल सरकार ने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एक साल के भीतर लगभग 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।   शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में उमड़ा जनसैलाब पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह में हजारों भाजपा समर्थक शामिल हुए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया। झारखंड समेत कई राज्यों और विदेशों से भी समर्थक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से हेलीकॉप्टर के जरिए रेसकोर्स मैदान और फिर सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। खुले वाहन में सवार होकर उन्होंने समर्थकों का अभिवादन भी किया।   बंगाल की राजनीति में नए दौर का संकेत भाजपा नेताओं का मानना है कि यह सिर्फ सरकार बदलने का क्षण नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। वहीं माखनलाल सरकार का सम्मान भाजपा द्वारा अपने पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक विरासत को महत्व देने का संदेश भी माना जा रहा है।

Unknown मई 9, 2026 0
Rahul Gandhi addressing a public rally in Haryana while attacking BJP and Prime Minister Narendra Modi
हरियाणा में राहुल गांधी का बीजेपी पर बड़ा हमला, बोले- अब सत्ता से विदाई तय

Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को हरियाणा में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा. एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा का सत्ता में बने रहने का समय अब खत्म होने वाला है और जनता जल्द इसका जवाब देगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ अगर कोई पार्टी मजबूती से खड़ी हो सकती है, तो वह केवल कांग्रेस है. राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता के बीच जाएं और भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए संघर्ष तेज करें. “बीजेपी ने चुनाव चोरी करने का सिस्टम बनाया” राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हरियाणा में चुनाव “चोरी” किया और अब पश्चिम बंगाल तथा असम में भी वही रणनीति अपनाई गई है. उन्होंने आरोप लगाया, “इन्होंने चुनाव चोरी करने का सिस्टम बना दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग और नौकरशाही को कंट्रोल कर रखा है.” राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर भाजपा सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है. भारत जोड़ो यात्रा का किया जिक्र कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि करीब 4000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उन्हें देश की जनता की समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के युवा नेताओं को भी ऐसी यात्राएं करनी चाहिए ताकि वे जनता से सीधे जुड़ सकें और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझ सकें. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी साधा निशाना राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से अमेरिका को फायदा हुआ, जबकि भारत को कोई बड़ा लाभ नहीं मिला. राहुल गांधी ने कहा, “अमेरिका के दबाव में आकर पीएम मोदी ने ऐसा समझौता किया है, जिससे भारत के कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से भारत का पक्ष नहीं रख पा रहे हैं. “नफरत नहीं, मोहब्बत से चलेगा हिंदुस्तान” अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने सामाजिक सौहार्द और प्रेम का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि देश नफरत और हिंसा से नहीं, बल्कि मोहब्बत और भाईचारे से आगे बढ़ सकता है. इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, राव नरेंद्र सिंह और बीके हरिप्रसाद शामिल थे.  

surbhi मई 9, 2026 0
ED officials conduct raid at Punjab minister Sanjeev Arora’s residence in Chandigarh amid money laundering probe
ED Raid: पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी का छापा, दिल्ली-NCR तक कार्रवाई

ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई शुरू की. ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर भी पहुंची, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया. पीएमएलए के तहत हुई कार्रवाई ईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत की गई है. जांच एजेंसी ने पंजाब के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी समेत कुल पांच परिसरों पर तलाशी ली है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निवेश और कथित अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि ईडी ने अभी तक मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहला मौका नहीं है जब संजीव अरोड़ा ईडी की जांच के दायरे में आए हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापेमारी की थी. उस समय संजीव अरोड़ा ने कहा था कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है. 2024 में भी हुई थी रेड ईडी ने साल 2024 में भी लुधियाना पश्चिम से विधायक रहे संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा था. उस दौरान जांच औद्योगिक जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई थी. उस समय अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे. राजनीतिक में बढ़ी हलचल ताजा कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.  

surbhi मई 9, 2026 0
BJP leaders meeting in Kolkata ahead of West Bengal government formation after election victory
बंगाल में नई सरकार गठन की कवायद तेज, EC का नोटिफिकेशन जारी, 8 मई को BJP विधायक दल की बैठक

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग (EC) ने नई विधानसभा के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। 4 मई को आए चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, करीब 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) 80 सीटों पर सिमट गई। नतीजों के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 8 मई को BJP विधायक दल की बैठक सूत्रों के मुताबिक, 8 मई को BJP विधायक दल की अहम बैठक हो सकती है, जिसमें नेता का चयन किया जाएगा। इस बैठक के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता पहुंचने की भी संभावना है, जो पार्टी के पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रह सकते हैं। राज्यपाल को भेजा गया नोटिफिकेशन चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना राज्यपाल को भेज दी गई है। इसके साथ ही विजयी दल को सरकार गठन का दावा पेश करने का अधिकार मिल गया है। 7 मई को खत्म होगा विधानसभा का कार्यकाल पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसी बीच निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और वोटों की लूट हुई है। ममता बनर्जी ने कहा कि “हम असल मायने में नहीं हारे हैं, ऐसे में इस्तीफे का सवाल नहीं उठता।” 9 मई को हो सकता है शपथग्रहण सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथग्रहण 9 मई को हो सकता है। यह दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का है, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इस तारीख की पुष्टि के संकेत दिए हैं। अन्य राज्यों में भी प्रक्रिया शुरू चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी की है। इन अधिसूचनाओं के बाद सभी राज्यों में विजयी दल सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं। फिलहाल, बंगाल में सबकी नजर BJP विधायक दल की बैठक और मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान पर टिकी है, जो राज्य की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा।  

surbhi मई 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

India vs England Series
स्पोर्ट्स

इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0