रांची। झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने राज्य में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों पर गहरी चिंता जताई है। वैश्विक ईंधन बाजार में अस्थिरता के बीच झारखंड में ईंधन संकट ने आम लोगों के साथ-साथ उद्योग और परिवहन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस बीच मंत्री इरफ़ान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उद्योग और परिवहन पर सबसे ज्यादा असर चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कमी से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। एक ओर ईंधन की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर कीमतों में बढ़ोतरी ने बाजार पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। उन्होंने कहा कि डीजल की कमी के कारण फैक्ट्रियों में जनरेटर तक नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उद्योग संचालन मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन उद्योग पेट्रोल-डीजल पर सबसे अधिक निर्भर है। ऐसे में ईंधन संकट से माल ढुलाई, सप्लाई और बाजार व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। चैंबर ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर झारखंड में ईंधन की समुचित और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। राजधानी में कई पेट्रोल पंप हुए ड्राई रांची सहित राज्य के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और अव्यवस्था देखी जा रही है। कई पेट्रोल पंपों के ड्राई होने की खबरों के बीच लोगों में चिंता बढ़ गई है। बढ़ती भीड़ के कारण पंपों पर तनावपूर्ण स्थिति बन रही है। मंत्री इरफान अंसारी ने सीएम को लिखा पत्र स्थिति को गंभीर मानते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में ईंधन संकट पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा बढ़ाने और जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। मंत्री ने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी हाल में लोगों को परेशानी में नहीं छोड़ा जाएगा।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हुए कहा कि नंदीग्राम केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि उनके दिल का हिस्सा है। इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा, “नंदीग्राम मेरे दिल में है। यहां की जनता ने मुझे जो प्यार और विश्वास दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जहां भी रहूं, नंदीग्राम के विकास के लिए हमेशा काम करता रहूंगा।” दो सीटों से जीत के बाद लिया फैसला शुभेंदु अधिकारी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। संवैधानिक नियमों के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। अब इस सीट पर उपचुनाव होने की संभावना है और इसे लेकर राज्य की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक यह साफ नहीं किया गया है कि नंदीग्राम से उपचुनाव में उम्मीदवार कौन होगा। बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र रहा नंदीग्राम नंदीग्राम सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से बेहद अहम मानी जाती रही है। इसी सीट से शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था। उस जीत को बंगाल की राजनीति का ऐतिहासिक मोड़ माना गया था। इसके बाद भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत की। केंद्र की योजनाओं को लेकर बड़ा बयान इस्तीफे के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने केंद्र सरकार की योजनाओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब केंद्र की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं को पश्चिम बंगाल में प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की हर योजना का लाभ बंगाल के गरीब, किसान, महिला, युवा और श्रमिक तक पहुंचाना हमारी प्राथमिकता होगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। नंदीग्राम के विकास का किया वादा शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नंदीग्राम के विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। भाजपा नेताओं के मुताबिक, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट जल्द शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार नंदीग्राम को विकास के मॉडल के रूप में तैयार करना चाहती है। विपक्ष ने उठाए सवाल वहीं, विपक्ष इस इस्तीफे को राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि नंदीग्राम सीट छोड़ने के पीछे भाजपा की नई राजनीतिक तैयारी हो सकती है। राज्य की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि नंदीग्राम उपचुनाव में कौन उम्मीदवार होगा और क्या यह सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का बड़ा रणक्षेत्र बनेगी।
कोलकाता, एजेंसियां। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान कथित भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। बिधाननगर कमिश्नरेट की साइबर क्राइम पुलिस ने कई गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। यह पहला मौका बताया जा रहा है जब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई हुई है। सोशल एक्टिविस्ट की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला पुलिस सूत्रों के अनुसार चुनाव परिणाम आने के अगले दिन सोशल एक्टिविस्ट राजीव सरकार की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कई सार्वजनिक रैलियों में भड़काऊ बयान दिए, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच तनाव और वैमनस्य फैल सकता है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को भाषणों के वीडियो लिंक और संबंधित सामग्री भी सौंपी। कई गैर-जमानती धाराएं लगाई गईं बिधाननगर साइबर क्राइम थाना ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। सेक्शन 192 के तहत अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया है। वहीं सेक्शन 196 के तहत विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाने का मामला दर्ज हुआ है, जो गैर-जमानती धारा है। इसके अलावा सेक्शन 351(2) के तहत डराने-धमकाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तथा सेक्शन 353(1)(c) के तहत झूठी या भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप भी लगाए गए हैं। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत भी कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता के अलावा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 123(2) और 125 भी अभिषेक बनर्जी पर लगाई गई हैं। शिकायत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ दिए गए कुछ बयानों का भी उल्लेख किया गया है। राजनीतिक हलकों में तेज हुई बहस इस मामले के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दल इसे चुनाव प्रचार में मर्यादा उल्लंघन का परिणाम बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। फिलहाल अभिषेक बनर्जी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद Mamata Banerjee ने पहली बार पार्टी नेताओं और उम्मीदवारों के साथ बड़ी बैठक की। कोलकाता के कालीघाट स्थित आवास पर हुई इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। बैठक में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee भी मौजूद रहे। ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से हार से निराश न होने और संगठन को दोबारा मजबूत करने की अपील की। ‘तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं झुकेगी’ ममता बनर्जी ने बैठक में कहा,“जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को नए सिरे से खड़ा करूंगी। जो लोग पार्टी में बने रहेंगे, उनसे कहती हूं कि क्षतिग्रस्त पार्टी कार्यालयों का पुनर्निर्माण कीजिए, उन्हें रंगिए और फिर से खोलिए। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी उन्हें रंग दूंगी।” उन्होंने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं और पार्टी फिर से जनता के बीच मजबूती से खड़ी होगी। बंगाल में TMC को मिली बड़ी हार इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। आजादी के बाद पहली बार Suvendu Adhikari के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बनाई। 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस केवल 80 सीटों तक सिमट गई। वहीं ममता बनर्जी को भी अपनी भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट से हराया था। ‘जनादेश लूटा गया’ बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश को छीना गया है और पार्टी कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिश की गई। अभिषेक बनर्जी ने बढ़ाया उम्मीदवारों का मनोबल तृणमूल कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “हमारे उम्मीदवारों ने लगातार धमकियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ चुनाव लड़ा।” TMC के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य की सत्ता गंवाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठन को बचाए रखना और नेताओं के संभावित पलायन को रोकना सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर बड़े बदलाव और संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।
चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। सुबह से ही चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके आवास पर ईडी की टीम छापेमारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि करीब 20 गाड़ियों में पहुंची टीम ने लंबे समय तक तलाशी अभियान चलाया। पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई है। इससे पहले लुधियाना स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी। भगवंत मान ने बीजेपी पर साधा निशाना ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “पंजाब गुरुओं और भगत सिंह की धरती है, इसे कोई झुका नहीं सकता।” मान ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय ईडी और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करती है। अरविंद केजरीवाल का भी केंद्र पर हमला आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने भी ईडी की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब को राजनीतिक रूप से दबाने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा पहले भी पंजाब के किसानों और राज्य के अधिकारों के खिलाफ काम करती रही है और अब ईडी की रेड के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। पंजाब में लगातार बढ़ रही ED की सक्रियता हाल ही में मोहाली और चंडीगढ़ में भी ईडी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें कुछ कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। राजनीतिक माहौल हुआ गर्म संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति और गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक पल देखने को मिला। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंच पर मौजूद 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता Makhanlal Sarkar के पैर छुए, उन्हें शॉल ओढ़ाया और गले लगाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखते ही पूरे समारोह में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी। सोशल मीडिया पर भी यह तस्वीर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कौन हैं माखनलाल सरकार? माखनलाल सरकार पश्चिम बंगाल में भाजपा और राष्ट्रवादी विचारधारा के शुरुआती दौर के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। आजादी के बाद उन्होंने राष्ट्रवादी आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। वर्ष 1952 में कश्मीर में भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान वे जनसंघ संस्थापक Syama Prasad Mukherjee के साथ मौजूद थे। उस समय उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। 1980 में भाजपा के गठन के बाद माखनलाल सरकार ने पश्चिम दिनाजपुर, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने एक साल के भीतर लगभग 10 हजार लोगों को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद लगातार सात वर्षों तक जिला अध्यक्ष के रूप में काम किया, जो उस दौर में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में उमड़ा जनसैलाब पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के शपथ ग्रहण समारोह में हजारों भाजपा समर्थक शामिल हुए। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया। झारखंड समेत कई राज्यों और विदेशों से भी समर्थक इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां से हेलीकॉप्टर के जरिए रेसकोर्स मैदान और फिर सड़क मार्ग से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। खुले वाहन में सवार होकर उन्होंने समर्थकों का अभिवादन भी किया। बंगाल की राजनीति में नए दौर का संकेत भाजपा नेताओं का मानना है कि यह सिर्फ सरकार बदलने का क्षण नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। वहीं माखनलाल सरकार का सम्मान भाजपा द्वारा अपने पुराने कार्यकर्ताओं और वैचारिक विरासत को महत्व देने का संदेश भी माना जा रहा है।
Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को हरियाणा में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा. एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि भाजपा का सत्ता में बने रहने का समय अब खत्म होने वाला है और जनता जल्द इसका जवाब देगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ अगर कोई पार्टी मजबूती से खड़ी हो सकती है, तो वह केवल कांग्रेस है. राहुल गांधी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता के बीच जाएं और भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए संघर्ष तेज करें. “बीजेपी ने चुनाव चोरी करने का सिस्टम बनाया” राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा ने हरियाणा में चुनाव “चोरी” किया और अब पश्चिम बंगाल तथा असम में भी वही रणनीति अपनाई गई है. उन्होंने आरोप लगाया, “इन्होंने चुनाव चोरी करने का सिस्टम बना दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव आयोग और नौकरशाही को कंट्रोल कर रखा है.” राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाकर भाजपा सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रही है. भारत जोड़ो यात्रा का किया जिक्र कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि करीब 4000 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उन्हें देश की जनता की समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के युवा नेताओं को भी ऐसी यात्राएं करनी चाहिए ताकि वे जनता से सीधे जुड़ सकें और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझ सकें. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी साधा निशाना राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते से अमेरिका को फायदा हुआ, जबकि भारत को कोई बड़ा लाभ नहीं मिला. राहुल गांधी ने कहा, “अमेरिका के दबाव में आकर पीएम मोदी ने ऐसा समझौता किया है, जिससे भारत के कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से भारत का पक्ष नहीं रख पा रहे हैं. “नफरत नहीं, मोहब्बत से चलेगा हिंदुस्तान” अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने सामाजिक सौहार्द और प्रेम का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि देश नफरत और हिंसा से नहीं, बल्कि मोहब्बत और भाईचारे से आगे बढ़ सकता है. इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, राव नरेंद्र सिंह और बीके हरिप्रसाद शामिल थे.
ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई शुरू की. ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर भी पहुंची, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया. पीएमएलए के तहत हुई कार्रवाई ईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत की गई है. जांच एजेंसी ने पंजाब के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी समेत कुल पांच परिसरों पर तलाशी ली है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निवेश और कथित अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि ईडी ने अभी तक मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहला मौका नहीं है जब संजीव अरोड़ा ईडी की जांच के दायरे में आए हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापेमारी की थी. उस समय संजीव अरोड़ा ने कहा था कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है. 2024 में भी हुई थी रेड ईडी ने साल 2024 में भी लुधियाना पश्चिम से विधायक रहे संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा था. उस दौरान जांच औद्योगिक जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई थी. उस समय अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे. राजनीतिक में बढ़ी हलचल ताजा कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय चुनाव आयोग (EC) ने नई विधानसभा के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। 4 मई को आए चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया है। वहीं, करीब 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) 80 सीटों पर सिमट गई। नतीजों के बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 8 मई को BJP विधायक दल की बैठक सूत्रों के मुताबिक, 8 मई को BJP विधायक दल की अहम बैठक हो सकती है, जिसमें नेता का चयन किया जाएगा। इस बैठक के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता पहुंचने की भी संभावना है, जो पार्टी के पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद रह सकते हैं। राज्यपाल को भेजा गया नोटिफिकेशन चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना राज्यपाल को भेज दी गई है। इसके साथ ही विजयी दल को सरकार गठन का दावा पेश करने का अधिकार मिल गया है। 7 मई को खत्म होगा विधानसभा का कार्यकाल पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। इसी बीच निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और वोटों की लूट हुई है। ममता बनर्जी ने कहा कि “हम असल मायने में नहीं हारे हैं, ऐसे में इस्तीफे का सवाल नहीं उठता।” 9 मई को हो सकता है शपथग्रहण सूत्रों के अनुसार, नई सरकार का शपथग्रहण 9 मई को हो सकता है। यह दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती का है, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जा रहा है। BJP प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी इस तारीख की पुष्टि के संकेत दिए हैं। अन्य राज्यों में भी प्रक्रिया शुरू चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी नई विधानसभा के गठन के लिए अधिसूचना जारी की है। इन अधिसूचनाओं के बाद सभी राज्यों में विजयी दल सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं। फिलहाल, बंगाल में सबकी नजर BJP विधायक दल की बैठक और मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान पर टिकी है, जो राज्य की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा।
Punjab Politics: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के साथ दिल्ली का रुख किया है, जहां वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य हाल ही में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के मुद्दे को उठाना है, जिसे पार्टी ‘ग़ैरक़ानूनी दलबदल’ करार दे रही है। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और इसके संवैधानिक पहलुओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा विवाद? 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस फैसले को राज्यसभा सभापति की मंजूरी भी मिल गई, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया। हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह दलबदल कानून का स्पष्ट उल्लंघन है और इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के साथ समझौता किया गया है। राष्ट्रपति से क्या करेंगे मांग? भगवंत मान इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रपति के सामने विस्तार से रखेंगे और उनसे संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति हमारी बात जरूर सुनेंगी। वह संविधान की संरक्षक हैं और देश की सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकरण हैं। हमें न्याय की उम्मीद है।” बीजेपी का जवाब और सियासी तंज इस मुद्दे पर सुनील जाखड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें इस मुलाकात की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन भगवंत मान को अपने विधायकों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि AAP के विधायक भी भाजपा के कार्यक्रमों में पहुंच जाएं। इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के बीच सियासी जुबानी जंग और तेज हो गई है। संवैधानिक और राजनीतिक महत्व यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक दल बदल तक सीमित नहीं है, बल्कि दलबदल कानून, संसद की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। अगर इस पर कोई बड़ा फैसला आता है, तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है कि राज्यसभा जैसे सदन में दलबदल के मामलों को कैसे देखा और सुलझाया जाता है। आगे की राजनीति पर नजर अब सभी की निगाहें द्रौपदी मुर्मु से होने वाली इस मुलाकात पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर क्या संवैधानिक कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे AAP को कोई राहत मिलती है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पंजाब से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जो आने वाले दिनों में और भी गर्मा सकता है।
Maharashtra Vidhan Parishad Election: बंगाल और असम में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र में भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखा दी है। महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में पार्टी के 6 उम्मीदवार निर्विरोध जीतकर सदन में पहुंचे हैं। सोमवार (4 मई) को हुए चुनाव में कुल 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिससे राज्य की राजनीति में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन की स्थिति और मजबूत हो गई है। किन नेताओं को मिली जीत निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में उपसभापति नीलम गोरहे, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे और पूर्व मंत्री बी. काडू जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। भाजपा की ओर से सुनील विनायक कर्जतकर, माधवी नाइक, संजय नत्थूजी भेंडे, विवेक बिपिंदादा कोल्हे और प्रमोद शांताराम जठार जैसे उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं। कैसे हुआ निर्विरोध चुनाव इस चुनाव के लिए कुल 14 नामांकन दाखिल किए गए थे, जिनमें चार निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे। लेकिन आवश्यक शर्तें पूरी न करने के कारण इन सभी निर्दलीयों के नामांकन रद्द कर दिए गए। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं बचा, जिसके चलते सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। विपक्ष को सीमित सफलता जहां भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीतीं, वहीं शिवसेना (UBT) को केवल एक सीट पर संतोष करना पड़ा। बाकी सीटें सहयोगी दलों और अन्य उम्मीदवारों के खाते में गईं। राजनीतिक संकेत क्या हैं? महाराष्ट्र में यह नतीजे साफ संकेत देते हैं कि महायुति गठबंधन का दबदबा बरकरार है। बंगाल और असम के बाद महाराष्ट्र में भी भाजपा की मजबूती पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और संगठनात्मक पकड़ को दर्शाती है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में आज अहम दिन है, जहां नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा पहुंचते ही आत्मविश्वास से भरा अंदाज दिखाया। सदन में प्रवेश करने से पहले उन्होंने कैमरे के सामने विक्ट्री साइन दिखाया, जिससे उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिला। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। विशेष सत्र में शुरू हुई बहस शुक्रवार सुबह 11 बजे से विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हुआ, जिसमें विश्वास मत पर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर करीब 90 मिनट तक बहस चलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बहुमत साबित करने के लिए सदन में 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। एनडीए को बहुमत का भरोसा एनडीए गठबंधन के नेताओं और विधायकों ने विश्वास जताया है कि सरकार आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। जेडीयू विधायक श्याम रजक ने इसे मात्र औपचारिकता बताया, जबकि पंकज मिश्रा ने दावा किया कि महागठबंधन के कुछ विधायक भी एनडीए के संपर्क में हैं। अन्य विधायकों ने भी सरकार को मजबूत समर्थन मिलने की बात कही। विपक्ष पर निशाना, समर्थन का दावा एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि कुछ विपक्षी विधायक सरकार के पक्ष में आ सकते हैं। इससे सदन में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। सरकार के लिए अहम परीक्षा यह विश्वास मत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए पहली बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। हालांकि, सदन में एनडीए के पास पर्याप्त संख्या होने के कारण सरकार के बहुमत साबित करने में किसी बड़ी चुनौती की संभावना कम बताई जा रही है। राजनीतिक नजरें परिणाम पर टिकीं अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सदन में मतदान के दौरान क्या परिणाम सामने आता है। यह सत्र बिहार की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच सियासत अब ‘झालमुरी’ वीडियो पर गरमा गई है। नरेंद्र मोदी द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा हमला बोला है और इसे “नौटंकी” करार दिया है। क्या है पूरा मामला? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वे झाड़ग्राम की एक साधारण दुकान पर रुककर मशहूर बंगाली स्नैक झालमुरी खरीदते और खाते नजर आए। वीडियो में पीएम दुकानदार को पैसे देने पर जोर देते दिखे, जबकि दुकानदार मना करता रहा। ममता का हमला–‘कैमरे पहले से तैयार थे’ इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि यह “अचानक” कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, “अगर प्रधानमंत्री बिना कार्यक्रम के अचानक रुके, तो वहां कैमरे पहले से कैसे मौजूद थे? यह सब पहले से प्लान किया गया था।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के पॉकेट में 10 रुपये का नोट! क्या कोई इस पर विश्वास करेगा? यह सिर्फ नौटंकी है।” खान-पान की राजनीति पर भी निशाना ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी पर लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है और किसी पर भी प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। चुनावी माहौल में बढ़ी बयानबाजी पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर है। ऐसे में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े राजनीतिक हमले का रूप ले रहे हैं।
पूर्व डिप्टी CM ने लगाया ‘पुलिस गुंडागर्दी’ का आरोप हरियाणा के हिसार में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। Dushyant Chautala, जो पूर्व उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता हैं, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी कार को रोका गया, उन्हें कुचलने की कोशिश की गई और उन पर पिस्टल तान दी गई। SP से मिलने जा रहे थे, रास्ते में हुआ विवाद दुष्यंत चौटाला के मुताबिक, वह हिसार के पुलिस अधीक्षक से मिलने जा रहे थे। यह मुलाकात गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान JJP से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी के मुद्दे पर थी। इसी दौरान रास्ते में क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CIA) की टीम ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। ‘गाड़ी से कुचलने की कोशिश, पिस्टल दिखाई’ चौटाला ने आरोप लगाया कि पुलिस वाहन ने उनकी गाड़ी को रोककर टक्कर मारने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन पर पिस्टल तान दी। हालांकि, वह बाद में SP से मिले और पूरे मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। CCTV फुटेज का दावा, सोशल मीडिया पर वीडियो साझा चौटाला ने दावा किया कि यह पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हुई है। उन्होंने कथित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो सिस्टम पर सवाल उठना जरूरी है।” BJP पर साधा निशाना JJP नेता ने इस घटना को “पुलिस की गुंडागर्दी” बताते हुए राज्य की BJP सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह “नया हरियाणा” है, जहां पुलिस वर्दी में गुंडे काम कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला? गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में छात्रों से बातचीत को लेकर हुए विवाद के बाद JJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई थी। इसी के विरोध में चौटाला हिसार पहुंचे थे और गिरफ्तारी को “गलत” बताते हुए रिहाई की मांग कर रहे थे। इस पूरे मामले ने हरियाणा की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब पुलिस प्रशासन और सरकार की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर टिकी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण को एक बार फिर निर्विरोध चुना गया है। यह उनका तीसरा कार्यकाल है, जो उच्च सदन में उनके प्रति व्यापक विश्वास को दर्शाता है। शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को उन्हें औपचारिक रूप से इस पद के लिए निर्वाचित किया गया। इससे पहले यह पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद उनकी नियुक्ति हुई। पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण की कार्यशैली और अनुभव की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि लगातार तीसरी बार उपसभापति चुना जाना इस बात का प्रमाण है कि पूरे सदन को उन पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि हरिवंश ने अपने कार्यकाल में हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर प्रधानमंत्री ने उनके जीवन और करियर पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हरिवंश नारायण का पत्रकारिता में लंबा अनुभव रहा है और उन्होंने उच्च मानकों के साथ काम किया है। उनकी लेखनी तेज लेकिन संतुलित रही है। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। चंद्रशेखर और जेपी से जुड़ा रहा संबंध पीएम मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि हरिवंश का पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने उनके जीवन पर पुस्तकें भी लिखी हैं। साथ ही उनका जन्म जेपी (जयप्रकाश नारायण) के गांव में हुआ था, जिससे उनकी सामाजिक और वैचारिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। काशी से शिक्षा और ग्रामीण पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री ने बताया कि हरिवंश की शिक्षा काशी में हुई है और उनकी जड़ें ग्रामीण समाज से जुड़ी हैं। इसी कारण वे आम लोगों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझते हैं और समाज से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रभावी रूप से रखते हैं। शपथ और निर्वाचन की प्रक्रिया हरिवंश नारायण को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा द्वारा उपसभापति पद के लिए प्रस्तावित किया गया, जिसका समर्थन एस. फांग्नोन कोन्यक ने किया। इसके बाद वे निर्विरोध चुने गए और 10 अप्रैल को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली थी। अब उनके नए कार्यकाल से सदन की कार्यवाही और सुचारू संचालन की उम्मीद जताई जा रही है
लुधियाना: पंजाब की राजनीति में हलचल मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora के घर छापेमारी की। ईडी की टीम सुबह-सुबह लुधियाना स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल भी तैनात किए गए। कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने सिर्फ आवास ही नहीं बल्कि Sanjeev Arora से जुड़े अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सौदों में अनियमितताओं से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर की जा रही है। अशोक मित्तल पर भी हुई थी रेड इससे पहले बुधवार को ईडी ने AAP के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के जालंधर स्थित घर और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में भी छापेमारी की थी। मित्तल के घर पर सर्च ऑपरेशन पूरा हो चुका है लेकिन उनकी यूनिवर्सिटी में अभी भी जांच जारी बताई जा रही है AAP पर बढ़ता दबाव लगातार दो दिनों में पार्टी के बड़े नेताओं पर हुई कार्रवाई से आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है, जबकि AAP की ओर से इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया जा सकता है। ED की ये कार्रवाई पंजाब की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकती है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और गरमा सकती हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल 16 अप्रैल को लोकसभा में पेश किए गए। डेढ़ घंटे बाद वोटिंग हुई कि बिलों पर चर्चा की जाए या नहीं। पक्ष में 251 वोट पड़े,185 सांसदों ने विरोध किया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बिलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान को हाईजैक करना चाहती है। इसके बाद सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने विरोध किया। कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं दिया जाएगा। तब तक इसका मतलब नहीं है। इस पर अमित शाह ने कहा- मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता। अखिलेश यादव ने कहा- पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या। इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है। लोकसभा में सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
Narendra Modi ने Vigyan Bhavan में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण को 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय देश की नारी शक्ति को समर्पित है और लोकतंत्र को नई मजबूती देगा। संसद रचने जा रही नया इतिहास प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। यह फैसला सामाजिक न्याय को मजबूत करेगा महिलाओं की भागीदारी से लोकतंत्र और सशक्त होगा “समतामूलक भारत” के सपने को आगे बढ़ाएगा विशेष सत्र और बड़ा फैसला सरकार ने Parliament of India का विशेष सत्र 16–18 अप्रैल के बीच बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े अहम कदम उठाए जाएंगे। पीएम मोदी ने याद दिलाया कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2023 को 2023 में सर्वसम्मति से पास किया गया था। “मैं उपदेश देने नहीं, आशीर्वाद लेने आया हूं” अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा: “मैं यहां किसी को उपदेश देने नहीं आया हूं” “मैं देश की माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने आया हूं” उन्होंने देशभर से आई महिलाओं का आभार जताया और इसे “नए युग की शुरुआत” बताया। दशकों का इंतजार खत्म होने की बात पीएम मोदी ने कहा कि: महिला आरक्षण पर करीब 4 दशक से चर्चा चल रही थी अब इसे लागू करने का समय आ गया है लक्ष्य है कि इसे 2029 तक हर हाल में लागू किया जाए सहयोग से आगे बढ़ने की अपील प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस मुद्दे पर: संवाद, सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ें संसद की गरिमा को नई ऊंचाई दें पीएम मोदी के बयान से साफ है कि सरकार महिला आरक्षण को बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मील का पत्थर बनाना चाहती है। अब नजर संसद के विशेष सत्र और विपक्ष के रुख पर रहेगी।
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV के ईरान युद्ध पर दिए गए बयानों की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें “ऐसा पोप पसंद नहीं है जो यह मानता हो कि परमाणु हथियार रखना ठीक है।” उन्होंने पोप के रुख को अमेरिकी विदेश नीति के लिए “बेहद खराब” करार दिया। ट्रंप का तीखा हमला मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि वे पोप लियो के प्रशंसक नहीं हैं। उनका आरोप है कि पोप ऐसे देशों के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं, जो परमाणु हथियार हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप के मुताबिक, यह वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे विचारों का समर्थन नहीं किया जा सकता। ईरान युद्ध पर आमने-सामने पोप लियो XIV हाल के दिनों में अमेरिका और इज़रायल की ईरान के खिलाफ नीतियों की खुलकर आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी को “अस्वीकार्य” बताया था। खासतौर पर ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि संघर्ष विराम से पहले “एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” धर्म और राजनीति का टकराव इस विवाद में धर्म और राजनीति का मेल भी देखने को मिला। ट्रंप और उनके रक्षा सचिव ने युद्ध के दौरान अपने बयानों में ईश्वर का उल्लेख किया, वहीं पोप ने शांति और संयम की अपील की। इस कारण दोनों पक्षों के बीच वैचारिक टकराव और गहरा गया है। अन्य मुद्दों पर भी मतभेद पोप लियो XIV ने वेनेज़ुएला के मुद्दे पर भी अमेरिका की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और वहां की जनता की इच्छा का सम्मान करने की बात कही थी।
कर्नाटक की कांग्रेस राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। करीब 30 विधायक New Delhi पहुंचकर पार्टी नेतृत्व से कैबिनेट में जगह की मांग करने वाले हैं। पहली बार चुने गए विधायकों की मांग पहली बार जीतकर आए विधायकों ने खुलकर अपनी दावेदारी पेश की है। उनका कहना है कि: कैबिनेट फेरबदल में कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाया जाए नए चेहरों को भी सरकार में मौका मिलना चाहिए सीनियर विधायकों का दबाव वहीं 3 से ज्यादा बार चुनाव जीत चुके वरिष्ठ विधायक भी पीछे नहीं हैं। करीब 40 सीनियर विधायकों में से 20 को मंत्री बनाने की मांग उनका तर्क है कि सरकार में अनुभव का उपयोग जरूरी है दिल्ली में बड़े नेताओं से मुलाकात 30 विधायक Delhi पहुंचकर वरिष्ठ विधायक Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge, K C Venugopal और Randeep Singh Surjewala से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। “हर किसी की इच्छा मंत्री बनने की” मांड्या से विधायक Ravikumar Gowda ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर किसी की होती है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री पर निर्भर करेगा। अंदरूनी खींचतान बढ़ी 38 विधायकों ने पहले ही नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग रखी विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी अब जल्द ही फिर बैठक कर आगे की रणनीति तय होगी क्यों अहम है यह मुद्दा? यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट विस्तार को लेकर अंदरूनी दबाव बढ़ता जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी हाईकमान और मुख्यमंत्री इस संतुलन को कैसे साधते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।