VD Satheesan ने सोमवार को केरल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया। कांग्रेस नीत United Democratic Front ने 2026 विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल कर दस साल बाद सत्ता में वापसी की है। Rajendra Vishwanath Arlekar ने सतीशन और उनके 20 सदस्यीय मंत्रिमंडल को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे। राहुल गांधी ने गले लगाकर दी बधाई समारोह में Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra और KC Venugopal शामिल हुए। इसके अलावा Siddaramaiah, DK Shivakumar, Revanth Reddy और Sukhvinder Singh Sukhu भी कार्यक्रम में पहुंचे। शपथ लेने के बाद राहुल गांधी ने वीडी सतीशन को गले लगाकर बधाई दी। दोनों नेताओं की बातचीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल Media पर भी चर्चा का विषय बने रहे। छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री तक का सफर 1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे वीडी सतीशन पेशे से वकील हैं। उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की और बाद में यूथ कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभाई। 2021 विधानसभा चुनाव के बाद वे केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने और लेफ्ट सरकार के खिलाफ UDF के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। 2026 विधानसभा चुनाव में उन्होंने परावुर सीट से लगातार छठी बार जीत हासिल की। उन्होंने CPI उम्मीदवार ईटी टायसन मास्टर को 20,600 वोटों से हराया। “24 घंटे में सरकार गठन ऐतिहासिक” शपथ ग्रहण के बाद सतीशन ने कहा कि केरल के इतिहास में पहली बार इतनी तेजी से सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद 24 घंटे के भीतर मंत्रिमंडल का गठन कर लिया गया। सतीशन ने कहा कि कैबिनेट गठन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय को विशेष महत्व दिया गया है। 20 सदस्यीय कैबिनेट ने ली शपथ नई सरकार में कांग्रेस और सहयोगी दलों के कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। मंत्रिमंडल में Ramesh Chennithala, K Muraleedharan और Sunny Joseph जैसे नेताओं को शामिल किया गया है। वहीं Indian Union Muslim League के नेताओं पीके कुन्हालिकुट्टी, पीके बशीर, एन समसुद्दीन और केएम शाजी को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। विधानसभा अध्यक्ष और डिप्टी स्पीकर के नाम तय मुख्यमंत्री सतीशन ने घोषणा की कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता Thiruvanchoor Radhakrishnan विधानसभा अध्यक्ष होंगे, जबकि Shanimol Usman को उपाध्यक्ष बनाया जाएगा। सरकार ने विधायक अपू जॉन जोसेफ को मुख्य सचेतक (Chief Whip) नियुक्त किया है। कांग्रेस की 5 गारंटी लागू करने का दावा शपथ ग्रहण से पहले रमेश चेन्निथला ने कहा कि नई सरकार चुनाव के दौरान किए गए सभी प्रमुख वादों को पूरा करेगी। कांग्रेस की प्रमुख गारंटी में शामिल हैं: महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा कॉलेज छात्राओं को हर महीने 1000 रुपये सहायता 3000 रुपये सामाजिक पेंशन हर परिवार को 25 लाख रुपये तक स्वास्थ्य बीमा छोटे कारोबारियों को 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण
Sonia Gandhi की तबीयत एक बार फिर खराब हो गई है। उन्हें गुरुग्राम स्थित Medanta - The Medicity में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक सोनिया गांधी आंख से जुड़ी समस्या के कारण अस्पताल पहुंची हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि उनकी हालत स्थिर है और उन्हें कुछ समय बाद डिस्चार्ज किया जा सकता है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी अस्पताल पहुंचे अस्पताल में भर्ती सोनिया गांधी के साथ उनके बेटे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi तथा बेटी Priyanka Gandhi Vadra भी मौजूद हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेता अस्पताल में उनके साथ हैं और डिस्चार्ज के बाद उन्हें घर लेकर जाएंगे। पहले से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहीं सोनिया गांधी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। उन्हें पेट, फेफड़ों और सांस से जुड़ी परेशानियां रहती हैं। उनका इलाज समय-समय पर Sir Ganga Ram Hospital, Indira Gandhi Medical College and Hospital और मेदांता अस्पताल में चलता रहा है। कांग्रेस की अहम रणनीतिक नेता हैं सोनिया गांधी सोनिया गांधी लंबे समय तक Indian National Congress की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं। उन्होंने पार्टी संगठन और रणनीति तय करने में दशकों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi की पत्नी हैं और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा की मां हैं। 1997 में राजनीति में की थी एंट्री राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी कई वर्षों तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में पार्टी नेताओं के लगातार आग्रह पर उन्होंने 1997 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया। 1998 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला और लगातार 22 वर्षों तक पार्टी का नेतृत्व किया। इसके बाद 2019 में वह दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष बनीं और तीन साल तक इस पद पर रहीं। केरल में सरकार गठन के बीच बढ़ी चिंता सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने की खबर ऐसे समय आई है जब Kerala में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री चयन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।
New Delhi में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासत तेज हो गई है। Tej Pratap Yadav द्वारा Rahul Gandhi पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस नेता Udit Raj ने कड़ा पलटवार किया है। क्या कहा उदित राज ने? कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि: “यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन तेज प्रताप यादव अपरिपक्व हैं। उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।” उन्होंने यह भी कहा कि तेज प्रताप को पहले खुद पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। तेज प्रताप यादव ने क्या कहा था? इससे पहले तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें: सत्ता का लालची बताया कहा कि कांग्रेस पार्टी को संभालना उनके बस की बात नहीं साथ ही उन्होंने Priyanka Gandhi को कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के लिए बेहतर विकल्प बताया। प्रियंका गांधी पर जताया भरोसा तेज प्रताप यादव ने कहा कि: प्रियंका गांधी ही कांग्रेस को बेहतर तरीके से चला सकती हैं उनके नेतृत्व में पार्टी मजबूत हो सकती है इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस को बेहतर तरीके से सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। ‘प्रियंका गांधी ही संभाल सकती हैं पार्टी’ तेज प्रताप यादव ने कहा, “कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, वो इंदिरा गांधी जैसी हैं। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है।” उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यात्रा करने से या बुलेट पर बैठने से कुछ नहीं होता, असली सवाल यह है कि उनका मकसद क्या है?” राहुल के बयान पर पलटवार तेज प्रताप का यह बयान राहुल गांधी द्वारा नीतीश कुमार को “समझौता किया हुआ नेता” कहे जाने के बाद आया है। बिहार की राजनीति में हालिया बदलाव–जहां नीतीश कुमार के अलग होने के बाद सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने–को लेकर भी उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा। पहले भी उठ चुके हैं सवाल राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व नेता शकील अहमद ने भी पार्टी के अंदर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पार्टी में फैसले सीमित दायरे में लिए जाते हैं और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका कम हो गई है। बढ़ती राजनीतिक बहस तेज प्रताप यादव और अन्य नेताओं के बयानों से यह साफ है कि कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर बहस अब पार्टी के बाहर भी तेज हो गई है। प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग अब विपक्षी दलों के नेताओं की तरफ से भी उठने लगी है, जिससे कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियां और गहरी होती दिख रही हैं।
नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज, विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए लाया गया महत्वपूर्ण बिल संसद में पास नहीं हो सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि 12 साल के शासन में पहली बार कोई संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव अटक गया है। इस पूरे मामले के पीछे “परिसीमन (Delimitation)” को लेकर चला विवाद मुख्य कारण बताया जा रहा है। सरकार ने लोकसभा में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने वाले बिल को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया था, जिसके बाद विपक्ष ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया। महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद ने बढ़ाई टकराव की स्थिति यह विधेयक महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया था। लेकिन इसे 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) से जोड़ दिया गया। विपक्ष का कहना है कि यह कदम महिलाओं के अधिकारों के बजाय राजनीतिक सीमाओं को बदलने की कोशिश है। संसद में नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत यह एक संवैधानिक संशोधन विधेयक था, जिसके लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। मतदान में सरकार को 298 वोट मिले, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। विपक्ष का तीखा हमला: ‘लोकतंत्र पर हमला’ विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र पर खुला हमला बताया। वहीं गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार परिसीमन को “पीछे के दरवाजे” से लागू करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक नक्शा बदलने का प्रयास है। उत्तर-दक्षिण भारत के बीच बढ़ा राजनीतिक तनाव परिसीमन मुद्दा लंबे समय से भारत में संवेदनशील माना जाता है। दक्षिण भारत के राज्य जैसे तमिलनाडु और केरल को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ने से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट जाएगी। वहीं उत्तर भारत के अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को इसका फायदा मिल सकता है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे “दंडात्मक कदम” बताते हुए विरोध जताया। सरकार का पक्ष: जनसंख्या के आधार पर न्याय जरूरी गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के अनुसार निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण जरूरी है ताकि हर वोट का समान मूल्य हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि यह अवसर महिलाओं के हित में है और इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए। आगे क्या होगा? महिला आरक्षण बिल पहले ही 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन इसके लागू होने में 2029 तक की देरी है। अब परिसीमन विवाद के चलते इसकी प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है। राजनीतिक दलों के बीच टकराव आगे और बढ़ने की संभावना है।
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने के प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi ने सरकार पर तीखा हमला बोला, वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने साफ कहा कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। प्रियंका गांधी का हमला, ‘चाणक्य भी चौंक जाते’ संसद में बहस के दौरान प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर आज चाणक्य होते तो सरकार की रणनीति देखकर चौंक जाते। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल अगले चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया है और इसका मकसद राजनीतिक फायदा उठाना है। पीएम मोदी का जवाब, ‘नहीं होगा अन्याय’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं को उनका हक दिलाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, सरकार ने महिला आरक्षण को लागू करने के लिए इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ दिया है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने के लिए नई जनगणना और परिसीमन जरूरी यही वजह है कि विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण को टाल रही है, जबकि सरकार इसे जरूरी प्रक्रिया बता रही है। दक्षिण भारत में बढ़ा विरोध दक्षिण भारत के कई राज्यों में इस बिल का विरोध तेज हो गया है। M. K. Stalin और उनकी पार्टी DMK ने विरोध प्रदर्शन किया BRS ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया इन राज्यों को डर है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। संसद के अंदर और बाहर सियासी जंग कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने इस बिल की तुलना ‘डिमोनेटाइजेशन’ से कर दी, जबकि अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे लेकर सवाल उठाए। वहीं सरकार का कहना है कि यह ऐतिहासिक सुधार है, जो देश की लोकतांत्रिक संरचना को मजबूत करेगा। आगे क्या? परिसीमन बिल पर संसद में बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों का कैसे जवाब देती है और क्या यह बिल मौजूदा स्वरूप में पास हो पाता है या इसमें बदलाव होते हैं।
नई दिल्ली: Amit Shah ने संसद में परिसीमन को लेकर उठ रही आशंकाओं पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि नए परिसीमन के बाद दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि इसमें बढ़ोतरी होगी। शाह ने विपक्ष के दावों को “भ्रम फैलाने वाला” बताते हुए लोकसभा में पांच बिंदुओं के जरिए अपनी बात रखी। 5 पॉइंट्स में समझाया - कैसे बढ़ेगा प्रतिनिधित्व गृह मंत्री ने आंकड़ों के साथ बताया कि दक्षिणी राज्यों को किसी तरह का नुकसान नहीं होगा: कर्नाटक: वर्तमान में 28 सीटें (5.15%) हैं, जो बढ़कर 42 सीटें हो जाएंगी (5.14%) आंध्र प्रदेश: 25 सीटों से बढ़कर 38 सीटें (4.65%) तेलंगाना: 17 सीटों से बढ़कर 26 सीटें (3.18%) तमिलनाडु: 39 सीटों से बढ़कर 59 सीटें (7.23%) केरल: 20 सीटों से बढ़कर 30 सीटें (3.67%) कुल प्रतिनिधित्व भी बढ़ेगा Amit Shah ने बताया कि फिलहाल दक्षिणी राज्यों से 129 सांसद लोकसभा में आते हैं, जो कुल 23.76% है। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 195 सीट हो जाएगी और हिस्सा लगभग 24% तक पहुंच जाएगा। यानी सीटें भी बढ़ेंगी और हिस्सेदारी भी लगभग स्थिर रहेगी। विपक्ष के आरोपों पर पलटवार कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra की ओर से परिसीमन आयोग में पक्षपात की आशंका जताने पर शाह ने कहा कि सरकार ने किसी कानून में बदलाव नहीं किया है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर पहले किसी सरकार ने इसमें हेरफेर किया होगा, तो वह अलग बात है, लेकिन मौजूदा सरकार ऐसा नहीं करेगी। 2029 से पहले लागू नहीं होगा परिसीमन शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन प्रक्रिया 2029 से पहले लागू नहीं होगी। जब तक आयोग की रिपोर्ट संसद और राष्ट्रपति की मंजूरी से पास नहीं होती, तब तक चुनाव पुरानी व्यवस्था के तहत ही होंगे। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav पर कटाक्ष करते हुए शाह ने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है, हालांकि जीत का दावा अलग बात है। सरकार का दावा है कि परिसीमन से दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि संख्या में वृद्धि के साथ संतुलन बना रहेगा। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है और आने वाले समय में यह बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस ने पहले चरण के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में पार्टी के शीर्ष राष्ट्रीय नेता शामिल हैं, जो राज्य में व्यापक चुनाव प्रचार करेंगे। चेहरे जो करेंगे प्रचार कांग्रेस की स्टार लिस्ट में शामिल प्रमुख नाम: सोनिया गांधी राहुल गांधी प्रियंका गांधी वाड्रा मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल CM) इसके अलावा कई दिग्गज नेता भी मैदान में उतरेंगे: के.सी. वेणुगोपाल शशि थरूर अशोक गहलोत सलमान खुर्शीद रणदीप सुरजेवाला कन्हैया कुमार मोहम्मद अजहरुद्दीन बंगाल के स्थानीय नेताओं को भी अहम भूमिका राज्य कांग्रेस के नेता भी प्रचार में सक्रिय रहेंगे: अधीर रंजन चौधरी दीपा दासमुंशी प्रदीप भट्टाचार्य शुभंकर सरकार (प्रदेश अध्यक्ष) ईशा खान चौधरी चुनाव की तारीखें पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई कुल सीटें: 294 कांग्रेस की रणनीति कांग्रेस नेता के मुताबिक: इस बार पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ रही है लक्ष्य है कि पहले चरण में सभी सीटों पर सीधे मतदाताओं तक पहुंच बनाई जाए राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी से पार्टी मजबूत मुकाबले की कोशिश में है
पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी रैलियों से लेकर दल-बदल तक, कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रियंका गांधी का हमला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने असम के शिवसागर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और असम के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “मोदी जी अमेरिका के गुलाम हैं… और असम के मुख्यमंत्री उनके गुलाम हैं।” प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डर और दबाव की राजनीति कर रही है और इससे देश को नुकसान हो रहा है। ओवैसी का मुर्शिदाबाद में बयान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सभा को संबोधित करते हुए कहा कि: अगर जनता का अपना नेता नहीं होगा, तो उनकी आवाज दबा दी जाएगी ममता बनर्जी और मोदी सरकार पर एक जैसी राजनीति करने का आरोप लगाया उन्होंने लोगों से अपनी “स्वतंत्र लीडरशिप” चुनने की अपील की। बड़ा राजनीतिक बदलाव वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता एच. एस. फूलका बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। फूलका 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं 2014 में AAP में शामिल हुए थे, 2019 में पार्टी छोड़ दी थी महाराष्ट्र उपचुनाव अपडेट भाजपा ने महाराष्ट्र के राहुरी विधानसभा उपचुनाव के लिए अक्षय शिवाजीराव कर्डिले को उम्मीदवार घोषित किया है अहम तारीखें: नामांकन की अंतिम तारीख:6 अप्रैल जांच:7 अप्रैल नाम वापसी:9 अप्रैल मतदान: 23 अप्रैल मतगणना: 4 मई यह सीट ग्रामीण और कृषि प्रधान है, जहां मराठा, ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं। चुनावी माहौल गरम देश के पांच राज्यों में चुनाव के बीच: नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज दल-बदल की राजनीति जारी क्षेत्रीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय मुद्दे भी हावी
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।